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झारखंड

गर्मियों में ग्लोइंग स्किन के लिए आजमाएं फ्रूट आइस थेरेपी, 15 मिनट...

X गर्मियों में ग्लोइंग स्किन के लिए आजमाएं फ्रूट आइस थेरेपी, मिनटों में होगा असर   अगर रोज-रोज फेस पैक बनाने का समय नहीं मिलता, तो फ्रूट आइस क्यूब फेस पैक एक आसान विकल्प हो सकता है. इसे बनाना भी बेहद आसान है. फ्रूट आइस क्यूब फेस पैक बनाने के लिए पपीता और कीवी को मैश कर लें. इसमें एक चम्मच शहद और थोड़ा चावल का आटा मिलाकर पेस्ट तैयार करें.अब इस मिश्रण को आइस ट्रे में डालकर फ्रीजर में जमा दें. शाम को एक क्यूब निकालकर चेहरे पर हल्के हाथों से रगड़ें और 10 से 15 मिनट बाद चेहरा धो लें. पपीता और कीवी में विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. शहद त्वचा को मुलायम रखने में मदद करता है. वहीं ठंडा आइस क्यूब चेहरे को ताजगी देने का काम करता है.यह आपकी स्किन को टोन और टाइट करने का काम भी करता है. ऐसा अगर आप 30 दिन लगातार करते हैं. तो यकीन मानिये, जिद्दी से जिद्दी दाग और टैनिंग चेहरे से खत्म हो जाएगी. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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पाकुड़ के महेशपुर स्वास्थ्य केंद्र में लंगूर ने मचाया उत्पात:दो लोगों को...

पाकुड़ जिले के महेशपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित स्वास्थ्य केंद्र परिसर में बुधवार को एक लंगूर ने जमकर उत्पात मचाया। लंगूर के अचानक कमरों में घुसने से मरीजों और उनके परिजनों में अफरातफरी मच गई। इस दौरान लंगूर ने दो लोगों को काटकर घायल कर दिया। लंगूर कई घंटों तक स्वास्थ्य केंद्र में उत्पात मचाता रहा, जिससे वहां भय का माहौल बन गया। मरीजों और आम जनता की सुरक्षा को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई की। स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत वन विभाग को घटना की सूचना दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की रेस्क्यू टीम के सदस्य अशराफुल शेख अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। रेस्क्यू टीम ने स्वास्थ्य केंद्र के कमरे में घुसकर उत्पात मचा रहे लंगूर को बड़ी सूझबूझ और सुरक्षित तरीके से काबू में किया। लंगूर को पकड़े जाने के दौरान भी वह काफी चीखता रहा। रेस्क्यू टीम के सदस्य अशराफुल शेख ने बताया कि लंगूर को काफी मशक्कत के बाद पकड़ा गया है। उन्होंने कहा कि लंगूर का स्वास्थ्य परीक्षण कराने के बाद उसे सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया जाएगा। फिलहाल, वो पूरी तरह से काबू में है। लंगूर के पकड़े जाने के बाद अस्पताल प्रशासन और मरीजों ने राहत की सांस ली। गौरतलब है कि इससे पहले भी जिला मुख्यालय में एक घायल लंगूर को रेस्क्यू टीम द्वारा बचाया गया था। Source link

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जीएम छत्रसाल सिंह कोडरमा पहुंचे, स्टेशन भवन का निरीक्षण किया:एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं...

पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के महाप्रबंधक (जीएम) छत्रसाल सिंह बुधवार को एक दिवसीय दौरे पर कोडरमा पहुंचे। उन्होंने निर्माणाधीन स्टेशन भवन का जायजा लिया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। यह भवन अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं से लैस होगा। इस दौरान धनबाद रेल मंडल प्रबंधक अखिलेश कुमार भी उनके साथ मौजूद रहे। जीएम ने स्पेशल सैलून से बंधुआ स्टेशन से लेकर कोडरमा स्टेशन तक का विंडो इंस्पेक्शन किया। निरीक्षण के बाद उन्होंने रेलवे गेस्ट हाउस में रेल अधिकारियों के साथ बैठक की और यात्री सुविधाओं पर विस्तार से चर्चा की। कोडरमा स्टेशन पर एयरपोर्ट जैसी आधुनिक सुविधाओं वाले भवन का निर्माण ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत किया जा रहा है। यह परियोजना अपने अंतिम चरण में है और इसका लोकार्पण जल्द होने की उम्मीद है। जीएम के निरीक्षण के दौरान कोडरमा-गया रेलखंड से बीओबीआरएम कोयला रैक को भी रवाना किया गया। यह विशेष कोयला रैक सामान्य मालगाड़ी के रैक से अधिक कोयला ले जाने में सक्षम है। जीएम छत्रसाल सिंह ने बताया कि धनबाद रेल मंडल में कई विकास कार्य प्रगति पर हैं। तीसरी और चौथी लाइन का निर्माण जारी है, जबकि कोडरमा-बरकाकाना रेलखंड के दोहरीकरण को भी स्वीकृति मिल गई है। जीएम ने कहा कि कोडरमा स्टेशन के नए भवन का लोकार्पण जल्द ही आम लोगों के लिए कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि कोडरमा-गया रेलखंड के बीच बना टनल 120 साल पुराना है। देश में बढ़ती ऊर्जा खपत को देखते हुए, इस रेल मार्ग से पावर प्लांट तक कम समय में अधिक से अधिक कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बीओबीआरएम कोयला वैगन की शुरुआत की गई है। Source link

