भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

Author name: scsmdos@gmail.com

झारखंड

राजस्थान का चूरमा, लखनऊ की चिकनकारी और जयपुरी ड्रेस..देवघर में सजा देशभर...

Last Updated:June 17, 2026, 19:22 IST देवघर के शिवलोक परिसर में इन दिनों 15 राज्यों का हस्तशिल्प मेला लोगों को आकर्षित कर रहा है. मेले में लखनऊ की मशहूर चिकनकारी, जयपुरी सूट, सहारनपुर की लकड़ी की कलाकृतियां समेत कई पारंपरिक उत्पाद उपलब्ध हैं. खास बात यह है कि यहां खरीदारी की शुरुआत सिर्फ 200 रुपये से हो रही है. कम कीमत और एक ही जगह पर कई राज्यों के उत्पाद मिलने के कारण बड़ी संख्या में लोग मेले में पहुंच रहे हैं. देवघर: पूरे आठ साल बाद देवघर के लोगों को एक बार फिर शानदार खरीदारी का मौका मिला है. अगर आप कम कीमत में बेहतरीन और देश के अलग-अलग राज्यों के मशहूर उत्पाद खरीदना चाहते हैं, तो शिवलोक परिसर में आयोजित हस्तशिल्प उत्सव मेला आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है. यहां एक ही स्थान पर देश के 15 राज्यों के प्रसिद्ध उत्पाद उपलब्ध हैं. मेले में रोजाना बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं और जमकर खरीदारी कर रहे हैं. लोगों के बीच भी आकर्षण का केंद्रखास बात यह है कि यहां मिलने वाले कई सामान बाजार की तुलना में अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध हैं, जिससे आम लोगों को भी बेहतर खरीदारी का अवसर मिल रहा है. मेले का माहौल पूरी तरह रंग-बिरंगा और आकर्षक नजर आ रहा है. यहां विभिन्न राज्यों की संस्कृति, कला और हस्तशिल्प की अनूठी झलक देखने को मिल रही है. यही कारण है कि यह मेला स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों के लोगों के बीच भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. शिवलोक परिसर में लगा हस्तशिल्प उत्सव मेलादेवघर के शिवलोक परिसर में 14 जून से हस्तशिल्प उत्सव मेले का आयोजन शुरू हुआ है, जो 5 जुलाई तक चलेगा. मेले के आयोजक लखनऊ निवासी सुनील शर्मा ने बताया कि इस बार देश के लगभग 15 राज्यों के कारीगर और व्यापारी अपने-अपने राज्यों के प्रसिद्ध उत्पाद लेकर देवघर पहुंचे हैं. ऐसे में लोगों को अलग-अलग राज्यों में जाकर खरीदारी करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यहां एक ही जगह पर कई राज्यों की खास वस्तुएं उपलब्ध हैं. मेले में लखनऊ की मशहूर चिकनकारी के परिधान, सहारनपुर की लकड़ी से बनी आकर्षक सजावटी वस्तुएं, राजस्थान का प्रसिद्ध चूरमा और अन्य कई पारंपरिक उत्पाद लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं. लगभग हर स्टॉल पर खरीदारों की भीड़ देखने को मिल रही है. 200 रुपये से शुरू हो रही है चिकनकारी कुर्तीमेले में महिलाओं के लिए खरीदारी के कई आकर्षक विकल्प मौजूद हैं. यहां मात्र 200 रुपये से कुर्तियां उपलब्ध हैं. इसके अलावा जयपुरी कॉटन ड्रेस, दिल्ली के स्टाइलिश शरारे, राजस्थानी सूट, जयपुरी प्रिंट की कुर्तियां, लखनऊ की चिकनकारी और कई तरह के फैशनेबल परिधान बिक्री के लिए रखे गए हैं. कपड़ों की कीमत 200 रुपये से लेकर 1800 रुपये तक है, जिससे हर वर्ग के लोग अपने बजट के अनुसार खरीदारी कर सकते हैं. महिलाओं और युवतियों में इन स्टॉलों को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है. कपड़ों के अलावा हस्तनिर्मित सजावटी सामान, घरेलू उपयोग की वस्तुएं और पारंपरिक उत्पाद भी लोगों को आकर्षित कर रहे हैं. 5 जुलाई तक चलेगा मेलामेले का संचालन प्रतिदिन सुबह करीब 11:30 बजे से शुरू होकर रात 9 बजे तक होता है. शाम के समय यहां सबसे अधिक भीड़ देखने को मिल रही है. परिवार के साथ आने वाले लोग खरीदारी के साथ-साथ मेले के माहौल का भी आनंद उठा रहे हैं. आयोजकों का कहना है कि इस मेले का उद्देश्य देश के विभिन्न हिस्सों की कला और हस्तशिल्प को लोगों तक पहुंचाना है, ताकि कारीगरों को बेहतर बाजार मिल सके और ग्राहकों को उचित कीमत पर गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपलब्ध हो सकें. ऐसे में यदि आप भी कुछ खास, पारंपरिक और किफायती सामान खरीदना चाहते हैं, तो 5 जुलाई तक चलने वाले इस हस्तशिल्प उत्सव मेले का जरूर रुख कर सकते हैं. About the Author Amita kishor न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Deoghar,Jharkhand Source link

