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झारखंड

सिल्ली-ईलू ट्रैक बनने के बाद रांची से कोलकाता जाने में 45 मिनट...

सिल्ली-ईलू बाईपास रेल लाइन परियोजना का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। उपलब्ध भूमि पर लगभग 50 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है, जबकि वर्तमान में रेलवे ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है। यह परियोजना दक्षिण-पूर्व रेलवे की महत्वपूर्ण योजनाओं में शामिल है। इसके पूरा होने से रांची, टाटानगर तथा कोलकाता के बीच रेल यात्रा अधिक सुगम हो जाएगी। अभी रांची से मुरी होकर कोलकाता और टाटा की ओर जाने वाली ट्रेनों को मुरी जंक्शन पर इंजन रिवर्सल करना पड़ता है, जिसमें करीब 35 मिनट का समय लगता है। इसके अलावा सिल्ली से मुरी तक पहुंचने में भी लगभग 10 मिनट लगते हैं। नई बाईपास लाइन शुरू होने के बाद ट्रेनों को मुरी जंक्शन जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे यात्रियों का लगभग 45 मिनट का समय बचेगा। ट्रेनों का परिचालन भी अधिक तेज एवं सुविधाजनक होगा और मुरी स्टेशन का लोड भी घटेगा। उप मुख्य अभियंता (निर्माण) एनके मीणा ने बताया कि परियोजना का कार्य लगातार जारी है और मार्च 2028 के निर्धारित लक्ष्य से पहले इसके पूरा होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि 1.47 हेक्टेयर सरकारी भूमि के अधिग्रहण का प्रस्ताव भेजा जा चुका है और यह प्रक्रिया जल्द ही पूरी हो जाएगी। वहीं 9.57 हेक्टेयर रैयती भूमि के अधिग्रहण के लिए जिला भूमि अधिग्रहण विभाग को भुगतान कर दिया गया है। रैयतों को मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। सिल्ली स्टेशन पर भी बढ़ रहीं सुविधाएं, क्षेत्र के लोगों को होगा सीधा फायदा सिल्ली रेलवे स्टेशन का भी तेजी से विस्तारीकरण किया जा रहा है। स्टेशन पर परिचालन संबंधी कार्यों को बेहतर बनाने के लिए नए भवन का निर्माण किया जा रहा है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, सिल्ली-ईलू बाईपास रेल लाइन के चालू होने का सबसे बड़ा लाभ सिल्ली क्षेत्र के लोगों को मिलेगा। अभी टाटानगर और कोलकाता मार्ग की ट्रेन पकड़ने के लिए यात्रियों को मुरी जाना पड़ता है। नई लाइन बनने के बाद उन्हें मुरी जाने की जरूरत नहीं होगी। रांची रेल मंडल की सीनियर डीसीएम श्रेया सिंह ने बताया कि ईलू-सिल्ली बाईपास रेलवे लाइन का मुख्य उद्देश्य ट्रेनों को मुरी जंक्शन पर रिवर्सल और अतिरिक्त परिचालन समय से बचाते हुए सीधा मार्ग उपलब्ध कराना है। परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है और इसके पूरा होने के बाद रेल संचालन अधिक सुगम एवं प्रभावी हो जाएगा। साथ ही यात्रा समय में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। बॉक्स – 1] सिल्ली-ईलू बाईपास लाइन एट ए ग्लेंस: लंबाई: 6 किमी. लंबी सिल्ली-ईलू बाईपास रेल लाइन का निर्माण चल रहा है। लागत: 137.23 करोड़ रुपये अनुमानित लागत। भूमि की स्थिति: 3.4 किमी. रेल लाइन के लिए भूमि अभी उपलब्ध है, जबकि शेष 11.04 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। रूट कनेक्टिविटी: रांची – सिल्ली – ईलू – कोटशिला/चांडिल/रामगढ़। बॉक्स – 2] 12.5 किमी. कानारोवां-टाटी सेक्शन का निरीक्षण हटिया-ओरगा डबल रेललाइन परियोजना के अंतिम चरण में मंगलवार और बुधवार को 12.5 किमी. लंबे कानारोवां-टाटी सेक्शन का महत्वपूर्ण निरीक्षण किया गया। रेलवे संरक्षा आयुक्त (CRS) बृजेश कुमार मिश्रा ने इसका गहन निरीक्षण किया। इस दौरान मंडल रेल प्रबंधक (DRM) रांची करुणा निधि सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। Source link

