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व्यापार

30 रुपये की साड़ी, लाखों का बिजनेस! कमाल है छत्तीसगढ़ के विनय...

Last Updated:February 04, 2026, 12:02 IST Saree Business Idia : रायपुर के पंडरी कपड़ा मार्केट में शादी सीजन के चलते साड़ियों की जबरदस्त मांग बढ़ गई है. यहां 30-35 रुपये से शुरू होने वाली साड़ियां अच्छी क्वालिटी में उपलब्ध हैं. होलसेल बाजार होने के कारण छोटे व्यापारी यहां से सस्ती साड़ियां खरीदकर अपने क्षेत्रों में बेचकर बंपर मुनाफा कमा रहे हैं. बाजार सुबह 9:30 से रात 10 बजे तक खुला रहता है. Saree Business Idia : छत्तीसगढ़ में शादी का सीजन एक बार फिर रफ्तार पकड़ चुका है और इसके साथ ही बाजारों में रौनक लौट आई है. रायपुर के पंडरी इलाके में स्थित ऐतिहासिक कपड़ा मार्केट इन दिनों ग्राहकों की पहली पसंद बना हुआ है. यहां साड़ियां मात्र 30 से 35 रुपये की शुरुआती कीमत में उपलब्ध हैं, जो पूरे छत्तीसगढ़ में कहीं और इतनी सस्ती दर पर नहीं मिलतीं. कम दाम में भी अच्छी क्वालिटी की साड़ियांपंडरी कपड़ा मार्केट के साड़ी व्यापारी विनय जैन ने बताया कि कम कीमत का मतलब यह नहीं है कि क्वालिटी से समझौता किया गया है. यहां कम दाम में भी अच्छी क्वालिटी की साड़ियां मिल जाती हैं. जैसे-जैसे ग्राहक अधिक कीमत वाली साड़ियों की ओर बढ़ते हैं, उन्हें और बेहतर डिजाइन व कपड़े की क्वालिटी मिलती है. यही वजह है कि इस बाजार में हर महीने साड़ियों की लगातार मांग बनी रहती है. विनय जैन के अनुसार छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान में साड़ी का विशेष महत्व है. यहां की महिलाएं पारंपरिक रूप से साड़ी पहनना पसंद करती हैं, विशेषकर विवाह, पूजा-पाठ और सामाजिक आयोजनों में. शादी के सीजन की शुरुआत होते ही बाजार में ग्राहकों की संख्या में कई गुना वृद्धि हो जाती है. पसंद के अनुसार चयन करने में आसानीउन्होंने बताया कि यहां उपलब्ध साड़ियां 8 से 10 रंगों में आती हैं, जिससे ग्राहकों को अपनी पसंद के अनुसार चयन करने में आसानी होती है. पंडरी मार्केट की खासियत यह है कि यहां अधिकतर दुकानें थोक विक्रेता (होलसेल) हैं. छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के व्यापारी यहां से कम कीमत में साड़ियां खरीदकर अपने इलाकों में खुदरा बिक्री करते हैं. जो लोग साड़ियों का व्यापार शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए पंडरी कपड़ा मार्केट सबसे उपयुक्त विकल्प माना जाता है. कम पूंजी में व्यापार शुरू करने की सुविधा यहां मौजूद है. दुकानें सुबह साढ़े 9 बजे से रात 10 बजे तक खुली रहती हैं, जिससे ग्राहकों और व्यापारियों दोनों को पर्याप्त समय मिलता है. विनय जैन ने बताया कि इच्छुक व्यापारी उनसे मोबाइल नंबर 9981299492 पर संपर्क कर सकते हैं. शादी सीजन के चलते इन दिनों बाजार में भारी भीड़ देखी जा रही है और साड़ियों की बिक्री में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है. पंडरी कपड़ा मार्केट न केवल रायपुर बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में साड़ी व्यापार का प्रमुख केंद्र बन चुका है. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Raipur,Raipur,Chhattisgarh First Published : February 04, 2026, 12:02 IST Source link

व्यापार

अब वेंडरों को नहीं जाना पड़ेगा साहूकार के पास, छत्तीसगढ़ सरकार दे...

