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झारखंड में चलती ट्रेन में मां बनी जयमाला, टांगरबसली स्टेशन पर दिया...

Last Updated:May 26, 2026, 08:57 IST Ranchi Lohardaga Passenger Train: रांची लोहरदगा पैसेंजर ट्रेन में जयमाला उरांव ने टांगरबसली स्टेशन पर बेटे को जन्म दिया. यहां महिला यात्रियों, रेलवे स्टाफ और डॉक्टरों की मदद से मां बच्चा दोनों स्वस्थ हैं. ख़बरें फटाफट झारखंड में चलती ट्रेन में महिला ने बच्चे को दिया जन्म रांची: झारखंड में रांची-लोहरदगा पैसेंजर ट्रेन (68027) में एक दिल छू लेने वाली घटना घटी है. यहां लोहरदगा के बकसीडिया गांव से अपनी गर्भवती पत्नी जयमाला उरांव के साथ रांची जा रहे एक व्यक्ति की मुश्किल तब बढ़ गई, जब ट्रेन चल रही थी तभी जयमाला को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई. टांगरबसली स्टेशन पर ट्रेन रोकी गई. जहां ट्रेन में महिला यात्रियों, रेलवे कर्मचारियों और स्थानीय चिकित्सकों ने मिलकर जयमाला की मदद की. यहां सभी की सामूहिक कोशिश से जयमाला ने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया. सुबह करीब 9:40 बजे ट्रेन टांगरबसली स्टेशन पहुंची. यहां गर्भवती महिला की हालत देखते हुए ट्रेन को लगभग 25 मिनट तक रोक दिया गया. इस दौरान रेलवे कर्मचारियों ने तुरंत मदद की और स्टेशन पर सुरक्षा घेरा बना दिया. इसके बाद महिला यात्रियों, रेलवे कर्मचारियों और स्थानीय चिकित्सकों ने मिलकर जयमाला की मदद की. साथ ही एंबुलेंस को सूचना दी गई, इसके बाद डॉक्टर और नर्स मौके पर पहुंचे. यहां सभी की सामूहिक कोशिश से जयमाला ने एक बेटे को जन्म दिया. मां और बच्चा दोनों स्वस्थ वहीं, डॉक्टरों ने बताया कि मां और नवजात शिशु दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं. जयमाला अपने पति के साथ लोहरदगा से रांची आ रही थीं. प्रसव के बाद उन्हें एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया जहां उनकी देखभाल की जा रही है. रेलवे कर्मचारियों ने किया मदद रेलवे अधिकारियों ने इस घटना को संभालने में बेहतरीन काम किया. ट्रेन के अन्य यात्रियों ने भी इस मौके पर शांति बनाए रखी और जरूरी सहयोग दिया. इस घटना ने एक बार फिर रेलवे कर्मचारियों की मानवीयता और तत्परता को साबित किया है. स्थानीय लोगों ने कहा कि ऐसी घटनाओं में रेलवे की त्वरित प्रतिक्रिया बहुत महत्वपूर्ण होती है. जयमाला और उनके परिवार ने सभी मदद करने वालों का आभार जताया है. About the Author Brijendra Pratap Singh बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ranchi,Jharkhand Source link

झारखंड

चाईबासा में प्रेमी जोड़े ने ट्रेन से कट दी जान:चार दिन पहले...

पश्चिमी सिंहभूम जिले के सोनुआ रेलवे स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक पर एक युवक और युवती के शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। घटना की सूचना मिलते ही आसपास के लोगों की भीड़ जुट गई और पुलिस मौके पर पहुंची। शुरुआती जांच में दोनों की पहचान नहीं हो पाई थी, जिससे मामला और भी रहस्यमय हो गया था। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित करते हुए जांच शुरू की और आसपास से मिले सामान को कब्जे में लिया। सिम कार्ड बना पहचान की कड़ी घटनास्थल से पुलिस को एक बैग, कई रेलवे टिकट और युवक की पैंट की जेब से एक मोबाइल फोन मिला था। मोबाइल बंद होने के कारण मृतकों की पहचान में दिक्कत आ रही थी। इसके बाद पुलिस ने मोबाइल के सिम कार्ड को दूसरे फोन में डालकर जांच की। इसी दौरान युवक के परिजनों का कॉल आया, जिससे पहचान का रास्ता साफ हुआ। दोनों की पहचान सोनुआ प्रखंड के भालूरूंगी गांव निवासी अर्जुन महतो और खुशबू महतो के रूप में हुई। 21 मई को पुरी घूमने गए थे दोनों पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों प्रेमी युगल थे और 21 मई को अपने घर से निकले थे। जानकारी के मुताबिक, वे पहले राउरकेला पहुंचे और वहां से पुरी जाने के लिए ट्रेन का टिकट लिया था। बताया जा रहा है कि दोनों पुरी घूमने गए थे। वापसी में टाटानगर और चक्रधरपुर होते हुए सोनुआ पहुंचे, जहां यह दर्दनाक घटना सामने आई। सूचना मिलने के बाद परिजन सोनुआ थाना पहुंचे और पुलिस को दोनों के घर से निकलने से लेकर उनकी यात्रा तक की विस्तृत जानकारी दी। पुलिस फिलहाल इस मामले को प्रथम दृष्टया आत्महत्या मानकर जांच कर रही है। Source link