झारखंड

झारखंड के 70 हजार सिपाहियों को मिलेगा एसीपी का लाभ

झारखंड के करीब 70 हजार कांस्टेबल कैडर के सिपाहियों और हवलदारों को एसीपी (एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन) का लाभ मिलेगा। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की कोर्ट ने इसके खिलाफ सरकार की अपील याचिका खारिज कर दी। राज्य सरकार ने एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों के वकील दिवाकर उपाध्याय ने बताया​ कि हाईकोर्ट के तत्कालीन जस्टिस अंबुज नाथ की कोर्ट ने 16 अगस्त 2024 को डीजीपी द्वारा सिपाहियों के लिए एसीपी लाभ के लिए लगाई गई तीनों शर्तों को निरस्त कर दिया था। साथ ही इन्हें समय से इसका लाभ देने का निर्देश दिया था। वेतन-पेंशन में मिलेगा लाभ एसीपी के तहत किसी कर्मचारी को लंबे समय से प्रोन्नति नहीं मिलती है, तो उसे निर्धारित सेवा अवधि पूरी होने पर उच्च वेतनमान और ग्रेड पे का लाभ दिया जाता है। इससे कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और अन्य वित्तीय लाभ बढ़ जाते हैं। वेतन-पेंशन में काफी फायदा होगा। Source link

झारखंड

बच्चों को योग-ध्यान से जोड़ने पर दिया जोर

विश्व योग दिवस के संदर्भ में गुरुदेव श्रीश्री रवि शंकर ने कहा कि योग को केवल आसन और शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित करना उसके व्यापक अर्थ को घटा देता है। उनके अनुसार योग मन, बुद्धि और चेतना को परिष्कृत करने का विज्ञान है। गुरुदेव ने कहा, सम्मान का अर्थ है वर्तमान क्षण के प्रति सजगता और कृतज्ञता; यही उपस्थिति साधना को गहराई देती है। उन्होंने बच्चों को कम उम्र से योग-ध्यान से जोड़ने और नियमित अभ्यास पर जोर दिया। Source link

ताज़ा खबर

सही समय पर खुल गया होर्मुज! वरना हो जाती दिक्‍कत, सरकारी एजेंसी...

