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महंगे पेंट नहीं, गांवों में आज भी हाथों की कला से सजती...


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Jamshedpur Kinudih Village Diwali Decoration With Sohrai Paintings: जमशेदपुर के किनूडीह गांव में महिलाएं त्योहारों पर पारंपरिक सोहराय पेंटिंग से घरों की दीवारों को सजाती हैं. इस लोककला में प्राकृतिक रंगों से प्रकृति के चित्र उकेरे जाते हैं. खास बात यह है कि सब एक-दूसरे का घर सजाने में सहयोग करते हैं.

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जमशेदपुर. दिवाली और खास त्योहारों के मौके पर शहर में लोग अपने घरों को खूबसूरत बनाने के लिए तरह-तरह के रंगों और डिजाइन का इस्तेमाल करते हैं. कहीं मार्बल स्टाइल पेंटिंग का ट्रेंड है तो कहीं लोग सिंगल टोन कलर से अपने घरों को नया लुक दे रहे हैं. लेकिन शहर से सटे झारखंड के गांवों में आज भी घरों को सजाने का एक ऐसा पारंपरिक तरीका देखने को मिलता है, जो आधुनिक सजावट से बिल्कुल अलग है. यहां महिलाएं किसी पेंटर को बुलाने के बजाय अपने हाथों से घर की दीवारों पर सोहराय पेंटिंग बनाती हैं. यह सिर्फ घर की सजावट नहीं, बल्कि झारखंड की लोककला और संस्कृति को जीवंत रखने की एक खूबसूरत परंपरा भी है.

सजाते हैं एक-दूसरे का घर
ऐसा ही अद्भुत नजारा जमशेदपुर से सटे किनूडीह गांव में देखने को मिला, जहां Local 18 की टीम पहुंची तो गांव की कई महिलाएं अपने-अपने घरों की दीवारों को सोहराय कला से सजाती नजर आईं. खास बात यह है कि यहां कोई एक महिला अपने घर को नहीं सजाती, बल्कि पूरे गांव की महिलाएं मिलकर एक-दूसरे के घरों की दीवारों पर पेंटिंग बनाने में मदद करती हैं. सभी महिलाएं एक साथ बैठकर प्राकृतिक रंगों और अपनी कल्पनाओं से दीवारों पर खूबसूरत आकृतियां उकेरती हैं.

हुनर का कमाल
इन दीवारों पर आपको प्रकृति की पूरी झलक देखने को मिलेगी. कहीं हिरण और हाथी जैसे जानवरों की आकृतियां बनी हैं तो कहीं पेड़-पौधे, फूल-पत्तियां और प्रकृति से जुड़ी अलग-अलग तस्वीरें नजर आती हैं. इन चित्रों की खासियत यह है कि इन्हें बनाने के लिए किसी मशीन या आधुनिक तकनीक की जरूरत नहीं पड़ती. महिलाएं अपने हुनर और पारंपरिक कला के जरिए साधारण मिट्टी की दीवारों को भी बेहद आकर्षक बना देती हैं.

हर साल ऐसे ही सजाते हैं घर
गांव की रहने वाली मुस्कान बताती हैं कि हम लोग हर साल अपने घरों को इसी तरह सजाते हैं. शहरों में लोग पेंटिंग और डिजाइन के लिए बाहर से कारीगर बुलाते हैं, लेकिन हमारे गांव में आज भी महिलाएं खुद अपने हाथों से घरों को सजाती हैं. इसमें पूरे गांव की महिलाएं एक-दूसरे का सहयोग करती हैं. इससे त्योहार की खुशी भी बढ़ जाती है और अपनी परंपरा भी बनी रहती है.

मेहनत का काम पर देता है संतुष्टि
वहीं रिया बताती हैं कि साल में एक बार हम लोग अपने घरों की अच्छी तरह साफ-सफाई करते हैं. इसके बाद दीवारों पर मिट्टी का लेप लगाकर उन्हें तैयार किया जाता है और फिर सोहराय पेंटिंग बनाई जाती है. यह काम भले ही मेहनत वाला है, लेकिन जब दीवारों पर खूबसूरत आकृतियां उभरकर आती हैं तो घर का पूरा रूप बदल जाता है. हमें खुशी होती है कि आज भी हम अपनी पुरानी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं.

मोह रही है लोगों का मन
किनूडीह गांव की ये महिलाएं बता रही हैं कि खूबसूरत घर बनाने के लिए महंगे रंगों और डिजाइनर पेंट की जरूरत नहीं होती. जरूरत होती है तो बस अपनी कला, मेहनत और परंपरा से जुड़े रहने की. शहर की चमक-दमक के बीच गांव की दीवारों पर उभरती सोहराय कला झारखंड की संस्कृति की ऐसी पहचान है, जो आज भी अपनी खूबसूरती से लोगों का मन मोह रही है.

About the Author

Raina Shukla

Raina Shukla is an experienced journalist and content professional with nearly two decades of experience in print and digital media. She holds a Master’s degree in Mass Communication and Journalism from Bundelk…

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