X अब वेंडरों को नहीं जाना पड़ेगा साहूकार के पास, छत्तीसगढ़ सरकार दे रही पैसा   Street vendors loan scheme : छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में पीएम स्वनिधि योजना से जुड़े स्ट्रीट वेंडरों के लिए बड़ी राहत की खबर है. अब पात्र पथ विक्रेताओं को बिना ब्याज ₹30,000 तक की रुपे क्रेडिट कार्ड सुविधा मिलेगी, जिससे छोटे कारोबार को बढ़ाने और आपात जरूरतों में मदद मिलेगी. नगर निगम ने ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है. दूसरे चरण का ऋण चुका चुके हितग्राहियों को पहले ₹10,000 की लिमिट मिलेगी, जो समय पर भुगतान करने पर ₹30,000 तक बढ़ाई जाएगी. 45 दिनों में भुगतान करने पर कोई ब्याज नहीं लगेगा, जिससे वेंडरों की आर्थिक मजबूती बढ़ेगी. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

झारखंड

11 गुफाएं, 9 मंदिर…श्रद्धा-पर्यटन का केंद्र; देवघर की ये पहाड़ी देखने देश...

Last Updated:April 28, 2026, 09:41 IST Best Religious Place To Visit In Deoghar: देवघर में यूं तो घूमने की कई जगहें हैं पर तपोवन पहाड़ की बात ही अलग है. ये स्थान लोगों के लिए पूज्यनीय है. यहां संकरी गुफाएं और मंदिर हैं. साथ ही ट्रैकिंग का अलग ही रोमांच मिलता है. ख़बरें फटाफट देवघर. झारखंड के देवघर में स्थित तपोवन पहाड़ हिंदू धर्म के श्रद्धालुओं के लिए आस्था और विश्वास का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है. यह स्थान ऊंचे पहाड़ पर बसा हुआ है और अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ धार्मिक महत्व के लिए भी प्रसिद्ध है. तपोवन को ’11 गुफाओं और 09 मंदिरों की पहाड़ी’ के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यहां एक ही स्थान पर कई प्राचीन गुफाएं और मंदिर मौजूद हैं. दूर-दूर से लोग यहां दर्शन करने और घूमने के लिए आते हैं. शांत वातावरण, ठंडी हवा और चारों तरफ फैली हरियाली इस जगह को और भी खास बना देती है. बेहद रहस्यमयी हैं यहां की गुफाएंतपोवन की गुफाएं यहां की सबसे बड़ी खासियत हैं. बाहर से देखने पर ये गुफाएं बेहद संकरी और छोटी लगती हैं, जिससे लगता है कि शायद इनमें प्रवेश करना आसान नहीं होगा. लेकिन जैसे ही लोग अंदर जाते हैं, उन्हें महसूस होता है कि इन गुफाओं में आसानी से जाया जा सकता है. अंदर का माहौल बिल्कुल अलग दुनिया जैसा लगता है, जहां शांति और सुकून का अनुभव होता है. यही वजह है कि पुराने समय में यह स्थान ऋषि-मुनियों और तपस्वियों की साधना का केंद्र रहा है. मान्यता है कि महर्षि वाल्मीकि ने