झारखंड

कोडरमा का सागर स्केटिंग कर जा रहा केदारनाथ:25 दिनों में पूरी होगी...

कोडरमा जिले के डोमचांच प्रखंड निवासी 15 वर्षीय सागर मेहता ने एक अनोखी धार्मिक यात्रा की शुरुआत की है। सागर स्केटिंग करते हुए करीब 1500 किलोमीटर दूर केदारनाथ धाम के लिए निकले हैं। उन्होंने अपनी यात्रा सोमवार की शाम को घर से शुरू की। पहले दिन वे झुमरीतिलैया तक पहुंचे, जहां रात में विश्राम किया। मंगलवार सुबह वे फिर अपने लक्ष्य की ओर निकल पड़े। इस अनोखी यात्रा को लेकर स्थानीय लोगों में उत्साह और जिज्ञासा का माहौल है। 25 दिनों में पूरी होगी यात्रा, हर दिन चलेगा 70 किमी सागर के अनुसार, वे इस लंबी यात्रा को करीब 25 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। वर्तमान में भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप को देखते हुए वे प्रतिदिन 60 से 70 किलोमीटर की दूरी तय कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जैसे ही मौसम अनुकूल होगा, वे अपनी रोजाना तय की जाने वाली दूरी को और बढ़ाएंगे। इस कठिन सफर के लिए वे पूरी तैयारी के साथ निकले हैं। रास्ते में आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हैं। 20 किलो का बैग, तंबू और जरूरी सामान साथ इस कठिन यात्रा के दौरान सागर अपनी पीठ पर करीब 20 किलो वजन का बैग लेकर चल रहे हैं। उनके बैग में कपड़े, खाने-पीने का सामान, फर्स्ट एड बॉक्स और तंबू लगाने की सामग्री शामिल है। सागर ने बताया कि सुनसान इलाकों या खराब मौसम में फंसने की स्थिति में यही सामान उनके काम आएगा। वे जरूरत पड़ने पर रास्ते में ही तंबू लगाकर विश्राम करेंगे। कम उम्र में इस तरह की कठिन यात्रा को लेकर उनकी तैयारी और हिम्मत लोगों को प्रेरित कर रही है। सनातन धर्म के प्रचार का लक्ष्य सागर ने इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार और उसकी रक्षा बताया है। उन्होंने कहा कि आज के समय में लोग अपने धर्म से दूर होते जा रहे हैं, ऐसे में वे इस यात्रा के माध्यम से जागरूकता फैलाना चाहते हैं। सागर इससे पहले 2024 में स्केटिंग करते हुए देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम और 2025 में जम्मू के कटरा स्थित वैष्णो देवी धाम की यात्रा भी कर चुके हैं। उनका सपना देश के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंचकर सनातन धर्म का संदेश फैलाना है। Source link

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Delhi Gymkhana Club Row Explained : अरबों की जमीन, कौड़ियों में किराया...

