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जमीन विवाद में बेटे ने पिता की हत्या की:गला रेतकर जंगल में...

धनबाद के महूदा थाना क्षेत्र के भुरुंगिया बस्ती निवासी हलीम शेख हत्याकांड का पुलिस ने महज 12 घंटे के भीतर सनसनीखेज खुलासा कर दिया है। जांच में सामने आया है कि इस जघन्य वारदात की साजिश किसी और ने नहीं, बल्कि मृतक के मंझले बेटे मोहम्मद इश्तियाक शेख ने अपने दो सहयोगियों के साथ मिलकर रची थी। बाघमारा एसडीपीओ अजीत कुमार विमल ने बताया कि घटना के बाद तुरंत एसआईटी और तकनीकी टीम गठित की गई थी। दोनों टीमों ने समन्वय के साथ काम करते हुए तेजी से साक्ष्य जुटाए और मामले की गुत्थी सुलझा ली। पुलिस ने सबसे पहले माथाटांड़ निवासी शाहबाज शेख को गिरफ्तार किया, जिसने पूछताछ में पूरी साजिश का खुलासा कर दिया। धारदार हथियार से गला रेतकर की हत्या पुलिस के अनुसार, आरोपी शाहबाज शेख ने हलीम शेख को बक्सा बनाने के बहाने फोन कर कुलटांड़ जंगल बुलाया था। पहले से घात लगाए बैठे अन्य आरोपियों ने वहां पहुंचते ही धारदार हथियार से उनका गला रेतकर निर्मम हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद शव को झाड़ियों में छिपा दिया गया था। ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव बरामद किया। मृतक के कपड़ों से मिले मोबाइल फोन और आधार कार्ड के जरिए उनकी पहचान की गई। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। जमीन बंटवारे को लेकर था विवाद मृतक की पत्नी नजबुन निशा ने बताया कि जमीन बंटवारे को लेकर इश्तियाक शेख का अपने पिता से लंबे समय से विवाद चल रहा था। हलीम शेख तीनों बेटों में जमीन बराबर बांटना चाहते थे, जबकि इश्तियाक उस पर अकेले कब्जा करना चाहता था। इस विवाद को लेकर कई बार पंचायत भी हो चुकी थी। आरोपी अपने पिता को लगातार जान से मारने की धमकी देता था। परिजनों के मुताबिक, इन धमकियों से हलीम शेख इतने डरे हुए थे कि उन्होंने कुछ दिन पहले अपना और पत्नी का कफन तक खरीद लिया था। एक पत्र लिखकर अनहोनी की आशंका जताई थी। पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। Source link

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ओडिशा का एक PT टीचर, जो अजनबियों की फोटो खींचकर उन्हें फ्रेम...