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निर्जला एकादशी पर खाटू ही नहीं, रींगस के श्याम जी भी बनेंगे...

Last Updated:June 24, 2026, 17:37 IST Nirjala Ekadashi Celebration: निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर खाटूश्याम जी के साथ-साथ रींगस स्थित श्याम जी मंदिर में भी भव्य धार्मिक आयोजन की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं. इस विशेष अवसर पर श्याम बाबा का आकर्षक और दिव्य श्रृंगार किया जाएगा, जिसके लिए थाईलैंड से विशेष फूल मंगवाए जा रहे हैं. मंदिर परिसर को रंग-बिरंगे पुष्पों और आकर्षक सजावट से सजाया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक और भक्ति से भरा माहौल मिलेगा. आयोजन के दौरान श्याम बाबा को 56 प्रकार के व्यंजनों का विशेष भोग भी अर्पित किया जाएगा. निर्जला एकादशी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने विशेष व्यवस्थाएं की हैं. ख़बरें फटाफट KhatuShyam Ji: निर्जला एकादशी पर रींगस स्थित प्राचीन श्याम मंदिर में मेले का आयोजन होगा. यह मेला 25 और 26 जून को आयोजित होगा. मंदिर प्रशासन और श्री श्याम मंदिर कमेटी की ओर से श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए विशेष तैयारियां की गई हैं. मेले के दौरान बाबा श्याम का विशेष श्रृंगार किया जाएगा. मंदिर कमेटी के अनुसार, इस बार बाबा के दरबार को विदेशी फूलों से सजाने की तैयारी की गई है. इसके लिए थाईलैंड से विशेष फूल मंगवाए गए हैं. इन विदेशी फूलों से रींगस के बाबा श्याम का विशेष श्रृंगार किया जाएगा. इसके अलावा मंदिर की सजावट कार्य में दर्जनों बंगाली कारीगर कई दिनों से जुटे हुए हैं. श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए राजा पार्क से मंदिर तक विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं. गर्मी और संभावित वर्षा से बचाव के लिए मार्ग में छाया, पेयजल, पंखे, हवा और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था की गई है. वहीं भक्तों को राहत और शीतलता प्रदान करने के लिए उन पर ठंडे इत्र की फुहारें भी की जाएंगी. मंदिर प्रशासन का कहना है कि मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं. 56 पकवानों का लगेगा भोगप्राचीन श्याम मंदिर के पुजारियों ने बताया कि दो दिवसीय आयोजन के दौरान बाबा श्याम का विशेष श्रृंगार और आकर्षक झांकी सजाई जाएगी. देश-विदेश से मंगाए गए फूलों से गर्भगृह को भव्य रूप दिया जाएगा. साथ ही विशेष आरती का आयोजन होगा और बाबा को 56 प्रकार के पकवानों का भोग अर्पित किया जाएगा. श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण की भी विशेष व्यवस्था रहेगी. इसके अलावा श्याम भक्तों के निशानों की पूजा-अर्चना के लिए अलग से प्रबंध किए गए हैं. निशान पदयात्रा भी निकाली जाएगी श्री श्याम मंदिर कमेटी के तत्वावधान में भैरूंजी मोड़ स्थित श्री श्याम तोरण गेट से प्राचीन श्याम मंदिर तक विशाल निशान यात्रा निकाली जाएगी. यात्रा में 1100 से अधिक श्रद्धालु हाथों में निशान लेकर शामिल होंगे. यह पदयात्रा रींगस नगर के प्रमुख मार्गों और बाजारों से होकर मंदिर पहुंचेगी. मेले के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने और भीड़ प्रबंधन के लिए प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क रहेगा. About the Author Jagriti Dubey Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Sikar,Rajasthan Source link

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झारखंड के कुसुम की चटनी का स्वाद है लाजवाब, जानिए इसे बनाने...

