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Grafted brinjal cultivation: झारखंड के बोकारो जिले में किसान अब पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. चास प्रखंड के उलगोड़ा गांव के किसान सीताराम महतो भी 60 डिसमिल जमीन में ग्राफ्टेड बैंगन की खेती कर रहे हैं. मोबाइल और यूट्यूब से खेती के नए तरीके सीखकर उन्होंने इसे अपने खेत में अपनाया है. उनका मानना है कि सही तकनीक और बेहतर देखभाल से कम जमीन में भी अच्छी पैदावार हासिल की जा सकती है.
लोकल 18 से खास बातचीत में सीताराम ने बताया कि वह किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं. जहां खेती को बेहतर और अधिक लाभकारी बनाने के लिए वह यूट्यूब पर आधुनिक कृषि तकनीकों से जुड़ी जानकारियां देखते और सीखते रहे हैं. इसी दौरान उन्हें ग्राफ्टेड बैंगन की खेती के बारे में जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने ऑनलाइन पौधे मंगाकर इसे अपने खेत में आजमाने का फैसला किया. उन्होंने जुलाई महीने में इसकी रोपाई की थी और अब इससे बेहतर उत्पादन हासिल कर रहे हैं.
सीताराम महतो के अनुसार, ग्राफ्टेड बैंगन की खेती का एक प्रमुख फायदा यह है कि उचित देखभाल और अनुकूल परिस्थितियों में पौधे लंबे समय तक उत्पादन दे सकते हैं और किसान नियमित रूप से फसल की देखभाल करके एक से दो साल तक बैंगन की तुड़ाई ले सकते हैं. हालांकि इसकी अवधि पौधों की किस्म, मौसम और रखरखाव पर निर्भर करती है.
वहीं, 60 डिसमिल जमीन में ग्राफ्टेड बैंगन की खेती करने पर उन्हें करीब 30 हजार रुपये की लागत आई है. उनके मुताबिक, उचित देखभाल और अनुकूल परिस्थितियां मिलने पर एक साल में लगभग 100 से 150 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है.
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बाजार में बैंगन का औसत भाव 30 रूपया प्रति किलो रहता है और 100 क्विंटल बैंगन के औसतन उत्पादन होता है और औसत बिक्री मूल्य 30 रुपये प्रति किलो मिलता है, तो 3 लाख की आमदनी हो सकती है. वहीं, 30 हजार लागत घटकर भी 2 लाख 70 हजार रूपये कि कमाई आसानी से कर सकते हैं.
वहीं, आखिर में सीताराम ने किसानों को सलाह दी कि ग्राफ्टेड बैंगन की खेती में अच्छी पैदावार के लिए पौधों की नियमित देखभाल और रोगों व कीटों से बचाव करना जरूरी है. बैंगन की फसल में आमतौर पर सफेद मक्खी का प्रकोप अधिक देखने को मिल सकता है, जो पौधों को नुकसान पहुंचते हैं ऐसे में किसानों को खेत की नियमित निगरानी करनी चाहिए और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार जैविक या उपयुक्त कीट नियंत्रण उपाय अपनाने चाहिए.