होमताजा खबरदेश एक PT टीचर, जो अजनबियों की फोटो खींचकर उन्हें फ्रेम करके तोहफे में देता है Last Updated:June 15, 2026, 12:21 IST एक ऐसा टीचर जिसके पास लाखों रुपए तो नहीं हैं, मगर दूसरों के चेहरे पर सच्ची मुस्कान लाने के लिए एक बेहतरीन दिल, थोड़ा सा वक्त और उनका एक कैमरा ही काफी है. उनका नाम है रंजन और ये आज के दिन की सबसे खूबसूरत और दिल को छू लेने वाली कहानी है. इस बेहतरीन कहानी को पढ़ेंगे तो फोटो के बारे में खुद ही समझ जाएंगे. जगमोहन, News18 ओडिशा: हर इंसान खुश रहना चाहता है, मगर खुशी मिलती है छोटी-छोटी चीजों में. अब ओडिशा के एक पीटी टीचर को ही ले लीजिए, वो अपनी ड्यूटी खत्म करने के बाद सड़कों पर निकलते हैं. वे चुपके से किसी गरीब, मजदूर या राहगीर की उसकी रोजमर्रा की जिंदगी जीते हुए एक बेहतरीन तस्वीर खींचते हैं, उसे अपने पैसों से लैमिनेट यानी फ्रेम कराते हैं और फिर एक अनमोल तोहफे के रूप में वापस उसी व्यक्ति को सौंप देते हैं. इस अनोखी मुहिम को नाम दिया गया है ‘तिकिए खुसी’, यानी ‘एक छोटी सी खुशी’. सरकारी स्कूल के मास्टर साहब और कैमरे का अनोखा इश्कइस बेहद भावुक और मानवीय कहानी के नायक हैं रंजन पात्रा. रंजन ओडिशा के ‘ओडिशा आदर्श विद्यालय’ में एक युवा शारीरिक शिक्षा शिक्षक यानी पीटी मास्टर हैं. स्कूल में बच्चों को खेलकूद और अनुशासन सिखाने वाले रंजन का दिल कला और फोटोग्राफी के लिए धड़कता है. अक्सर शौकिया फोटोग्राफर बड़ी-बड़ी शादियों, खूबसूरत वादियों या नामी चेहरों को कैमरे में कैद करने के लिए लाखों रुपये लेते हैं. लेकिन रंजन ने अपने कैमरे का लेंस उन लोगों की तरफ मोड़ा जिन्हें मुख्यधारा का समाज अक्सर अनदेखा कर देता है. वे सड़कों पर झाड़ू लगाने वाले, खेतों में पसीना बहाने वाले, या किसी कोने में अपनी गरीबी के साथ जी रहे आम और अनजान लोगों की तस्वीरें खींचते हैं. साल 2020 से शुरू हुआ सफर और 1000 से ज्यादा चेहरों पर मुस्कानरंजन पात्रा ने इस खूबसूरत सफर की शुरुआत साल 2020 में की थी. बीते 6 सालों में वे अपनी जेब से पैसे खर्च कर 1,000 से ज्यादा लोगों को उनकी लैमिनेटेड तस्वीरें गिफ्ट कर चुके हैं. इस मुहिम के पीछे रंजन का इरादा बहुत साफ और नेक है. वे कहते हैं कि बहुत से बुजुर्गों और गरीब ग्रामीणों के पास अपनी पूरी जिंदगी में कोई ऐसी तस्वीर नहीं होती जिसे वे याद के तौर पर सहेज सकें. रंजन जब उन्हें उनके ही काम में रमे हुए, जैसे मुर्गियों को दाना खिलाते हुए या मुस्कुराते हुए कैमरे में कैद करते हैं, तो वह उनकी जिंदगी का पल हमेशा के लिए सहेज लेते हैं. लैमिनेशन के कारण ये कागज का टुकड़ा सालों-साल खराब नहीं होता और उनके घरों की दीवारों की शान बन जाता है. एक तस्वीर जो मुर्गियों को दाना खिलाते बुजुर्ग के लिए ‘अजूबा’ बन गईरंजन पात्रा के काम की खूबसूरती को समझने के लिए नीचे वाली तस्वीर देखिए… ये फोटो तब की है, जब पीटी टीचर ने उस परिवार को फोटो गिफ्ट की थी. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें साल 2020 से शुरू हुआ सफर और 1000 से ज्यादा चेहरों पर मुस्कानरंजन पात्रा ने इस खूबसूरत सफर की शुरुआत साल 2020 में की थी. बीते 6 सालों में वे अपनी जेब से पैसे खर्च कर 1,000 से ज्यादा लोगों को उनकी लैमिनेटेड तस्वीरें गिफ्ट कर चुके हैं. इस मुहिम के पीछे रंजन का इरादा बहुत साफ और नेक है. वे कहते हैं कि बहुत से बुजुर्गों और गरीब ग्रामीणों के पास अपनी पूरी जिंदगी में कोई ऐसी तस्वीर नहीं होती जिसे वे याद के तौर पर सहेज सकें. रंजन जब उन्हें उनके ही काम में रमे हुए, जैसे मुर्गियों को दाना खिलाते हुए या मुस्कुराते हुए कैमरे में कैद करते हैं, तो वह उनकी जिंदगी का पल हमेशा के लिए सहेज लेते हैं. लैमिनेशन के कारण ये कागज का टुकड़ा सालों-साल खराब नहीं होता और उनके घरों की दीवारों की शान बन जाता है. एक तस्वीर जो मुर्गियों को दाना खिलाते बुजुर्ग के लिए ‘अजूबा’ बन गईरंजन पात्रा के काम की खूबसूरती को समझने के लिए नीचे वाली तस्वीर देखिए… ये फोटो तब की है, जब पीटी टीचर ने उस परिवार को फोटो गिफ्ट की थी. इस तस्वीर में एक बेहद साधारण, बुजुर्ग ग्रामीण जमीन पर उकड़ू बैठे हुए एक बांस के सूप से अपनी मुर्गियों और छोटे-छोटे चूजों को दाना खिला रहे हैं. बगल में एक पुरानी साइकिल खड़ी है और पीछे लकड़ियों का ढेर लगा है. ये ग्रामीण भारत के सीधे-सादे जीवन का एक ऐसा बेमिसाल शॉट है, जिसे रंजन ने बिना किसी बनावट के, उनके प्राकृतिक अंदाज में कैद किया. जब अपनी ही तस्वीर देखकर छलक आईं बुजुर्ग की आंखेंकहानी का सबसे भावुक मोड़ तब आता है जब रंजन उस तस्वीर को प्रिंट कराकर, बकायदा लैमिनेट करके उसी बुजुर्ग के पास दोबारा पहुंचते हैं. अब दूसरी तस्वीर देखिए… ये वो फोटो है जो टीचर ने चलते फिरते खींच ली थी. इसमें हरे रंग की शर्ट में रंजन पात्रा खुद उस बुजुर्ग के घर के बाहर खड़े हैं. बुजुर्ग के हाथ में वही लैमिनेटेड फोटो है जो रंजन ने पहले खींची थी. बुजुर्ग के चेहरे पर अपनी ही उस सुंदर तस्वीर को हाथ में थामे देखने का जो अचरज और गर्व है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. उनके साथ उनके परिवार की दो छोटी बच्चियां भी खड़ी हैं, जिनके चेहरों पर एक अनजानी सी खुशी है. ये सिर्फ एक फोटो का लेन-देन नहीं है, बल्कि एक इंसान द्वारा दूसरे इंसान को दिया गया ‘सम्मान’ है. यानी वही खुशी जिसका जिक्र मैंने पहले खबर में किया था…कि खुशी छोटी-छोटी चीजों में है. ‘तिकिए खुसी’ निस्वार्थ भाव से यादें सहेजने की जिदरंजन पात्रा इस पूरे काम के लिए किसी से एक नया पैसा नहीं लेते. स्कूल की नौकरी से जो सैलरी मिलती है, उसी का एक हिस्सा वे इन अजनबियों की ‘छोटी सी खुशी’ यानी तिकिए खुसी के लिए डिजिटल प्रिंटिंग और लैमिनेशन में खर्च कर देते हैं. उनके इस निस्वार्थ प्रयास ने आज ओडिशा के सोशल मीडिया

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फैशन की दुनिया में बनाना है नाम… जमशेदपुर के ये संस्थान दे...