दिल्ली जिमख़ाना को लेकर बवाल मचा तो पब्लिक को भी पता चल रहा है कि अफसर लोग सुविधाओं के नाम पर कैसे-कैसे लुत्फ उठाते रहते हैं. और ये तो दिल्ली जिमख़ाना सुर्खियों में आया है, क्योंकि सरकार के विभाग ने उसको कह दिया है कि प्रधानमंत्री के आवास के बिलकुल बगल की जबरदस्त लोकेशन को छोडकर दूसरी जगह चले जाओ. तो हाय-तौबा मची हुई है कि ऐसे-कैसे चले जाएं? क्योंकि ये जो जिमख़ाना जैसी जगहें होती हैं ये तो बडे साहब लोगों की वो जगहें होती हैं, जहां आम पब्लिक तो जा भी नहीं सकती. लेकिन अब बवाल मच ही गया है तो इसी बहाने समझ तो लेना चाहिए कि ये जिमख़ाना होता क्या है? तो पहली बात तो ये नाम कैसा है? जिमख़ाना? असल मे ये अंग्रजों ने बनाए थे ये सब ठिकाने अपने अफसरों के लिए. अंग्रेजों से पहले मुगल थे, तो मुगलों के टाइम दरबार में फारसी भाषा चलती थी. और फारसी में किसी ठिकाने को या जगह को ख़ाना कहते हैं. जैसे दवाख़ाना, बावरचीख़ाना, कारख़ाना, पागलख़ाना, डाकख़ाना. तो अंग्रेज अफसर आए तो उनको अपने खेलने वगैरह के लिए, कसरत के लिए और मनोरंजन वगैरह के लिए जगह बनानी थी. वो लोग खेलते थे जिमनेजियम में. आजकल भी तो कसरत के लिए जिम जाते हैं ना लोग. वो असल में जिमनैस्टिक्स करने की जगह को कहते हैं जिमनेजियम. उसी जिमनेजियम को शॉर्ट कर के लोग बोलने लगे जिम. और आजकल एक्सरसाइज करनी की जगह को जिम ही कहने लग गए हैं. अंग्रेजों ने कई जगह खोले जिमखाने उस जमाने में अंग्रेजों को असल में एक क्लब चाहिए था, जहां वो क्रिकेट टेनिस वगैरह खेल भी सकें और शाम को पार्टी वगैरह भी कर सकें. तो जिमनेजियम के जिम और फारसी के खाना को जोड़कर उन्होंने शब्द बना दिया जिमख़ाना. और कई जगह जिमखाने खोल दिए. सबसे पहले 1861 में रुडकी में जिमख़ाना बनाया. फिर 1875 में बॉम्बे जिमख़ाना, 1882 में पूना जिमख़ाना क्लब, 1884 में मद्रास जिमख़ाना क्लब, डिब्रूगढ जिमख़ाना क्लब, 1885 में अहमदाबाद जिमख़ाना क्लब, 1886 में कराची जिमख़ाना, करते-करते कई जिमखाने खोल दिए. अंग्रेजों का राज था. जमीन देखते थे और बड़े-बड़े ये क्लब बना देते थे अपने गोरे अफसरों के लिए. ताकि भारतीयों से अलग रहकर अपना वही लाइफस्टाइल चलाएं जैसा इंग्लैंड में रईसों का होता था. भारतीयों को तो अंदर घुसने तक नहीं दिया जाता था. ऐसे-ऐसे ड्रेस कोड लगा रखे थे जो कपड़े वो इंग्लैंड में पहना करते थे. भले ही भारत की तपती गर्मी में वो सूट-बूट ना चलते हों लेकिन अपने आप को यहां के लोगों से ऊपर दिखाने के लिए ये सब करते रहते थे वो. भारतीयों की एंट्री ही बंद थी. नौकर ज़रूर भारतीय होते थे. पंखा झलने के लिए. शराब परोसने के लिए. खाना परोसने के लिए. बाकी साफ-सफाई के लिए. बाग़बानी के लिए. और गोरे अंग्रेज़ खेलते थे क्रिकेट, पोलो, और पत्तों की गेम ब्रिज. व्हिस्की पीते थे, स्कॉच का चस्का भारत में वहीं से लगा. ब्रिटिश राज की ताक़त दिखाने का जरिया था जिमखाना मतलब ये जिमख़ाने