सौ बात की एक बात ये कि ये जो गोरों में फैलाया जा रहा है भारतीय उनके देशों में जा कर उनकी नौकरियां खा रहे हैं, इस पॉलिटिक्स का जवाब देने की जरूरत है. इसलिए भी जरूरत है क्योंकि लोगों को ये लॉजिक ठीक लग रहा है कि भाई बाहर के देशों से अगर कोई उनके देश में आ कर काम करेगा तो लोकल लोग तो बिफरेंगे ही. ब्रिटेन में तो एक पार्टी ही खड़ी हो गई है रिफॉर्म यूके नाम की जिसने इस बार के वहां के लोकल काउंसिल चुनावों में वहां की पुरानी पार्टियों को ही पीछे छोड़ दिया. और उसकी पॉलिटिक्स ही यही है कि ब्रिटेन अब ब्रिटेन वालों का ही नहीं रहा. और बाहर से आ कर लोग वहां बस रहे हैं. लेकिन इसमें ये फर्क करना जरूरी है कि भाई एक तो वो हैं जो गैर-कानूनी तरीके से इराक से आ रहे हैं, सिरिया से आ रहे हैं, अफगानिस्तान से आ रहे हैं, अफ्रीका के सूडान से आ रहे हैं और भी कई अफ्रीकी देशों से आ रहे हैं. वो तो हो गया वहां का घुसपैठिया फैक्टर. कि वो गैर-कानूनी तरीके से आ रहे हैं और ब्रिटेन के लोगों पर बोझ बन रहे हैं.
लेकिन नेता लोग वहां अब भारतीयों को भी लपेटे में लेने लग गए हैं. वहां के एक निर्दलीय सांसद हैं रूपर्ट लो. वो भी रिफॉर्म यूके पार्टी में हुआ करते थे. अब उन्होंने अपनी एक अलग मुहिम शुरू की है ‘रिस्टोर ब्रिटेन के नाम से’. वो भी यही पॉलिटिक्स चमका रहे हैं. उन्होंने कह दिया कि ये लाखों भारतीय और पाकिस्तानी ब्रिटेन में आ कर ब्रिटेन के बेरोजगारों का रोजर छीन रहे हैं. कह रहे हैं कि मुझे जिसको रेसिस्ट कहना है कह ले, जिसको नस्लवादी कहना है कह ले, लेकिन मुझे फर्क नहीं पड़ता, ये बंद होना चाहिए. और लोग कह रहे हैं कि अगर वो अपने देश की बात कर रहे हैं तो गलत क्या है? वहां के सांसद हैं तो अपने लोगों के बारे में ही बोलेंगे, इसमें गलत क्या है? तो ऐसे लोगों को बताने की जरूरत है कि गलत क्या है. कौन से रोजगार छीन रहे हैं भारतीय? गोरों के रोजगार छीन रहे हैं भारत के लोग? कौनसे रोजगार? उनकी कंपनियों के रोजगार? कहां से बनी वो कंपनियां? कहां से बना है वो अमीर देश? हमें गरीब देश के लोग बता रहे हो जो तुम्हारी नौकरियां ले रहे हैं, तुम्हारा काम-धंधा ले रहे हैं? कहां से खड़ा किया गोरों ने ये काम-धंधा जिसपर ऐसे ऐंठ रहे हैं कि उनकी मिल्कियत भारत के लोग ले जा रहे हैं? औद्योगिक क्रांति से बनाया आपने? औद्योगिक क्रांति का पैसा कहां से आया था?
याददाश्त ताजा करने की जरूरत
इन लोगों की याददाश्त ताजा करने की जरूरत है. ये जो ऐंठ रहे हैं कि भारत के लोग हमारे महान ब्रिटेन में कैसे घुसे चले आ रहे हैं इनको याद दिलाने की जरूरत है कि वो आए थे यहां. वो आए थे यहां भीख मांगते हुए कि व्यापार कर लो उनके साथ. 400 साल पहले अग्रेज जब भारत आए थे तो पूरी दुनिया की GDP में भारत का हिस्सा जानते हैं कितना था? 25%, दुनिया की एक चौथाई GDP भारत से आती थी. सबसे अमीर देश भारत था. और ब्रिटेन का हिस्सा कितना था? 2%, सिर्फ 2% हिस्सा रखने वाला मामूली सा देश ब्रिटेन था. वो आए जहांगीर के दरबार में और मिन्नतें कर रहे थे कि हमारे साथ व्यापार कर लो. ब्रिटेन के राजघराने का दूत जो आया था 1615 में सर टॉमस रो, वो वहां से तोहफे लेकर आया घड़ियां, शराब, पिस्तौल वगेरह मुगल बादशाह को देने के लिए तो दरबार में लोग हंस रहे थे कि कौन से गरीब से देश से आया है कोई दूत. उसने खुद लिखा कि व्यापार का समझौता करने चला तो गया भारत लेकिन भारत को देने के लिए हमारे पास है क्या? ऐसी कौनसी चीज है जो भारत में नहीं जो हम उसको दे सकें. खुद लिखा उसने कि उसको भारत देख कर ही शर्म आ रही थी कि हम क्या देंगे इनको.