भी यहां तप किया था, वहीं श्री बालानंद ब्रह्मचारी ने भी इसी स्थान पर साधना कर सिद्धि प्राप्त की थी. क्या कहते हैं स्थानीय लोगयहां के स्थानीय निवासी अमित कुमार बताते हैं कि यहां स्थित मंदिरों में भगवान शिव की विशेष पूजा होती है. पहाड़ पर बना तपो नाथ महादेव मंदिर श्रद्धालुओं के बीच खास महत्व रखता है, जहां लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं. इसके अलावा गुफाओं के भीतर हनुमान जी की प्रतिमा भी स्थापित है, जो भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र है. यहां की एक और अद्भुत चीज है पहाड़ में बनी एक बड़ी दरार, जिसके बीच हनुमान जी का मंदिर स्थित है. इस दरार को लेकर एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है कि जब रावण यहां तप करने आया था, तब देवताओं के कहने पर रावण का तप भंग करने के लिए हनुमान जी ने अपने गदा के प्रहार से पहाड़ को तोड़ दिया, जिससे यह दरार बन गई. दो पत्थरों के दरारों के बीच है हनुमान मंदिरतपोवन के नीचे एक पवित्र जल कुंड भी मौजूद है, जिसे सीता कुंड कहा जाता है. मान्यता है कि माता सीता यहां स्नान करती थीं, इसलिए यह स्थान भी धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इसके साथ ही यह पूरा क्षेत्र प्राकृतिक रूप से बेहद सुंदर है, जहां पहाड़, गुफाएं और हरियाली मिलकर एक अनोखा दृश्य प्रस्तुत करते हैं. यही कारण है कि यहां न केवल श्रद्धालु, बल्कि पर्यटक भी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं और तपो नाथ महादेव मंदिर, हनुमान गुफा, सीता कुंड समेत कई जगहों का आनंद लेते हैं. देवघर से इतना दूर हैझारखंड के सबसे ऊंचे पर्वतों में स्थित तपोवन पहाड़ी में पवित्र जैन तीर्थ स्थल है. यहां तपोवन पर्वत के ऊपर कई प्राचीन मंदिर और गुफाएं हैं, जिन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं. ऐसे में तपोवन पहाड़ियों में घूमने लायक जगहों में तपो नाथ महादेव मंदिर, हनुमान गुफा, सीता कुंड के साथ ही अन्य गुफाएं और पहाड़ियां हैं. जहां आप घूम सकते हैं. देवघर शहर से तपोवन पहाड़ की दूरी 10 किलोमीटर है. यहां पहुंचने के लिए आप देवघर से टैक्सी या ऑटो ले सकते हैं. जहां देवघर बस स्टैंड और देवघर रेलवे स्टेशन से भी तपोवन पहाड़ की दूरी 10 किलोमीटर है. इसके साथ ही नजदीकी एयरपोर्ट देवघर हवाई अड्डा रांची है. जहां से तपोवन पहाड़ की दूरी 15 किलोमीटर है. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Deoghar,Jharkhand First Published : April 28, 2026, 09:41 IST Source link