शिक्षा

NTA Meets Panel, Suggests Learning From China-US Exam Systems

Hindi News National NEET Exam: NTA Meets Panel, Suggests Learning From China US Exam Systems नई दिल्ली12 मिनट पहले कॉपी लिंक भारत में चीन की प्रवक्ता यू जिंग ने गाओकाओ से जुड़ा एक वीडियो X पर शेयर किया है। NEET UG पेपर लीक मामले के बीच नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने बुधवार को संसदीय समिति से मुलाकात की। उन्होंने परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी। बैठक में NTA के डायरेक्टर जनरल अभिषेक सिंह और नेशनल मेडिकल काउंसिल अध्यक्ष अभिजात शेठ शामिल हुए। समिति के सदस्यों ने सुझाव दिया कि हमें अमेरिका और चीन जैसे देशों से सीखना चाहिए। वहां बिना किसी शिकायत के परीक्षाएं होती हैं। विदेशों में अपनाए जाने वाले अच्छे तरीकों से सीखें और ऐसे सिस्टम अपनाएं ताकि देश में परीक्षा व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित और पुख्ता हो। इधर, भारत में चीन की प्रवक्ता यू जिंग ने एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने गाओकाओ को दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा बताया। साथ ही लिखा- यह भारत के JEE-NEET का संयुक्त रूप है। 2 दिन में 1.3 करोड़ छात्रों ने हिस्सा लिया। इनके लिए कारखानों ने काम रोका। सड़कें सूनी रहीं। पूरा देश छात्रों के लिए एकजुट हो गया। भारत में NEET में आमतौर पर 20 लाख से ज्यादा और JEE में करीब 15 लाख उम्मीदवार बैठते हैं। 2026 में हुआ 3 मई को हुआ अंडरग्रेजुएट मेडिकल एडमिशन एग्जाम पेपर लीक के आरोपों के कारण 12 मई को रद्द कर दिया गया था। 21 जून को इसे दोबारा करवाया जा रहा है। चीनी प्रवक्ता का X पोस्ट… तीसरी संसदीय समिति के सामने पेश हुए NTA-NMC के अधिकारी NEET-UG पेपर विवाद के बाद यह तीसरी संसदीय समिति थी जिसके सामने दोनों मंत्रालयों, NTA और NMC के अधिकारी पेश हुए थे। इससे पहले वे शिक्षा और सरकारी आश्वासनों से जुड़ी संसदीय समितियों के सामने पेश हो चुके थे। इन समितियों को बताया गया था कि अभी उनका पूरा ध्यान 21 जून को होने वाली NEET की दोबारा परीक्षा पेन-पेपर फॉर्मेट में कराने पर है। इधर, संसदीय समिति ने हालिया विवाद के बाद एनटीए का मनोबल बढ़ाने की बात भी कही। उन्होंने छात्रों का तनाव कम करने और एनटीए-एनएमसी के बीच तालमेल पर जोर दिया ताकि सीटें खाली न रहें। सदस्यों ने छात्रों के बीच आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई। उन्होंने सरकार से उन छात्रों के परिवारों की मदद करने को भी कहा जिन्होंने आत्महत्या की थी। साल में 2-3 बार करवाया जाए एग्जाम भारत की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG फिलहाल साल में एक बार एक ही सेशन में होती है। संसदीमय समिति के सदस्यों ने साल में 2-3 बार NEET-UG करवाने का सुझाव भी दिया ताकि छात्रों को परीक्षा पास करने के कई मौके मिलें। वे ऐसी वजहों से परेशान न हों जो उनके नियंत्रण से बाहर हों। साल में कई बार NEET आयोजित करने की मांग भी बार-बार उठाई जाती रही है। जुलाई 2018 में, तत्कालीन केंद्रीय HRD मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने घोषणा की थी कि NTA साल में दो बार JEE Main और NEET-UG आयोजित करेगा। हालाँकि, इसे कभी लागू नहीं किया गया। हालांकि, 2023 में नेशनल मेडिकल कमीशन ने कहा था कि साल में दो बार NEET-UG आयोजित करना व्यावहारिक नहीं होगा क्योंकि सभी MBBS सीटें एक ही काउंसलिंग प्रक्रिया के जरिए भरी जाती हैं। NEET पेपर लीक में अब तक 13 गिरफ्तार, 21 जून को परीक्षा NEET-UG परीक्षा 3 मई को देश के 551 शहरों और विदेश के 14 सेंटर्स में हुई थी। इसमें करीब 23 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे। NTA के अनुसार 7 मई की शाम परीक्षा में गड़बड़ी की सूचना मिली थी। इसके बाद मामला केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा गया। 12 मई को परीक्षा रद्द की गई और री-एग्जाम का फैसला लिया गया। 15 मई को शिक्षा मंत्रालय और NTA ने NEET री-एग्जाम की तारीख 21 मई को होने का ऐलान किया। इस मामले की जांच CBI कर रही है। अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। NEET से 1 लाख से ज्यादा मेडिकल कॉलेज में एडमिशन नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) भारत में मेडिकल और डेंटल कोर्सेज में दाखिले के लिए होने वाली राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा है। इसकी शुरुआत 2013 में हुई थी। इस परीक्षा के माध्यम से देश के सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS, BDS, आयुष (BAMS, BHMS) और नर्सिंग जैसे कोर्सेज में दाखिला मिलता है, जिसमें AIIMS और JIPMER जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी शामिल हैं। भी देश में लगभग 1 लाख से अधिक MBBS और 27000 से अधिक BDS सीटें हैं। ————————— ये खबर भी पढ़ें… NEET पेपर लीक करवाने वाले 5 आरोपियों के घर पहुंचा भास्कर: कोई बेटे को टॉपर बनाना चाहता था था, कोई 2BHK फ्लैट में रह रहा 3 मई को NEET एग्जाम हुआ। अगले दिन पेपर लीक की बात सामने आने लगी। हालांकि, एग्जाम कराने वाली एजेंसी NTA दावा कर रही है कि पेपर लीक हुआ ही नहीं। 8 मई को जांच CBI को सौंपी गई।12 मई को एग्जाम रद्द कर दिया गया। इस मामले में 13 लोग गिरफ्तार किए गए। 9 महाराष्ट्र के हैं। दैनिक भास्कर की टीम इनमें से 5 प्रमुख किरदारों के घर और संस्थानों तक पहुंची। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं… Source link

झारखंड

सचिव 10 दिन से नहीं, परीक्षा नियंत्रक का पद 8 साल से...