ब्रिटेन में भारतीय अपनी काबिलियत के दम पर रोजगार पाते हैं. (फाइल फोटो/Reuters)
…तब तो ब्रिटेन में सीवर और शौचालय तक नहीं थे
कपड़ा भारत का दुनिया में नंबर एक पर था. ढाका का मलमल दुनिया में मशहूर था. दुनिया में 25% कपड़ा भारत का बिकता था. समुद्री जहाज भारत जैसे दुनिया में कहीं नहीं बनते थे. बंगाल में बने जहाज दुनिया के सबसे मजबूत जहाज माने जाते थे. दिल्ली, आगरा, लाहौर जैसे शहर ऐसे थे कि दुनिया में ऐसे मॉडर्न शहर नहीं थे. और लंदन क्या था? भारत में सिंधु घाटी सभ्यता के समय से नालियों का सिस्टम था. वो तो चलो 5000 साल पहले की बात हो गई लेकिन जब अंग्रेज भारत आए तब तक भी उनके यहां शौच के लिए जगह नहीं होती थी, सीवर नहीं होते थे. लोग घर में गड्ढा कर के उसके अंदर शौच करते थे. जब वो गड्ढा भर जाता था तो मिट्टी डाल कर दूसरा गड्ढा करते थे. लंदन में नालियां सीधा वहां की टेम्स नदी में गिरती थीं. जानवरों की लाशें नदी में डाल देते थे. गरीब तो सड़कों पर खुले में शौच करते थे.
लंदन में जब संसद बंद करनी पड़ी थी
1858 में तो ये हालत हो गई थी कि लंदन की संसद बंद करनी पड़ गई थी. क्यों? क्योंकि टेम्स नदी शौच से भर गई थी. पूरे लंदन में सांस लेना मुश्किल हो गया था इतनी बदबू थी इन गोरे अंग्रेजों के प्यारे लंदन में. 1858 की घटना को तो इनके इतिहास में ‘द ग्रेट स्टिंक’ के नाम से जाना जाता है. उनके बच्चे गंदगी में बीमारियों से मर जाते थे. नदी में शौच भरा हुआ था पीने की पानी तक नहीं था. और उस टाइम भारत में सड़कें रोज धुलती थीं. नहरों का जाल था. कसाईखाने शहर से बाहर होते थे. गुसलखाने होते थे. ड्रेनेज सिस्टम होता था. नदियों पर घाट थे. घाट नियमित रूप से साफ रखे जाते थे. शहरों में बाजार ऐसे थे कि दुनिया में कहीं नहीं होते थे ऐसे बाजार. चांदनी चौक उस वक्त की दुनिया का टाइम्ज स्क्वेयर था. इंस्टाग्राम होता ना तो सारी दुनिया आती रील बनाने. बागों में फव्वारे होते थे. ये आए थे उस भारत के साथ व्यापार करने. और युद्ध करके 1757 में ईस्ट इंडिया कंपनी के कब्जा कर लिया. और भारत पर टैक्स लगाकर भारत को लूटा.
भारत का पैसा ब्रिटेन में खर्च होता था
भारत के टैक्स का बड़ा हिस्सा ब्रिटेन भेज दिया. भारत का पैसा ब्रिटेन में खर्च होता था, भारत में नहीं. भारत से सस्ते में कच्चा माल ले जाते थे. कपास ले जाते थे, नील ले जाते थे, चावल ले जाते थे. और भारत के पैसे से ब्रिटेन में कारखानों खड़े किए. और उसको कह दिया औद्योगिक क्रांति. भारत पर टैक्स लगाकर, भारत का माल लेकर, अपने कारखाने बनाकर उनका माल भारत में ही बेचने आते थे. जब आए थे तो भारत को देने लायक कुछ था नहीं इनके पास. और फिर हमारे ही पैसे से फैक्टरियां खड़ी कर के हमें ही माल बेचने लगे. और हमारे मजदूरों को हमारे बुनकरों को बेरोजगार कर दिया. और आज हमें कह रहे हैं कि हम उनके रोजगार ले रहे हैं?
तुमने तो जबरदस्ती की, क्या हमने भी ऐसा किया?
