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लातेहार जिले के नेतरहाट की तराई में बसे सुदूरवर्ती नैना गांव में 18 मई को हुए एक हादसे ने पूरे गांव की जिंदगी को संकट में डाल दिया है। गांव का एकमात्र सरकारी कुआं अचानक जोरदार आवाज के साथ जमींदोज हो गया। जिससे नल-जल योजना के तहत हो रही पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। इसी कुएं में मोटर लगाकर करीब 50 परिवारों और लगभग 300 की आबादी वाले गांव में पानी पहुंचाया जाता था। कुआं धंसने के समय वहां कोई मौजूद नहीं था, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। इसके बाद गांव के सामने पेयजल का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। नदी से ढोना पड़ रहा पीने का पानी कुआं ध्वस्त होने के बाद नैना गांव के ग्रामीणों को अब नदी और अन्य अस्थायी स्रोतों पर निर्भर होना पड़ रहा है। चिलचिलाती गर्मी के बीच रोजाना लंबी दूरी तय कर पानी लाना ग्रामीणों के लिए बेहद मुश्किल हो गया है। खासकर महिलाएं और बच्चे इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। ग्रामीण महिलाओं शकुंतला देवी, विमला देवी और मनीता देवी ने बताया कि पहले घर तक पानी मिल जाता था, लेकिन अब हर दिन कई किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ रहा है। पानी की कमी के कारण दैनिक जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। गर्मी ने हालात और भी भयावह बना दिए हैं। वैकल्पिक व्यवस्था की उठी मांग ग्रामीणों का कहना है कि प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर इस गांव में बुनियादी सुविधाओं की हमेशा से कमी रही है, लेकिन अब पानी जैसी मूलभूत जरूरत भी पूरी नहीं हो पा रही है। उमेश महतो समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि यही एकमात्र जलस्रोत था। जिसके ध्वस्त होने के बाद गांव पूरी तरह संकट में है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल वैकल्पिक जलस्रोत उपलब्ध कराने, कुएं की मरम्मत कराने या नए कुएं/बोरिंग की व्यवस्था करने की मांग की है। ग्रामीणों में इस समस्या को लेकर आक्रोश भी देखा जा रहा है। विभाग ने दिया त्वरित कार्रवाई का भरोसा मामले को लेकर पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता दीपक कुमार महतो ने कहा कि स्थिति की जानकारी मिलने पर विभाग तुरंत कार्रवाई करेगा। उन्होंने बताया कि संबंधित कनीय अभियंता को मौके पर भेजकर जांच कराई जाएगी। जल्द से जल्द पेयजल आपूर्ति बहाल करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल नैना गांव के लोग भीषण गर्मी में पानी के लिए जूझ रहे हैं। प्रशासन की त्वरित कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
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