X झारखंड के कुसुम की चटनी का स्वाद है लाजवाब,जानिए इसे बनाने का आसान देसी तरीका   झारखंड के जंगलों में गर्मियों के मौसम में मिलने वाला कुसुम फल स्वाद और पोषण के लिए खास पहचान रखता है. खट्टा, मीठा और हल्का तीखा स्वाद लिए यह फल ग्रामीण इलाकों में काफी पसंद किया जाता है. कुसुम फल का सबसे ज्यादा उपयोग इसकी स्वादिष्ट चटनी बनाने में किया जाता है. इसके लिए सबसे पहले फलों को अच्छी तरह धोकर उनका गूदा अलग कर लिया जाता है. फिर इसमें स्वादानुसार नमक, चीनी और मिर्च मिलाई जाती है। इसके बाद मिश्रण को अच्छी तरह मिलाने पर चटपटी कुसुम चटनी तैयार हो जाती है. इस चटनी में खट्टा, मीठा और तीखा स्वाद एक साथ मिलता है, जो इसे बेहद खास बनाता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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नौकरी छोड़ शुरू की नर्सरी, अब दे रहे जॉब:10 हजार से डेढ़...

धनबाद जिले के धोकरा निवासी अशोक मंडल ने सरकारी या निजी नौकरी की तलाश करने वाले युवाओं के विपरीत स्वरोजगार का मार्ग चुना। उन्होंने बैंक की नौकरी छोड़कर अपनी नर्सरी शुरू की, जो आज क्षेत्र में एक पहचान बना चुकी है। अशोक मंडल एसबीआई के जर्नल ऑफिस, बैंक मोड़ में मैसेंजर के पद पर कार्यरत थे। उन्हें प्रतिमाह लगभग 9200 रुपए वेतन मिलता था। करीब सात साल तक नौकरी करने के बाद, वर्ष 2014 में उन्होंने नौकरी छोड़कर अपना व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया। आज वो 5 लाख रुपए सलाना तक कमाई कर ले रहे हैं। नर्सरी चलाने का तरीका सीखा अशोक बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही खेती और पौधों से लगाव था। बैंक में काम करते हुए, एक कृषि प्रबंधक ने उन्हें पौधों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने प्रबंधक से बीज लगाने, पौधों की देखभाल, मिट्टी तैयार करने और नर्सरी चलाने के तरीके सीखे, जिसके बाद उन्होंने इस क्षेत्र में आगे बढ़ने का फैसला किया। वर्ष 2019 में अशोक मंडल ने छोटे स्तर पर नर्सरी की शुरुआत की। उन्होंने लगभग 10 हजार पौधे लगाए। अपनी कड़ी मेहनत और उचित देखभाल के कारण, उन्हें शुरुआती दौर में ही लगभग डेढ़ लाख रुपए का फायदा हुआ। इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे अपनी नर्सरी का विस्तार करना शुरू किया। 200 से अधिक किस्मों के पौधों उपलब्ध आज उनकी नर्सरी में डेढ़ लाख से अधिक पौधे मौजूद हैं। यहां फूलों, फलदार पेड़, औषधीय, सब्जियों और बागवानी से संबंधित विभिन्न प्रकार के पौधे उपलब्ध हैं। उनकी नर्सरी में 200 से अधिक किस्मों के पौधों की वैरायटी मिलती है। अशोक मंडल की नर्सरी अब केवल धनबाद जिले तक ही सीमित नहीं है। धनबाद के अलावा, जामताड़ा, रांची, गिरिडीह, गोड्डा, पाकुड़, हजारीबाग और डाल्टनगंज सहित कई जिलों से लोग यहां पौधे खरीदने और ऑर्डर देने आते हैं। यह नर्सरी कई लोगों को रोजगार भी प्रदान कर रही है। नर्सरी में 8 स्टाफ काम कर रहे नर्सरी के जरिए अशोक मंडल खुद आत्मनिर्भर बने ही हैं, साथ ही दूसरे लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं। वर्तमान में उनकी नर्सरी में करीब 8 लोग काम कर रहे हैं। वहीं, सीजन के समय यह संख्या बढ़कर 12 से 15 लोगों तक पहुंच जाती है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिल रहा है। हालांकि सफलता के बाद भी अशोक मंडल के सामने कुछ चुनौतियां हैं। उनका कहना है कि अभी तक उन्हें किसी तरह की सरकारी सहायता या सब्सिडी नहीं मिली है। सिंचाई के लिए बिजली की समस्या रहती है, जिससे पौधों की देखभाल प्रभावित होती है। अशोक मंडल की कहानी बताती है कि अगर मेहनत, सीखने की इच्छा और आत्मविश्वास हो तो सीमित संसाधनों के बावजूद खुद का रोजगार खड़ा किया जा सकता है और दूसरों को भी रोजगार दिया जा सकता है। Source link

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नौकरी छोड़ शुरू की नर्सरी, अब दे रहे जॉब:10 हजार से डेढ़...

