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बुवाई से पहले चुनें चने की ये उन्नत किस्में, रोगों से बचाव...


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एग्रीकल्चर: चने की खेती में अच्छा उत्पादन पाने के लिए लगाएं ये किस्में

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Chana Ki Kheti Tips: चने की खेती में अच्छा उत्पादन पाने के लिए बुवाई से पहले उन्नत और उपयुक्त किस्मों का चयन करना जरूरी है. सही बीज का चुनाव फसल की गुणवत्ता, पैदावार और संभावित मुनाफे को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. किसानों को अपने क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी और बुवाई के समय के अनुसार किस्म चुननी चाहिए. रोगों से बचाव के लिए कृषि विशेषज्ञों की सलाह और अनुशंसित बीजों को प्राथमिकता देना फायदेमंद रहेगा.

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भीलवाड़ा: रबी के सीजन में चने की फसल को रबी की प्रमुख फसलों में से एक माना जाता है सर्दियों के मौसम में चने की बुवाई का काम शुरू हो जाता है. अक्टूबर और नवंबर का महीना इसकी खेती के लिए अहम माना जाता है. ऐसे में किसान अच्छी पैदावार और रोगों से बचाव के लिए चने की उन्नत किस्मों का चुनाव करें. सही किस्म और उचित देखभाल से उत्पादन बेहतर हो सकता है.

कृषि पर्यवेक्षक कजोड़ मल गुर्जर ने बताया कि रबी सीजन में चने की खेती किसानों के लिए आय का अच्छा साधन मानी जाती है. अक्टूबर और नवंबर का महीना चने की बुवाई के लिहाज से महत्वपूर्ण है. चने की सही बीज, समय पर बुवाई और संतुलित खाद प्रबंधन से फसल की पैदावार बेहतर की जा सकती है. राजस्थान की परिस्थितियों को देखते हुए जीएनजी-1581 (करण चना-1), आरएसजी-963 और जीएनजी-2171 जैसी किस्म को ट्राई किया जा सकता है.

रोगों के प्रति अपेक्षाकृत बेहतर सहनशीलता भी होती
चने की उन्नत किस्मों का सबसे बड़ा फायदा उनकी अच्छी उत्पादन क्षमता और स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल होने की संभावना है. उचित किस्म का चुनाव करने पर पौधों की बढ़वार, फलियों का विकास और दानों की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है. कुछ किस्मों में प्रमुख रोगों के प्रति अपेक्षाकृत बेहतर सहनशीलता भी होती है, जिससे फसल को नुकसान का जोखिम कम करने में मदद मिलती है. किसानों को बीज खरीदते समय किस्म की प्रमाणित जानकारी, अनुशंसित बुवाई अवधि, पकने की अवधि और रोग प्रतिरोधक क्षमता की जानकारी अवश्य लेनी चाहिए. इससे खेत की परिस्थितियों के हिसाब से सही किस्म चुनना आसान होगा.

बुवाई से पहले रखें इन बातों का ध्यान
कजोड़ मल गुर्जर ने बताया कि चने की अच्छी पैदावार के लिए खेत में उचित नमी और जल निकास की व्यवस्था जरूरी है. खेत में पानी भरने से जड़ों से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए भारी मिट्टी वाले खेतों में जल निकास पर विशेष ध्यान दें. बुवाई के लिए प्रमाणित बीज का इस्तेमाल करें और बीजोपचार कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार करें. फसल में उखटा रोग, जड़ सड़न और अन्य बीमारियों की नियमित निगरानी करें.

About the Author

Jagriti Dubey

मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…

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