Hindi News Local Jharkhand Ranchi The Secretary Has Been Absent For 10 Days, The Post Of Controller Of Examinations Has Been Vacant For 8 Years, And The Institution With 2.4 Million Students Has Been Vacant. रांची4 घंटे पहले कॉपी लिंक रांची राज्य के 24 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षाओं, परिणामों और प्रमाणपत्रों का जिम्मा संभालने वाला झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) इन दिनों लगभग बिना स्थायी प्रशासनिक ढांचे के संचालित हो रहा है। स्थिति यह है कि जैक चेयरमैन को छोड़कर सचिव, उपाध्यक्ष, परीक्षा नियंत्रक और संयुक्त सचिव जैसे अधिकांश पद या तो खाली हैं या अतिरिक्त प्रभार के भरोसे चल रहे हैं। इसका असर जैक के कामकाज पर साफ दिखने लगा है। 16 जून से मध्यमा व मदरसा परीक्षा पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। वहीं स्क्रूटनी, वेरिफिकेशन, प्रमाणपत्र वितरण और स्कूलों की प्रस्वीकृति समेत अन्य कार्य प्रभावित हो गए हैं। कौन-सा पद कब से खाली जैक सचिव का पद पिछले 10 दिनों से खाली है। उपाध्यक्ष का पद करीब 18 महीने से रिक्त पड़ा है। दो संयुक्त सचिवों में एक का पद 30 महीने से खाली है, जबकि दूसरे पद पर कार्यरत अधिकारी अतिरिक्त प्रभार में हैं। परीक्षा नियंत्रक का पद पिछले 8 वर्षों से भरा ही नहीं गया है, जबकि झारखंड अधिविद्य परिषद अधिनियम में इस पद का स्पष्ट प्रावधान है। इन कार्यों पर असर सचिव के अभाव में मध्यमा और मदरसा परीक्षा की तैयारियां प्रभावित हो रही हैं। परीक्षा 16 जून से है, लेकिन प्रवेश पत्र डाउनलोड नहीं हो पा रहे हैं। जैक ने प्रवेश पत्र डाउनलोड की समय-सीमा 12 जून तक बढ़ा दी है। स्क्रूटनी की प्रक्रिया ठप पड़ गई है। कई छात्र विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होने के बाद अपने अंकों के पुनर्मूल्यांकन की मांग कर रहे हैं। वेरिफिकेशन कार्य भी प्रभावित है। वहीं 8, 9 और 11 की विशेष परीक्षाओं से जुड़े कार्य लंबित हैं। याचिका दायर करेगा मोर्चा वित्तरहित संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष फजलुल कदीर अहमद, रघुनाथ सिंह समेत अन्य ने कहा कि तीन दिनों के भीतर जैक में सचिव की नियुक्ति नहीं की गई तो 16 जून को झारखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की जाएगी। इसके अलावा 12 जून को राज्यभर के प्राचार्यों, प्रधानाचार्यों और शिक्षक प्रतिनिधियों की बैठक होगी, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी। शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी संघर्ष मोर्चा ने जैक में रिक्त पड़े महत्वपूर्ण पदों को शीघ्र भरने की मांग की है। मोर्चा के अध्यक्ष मंडल के रघुनाथ सिंह का कहना है कि सचिव की नियुक्ति में हो रही देरी का सीधा असर छात्रों के साथ शिक्षण संस्थानों पर पड़ रहा है। नियुक्ति नहीं होने की धमकी दी है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ Source link

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तेल के लिए अंडमान के बाद यहां होगी ड्रिलिंग, समंदर में उतरी...

