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झारखंड

बोकारो का लापता नाबालिग पुरी से बरामद:पिता के जेल जाने से चिंतित...

बोकारो पुलिस ने बालीडीह थाना क्षेत्र से लापता हुए एक नाबालिग को ओडिशा के पुरी से सकुशल बरामद कर लिया है। लगभग एक सप्ताह तक चले सघन तलाशी अभियान के बाद पुलिस को यह सफलता मिली। नाबालिग के सुरक्षित मिलने से उसके परिजनों ने राहत की सांस ली है। मुख्यालय डीएसपी पवन कुमार ने शनिवार को बताया कि बालीडीह थाना क्षेत्र के कुर्मीडीह गांव निवासी प्रतीक नामक नाबालिग 6 जून को अपने घर से अचानक चला गया था और वापस नहीं लौटा। इसके बाद उसकी मां के बयान पर बालीडीह थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल चार पुलिस टीमों का गठन किया गया। डीएसपी ने बताया कि जांच के दौरान रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के सहयोग से बोकारो रेलवे स्टेशन का सीसीटीवी फुटेज प्राप्त किया गया। फुटेज के आधार पर पुलिस ने नाबालिग की गतिविधियों का पता लगाया और रांची रेलवे स्टेशन सहित अन्य स्थानों पर भी जांच की। तकनीकी और मानवीय सूचना के आधार पर संबंधित ट्रेन की पहचान की गई। इसके बाद पुलिस टीम पुरी पहुंची, जहां से नाबालिग को सकुशल बरामद कर लिया गया। पुलिस टीम नाबालिग की मां के साथ पुरी से बोकारो के लिए रवाना हो चुकी है। प्रारंभिक जांच में अपहरण की आशंका से इनकार करते हुए डीएसपी ने कहा कि यह घटना अपहरण का नहीं, बल्कि पारिवारिक परिस्थितियों से जुड़ा मामला प्रतीत होता है। उन्होंने बताया कि नाबालिग के पिता अमित कुमार पहले से जेल में बंद हैं, जिससे वह मानसिक रूप से चिंतित था। इसी चिंता के कारण उसने घर छोड़ने का कदम उठाया था। पुलिस ने कहा कि नाबालिग के बोकारो पहुंचने और विस्तृत पूछताछ के बाद पूरे मामले का खुलासा हो जाएगा। Source link

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TMC Crisis Live:क्यों बिखर रही TMC, क्या अभिषेक बनर्जी जिम्मेदार? सुकांत मजूमदार...

