भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

know papaya farming tips desi segment vs hybrid red lady for ganga...


होमताजा खबरकृषि

देसी या हाइब्रिड? गंगा किनारे पपीते की खेती के लिए कौन है बेस्ट, जानें

Last Updated:

Papaya Farming Tips: भागलपुर के युवाओं में पपीते की खेती को लेकर नया क्रेज देखा जा रहा है, लेकिन मुनाफे के चक्कर में किस्म का गलत चुनाव किसानों को भारी पड़ सकता है. कृषि विशेषज्ञ गुंजेश गुंजन के अनुसार गंगा के मैदानी इलाकों के लिए हाइब्रिड रेड लेडी की तुलना में देसी सेगमेंट अधिक सुरक्षित और फलदायी है. इस रिपोर्ट में जानें कैसे ड्रिप सिंचाई और सही जल प्रबंधन के जरिए आप पपीते की खेती से अपनी तकदीर बदल सकते हैं. फंगस जैसी बीमारियों से पौधों को बचा सकते हैं. जानिए एक्सपर्ट टिप्स.

ख़बरें फटाफट

भागलपुर: बिहार में खेती-किसानी का स्वरूप तेजी से बदल रहा है. अब युवा परंपरागत फसलों को छोड़कर फल और सब्जियों की आधुनिक खेती की ओर रुख कर रहे हैं. भागलपुर जिले में इन दिनों पपीते की खेती को लेकर युवाओं में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है. पपीता कम समय में अधिक मुनाफा देने वाली फसल मानी जाती है. लेकिन सही तकनीक और सही किस्म के चुनाव के बिना इसमें भारी नुकसान की संभावना भी बनी रहती है.

कौन सी किस्म है सबसे बेहतर?
पपीते की खेती में अक्सर किसान रेड लेडी किस्म को सबसे अच्छा मानते हैं. लेकिन स्थानीय परिस्थितियों में यह धारणा हमेशा सही साबित नहीं होती. कृषि शोधकर्ता गुंजेश गुंजन के अनुसार गंगा के तटीय क्षेत्रों में पपीते की फसल में फंगस लगने का खतरा सबसे अधिक होता है. रेड लेडी जैसी हाइब्रिड किस्मों में बीमारियां अधिक पकड़ती हैं.

गुंजेश गुंजन आगे सलाह देते हैं कि भागलपुर और इसके आसपास के इलाकों के लिए देसी सेगमेंट की किस्में सबसे अधिक लाभदायक हैं. इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं. देसी पपीते को हाइब्रिड की तुलना में अधिक समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है. हाइब्रिड के मुकाबले मार्केट में इसके दाम थोड़े कम जरूर मिलते हैं. लेकिन एक ही पौधे से मिलने वाली पैदावार इतनी अधिक होती है कि कुल कमाई हाइब्रिड से ज्यादा हो जाती है.

पानी का सही मेंटेनेंस है सफलता की कुंजी
पपीता एक ऐसी फसल है जहां पानी का प्रबंधन सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. जरा सी चूक पूरी फसल को बर्बाद कर सकती है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि पपीते के पौधों को न तो ज्यादा पानी चाहिए और न ही बहुत कम. अधिक सिंचाई से पपीते का स्वाद फीका पड़ जाता है. वह पानी जैसा लगने लगता है. पानी की कमी होने पर पौधे के पत्ते पीले पड़कर झड़ने लगते हैं.

ड्रिप सिंचाई, मिठास और ग्रोथ का राज
पपीते की खेती को सफल बनाने के लिए ड्रिप सिंचाई सबसे उत्तम तकनीक मानी गई है. यह तकनीक न केवल पानी बचाती है. बल्कि पौधों को जरूरत के अनुसार नमी प्रदान करती है. ड्रिप सिंचाई के उपयोग से फल अच्छी तरह ग्रो करते हैं. उनकी मिठास भी बनी रहती है.

About the Author

Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top