Oil India Ultra Deepwater Drilling: देश में तेल की कमी दूर करने के लिए अब देसी संसाधनों पर फोकस किया जा रहा है. इस दिशा में देसी कंपनियां कमर कसकर उतर चुकी हैं. इसमें सरकारी तेल एवं गैस कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) बड़ी भूमिका निभाने जा रही है. दरअसल, समंदर की गहराइयों में नए हाइड्रोकार्बन भंडारों की तलाश तेज कर दी गई है. अंडमान सागर में चल रहे खोज अभियानों के बीच अब ऑयल इंडिया की नजर देश के पूर्वी तट पर स्थित कृष्णा-गोदावरी और महानदी बेसिन के अल्ट्रा-डीपवॉटर क्षेत्रों पर है. आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार ऑयल इंडिया 2027 से इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर खोजी ड्रिलिंग अभियान शुरू करने की तैयारी कर रही है. इसके लिए आवश्यक लॉजिस्टिक्स और तकनीकी ढांचे को विकसित करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है. 2027 से शुरू होगी नई खोज ऑयल इंडिया को ओपन एक्रेज लाइसेंसिंग पॉलिसी (OALP)-IX के तहत चार अपतटीय ब्लॉक आवंटित किए गए हैं. इनमें महानदी बेसिन के दो और कृष्णा-गोदावरी बेसिन के दो अल्ट्रा-डीपवॉटर ब्लॉक शामिल हैं. कंपनी फरवरी 2027 से इन ब्लॉकों में खोजी ड्रिलिंग शुरू करने की योजना पर काम कर रही है. सूत्रों के मुताबिक महानदी बेसिन में पहला स्ट्रेटिग्राफिक कुआं अप्रैल 2027 के आसपास ड्रिल किया जा सकता है. इस तरह की ड्रिलिंग का उद्देश्य सीधे उत्पादन शुरू करना नहीं होता, बल्कि समुद्र के नीचे मौजूद भूगर्भीय संरचनाओं का अध्ययन करना और तेल-गैस की संभावनाओं का आकलन करना होता है. अंडमान बेसिन में पहले से जारी है अभियान पूर्वी तट पर विस्तार की तैयारी के साथ-साथ ऑयल इंडिया अंडमान और निकोबार क्षेत्र में भी अपने खोज अभियान को आगे बढ़ा रही है. कंपनी वर्तमान में अंडमान सागर के दो अपतटीय ब्लॉकों में काम कर रही है. दस्तावेजों के अनुसार, यहां अब तक तीन खोजी कुओं की ड्रिलिंग पूरी की जा चुकी है, जबकि दो और कुएं ड्रिल करने की तैयारी चल रही है. ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अंडमान बेसिन भारत के लिए भविष्य का बड़ा हाइड्रोकार्बन क्षेत्र साबित हो सकता है. दरअसल, इस क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना दक्षिण-पूर्व एशिया के उन इलाकों से काफी मिलती-जुलती है, जहां तेल और गैस के विशाल भंडार मौजूद हैं. यदि यहां व्यावसायिक स्तर पर तेल या गैस की खोज सफल होती है, तो यह भारत के ऊर्जा क्षेत्र की तस्वीर बदल सकती है. क्यों महत्वपूर्ण हैं कृष्णा-गोदावरी और महानदी बेसिन? भारत के पूर्वी तट पर स्थित कृष्णा-गोदावरी बेसिन पहले भी देश को कई बड़े गैस भंडार दे चुका है. इसे भारत के सबसे महत्वपूर्ण अपतटीय ऊर्जा क्षेत्रों में गिना जाता है. वहीं, इसके उत्तर में स्थित महानदी बेसिन अभी अपेक्षाकृत कम खोजा गया क्षेत्र है. विशेषज्ञों का मानना है कि महानदी बेसिन में बड़े ऊर्जा संसाधनों की संभावना मौजूद है, लेकिन इसकी वास्तविक क्षमता का आकलन अभी पूरी तरह नहीं हो पाया है. ऐसे में ऑयल इंडिया का आगामी अभियान भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. समुद्र के बीच संचालन के लिए हेलीकॉप्टर सेवा अल्ट्रा-डीपवॉटर क्षेत्रों में ड्रिलिंग आसान काम नहीं है. ड्रिलिंग यूनिट्स अक्सर तट से सैकड़ों समुद्री मील दूर स्थित होती हैं. ऐसे में कर्मचारियों और जरूरी उपकरणों की आवाजाही के लिए विशेष व्यवस्थाओं की जरूरत पड़ती है. इसी को ध्यान में रखते हुए ऑयल इंडिया ने समर्पित हेलीकॉप्टर सेवाएं लेने की प्रक्रिया शुरू की है. इन हेलीकॉप्टरों का उपयोग तटीय बेस और समुद्र में मौजूद ड्रिलिंग प्लेटफॉर्म के बीच कर्मियों और आवश्यक सामग्रियों के परिवहन के लिए किया जाएगा. ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम ऑयल इंडिया की यह दोहरी रणनीति- एक ओर अंडमान सागर में फ्रंटियर एक्सप्लोरेशन और दूसरी ओर पूर्वी तट के अल्ट्रा-डीपवॉटर क्षेत्रों में नई खोज कंपनी के इतिहास के सबसे महत्वाकांक्षी विस्तार अभियानों में से एक मानी जा रही है. भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है. ऐसे में घरेलू भंडारों की खोज और उत्पादन बढ़ाना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है. यदि अंडमान, कृष्णा-गोदावरी और महानदी बेसिन में ऑयल इंडिया को सफलता मिलती है, तो इससे न केवल देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी बल्कि आयात बिल में भी उल्लेखनीय कमी आ सकती है. समुद्र की गहराइयों में छिपे ऊर्जा संसाधनों की यह खोज आने वाले वर्षों में भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लक्ष्य के और करीब ले जा सकती है. Source link

झारखंड

4 साल तक खराब नहीं होगा आम का अचार, पलामू की किचन...