धनबाद जिले के धोकरा निवासी अशोक मंडल ने सरकारी या निजी नौकरी की तलाश करने वाले युवाओं के विपरीत स्वरोजगार का मार्ग चुना। उन्होंने बैंक की नौकरी छोड़कर अपनी नर्सरी शुरू की, जो आज क्षेत्र में एक पहचान बना चुकी है। अशोक मंडल एसबीआई के जर्नल ऑफिस, बैंक मोड़ में मैसेंजर के पद पर कार्यरत थे। उन्हें प्रतिमाह लगभग 9200 रुपए वेतन मिलता था। करीब सात साल तक नौकरी करने के बाद, वर्ष 2014 में उन्होंने नौकरी छोड़कर अपना व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया। आज वो 5 लाख रुपए सलाना तक कमाई कर ले रहे हैं। नर्सरी चलाने का तरीका सीखा अशोक बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही खेती और पौधों से लगाव था। बैंक में काम करते हुए, एक कृषि प्रबंधक ने उन्हें पौधों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने प्रबंधक से बीज लगाने, पौधों की देखभाल, मिट्टी तैयार करने और नर्सरी चलाने के तरीके सीखे, जिसके बाद उन्होंने इस क्षेत्र में आगे बढ़ने का फैसला किया। वर्ष 2019 में अशोक मंडल ने छोटे स्तर पर नर्सरी की शुरुआत की। उन्होंने लगभग 10 हजार पौधे लगाए। अपनी कड़ी मेहनत और उचित देखभाल के कारण, उन्हें शुरुआती दौर में ही लगभग डेढ़ लाख रुपए का फायदा हुआ। इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे अपनी नर्सरी का विस्तार करना शुरू किया। 200 से अधिक किस्मों के पौधों उपलब्ध आज उनकी नर्सरी में डेढ़ लाख से अधिक पौधे मौजूद हैं। यहां फूलों, फलदार पेड़, औषधीय, सब्जियों और बागवानी से संबंधित विभिन्न प्रकार के पौधे उपलब्ध हैं। उनकी नर्सरी में 200 से अधिक किस्मों के पौधों की वैरायटी मिलती है। अशोक मंडल की नर्सरी अब केवल धनबाद जिले तक ही सीमित नहीं है। धनबाद के अलावा, जामताड़ा, रांची, गिरिडीह, गोड्डा, पाकुड़, हजारीबाग और डाल्टनगंज सहित कई जिलों से लोग यहां पौधे खरीदने और ऑर्डर देने आते हैं। यह नर्सरी कई लोगों को रोजगार भी प्रदान कर रही है। नर्सरी में 8 स्टाफ काम कर रहे नर्सरी के जरिए अशोक मंडल खुद आत्मनिर्भर बने ही हैं, साथ ही दूसरे लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं। वर्तमान में उनकी नर्सरी में करीब 8 लोग काम कर रहे हैं। वहीं, सीजन के समय यह संख्या बढ़कर 12 से 15 लोगों तक पहुंच जाती है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिल रहा है। हालांकि सफलता के बाद भी अशोक मंडल के सामने कुछ चुनौतियां हैं। उनका कहना है कि अभी तक उन्हें किसी तरह की सरकारी सहायता या सब्सिडी नहीं मिली है। सिंचाई के लिए बिजली की समस्या रहती है, जिससे पौधों की देखभाल प्रभावित होती है। अशोक मंडल की कहानी बताती है कि अगर मेहनत, सीखने की इच्छा और आत्मविश्वास हो तो सीमित संसाधनों के बावजूद खुद का रोजगार खड़ा किया जा सकता है और दूसरों को भी रोजगार दिया जा सकता है। Source link

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तारातला गोदाम हादसा: 20 हजार वर्गफुट का मलबा, लोहे के भारी बीम...