Last Updated:June 17, 2026, 18:14 IST Oil Reserve : अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्ति और होर्मुज खुलने की खबरों के बीच आई एक रिपोर्ट में कई खुलासा किया गया है. इसमें बताया गया है कि सही समय पर होर्मुज खुल गया और तेल को लेकर आने वाला संकट टल गया. भारत के पास रणनीतिक रिजर्व महज 9 से 10 दिन का ही बचा है, क्‍योंकि उसका ज्‍यादातर आयात 6 देशों पर सीमित है. देश के पास क्रूड का कुल रणनीतिक भंडार 10 दिन का ही बचा है. नई दिल्‍ली. ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौता फाइनल होने के बाद इसी शुक्रवार से होर्मुज को खोलने की तैयारी है. इस बीच आई एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारत के पास रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार देश रोजाना आयात के 10 दिन के बराबर ही बचा है. इससे पता चलता है कि होर्मुज का रास्‍ता बिलकुल सही समय पर खुल गया. अगर यह संघर्ष लंबा चलता तो देश के सामने पेट्रोलियम उत्‍पादों का संकट पैदा हो सकता था. ऊर्जा, पर्यावरण एवं जल परिषद (सीईईडब्ल्यू) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में बताया है कि भारत का मौजूदा रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार देश के शुद्ध कच्चे तेल के आयात का केवल नौ से 10 दिन की जरूरत के बराबर बचा है. यह आयात पर निर्भर अन्य प्रमुख देशों की तुलना में काफी कम है. रिपोर्ट में कहा गया कि कच्चे तेल के आयात पर अत्यधिक निर्भर अन्य देश जैसे जापान और दक्षिण कोरिया अपने पास 200 दिन से अधिक की जरूरत के बराबर भंडार बनाए रखते हैं. 85 फीसदी तेल खरीद 6 देशों सेपरिषद ने ‘हाउ सिक्योर इज इंडियाज एनर्जी फ्यूचर? असेसिंग एक्सेसिबिलिटी, रिलायबिलिटी एंड अफोर्डेबिलिटी’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में बताया है कि भारत के कच्चे तेल के आयात का 85 फीसदी से अधिक हिस्सा रूस और प्रमुख पश्चिम एशियाई देशों सहित केवल छह देशों से आता है. इससे आपूर्ति में किसी भी प्रकार के व्यवधान या झटके से निपटने की क्षमता सीमित हो जाती है. भारत ने अपनी विविधता पर काम तो किया है, लेकिन अभी वहां से आयात बहुत सीमित मात्रा में होता है. यही वजह है कि हालिया संकट में भारत को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. कहां दिखेगा इसका असरसीईईडब्ल्यू में फेलो हेमंत माल्या ने बताया कि कच्चे तेल, तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी), एलपीजी, कोयले या प्रमुख समुद्री परिवहन मार्गों में व्यवधान का असर तेजी से रसोई गैस की लागत, परिवहन ईंधन की कीमतों, उर्वरक सब्सिडी, औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता और मुद्रास्फीति पर पड़ सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, गैस क्षेत्र में भारत अपनी कुल आवश्यकता का लगभग आधा हिस्सा एलएनजी आयात के माध्यम से पूरा करता है, लेकिन देश में गैस के लिए कोई समर्पित रणनीतिक भंडारण सुविधा नहीं है. इससे उर्वरक संयंत्रों और शहरी गैस वितरण नेटवर्क पर जोखिम बढ़ जाता है कोयला सुरक्षा पर भी संकटरिपोर्ट में कहा गया है कि इस्पात उत्पादन के लिए आयातित कोकिंग कोयले, विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया से आयात पर निर्भरता और गैर-कोकिंग कोयले के आयात के मामले में इंडोनेशिया की निर्यात नीतियों के प्रति संवेदनशीलता से देश की कोयला सुरक्षा पर भी असर पड़ रहा है. घरेलू स्तर पर कोयले की गुणवत्ता में गिरावट और उत्पादन लागत में वृद्धि से कोयला आधारित बिजली उत्पादन की लागत संबंधी बढ़त स्थिर नवीकरणीय ऊर्जा की तुलना में कम होती जा रही है. About the Author Pramod Kumar Tiwari प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

झारखंड

झारखंड राज्यसभा चुनाव में कौन मारेगा बाजी? सीटों का गणित और विधायकों...