TMC Crisis Live Updates: पश्चिम बंगाल की राजनीति में कभी अजेय मानी जाने वाली तृणमूल कांग्रेस अब अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजरती दिख रही है. विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद पार्टी के भीतर जो असंतोष शुरू हुआ था, वह अब खुली बगावत में बदलता नजर आ रहा है. एक समय ममता बनर्जी की सबसे मजबूत राजनीतिक दीवार मानी जाने वाली TMC अब अंदर से दरकती दिखाई दे रही है. विधायक, सांसद और पुराने नेता लगातार पार्टी लाइन से अलग होते जा रहे हैं. इसी बीच TMC सांसद अरूप चक्रवर्ती का NDA को समर्थन देने का संकेत ममता बनर्जी के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है. राजनीतिक गलियारों में इसे सिर्फ एक नेता का रुख बदलना नहीं, बल्कि TMC के अंदर तेजी से बढ़ती बेचैनी का बड़ा संकेत माना जा रहा है. पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठ रहे हैं और विपक्ष इसे ममता युग के कमजोर पड़ने की शुरुआत बता रहा है. इस बीच तृणमूल कांग्रेस नेता कीर्ति आजाद ने पार्टी में जारी बगावत के बीच बीजेपी पर बड़ा आरोप लगाया है. उन्होंने आरोप लगाया कि सांसदों को डराकर, धमकाकर और पैसे देकर तोड़ा जा रहा है. उन्होंने कहा कि ’50 लाख से 5 करोड़ रुपए तक देकर सांसदों को सेट किया गया.’ TMC में बगावत का यह दौर ऐसे समय में सामने आया है जब पार्टी पहले से ही कई मोर्चों पर दबाव झेल रही है. विधानसभा में 58 बागी विधायकों का अलग गुट बनाना, लोकसभा सांसदों के भीतर असंतोष और राज्यसभा में लगातार इस्तीफों ने पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. बारासात सांसद काकोली घोष दस्तिदार पहले ही दावा कर चुकी हैं कि करीब 20 सांसद उनके गुट के संपर्क में हैं और NDA को समर्थन देने के लिए तैयार हैं. अब अरूप चक्रवर्ती के समर्थन ने इस संकट को और गहरा कर दिया है. दूसरी तरफ अभिषेक बनर्जी से CID की लंबी पूछताछ ने भी राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है. TMC अब सिर्फ विपक्ष के हमलों से नहीं, बल्कि अपने ही नेताओं की नाराजगी से घिरी हुई दिख रही है. TMC के भीतर राजनीतिक संकट के बीच अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें भी बढ़ती दिख रही हैं. फर्जी हस्ताक्षर मामले में CID ने उनसे करीब साढ़े पांच घंटे तक पूछताछ की. सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसी उनके कई जवाबों से संतुष्ट नहीं थी. विपक्ष इसे TMC नेतृत्व पर बढ़ते दबाव के तौर पर देख रहा है. TMC Crisis Live: TMC में लोकतांत्रिक तरीके से नहीं चल रही थी संसदीय पार्टी: ऋतब्रत बनर्जी टीएमसी संकट लाइव: पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और TMC से निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी ने पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि अगर बागी सांसदों की संख्या 20 से ज्यादा भी हो जाए तो उन्हें हैरानी नहीं होगी, क्योंकि संसदीय दल को जिस तरीके से चलाया जा रहा था वह पूरी तरह लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ था. ऋतब्रत ने दावा किया कि सांसदों को स्वतंत्र रूप से सवाल पूछने का अधिकार नहीं दिया जा रहा था. उन्होंने कहा कि पिछले सत्र में उन्होंने कोई सवाल नहीं पूछा, क्योंकि पार्टी की रिसर्च टीम पहले से सवाल तय कर रही थी. उनके मुताबिक यह पूरी प्रक्रिया लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है. TMC Crisis News Live: पाप और भ्रष्टाचार की नींव पर बना TMC का किला ढह रहा: तरुण चुघ का हमला टीएमसी संक लाइव अपडेट्स: BJP नेता और राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ‘पाप, धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा, लूट और तुष्टिकरण की राजनीति पर बना TMC का जर्जर किला अब ताश के पत्तों की तरह बिखर रहा है.’ उन्होंने आरोप लगाया कि जिन नेताओं ने पश्चिम बंगाल को भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण का केंद्र बना दिया, अब जनता द्वारा सत्ता से बाहर किए जाने के बाद वही अपने कर्मों का बोझ झेल रहे हैं. TMC Crisis Live Updates: शाइना NC का ममता पर हमला: आप अब भी आंखों पर पट्टी बांधे हैं टीएमसी संकट न्यूज लाइव: शिवसेना की राष्ट्रीय प्रवक्ता शाइना NC ने तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए ममता बनर्जी पर अभिषेक बनर्जी से जुड़े आरोपों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया. फर्जी हस्ताक्षर विवाद और TMC के वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी के बयानों का जिक्र करते हुए शाइना ने कहा कि अब पार्टी के अपने नेता ही सवाल उठा रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि लगातार बढ़ते आरोपों और नेताओं के पार्टी छोड़ने के बावजूद ममता बनर्जी संकट को स्वीकार नहीं कर रही हैं. शाइना NC ने चेतावनी दी कि अगर TMC नेतृत्व ‘जागा नहीं’ तो पार्टी अस्तित्व के संकट में फंस सकती है. TMC Crisis Live: TMC भ्रष्टाचार जांच अभी सिर्फ शुरुआत: दिलीप घोष टीएमसी संकट लाइव: पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने कहा है कि तृणमूल कांग्रेस से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामलों में चल रही CID जांच ‘सिर्फ शुरुआत’ है. जलपाईगुड़ी में बातचीत के दौरान उन्होंने दावा किया कि TMC शासन के दौरान हुए कथित अपराधों में हर स्तर के लोग शामिल रहे हैं. दिलीप घोष ने कहा कि जांच लगातार आगे बढ़ रही है और जैसे-जैसे सबूत सामने आएंगे, उसी के मुताबिक कार्रवाई भी होगी. TMC Crisis News Live: अभिषेक बनर्जी के उभार से TMC में बढ़ी अंदरूनी कलह: सुकांत मजूमदार का दावा टीएमसी संक लाइव अपडेट्स: केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने दावा किया है कि तृणमूल कांग्रेस में बढ़ती दरार, खासकर सांसदों के बीच, अभिषेक बनर्जी के तेजी से बढ़ते प्रभाव को लेकर लंबे समय से चली आ रही नाराजगी का नतीजा है. सिलीगुड़ी में बातचीत के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि TMC के कई वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी की “पैराशूट एंट्री” से कभी सहज नहीं थे. मजूमदार ने यह भी कहा कि अब जब TMC सत्ता में नहीं है, तो पार्टी के भीतर दबे हुए मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं. TMC Crisis Live Updates: कीर्ति आजाद बोले- कल्याण बनर्जी और अभिषेक के बीच विवाद सुलझ गया टीएमसी संकट न्यूज लाइव: तृणमूल कांग्रेस में जारी सियासी घमासान के बीच सांसद कीर्ति आजाद ने दावा किया है कि कल्याण बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के बीच चल रहा विवाद अब सुलझ चुका है. उन्होंने कहा कि कल्याण बनर्जी भावुक इंसान हैं और ‘दीदी’