Last Updated:June 11, 2026, 09:16 IST Aam Achar Recipe: पलामू की किचन एक्सपर्ट चंपा देवी ने लोकल 18 को पारंपरिक आम के अचार की रेसिपी बताई. उन्होंने कहा कि सही तरीके से रखने पर अचार 4 साल तक सुरक्षित रह सकता है. आइये जानते हैं इस रेसिपी के बारे में. ख़बरें फटाफट पलामू: गर्मी का मौसम आते ही बाजारों में कच्चे और पके आम की भरमार देखने को मिलती है. आम को फलों का राजा कहा जाता है. इस मौसम में इसकी मांग सबसे अधिक रहती है. लोग आम का सेवन अलग-अलग तरीके से करते हैं. कोई इसे सीधे फल के रूप में खाना पसंद करता है तो कोई आम पना, चटनी, मुरब्बा और अचार बनाकर इसका स्वाद लेता है. खासकर कच्चे आम का अचार भारतीय रसोई की शान माना जाता है. यह न केवल खाने का स्वाद बढ़ाता है. बल्कि लंबे समय तक सुरक्षित भी रहता है. गर्मी के दिनों में यदि घर पर पारंपरिक तरीके से आम का अचार तैयार किया जाए तो इसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है और पूरे साल इसका आनंद लिया जा सकता है. जानें आम के अचार की रेसिपी पलामू की किचन एक्सपर्ट चंपा देवी ने लोकल 18 को बताया कि स्वादिष्ट और लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाला आम का अचार बनाने के लिए सबसे पहले 5 किलो कच्चे आम लें. आम को अच्छी तरह धोकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें और उसके अंदर मौजूद गुठली का कठोर हिस्सा निकाल दें. इसके बाद कटे हुए आम को दोबारा साफ पानी से धो लें और लगभग 4 घंटे तक धूप में फैलाकर सुखाएं, ताकि उसमें मौजूद अतिरिक्त नमी निकल जाए. इससे अचार लंबे समय तक खराब नहीं होता है. उन्होंने बताया कि आम के टुकड़ों को एक बड़े बर्तन या गमले में डालकर उसमें 2 चम्मच हल्दी, 250 ग्राम नमक और लगभग 50 ग्राम सरसों का तेल मिलाकर अच्छी तरह मिक्स कर दें. इसके बाद इसे पूरी रात ढककर रख दें. रातभर में आम से जो पानी निकले. उसे अगले दिन निकालकर फेंक दें. यह प्रक्रिया अचार को अधिक स्वादिष्ट और टिकाऊ बनाने में मदद करती है. आम के अचार में डालें ये मसाला वहीं, मसाला तैयार करने के लिए 250 ग्राम सरसों, 100 ग्राम लाल मिर्च, 100 ग्राम मेथी, 100 ग्राम जीरा और 50 ग्राम अजवाइन लें. सबसे पहले मेथी और जीरा को हल्का भून लें. इसके बाद सरसों को हल्का गर्म करें और लाल मिर्च को भी भून लें. अब सभी मसालों को मिलाकर मिक्सी में दरदरा पीस लें. तैयार मसाले में 250 ग्राम नमक और 500 ग्राम सरसों का तेल मिलाकर अच्छी तरह मिक्स करें. इसके बाद इस मसाले को आम के टुकड़ों में डालकर अच्छे से मिला दें. अंत में 4 चम्मच हल्दी डालकर अचार को फिर से अच्छी तरह मिक्स कर लें. 4 साल तक खराब नहीं होगा अचार उन्होंने कहा कि तैयार अचार को साफ और सूखे बर्तन में भरकर लगभग 10 दिनों तक ढककर रखें. बीच-बीच में इसे चलाते रहें. ताकि मसाले और तेल सभी टुकड़ों में अच्छी तरह समा जाएं. 10 दिन बाद स्वादिष्ट देसी आम का अचार खाने के लिए तैयार हो जाता है. यदि इसे साफ-सफाई और सही तरीके से रखा जाए तो यह अचार चार साल तक सुरक्षित रह सकता है और हर भोजन का स्वाद बढ़ाता रहता है. About the Author Brijendra Pratap Singh बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Palamu,Jharkhand Source link

झारखंड

12 जून को होनेवाली रिम्स की शासी परिषद की बैठक फिर हुई...

रांची| रिम्स की 12 जून को होनेवाली शासी परिषद की बैठक फिर स्थगित कर दी गई है। रिम्स प्रशासन ने बैठक स्थगित होने के पीछे अपरिहार्य कारण बताए हैं। इससे पहले परिषद की बैठक 1 जून को प्रस्तावित थी, लेकिन 2 जून को सीएम द्वारा स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक कर ने के कारण उसे स्थगित कर दिया गया था। Source link

झारखंड

बोकारो में आज से 3 दिन तक आंधी-बारिश का ऑरेंज अलर्ट, 60...