ब्रिटिश राज की ताक़त दिखाने का भी एक ज़रिया थे कि गोरे लोग साहब लोग हैं, और बाक़ी जो भारतीय हैं चाहे कितने ही रईस हों वो भी उनसे तो नीचे ही हैं. वर्ष 1911 में किंग जॉर्ज भारत आए तो घोषणा की गई कि ब्रिटिश इंडिया की राजधानी कलकत्ते से दिल्ली शिफ़्ट की जाएगी. तब तक कलकत्ता राजधानी होती थी. तो नई दिल्ली बनाई गई नई राजधानी. और यहां तो फिर सबसे बड़े अफ़सर आने वाले थे अंग्रेज़ों के. तो उनके लिए 1913 में बनाया गया इंपीरियल दिल्ली जिमख़ाना क्लब. और ये बन गया गोरे लोगों का वो ठिकाना जहां सिर्फ़ नौकर ही भारतीय होते थे. और ये तो खैर अंग्रेज़ों के सारे क्लबों में ऐसा ही था. चटगांव में भी एक यूरोपियन क्लब था. वहां का क़िस्सा आपने सुना हो शायद. वहां तो बाहर ही बोर्ड लगा रखा था कि ‘डॉग्ज़ ऐंड इंडियंज़ नॉट अलाउड’, कुत्तों और भारतीयों का आना मना है. ये जो अंग्रेज़ आजकल दुनिया को सलीके के पाठ पढ़ाते रहते हैं, ऊंच-नीच के पाठ पढ़ाते रहते है, अधिकारों के पाठ पढ़ाते रहते हैं ये बोर्ड लगाते थे कुत्ते और भारतीय अंदर नहीं आ सकते. तो चटगांव में सूर्या सेन की टीम में एक क्रांतिकारी थीं प्रीतिलता वड्डेदार. उन्होंने चटगांव में यूरोपियन क्लब को आग लगा दी थी. कि ये लिखोगे कि कुत्ते और भारतीय नहीं आ सकते? उन्होंन क्लब ही फूंक डाला था और पुलिस ने जब उनको घेर लिया था तो सायनाइड खाकर जान दे दी थी. प्रीतिलता ज़िंदा पुलिस के हाथ नहीं आईं थीं. मतलब इतना रोष होता था अंग्रेज़ों के इन क्लबों को लेकर पब्लिक में कि हमारी ही ज़मीन पर क़ब्ज़ा करके अपनी ऐश के लिए ये ठिकाने बनाए जा रहे हैं और भारतीय को नौकर बनाकर रखा हुआ है. लेकिन अंग्रेज़ तो चले गए. 1947 में देश आज़ाद हो गया. फिर क्या हुआ इन जिमख़ानों का? ये हमारे अफ़सरों ने घेर लिए. सरकार और सेना के अफ़सरों के हो गए ये. देशभर में जितने भी ये जिमख़ाने और क्लब थे वो अब इन अफ़सरों ने घेर लिए वैसे ही जैसे अंग्रेज़ अफ़सरों के ये हुआ करते थे. बस ग़नीमत रही कि इन्होंने बोर्ड नहीं लगाया कि कुत्ते और आम पब्लिक अंदर नहीं आ सकती. दिल्ली में भी इंपीरियल जिमख़ाना से इंपीरियल नाम हट गया और वो सिर्फ़ दिल्ली जिमख़ाना हो गया. और आम पब्लिक इसमें फिर भी नहीं जा सकती थी. वही अंग्रेज़ों वाले रिवाज चलते रहे. कुर्ते साड़ी वगैरह तो बाद में इन लोगों ने अलाउ कर दिये. लेकिन चोंचले इनके वही चलते रहे. कि ये नहीं पहन सकते, वो नहीं पहन सकते. लेकिन अंग्रेज़ो का तो राज था. तो उन्होंने 1928 में दिल्ली की सबसे प्राइम 27 एकड़ ज़मीन हमेशा के लिए अपने अफ़सरों के लिए लीज़ पर दी थी. लेकिन आज़ादी के बाद तो ये पब्लिक की ज़मीन हुई ना. हमारे अफ़सरों को देकर गए थे क्या अंग्रज़? साल का किराया एक हज़ार रुपये? अरबों की जमीन, कौड़ियों में किराया चले गए ना अंग्रेज़. ये हमारे वाले अफ़सर अब भारत सरकार को सिर्फ़ एक हज़ार रुपये किराया क्यों देंगे ये सवाल उठ रहा है