झारखंड

चौथी पास किसान ने बदली किस्मत, धान-गेहूं छोड़ा, उगाया जरबेरा, 4 कट्ठा...

होमताजा खबरकृषि चौथी पास किसान ने बदली किस्मत, धान-गेहूं छोड़ा उगाया जरबेरा, हो रही दनादन कमाई Last Updated:April 28, 2026, 10:28 IST Deoghar Farmer Earning Well With Gerbera: देवघर के किसान टुनटुन पंडित इस बात का बढ़िया उदाहरण हैं कि अगर थोड़ी सी ट्रेनिंग लेकर एडवांस खेती की जाए तो पारंपरिक खेती की तुलना में बढ़िया कमाई की जा सकती है. उन्होंने धान-गेंहू छोड़ जरबेरा उगाया और 4 कट्टा से सालाना 4 लाख तक की कमाई कर रहे हैं. ख़बरें फटाफट देवघर. समय के साथ खेती-किसानी का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है. पहले जहां किसान केवल पारंपरिक फसलों जैसे धान, गेहूं और सरसों पर निर्भर रहते थे, वहीं अब आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण की मदद से वे नई-नई फसलों की खेती कर रहे हैं. इस बदलाव ने किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है. आज के दौर में कृषि विज्ञान केंद्र जैसे संस्थानों से प्रशिक्षण लेकर किसान तकनीकी खेती अपना रहे हैं और कम जमीन में ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं. यह बदलाव न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुधार रहा है, बल्कि उनके जीवन स्तर को भी बेहतर बना रहा है. मात्र चौथी कक्षा तक पढ़े हैं किसान टुनटुन पंडितझारखंड के देवघर जिले के देवीपुर प्रखंड के गमरडीहा गांव के रहने वाले किसान टुनटुन पंडित इसकी एक मिसाल हैं. टुनटुन पंडित ने बहुत कम पढ़ाई की है, वे केवल चौथी कक्षा तक ही पढ़े हैं. एक समय था जब वे भी पारंपरिक खेती करते थे, लेकिन उस समय उनकी आमदनी इतनी कम थी कि घर चलाना भी मुश्किल हो जाता था. खेती में मेहनत बहुत लगती थी, लेकिन उसके मुकाबले आमदनी बहुत कम होती थी. ऐसे में परिवार की जिम्मेदारियों को निभाना उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण हो गया था. सालाना होती है 04 लाख से भी ज्यादा कमाईटुनटुन पंडित ने हार नहीं मानी और अपनी स्थिति को बदलने का फैसला किया. उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षण लिया और नई तकनीकों के बारे में जानकारी हासिल की. इसके बाद उन्होंने जरबेरा फूल की खेती शुरू की. यह एक ऐसी खेती है जिसमें मेहनत तो लगती है, लेकिन सही तरीके से करने पर अच्छी आमदनी भी होती है. आज टुनटुन पंडित करीब चार कट्ठा जमीन में 3500 से 4000 जरबेरा के पौधे लगाए हुए हैं. इन पौधों से उन्हें सालाना करीब 4 लाख रुपये तक की आमदनी हो जाती है, जो उनके लिए एक बड़ी सफलता है. आसानी से बिक जाते हैं फूलदेवघर को देवों की नगरी कहा जाता है, जहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं. पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों में फूलों की काफी मांग रहती है, जिसका फायदा टुनटुन पंडित को भी मिल रहा है. उनके उगाए हुए जरबेरा फूल आसानी से बाजार में बिक जाते हैं, जिससे उन्हें लगातार अच्छी आय प्राप्त हो रही है. यही कारण है कि उन्होंने पारंपरिक खेती छोड़कर फूलों की खेती को अपनाया और आज वे एक सफल किसान बन गए हैं. परिवार की जिम्मेदारी के साथ साथ की खेतीहालांकि, टुनटुन पंडित का जीवन इतना आसान नहीं रहा है. कुछ साल पहले उनकी पत्नी का निधन हो गया था, जिसके बाद उन पर परिवार की पूरी जिम्मेदारी आ गई. उन्होंने न केवल खेती संभाली, बल्कि अपने बच्चों की देखभाल भी खुद ही की. वे खेत में काम करने के साथ-साथ घर पर खाना बनाकर बच्चों को खिलाते थे और उनकी पढ़ाई का भी ध्यान रखते थे. यह समय उनके लिए बहुत कठिन था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और लगातार मेहनत करते रहे. खेती के बदौलत बेटे को दिलाई नौकरीआज उनकी मेहनत रंग लाई है. फूलों की खेती से हुई कमाई के दम पर उन्होंने अपने बड़े बेटे को बाहर पढ़ने भेजा और उसे अच्छी शिक्षा दिलाई. यही नहीं, उनका बेटा आज रेलवे में नौकरी कर रहा है, जो टुनटुन पंडित के संघर्ष और मेहनत का सबसे बड़ा परिणाम है. उनकी कहानी यह बताती है कि अगर इंसान मेहनत और सही दिशा में प्रयास करे, तो वह किसी भी परिस्थिति को बदल सकता है. सिमित संसाधनों के बावजूद सफलता हासिल कीटुनटुन पंडित जैसे किसान आज के समाज के लिए प्रेरणा हैं. उन्होंने यह साबित कर दिया है कि कम पढ़ाई और सीमित संसाधनों के बावजूद भी सफलता हासिल की जा सकती है. जरूरत है तो सिर्फ सही जानकारी, प्रशिक्षण और मेहनत की. उनकी यह सफलता कहानी न केवल अन्य किसानों को प्रेरित करती है, बल्कि यह भी बताती है कि खेती में बदलाव अपनाकर बेहतर भविष्य बनाया जा सकता है. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Deoghar,Jharkhand First Published : April 28, 2026, 10:28 IST Source link

झारखंड

प्राइम लोकेशन में सस्ता घर चाहिए? आ जाएं सोनारी, मिलेगी बजट फ्रेंडली...

