देवघरः मौसम की एक करवट किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर सकती है. खेतों में कहीं धान की फसल पककर तैयार है, तो कहीं किसान आलू, सरसों और गेहूं की खेती की तैयारी में जुटे हुए हैं. ऐसे में अगर अचानक तेज बारिश और हवा चलने लगे, तो किसानों की परेशानी बढ़ सकती है. मौसम के बदलते मिजाज को देखते हुए देवघर के किसानों को अभी से सतर्क रहने की जरूरत है. आखिर बारिश से पहले किसान कौन-कौन से जरूरी काम कर लें, ताकि फसल को कम से कम नुकसान हो? कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. विवेक कश्यप ने किसानों को कुछ जरूरी सलाह दी है.
क्या कहते हैं कृषि वैज्ञानिक?
मौसम विभाग की ओर से 29 अक्टूबर से अगले तीन दिनों के दौरान भारी बारिश की चेतावनी दिए जाने की जानकारी के बीच किसानों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है. हालांकि, किसानों को अपने क्षेत्र के ताजा मौसम पूर्वानुमान और आधिकारिक चेतावनी पर भी नजर रखनी चाहिए. देवघर के कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. विवेक कश्यप ने लोकल 18 को बताया कि बारिश आने से पहले खेतों में खड़ी फसलों की स्थिति का आकलन करना बेहद जरूरी है. खासकर उन किसानों को अधिक सतर्क रहना चाहिए, जिनकी धान की फसल पककर तैयार हो चुकी है या जो रबी फसलों की बुवाई और रोपाई की तैयारी कर रहे हैं.
समय रहते कर लें धान की खेत में यह कार्य
जिन किसानों के खेतों में धान की फसल पककर तैयार हो चुकी है, उन्हें मौसम को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द कटाई करने पर विचार करना चाहिए. अगर किसान बारिश का इंतजार करते रहे और इसी बीच खेतों में पानी भर गया, तो कटाई में परेशानी हो सकती है. वहीं, तेज हवा और बारिश के कारण धान की फसल गिरने का खतरा भी बढ़ सकता है. इससे फसल की गुणवत्ता और कटाई के काम पर असर पड़ सकता है. हालांकि, कटाई का फैसला फसल की वास्तविक परिपक्वता और स्थानीय मौसम की स्थिति देखकर ही लेना चाहिए.जिन किसानों के लिए बारिश से पहले कटाई करना संभव नहीं है, उन्हें खेत में जलजमाव रोकने की व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि पानी जमा होने से फसल को नुकसान न पहुंचे.
आलू, सरसों और गेहूं की खेती करने वाले किसान भी रहें सतर्क
देवघर में कई किसान अब रबी फसलों की तैयारी में जुट गए हैं. कोई आलू की रोपाई कर रहा है, तो कोई सरसों और गेहूं की बुवाई की योजना बना रहा है. ऐसे किसानों को सलाह दी जाती है कि संभावित भारी बारिश के दौरान खेतों की नमी और मिट्टी की स्थिति को ध्यान में रखकर ही खेती से जुड़े अगले कदम उठाएं. बारिश से पहले खेत में पानी निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करें. अत्यधिक गीली मिट्टी में जल्दबाजी में बुवाई या रोपाई करने से काम प्रभावित हो सकता है. इसलिए मौसम की स्थिति सामान्य होने और खेत की मिट्टी खेती के अनुकूल होने के बाद ही आगे बढ़ना बेहतर रहेगा. इससे किसानों को बीज, श्रम और दूसरी लागत के नुकसान से बचने में मदद मिल सकती है.
बैंगन, टमाटर और मिर्च की फसल को बचाने के लिए करें ये काम
जिन किसानों ने अपने खेतों में बैंगन, टमाटर, मिर्च और दूसरी सब्जियां लगा रखी हैं, उन्हें भी सावधानी बरतने की जरूरत है. तेज हवा और बारिश के दौरान पौधे झुक सकते हैं या टूट सकते हैं. ऐसे में पौधों को मजबूत बल्ले या सहारे से अच्छी तरह बांधकर रखना चाहिए. खासकर टमाटर जैसी फसलों में सहारा देने से पौधों के गिरने की आशंका कम की जा सकती है. इसके साथ ही खेतों में पानी जमा होने से रोकना भी जरूरी है, क्योंकि लंबे समय तक जलजमाव रहने से पौधों की जड़ों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है. सब्जियों की खेती करने वाले किसान अपने खेतों और नालियों की स्थिति पहले ही जांच लें, ताकि बारिश के दौरान पानी की निकासी में परेशानी न हो.
खेत में ना होने दें जलजमाव
कृषि वैज्ञानिक डॉ. विवेक कश्यप की सलाह के अनुसार, बारिश से पहले किसानों को अपने खेतों की स्थिति का निरीक्षण करना चाहिए और जलनिकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखनी चाहिए. जहां जरूरत हो, वहां पानी निकलने के रास्ते साफ रखें, ताकि खेत में लंबे समय तक जलजमाव की स्थिति न बने. किसानों को मौसम विभाग के पूर्वानुमान पर नजर रखने के साथ अपनी फसल की अवस्था के अनुसार फैसले लेने चाहिए.