झारखंड

केमिकल फ्री आम की तलाश खत्म! बिना कार्बाइड के यहां मिलेगा प्राकृतिक...

Last Updated:May 26, 2026, 09:06 IST Palamu Mango Research Center: पलामू के चियांकी अनुसंधान केंद्र में कार्बाइड मुक्त बम्बईया, हिमसागर, लंगड़ा, दशहरी, मल्लिका, आम्रपाली आम मिल रहा है. इस आम की कीमत 60 से 70 रुपये किलो है. बता दें कि यहां जुलाई तक अलग अलग किस्मों के आम आपको मिलेंगे. ख़बरें फटाफट पलामू: आम को फलों का राजा कहा जाता है और गर्मी के मौसम में इसकी मांग सबसे अधिक रहती है. बाजारों में आम की बहार शुरू हो चुकी है, लेकिन अगर आप स्वाद के साथ सेहतमंद और प्राकृतिक तरीके से पका आम तलाश रहे हैं तो पलामू जिले के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र चियांकी आपके लिए खास जगह बन गया है. यहां मिलने वाले आम न केवल स्वाद में बेहतरीन हैं. बल्कि इन्हें कार्बाइड जैसी हानिकारक चीजों से नहीं पकाया जाता, जिससे यह स्वास्थ्य के लिए भी सुरक्षित माने जा रहे हैं. चियांकी में मिल रही कई खास वैरायटी पलामू क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र चियांकी में इस बार 8 से 10 किस्म के आम उपलब्ध हैं. हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में इस साल आम की पैदावार थोड़ी कम हुई है. कृषि वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश शाह ने कहा कि एक वर्ष अच्छा फलन और दूसरे वर्ष कम फलन देखने को मिलता है. यहां सबसे पहले बम्बईया आम तैयार हुआ, जिसकी तुड़ाई चार-पांच दिन पहले से शुरू हो चुकी है. फिलहाल यहां हिमसागर आम लोगों को आकर्षित कर रहा है. आने वाले दिनों में अलफांसो, लंगड़ा, दशहरी, मल्लिका और आम्रपाली जैसी लोकप्रिय किस्में भी उपलब्ध होंगी. कार्बाइड वाले आम से बचने की सलाह कृषि वैज्ञानिक अखिलेश कुमार ने बताया कि बाजार में बिकने वाले कई आमों को जल्द पकाने के लिए कार्बाइड का इस्तेमाल किया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होता है. उन्होंने कहा कि चियांकी में आम प्राकृतिक तरीके से पकाए जाते हैं. पेड़ से तोड़ने के बाद आम जब पूरी तरह मैच्योर हो जाता है तो उसे पकने में तीन से चार दिन का समय लगता है. धीरे-धीरे प्राकृतिक रूप से पकने के कारण इसका स्वाद भी बेहतर होता है और स्वास्थ्य पर किसी तरह का बुरा असर नहीं पड़ता. 60 से 70 रुपये किलो में मिल रहा आम चियांकी अनुसंधान केंद्र में आम की कीमत भी लोगों के बजट के अनुसार रखी गई है. यहां अधिकांश आम 60 रुपये प्रति किलो की दर से मिल रहे हैं, जबकि लंगड़ा आम की कीमत 70 रुपये प्रति किलो तय की गई है. फिलहाल हिमसागर आम बिक्री के लिए उपलब्ध है. इसके बाद एक सप्ताह के भीतर लंगड़ा बाजार में आ जाएगा. फिर दशहरी की बारी आएगी और सीजन के अंत में मल्लिका व आम्रपाली लोगों को स्वाद का आनंद देंगे. जुलाई तक मिलेगा स्वाद का आनंद चियांकी में आम का यह खास सीजन जुलाई महीने के अंत तक चलेगा. अलग-अलग समय पर अलग-अलग किस्म के आम उपलब्ध होने से लोगों को पूरे सीजन भर विविध स्वाद का आनंद मिलेगा. प्राकृतिक रूप से पके और बेहतर गुणवत्ता वाले आमों के कारण चियांकी इन दिनों आम प्रेमियों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. About the Author Brijendra Pratap Singh बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Palamu,Jharkhand Source link

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10 जून को सीएम आवास के सामने घेराव और प्रदर्शन कार्यक्रम को...

भास्कर न्यूज|भरनो झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा गुमला जिला के तत्वावधान में भरनो प्रखंड कार्यालय परिसर में सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आगाज झारखंड आंदोलनकारी के राजकीय मान सम्मान, अलग पहचान, रोजी रोजगार, नियोजन के गारंटी तथा जेल जाने की बाध्यता समाप्त कर सभी को सम्मान पेंशन राशि 50-50 हजार रुपया देने के मुद्दे को लेकर दो जून की रोटी के लिए 10 जून को मुख्यमंत्री आवास के समक्ष घेराव – प्रदर्शन, आमरण तथा आत्मदाह कार्यक्रम को सफल बनाने का आह्वान किया गया। नावाटोली बाजार से ब्लॉक परिसर तक जुलूस निकाला गया। न्याय के साथ सम्मान दो, समाज में स्वाभिमान से जीने का अधिकार दो, दिशोम गुरु शिबू सोरेन को झारखंड आंदोलनकारी का सर्वोच्च सम्मान दो, झारखंड आंदोलनकारी जिंदाबाद, जयपाल सिंह मुंडा अमर रहे,सी पी तिर्की अमर रहे, अजीत तिग्गा अमर रहे,शिबू सोरेन अमर रहे का नारा लगाया गया । मौके पर मुख्य अतिथि झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के संस्थापक प्रधान सचिव पुष्कर महतो ने कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों के अधिकारों की रक्षा की मांग को न दबाया जा सकता है,न मिटाया जा सकता है. झारखंड के अस्तित्व , अस्मिता, पहचान जिंदा है झारखंड आंदोलनकारियों के त्याग और बलिदान से. अबुआ सरकार में झारखंड आंदोलनकारी उपेक्षित हैं. राज्य में सरकार के संकल्प एवं आश्वासन का पालन नहीं किया जा रहा है जिसके कारण 10 जून को झारखंड आंदोलनकारियों के द्वारा धरना प्रदर्शन आमरण अनशन किया जाएगा। Source link

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सीएम ने योजनाओं की प्रगति, परियोजनाओं का हाल जाना:झारखंड का खनन राजस्व...