Last Updated:April 28, 2026, 16:36 IST Jamshedpur Prime Location For Rented Homes: जमशेदपुर में कम बजट लेकिन अच्छी लोकेशन में किराये का घर या फ्लैट ढूंढ रहे तो सोनारी एरिया में शिफ्ट हो सकते हैं. यहां आसपास ही आपको सारी सुविधाएं मिल जाएंगी और किराया लोकेशन को देखते हुए कम है. अगर आप जमशेदपुर में अपने परिवार के साथ नौकरी के सिलसिले में शिफ्ट हो रहे हैं और एक अच्छे, सुरक्षित और सुविधाजनक इलाके में किराए का घर ढूंढ रहे हैं, तो सोनारी क्षेत्र आपके लिए सबसे बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है. यह इलाका शहर के प्रमुख और प्राइम लोकेशन में गिना जाता है, जहां रहने के लिए लगभग हर जरूरी सुविधा आसानी से उपलब्ध है. सोनारी की सबसे बड़ी खासियत इसकी शांत और हरी-भरी वादियां हैं, जो इसे अन्य भीड़-भाड़ वाले इलाकों से अलग बनाती हैं. यहां का वातावरण न सिर्फ साफ-सुथरा है बल्कि परिवार के साथ रहने के लिए भी काफी सुरक्षित माना जाता है. 24 घंटे बिजली और पानी की सुविधा इस क्षेत्र की एक बड़ी विशेषता है, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी में किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता. इसके अलावा, यहां की सिक्योरिटी व्यवस्था भी काफी मजबूत है, जिससे परिवार के साथ रहने वाले लोगों को एक अलग ही सुकून मिलता है. सोनारी क्षेत्र उन लोगों के लिए एक परफेक्ट जगह है जो अपने परिवार के साथ सुरक्षित, सुविधाजनक और शांत माहौल में रहना चाहते हैं. बेहतर लोकेशन, किफायती किराया और सभी आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता इसे जमशेदपुर के सबसे पसंदीदा रिहायशी इलाकों में शामिल करती है. Add News18 as Preferred Source on Google सोनारी में चारों ओर अच्छी तरह से विकसित कॉलोनियां मौजूद हैं, जहां से आपको बाजार, मेडिकल स्टोर, अस्पताल और स्कूल जैसी जरूरी सुविधाएं बेहद नजदीक मिल जाती हैं. बच्चों की पढ़ाई के लिए अच्छे स्कूल और परिवार की स्वास्थ्य जरूरतों के लिए बेहतर अस्पताल इस इलाके को और भी खास बनाते हैं. साथ ही, दैनिक जरूरतों के लिए बाजार भी पास में ही उपलब्ध होने के कारण यहां रहने वाले लोगों को कहीं दूर जाने की जरूरत नहीं पड़ती. अगर किराए की बात करें तो सोनारी में आपको बजट के अनुसार कई अच्छे विकल्प मिल जाएंगे. सामान्य तौर पर यहां ₹5000 प्रति महीने के आसपास आपको दो कमरे का घर आसानी से मिल सकता है, जो छोटे परिवार के लिए बिल्कुल उपयुक्त होता है. वहीं, अगर आप फ्लैट लेना चाहते हैं तो ₹8000 से ₹10000 के बीच में आपको एक अच्छा और सुविधाजनक फ्लैट भी मिल सकता है, जिसमें आधुनिक सुविधाएं भी शामिल होती हैं. First Published : April 28, 2026, 16:36 IST Source link

झारखंड

गर्मी में दूध घटने से परेशान पशुपालक… अपनाएं ये तरीका, पीला भूसा...