रांची. झारखंड में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है. दो सीटों के लिए होने वाले इस चुनाव में मुकाबला दिलचस्प हो गया है, क्योंकि मैदान में तीन उम्मीदवार हैं. सत्ताधारी महागठबंधन की ओर से झामुमो के बैद्यनाथ राम और कांग्रेस के प्रणव झा उम्मीदवार हैं, जबकि एनडीए ने निर्दलीय उम्मीदवार और उद्योगपति परिमल नाथवानी को समर्थन दिया है. हालांकि इस बार राज्यसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा और निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के बीच माना जा रहा है. चुनाव से ठीक पहले सभी दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने में जुट गए हैं. सूत्रों के मुताबिक एनडीए अपने सभी 24 विधायकों को रांची के एक होटल में ठहराने की तैयारी कर रहा है, ताकि मतदान से पहले किसी तरह की टूट-फूट या क्रॉस वोटिंग की संभावना को रोका जा सके. आखिर कितना है जीत का आंकड़ा? झारखंड विधानसभा की मौजूदा स्थिति को देखें तो राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए किसी उम्मीदवार को लगभग 27 से 28 प्रथम वरीयता (फर्स्ट प्रेफरेंस) वोटों की जरूरत होती है. यही वजह है कि इस चुनाव का पूरा गणित विधायकों की संख्या पर टिका हुआ है. समझिए सीटों का पूरा गणित इस बार राज्यसभा चुनाव में सबसे मजबूत स्थिति में जेएमएम है. महागठबंधन के भीतर विधानसभा सीटों का मौजूदा गणित इस प्रकार है- झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM): 34 विधायक (यानी जेएमएम को अपने एक उम्मीदवार को जिताने के लिए जरूरी 28 वोटों के बाद भी उसके पास 6 अतिरिक्त (Surplus) वोट बच रहे हैं). कांग्रेस: 16 विधायक, राष्ट्रीय जनता दल (RJD): 04 विधायक और भाकपा माले (CPIML): 02 विधायक. यदि जेएमएम अपने 6 अतिरिक्त वोट कांग्रेस को ट्रांसफर कर देती है, और आरजेडी (4) एवं माले (2) के विधायक भी कांग्रेस के पक्ष में मतदान करते हैं, तो कांग्रेस का कुल आंकड़ा (16 + 6 + 4 + 2 = 28) बिल्कुल जादुई आंकड़े तक पहुंच जाएगा. बैद्यनाथ राम की स्थिति क्यों मजबूत? झामुमो के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम की जीत लगभग तय मानी जा रही है. इसकी वजह झामुमो का अपना मजबूत संख्या बल है. विधानसभा में जेएमएम (34 सीटें) के पास इतनी ताकत है कि वह अपने उम्मीदवार को आराम से राज्यसभा भेज सकती है. यानी पहली सीट पर मुकाबले की स्थिति लगभग नहीं है और सभी की नजर दूसरी सीट पर टिकी हुई है. कांग्रेस उम्मीदवार के सामने चुनौती महागठबंधन ने दूसरी सीट कांग्रेस के खाते में दी है और प्रणव झा को उम्मीदवार बनाया है. लेकिन, यहीं से मुकाबला रोचक हो जाता है. कांग्रेस को अपने सहयोगी दलों के समर्थन के बावजूद वोटों का पूरा प्रबंधन करना होगा. दूसरी ओर एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी इस सीट को लेकर पूरी ताकत झोंक चुके हैं. परिमल नाथवानी के पास कितने वोट? एनडीए के पास फिलहाल 24 विधायक हैं. यदि सभी विधायक एकजुट होकर मतदान करते हैं तो भी नाथवानी जीत के आंकड़े से कुछ वोट पीछे रह जाते हैं. राजनीतिक जानकारों के अनुसार उन्हें जीत सुनिश्चित करने के लिए करीब 3 से 4 अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता पड़ सकती है. यही वजह है कि चुनाव से पहले क्रॉस वोटिंग की चर्चाएं तेज हो गई हैं. एनडीए की नजर महागठबंधन के उन विधायकों पर मानी जा रही है, जो किसी कारणवश असंतुष्ट बताए जाते हैं. क्या क्रॉस वोटिंग बदल सकती है खेल? राज्यसभा चुनाव में मतदान गुप्त नहीं होता, लेकिन प्राथमिकता आधारित मतदान की व्यवस्था कई बार राजनीतिक समीकरण बदल देती है. ऐसे में यदि कुछ विधायक पार्टी लाइन से हटकर मतदान करते हैं तो दूसरी सीट का परिणाम पूरी तरह बदल सकता है. राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि इस चुनाव में असली मुकाबला कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा और एनडीए समर्थित परिमल नाथवानी के बीच है. विधायकों की घेराबंदी क्यों? इसी संभावित क्रॉस वोटिंग को रोकने के लिए सभी दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश कर रहे हैं. सूत्रों के अनुसार एनडीए ने अपने विधायकों के लिए रांची के रेडिसन ब्लू होटल में 32 कमरे बुक कराए हैं. उधर महागठबंधन भी अपने विधायकों पर नजर बनाए हुए है और किसी तरह की टूट-फूट की संभावना को खत्म करने में जुटा है. क्या कहते हैं राजनीतिक संकेत? संख्या बल के आधार पर देखें तो पहली सीट झामुमो उम्मीदवार बैद्यनाथ राम के पक्ष में दिखाई देती है. लेकिन, दूसरी सीट पर तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है. यदि एनडीए अतिरिक्त 3-4 वोट जुटाने में सफल रहता है तो परिमल नाथवानी मुकाबले को पलट सकते हैं. यही कारण है कि 18 जून को होने वाला मतदान सिर्फ दो सीटों का चुनाव नहीं, बल्कि झारखंड की बदलती राजनीतिक रणनीतियों और विधायकों की निष्ठा की भी परीक्षा माना जा रहा है. सभी की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या परिमल नाथवानी आवश्यक अतिरिक्त वोट जुटा पाते हैं या महागठबंधन अपनी दोनों सीटें सुरक्षित रखने में सफल रहता है. Source link

झारखंड

चतरा में 1.60 लाख की अवैध शराब जब्त:कार से बिहार ले जा...

