Tamil Nadu News: तमिलनाडु में थलापति विजय की सरकार बन चुकी है. टीवीके सरकार अब वादों को पूरा करने में जुटी है. इस बीच तमिलनाडु की सियासत को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. जी हां, तमिलनाडु की चुनाव बाद की राजनीति में हलचल मचाने वाला खुलासा हुआ है. जी हां, थलापति विजय को सत्ता में आने से रोकने के लिए डीएमकी और एआईएडीएमके ने मिलकर गेम प्लान तैयार किया था. इसके लिए इन दोनों पार्टियों ने एक शख्स को सीएम पोस्ट भी ऑफर किया था. वह शख्स कोई और नहीं वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन थे. जी हां, वीसीके चीफ थोल थिरुमावलवन ने दावा किया है कि डीएमके और एआईएडीएमके ने सत्ता साझा करने के असाधारण फॉर्मूले तलाशे थे. इसके तहत उन्हें मुख्यमंत्री पद की पेशकश की गई थी. मकसद बस इतना कि थलापति विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) को सरकार बनाने से रोका जा सके.
न्यूज18 तमिलनाडु से खास बातचीत में वीसीके प्रमुख ने पुष्टि की कि इस महीने सरकार गठन के ड्रामे के चरम पर दोनों द्रविड़ पार्टियों के बीच बातचीत हुई थी. यह तब हुआ था, जब विजय की टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी लेकिन बहुमत के आंकड़े से पीछे थी.
सीएम पद पर मीटिंग की वो कहानी
थोल थिरुमावलवन ने कहा, ‘7 मई को हमें अलग-अलग निमंत्रण मिले कि सीएम स्टालिन हमसे मिलना चाहते हैं.’ वीसीके और वाम नेताओं की बैठक का जिक्र करते हुए थोल थिरुमावलवन ने कहा, ‘जब हम गए, उन्होंने प्रस्ताव रखा कि एआईएडीएमके चाहती है कि हम साथ मिलकर एडापड्डी पलानीस्वामी को मुख्यमंत्री बनाएं. मैंने उनसे कहा कि डीएमके का भविष्य ही सवाल बन जाएगा. वाम दलों की भी यही राय थी.’
डीएमके और एआईएडीएमके के बीच पर्दे के पीछे खेल
इन टिप्पणियों से सरकार गठन के तनावपूर्ण दौर में डीएमके और एआईएडीएमके के बीच पर्दे के पीछे हुई बातचीत की अटकलों की पुष्टि होती है. लेकिन बड़ा राजनीतिक झटका थिरुमावलवन के अगले दावे से आया. वीसीके चीफ ने आगे कहा कि 8 मई को नया प्रस्ताव आया कि जिसमें मुझे उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में पेश किया, जबकि पलानीस्वामी को डिप्टी सीएम. उन्होंने ‘मैंने इसे मजाक में उड़ा दिया. ऐसा कुछ तमिलनाडु में कभी नहीं हो सकता.’
थिरुमावलवन को मिला सीएम पोस्ट का ऑफर
थिरुमावलवन ने दावा किया कि टीवीके को समर्थन देने का पत्र देने के बाद भी उन्हें ऑफर मिलते रहे. उन्होंने कहा, ‘टीवीके को समर्थन देने के बाद भी मुझे मुख्यमंत्री पद का ऑफर मिला.’ हालांकि, अंत में वीसीके ने विजय की पार्टी का समर्थन किया, जिससे टीवीके बहुमत के आंकड़े को पार कर गई और विजय के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हुआ.
थोल थिरुमावलवन का दावा, डीएमके-एआईएडीएमके ने सीएम पद ऑफर किया
क्यों अहम है यह खुलासा
यह चौंकाने वाले खुलासे ऐसे समय में आए हैं, जब एआईएडीएमके अंदरूनी संकट से जूझ रही है. पार्टी के एक बागी गुट ने ईपीएस पर आरोप लगाया है कि वे सिर्फ विजय के उभार को रोकने के लिए डीएमके से गठजोड़ करने को तैयार थे. वहीं, ईपीएस गुट का आरोप है कि बागी एआईएडीएमके विधायकों को टीवीके का समर्थन करने के बदले कैबिनेट में जगह देने का वादा किया गया था.
इस विवाद में सुपरस्टार रजनीकांत का नाम भी आ गया है, जिनके बारे में राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि उन्होंने डीएमके-एआईएडीएमके के बीच बातचीत में अनौपचारिक रूप से मदद की. रजनीकांत ने इन अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया. उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘मैं स्टालिन को 35-40 साल से जानता हूं. मुझे दुख हुआ कि वे कोलाथुर सीट से हार गए. क्या इतनी राजनीतिक तनाव के समय ऐसी बात करना संभव है?’
इन खुलासों से पता चलता है कि जब टीवीके शुरू में बहुमत से पीछे थी, तो प्रतिद्वंद्वी गुटों ने संख्या जुटाने के लिए हर संभव कोशिश की, जिससे ऐसे राजनीतिक हालात बने जो पहले कभी सोचे भी नहीं जा सकते थे. (पूर्णिमा मुरली की रिपोर्ट)