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Tata Group Row : फिर कोर्ट की दहलीज तक पहुंचा टाटा समूह...


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Tata Group Row : मिस्त्री और टाटा परिवार का विवाद कोई नया नहीं है. इससे पहले साल 2016 में दिवंगत उद्योगपति रतन टाटा और साइरस मिस्त्री के बीच पद को लेकर विवाद हुआ था, जो सुप्रीम कोर्ट तक गया. अब इतिहास ने एक बार फिर खुद को दोहराया है और ताजा विवाद मेहली मिस्त्री और नोएल टाटा के बीच है. यह विवाद भी पद को लेकर ही शुरू हुआ है, जो फिलहाल चैरिटेबल आयुक्त की अदालत में चल रहा है.

फिर कोर्ट की दहलीज तक पहुंचा टाटा समूह का विवाद, मेहली मिस्त्री ने दी चुनौतीZoom

मेहली मिस्त्री ने टाटा समूह को उन्हें हटाए जाने को लेकर चुनौती दी है.

नई दिल्ली. टाटा समूह का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. समूह का एक और मामला कोर्ट की दहलीज तक पहुंच गया है. वेटरन उद्योगपति रतन टाटा के करीबी रहे मेहली मिस्त्री ने खुद को टाटा समूह के ट्रस्ट से हटाए जाने को चुनौती दी है. उन्होंने चैरिटेबल आयुक्त की अदालत में खुद को हीराबाई जमशेदजी टाटा नवसारी चैरिटेबल इंस्टिट्यूशन और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) के न्यासी पद से 23 अक्टूबर, 2025 को हटाए जाने के फैसले को चुनौती दी है.

मिस्त्री ने टाटा के दो प्रमुख न्यासों के उन दावों का जवाब दिया, जिनमें उनके ट्रस्ट के कामकाज की जांच करने के कानूनी अधिकार पर सवाल उठाए गए थे. सर रतन टाटा ट्रस्ट (एसआरटीटी) और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) ने 15 अक्टूबर को न्यासों के संचालन के तौर-तरीकों और हितों के टकराव से जुड़े मामलों को चुनौती देने के मिस्त्री के कानूनी अधिकार पर सवाल उठाए थे.

आयुक्त ने मांगा टाटा ट्रस्ट से जवाब
चैरिटेबल आयुक्त के समक्ष दाखिल तीन जवाबी हलफनामों में मिस्त्री ने न्यासों के खिलाफ अपनी आपत्तियां दोहराते हुए कहा कि ये सवाल पारदर्शिता और जवाबदेही के हित में उठाए गए हैं. सुनवाई के दौरान आयुक्त ने टाटा ट्रस्ट को 3 दिसंबर तक इन जवाबी हलफनामों पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है. मिस्त्री ने उन्हें न्यासी के पद से हटाए जाने के फैसले पर भी आपत्ति जताई है. उन्होंने दावा किया कि मूल न्यास दस्तावेजों में किसी न्यासी का कार्यकाल 3 साल तक सीमित करने का कोई प्रावधान नहीं है.

नोएल टाटा को लाभ मिला तो मुझे क्यों नहीं
उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि टाटा ट्रस्ट के अध्यक्ष नोएल टाटा को वह लाभ क्यों दिया गया, जिससे उन्हें वंचित रखा गया. मिस्त्री ने 23 अक्टूबर, 2025 को जारी उनके न्यासी पद की समाप्ति संबंधी परिपत्र की वैधता को चुनौती देते हुए कहा कि नोएल टाटा, वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह ने इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी थी, जबकि जिमी एन टाटा ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया था. मिस्त्री ने चैरिटेबल आयुक्त से उस प्रस्ताव की वैधता की जांच करने का अनुरोध किया, जिसके तहत उनका न्यासी पद समाप्त किया गया था.

मदतान करने वाले न्यासियों के अधिकार को भी चुनौती
उन्होंने प्रस्ताव पर मतदान में हिस्सा लेने वाले न्यासियों के अधिकार और पात्रता की भी जांच करने की मांग की है. मिस्त्री ने आयुक्त से ‘परिवर्तन रिपोर्ट’ को खारिज करने का आग्रह किया है. मिस्त्री ने अपने जवाबी हलफनामों में कहा कि बाई हीराबाई न्यास के विलेख के अनुसार, न्यासी का नवसारी या तत्कालीन बंबई प्रेजिडेंसी का निवासी पारसी होना और पारसी धर्म का पालन करना अनिवार्य है. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या नोएल टाटा इन शर्तों को पूरा करते हैं. संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में टैक्स निवास से जुड़े सवालों के जवाब में मिस्त्री ने कहा कि नोएल टाटा आयरलैंड के नागरिक हैं और उनके पास यूएई का गोल्डन वीजा है. उन्होंने आयुक्त से सभी न्यासियों को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देने का अनुरोध किया, जिसमें वे न्यास दस्तावेज के तहत अपनी पात्रता की पुष्टि करें. इसमें पारसी जोरोस्ट्रियन धर्म का पालन करने की शर्त भी शामिल है.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…

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