झारखंड

कचरे से कमाल कर रहीं जमशेदपुर की खुशबू, बनाती ऐसे सजावटी सामान,...

Last Updated:June 12, 2026, 10:24 IST Jamshedpur News: जमशेदपुर की खुशबू सिंह कचरे से ऐसे-ऐसे आइटम बनाती हैं कि उन्हें देखकर कोई नहीं कह सकता ये कूड़ा थे. प्लास्टिक वेस्ट से सजावटी सामान और नारियल के छिलकों से चिड़ियों के घोंसले बनाकर वह पर्यावरण संरक्षण की मिसाल पेश कर रही हैं. ख़बरें फटाफट जमशेदपुर. जमशेदपुर की खुशबू सिंह पर्यावरण संरक्षण की ऐसी मिसाल पेश कर रही हैं, जो लोगों को न सिर्फ स्वच्छता का संदेश दे रही हैं, बल्कि कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलने की प्रेरणा भी दे रही हैं. जहां अधिकांश लोग घरों से निकलने वाले प्लास्टिक और अन्य बेकार सामान को फेंक देते हैं, वहीं खुशबू सिंह एक भी प्लास्टिक या वेस्ट सामग्री को बेकार नहीं मानतीं. उनका मानना है कि सही सोच और थोड़ी रचनात्मकता से किसी भी अनुपयोगी वस्तु को आकर्षक और उपयोगी उत्पाद में बदला जा सकता है. नहीं होगा यकीन, ये हैं कचराखुशबू ने अपने घर को ही ‘बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट’ की एक जीवंत प्रदर्शनी बना दिया है. उन्होंने छोटे-छोटे प्लास्टिक के टुकड़ों को इकट्ठा कर बोतलों में भरकर आकर्षक सजावटी वृक्ष तैयार किए हैं. इसके अलावा घर में मौजूद खाली प्लास्टिक और कांच की बोतलों को रंग-बिरंगे डिजाइन देकर खूबसूरत फ्लावर वास, लैंप होल्डर और कई सजावटी वस्तुओं का रूप दिया है. उनके घर में रखे उत्पादों को देखकर यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि वे कभी फेंकने योग्य कचरे का हिस्सा थे. आजकल बना रहीं पक्षियों के आशियानेगर्मियों के मौसम में पक्षियों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खुशबू सिंह इन दिनों नारियल के छिलकों से चिड़ियों के लिए घोंसले तैयार कर रही हैं. अब तक वे 150 से अधिक घोंसले बना चुकी हैं और हर दिन 3 से 4 नए घोंसले तैयार करती हैं. उनका लक्ष्य अधिक से अधिक पक्षियों को सुरक्षित और ठंडा आशियाना उपलब्ध कराना है, ताकि भीषण गर्मी में उन्हें राहत मिल सके. नेचुरल तरीके से बनता है घोंसलाघोंसला बनाने की प्रक्रिया भी बेहद रोचक और पर्यावरण के अनुकूल है. सबसे पहले नारियल के छिलकों को अच्छी तरह साफ कर सुखाया जाता है. इसके बाद एक गुब्बारे की सहायता से उसका आकार तैयार किया जाता है और मजबूत सूत से बांधा जाता है. फिर उस पर फेविकोल और कोकोपीट की परत लगाई जाती है, जिससे घोंसला मजबूत, सुंदर और अंदर से ठंडा बना रहता है. यह प्राकृतिक संरचना चिड़ियों के रहने के लिए सुरक्षित वातावरण प्रदान करती है. बच्चों और युवाओं को ट्रेनिंग भी देती हैंखुशबू सिंह केवल स्वयं तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि बच्चों और युवाओं को भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक कर रही हैं. वे समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर बच्चों को सिखाती हैं कि किस प्रकार घर और आसपास के कचरे को उपयोगी वस्तुओं में बदला जा सकता है. उनका प्रयास नई पीढ़ी में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है. कचरे से भी हो सकता है पर्यावरण संरक्षणइसके अलावा वे अपनी टीम और स्वच्छता पुकारो के साथ नदी एवं सार्वजनिक स्थानों पर सफाई अभियान भी चलाती हैं. सफाई के दौरान जो भी अनुपयोगी सामग्री मिलती है, उसे अपने साथ लाकर नए उत्पादों में बदल देती हैं. खुशबू सिंह का यह अनोखा प्रयास साबित करता है कि अगर इच्छाशक्ति और रचनात्मक सोच हो, तो कचरा भी पर्यावरण संरक्षण और समाज सेवा का सशक्त माध्यम बन सकता है. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jamshedpur,Purbi Singhbhum,Jharkhand Source link