चतरा पुलिस ने 17 पेटी (कुल 408 बोतल) अंग्रेजी शराब बरामद किया है। दो तस्कर शराब की इस खेप को कार से ‘ड्राई स्टेट’ बिहार ले जा रहे थे। इसकी कीमत 1 लाख 60 हजार रुपए आंकी गई है। यह कार्रवाई संघरी घाटी के रास्ते की गई, जहां से शराब बिहार भेजी जा रही थी। पुलिस ने तस्करी में इस्तेमाल की जा रही एक कार को जब्त किया है। इस दौरान एक तस्कर को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि दूसरा तस्कर अंधेरे का फायदा उठाकर फरार होने में सफल रहा। पकड़े गए आरोपी की पहचान राजपुर थाना क्षेत्र के हरहद गांव निवासी सोनू कुमार यादव के रूप में हुई है। पुलिस फरार तस्कर पवन कुमार यादव की तलाश कर रही है और मामले की आगे की जांच जारी है। पुलिस को भनक लगी थी कि रात के अंधेरे में चतरा से अवैध विदेशी शराब की एक बड़ी खेप कार के जरिए बिहार ले जाई जाने वाली है। पुलिस ने सघन वाहन चेकिंग अभियान शुरू किया। रात करीब 11:15 बजे चतरा शहर की ओर से एक सिल्वर रंग की कार आती दिखी। पुलिस टीम ने जब कार को रुकने का इशारा किया, तो रुकते ही उसमें सवार दो व्यक्ति भागने लगे। जवानों ने फुर्ती दिखाते हुए एक को खदेड़ कर दबोच लिया, जबकि उसका साथी पवन कुमार यादव अंधेरे और जंगल का फायदा उठाकर भागने में सफल रहा। Source link

झारखंड

गिरिडीह में पूरनानगर में सब्जी दुकान और कार जली:ग्रामीणों ने CCTV फुटेज...

गिरिडीह के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के पूरनानगर गांव में बुधवार देर रात आगजनी की घटना हुई। इस घटना में एक सब्जी दुकान और पास खड़ी एक कार जलकर राख हो गई। ग्रामीणों ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर एक आरोपी को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। यह घटना देर रात करीब दो बजे हुई। अज्ञात व्यक्ति द्वारा लगाई गई आग से एक सब्जी दुकान पूरी तरह जल गई। वहीं, पास में खड़ी अर्जुन पंडित की कार भी आग की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गई। स्थानीय लोगों ने आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक दुकान जल चुकी थी। आक्रोशित ग्रामीणों ने आरोपी को पकड़ लिया घटना के बाद गुरुवार को आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। फुटेज में गांव निवासी बाजो पंडित की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं। इसके बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने आरोपी बाजो पंडित को पकड़ लिया और बिजली के पोल से बांधकर विरोध प्रदर्शन किया। सूचना मिलने पर मुफस्सिल थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने ग्रामीणों के कब्जे से आरोपी को छुड़ाया और हिरासत में लेकर थाने ले गई, जहां उससे पूछताछ की जा रही है। दान पेटी चोरी करने का आरोप लग चुका है ग्रामीणों ने बताया कि आरोपी बाजो पंडित की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं है। उस पर पहले भी गांव के मंदिर की दान पेटी चोरी करने का आरोप लग चुका है। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है। इस आगजनी से पीड़ित परिवार को लाखों का आर्थिक नुकसान हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित को उचित मुआवजा देने और मामले में निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है। पुलिस ने कहा है कि जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। Source link

ताज़ा खबर

Explainer: 11 बार G7 की मीटिंग में जा चुका भारत लेकिन वो...

