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मोदी-शाह का बंगाल प्लान सुन राहुल-अखिलेश के उड़ेंगे होश, ताकते रह जाएंगे ये 2

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Modi-Shah Bengal Plan : बंगाल जीत के बाद मोदी-शाह की जोड़ी बड़ा धमाका कर सकती है. बंगाल जीत के बाद लोकसभा में भी बीजेपी बाजी पलट सकती है. बीजेपी जो काम लोकसभा चुनाव 2024 में नहीं कर सकी, क्या वह 2026 में कर लेगी? क्या दो साल बाद बीजेपी को लोकसभा में बहुमत मिल जाएगा? क्या ममता बनर्जी की पार्टी में जबरदस्त टूट होने वाली है? ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी क्या बिखर जाएगी? जानें टीएमसी सांसद काकोली घोष का इस्तीफा, केंद्र की वाई कैटेगरी की सुरक्षा. जानें जून महीने में मोदी-शाह का वह प्लान, जिससे राहुल गांधी और अखिलेश यादव ही नहीं नीतीश कुमार और आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडु की भी नींद उड़ जाएगी.

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बीजेपी का लोकसभा में सीटों का आंकड़ा बढ़ सकता है.

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे के बाद बीजेपी बमबम हो गई है. बंगाल की सत्ता हाथ से जाने के बाद ममता बनर्जी की पार्टी के कई सांसद पाला बदलने के फिराक में बैठे है. टीएमसी के भीतर बगावत की आग धधर रही है. लोहा गरम है, सिर्फ बीजेपी की हथौड़ा मारने भर की देरी है. टीएमसी के आंतरिक सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा में पार्टी के कुल 29 सांसदों में से 20 से अधिक सांसद पाला बदलने और टीएमसी को बाय-बाय बोलने को पूरी तरह बेताब हैं. क्योंकि अभी तक मोदी-शाह का ग्रीन ग्रीन सिग्नल नहीं मिला है. इसलिए सारे इंतजार कर रहे हैं. टीएमसी की चार बार की सांसद काकोली घोष दस्तीदार के तल्ख तेवरों ने दूसरे लोकसभा सांसदों को हौसला दिया है. काकोली ने आई-पैक के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया. इधर काकोली की नाराजगी के बीच केंद्र सरकार ने उन्हें ‘Y’ श्रेणी की सीआईएसएफ सुरक्षा भी मुहैया करा दी.

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में तृणमूल कांग्रेस के महज 80 सीटों पर सिमट जाने के बाद, सूबे की राजनीति में बदलाव के दायरे का विस्तार तेजी से हो रहा है. ममता बनर्जी भले ही सार्वजनिक रूप से अपनी इस हार को स्वाभाविक न मानकर इसे भाजपा और चुनाव आयोग की साजिश करार दे रही हों और रोज विलाप के अंदाज में तीखे बयान जारी कर रही हों, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अब उनके अपने ही साथी उन पर भरोसा खो चुके हैं. टीएमसी के भीतर पिछले 15 साल से जनता के बीच पनप रहे आक्रोश का असर अब पार्टी के आंतरिक ढांचे को पूरी तरह ढहाने लगा है.

टीएमसी के 29 में से कितने सांसद टूटेंगे?

पार्टी के भीतर हालात इस कदर बदतर हो चुके हैं कि अब सांसदों और विधायकों के सामूहिक रूप से पाला बदलने की सुगबुगाहट तेज हो गई है. ममता बनर्जी की बुलाई जा रही संगठनात्मक बैठकों और विरोध प्रदर्शनों से पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों का नदारद रहना यह साफ संकेत दे रहा है. राज्य में अभिषेक बनर्जी और ममता बनर्जी का खौफ अब खत्म हो चुका है. खुद ममता बनर्जी भी इस अलगाव को भांप चुकी हैं, तभी वे हताशा में कह रही हैं कि जिन्हें जाना है, वे चले जाएं, वे बचे-खुचे लोगों से पार्टी को दोबारा खड़ा कर लेंगी.

लोकसभा में पलटेगी बाजी?

टीएमसी के ही एक मौजूदा सांसद के दावों पर यकीन करें तो आने वाले कुछ दिन ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक झटका लेकर आ रहे हैं. वर्तमान में लोकसभा में टीएमसी के 29 सांसद हैं, जो देश के निचले सदन में विपक्ष की दूसरी सबसे बड़ी ताकत हैं. लेकिन यह ताकत बहुत जल्द बिखरने वाली है. सूत्रों के मुताबिक, कल्याण बनर्जी, अभिषेक बनर्जी और अन्य एक-दो सांसदों को छोड़कर, टीएमसी के करीब 20 से 25 सांसद भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के साथ निरंतर संपर्क में हैं.

बहुमत के करीब पहुंचेगी भाजपा!

चर्चा है कि अगले ही महीने यानी जून 2026 भाजपा इस बड़े दलबदल को मूर्त रूप दे सकती है. वर्तमान में लोकसभा में भाजपा के पास अपने दम पर 240 सीटें हैं और बहुमत के लिए 272 का आंकड़ा चाहिए, जिसके लिए वह एनडीए के सहयोगी दलों पर निर्भर है. जेडीयू और टीडीपी दो ऐसे दल हैं, जिसके बल मोदी सरकार केंद्र में है. लेकिन इसमें एक भी अगर झटका देता है तो बीजेपी अपना प्लान-बी तैयार रखना चाहती है. यदि टीएमसी के ये 20 से अधिक सांसद टूटकर भाजपा का दामन थाम लेते हैं या संसद में एक अलग गुट बनाकर सरकार को समर्थन देते हैं, तो लोकसभा में भाजपा की ताकत अकेले ही बहुमत के जादुई आंकड़े के बेहद करीब पहुंच जाएगी.

इस पूरे संकट के केंद्र में टीएमसी की चार बार की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार के बागी तेवर हैं. दरअसल, ममता बनर्जी ने एक बड़ा संगठनात्मक फेरबदल करते हुए काकोली घोष से लोकसभा में मुख्य सचेतक का पद छीनकर कल्याण बनर्जी को सौंप दिया था. इस फैसले को काकोली ने पार्टी के भीतर अपना घोर अपमान माना. भाजपा ने इस आंतरिक कलह को भांपने में देर नहीं की. इंटेलिजेंस ब्यूरो की थ्रेट असेसमेंट रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार ने तुरंत काकोली घोष दस्तीदार को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की वीआईपी ‘Y’ श्रेणी की सशस्त्र सुरक्षा मुहैया करा दी. इसके तुरंत बाद, काकोली ने टीएमसी के लिए चुनावी रणनीति बनाने वाली एजेंसी आई-पैक के खिलाफ सार्वजनिक रूप से आवाज बुलंद करते हुए जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया. काकोली का यह कदम टीएमसी के भीतर एक बड़े विद्रोह का स्पष्ट संकेत है.

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रविशंकर सिंहChief Reporter

I am an alumnus of Bharatiya Vidya Bhavan, Delhi with a career in journalism that spans across several prestigious newsrooms. Over the years, I have honed my craft at Sahara Samay, Tehelka, P7 and Live India, a…और पढ़ें



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