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जेपीएससी की नौ भर्ती परीक्षाओं में धांधली की पुष्टि के बाद सीआईडी ने अब टीडीपीएल और बिंसिस के माध्यम से ली गई 27 परीक्षाओं की जांच शुरू कर दी है। ये वे परीक्षाएं हैं, जिनमें अंतिम नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। सीआईडी ने अपनी चार्जशीट में कोर्ट को यह जानकारी दी है। सीआईडी के मुताबिक तत्कालीन प्रभारी परीक्षा नियंत्रक के चैंबर से जब्त दस्तावेजों में एसीएफ मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में भी गड़बड़ी मिली है। उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित कृषि गणना उत्पादक महाविद्यालय, बहेड़ी के परीक्षक प्रो. हरिकेश सिंह ने एक अभ्यर्थी के प्रश्न पत्र के प्रथम व द्वितीय खंड की लिखावट में भिन्नता होने की सूचना परीक्षा नियंत्रक और आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष को दी थी। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। सीआईडी के मुताबिक तत्कालीन अध्यक्ष एल ख्यांगते और उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता ने आयोग के नियमों की धज्जियां उड़ाईं। बिना टेंडर निजी एजेंसी को परीक्षा का पूरा काम सौंप दिया। यही नहीं, उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षा, बारकोडिंग, डेटा संसाधन और ओएमआर शीट के मूल्यांकन जैसे अत्यंत गोपनीय कार्य भी निजी एजेंसी को सौंपकर हेरफेर का रास्ता साफ किया। ख्यांगते और श्वेता गुप्ता की परीक्षा एजेंसी के साथ होती थी गुप्त बैठकें जांच एजेंसी के मुताबिक ख्यांगते के निजी सचिव मनोरंजन कुमार ने भी चौंकाने वाला बयान दिया है। उसने बताया था कि पहले आयोग अपने गोपनीय काम खुद करता था। एजेंसियां परीक्षा नियंत्रक से मिलती थींं। लेकिन ख्यांगते के कार्यकाल में एजेंसियों की अध्यक्ष और उप परीक्षा नियंत्रक के बीच गोपनीय बैठक होने लगी। 14वीं जेपीएससी बैकलॉग, एपीपी, एसीएफ और एफआरओ की पीटी व मेन्स टीडीपीएल के कराई गई। 11वीं-13वीं सिविल सेवा परीक्षा व सीडीपीओ का इंटरव्यू व फाइनल रिजल्ट इसी एजेंसी ने तैयार किया। वहीं सिविल जज का संशोधित रिजल्ट टीडीपीएल और जेईटी 2024 का काम बिंसिस से कराया गया। दंत चिकित्सक भर्ती की फाइल में ख्यांगते ने 28 मई 2025 को साफ लिखा था कि परीक्षा के बाद की प्रक्रिया और रिजल्ट का काम आयोग नहीं, एजेंसी ही करेगी। 10 लाख से ऊपर के काम के लिए भी टेंडर नहीं राज्य सरकार के प्रोक्योरमेंट मैनुअल के मुताबिक संचित निधि से खर्च करने वाले सभी विभागों और आयोग के लिए 10 लाख रुपए से अधिक के काम के लिए टेंडर अनिवार्य था। फिर भी जून 2025 में बिना टेंडर के ही टीडीपीएल को करोड़ों रुपए का काम सौंप दिया। दिखावे की प्रतियोगिता कराकर एक ही दिन में एजेंसी चुन ली गई और रिश्वत की रकम तय की गई। ये 27 परीक्षाएं जांच के दायरे में झारखंड कंबाइंड सिविल सर्विसेज एग्जामिनेशन (बैकलॉग)-2025 {झारखंड कंबाइंड सिविल सर्विसेज एग्जामिनेशन (बैकलॉग)-2023 {सिविल जज (जूनियर डिवीजन) {छठी सीमित उप समाहर्ता भर्ती परीक्षा {उप निदेशक, अभियोजन भर्ती परीक्षा {सहायक प्राध्यापक (एनेस्थीसिया विभाग), झारखंड मेडिकल कॉलेज (नियमित) {निदेशक, डेयरी विकास भर्ती परीक्षा {सहायक प्राध्यापक (नियमित) झारखंड विश्वविद्यालय (विषय : कुड़माली) {गैर-शैक्षणिक पद (कुलसचिव/रजिस्ट्रार) भर्ती।
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