राजधानी रांची में बुधवार को धूप और आंशिक बादलों का मिला-जुला असर देखने को मिला। दिनभर उमस भरी गर्मी ने लोगों को परेशान किया। शाम करीब 6 बजे रांची, बोकारो समेत आसपास के क्षेत्रों में हल्की बारिश हुई। इस दौरान गरज के साथ तेज हवा भी चली, जिससे कुछ देर के लिए मौसम सुहाना हो गया। मौसम केंद्र के अनुसार रांची का अधिकतम तापमान 36.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पिछले 24 घंटे की तुलना में लगभग 1 डिग्री अधिक रहा। वहीं डालटनगंज 43.2 डिग्री सेल्सियस के साथ राज्य का सबसे गर्म रहा। पिछले 24 घंटे के दौरान दुमका जिले में सर्वाधिक 37.2 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। मौसम विभाग ने 11 से 13 जून के बीच राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश की संभावना जताई है। इस दौरान रांची, खूंटी, रामगढ़, बोकारो, हजारीबाग, कोडरमा, गिरिडीह, धनबाद, देवघर, जामताड़ा, दुमका, पाकुड़, गोड्डा और साहिबगंज जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। विभाग के अनुसार इन जिलों में 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है। गरज के साथ बारिश की भी संभावना है। लोगों को खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और खुले स्थानों पर न जाने की सलाह दी है। मानसून: एक हफ्ते में पहली बार दोनों छोर पर रुका… जल्द बढ़ेगा नई दिल्ली | मानसून आने के बाद बुधवार को पहली बार ऐसा हुआ, जब इसकी रफ्तार दोनों छोरों (पूर्वी व पश्चिमी तट) पर रुक गई। हालांकि, अगले दो से तीन दिनों में इसके तेजी से आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो रही हैं। जल्द ही मानसून महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश के बाकी हिस्सों को पार कर लेगा। इसके अलावा यह तमिलनाडु को पूरा कवर करते हुए ओडिशा और छत्तीसगढ़ तक पहुंचेगा। मानसून का पूर्वी छोर प. बंगाल को पार करके बिहार और झारखंड में भी दस्तक दे देगा। फिलहाल मानसून चेन्नई, महाराष्ट्र के हरनाई और बंगाल के सिलीगुड़ी में रुका है। मानसून आने के बाद से अब तक बारिश में 25% की कमी रही है। उम्मीद है कि अगले दो-तीन दिनों में इसकी भरपाई हो जाएगी। दूसरी ओर, उत्तर भारत के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में प्री-मानसून की बौछारें देखने को मिलेंगी। गुरुवार को कश्मीर में एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ प्रवेश करेगा। Source link

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मानसून में घूमने का है प्लान? हैदराबाद के पास ये 5 झरने...

