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जमीन नहीं थी तो लीज पर ली, शुरू की गेंदा की खेती,...


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लीज पर जमीन लेकर शुरू की फूलों की खेती, देवघर के टुनटुन पंडित अब कमा रहे लाखों

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देवघर के टुनटुन पंडित ने खुद की जमीन न होने पर लीज पर खेत लेकर गेंदा फूल की खेती शुरू की .बाबा बैद्यनाथ मंदिर में फूलों की भारी मांग से वे सालाना करीब 7 लाख रुपये कमा रहे हैं. उनकी यह सफलता साबित करती है कि सही बाजार समझ और मेहनत से खेती भी सरकारी नौकरी से बेहतर मुनाफा दे सकती है.

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देवघरः देवघर की मिट्टी से निकली यह कहानी आज उन किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद कुछ बड़ा करने का सपना देखते हैं. यह कहानी है किसान टुनटुन पंडित जी की, जिनके पास खुद की जमीन नहीं थी, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय लीज पर जमीन लेकर खेती करने का फैसला किया. शुरुआत में वे छोटे-छोटे खेतों में पारंपरिक फसल जैसे धान और गेहूं की खेती करते थे, जिससे आमदनी सीमित ही रहती थी. मेहनत तो बहुत होती थी, लेकिन मुनाफा उतना नहीं मिल पाता था. ऐसे में उन्होंने कुछ नया करने की ठानी और फूलों की खेती की ओर कदम बढ़ाया, जो आज उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट बन चुका है.

लीज पर जमीन लेकर शुरू की फूल की खेती
टुनटुन पंडित जी ने देवघर में एक एकड़ जमीन लीज पर लेकर गेंदा फूल की खेती शुरू की.आपको बता दें कि इस इलाके में एक एकड़ में करीब 17 कठा जमीन होती है, जिसमें उन्होंने पूरी योजना और मेहनत के साथ फूलों की खेती को अपनाया. शुरुआत में यह फैसला थोड़ा जोखिम भरा जरूर था, लेकिन उन्होंने बाजार की मांग को समझा और उसी के अनुसार अपनी खेती को ढाला. देवघर में स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर में पूजा-पाठ के लिए गेंदा फूल की मांग हमेशा बनी रहती है, और यही उनकी सफलता की सबसे बड़ी वजह बनी. उन्होंने अपनी फसल को सीधे मंदिर के आसपास के बाजारों में बेचना शुरू किया, जिससे उन्हें अच्छा दाम मिलने लगा.

क्या कहते हैं किसान टुनटुन पंडित
किसान टुनटुन पंडित ने लोकल 18 के संवाददाता से बातचित करते हुए कहाँ की हर सप्ताह लगभग तीन क्विंटल गेंदा फूल की तोड़ाई करते हैं.अगर इसकी कीमत की बात करें तो बाजार में गेंदा फूल करीब 50 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिकता है। इस हिसाब से उनकी साप्ताहिक कमाई काफी अच्छी हो जाती है, और साल भर में यह आंकड़ा करीब 7 लाख 20 हजार रुपये तक पहुंच जाता है.खास बात यह है कि यह कमाई उन्होंने बिना अपनी जमीन के, सिर्फ लीज पर खेती करके हासिल की है. उनकी यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि अगर सही फसल का चयन और बाजार की समझ हो, तो खेती से भी अच्छी आय अर्जित की जा सकती है.

सिंचाई के लिए बोरिंग की है आवश्यकता
टुनटुन पंडित जी बताते हैं कि गेंदा फूल की खेती में ज्यादा खर्च नहीं आता, लेकिन देखभाल और समय पर मेहनत करना बहुत जरूरी होता है. उन्होंने अपनी खेती में नियमित सिंचाई, खाद और सही समय पर तोड़ाई का विशेष ध्यान रखा, जिससे उनकी फसल की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है. हालांकि फूलो की सिंचाई के लिए पानी परोसी के कुए से दूर से लाना पड़ता है अगर खुद के खेत मे बोरिंग हो जाये तों उत्पादन मे और वृद्धि हो सकती है फूल के साथ अन्य चीजों की भी खेती की जा सकती है.यही वजह है कि उनके फूलों की मांग बाजार में हमेशा बनी रहती है और उन्हें बेचने में कोई परेशानी नहीं होती.

आय में हुई कई गुणा बढ़ोतरी 
उनकी सफलता यह सिखाती है कि अगर किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ बाजार की मांग को समझकर नई तकनीक और फसलों को अपनाएं, तो वे अपनी आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं. बिना अपनी जमीन के भी, सिर्फ हिम्मत और सही सोच के दम पर उन्होंने जो मुकाम हासिल किया है, वह हर किसान के लिए एक प्रेरणा है.

About the Author

Prashun Singh

मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.



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