होमफोटोकृषि गर्मी में दूध घटने से परेशान पशुपालक,अपनाएं ये तरीका, दुधारू पशु रहेंगे स्वस्थ Last Updated:April 28, 2026, 20:36 IST Animal Care Tips: गर्मी का मौसम दुधारू पशुओं के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं होता. तेज धूप, लू और पानी की कमी के कारण इस समय पशु जल्दी बीमार पड़ जाते हैं और सबसे बड़ी चिंता यह होती है कि उनका दूध उत्पादन अचानक कम हो जाता है या कई बार पूरी तरह खत्म हो जाता है. ऐसे में पशुपालकों के लिए यह समय चुनौती भरा जरूर होता है, लेकिन अगर खान-पान और देखभाल पर सही तरीके से ध्यान दिया जाए तो गर्मी में भी दूध उत्पादन को बनाए रखा जा सकता है. खासकर आहार का सही चुनाव इस मौसम में सबसे ज्यादा जरूरी हो जाता है. हालांकि हर भूसा एक जैसा नहीं होता, इसलिए सही भूसे का चुनाव करना जरूरी है. डॉ सोरेन के अनुसार पीला भूसा जैसे गेहूं, धान, मकई और चना का भूसा दुधारू पशुओं के लिए बेहतर माना जाता है. इसमें जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो पशु के शरीर को ऊर्जा देते हैं और दूध उत्पादन को बनाए रखने में मदद करते हैं. देवघर कृषि विज्ञान केंद्र की पशु चिकित्सक डॉ पूनम सोरेन बताती हैं कि गर्मी के दिनों में हरा चारा आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाता. खेतों में नमी की कमी और तेज तापमान के कारण हरी घास और चारा कम हो जाता है, जिससे पशुपालकों को परेशानी होती है. ऐसे समय में भूसा एक अच्छा विकल्प बनकर सामने आता है. यह भी ध्यान रखें कि सिर्फ भूसा देना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे खिलाने का तरीका भी उतना ही जरूरी है. अक्सर देखा जाता है कि पशुपालक सीधे सूखा भूसा पशु के सामने रख देते हैं, जो एक बड़ी गलती है. सूखा भूसा खाने से पशु के पाचन तंत्र पर असर पड़ सकता है और उसका पेट खराब हो सकता है. इससे पशु बीमार पड़ सकता है और दूध उत्पादन पर भी खराब असर पड़ता है. इसलिए भूसा खिलाने से पहले उसे सही तरीके से तैयार करना बहुत जरूरी है. Add News18 as Preferred Source on Google डॉ पूनम सोरेन सलाह देती हैं कि भूसे को खिलाने से पहले कम से कम एक से दो घंटे तक पानी में भिगोकर रखना चाहिए. जब भूसा अच्छी तरह से फूल जाता है, तब उसे पशु को खिलाना चाहिए. इससे भूसा नरम हो जाता है और पशु उसे आसानी से पचा पाता है. साथ ही इससे पशु के शरीर में पानी की कमी भी कुछ हद तक पूरी होती है, जो गर्मी के मौसम में बेहद जरूरी है. अगर पशुपालक इस छोटे से तरीके को अपनाते हैं, तो वे अपने पशुओं को बीमारियों से बचा सकते हैं और दूध उत्पादन को भी बेहतर बना सकते हैं. गर्मी के मौसम में दुधारू पशुओं की देखभाल में थोड़ी सी सावधानी और सही जानकारी बहुत बड़ा फर्क ला सकती है. सही भूसा, सही तरीका और समय पर देखभाल से पशुपालक न केवल अपने पशुओं को स्वस्थ रख सकते हैं, बल्कि अपने दूध उत्पादन को भी स्थिर और अच्छा बनाए रख सकते हैं. First Published : April 28, 2026, 20:36 IST Source link

झारखंड

फीस से ज्यादा था पेट्रोल का खर्च, पिता ने लगाया दिमाग, कोचिंग...

