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धान की खेती का समय धीरे-धीरे शुरू होने वाला है. पहली बारिश के साथ ही किसान खेतों की तैयारी और धान की नर्सरी यानी बिछड़ा तैयार करने के काम में जुट जाएंगे. लेकिन कई बार जल्दबाजी में किसान कुछ जरूरी बातों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसका असर बाद में पूरी फसल पर पड़ता है. सही तरीके से शुरुआत नहीं होने पर धान की पैदावार कम हो सकती है और किसानों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है. इसलिए कृषि विशेषज्ञ खेती शुरू करने से पहले खेत की अच्छी तैयारी करने की सलाह दे रहे हैं.
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को मौसम के अनुसार धान के बीज चुनने की भी सलाह दी है. इस साल मानसून कमजोर रहने की संभावना जताई जा रही है. ऐसे में कम पानी में अच्छी पैदावार देने वाली किस्मों का चयन करना फायदेमंद रहेगा.
कृषि विशेषज्ञ अंबिका कुशवाहा ने बताया कि धान की नर्सरी तैयार करने से पहले खेत की सफाई सबसे जरूरी काम है. खेत में उगी खरपतवार यानी बेकार घास को पूरी तरह हटाना चाहिए. अगर खेत में खरपतवार रह जाता है तो वह मिट्टी के पोषक तत्वों को खींच लेता है, जिससे धान के पौधे कमजोर हो जाते हैं. इसके बाद सूखे खेत की अच्छी तरह जुताई करनी चाहिए.
जुताई से मिट्टी भुरभुरी हो जाती है और उसमें हवा का संचार बढ़ता है. इससे मिट्टी की उर्वरक क्षमता मजबूत होती है और पौधों की जड़ें तेजी से बढ़ती है. विशेषज्ञों के अनुसार खेत में गोबर की खाद का इस्तेमाल भी काफी फायदेमंद होता है. गोबर की खाद मिट्टी को प्राकृतिक ताकत देती है और जमीन में नमी बनाए रखने में मदद करती है.
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रासायनिक खाद के साथ गोबर खाद का उपयोग करने से फसल को अधिक फायदा मिलता है. अगर समय पर बारिश नहीं हो रही हो तो खेत में सिंचाई जरूर करनी चाहिए, ताकि मिट्टी में पर्याप्त नमी बनी रहे. सूखी मिट्टी में तैयार की गई नर्सरी कमजोर हो जाती है और पौधों की बढ़वार सही तरीके से नहीं हो पाती.
धान की नर्सरी हमेशा थोड़ी ऊंची जमीन पर तैयार करनी चाहिए, जहां सिंचाई और जल निकासी दोनों की अच्छी व्यवस्था हो. लगातार बारिश होने पर खेत में पानी जमा हो सकता है, जिससे नर्सरी खराब होने का खतरा रहता है. वहीं पानी की कमी होने पर पौधे सूखने लगते हैं. इसलिए ऐसी जगह का चयन जरूरी है जहां अतिरिक्त पानी आसानी से निकल सके और जरूरत पड़ने पर सिंचाई भी हो सके.
विशेषज्ञों के अनुसार शक्ति पोहा, सवा 200, सवा 300, कावेरी 468 और पूसा बासमती 1509 जैसी धान की किस्में कम बारिश में भी अच्छी उपज देती हैं. इन किस्मों में बीमारियां कम लगती हैं और उत्पादन भी बेहतर होता है. सही बीज का चयन किसानों को कम खर्च में ज्यादा मुनाफा दिलाने में मदद कर सकता है.