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झारखंडी सिनेमा के इतिहास में शायद पहली बार ऐसा नजारा दिख रहा है, जहां लोग फिल्म देखने के लिए हाथ में गुलदस्ते, गले में झारखंडी गमछा और थिएटरों के बाहर ढोल-नगाड़े बजाते हुए पहुंच रहे हैं। सोशल मीडिया से लेकर बॉक्स ऑफिस तक, इन दिनों सिर्फ एक ही नाम की गूंज है- ‘सेरेंग’। आदिवासी पृष्ठभूमि पर बनी इस नागपुरी फिल्म ने सफलता के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। आलम यह है कि फिल्म अपने चौथे हफ्ते में है और इसके शो घटने के बजाय लगातार बढ़ रहे हैं। रांची के“पॉपकॉर्न सिनेमा’ के तो सारे शो इसी फिल्म के नाम हो चुके हैं। अब यह फिल्म 5 जून से खोरठा और संथाली भाषा में अन्य जगहों पर रिलीज की जाएगी। नेताओं से लेकर युवाओं तक में क्रेज विधायक शिल्पी नेहा तिर्की ने लड़कियों को फिल्म दिखाने के लिए पूरा का पूरा हॉल बुक कर लिया। वहीं, लोहरदगा सांसद सुखदेव भगत ने भी फिल्म देखकर इसकी तारीफ की। रांची के 4 सिनेमाघरों के अलावा रामगढ़, खूंटी, राउरकेला में भी फिल्म बंपर कमाई कर रही है। लव-जिहाद विवाद से फिल्म को फायदा फिल्म कंट्रोवर्सी से सुर्खियों में है। सेराज अंसारी व माघी मुंडा के प्रेम प्रसंग को ‘लव-जिहाद’ का रूप देने की कोशिश की गई। निर्देशक एनपीके ने कहा, “कुछ लोग फिल्म देखे बिना बयानबाजी कर रहे हैं। जबकि थिएटर से निकल रहे लोगों की आंखों में कहानी को लेकर आंसू और सम्मान है।’
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