Last Updated:June 15, 2026, 11:30 IST Jamshedpur Top Fashion Designing Institute: जमशेदपुर में फैशन डिजाइनिंग करियर के लिए Glam Institute of Fashion Designing और PAHAL JAMSHEDPUR जैसे संस्थान प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और NIFT NID तैयारी दे रहे हैं. यहां एडमिशन लेकर आप अपने करियर को नई उड़ान दे सकते हैं. आज के दौर में सफलता केवल डॉक्टर, इंजीनियर या सरकारी नौकरी तक सीमित नहीं रह गई है. कई ऐसे छात्र होते हैं, जिनकी रुचि पारंपरिक पढ़ाई में कम होती है, लेकिन उनकी रचनात्मक सोच, कला, डिजाइन और नए प्रयोग करने की क्षमता उन्हें दूसरों से अलग बनाती है. ऐसे युवाओं के लिए फैशन डिजाइनिंग एक बेहतरीन करियर विकल्प बनकर उभरा है. यह ऐसा क्षेत्र है. जहां अच्छे अंक से ज्यादा महत्व आपकी कल्पनाशक्ति, डिजाइनिंग स्किल और नए ट्रेंड को समझने की क्षमता का होता है. फैशन इंडस्ट्री में आज डिजाइनर, स्टाइलिस्ट, फैशन कंसल्टेंट, मॉडल कोऑर्डिनेटर और ब्रांड मैनेजर जैसे कई आकर्षक अवसर मौजूद हैं. जमशेदपुर में भी अब फैशन डिजाइनिंग की पढ़ाई के लिए अच्छे संस्थान उपलब्ध हैं. इनमें सबसे चर्चित नाम Glam Institute of Fashion Designing का है, जो सकची स्थित एक प्रमुख फैशन डिजाइनिंग संस्थान है. यहां फैशन डिजाइन, टेक्सटाइल डिजाइन, मॉडलिंग, बुटीक मैनेजमेंट और अन्य रचनात्मक कोर्स संचालित किए जाते हैं. संस्थान छात्रों को केवल थ्योरी नहीं, बल्कि प्रैक्टिकल ट्रेनिंग, डिजाइन प्रोजेक्ट, वर्कशॉप और इंडस्ट्री एक्सपोजर भी प्रदान करता है, जिससे वे वास्तविक दुनिया की चुनौतियों के लिए तैयार हो सके. फैशन डिजाइनिंग की पढ़ाई में छात्रों को कपड़ों की डिजाइनिंग, फैब्रिक की जानकारी, कलर कॉम्बिनेशन, फैशन इलस्ट्रेशन, पैटर्न मेकिंग और ट्रेंड फोरकास्टिंग जैसी महत्वपूर्ण चीजें सिखाई जाती हैं. इसके साथ ही उन्हें अपनी खुद की डिजाइन तैयार करने और उसे बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया भी समझाई जाती है. यही कारण है कि यह कोर्स केवल नौकरी ही नहीं, बल्कि खुद का बुटीक, फैशन ब्रांड या डिजाइन स्टूडियो शुरू करने का अवसर भी देता है. Add News18 as Preferred Source on Google जो छात्र राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों जैसे NIFT या NID में प्रवेश लेना चाहते हैं. उनके लिए जमशेदपुर में PAHAL JAMSHEDPUR – NID NIFT NATA B.ARCH UCEED Coaching जैसी संस्थाएं भी मार्गदर्शन प्रदान करती हैं. यहां छात्रों को डिजाइन एप्टीट्यूड, स्केचिंग और क्रिएटिव टेस्ट की तैयारी कराई जाती है, जिससे वे देश के प्रतिष्ठित डिजाइन संस्थानों में प्रवेश पाने का सपना पूरा कर सके. फैशन इंडस्ट्री आज केवल ग्लैमर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अरबों रुपये का बड़ा व्यवसाय बन चुका है. बड़े-बड़े ब्रांड, ई-कॉमर्स कंपनियां, फिल्म इंडस्ट्री, विज्ञापन जगत और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लगातार प्रशिक्षित फैशन प्रोफेशनल्स की मांग कर रहे हैं. ऐसे में यह क्षेत्र युवाओं को रोजगार, पहचान और आर्थिक सफलता तीनों प्रदान कर सकता है. यदि आपको ड्राइंग, रंगों, कपड़ों और नए डिजाइन बनाने में रुचि है तो फैशन डिजाइनिंग आपके लिए एक सुनहरा अवसर साबित हो सकता है. जरूरी नहीं कि हर छात्र किताबों में अव्वल हो, लेकिन अपनी प्रतिभा को सही दिशा देकर वह एक सफल फैशन डिजाइनर जरूर बन सकता है. जमशेदपुर के ये संस्थान ऐसे ही सपनों को हकीकत में बदलने का काम कर रहे हैं और शहर के युवाओं को ग्लैमर वर्ल्ड में नई पहचान दिलाने का अवसर प्रदान कर रहे हैं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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धनबाद में असम की युवती से दुष्कर्म का प्रयास:मुंबई वाली ट्रेन छूटी,...