Last Updated:April 28, 2026, 20:39 IST कोडरमा के आश्रम रोड निवासी बिजली मिस्त्री धर्म प्रकाश ने जुगाड़ तकनीक से साधारण साइकिल को इलेक्ट्रिक साइकिल में बदलकर मिसाल पेश की है. उनकी बेटी पिंकी कुमारी ने बताया कि पहले साधारण साइकिल से ट्यूशन जाने में करीब आधा घंटा लग जाता था और काफी थकान होती थी. अब इलेक्ट्रिक साइकिल से आने-जाने में पंद्रह मिनट से भी कम समय लगता है और बिना थकान के सफर पूरा हो जाता है. ख़बरें फटाफट कोडरमा: पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने जहां आम लोगों की जेब पर असर डाला है वहीं अब लोग तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ रुख कर रहे हैं. इसी बीच कोडरमा के झुमरी तिलैया शहर के आश्रम रोड निवासी बिजली मिस्त्री धर्म प्रकाश ने अपनी जुगाड़ तकनीक और हुनर से साधारण साइकिल को इलेक्ट्रिक साइकिल में बदल डाला है. दसवीं तक पढ़ाई करने वाले धर्म प्रकाश वर्षों से बिजली के विभिन्न उपकरणों की मरम्मत का काम करते आ रहे हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी तकनीकी समझ का उपयोग करते हुए एक ऐसी इलेक्ट्रिक साइकिल तैयार की है जो कम खर्च में बेहतर सुविधा दे रही है. साधारण साइकिल को बना दिया इलेक्ट्रिक साइकिलधर्म प्रकाश ने बताया कि उनकी बेटी पिंकी कुमारी स्नातक की पढ़ाई कर रही हैं और ट्यूशन पढ़ने के लिए रोज घर से करीब पांच किलोमीटर दूर जाती है. आने-जाने में उसे रोजाना 10 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता था. पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के कारण दोपहिया वाहन से आने-जाने का खर्च ट्यूशन फीस से भी अधिक होने लगा. इसी परेशानी ने उन्हें कुछ नया करने की प्रेरणा दी. उन्होंने घर में रखी एक साधारण साइकिल को जुगाड़ तकनीक के जरिए इलेक्ट्रिक साइकिल में बदलने का फैसला किया. करीब एक सप्ताह की मेहनत के बाद उन्होंने यह मॉडल तैयार किया. इसे बनाने में लगभग 8 हजार रुपये की लागत आई है. 2 घंटे में फुल चार्जउन्होंने बताया कि साइकिल में 24 वोल्ट की डीसी मोटर, लिथियम बैट्री, डबल चेन स्पॉकेट का इस्तेमाल किया गया है. इसके अलावा इसमें बैटरी चार्जिंग इंडिकेटर, हॉर्न, एक्सीलेटर और लाइट जैसी सुविधाएं भी दी गई हैं. इस इलेक्ट्रिक साइकिल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि बैटरी सिर्फ दो घंटे में फुल चार्ज हो जाती है और एक बार चार्ज होने पर करीब 30 किलोमीटर तक चल सकती है. साथ ही यदि रास्ते में बैटरी कम हो जाए तो इसे सामान्य साइकिल की तरह पैडल मारकर भी चलाया जा सकता है. अब ट्यूशन जाने में आधे से भी कम समय लगता हैउनकी बेटी पिंकी कुमारी ने बताया कि पहले साधारण साइकिल से ट्यूशन जाने में करीब आधा घंटा लग जाता था और काफी थकान होती थी. अब इलेक्ट्रिक साइकिल से आने-जाने में पंद्रह मिनट से भी कम समय लगता है और बिना थकान के सफर पूरा हो जाता है. About the Author Rajneesh Singh जी न्यूज, इंडिया डॉट कॉम, लोकमत, इंडिया अहेड, न्यूज बाइट्स के बाद अब न्यूज 18 के हाइपर लोकल सेगमेंट लोकल 18 के लिए काम कर रहा हूं. विभिन्न संस्थानों में सामान्य खबरों के अलावा टेक, ऑटो, हेल्थ और लाइफ स्टाइल बीट…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Kodarma,Jharkhand First Published : April 28, 2026, 20:38 IST Source link

झारखंड

Video: पेट्रोल पंप के पास कार की छत पर जला रहे थे...

हादसे का शिकार हुई कार उड़ीसा नंबर की है। कुछ लोग कार की छत पर पटाखे जला रहे थे। इन्हीं पटाखों की चिंगारी से कार में आग लग गई। अगर आग पर समय रहते काबू नहीं पाया जाता तो बड़ा हादसा हो सकता था। Source link

झारखंड

जमशेदपुर में रेलवे कर्मी की हत्या, बागबेड़ा लॉबी गेट पर बाइक सवारों...

जमशेदपुर में बागबेड़ा थाना क्षेत्र में सनसनीखेज घटना सामने आई है। यहां रेलवे लॉबी गेट के पास रविवार देर रात एक रेलवे कर्मी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मृतक जीके मीणा आदित्यपुर का निवासी था और रेलवे से जुड़े कार्यों के साथ-साथ जमीन कारोबार में भी सक्रिय था। Source link

झारखंड

मायके जाने की जिद कर रही थी पत्नी, पति ने कुल्हाड़ी से...

पत्नी की हत्या करने के बाद आरोपी पति उसके शव के साथ सोया रहा। सुबह होने पर उसने परिजनों को बताया कि उसने हत्या कर दी है। इसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। Source link

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