झारखंड

स्कूलों में 75% से कम उपस्थिति वाले छात्रों को परीक्षा फॉर्म नहीं...

भास्कर न्यूज | लातेहार उपायुक्त संदीप कुमार ने बैठक कर शिक्षा विभाग से जिले के सरकारी विद्यालयों में संचालित शैक्षणिक गतिविधियों, शिक्षक उपस्थिति एवं प्रशासनिक कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने विद्यालयों में शिक्षकों एवं छात्रों की उपस्थिति की जानकारी ली। सभी प्रखंडों में ई-विद्या वाहिनी से शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने की बात कही। अपार आईडी जेनरेशन का कार्य निर्धारित समय पर शत-प्रतिशत पूरा करने, विद्यार्थियों का आधार कार्ड बनवाने के लिए इस प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। उपायुक्त ने कहा कि विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। जिन विद्यार्थियों की उपस्थिति 75 प्रतिशत से कम है, उन्हें परीक्षा प्रपत्र (फॉर्म) भरने की अनुमति नहीं दी जाए। साथ ही, विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने बच्चों के नामांकन एवं उपस्थिति की जानकारी लेते हुए सभी प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी को अपने क्षेत्र अंतर्गत स्कूलों का निरंतर निरीक्षण कर विद्यालय में विद्यार्थियों की उपस्थिति, शौचालय एवं पीने की पानी समेत अन्य सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित कराने, जिले के प्रत्येक स्कूलों का संचालन सही तरीके से करते हुए स्कूलों में बच्चों के ड्रेस, पानी एवं शौचालय के साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उपायुक्त ने पीएम पोषण (मध्याहन भोजन) योजना की समीक्षा करते हुए डीएसई को जिले का आच्छादन दर बढ़ाने, शत प्रतिशत बच्चों को ससमय राशन, पुस्तक एवं योग्य बच्चो को छात्रवृत्ति, स्कूलों में नियमित हेल्थ चेकअप शिविर लगाकर बच्चों के स्वास्थ्य की जांच अनिवार्य कराने के निर्देश दिए। बैठक में डीडीसी सैय्यद रियाज अहमद, डीईओ प्रिंस कुमार, डीएसई गौतम कुमार साहू, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. चंदन के अलावे सभी बीईईओ समेत अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे। Source link