धनबाद के गोविंदपुर थाना क्षेत्र में असम की एक युवती के साथ दुष्कर्म के प्रयास का सनसनीखेज मामला सामने आया है। युवती अपनी सहेलियों के साथ मुंबई जा रही थी, लेकिन धनबाद स्टेशन पर उसकी ट्रेन छूट गई। पिछले दो दिनों से वह स्टेशन के आसपास रह रही थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात स्टेशन के पास एक होटल में काम करने वाले राजू साव से हुई। आरोप है कि राजू साव ने उसे घरेलू काम दिलाने का भरोसा दिया। इस बहाने उसे अपने जाल में फंसा लिया। असहाय स्थिति में फंसी युवती को आरोपी ने मदद का झांसा देकर गोविंदपुर स्थित एक फ्लैट तक पहुंचा दिया। जहां उसके साथ गलत हरकत करने की कोशिश की गई। खबर से जुड़ी तस्वीरें देखें…. शोर मचाने पर बची जान युवती के अनुसार, उसे आपणो घर सोसाइटी के एक फ्लैट में भेजा गया। जहां साफ-सफाई के बहाने बुलाया गया था। फ्लैट मालिक अक्षय अग्रवाल ने उसके साथ अश्लील हरकतें शुरू कर दी। जबरन संबंध बनाने का प्रयास किया। युवती ने साहस दिखाते हुए विरोध किया। किसी तरह खुद को छुड़ाकर फ्लैट से बाहर निकल आई। बाहर आते ही उसने शोर मचाया, जिसे सुनकर सोसाइटी के लोग और स्थानीय निवासी मौके पर पहुंचे। लोगों ने तत्परता दिखाते हुए राजू साव को पकड़ लिया, जबकि उसका एक अन्य साथी मौके से फरार हो गया। पुलिस जांच में जुटी, पीड़िता सदमे में सूचना मिलते ही गोविंदपुर पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और फ्लैट की तलाशी ली। तलाशी के दौरान कमरे से शराब की बोतलें भी बरामद की गईं। पुलिस ने युवती के आरोपों के आधार पर राजू साव को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है, जबकि फरार आरोपी की तलाश जारी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पीड़िता फिलहाल शारीरिक और मानसिक रूप से काफी परेशान है, जिसके कारण उसका विस्तृत बयान अभी दर्ज नहीं हो सका है। उसका मोबाइल फोन भी खो गया है। जिससे परिजनों से संपर्क करने में दिक्कत हो रही है। पुलिस का कहना है कि पीड़िता का बयान दर्ज होते ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। Source link

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कोडरमा के सतगावां में तेज रफ्तार ट्रक का कहर:विपरीत दिशा से आ...

कोडरमा जिले के सतगावां थाना क्षेत्र में भीषण सड़क हादसे में 30 वर्षीय युवक की मौत हो गई। यह दुर्घटना घोड़सीमर मोड़ के पास हुई, जहां एक अनियंत्रित ट्रक ने मोटरसाइकिल सवार को जोरदार टक्कर मार दी। मृतक की पहचान गाजेडीह निवासी दीपक कुमार के रूप में की गई है। हादसा इतना भयावह था कि टक्कर के बाद बाइक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और दीपक कुमार ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है। विपरीत दिशा से आ रहे ट्रक ने मारी टक्कर प्राप्त जानकारी के अनुसार, दीपक कुमार गोविंदपुर की ओर से अपनी मोटरसाइकिल पर सवार होकर अपने घर गाजेडीह लौट रहे थे। इसी दौरान गोविंदपुर से गांवा की ओर जा रहा एक तेज रफ्तार और अनियंत्रित ट्रक विपरीत दिशा से आया और उनकी बाइक को सीधी टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दीपक कुमार को संभलने का कोई मौका नहीं मिला। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रक की गति काफी अधिक थी, जिससे दुर्घटना की गंभीरता और बढ़ गई। हादसे के बाद ट्रक चालक मौके से फरार बताया जा रहा है, जिसकी तलाश की जा रही है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल घटना की सूचना मिलते ही सतगावां थाना प्रभारी बबलू कुमार सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी की और पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल कोडरमा भेज दिया। इस घटना से मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में तेज रफ्तार और लापरवाह ड्राइविंग के कारण लगातार हादसे हो रहे हैं, लेकिन इस पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। लोगों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई और सड़क सुरक्षा के ठोस उपाय लागू करने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। Source link

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अल नीनो लील लेगा धान की फसल! IMD ने बताया कब ताकतवर...

