रांची21 घंटे पहले
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झारखंड के स्कूलों में अब मातृभाषा और स्थानीय भाषाओं को पढ़ाई का मुख्य आधार बनाया जाएगा। साथ ही हिंदी व अंग्रेजी को भी समान महत्व दिया जाएगा। सीएम हेमंत सोरेन ने बुधवार को झारखंड मंत्रालय में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा तैयार ‘झारखंड राज्य भाषा शिक्षा नीति’ के प्रारूप की उच्चस्तरीय समीक्षा के दौरान ये निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ पाठ्यक्रम पूरा कराना नहीं, बल्कि बच्चों के कौशल, प्रतिभा और अभिव्यक्ति क्षमता को निखारना होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के बच्चे घर और समाज में स्थानीय भाषाओं में संवाद करते हैं, जबकि स्कूलों में पढ़ाई मुख्यतः हिंदी व अंग्रेजी में होती है।
हॉकी बनेगी कौशल आधारित शिक्षा का हिस्सा
राज्य में खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने हॉकी को कौशल आधारित शिक्षा से जोड़ने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि झारखंड के छात्र-छात्राएं हॉकी में देश-दुनिया में नाम रोशन कर रहे हैं, ऐसे में स्कूली शिक्षा के माध्यम से ही उनकी खेल प्रतिभा को तराशने के पुख्ता अवसर मिलने चाहिए।
तीन चरणों में लागू होगी नीति… प्रस्तावित नीति ‘संवर्धनात्मक बहुभाषिकता’ के सिद्धांत पर तैयार की जाएगी। इसका अर्थ है कि बच्चे की पहली (मातृ) भाषा को हटाए बिना उसमें दूसरी और तीसरी भाषा (हिंदी और अंग्रेजी) को जोड़ा जाएगा, जिससे तीनों भाषाएं एक-दूसरे की पूरक बनें। इस नीति को तीन प्रमुख चरणों में बांटा गया है-पहला दूसरी कक्षा तक, दूसरा कक्षा तीन से पांच तक और तीसरा चरण छठी से 12वीं कक्षा तक।