शिक्षा

NTA Issues Guidelines, Rough Work Sheet Increased

Hindi News Career NEET UG Re Exam 2026: NTA Issues Guidelines, Rough Work Sheet Increased 16 मिनट पहले कॉपी लिंक नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA ने NEET UG रीएग्‍जाम में कुछ बदलाव किए हैं। नए नोटिस के तहत, परीक्षा का समय अब 180 मिनट से बढ़ाकर 195 मिनट कर दिया गया है। इसके अलावा आंसर शीट में रफ वर्क के लिए भी जगह बढ़ाई गई है। NEET UG 2026 इस साल पेपर लीक के चलते रद्द कर दिया गया था। रीएग्‍जाम अब 21 जून को आयोजित किया जाना है जिसे लेकर नए बदलाव किए गए हैं। NEET-UG परीक्षा 3 मई 2026 को हुई थी, लेकिन पेपर लीक के आरोपों के बाद 12 मई को NTA ने इसे रद्द कर दिया। मामले की जांच CBI कर रही है और अब 21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा होगी। लॉकडाउन में रहेंगे पेपर सेटर्स एग्जाम होने तक पेपर सेटर्स को कड़े प्रतिबंध का पालन करना होगा। उन्‍हें 21 जून तक लॉकडाउन में रखा जाएगा ताकि पेपर लीक होने की आशंका न रहे। एग्जाम आयोजन के लिए देश भर के 551 शहर और विदेशों में 14 शहरों को चुना गया है। पेपर ले जाने के लिए एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल अधिकारियों के अनुसार एग्जाम से संबंधित सभी काम जैसे प्रश्नों की सेटिंग, ट्रांसलेशन, प्रिंटिंग, पैकेजिंग, स्टोरेज से लेकर ट्रांसपोर्टेशन और डिस्ट्रिब्यूशन की कड़ी निगरानी रखी जा रही है। सरकार द्वारा क्वेश्चन पेपर से संबंधित सभी सामान ले जाने के लिए इंडियन एयरफोर्स एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल किया जाएगा। डिजिटल क्षेत्र में अधिकारी 24 घंटे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग पर नजर जमाए हुए हैं ताकि फेक क्वेश्चन पेपर, गलत सूचनाओं और संदिग्ध गतिविधियों को एग्जाम से दूर रखा जा सके। एक्सपर्ट को खुद पता नहीं होगा कि किस एग्जाम के पेपर बना रहे हैं NTA ऐसा नया सिस्टम बनाने पर काम कर रही है, जिसमें सवाल तैयार करने वाले एक्पर्ट्स को भी पता नहीं होगा कि वह किस एग्जाम के क्वेश्चन पेपर बना रहे हैं। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की नई योजना के तहत अलग-अलग सब्जेक्ट के एक्सपर्ट्स सिर्फ प्रश्न तैयार करेंगे। इन प्रश्नों को एक बड़े डिजिटल बैंक में रखा जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, इसमें करीब 10 हजार प्रश्न हो सकते हैं। बाद में टेक्निक की मदद से इन प्रश्नों से फाइनल एग्जाम पेपर तैयार होगा। NEET से 1 लाख से ज्यादा मेडिकल कॉलेज में एडमिशन नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) भारत में मेडिकल और डेंटल कोर्सेज में एडमिशन के लिए होने वाली राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा है। इसकी शुरुआत 2013 में हुई थी। इस परीक्षा के माध्यम से देश के सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS, BDS, आयुष (BAMS, BHMS) और नर्सिंग जैसे कोर्सेज में एडमिशन मिलता है, जिसमें AIIMS और JIPMER जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी शामिल हैं। ————— ये खबर भी पढ़ें इंजीनियर की नौकरी बोरिंग लगी तो नूडल्‍स का स्‍टॉल लगाया:मेटा की नौकरी छोड़ी, मदद करती गर्लफ्रेंड के साथ वीडियो वायरल फाइनेंशियल एडवाइजर और कंटेंट क्रिएटर लुइसा ते ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो इंटरव्यू शेयर किया। ये इंटरव्यू एल्विन का है जो मेटा कंपनी से नौकरी छोड़ कर नूडल्स बेचने का काम कर रहे थे। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं… Source link

झारखंड

ट्रेलर ने कार में मारी टक्कर, दो स्कूली छात्राएं घायल:CCTV में कैद...

पश्चिमी सिंहभूम जिले के आयता गांव चौक पर शुक्रवार सुबह एक सड़क हादसे में दो स्कूली छात्राएं घायल हो गईं। हादसा ट्रेलर द्वारा एक कार को टक्कर मारने की वजह से हुआ। छात्राएं सड़क किनारे स्कूल बस के इंतजार में एक होटल के पास खड़ी थी। इसी दौरान होटल की ओर मुड़ रही एक कार को ट्रेलर ने टक्कर मार दी और कार घिसटती हुई छात्राओं को अपनी चपेट में ले लिया। स्थानीय लोगों की मदद से छात्राओं को अस्पताल में भर्ती कराया गया। ट्रेलर के ड्राइवर की लोगों ने पिटाई भी की इधर, हादसे का सीसीटीवी सामने आया है। वहीं, घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने चाईबासा-टाटा मुख्य मार्ग को तीन घंटे तक जाम कर दिया, जिससे यातायात बाधित रहा। ट्रेलर के ड्राइवर की लोगों ने पिटाई भी की। मौके पर पहुंची पुलिस ने ड्राइवर को भीड़ के चंगुल से छुड़ाया। घायल छात्राओं की पहचान सात वर्षीय अनुष्का कुमारी पान और आठ वर्षीय लवली तांती के रूप में की गई। हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने दोनों छात्राओं को चाईबासा सदर अस्पताल पहुंचाया। एक छात्रा को आई गंभीर चोट जांच में अनुष्का के सिर और छाती में गंभीर चोटें पाई गईं, जिसके बाद उसे बेहतर इलाज के लिए जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल रेफर किया गया। वहीं, लवली तांती को मामूली चोटें आई हैं और उसकी स्थिति खतरे से बाहर बताई गई है। घटना से नाराज ग्रामीणों ने सड़क जाम कर ट्रेलर चालक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। जाम के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाकर शांत किया। करीब तीन घंटे बाद जाम हटाया गया और यातायात व्यवस्था सामान्य हो सकी। Source link

