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Mirzapur News : मिर्जापुर जिले में कुछ ऐसे स्थल है जो बेहद ही खास है. इनमें कलेक्ट्रेट भवन, रेलवे स्टेशन, बीएलजे इंटरमीडिएट कॉलेज और घंटाघर है. इनका निर्माण अंग्रेजी शासन काल में हुआ था.
मिर्जापुर जिले का कलेक्ट्रेट का निर्माण अंग्रेजों के शासनकाल में हुआ था. इसाक निर्माण 1835 में हुआ था, यहां आज इसी भवन में कलेक्ट्रेट चलता है.
मिर्जापुर : उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में अंग्रेजों के द्वारा कई ऐसे ऐतिहासिक का निर्माण कराया गया है, जो मिर्जापुर जिले के प्राचीन स्थलों में से एक है. अंग्रेजों के शासनकाल में निर्मित यह भवन आज भी बेहद खास है, जिनकी पहचान भी मिर्जापुर जिले से होती है. खास बात है कि सैकड़ों सालों के बीत जाने के बावजूद भी इनकी चमक कम नहीं हुई है.
मिर्जापुर जिले में अंग्रेजों के शासनकाल में घंटाघर का निर्माण हुआ था. घंटाघर शहर के बीच में स्थित है. यह ऐतिहासिक भवन है, यहां पर नक्काशी दर पत्थरों का प्रयोग किया गया है, जो की देखने में बेहद ही आकर्षक नजर आते हैं.
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घंटाघर के निर्माण में लाल बलुआ पत्थरों का प्रयोग किया गया है, जो इसकी सुंदरता को कई गुना तक बढ़ा देता है. इसमें एक घंटा और घड़ी लगाया गया है, जिससे टाइम का पता चलता है. पुराने समय में यह घड़ी शहर के लोगों का टाइम जानने का एकमात्र साधन था.
अंग्रेजों के शासनकाल में बने कलेक्ट्रेट में डीएम, एडीएम सहित कई विभागों का संचालन होता है. संयुक्त कार्यालय में जिलेभर के अधिकारी बैठते हैं. मिर्जापुर जिले की पहचान भी इन्हीं ऐतिहासिक भवनों से होती है.
मिर्जापुर के पुराने स्टेशन को माल गोदाम के तौर पर विकसित किया गया है, जहां पर खाद सहित अन्य खाद्यान्न सामग्री भी स्टोर किए जाते हैं, यहां से ट्रकों के माध्यम से इन्हें दूसरे स्थान तक ले जाया जाता है.
मिर्जापुर शहर में स्थित रेलवे स्टेशन का निर्माण भी अंग्रेजों के शासनकाल में कराया गया था. यह स्टेशन दिल्ली-हावड़ा रूट के बीच में बनाया गया था, जो आज भी ऐतिहासिक धरोहर के तौर पर मौजूद है. स्टेशन का विकास तो किया गया, लेकिन कुछ पुराने हिस्से को आज भी ऐसे ही छोड़ गया है.
मिर्जापुर जिले की सबसे प्राचीन विद्यालयों में एक बीएलजे को अंग्रेजों के शासनकाल में निर्मित किया गया था. अंग्रेजी शासको के द्वारा लोगों की पढ़ाई के मद्देनजर स्कूल का निर्माण किया गया था. सबसे पहले स्कूल लंदन मिशन के नाम से चला था. समय में परिवर्तन होने के साथ ही स्कूल का नाम भी बदल दिया गया.