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AI भी रह गया पीछे! जमशेदपुर की 4 महीने की वामिका ने...


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Jamshedpur 4 Month Record Holder Vamika: जमशेदपुर की चार महीने की वामिका ने नेशनल रिकॉर्ड बनाया है. इतनी कम उम्र में वामिका ने 113 फ्लैश कार्ड पहचानकर चाइल्ड ड्रीम बूस्टर हब बुक ऑफ रिकॉर्ड में जगह बनायी. वामिका की मां राम्या ने गर्भावस्था के दौरान से ही इसके लिए मन बनाना शुरू कर दिया था.

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जमशेदपुर. जमशेदपुर से एक बेहद दिलचस्प और प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है. आमतौर पर चार महीने के बच्चे सिर्फ मुस्कुराना और अपने आसपास की चीजों को देखना सीखते हैं, लेकिन इस नन्ही बच्ची ने अपनी असाधारण क्षमता से सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है.

जमशेदपुर की रहने वाली मात्र चार महीने की बच्ची वामिका को ‘गॉड गिफ्टेड चाइल्ड’ के रूप में पहचान मिली है. इतनी छोटी उम्र में उन्होंने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है. वामिका ने ‘चाइल्ड ड्रीम बूस्टर हब बुक ऑफ रिकॉर्ड’ में अपना नाम दर्ज कराकर नेशनल रिकॉर्ड हासिल किया है.

गर्भावस्था में पड़ी नींव
वामिका के पिता राकेश टिनप्लेट कंपनी में कार्यरत हैं, जबकि उनकी मां राम्या एक टीचर हैं. राम्या बताती हैं कि वामिका की इस अद्भुत प्रतिभा की नींव गर्भावस्था के दौरान ही पड़ गई थी. उस समय वे नियमित रूप से पढ़ाई करती थीं, जिससे उन्हें लगता है कि बच्चे के मस्तिष्क पर अच्छा असर पड़ा.

2 महीने के बाद से दिखाने लगे थे फ्लैश कार्ड
जन्म के लगभग दो महीने बाद से ही वामिका को फ्लैश कार्ड दिखाने की शुरुआत की गई. शुरुआत में यह एक सामान्य अभ्यास था, लेकिन धीरे-धीरे वामिका ने उन कार्ड्स को पहचानना शुरू कर दिया. माता-पिता ने रोज कुछ समय निकालकर उन्हें अलग-अलग चीजों को दिखाया और समझाया.

लगातार अभ्यास और सही मार्गदर्शन का ही परिणाम है कि महज चार महीने की उम्र में वामिका 113 फ्लैश कार्ड्स पहचानने में सक्षम हो गईं. इनमें फलों के नाम, सब्जियों के नाम, रंगों की पहचान और यहां तक कि दुनिया के विभिन्न देशों के झंडे भी शामिल हैं. इतनी छोटी उम्र में इतनी साफ पहचान क्षमता वास्तव में अद्भुत है.

नेशनल रिकॉर्ड बनाया
राम्या ने आगे बताया कि जब उन्हें वामिका की इस खास प्रतिभा का एहसास हुआ, तब उन्होंने उसे नेशनल रिकॉर्ड के लिए पंजीकृत किया. सभी जरूरी परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद वामिका को यह सम्मान मिला. इसके साथ ही उन्हें कई पुरस्कार भी प्राप्त हुए, जो अब उनके घर की शोभा बढ़ा रहे हैं.

परिवार चाहता है बेटी साइंटिस्ट बने
इस उपलब्धि से पूरे परिवार में खुशी का माहौल है. वामिका के माता-पिता अपनी बेटी के भविष्य को लेकर बेहद उत्साहित हैं. उनका सपना है कि उनकी बेटी आगे चलकर एक वैज्ञानिक बने और देश का नाम रोशन करे.

वामिका की यह कहानी न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह भी दिखाती है कि सही मार्गदर्शन और अच्छा माहौल मिलने पर बच्चे कम उम्र में भी असाधारण उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं.

About the Author

Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें



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