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि खनन राजस्व के मामले में झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से बेहतर स्थिति में है। उन्होंने राजस्व संग्रहण में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बायोमैट्रिक व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया। साथ ही सिंचाई परियोजनाओं को समय पर पूरा करने और पाइपलाइन से पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने सोमवार को झारखंड मंत्रालय में विकास योजनाओं, सिंचाई परियोजनाओं, वित्तीय प्रबंधन और राजस्व संग्रहण को लेकर दो उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकें कीं। पहली बैठक वित्त एवं वाणिज्य-कर विभाग के अधिकारियों के साथ हुई, जबकि दूसरी बैठक जल संसाधन विभाग की योजनाओं की प्रगति को लेकर आयोजित की गई। दोनों बैठकों में मुख्यमंत्री ने योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने, पारदर्शिता बढ़ाने और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष जोर दिया। अवैध खनन रोकने के लिए तकनीक पर फोकस:खनन राजस्व की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि ओडिशा और छत्तीसगढ़ की तुलना में झारखंड का खनन राजस्व बेहतर स्थिति में है। इस पर मुख्यमंत्री ने संतोष जताते हुए कहा कि खनिज संसाधनों के सुव्यवस्थित प्रबंधन और पारदर्शी नीतियों के कारण यह सफलता मिली है। उन्होंने अवैध खनन पर सख्त नियंत्रण, आधुनिक तकनीक के उपयोग और निगरानी तंत्र को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए। मंगलवार को स्कूली शिक्षा व समाज कल्याण विभाग की समीक्षा होगी। वित्तीय अनुशासन और राजस्व संग्रह पर जोर वित्त एवं वाणिज्य-कर विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य की वित्तीय स्थिति, बजट प्रबंधन, राजस्व संग्रहण और विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बजट प्रावधानों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए और तय समयसीमा के भीतर लक्ष्यों को पूरा किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की आर्थिक मजबूती के लिए राजस्व संग्रह और वित्तीय अनुशासन बेहद जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। हर विभाग को साझा दृष्टिकोण के साथ काम करना होगा। बैठक में बजट आकलन, राजस्व लक्ष्य, स्थापना व्यय, पूंजीगत प्राप्तियां और केंद्र सरकार से मिलने वाले सहायता अनुदान समेत अन्य विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। सिंचाई योजनाओं को समय पर पूरा करने का निर्देश जल संसाधन विभाग की समीक्षा में राज्य की सिंचाई योजनाओं, मेगा लिफ्ट परियोजनाओं, पाइपलाइन आधारित योजनाओं, बांधों और बहुउद्देश्यीय परियोजनाओं की प्रगति देखी गई। सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सिंचाई योजनाओं को तय समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए, ताकि किसानों को सीधा लाभ मिल सके। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से कृषि उत्पादन बढ़ेगा। नदी जल संरक्षण और पाइप लाइन योजनाओं पर जोर पाइपलाइन आधारित सिंचाई योजनाओं की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने नदी जल संरक्षण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि राज्य की नदियों के जल को राज्य के भीतर ही संरक्षित कर किसानों के खेतों तक पहुंचाने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाई जाए। सीएम ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार योजनाएं तैयार करने, छोटे जलाशयों का निर्माण का निर्देश दिया। विभागों में बायोमैट्रिक व्यवस्था लागू करने का निर्देश सीएम ने प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बायोमैट्रिक उपस्थिति प्रणाली को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया। कहा-सभी विभागों और कार्यालयों में बायोमैट्रिक व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू हो, ताकि जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता आए। जीएसटी, वैट, प्रोफेशनल टैक्स और अन्य कर मदों के अंतर्गत राजस्व संग्रह की स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा हुई। हेमंत ने कर चोरी पर नियंत्रण और स्वैच्छिक अनुपालन बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकी व्यवस्था विकसित करने का निर्देश दिया। Source link

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QUAD Meet Live: क्वाड मीट में जयशंकर से मिलेंगे तीन यार, चीन...

