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Aloo Ki Kheti Tips: आलू की खेती से होगी बढ़िया कमाई, खेत...


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Potato Farming Tips: आप भी आलू की खेती करने जा रहे हैं? तो खेती करने से पहले ये जानकारी जरूर ले लें. पूर्णिया के भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय के एक्सपर्ट डॉ. विकास कुमार ने आलू की बंपर पैदावार के लिए कई टिप्स दिए हैं. इसमें खेत तैयार करने और फर्टिलाइजर के इस्तेमाल की महत्वपूर्ण जानकारी दी है.

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पूर्णिया: सर्दी का मौसम शुरू होते ही किसान आलू की खेती की तैयारी में जुट जाते हैं. आलू की अच्छी पैदावार के लिए खेत की सही तैयारी, संतुलित उर्वरक का इस्तेमाल और बेहतर बीज का चुनाव बेहद जरूरी है. पूर्णिया स्थित भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय के कृषि विशेषज्ञ डॉ. विकास कुमार ने आलू की खेती से जुड़ी जरूरी जानकारी साझा की है. डॉ. विकास कुमार ने बतलाया कि आलू जमीन के अंदर तैयार होने वाली फसल है. इसकी खेती के लिए दोमट मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है. जबकि बालुई मिट्टी भी आलू की खेती के लिए अच्छी रहती है. सीमांचल के कई इलाकों में इस तरह की मिट्टी होने के कारण यहां आलू की खेती के लिए अनुकूल परिस्थितियां हैं.

2-3 बार करें गहरी जुताई
आलू की खेती के लिए खेत की तैयारी अच्छी तरह करना जरूरी है. इसके लिए खेत की 2 से 3 बार गहरी जुताई करनी चाहिए. अंतिम जुताई के समय पाटा चलाकर खेत को समतल कर देना चाहिए. इससे मिट्टी भुरभुरी हो जाती है. खेत समतल रहने से आलू की बुआई आसानी से की जा सकती है. डॉ.विकास के अनुसार अंतिम जुताई के समय खेत में जैविक खाद देना भी जरूरी है. इसके लिए सड़ी हुई गोबर की खाद, वर्मी कंपोस्ट या कंपोस्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है. सड़ी हुई गोबर की खाद करीब 20 टन प्रति हेक्टेयर की दर से अंतिम जुताई के समय खेत में डालने की सलाह दी गई है.

नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का रखें ध्यान
आलू की फसल के लिए प्रमुख पोषक तत्वों की उचित मात्रा देना भी जरूरी है. कृषि विशेषज्ञ डॉ.विकास के अनुसार, नाइट्रोजन 120 किलो, फास्फोरस 120 किलो और पोटाश 100 किलो प्रति हेक्टेयर की दर से देने की जरूरत होती है. इसके अलावा सूक्ष्म पोषक तत्वों का भी ध्यान रखना चाहिए. विशेषज्ञ के मुताबिक कई बार आलू की फसल में बोरॉन और जिंक की कमी के कारण पौधों में समस्याएं देखने को मिलती हैं. इसलिए खेत की अंतिम तैयारी के समय इन पोषक तत्वों की जरूरत के अनुसार व्यवस्था करना जरूरी है.

बीज उपचार के बाद ही करें बुआई
आलू की अच्छी फसल के लिए बीज का उपचार करना भी महत्वपूर्ण है. कृषि विशेषज्ञ ने बताया कि आलू के बीज की बुआई से पहले बेविस्टिन नामक दवा से बीजोपचार करना चाहिए. इसके बाद ही उपचारित बीज को खेत में लगाना चाहिए. उन्होंने बताया कि आलू के बीज कंद का वजन करीब 15 से 25 ग्राम होना जरूरी है. खेत की अच्छी तैयारी, संतुलित पोषण, उचित बीज उपचार और सही आकार के बीज कंद का इस्तेमाल करने से किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.

About the Author

Amit Ranjan

अमित रंजन वर्तमान में News18 में बिहार, झारखंड और दिल्ली से जुड़ी खबरों के समन्वय और संपादन का कार्य देख रहे हैं. खोजी पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है. राजनीति, शिक्षा, खेल, क्राईम और मौसम जैसे विषयों …

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