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Agriculture tips | बाड़मेर मंगले की बेरी में बूंद बूंद सिंचाई से...


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जहां बबूल और झाड़ियां वहां 50°C में भी हरियाली! इस गांव ने तो कमाल कर दिया

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Green Garden In Desert : बाड़मेर के मंगले की बेरी गांव ने रेगिस्तान में हरियाली उगाकर सबको चौंका दिया है. जहां कभी सिर्फ बबूल और सूखी जमीन नजर आती थी, वहां अब 4 हजार से ज्यादा पौधे लहलहा रहे हैं. ग्रामीणों ने बूंद-बूंद सिंचाई तकनीक से 50 डिग्री तापमान में भी इस इलाके को हराभरा बना दिया, जो अब पूरे राजस्थान के लिए प्रेरणा बन रहा है.

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बाड़मेर. सरहदी बाड़मेर के तपते रेगिस्तान में स्थित मंगले की बेरी गांव में जहां कभी बंजर जमीन, बबूल और झाड़ियां नजर आती थीं, वहां अब हरियाली की चादर बिछी हुई है. नीम, शीशम, आंवला, नींबू, केर और गुलमोहर सहित 12 किस्मों के 4 हजार से ज्यादा पौधे लहलहा रहे हैं. खास बात यह है कि 50 डिग्री तापमान वाले इलाके में ग्रामीणों ने बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति से इन पौधों को सींचकर रेगिस्तान में सुकून देने वाला बगीचा तैयार कर दिया है.

सरहदी बाड़मेर जिले के इस गांव ने ऐसा काम कर दिखाया है, जो किसी मिसाल से कम नहीं माना जा रहा. आडेल पंचायत समिति के मंगले की बेरी में जहां कभी सूखी जमीन और झाड़ियां दिखाई देती थीं, वहां आज दूर-दूर तक हरियाली नजर आती है. भीषण गर्मी और तेज तापमान के बीच यह जगह लोगों को ठंडक और सुकून का एहसास करा रही है. गांव के लोगों की सामूहिक मेहनत और पानी बचाने वाली तकनीक ने इस पूरे इलाके की तस्वीर बदल दी है.

बूंद-बूंद सिंचाई से बदली गांव की तस्वीर
इस इलाके में सबसे बड़ी चुनौती कम पानी के बीच पौधों को जिंदा रखना था. इसके लिए ग्रामीणों ने बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति अपनाई. पानी की हर बूंद का सही उपयोग करते हुए पौधों तक नमी पहुंचाई गई. लगातार देखभाल और संरक्षण का ही नतीजा है कि आज ये पौधे बड़े होकर घनी हरियाली में बदल चुके हैं. ग्रामीणों का कहना है कि शुरुआत में लोगों को भरोसा नहीं था कि रेगिस्तान जैसी जगह पर इतनी हरियाली तैयार हो सकती है. लेकिन गांव के लोगों ने मिलकर पौधों की देखभाल की और अब यह जगह पूरे इलाके के लिए प्रेरणा बन चुकी है.

8 हेक्टेयर में तैयार हुआ हरियाली का क्षेत्र
आज 50 डिग्री तापमान में भी यहां ठंडक और सुकून का एहसास होता है. स्थानीय ग्रामीण गोरखाराम बताते हैं कि अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो तो रेगिस्तान में भी हरियाली उगाई जा सकती है. उन्होंने बताया कि पहले चरण में 5 हेक्टेयर भूमि पर नीम, शीशम, आंवला, नींबू, केर और गुलमोहर सहित करीब 12 किस्मों के 2500 से अधिक पौधे लगाए गए थे, जो अब अच्छी तरह विकसित हो चुके हैं. वहीं दूसरे चरण में 3 हेक्टेयर क्षेत्र में 1500 से ज्यादा पौधे लगाए गए हैं. लगातार बढ़ती हरियाली के कारण अब यह इलाका पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बनता जा रहा है.

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना से मिला सहयोग
जलग्रहण विकास एवं भू संरक्षण विभाग की ओर से प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के तहत इस कार्य को आगे बढ़ाया गया. पहले चरण में 5 हेक्टेयर भूमि पर चारागाह विकास और उद्यानिकी कार्य के तहत करीब 2500 पौधे लगाए गए. इनमें शीशम, सागवान, आम, इमली, नीम, गुलमोहर, चूरेल, बादाम, मौसमी, आंवला, बेर, गुंदा, अनार, शहतूत, सहजन और कैक्ट्स जैसी कई प्रजातियां शामिल हैं. इसके बाद दूसरे चरण में 3 हेक्टेयर भूमि पर 1500 पौधे और लगाए गए. अब यह पूरा क्षेत्र रेगिस्तान के बीच हरियाली की नई पहचान बनता जा रहा है.

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Anand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में News18 हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें



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