Last Updated:June 11, 2026, 08:42 IST Places to Visit in Hyderabad During Monsoon: अगर आप मानसून में हैदराबाद के आसपास प्राकृतिक खूबसूरती का आनंद लेना चाहते हैं, तो तेलंगाना के प्रसिद्ध झरने आपकी यात्रा को यादगार बना सकते हैं. कुंतला और बोगाथा जैसे विशाल झरनों से लेकर मल्लेला तीर्थम और गायत्री जैसे शांत प्राकृतिक स्थलों तक, हर जगह अलग अनुभव मिलता है. बारिश के बाद इन झरनों का जलप्रवाह बढ़ जाता है और आसपास का इलाका हरियाली व कोहरे से भर जाता है. कुछ झरनों तक पहुंचने के लिए ट्रेकिंग और सीढ़ियों का सफर भी करना पड़ता है, जो एडवेंचर प्रेमियों के लिए अतिरिक्त आकर्षण बन जाता है हैदराबाद और तेलंगाना के आसपास मानसून की पहली बारिश होते ही प्रकृति का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है. जंगलों, पहाड़ियों और घाटियों के बीच छिपे झरने पूरी तरह जीवंत हो उठते हैं. सूखी चट्टानों से बहता दूधिया सफेद पानी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है. बारिश के बाद इन झरनों की सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है और आसपास का वातावरण हरियाली से भर जाता है. वीकेंड ट्रिप और प्रकृति प्रेमियों के लिए यह समय सबसे खास माना जाता है. मानसून के दौरान हैदराबाद के करीब स्थित एथीपोतला, कुंतला, बोगाथा, मल्लेला तीर्थम और गायत्री झरने घूमने के लिए बेहतरीन विकल्प हैं. कुंतला वॉटरफॉल तेलंगाना का सबसे ऊंचा और सबसे प्रसिद्ध झरना माना जाता है. मानसून की शुरुआती बारिश के बाद इसका रूप बेहद आकर्षक और विशाल हो जाता है. यह सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला के घने जंगलों के बीच कदम नदी पर स्थित है. झरने तक पहुंचने के लिए प्रवेश द्वार से करीब 400 सीढ़ियां नीचे उतरनी पड़ती हैं, जो यात्रा को रोमांचक बना देती हैं. लगभग 147 से 200 फीट की ऊंचाई से गिरता पानी दो चरणों में नीचे आता है और मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करता है. हैदराबाद से करीब 260 किलोमीटर दूर स्थित यह झरना मानसून में प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों की पहली पसंद बन जाता है. भोगता (बोगाथा) वॉटरफॉल अपनी विशाल चौड़ाई और आकर्षक चट्टानी संरचना के कारण “तेलंगाना का नियाग्रा” कहलाता है. मानसून की पहली बारिश के बाद इसका जलप्रवाह काफी बढ़ जाता है, जिससे झरना और भी भव्य दिखाई देता है. इस दौरान आसपास की घाटियां घने कोहरे और हरियाली की चादर से ढक जाती हैं, जो पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं. यहां आने वाले पर्यटकों के लिए सुंदर पार्क, बैठने की व्यवस्था और कई व्यू-पॉइंट्स भी विकसित किए गए हैं. हैदराबाद से करीब 280 किलोमीटर दूर स्थित यह झरना वीकेंड रोड ट्रिप के लिए बेहतरीन पर्यटन स्थलों में गिना जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google पोचेरा वॉटर फॉल्स तेलंगाना के सबसे खूबसूरत प्राकृतिक झरनों में से एक है. यह कुंतला जलप्रपात के करीब कदम नदी पर स्थित है और अपनी गहराई तथा चौड़े जलप्रवाह के लिए जाना जाता है. मानसून की शुरुआती बारिश के बाद इसका पानी पथरीले रास्तों और प्राकृतिक सीढ़ियों जैसी चट्टानों से होकर नीचे गिरता है, जो बेहद मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करता है. आसपास का शांत वातावरण और हरियाली इसकी सुंदरता को और बढ़ा देती है. हैदराबाद से लगभग 257 किलोमीटर दूर स्थित इस स्थल पर तेलंगाना पर्यटन विभाग ने पार्क और बैठने की बेहतर व्यवस्था विकसित की है, जिससे पर्यटकों को सुखद अनुभव मिलता है. मल्लेला तीर्थम वॉटरफॉल नल्लामला के घने जंगलों के बीच स्थित एक खूबसूरत और शांत प्राकृतिक स्थल है. जो लोग हैदराबाद से ज्यादा दूर यात्रा नहीं करना चाहते, उनके लिए यह बेहतरीन विकल्प माना जाता है. यह झरना कृष्णा नदी की एक सहायक धारा से बनता है और चारों ओर फैली हरियाली इसकी सुंदरता को और बढ़ा देती है. यहां पहुंचने के लिए करीब 350 सीढ़ियां उतरनी पड़ती हैं, जिसके दौरान जंगल का मनमोहक दृश्य देखने को मिलता है. धुंध और ठंडी फुहारों से भरा वातावरण पर्यटकों को आकर्षित करता है. हैदराबाद से लगभग 185 किलोमीटर दूर होने के कारण यह एक शानदार वीकेंड ट्रिप डेस्टिनेशन है. गायत्री वॉटरफॉल (गदिधा गुंडम) उन पर्यटकों के लिए खास आकर्षण है, जो भीड़भाड़ से दूर प्रकृति के बीच सुकून भरे पल बिताना चाहते हैं. कदम वन क्षेत्र के भीतर स्थित यह झरना अपनी प्राकृतिक और अछूती खूबसूरती के लिए जाना जाता है. यहां तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को छोटा-सा जंगल ट्रेक करना पड़ता है, जो यात्रा को और रोमांचक बना देता है. मानसून की पहली बारिश के बाद झरने का जलप्रवाह बढ़ जाता है और आसपास का क्षेत्र हरियाली से भर उठता है. हैदराबाद से करीब 270 किलोमीटर दूर स्थित यह स्थल एडवेंचर और नेचर लवर्स के लिए बेहतरीन डेस्टिनेशन माना जाता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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रांची का मन्नत पूरी करने वाला अनोखा हनुमान मंदिर, लेकिन शाम 6...