होमताजा खबरदेश अल नीनो लील लेगा धान की फसल! IMD ने बताया कब ताकतवर होगा मौसमी राक्षस Last Updated:June 15, 2026, 11:20 IST El Nino Monsoon Impact: प्रशांत महासागर में अल नीनो सक्रिय हो चुका है. इसे मानसून का हत्‍यारा भी माना जाता है. इसके एक्टिव होने का सीधा असर मानसून पर पड़ता है, जिसकी वजह से भारत में बारिश में कमी आती है. औसत से कम बारिश होने की वजह से खेतीबारी की गतिविधियां बुरी तरह से प्रभावित होती हैं, जिससे इकोनॉमी भी प्रभावित होती है. IMD के डायरेक्‍टर जनरल मृत्‍युंजय महापात्र ने कहा कि अल नीनो से घबराने की जरूरत नहीं है. अल नीनो से कम बारिश होने की आशंका है. इसका असर खेतीबारी पर पड़ना तय माना जा रहा है. (फाइल फोटो/Reuters) रिपोर्ट: सुरोजीत गुप्‍ता El Nino Monsoon Impact: प्रशांत महासागर में इस महीने की शुरुआत में सक्रिय हुआ अल नीनो (El Nino) सितंबर के अंत तक बहुत ज्‍यादा मजबूत हो सकता है. इसके मानसून के बाद भी बने रहने की संभावना है. हालांकि, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने कहा है कि फिलहाल घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों ने इसके संभावित प्रभावों से निपटने के लिए अग्रिम तैयारियां शुरू कर दी हैं. IMD चीफ डॉ. महापात्र ने कहा कि जुलाई, अगस्त और सितंबर की शुरुआत तक देश में मध्यम स्तर की अल नीनो परिस्थितियां रहने की संभावना है. इसके बाद इसकी तीव्रता बढ़ सकती है. उन्होंने स्पष्ट किया कि मौसम विभाग लगातार स्थिति पर नजर रख रहा है और समय रहते चेतावनी एवं आवश्यक सलाह जारी की जाएगी. अल नीनो एक ऐसी जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के सतही जल का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है. इसका असर वैश्विक तापमान और वर्षा के पैटर्न पर पड़ता है. भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि दक्षिण-पश्चिम मानसून पर इसकी सीधी या अप्रत्यक्ष छाप पड़ सकती है. मानसून देश की कृषि, जल संसाधनों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा माना जाता है. अल नीनो से निपटने की तैयारी IMD प्रमुख के अनुसार, सरकार पहले ही संभावित जोखिम को देखते हुए राज्यों और जिलों में विशेष निगरानी के निर्देश दे चुकी है. जिन क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा होने की आशंका है, वहां त्वरित कार्रवाई की योजना तैयार की जा रही है. कृषि क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए बीजों की उपलब्धता, जल प्रबंधन और वैकल्पिक फसल योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी किसानों से घबराने की बजाय समय रहते तैयारी करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि देश के प्रमुख जलाशयों में इस समय जल स्तर सामान्य से बेहतर स्थिति में है, जिससे खरीफ फसलों को सहारा मिलेगा और संभावित सूखे जैसी परिस्थितियों का प्रभाव कुछ हद तक कम किया जा सकेगा. मानसून कमजोर हुआ तो क्‍या पड़ेगा असर अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि अल नीनो का प्रभाव बढ़ता है और वर्षा में कमी आती है, तो इसका असर कृषि उत्पादन और देश की आर्थिक वृद्धि दर पर पड़ सकता है. विशेष रूप से तिलहन, दलहन, खाद्य तेल और कपास जैसी अपेक्षाकृत कम सिंचित फसलें अधिक प्रभावित हो सकती हैं. इससे खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका भी पैदा हो सकती है. डॉ. महापात्र ने बताया कि उत्तर-पश्चिम भारत, मध्य भारत और प्रायद्वीपीय भारत के पश्चिमी हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है. गुजरात, राजस्थान से लेकर ओडिशा, उत्तरी आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ तक के कुछ क्षेत्रों में सिंचाई सुविधाएं अपेक्षाकृत सीमित हैं. ऐसे इलाकों में यदि वर्षा कम रहती है तो उसका प्रभाव अधिक गंभीर हो सकता है. वेदर फोरकास्‍ट सिस्‍टम में सुधार आईएमडी ने मौसम पूर्वानुमान प्रणाली में हुई प्रगति पर महापात्र ने बताया कि 2021 से 2025 के बीच दीर्घकालिक मानसून पूर्वानुमान में त्रुटि घटकर केवल 2.2 प्रतिशत रह गई है, जबकि 2016 से 2020 के दौरान यह 7.5 प्रतिशत थी. नई तकनीक और आधुनिक पद्धतियों के कारण न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि विभिन्न क्षेत्रों के लिए भी मौसम पूर्वानुमान की सटीकता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है. विशेषज्ञों का कहना है कि अल नीनो की चुनौती को देखते हुए सतर्कता, वैज्ञानिक तैयारी और समय पर कार्रवाई ही इसके संभावित प्रभावों को कम करने की सबसे प्रभावी रणनीति होगी. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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पशुओं का किशमिश है यह चीज! फ्री में उपलब्ध… गायों को खिलाकर...