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बालाघाट के इस चावल के एक नहीं दो पीएम थे दीवाने, जीआई...

Last Updated:June 12, 2026, 13:08 IST चिन्नौर चावल, जो दिखने में सामान्य और स्वाद में लाजवाब है. चावल की यह किस्म बालाघाट की ही पैदाइश है. बालाघाट के वारासिवनी इलाके में इसका उत्पादन होता है. चिन्नौर चावल को पूर्व प्रधानमंत्रियों की भी पसंद बन चुका था.साल 2022 में चिन्नौर के लिए बालाघाट को जीआई टैग मिला. ये है चिन्नौर चावल की पहचान चिन्नौर चिकना और नोकदार राइस है. मध्य प्रदेश के बालाघाट को धान का कटोरा कहा जाता है. यहां पर धान की खेती  प्रमुखता से की जाती है. यहां पर धान की कई पारंपरिक किस्मों की खेती होती है, जिसकी डिमांड न सिर्फ इंडिया में बल्कि विदेशों में भी काफी है. इसी में से एक है चिन्नौर चावल, जो दिखने में सामान्य और स्वाद में लाजवाब है. चावल की यह किस्म बालाघाट की ही पैदाइश है. बालाघाट के वारासिवनी इलाके में इसका उत्पादन होता है. चिन्नौर चावल को पूर्व प्रधानमंत्रियों की भी पसंद बन चुका था. इंदौर में आयोजित ब्रिक्स कृषि सम्मेलन के ग्रामीण हाट बाजार में विशेष कृषि उत्पाद में बालाघाट के चिन्नौर चावल का भी प्रदर्शन रहा. जहां पर कई देशों के प्रतिनिधि मंडल ने चावल की काफी सराहना की थी. ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिन्नौर चावल को अलग पहचान मिलने की संभावना है. इससे किसानों के एफपीओ भी बन सकते हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी निर्यात पहले से बढ़ जाएगा. अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमका चिन्नौर चावलबालाघाट के चिन्नौर को मिली थी नई पहचानबालाघाट के वारासिवनी के कायदी इलाके में चिन्नौर चावल की उपज हुई. ऐसे माना जाता है. यहां की जलवायु चावल के लिए सबसे बढ़िया है. ऐसे में साल 2019 में बालाघाट के कृषि विभाग ने चावल निदेशालय हैदराबाद में जीआई टैग का दावा किया. साल 2022 में चिन्नौर के लिए बालाघाट को जीआई टैग मिला. ये है चिन्नौर चावल की पहचान चिन्नौर चिकना और नोकदार राइस है. चावल का स्वाद मीठा है और साथ ही मुलायम लगता है. इसको पकने में काफी कम समय लगता है. इसलिए इसे खीर के लिए बेहतर माना जाता है. ठंडा होने के बाद भी यह चावल नर्म रहता है. अगर आपको असली चिन्नौर की पहचान करनी है, तो उसके पांच से छः दाने अच्छे से चबाकर खा लो तो उसका स्वाद लंबे समय तक मुंह में बना रहता है.  इनमें राइस ब्रान की मात्रा 17-18 प्रतिशत होती है. वहीं चिन्नौर धान की बात करें तो इसमें 20-21 प्रतिशत होती है. दो प्रधानमंत्रियों से जुड़ा है किस्सावारासिवनी के रहने वाले अनिल पिपरवार ने बताया कि एक समय था जब बालाघाट के कायदी से देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के लिए चिन्नौर चावल जाता था. उसके बाद भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी बालाघाट के मलाजखंड आई थी तब उन्हें चिन्नौर चावल भेंट किए गए थे. उसके बाद भी कई बार बालाघाट से दिल्ली उनके लिए चावल भेजे गए. अब भी नाराज है चिन्नौर उत्पादक किसानअनिल पिपलेवार का कहना है कि भले ही बालाघाट के चिन्नौर चावल को जीआई टैग मिल चुका है. लेकिन उस स्तर की वैश्विक पहचान नहीं मिल सकी है. वहीं, किसानों को भी उतना लाभ नहीं मिल पा रहा है. ऐसे में सरकार इस चावल को और भी बेहतर ढंग प्रचारित करना चाहिए. सबसे जरूरी है कि इसकी मार्केटिंग का ख्याल रखना चाहिए ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान इसकी खेती कर सकें. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Balaghat,Balaghat,Madhya Pradesh Source link