होमताजा खबरधर्म रांची का मन्नत पूरी करने वाला मंदिर, शाम 6 बजे होता है विरान, जानें क्यों Last Updated:June 11, 2026, 07:51 IST Ranchi Ulatu Gaon Hanuman Mandir: रांची के उलाटू गांव के पहाड़ी पर स्थित हनुमान मंदिर में चार मुखी प्रतिमा है. घने जंगल और जंगली जानवरों के डर से यहां शाम 6 बजे बाद किसी को रुकने नहीं दिया जाता है. मंदिर के पुजारी ने बताया कि यहां सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. ख़बरें फटाफट रांची: झारखंड की राजधानी रांची के उलाटू गांव में एक मंदिर है, जो कि हनुमान जी का है. यह मंदिर काफी सुनसान जगह पर है और एक पहाड़ की चोटी के पास है. मंदिर के पुजारी शंभू पाठक बताते हैं कि शाम के 6 बजते ही यहां से लोग निकल जाते हैं, कहते हैं कि रात में यहां जो रुकता है. उसके साथ अनर्थ हो जाता है. इस तरह की कई घटनाएं देखने को मिली हैं. आइये जानते हैं इस मंदिर की विशेषता के बारे में. मंदिर के पुजारी बताते हैं कि रात में कई बार ऐसी अजीबोगरीब आवाज भी आती है. इसीलिए शाम 6:00 बजे के बाद यहां पर कोई नहीं रुकता है. यहां पर हनुमान जी सबकी मुराद भी पूरी करते हैं, लेकिन जैसे ही शाम के 6 बजते हैं, बहुत अधिक तो 7 बजे तक यहां से लोग एकदम से निकल जाते हैं. यहां कोई यहां रुकने की हिम्मत भी नहीं कर पाता है. जानें आखिर क्या है वजह मंदिर के पुजारी शंभू बताते हैं कि दरअसल एक तो अगल-बगल घना जंगल है. यहां आसपास एक भी घर नहीं है. इसके साथ ही यहां आसपास के 1 किलोमीटर के दायरे में भी कोई घर नहीं है. यहां सिर्फ घना जंगल है. ऐसा कहा जाता है कि यहां पर बड़े जानवर रहते हैं. जैसे लोमड़ी, सियार, हाथी यह सब रात में इन पहाड़ियों पर आते हैं और रात में यह पहाड़ी इन सभी जानवरों का डेरा रहती है. इसीलिए रात में कई बार लोग लोमड़ी और सियार की अजीबोगरीब आवाज सुनते हैं. हालांकि अब तो इतने लाइट हो गई है कि यह आवाज पहले के मुकाबले काफी कम हो गई है. जहां शाम के 5:00 के बाद तो खासतौर पर यहां पर कोई भी महिला तो रुकने की परमिशन बिल्कुल भी नहीं है. कहा जाता है कि पूरे पहाड़ को हनुमान जी सुरक्षित रखते हैं. जानें यहां के लोगों की क्या है आस्था यहां पर चार मुखी हनुमान भगवान की प्रतिमा है. कहा जाता है कि जो भी इसकी पूजा करता है. प्रभु उसकी मनोकामना जरुर पूरी करते हैं. इसलिए यहां पर कोई घर बनाने का मन्नत मांगने के लिए आता है तो कोई शादी विवाह और पढ़ाई के लिए आता है. यहां सबकी मन्नत पूरी होती है. यही कारण है कि लोगों कि यहां पर आस्था काफी अधिक है. About the Author Brijendra Pratap Singh बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ranchi,Jharkhand Source link

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हरमू नदी में गिर रहे 76 नालों के गंदा पानी को रोकने...

Hindi News Local Jharkhand Ranchi No Measures Have Been Taken To Stop The Dirty Water From 76 Drains Flowing Into The Harmu River; A Drain Master Worth Rs 2 Crore Has Been Deployed To Clean The Silt. रांची3 घंटे पहले कॉपी लिंक हरमू नदी की सफाई में लगी मशीन। भास्कर इनसाइट शहर से गुजर रही हरमू नदी की सफाई के लिए रांची नगर निगम ने ड्रेन मास्टर क्लीनिंग मशीन को उतारा है। बुधवार को मेयर रोशनी खलखो और डिप्टी मेयर नीरज कुमार ने हरमू नदी में अत्याधुनिक ड्रेन मास्टर क्लीनिंग मशीन का विधिवत उद्घाटन किया। इसके साथ ही नदी की सफाई का अभियान भी शुरू हो गया। करीब 2 करोड़ की लागत वाली यह मशीन पानी में तैरते हुए नदी के भीतर जमा कचरा, जलकुंभी और गाद को निकालने का काम करेगी। इस मशीन की खरीदारी सीसीएल के सीएसआर फंड से की गई है। अब इस मशीन से हरमू नदी में जमा कचरा और गाद को निकाला जाएगा। इस मौके पर मेयर रोशनी खलखो ने कहा कि हरमू नदी को स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त बनाना नगर निगम की प्राथमिकता है। वहीं डिप्टी मेयर नीरज कुमार ने उम्मीद जताई कि आधुनिक मशीन के उपयोग से नदी के सफाई अभियान को नई गति मिलेगी और शहरवासियों को एक स्वच्छ जलधारा देखने को मिलेगी। लेकिन, सबसे बड़ा सवाल है कि हरमू नदी में जमा कचरा और गाद तो साफ हो जाएगा। नदी में गिर रहे 76 नालों के गंदे पानी और कचरे की सफाई कैसे होगी। क्योंकि, नगर निगम या नगर विकास विभाग की ओर से नालों के गंदे पानी को रोकने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसे में एक ओर ड्रेन मास्टर मशीन से नदी की सफाई होगी और दूसरी ओर 76 नालों का कचरा नदी को गंदा करता करता रहेगा। 85 करोड़ रु. फूंके, नाला बनकर रह गई हरमू नदी हरमू नदी के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण पर नगर विकास विभाग की एजेंसी जुडको ने 85 करोड़ रुपए फूंक दिया है। लगभग एक दशक पहले निर्माण शुरू हुआ। पांच साल पहले काम पूरा हो गया। लेकिन नदी में गिरने वाले 82 में मात्र 6 नालों के गंदे पानी को ही साफ करने की योजना बनी। 76 नालों को खुला ही छोड़ दिया गया। ऑपरेशन और मेंटनेंस भी बंद हो गया। क्योंकि, नदी के ऑपरेशन और मेंटनेंस के लिए जुडको ने कांट्रेक्टर को बकाया पैसा नहीं दिया। इस वजह से हरमू अब नाला बनकर रह गई। ऐसे में ड्रेन मशीन के डीजल और अन्य संसाधनों पर लाखों खर्च करने पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ Source link

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