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जमशेदपुर के दो दोस्तों ने बदल दी गांव के कलाकारों की किस्मत,...


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Jamshedpur News: जमशेदपुर के दो दोस्तों ने मिलकर ऐसा काम किया, जिससे न केवल जनजातीय कला को ग्लोबल बाजार मिल रहा है बल्कि इन कलाकारों की आमदनी भी बढ़ी है. चाको थॉमस और शेरिन मैथ्यू ने पर्पल स्टोरी कंपनी के माध्यम से कारीगरों को मंच उपलब्ध कराया है.

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जमशेदपुर. जमशेदपुर के दो दोस्त चाको थॉमस और शेरिन मैथ्यू ने एक ऐसा काम शुरू किया है, जिसकी कल्पना भी बहुत कम लोग कर पाते हैं. जहां एक तरफ गांव के कलाकार अक्सर अपनी कला के बावजूद पहचान और बाजार के अभाव में पीछे रह जाते हैं, वहीं इन दोनों युवाओं ने उनकी किस्मत बदलने का बीड़ा उठाया. आज उनकी इस पहल के कारण गांव के कलाकार न सिर्फ पहचान पा रहे हैं, बल्कि घर बैठे ही लाखों की आमदनी भी कर रहे हैं.

कलाकारों को नहीं मिल पाता था प्लेटफॉर्म
इन दोस्तों ने ओडिशा के बोंडा जनजाति और गडाबा जनजाति के साथ-साथ झारखंड की महली जनजाति के कारीगरों को जोड़कर एक अनोखा नेटवर्क तैयार किया है. इन जनजातियों के पास पीढ़ियों से चली आ रही पारंपरिक कला है, लेकिन पहले इन्हें सही प्लेटफॉर्म नहीं मिल पाता था. ऐसे में जमशेदपुर के इन युवाओं ने उनकी कला को बाजार तक पहुंचाने की जिम्मेदारी उठाई.

कारीगरों को मिल रहा सीधा फायदा
इन्होंने अपनी कंपनी पर्पल स्टोरी के जरिए इन कलाकारों के बनाए प्रोडक्ट को ग्लोबल स्तर तक पहुंचाना शुरू किया. आज इनके उत्पाद देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी पसंद किए जा रहे हैं. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया की मदद से इनकी पहुंच लगातार बढ़ रही है, जिससे कारीगरों को सीधे फायदा मिल रहा है.

अगर प्रोडक्ट की बात करें तो उड़ीसा के बोंडा और गडाबा जनजाति के कारीगर बांस (बंबू) से शानदार आर्ट तैयार करते हैं. इनमें पेन स्टैंड, डेकोरेटिव आइटम, होम डेकोर और खूबसूरत लैंप शामिल हैं. ये सभी प्रोडक्ट न सिर्फ पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि देखने में भी बेहद आकर्षक होते हैं.

जलकुंभी से भी बनते हैं काम के आइटम
वहीं झारखंड की महली जनजाति के लोग जलकुंभी (वॉटर हायसिंथ) से कई उपयोगी और स्टाइलिश उत्पाद बनाते हैं. इनमें गिफ्ट हैंपर, ट्रे, पॉट और कॉरपोरेट गिफ्ट जैसी चीजें शामिल हैं. जलकुंभी को आमतौर पर बेकार समझा जाता है, लेकिन इन कारीगरों ने इसे अपनी कला के जरिए कीमती बना दिया है.

इस पहल की सबसे खास बात यह है कि इससे कलाकारों को अपने गांव से बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती. वे अपने घर पर रहकर ही काम करते हैं और उनकी बनाई चीजें सीधे बड़े बाजारों तक पहुंचती हैं. इससे उनकी आमदनी में लगातार वृद्धि हो रही है और उनका जीवन स्तर भी बेहतर हो रहा है.

मिसाल बन चुकी है यह सोच
जमशेदपुर के इन दो दोस्तों की यह सोच न सिर्फ सराहनीय है, बल्कि यह एक मिसाल भी बन चुकी है. उन्होंने यह साबित कर दिया है कि अगर सही दिशा और प्लेटफॉर्म मिले, तो गांव की कला भी वैश्विक पहचान हासिल कर सकती है. यह पहल ‘लोकल से ग्लोबल’ की अवधारणा को सच्चे मायनों में साकार कर रही है.

About the Author

Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें



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