2026 का 52वां G7 शिखर सम्मेलन फ्रांस के एवियन-ले-बैंस शहर में हो रहा है. भारत को पहली बार अतिथि देश के तौर पर वर्ष 2003 में इसमें आमंत्रण मिला था. तब भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई इसमें गए थे. तब भारत 11 बार इसमें हिस्सा ले चुका है. लेकिन आखिर वो कौन सी वजहें हैं कि वो इस टॉप ग्लोबल ग्रुप का सदस्य नहीं बन सकता. G7 उन्नत अर्थव्यवस्थाओं का एक विशिष्ट क्लब है, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान शामिल हैं. बेशक भारत G20 का एक प्रमुख सदस्य है, लेकिन ऐतिहासिक, आर्थिक और रणनीतिक वजहों से इसे G7 में शामिल नहीं किया गया है. वो 7 वजहें जिससे भारत नहीं सदस्य 1. आर्थिक गतिशीलता – ऐतिहासिक रूप से G7 महत्वपूर्ण औद्योगिक शक्ति और तकनीकी प्रगति के साथ उन्नत अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों का समूह वाले देशों के साथ बनाया गया था. हालांकि भारत हालांकि तेजी से विकास कर रहा है लेकिन इसकी प्रति व्यक्ति आय कम है. साथ ही उसे सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों का सामना भी करना पड़ता है जो इसे G7 सदस्य देशों से अलग करती है. वो इन मामलों में भारत से बहुत आगे हैं. 2. गुटनिरपेक्ष आंदोलन की विरासत – शीत युद्ध के दौरान भारत गुटनिरपेक्ष आंदोलन का एक प्रमुख सदस्य था, जिसने संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ के बीच महाशक्ति प्रतिद्वंद्विता से दूरी बनाए रखने की मांग की थी. इस रुख ने बहुपक्षीय मंचों और गठबंधनों के प्रति भारत के दृष्टिकोण को आकार दिया, इसकी वजह से भी ये जी7 का सदस्य नहीं है. (AI Photo) 3. ये जी7 देशों से अलग है – भारत का आर्थिक महत्व और कूटनीतिक प्रभाव बेशक बढ़ रहा है लेकिन इसका विकास पथ अन्य G7 देशों से अलग है. विकास का रास्ता और आर्थिक संरचना भी उसके G7 से बाहर रहने की वजह है. 4. रणनीतिक संबंध – अन्य देशों के साथ भारत के रणनीतिक संबंध, विशेष रूप से एशिया-प्रशांत क्षेत्र में, जी7 सदस्य देशों से अलग तरह के हैं. इससे G7 में सदस्यता के बजाय क्षेत्रीय और द्विपक्षीय गठबंधनों पर ध्यान केंद्रित होता है. 5. ऐतिहासिक तनाव और प्राथमिकताएं- G7 ने ऐतिहासिक रूप से आर्थिक स्थिरता और विकास जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया है, जो जरूरी नहीं कि भारत की प्राथमिकताओं के साथ मेल खाता हो. ये भी एक सदस्य बनने में बाधा है. 6. मानव विकास सूचकांक – भारत मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) के मामले में जी7 सदस्य देशों से पीछे है, जो जीवन प्रत्याशा, शिक्षा और आय जैसे कारकों को मापता है. एचडीआई स्कोर में यह असमानता भारत के जी7 से बाहर होने की एक और वजह है. 7. प्रति व्यक्ति जीडीपी – भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी और प्रति व्यक्ति संपत्ति जी7 सदस्य देशों की तुलना में काफी कम है. G7 देशों की औसत नाममात्र जीडीपी प्रति व्यक्ति आय लगभग $45,000 है, जबकि भारत की प्रति व्यक्ति आय लगभग $2,000 है. G7 से भारत जैसी महत्वपूर्ण उभरती अर्थव्यवस्थाओं की अनुपस्थिति वैश्विक शासन की वैधता पर सवाल उठाती है. G7 की सदस्यता के विस्तार में भारत जैसे देशों की मौजूदगी इसकी विश्वसनीयता को बढ़ा सकती है. क्या भारत की सदस्यता के संकेत हैं ऊपर जो 07 कारण हैं, वो तो अपनी जगह हैं लेकिन इसके बाद भी भारत का G7 के सदस्य बनने का दावा मजबूत है. 