होमताजा खबरकृषि पशुओं का किशमिश है यह चीज! गायों को खिलाकर निकालें दूध, रोजाना भरेगी बाल्टी Last Updated:June 15, 2026, 09:57 IST पशुओं के लिए मुफ्त में उपलब्ध एक खास चीज ‘किशमिश’ का काम करती है. इसे गायों को खिलाने से दूध का उत्पादन तेजी से बढ़ता है. इसके सेवन से रोजाना सुबह-शाम दूध की बाल्टी भर जाएगी. यह चीज पशुओं के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद है. जानिए इस जादुई चीज के बारे में… ख़बरें फटाफट कोडरमाः ग्रामीण इलाकों में प्राकृतिक रूप से मिलने वाला महुआ पशुओं के लिए भी बेहद पौष्टिक आहार माना जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में इसे पशुओं का किशमिश भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें कई ऐसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो पशुओं की सेहत और उत्पादन क्षमता को बेहतर बनाने में सहायक होते हैं. श्री कोडरमा गौशाला के पशु विशेषज्ञ रजनीश कुमार ने विशेष बातचीत में बताया कि महुआ में विटामिन, मिनरल्स और प्राकृतिक ऊर्जा देने वाले तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. यही वजह है कि इसे पशुओं के लिए एक प्राकृतिक टॉनिक के रूप में देखा जाता है. हालांकि इसका सेवन हमेशा सीमित मात्रा में ही कराया जाना चाहिए. दूध उत्पादन बढ़ाने में मददगारउन्होंने कहा कि किसी भी पोषक तत्व की अधिक मात्रा नुकसान पहुंचा सकती है और यही बात महुआ पर भी लागू होती है. इसलिए पशुपालकों को अपने पशुओं की उम्र, वजन और आवश्यकता के अनुसार ही महुआ खिलाना चाहिए. उन्होंने बताया कि दुधारू पशुओं को महुआ खिलाने से दूध उत्पादन में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है. वहीं जो पशु दूध नहीं देते हैं, उनमें यह शरीर की ताकत बढ़ाने, ऊर्जा बनाए रखने और सामान्य स्वास्थ्य सुधारने में मददगार हो सकता है. पशुपालकों को सूखे महुआ को पहले पानी में भिगो देना चाहिए और उसके बाद एक पशु को लगभग 100 ग्राम की मात्रा में सुबह खिलाना चाहिए. इस तरीके से महुआ आसानी से पचता है और उसका पोषण भी बेहतर तरीके से मिलता है. पाचन तंत्र में करता है सुधारउन्होंने बताया कि महुआ के नियमित लेकिन नियंत्रित सेवन से पशुओं का पाचन तंत्र बेहतर रहता है. यह पेट साफ रखने में मदद करता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में भी सहायक माना जाता है. उन्होंने मौसम के अनुसार भी सावधानी बरतने की सलाह दी. उन्होंने बताया कि महुआ की तासीर गर्म होती है, इसलिए गर्मियों में इसे बहुत अधिक मात्रा में नहीं देना चाहिए. अधिक सेवन से पशुओं को परेशानी हो सकती है. वहीं सर्दियों के मौसम में सीमित मात्रा में महुआ खिलाने से यह पशुओं को अंदरूनी गर्माहट और अतिरिक्त ऊर्जा प्रदान करने में सहायक होता है. About the Author Prashun Singh मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Kodarma,Jharkhand Source link

झारखंड

अभियान के 21वें दिन मशीनों ने सरस्वतिया नदी को किया पुनर्जीवित

भास्कर न्यूज | गढ़वा जनसहभागिता एवं प्रशासनिक सहयोग से संचालित आपन सरस्वतिया अभियान के तहत रविवार को लगातार 21वें दिन भी सरस्वतिया नदी की सफाई, डी-सिल्टिंग एवं पुनर्जीवन का कार्य जारी रहा। मानसून के निकट आने को देखते हुए अभियान को और गति प्रदान की गई तथा नदी के विभिन्न हिस्सों में व्यापक स्तर पर सफाई एवं चौड़ीकरण का कार्य किया गया। रविवार को सुबह 9 बजे से ही आधा दर्जन से अधिक जेसीबी एवं अन्य मशीनें नदी क्षेत्र में कार्यरत रहीं। विभिन्न स्थानों पर वर्षों से गाद, झाड़ियों, सूखे वृक्षों एवं अन्य अवरोधों के कारण अपना स्वरूप खो चुकी नदी को पुनः आकार देने का प्रयास किया गया। मशीनों की सहायता से नदी तल की सफाई, डी-सिल्टिंग, चौड़ीकरण तथा जल प्रवाह को बाधित करने वाले अवरोधों को हटाने का कार्य किया गया। अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने कहा कि मानसून के आगमन के बाद नदी में जलभराव बढ़ने से डी-सिल्टिंग एवं सफाई कार्य प्रभावित हो सकता है। इसी कारण मानसून पूर्व अधिकतम कार्य पूर्ण करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि रविवार को मशीनों की संख्या बढ़ाकर अभियान को अतिरिक्त गति दी गई, ताकि शेष कार्यों को शीघ्र पूरा किया जा सके। उन्होंने कहा कि यदि जन सहयोग से अतिरिक्त जेसीबी मिले तो अगले तीन-चार दिन ऐसे ही व्यापक कार्य कराया जाएगा। अभियान के दौरान स्थानीय नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं स्वच्छता प्रेमियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। कई स्थानों पर लोगों ने श्रमदान कर नदी संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। अनुमंडल पदाधिकारी ने रविवार को अभियान को गति प्रदान करने में योगदान देने वाले गढ़वा के समाजसेवी राकेश पाल, केसरवानी वैश्य सभा के अध्यक्ष संतोष केसरी, व्यवसायी संघ के अध्यक्ष राजेश गुप्ता, संत मरियम आवासीय विद्यालय डाल्टनगंज के चेयरमैन अविनाश देव एवं समाज सेवी विकास माली सहित सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों के स्वैच्छिक सहयोग के कारण ही यह अभियान निरंतर आगे बढ़ रहा है और अब एक जनआंदोलन का स्वरूप ग्रहण कर चुका है। वहीं 15 दिन पूर्व मेराल क्षेत्र में आरंभ हुए सरस्वतिया नदी की सफाई एवं डी-सिल्टिंग का कार्य निरंतर दिन जारी रहा। अनुमंडल पदाधिकारी ने वहां के अंचलाधिकारी सहित मेराल की पूरी टीम, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों एवं नागरिकों की सराहना करते हुए कहा कि वहां भी लोगों का उत्साहजनक सहयोग मिल रहा है, जिसके कारण अभियान के सकारात्मक परिणाम दिखाई देने लगे हैं। उन्होंने कहा कि सरस्वतिया नदी केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि क्षेत्र की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर है। इसके संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए समाज एवं प्रशासन का यह साझा प्रयास आगे भी निरंतर जारी रहेगा। जनसहभागिता ही इस अभियान की सबसे बड़ी शक्ति है और इसी के बल पर नदी को उसके मूल स्वरूप में वापस लाने का सामूहिक लक्ष्य तय किया गया है। अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने कहा कि सूचना मिल रही है कि सरस्वतिया नदी की सफाई के बाद भी कुछ लोग नदी में सीधे कचरा एवं अपशिष्ट फेंकने से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसे लोगों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में नगर परिषद को आवश्यक आदेश जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शहर की जिम्मेदार लोगों द्वारा नदी को स्वच्छ बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, ऐसे में अराजक व्यक्तियों को नदी को पुनः प्रदूषित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। स्थानीय नागरिकों से भी ऐसे मामलों की सूचना प्रशासन को उपलब्ध कराने की अपील की गई है। अनुमंडल पदाधिकारी ने कहा कि जन शिकायतें आ रही हैं कि नदी क्षेत्रों में कूड़ा फेंकने वालों को नगर परिषद द्वारा दंडित किए जाने की बजाय नगर परिषद खुद भी कचरा फेंकने वालों में शामिल है। कई मुहल्लों से नियमित रूप से कचरा उठाव नहीं किए जाने की शिकायतें भी प्राप्त हुई हैं। यदि जांच में इन शिकायतों की पुष्टि होती है तो नगर परिषद के संबंधित जिम्मेदार पदाधिकारियों एवं कर्मियों की जवाबदेही तय करते हुए उनके विरुद्ध भी आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरस्वतिया नदी को स्वच्छ एवं अविरल बनाने के अभियान में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। Source link