होमताजा खबरदेश क्वाड मीट में जयशंकर से मिलेंगे 3 यार, चीन की निकालेंगे काट, तेल-गैस पर भी बात Last Updated:May 26, 2026, 08:27 IST राजधानी दिल्ली के हैदराबाद हाउस में आज क्वाड देशों (QUAD Meet) के विदेश मंत्रियों की अहम बैठक होने जा रही है. इस बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, समुद्री मार्गों की आजादी, सप्लाई चेन को मजबूत बनाने, ऊर…और पढ़ें क्वाड मीट में एस जयशंकर , मार्को रुबियो, ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वांग और जापान के विदेश मंत्री तोसीमित्सु मोतेगी बैठक करेंगे. राजधानी दिल्ली में आज क्वाड देशों (QUAD Meet) के विदेश मंत्रियों की अहम बैठक होने जा रही है. हैदराबाद हाउस में होने वाली इस बैठक में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री शामिल होंगे. यह बैठक सुबह 9 बजे शुरू होगी, जिसके बाद करीब 9:50 बजे संयुक्त बयान जारी किया जाएगा. इस बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, समुद्री मार्गों की आजादी, सप्लाई चेन को मजबूत बनाने, ऊर्जा सुरक्षा और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी. माना जा रहा है कि बैठक का सबसे बड़ा फोकस चीन के बढ़ते प्रभाव और खासकर क्रिटिकल मिनरल्स सेक्टर में उसके दबदबे को चुनौती देना होगा. दरअसल, पिछले साल क्वाड क्रिटिकल मिनरल्स पहल शुरू की गई थी. अब इस बैठक में सप्लाई चेन को विविध बनाने और आर्थिक सुरक्षा मजबूत करने के लिए कई बड़े कदमों का ऐलान हो सकता है. अमेरिका इस पहल की अगुवाई कर रहा है और माना जा रहा है कि QUAD देश मिलकर चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति तैयार कर रहे हैं. इस बैठक में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की मौजूदा स्थिति पर भी चर्चा होगी. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर उसके असर को देखते हुए क्वाड देश ऊर्जा सुरक्षा को लेकर साझा रणनीति बना सकते हैं. इसके अलावा समुद्री सुरक्षा, ट्रांसनेशनल क्राइम, मानवीय सहायता और आपदा प्रबंधन जैसे मुद्दे भी एजेंडे में शामिल हैं. QUAD Meet Live: क्वाड के सामने सबसे बड़ी चुनौती चीन QUAD इस समय इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का सबसे अहम रणनीतिक मंच माना जाता है, लेकिन इसके सामने आज की तारीख में कई बडी चुनौतियां भी हैं. QUAD की सबसे बडी चुनौती चीन है. चीन इसे अपने खिलाफ रणनीतिक घेराबंदी के रूप में देखता है. दक्षिण चीन सागर, ताइवान स्ट्रेट और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की सैन्य और आर्थिक सक्रियता लगातार बढ रही है. ऐसे में QUAD देशों को संतुलन बनाए रखने के साथ टकराव से भी बचना पडता है. QUAD Meet Live: चीन की गतिविधियों को लेकर चिंता में कई देश क्वाड की यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर में चीन की गतिविधियों को लेकर कई देशों की चिंता बढ़ी हुई है. ऐसे में QUAD देशों की ओर से ‘फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक’ पर जोर दिए जाने की उम्मीद है. संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून (UNCLOS) के तहत समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता और निर्बाध व्यापार पर भी जोर दिया जा सकता है. दिल्ली में होने वाली यह बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ QUAD की नई रणनीतिक तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है. Location : New Delhi,Delhi Source link

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फीकी सब्जी में आ जाए जान, नॉनवेज में डालो तो बने होटल...