हम तुम्हारे देश में कब्जा कर के जबरदस्ती ले रहे हैं क्या काम? अपनी काबिलियत पर ले रहे हैं ना. तुमने तो जबरदस्ती बेरोजगार किया था ना हमें. 1750 में दुनिया का सबसे बड़ा औद्योगिक देश भारत था. दुनिया में भारत के उद्योग का हिस्सा 25% और 1900 आते-आते भारत के उद्योग का हिस्सा कितना रह गया? 2%, यानी 25% से हमें 2% पर ला दिया और आज हमें कह रहे हो कि हम गोरों का रोजगार ले रहे हैं? कहते हैं सड़के बनाईं, रेलवे बनाई. हां बनाई. किसके पैसे से बनाई? लंदन से लाए थे पैसा यहां रेलवे बनाने के लिए? हमारे ही टैक्स के पैसे से कुछ टुकड़े यहां फेंक कर रेल बना दी, सड़कें बना दीं तो वो तो हम भी बना लेते. जब भारत तुमसे ऐडवांस्ड होता था जब तुम आए तो आगे भी तो बढ़ता रहता. तुम तो लूट के पैसों के बल पर आगे बढ़े. हम तो अपनी ताकत रखते थे ना आगे बढ़ने की.
गोरों ने लूटे 45 लाख करोड़ डॉलर
मशहूर अर्थशास्त्री उत्सा पटनायक ने पूरी गहन रिसर्च की है. उनके अनुसार 1765 से 1938 के बीच ब्रिटेन भारत से पता है कितने पैसे निकाल कर गया? आज के भाव लगाएं तो ब्रिटेन अपने राज के दौरान 45 लाख करोड़ डॉलर भारत से ले गया. 45 लाख करोड़ डॉलर. ये जो औद्योगिक क्रांति वहां उसने की, वो भारत से लूटे हुए पैसों से की. 45 लाख करोड़ डॉलर का मतलब समझ रहे हैं? यानी ब्रिटेन की आज की GDP का 17 गुना. आज यानी विकसित ब्रिटेन जो है आज का, उसकी जितनी GDP है, उसका 17 गुना, 45 लाख करोड़ डॉलर ब्रिटेन ने भारत से निकाला अपने राज में. और कह रहे हो कि भारतीय तुम्हारे रोज़गार ले रहे हैं. लाओ 45 लाख करोड़ डॉलर वापस, और ले लो अपने रोजगार.
भारत क्या तुम्हारी बपौती थी?
कह रहे हैं कि ब्रिटेन किसी की बपौती नहीं है, तो भारत क्या तुम्हारी बपौती थी क्या? जब आए थे तो भारत के सामने कुछ भी नहीं थे. भारत को देने लायक तोहफे भी नहीं थे तुम्हारे राजदूत के पास, शर्म आ रही थी उसको यहां. और जब गए 1947 में तो ब्रिटेन दुनिया की सबसे ताकतवर औद्योगिक शक्ति बन चुका था. दुनिया की GDP में उसका हिस्सा बड़ा हो चुका था. शहर विकसित कर लिए हमारे पैसों से, कारखाने बना लिये हमारे पैसों से, रेल बना ली हमारे पैसों से, बैंक बना लिया हमारे पैसों से. भारत की दुनिया की GDP में हिस्सेदारी 25% से घटकर 4% के आसपास कर दी. उद्योग नष्ट कर दिये, किसान गरीब कर दिये, अकाल पड़ गए यहां पर.
खुद सुपर पावर कैसे बने?
खुद सुपर पावर कैसे बने? सेना कहां से आई? भारत से. भारतीय सेनिकों के दम पर तुमने नेपोलियन के खिलाफ युद्ध लड़े, भारत के सैनिकों के दम पर तुमने पहली वर्ल्ड वॉर लड़ी, भारत के सैनिकों के दम पर तुमने दूसरी वर्ल्ड वॉर लड़ी. भारत से टैक्स लेकर तुमने सेना खड़ी की, हथियार खरीदे, नौसेना बनाई और अपना साम्राज्य फैलाया. हां, अब कहने वाले यही कहेंगे ना कि अंग्रेज आए थे तो मुकाबला करते ना उनका. यही कहते हैं ना कि दम था तो रोक लेते अंग्रेजों को. अच्छा. तो फिर अब तुम क्यों रो रहे हो? दम है तो अपनी काबिलियत दिखाओ ना भारतीयों के सामने. तुम्हारे लोगों को रोजगार अगर इसलिए नहीं मिल रहे क्योंकि भारतीय ज्यादा काबिल हैं तो करो मुकाबला काबिलियत पर.
ऐंठन दिखाने वाले तुम कौन?
ऐंठन दिखाने वाले तुम कौन हो? लूट के पैसों से अपना घर बनाने वाले कह रहे हैं कि जिनके घर से लूट कर आए हैं वो वहां ना आएं? लूट का माल वापस करो फिर. 45 लाख करोड़ डॉलर बकाया बनता है. पूरा ब्रिटेन भी बेच डालोगे ना तब भी ना दे पाओगे. तो भारतीय तो सभ्य तरीके से काम कर रहे हैं, कानूनी तरीके से काम कर रहे हैं, तुम्हारी तरह लूट नहीं रहे वहां पर. तो तुम जो एक और चीज देकर गए हो ना, अंग्रेजी, उसी अंग्रेजी में दो शब्द सुन लो. शट अप. सौ बात की एक बात.