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सेंट्रल यूनिवर्सिटी झारखंड (सीयूजे) के चेरी मनातू कैंपस में रविवार को छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। मेस की लगातार बढ़ती फीस, खाने की खराब गुणवत्ता और छात्र प्रतिनिधित्व नहीं होने के विरोध में करीब 200 छात्र धरने पर बैठ गए। सुबह 9 बजे से अनिल कुमार और मृत्युंजय कुमार अनशन पर हैं। धरने पर बैठे छात्रों का कहा कि अब आश्वासन नहीं चलेगा। फीस का हिसाब, गुणवत्तापूर्ण खाना और छात्र प्रतिनिधित्व समेत अन्य मांगों पर प्रशासन को स्पष्ट निर्णय लेना होगा। छात्रों का कहना है कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति या संस्थान के खिलाफ नहीं, बल्कि स्टूडेंट्स के अधिकार, पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वविद्यालय के निर्णयों में छात्रों की भागीदारी के लिए है। छात्रों ने कहा कि सीयूजे एक्ट में स्टूडेंट यूनियन के गठन का प्रावधान है। इस कारण किसी भी बैठक में छात्र प्रतिनिधि शामिल नहीं होते है। इससे विवि प्रशासन मनमानी फैसला ले रहा है। एक साल में मेस फीस 1179 रुपए बढ़ी आंदोलन का बड़ा मुद्दा हॉस्टल मेस की बढ़ती फीस है। छात्रों के मुताबिक ग्रीष्मावकाश 2025 से पहले मेस शुल्क करीब 2,621 रुपए प्रति माह था। इसमें शाम का स्नैक्स भी शामिल था। इसके बाद शुल्क बढ़कर 3,071 (यूजी हॉस्टल) और 3,377 (पीजी व पीएचडी हॉस्टल) तक पहुंच गया। छात्रों का कहना है कि अब शुल्क 3,800 रुपए प्रतिमाह करने की बात सामने आई है। खास बात यह है कि इस शुल्क में शाम का स्नैक्स भी शामिल नहीं बताया जा रहा है। छात्रों ने सवाल उठाया कि शुल्क में बढ़ोतरी का आधार क्या है। खाने की लागत कितनी आती है और एजेंसी को कितना भुगतान किया जाता है। उन्होंने इसे सार्वजनिक करने की मांग की। सिर्फ आश्वासन मिला…कोई कार्रवाई नहीं सुबह से चल रहे धरने के बीच छात्रों से बातचीत के लिए वार्डन सुभाष कुमार बैठा, एसोसिएट डीएसडब्ल्यू शैलेंद्र कुमार और चीफ प्रॉक्टर अमरेंद्र कुमार पहुंचे। अधिकारियों ने धरने पर बैठे छात्रों से बातचीत की और उनकी मांगों को कुलपति और अन्य विवि अधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। हालांकि, छात्रों के अनुसार रात 9 बजे तक उनकी मांगों पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई थी। परीक्षा से रोके जाने पर दो छात्र अनशन पर इधर सीयूजे के पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड गणित पाठ्यक्रम के दो छात्र आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। मनु कुमार और ऋषि कुमार का आरोप है कि कम अटेंडेंस के कारण उन्हें परीक्षा में शामिल होने से रोका जा रहा है। जबकि उन्होंने अपनी बीमारी से संबंधित मेडिकल दस्तावेज विश्वविद्यालय में जमा किए थे। इसके बावजूद उनकी समस्या पर अपेक्षित विचार नहीं किया गया।
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