Last Updated:June 24, 2026, 16:28 IST कोलकाता के तारातला में निर्माणाधीन गोदाम गिरने से बड़ा हादसा हुआ है. मलबे के नीचे दबे मजदूरों की चीखें राहतकर्मियों को झकझोर रही हैं. सेना और एनडीआरएफ की टीमें बचाव कार्य में जुटी हैं. अब तक 14 घायलों को निकाला गया है. रात भर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी होने की संभावना है. घटनास्थल पर भारी अफरा-तफरी और अपनों को खोने का डर बना हुआ है. ख़बरें फटाफट तारातला में गिरा निर्माणाधीन गोदाम: मलबे के नीचे से आ रही हैं मजदूरों की सिसकियां, रात भर चलेगा रेस्क्यू ऑपरेशन. कोलकाता के तारातला इलाके में बुधवार दोपहर उस समय मातम पसर गया. जब एक निर्माणाधीन गोदाम की विशाल छत अचानक भरभरा कर गिर गई. लगभग 20 हजार वर्गफुट में फैला यह गोदाम पल भर में मलबे के ढेर में तब्दील हो गया. मलबे के नीचे से लगातार आ रही मजदूरों की दर्दनाक चीखें वहां मौजूद हर इंसान का दिल दहला रही हैं. घटनास्थल पर कंक्रीट और लोहे के भारी बीम के नीचे जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे मजदूरों को बचाने के लिए सेना, एनडीआरएफ और दमकल विभाग की टीमें जान की बाजी लगाकर जुटी हैं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Kolkata,West Bengal Source link

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न क्रीम, न फेशियल, बर्फ वाले पानी की ये आसान ट्रिक दिला...

X न क्रीम, न फेशियल, बर्फ वाले पानी की ये आसान ट्रिक दिला सकता है ग्लोइंग स्किन   अगर आप लंबे समय तक त्वचा को जवां और ताजा बनाए रखना चाहते हैं, तो एक आसान घरेलू तरीका आपकी मदद कर सकता है. ब्यूटी एक्सपर्ट कविता के अनुसार, सुबह ठंडे पानी या बर्फ वाले पानी में चेहरा डुबाने से त्वचा फ्रेश दिख सकती है.इसके लिए एक बड़े बर्तन में ठंडा पानी लें. चाहें तो उसमें कुछ आइस क्यूब भी डाल सकते हैं. इसके बाद चेहरे को कुछ सेकंड के लिए पानी में डुबोएं और बाहर निकालें. इस प्रक्रिया को कई बार दोहराया जा सकता है. उनके मुताबिक, ठंडा पानी चेहरे को ताजगी देने में मदद करता है और मेकअप से पहले करने पर त्वचा अधिक फ्रेश नजर आ सकती है. खासकर 25 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं इसे अपनी स्किन केयर रूटीन में शामिल कर सकती हैं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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चाईबासा में विवाहिता ने लगाई फांसी, मौत:दो माह से रह रही थी...

पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी थाना क्षेत्र की हरिजन बस्ती में 26 वर्षीय मनीषा मुखी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। यह घटना मंगलवार देर शाम की है। बुधवार को पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए चाईबासा के सदर अस्पताल भेजा और मामले की जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, मनीषा मुखी पिछले डेढ़ से दो माह से अपने परिवार से अलग किसी अन्य व्यक्ति के साथ रह रही थीं। उनके पति गुरुवा मुखी ने बच्चों के भविष्य को देखते हुए उन्हें वापस लाने का प्रयास किया। गुरुवा ने इस संबंध में सदर थाना में लिखित आवेदन भी दिया था। थाना में दोनों पक्षों के बीच समझौता होने के बाद मंगलवार को ही गुरुवा अपनी पत्नी को घर वापस लाए थे। पति गुरुवा मुखी ने बताया कि घर लौटने के बाद मनीषा परेशान दिख रही थीं। घटना से कुछ समय पहले मनीषा ने ही उन्हें बाजार जाने के लिए कहा। उन्होंने अपना एटीएम कार्ड देते हुए कहा कि पैसे निकाल कर बच्चों के लिए कुछ खाने-पीने का सामान लेते आएं। गुरुवा मुखी के अनुसार, जब वह बाजार में थे, तभी पड़ोसियों ने फोन पर उन्हें घटना की सूचना दी। सूचना मिलते ही वह घर पहुंचे। परिजनों और स्थानीय लोगों की मदद से मनीषा को तत्काल नोवामुंडी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। मनीषा और गुरुवा मुखी की शादी करीब दस वर्ष पहले हुई थी और उनके दो बच्चे हैं। पति ने बताया कि बच्चों की खातिर उन्होंने पत्नी को समझाकर घर वापस लाने का प्रयास किया था। हालांकि, घर लौटने के कुछ ही घंटों बाद मनीषा ने दुपट्टे के सहारे फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने यूडी केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। Source link

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