झारखंड

पलामू में पानी पीने पहुंचे जानवरों पर रखी गई नजर, जंगल में...

Last Updated:June 12, 2026, 13:19 IST Palamu News: भीषण गर्मी में जब जंगल के जलस्रोत सूखने लगते हैं, तब वन्यजीव पानी की तलाश में तय जगहों पर पहुंचते हैं. इसी दौरान पलामू टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की गिनती और निगरानी के लिए विशेष वाटरहोल सेंसस कराया गया. ये बेहतरीन तरीका है जिससे जानवरों की गिनती की जाती है और डेटा कलेक्ट किया जाता है. ख़बरें फटाफट पलामू. भीषण गर्मी के मौसम में जब जंगल के अधिकांश जलस्रोत सूखने लगते हैं, तब वन्यजीव पानी की तलाश में सीमित जलस्रोतों की ओर रुख करते हैं. इसी अवसर का उपयोग कर पलामू टाइगर रिजर्व (PTR) में वन्यजीवों की निगरानी और उनकी संख्या का आकलन करने के लिए पारंपरिक वाटरहोल गणना (वाटरहोल सेंसस) की जाती है. इस वर्ष भी ‘वाटरहोल गणना 2026’ का सफल आयोजन किया गया, जिसमें वन कर्मियों और स्वयंसेवकों ने मिलकर 14 घंटे तक लगातार जंगल के विभिन्न जलस्रोतों पर नजर रखी. इसी क्षेत्र से शुरू हुई थी बाघों की गणनापलामू टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जैना ने बताया कि पलामू टाइगर रिजर्व का देश में एक खास इतिहास रहा है. भारत में बाघों की गणना की शुरुआत भी इसी क्षेत्र से हुई थी. वन्यजीवों के अध्ययन और संरक्षण के क्षेत्र में पलामू लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है. उन्होंने बताया कि वाटरहोल सेंसस वन्यजीवों की निगरानी की एक पारंपरिक और वैज्ञानिक तरीका है, जिसका उपयोग आज भी प्रभावी रूप से किया जा रहा है. पानी पीने आते हैं, तब होती है गणनाउन्होंने कहा कि यह एक मौसमी गतिविधि है, जो मुख्य रूप से गर्मी के दिनों में आयोजित की जाती है. इस दौरान जंगल के जानवर पानी पीने के लिए तय जलस्रोतों पर आते हैं. ऐसे में वन विभाग के कर्मचारी और प्रशिक्षित स्वयंसेवक मचानों तथा छिपे हुए स्थानों से उनकी गतिविधियों पर नजर रखते हैं. इससे यह जानकारी मिलती है कि कौन-सा वन्यजीव किस जलस्रोत पर आता है, कितनी संख्या में आता है और उसका समय क्या होता है. आसान हो जाती है गिनतीगणना के दौरान हर वाटरहोल पर विशेष डेटा शीट उपलब्ध कराई गई थी, जिसमें वन्यजीवों के आने का समय, प्रजाति, नर-मादा और शावकों की अनुमानित संख्या सहित अन्य जरूरी जानकारियां दर्ज की गईं. शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार हाथी, तेंदुआ, गौर, चीतल, सांभर, कोटरा, भालू और सियार जैसे कई महत्वपूर्ण वन्यजीवों की मौजूदगी दर्ज की गई है. इससे जंगल के जानवरों की गणना करना आसान हो जाता है. सबसे भरोसेमंद तरीका माना जाता हैवन अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की गणना से न केवल वन्यजीवों की मौसमी गतिविधियों का आकलन होता है, बल्कि यह भी पता चलता है कि कौन से जलस्रोत वन्यजीवों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं. जुटाए गए आंकड़ों का वैज्ञानिक विश्लेषण भविष्य में जलस्रोतों के बेहतर प्रबंधन, कृत्रिम जल आपूर्ति की व्यवस्था और शिकार विरोधी अभियान को मजबूत बनाने में सहायक साबित होगा. यही वजह है कि वाटरहोल गणना आज भी वन्यजीव संरक्षण की सबसे भरोसेमंद पारंपरिक तरीकों में से एक मानी जाती है. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Palamu,Jharkhand Source link

