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- Asthma Is Becoming A ‘silent Epidemic’, With 34 Million Patients In The Country; The Rise In Children And Hidden Cases Is Raising Concerns.
रांची23 घंटे पहलेलेखक: अमन मिश्रा
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प्रदूषण से बढ़ रहा अस्थमा, झारखंड की 12% आबादी को सांस की बीमारी
वर्ल्ड अस्थमा डे के मौके पर अस्थमा को लेकर चिंताजनक ट्रेंड सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बीमारी अब सिर्फ मौसमी नहीं रही, बल्कि तेजी से बढ़ती हुई क्रॉनिक पब्लिक हेल्थ समस्या बन चुकी है। पल्मोनोलॉजिस्ट से बातचीत में सामने आया कि झारखंड में करीब 11 से 12% आबादी श्वास संबंधित बीमारी की चपेट में है। इनमें अधिकतर अस्थमा से पीड़ित हैं।
रिम्स टीबी एंड चेस्ट विभाग के हेड डॉ. ब्रजेश मिश्रा बताते हैं कि अस्थमा के केस पहले की तुलना में तेजी से बढ़े हैं। अब यह हर उम्र के लोगों को प्रभावित कर रहा है, खासकर शहरी इलाकों में इसका असर ज्यादा दिख रहा है। एक रिसर्च के अनुसार, झारखंड में औसतन 415 मरीज प्रति एक लाख आबादी में अस्थमा से प्रभावित हैं। शहरी इलाकों में यह दर ज्यादा (524 प्रति लाख) है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, झारखंड के कुछ शहरों में पिछले 5 वर्षों में अस्थमा के मामलों में 25% तक वृद्धि हुई है।

सबसे ज्यादा प्रभावित जिले…
साहिबगंज: 501-700 प्रति लाख
धनबाद: 600+ प्रति लाख तक केस
पाकुड़: 501-600 प्रति लाख
कोडरमा, हजारीबाग, गिरिडीह, देवघर, दुमका: 401-500 प्रति लाख (ये जिले अस्थमा के मामले में हाई रिस्क जोन में हैं)
अन्य प्रभावित क्षेत्र…
बोकारो, पलामू, चतरा, गढ़वा: 301-400 प्रति लाख (ये मध्यम स्तर वाले जिले हैं)
रांची, पूर्वी सिंहभूम, गुमला, प. सिंहभूम, लोहरदगा: 201–300 प्रति लाख (ये जिले सबसे कम, लेकिन स्थिर स्तर पर हैं)
किस तरह का ट्रेंड दिख रहा है?
प्रदूषण सबसे बड़ा ट्रिगर: डॉ. ब्रजेश मिश्रा के अनुसार, धूल और प्रदूषण के कारण एलर्जी और अस्थमा के मरीज बढ़ रहे हैं। धुआं अस्थमा के मामलों को तेजी से बढ़ा रहा है।
नए मरीजों की संख्या में तेजी: अब ऐसे लोग भी अस्थमा की चपेट में आ रहे हैं, जिन्हें पहले कभी सांस की समस्या नहीं थी।
बच्चों व युवाओं में बढ़ता असर: अस्थमा अब बच्चों और युवाओं में तेजी से फैल रहा है। फास्ट फूड, मोटापा, कम शारीरिक गतिविधि और बढ़ता प्रदूषण इसके बड़े कारण हैं।
अंडर डायग्नोसिस: करीब 70% तक मामलों का सही समय पर डायग्नोसिस नहीं हो पाता। लोग लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं।
क्या आपको सांस की बीमारी है? ऐसे करें खुद की जांच…
1. 3S फॉर्मूला: अगर ये 3 लक्षण बार-बार दिखें तो सतर्क हो जाएं
छींक/एलर्जी (स्नीज)
सांस फूलना (शॉर्टनेस ऑफ ब्रीद)
सीटी जैसी आवाज (व्हिस्लिंग साउंड)
(खासकर रात या सुबह ज्यादा हो तो यह अस्थमा का संकेत हो सकता है)
2. पांच मिनट एक्टिविटी टेस्ट
5 मिनट तेज चलें या सीढ़ियां चढ़ें।
देखें: क्या सांस सामान्य से ज्यादा फूल रही है? अगर जल्दी थकान और सांस फूलती हो तो फेफड़ों की जांच जरूरी है।
3. 2T फॉर्मूला (टाइम एंड ट्रिगर)
टाइम: क्या समस्या मौसम बदलने या रात में बढ़ती है?
ट्रिगर: धूल, धुआं या एक्सरसाइज से परेशानी बढ़ती है?
(अगर हां, तो यह एलर्जिक या अस्थमा का संकेत हो सकता है)
4. सात दिन पैटर्न रूल
1 हफ्ते तक लक्षण नोट करें।
अगर हफ्ते में 2-3 बार खांसी, सांस फूलना या सीने में जकड़न हो, तो इसे नजरअंदाज न करें, डॉक्टर से जांच कराएं।