शिक्षा

NCERT Book Alters Nude Sculpture

नई दिल्ली18 मिनट पहले कॉपी लिंक NCERT की नई किताब ‘मधुरिमा’ में सिंधु घाटी सभ्यता की प्रसिद्ध ‘डांसिंग गर्ल’ की तस्वीर बदले हुए रूप में छापी गई है। इस किताब में मूर्ति के धड़ को रंग से ढक दिया गया है, जिससे वह कपड़े पहने हुए दिखाई देती है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘डांसिंग गर्ल’ की तस्वीर 9वीं क्लास की किताब ‘मधुरिमा’ के पहले चैप्टर ‘हिस्ट्री ऑफ आर्ट्स’ में दी गई है। तस्वीर में कंधों से नीचे का हिस्सा ढक दिया गया है, जबकि मूल मूर्ति में यह हिस्सा खुला दिखाई देता है। 25 साल से छप रही इस कांस्य मूर्ति के मूल स्वरूप में पहले कभी बदलाव नहीं किया गया था। यह किताब NCERT की नई आर्ट्स एजुकेशन सीरीज का हिस्सा है, जिसे नई शिक्षा नीति (NEP) और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF) के तहत तैयार किया गया है। अब तक क्लास 1 से 9 तक की किताबें जारी की जा चुकी हैं। इतिहासका बोले- यह सेंसरशिप है मिशेल डेनिनो ने तस्वीर में किए गए बदलाव को छात्रों के साथ अन्याय बताया। उन्होंने कहा कि मूर्ति के पूरे धड़ को ढकना सेंसरशिप है। डेनिनो के मुताबिक, इससे ऐसी मूर्ति दिखाई गई है, जो असल में कहीं मौजूद नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर इसी तर्क पर तस्वीर बदली जा रही है, तो क्या छात्रों को नेशनल म्यूजियम में रखी मूल प्रतिमा और दूसरी अर्धनग्न या नग्न ऐतिहासिक मूर्तियां देखने से भी रोका जाएगा? NCERT बोला- कोई खास वजह नहीं तस्वीर में बदलाव को लेकर पूछे गए सवाल पर NCERT के निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी ने द इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि इसके पीछे कोई खास वजह नहीं है। उन्होंने कहा कि कक्षा 6 की सोशल साइंस किताब में ‘डांसिंग गर्ल’ की तस्वीर अपने मूल रूप में मौजूद है और यह हड़प्पा सभ्यता की प्रमुख खोजों में से एक है। NCERT के क्लास 9वीं की किताब मधुरिमा में ये तस्वीर छपी है। पहले भी तस्वीर पर उठी थी आपत्ति इतिहासकार मिशेल डेनिनो ने मई में द इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में बताया था कि NCERT ने सिंधु घाटी सभ्यता वाले चैप्टर के ओपनिंग पेज पर ‘डांसिंग गर्ल’ की तस्वीर लगाने पर आपत्ति जताई थी। डेनिनो उस समय NCERT की नई कक्षा 6 सोशल साइंस किताब की टेक्स्टबुक डेवलपमेंट कमेटी के प्रमुख थे। डेनिनो के मुताबिक, कुछ लोगों का मानना था कि मूर्ति के नग्न वाले स्वरूप को लेकर विवाद हो सकता है। बाद में तस्वीर को चैप्टर की शुरुआत से हटाकर अंदर के पन्ने पर छोटे आकार में रखा गया था, लेकिन तस्वीर को हटाया नहीं गया। डेनिनो ने कहा था कि अगर डांसिंग गर्ल बच्चों के लिए उपयुक्त नहीं है, तो फिर उन्हें राष्ट्रीय संग्रहालय भी नहीं जाना चाहिए, जहां यह मूर्ति रखी हुई है। मोहनजोदड़ो और ‘डांसिंग गर्ल’ क्यों हैं खास? मोहनजोदड़ो सिंधु घाटी सभ्यता (हड़प्पा सभ्यता) के सबसे बड़े और विकसित शहरों में से एक था। यह वर्तमान पाकिस्तान के सिंध प्रांत में स्थित है। इस शहर की खोज 1922 में भारतीय पुरातत्वविद् राखालदास बनर्जी ने की थी। सिंधु घाटी सभ्यता दुनिया की सबसे प्राचीन शहरी सभ्यताओं में गिनी जाती है। इसका काल लगभग 2600 ईसा पूर्व से 1900 ईसा पूर्व माना जाता है। मोहनजोदड़ो अपनी सुनियोजित सड़कों, जल निकासी व्यवस्था, अनाज भंडारों और उन्नत नगर नियोजन के लिए प्रसिद्ध है। ‘डांसिंग गर्ल’ नाम से मशहूर करीब 4 इंच ऊंची कांस्य मूर्ति 1926 में मोहनजोदड़ो से मिली थी। मूर्ति में जूड़ा बांधे एक युवती को दिखाया गया है, जिसके हाथों में कई चूड़ियां और गले में हार है। उसकी मुद्रा आत्मविश्वास से भरी मानी जाती है। पुरातत्वविद इसे हड़प्पा सभ्यता की उन्नत धातुकला, शिल्पकला और कलात्मक समझ का महत्वपूर्ण प्रमाण मानते हैं। ‘डांसिंग गर्ल’ आज सिंधु घाटी सभ्यता की सबसे पहचान वाली कलाकृतियों में गिनी जाती है। मूल मूर्ति नई दिल्ली के नेशनल म्यूजियम में रखी गई है। —————– ये खबर भी पढ़ें… NCERT-करप्शन इन ज्यूडीशियरी के लेखकों को हटाने का आदेश वापस:सुप्रीम कोर्ट बोला- कंटेंट पर सवाल, व्यक्ति पर नहीं; लिखने वालों पर सरकार फैसला करे NCERT बुक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ चैप्टर पर हुए विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने दो महीने पहले दिया फैसला बदल दिया है। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि जिन तीन शिक्षाविदों ने विवादित हिस्सा लिखा। उन्हें हटा दिया जाए और दोबारा काम न दिया जाए। पूरी कॉपी पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं… Source link