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भाजपा की मासिक बैठक में बूथ मजबूती पर जोर

भास्कर न्यूज | दुमका भारतीय जनता पार्टी दुमका जिला की मासिक पदाधिकारी बैठक गुरवार को दुमका परिसदन में जिलाध्यक्ष रूपेश मंडल की अध्यक्षता में हुई। बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व स्वास्थ्य मंत्री भानु प्रताप शाही उपस्थित रहे, जबकि जिला प्रभारी अशोक उपाध्याय विशेष रूप से शामिल हुए। बैठक में चल रहे संगठनात्मक अभियानों की समीक्षा के साथ-साथ आगामी जनसंपर्क कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई। बूथ स्तर तक संगठन को और सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया। शाही ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा जनता के सुख-दुख की सहभागी पार्टी है। जिला प्रभारी अशोक उपाध्याय ने संगठनात्मक समन्वय और अनुशासन पर जोर देते हुए आगामी कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक संचालित करने के निर्देश दिए। बैठक में जिला पदाधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की संगठनात्मक स्थिति और स्थानीय समस्याओं की जानकारी साझा की। बैठक में रूपेश मंडल, भानु प्रताप शाही, अशोक उपाध्याय, मृणाल कुमार मिश्रा, निवास मंडल, परितोष सोरेन, गौरव कांत, सीताराम पाठक, रविकांत मिश्रा, सुरेश मुर्मू सहित बड़ी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे। Source link

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चतरा के तरवागड़ा गांव में अब भी सड़क नहीं:ग्रामीणों ने श्रमदान से...

झारखंड के चतरा जिले में प्रशासनिक उदासीनता का एक मामला सामने आया है। हंटरगंज प्रखंड के तरवागड़ा पंचायत के शाही नौडीहवा टोला गांव में आजादी के 78 साल बाद भी पक्की सड़क का निर्माण नहीं हो पाया था। सरकारी वादों से निराश ग्रामीणों ने स्वयं सड़क बनाने का निर्णय लिया। ग्रामीणों ने आपस में चंदा इकट्ठा किया और श्रमदान के माध्यम से एक किलोमीटर लंबी कच्ची सड़क का निर्माण किया। यह पहल नेताओं और अधिकारियों द्वारा किए गए वादों के पूरा न होने के कारण की गई। गांव को इतने वर्षों बाद भी पक्की सड़क नहीं मिल पाई थी। विशेषकर बरसात के मौसम में यह रास्ता कीचड़ और गड्ढों में तब्दील हो जाता था। इससे स्कूली बच्चों, किसानों और मरीजों को आवागमन में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता था, जिससे उनकी जान को भी जोखिम होता था। आपसी सहयोग से चंदा इकट्ठा किया गांव के उमेश यादव, शंभू यादव, राजदेव यादव समेत सैकड़ों ग्रामीणों ने एक बैठक की और आपसी सहयोग से चंदा इकट्ठा किया। उस राशि से गांव में एक जेसीबी मशीन मंगवाई गई। इसके बाद क्या युवा, क्या बुजुर्ग और क्या महिलाएं, सभी टोकरी और फावड़ा लेकर निकल पड़े। ग्रामीणों की दिन-रात की कड़ी मेहनत का नतीजा यह हुआ कि पंचफेडवा मैदान से पीसीसी मुख्य मार्ग शाही तक 1 किलोमीटर लंबी कच्ची सड़क बनकर तैयार हो गई। ग्रामीणों ने बताया कि इस सड़क की बदहाली का आलम यह था कि दूसरे गांव के लोग हमारे गांव में अपनी बेटी की शादी करने से कतराते थे। ग्रामीणों ने अब सरकार और जिला प्रशासन से इस मार्ग पर अविलंब पीसीसी सड़क निर्माण कराने की मांग की है, ताकि आने वाले मानसून में यह मिट्टी दोबारा कीचड़ में न बदल जाए। Source link

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