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Amritsar Student Suicide Case। 3 महीने से स्कूल नहीं आई बच्ची… स्कूल...


अमृतसर: पंजाब के अमृतसर में 17 वर्षीय छात्रा की आत्महत्या के मामले ने अब एक नया मोड़ ले लिया है. इस दुखद घटना के बाद जहां एक तरफ पुलिस ने मृतका के पिता के बयानों के आधार पर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है, वहीं दूसरी तरफ स्कूल प्रशासन ने सामने आकर अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. स्कूल प्रबंधन का दावा है कि छात्रा पिछले तीन महीनों से स्कूल ही नहीं आ रही थी, इसलिए फीस के लिए प्रताड़ित करने का सवाल ही पैदा नहीं होता. पुलिस अब दोनों पक्षों के दावों की सत्यता जांचने में जुट गई है.

स्कूल प्रबंधन की सफाई और दावे
घटना के बाद चौतरफा घिरे स्कूल प्रबंधन ने आधिकारिक बयान जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की है. प्रबंधन का कहना है कि मृतका फरवरी महीने के बाद से स्कूल नहीं आ रही थी. वह पिछले लगभग 3 महीने से लगातार अनुपस्थित चल रही थी. इस दौरान स्कूल प्रशासन द्वारा छात्रा और उसके परिजनों से लिखित पत्रों (रिटर्न लेटर्स) और फोन कॉल के जरिए कई बार संपर्क साधने का प्रयास किया गया था, ताकि उसकी अनुपस्थिति का कारण जाना जा सके. प्रबंधन के मुताबिक, इस दौरान परिवार के सदस्यों से उन्हें सिर्फ यही जानकारी मिली थी कि बच्ची की तबीयत ठीक नहीं है, इसी वजह से वह स्कूल नहीं आ पा रही है. स्कूल प्रशासन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि फीस भरने को लेकर छात्रा को प्रताड़ित करने का जो आरोप लगाया जा रहा है, वह पूरी तरह से झूठ, बेबुनियाद और मनगढ़ंत है.

अस्पताल की सूचना पर हरकत में आई पुलिस
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब अमृतसर के फोर्टिस अस्पताल द्वारा स्थानीय पुलिस को एक मेमो भेजा गया. अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को सूचित किया कि एक 17 वर्षीय छात्रा को गंभीर हालत में लाया गया था, जिसने सुसाइड की कोशिश की थी और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई है. अस्पताल से मिली इस सूचना के बाद पुलिस तुरंत हरकत में आई और शव को कब्जे में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की.

पिता के बयान पर एफआईआर दर्ज
पुलिस ने इस मामले में मृतका के पिता रविंद्र सिंह के बयान दर्ज किए हैं. पिता ने स्कूल प्रशासन पर बेहद गंभीर और संवेदनशील आरोप लगाए हैं. रविंद्र सिंह का कहना है कि उनकी बेटी को 11वीं कक्षा की स्कूल फीस जमा न कर पाने के कारण प्रबंधन द्वारा लगातार मानसिक रूप से परेशान और प्रताड़ित किया जा रहा था. पिता के मुताबिक, इसी मानसिक तनाव और प्रताड़ना से तंग आकर उनकी बेटी ने यह आत्मघाती कदम उठाया. पुलिस ने पिता की शिकायत को आधार बनाते हुए स्कूल प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि असल में छात्रा की मौत के पीछे की मुख्य वजह क्या थी.

अमृतसर सुसाइड केस की 5 अहम बातें

17 वर्षीय छात्रा का सुसाइड: अमृतसर में 11वीं कक्षा की एक 17 वर्षीय छात्रा ने संदिग्ध परिस्थितियों में सुसाइड कर लिया, जिसकी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई. स्कूल प्रबंधन पर एफआईआर: मृतका के पिता रविंद्र सिंह के बयानों के आधार पर पुलिस ने स्कूल प्रशासन और प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. फीस के लिए प्रताड़ना का आरोप: पिता का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन उनकी बेटी को 11वीं कक्षा की बकाया फीस जमा करने के लिए लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था. 3 महीने से अनुपस्थित रहने का दावा: स्कूल प्रबंधन ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि छात्रा फरवरी महीने के बाद से (पिछले 3 महीने से) स्कूल नहीं आ रही थी. बीमारी का दिया गया था हवाला: स्कूल के मुताबिक, फोन और लिखित नोटिस के जरिए संपर्क करने पर परिजनों ने बताया था कि बच्ची ठीक नहीं है, इसलिए स्कूल नहीं आ रही.

सवाल-जवाब
स्कूल प्रबंधन ने फीस से जुड़े प्रताड़ना के आरोपों पर क्या सफाई दी है?

स्कूल प्रबंधन ने फीस को लेकर प्रताड़ित करने के आरोपों को पूरी तरह से बेबुनियाद और झूठ करार दिया है. उनका कहना है कि जब छात्रा पिछले तीन महीनों से स्कूल ही नहीं आ रही थी, तो उसे प्रताड़ित करने का कोई आधार ही नहीं बनता. प्रबंधन के अनुसार, उन्होंने अपनी तरफ से छात्रा की पढ़ाई और अनुपस्थिति को लेकर लगातार परिवार से संपर्क बनाए रखा था.

पुलिस को इस दुखद घटना की जानकारी कैसे मिली और उसकी शुरुआती कार्रवाई क्या रही?

पुलिस को इस घटना की शुरुआती जानकारी फोर्टिस अस्पताल के माध्यम से मिली, जहां छात्रा को सुसाइड के बाद इलाज के लिए भर्ती कराया गया था. छात्रा की मौत के बाद अस्पताल ने पुलिस को सूचित किया. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मृतका के पिता रविंद्र सिंह के बयान दर्ज किए और तुरंत स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कानूनी धाराओं में केस दर्ज कर लिया.

स्कूल प्रशासन और मृतका के परिजनों के बयानों में क्या मुख्य विरोधाभास (अंतर) है?

इस मामले में सबसे बड़ा विरोधाभास छात्रा के स्कूल न आने के कारण को लेकर है. पिता का आरोप है कि स्कूल की तरफ से फीस के लिए मिल रही मानसिक प्रताड़ना के कारण उनकी बेटी तनाव में थी और उसने यह कदम उठाया. इसके विपरीत, स्कूल का दावा है कि लिखित रिकॉर्ड और फोन कॉल्स के अनुसार, परिजनों ने खुद उन्हें बताया था कि बच्ची की तबीयत खराब (ठीक नहीं) है, जिसके कारण वह फरवरी के बाद से स्कूल नहीं आ पा रही थी.



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