2019 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने जी7 में चीन, भारत और तुर्की को इसमें शामिल करने का समर्थन किया था. अब तो खैर रूस ही इसका सदस्य नहीं है. अमेरिका भी चाहता है कि ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, भारत और दक्षिण कोरिया को इसमें शामिल किया जाए. अगर भारत इसमें शामिल हो तो क्या फायदा दुनिया में असर बढ़ेगा – G7 में सदस्यता से भारत का वैश्विक प्रभाव और प्रतिनिधित्व बढ़ेगा, जिससे उसे वैश्विक आर्थिक नीतियों, सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय चुनौतियों पर होने वाली प्रमुख चर्चाओं में भाग लेने की अनुमति मिलेगी. आर्थिक अवसर – आर्थिक अवसर बढ़ेंगे. खासकर व्यापार से लेकर नए दौर के तमाम मोर्चों पर. इसमें साझेदारी और निवेश भी शामिल हैं. रणनीतिक साझेदारी – G7 में भारत की सदस्यता संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी और जापान जैसे देशों के साथ इसकी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करेगी. ऊर्जा सुरक्षा – रूस से रियायती तेल खरीदकर और फिर यूरोप को परिष्कृत ईंधन की आपूर्ति करके यूरोपीय ऊर्जा संकट को हल करने में भारत की भूमिका को G7 सदस्यता के माध्यम से औपचारिक रूप दिया जा सकता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में इसकी स्थिति और मजबूत होगी. वैश्विक शासन – जी7 में भारत का शामिल होना अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण वैश्विक शासन में योगदान दे सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की वैधता और वैश्विक चुनौतियों से निपटने की उनकी क्षमता के बारे में चिंताओं का समाधान हो सकेगा. विकास और क्षमता निर्माण – G7 में भारत की सदस्यता विशेष रूप से शिक्षा, कौशल विकास और बुनियादी ढांचे के विकास जैसे क्षेत्रों को सुविधाजनक बना सकती है. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में वृद्धि – G7 में भारत की भागीदारी से जलवायु परिवर्तन, महामारी की रोकथाम और वैश्विक खाद्य सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा मिलेगा, जिससे इसे वैश्विक समाधानों में योगदान करने और साझा ज्ञान और विशेषज्ञता से लाभ उठाने की अनुमति मिलेगी. राजनयिक प्रभाव बढ़ेगा – G7 में भारत की सदस्यता उसके राजनयिक प्रभाव को बढ़ाएगी, जिससे वह अंतरराष्ट्रीय मंचों और वार्ताओं, विशेष रूप से व्यापार, सुरक्षा और विकास जैसे क्षेत्रों में अधिक प्रभावी ढंग से शामिल हो सकेगा. आर्थिक विकास में वृद्धि – जी7 में भारत के शामिल होने से आर्थिक विकास में वृद्धि हो सकती है, जिससे एक प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्था के रूप में इसकी स्थिति और मजबूत होगी. कब हुई जी7 की शुरुआत 25 मार्च 1973 को इस संगठन की शुरुआत हुई थी. तब ये 06 सदस्य देशों का समूह था. उसके अगले साल कनाडा इसमें शामिल हुआ. साल 1998 में इस समूह में रूस भी शामिल हो गया था और यह जी-7 से जी-8 बन गया था. प्रत्येक सदस्य देश बारी-बारी से इस समूह की अध्यक्षता करता है और दो दिवसीय वार्षिक शिखर सम्मेलन की मेजबानी करता है. क्यों हटाया गया रूस शुरुआत में रूस भी इस संगठन का हिस्सा था