झारखंड

दलमा में ‘फुटबॉल स्टार’ बना नन्हा गजराज:फीफा वर्ल्ड कप की धूम के...

जमशेदपुर के दलमा वन्यजीव अभयारण्य में इन दिनों फीफा फुटबॉल वर्ल्ड कप की धूम का असर जंगल तक दिखाई दे रहा है। यहां का नन्हा हाथी ‘बादल’ अपने अनोखे फुटबॉल खेल से पर्यटकों के बीच किसी स्टार खिलाड़ी से कम नहीं लग रहा। जिस तरह दुनिया भर में खिलाड़ी गोल करने की जद्दोजहद में जुटे हैं, उसी तरह ‘बादल’ भी अपनी सूंड और पैरों से गेंद को किक मारकर लोगों को रोमांचित कर रहा है। पर्यटक जब उसके सामने गेंद उछालते हैं, तो वह उसे कभी हल्के तो कभी जोरदार अंदाज में धकेलता है। उसकी हर किक पर लोग तालियां बजाते हैं, मानो किसी बड़े मैच का लाइव नजारा देख रहे हों। घायल से ‘चैंपियन’ बनने तक का है सफर करीब छह महीने पहले पश्चिमी सिंहभूम के चाईबासा इलाके के जंगलों में ‘बादल’ बेहद खराब हालत में मिला था। वह अपनी मां से बिछड़ा हुआ था। उसके शरीर पर कई गंभीर घाव थे। वन विभाग की टीम ने तत्परता दिखाते हुए उसे रेस्क्यू कर दलमा लाया। यहां पशु चिकित्सकों और वनकर्मियों ने दिन-रात उसकी देखभाल की। लगातार इलाज, संतुलित आहार और विशेष निगरानी के चलते वह धीरे-धीरे स्वस्थ होता गया। आज वही ‘बादल’ पूरी तरह फिट होकर न सिर्फ दौड़ता-भागता है, बल्कि अपनी चंचल हरकतों से सबका मनोरंजन भी कर रहा है। स्विमिंग पूल में कर रहा अटखेलियां गर्मी के मौसम में ‘बादल’ का स्विमिंग पूल में खेलना भी किसी शो से कम नहीं होता। पानी में उसकी अठखेलियां देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं। वह कभी सूंड से पानी उछालता है तो कभी खुद ही उसमें डुबकी लगाकर बाहर आता है। बच्चों के लिए यह अनुभव बेहद खास बन जाता है। सोशल मीडिया पर उसके वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिससे उसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। अब दलमा आने वाले पर्यटक जंगल सफारी के साथ-साथ ‘बादल’ को देखने को अपनी प्राथमिकता बना रहे हैं। दलमा की नई पहचान बना ‘बादल’ अभयारण्य में पहले से मौजूद हथिनी ‘रजनी’ पर्यटकों के बीच लोकप्रिय रही है, लेकिन ‘बादल’ की मासूमियत और खेलकूद भरे स्वभाव ने उसे अलग पहचान दिला दी है। डीएफओ सबा आलम अंसारी के अनुसार, ‘बादल’ पूरी तरह स्वस्थ है और तेजी से विकसित हो रहा है। फीफा वर्ल्ड कप के माहौल में उसका फुटबॉल प्रेम लोगों को खास तौर पर आकर्षित कर रहा है। अब हालात यह हैं कि दलमा का नाम लेते ही लोगों के जेहन में ‘फुटबॉल खेलता हाथी बादल’ जरूर आता है। Source link

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