झारखंड

ग्रेजुएशन में एडमिशन के लिए NPU ने जारी किया शेड्यूल, इस तारीख...

Last Updated:June 17, 2026, 17:09 IST नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय (एनपीयू) में शैक्षणिक सत्र 2026-30 के लिए स्नातक नामांकन प्रक्रिया 16 जून से शुरू हो गई है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसकी तैयारियां पूरी कर ली हैं. नामांकन के लिए चांसलर पोर्टल 16 जून से 16 जुलाई तक खुला रहेगा. इस दौरान छात्र-छात्राएं ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे. विश्वविद्यालय ने छात्रों से समय रहते रजिस्ट्रेशन करने की अपील की है. प्रशासन का कहना है कि निर्धारित अवधि के भीतर आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों का नामांकन प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा. पलामू: नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय (एनपीयू) में शैक्षणिक सत्र 2026-30 के लिए स्नातक नामांकन प्रक्रिया 16 जून से शुरू हो रही है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने नामांकन की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं. छात्रों के लिए चांसलर पोर्टल 16 जून से 16 जुलाई तक खुला रहेगा. इस अवधि के दौरान इच्छुक छात्र-छात्राएं ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर नामांकन के लिए आवेदन कर सकेंगे. विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि नए सत्र में नामांकन प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा, ताकि शैक्षणिक कैलेंडर नियमित रहे और विद्यार्थियों की पढ़ाई समय पर शुरू हो सके. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय लगातार शैक्षणिक सत्र को नियमित करने की दिशा में काम कर रहा है. साथ ही विभिन्न नए कोर्स जोड़ने के प्रयास भी किए जा रहे हैं. विश्वविद्यालय में परीक्षाएं भी निर्धारित समय के अनुसार आयोजित की जा रही हैं. कुलपति ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि एनपीयू के अंतर्गत वर्तमान में नौ अंगीभूत महाविद्यालय संचालित हो रहे हैं. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुरूप नामांकन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और छात्र हितों को ध्यान में रख कर बनाया गया है. छात्रों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को सरल और सुविधाजनक बनाया गया है. विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी सीट निर्धारण के अनुसार, नौ अंगीभूत महाविद्यालयों में कुल 12,630 सीटों पर नामांकन लिया जाएगा. इनमें सबसे अधिक 2,540 सीटें गणेश लाल अग्रवाल महाविद्यालय में उपलब्ध हैं. वहीं, एसएसजेएस नामधारी महाविद्यालय, गढ़वा में 2,400 सीटों पर नामांकन होगा. इसके अलावा महिला महाविद्यालय में 1,790 सीटें और जनता शिवरात्रि महाविद्यालय में 1,580 सीटें निर्धारित की गई हैं. मंडल कॉलेज, गढ़वा में 720 सीटें उपलब्ध रहेंगी. वहीं डिग्री कॉलेज मनीका, हुसैनाबाद और छतरपुर में 900-900 सीटों पर नामांकन किया जाएगा. महिला महाविद्यालय, लेस्लीगंज में भी 900 सीटें निर्धारित की गई हैं. कुलपति प्रो. (डॉ.) दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि आने वाले समय में रेहला और भवनाथपुर में नवस्थापित कॉलेजों का संचालन भी शुरू किया जाएगा. इन कॉलेजों के शुरू होने से क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के अधिक अवसर मिलेंगे.साथ ही, उन्हें स्थानीय स्तर पर ही नामांकन की सुविधा उपलब्ध होगी. विश्वविद्यालय प्रशासन को उम्मीद है कि इस बार बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं ऑनलाइन आवेदन करेंगे. इसके लिए विद्यार्थियों को समय रहते चांसलर पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कर आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने की सलाह दी गई है. कुलपति ने कहा कि निर्धारित तिथि के बाद आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे. इसलिए छात्र-छात्राएं अंतिम समय का इंतजार करने के बजाय समय पर आवेदन कर अपना नामांकन सुनिश्चित करें. About the Author Amita kishor न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Palamu,Jharkhand Source link

झारखंड

कुंडा में 1.9 किलो गांजा बरामद, तीन हिरासत में:छापेमारी में वजन मशीन,...

देवघर जिले के कुंडा थाना क्षेत्र में पुलिस ने नशे के कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 1.9 किलोग्राम गांजा बरामद किया है। इस दौरान तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है। बरामद गांजे की कीमत करीब 60 हजार रुपये बताई जा रही है। पुलिस ने मौके से एक इलेक्ट्रॉनिक वजन मशीन, नकद राशि और कई मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। यह कार्रवाई जिले में अवैध मादक पदार्थों की खरीद-बिक्री के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान का हिस्सा है। जानकारी के अनुसार, अवैध मादक पदार्थों की खरीद-बिक्री की गुप्त सूचना मिलने पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) कुलदीप कुमार के नेतृत्व में एक विशेष छापेमारी दल का गठन किया गया था। टीम ने सूचना के आधार पर कुंडा थाना क्षेत्र के एक संदिग्ध स्थान पर छापा मारा। पुलिस के पहुंचते ही वहां मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। हालांकि, पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए तीन संदिग्धों को मौके से हिरासत में ले लिया। तलाशी के दौरान उनके कब्जे से गांजा और अन्य सामान बरामद हुए। पुलिस ने सभी जब्त सामानों को विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत अपने कब्जे में ले लिया है। इस मामले में संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ जारी है, जिसके आधार पर पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है। Source link

Scroll to Top