Last Updated:May 26, 2026, 08:15 IST Jamshedpur Magic Masala: जमशेदपुर की इस छोटी सी दुकान पर ‘जादुई मसाला’ मिलता है. जादुई इसलिए की एक चुटकी डालने से ही पूरे खाने का स्वाद बदल जाता है. करीब 6 दशक से जीसी प्रसाद बाकी मसालों के साथ यह खास मसाला बेच रहे हैं और आज भी ग्राहकों का विश्वास उनके ऊपर पहले जैसा बना हुआ है. ख़बरें फटाफट जमशेदपुर. भारत को मसालों का देश कहा जाता है और यहां हर क्षेत्र के अपने अलग स्वाद और खुशबू वाले मसाले मिलते हैं. इन्हीं पारंपरिक स्वादों के बीच जमशेदपुर में एक ऐसा नाम भी है, जो पिछले करीब 60 वर्षों से लोगों की रसोई का हिस्सा बना हुआ है. शहर में ‘जादू मसाला’ के नाम से मशहूर यह खास मसाला जीसी प्रसाद अपने हाथों से तैयार करते हैं और आज भी उसी पारंपरिक तरीके को बनाए हुए हैं. 6 दशक से बेच रहे सूखे मसालेजमशेदपुर की एक छोटी सी दुकान में बैठकर जीसी प्रसाद पिछले छह दशक से सूखे मसालों को सही अनुपात में मिलाकर एक खास मिश्रण तैयार करते हैं. उनका कहना है कि इस मसाले की खासियत इसकी संतुलित मात्रा और शुद्ध मिश्रण में छिपी हुई है. यही वजह है कि उनके यहां आने वाले ग्राहक सालों से जुड़े हुए हैं और नए लोग भी एक बार इस्तेमाल करने के बाद दोबारा लौटते हैं. लोकल 18 से बातचीत में जीसी प्रसाद ने बताया कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी इसी दुकान को समर्पित कर दी. उन्होंने कहा कि इसी छोटे कारोबार के जरिए उन्होंने अपने दो बेटों को पढ़ाकर नौकरी तक पहुंचाया और अपनी तीन बेटियों की शादी भी कराई. उनके लिए यह दुकान केवल रोजगार नहीं, बल्कि जीवन की सबसे बड़ी पूंजी रही है. कई मसालों का खास मिश्रणउनका तैयार किया हुआ ‘जादू मसाला’ कई तरह के सूखे मसालों को मिलाकर बनाया जाता है. इसमें धनिया, सरसों, जीरा, सफेद गोलकी, काली गोलकी, जावित्री, बड़ी इलायची, छोटी इलायची और लौंग जैसे कई चुनिंदा मसालों का इस्तेमाल किया जाता है. सभी मसालों को तय मात्रा में मिलाकर तैयार किया जाता है, ताकि स्वाद और खुशबू का संतुलन बना रहे. सब्जी से नॉनवेज तक बढ़ा देता है स्वादजीसी प्रसाद बताते हैं कि इस मसाले की खास पहचान यह है कि यह साधारण सब्जी को भी स्वादिष्ट बना देता है. घर की फीकी या सामान्य सब्जी में इसकी एक चुटकी डालने पर स्वाद और खुशबू दोनों बढ़ जाते हैं. वहीं, नॉनवेज व्यंजनों में इसका इस्तेमाल करने पर खाना होटल जैसा स्वाद देने लगता है. कई ग्राहक इसे सूखे मसाले के रूप में खरीदते हैं, तो कुछ लोग इसे पिसवाकर गरम मसाले के रूप में इस्तेमाल करते हैं. आज इस खास मसाले की कीमत करीब 500 रुपये प्रति किलो है. बदलते समय और बाजार की बढ़ती कीमतों के बावजूद जीसी प्रसाद का यह पारंपरिक स्वाद आज भी जमशेदपुर के लोगों के बीच अपनी अलग पहचान बनाए हुए है. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jamshedpur,Purbi Singhbhum,Jharkhand Source link

झारखंड

मुफस्सिल थाना में नि:शुल्क शुद्ध पेयजल केंद्र की शुरुआत

गिरिडीह|भीषण गर्मी को देखते हुए मुफस्सिल थाना मुख्य द्वार पर सोमवार को थाना प्रभारी श्याम किशोर महतो के नेतृत्व में नि:शुल्क शुद्ध पेयजल वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन एसपी डॉ. बिमल कुमार ने राहगीरों, महिलाओं, पुरुषों और बच्चों को शुद्ध पेयजल वितरित कर किया। इस दौरान एसपी डॉ. बिमल कुमार ने कहा कि बढ़ती गर्मी को देखते हुए जिले के सभी थाना परिसरों के अंदर और बाहर आम जनता तथा राहगीरों के लिए नि:शुल्क शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने कहा कि आम लोग और राहगीर भीषण गर्मी के दौरान थाना परिसर में आकर शुद्ध पेयजल ग्रहण कर सकते हैं और कुछ समय विश्राम भी कर सकते हैं। एसपी ने बताया कि जिले के सभी थाना प्रभारियों को थाना परिसर में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही जिले के विभिन्न चौक-चौराहों पर भी पुलिस की ओर से आम जनता के लिए पेयजल की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने जानकारी दी कि 26 मई को शहर के टॉपर चौक पर भी पुलिस द्वारा नि:शुल्क शुद्ध पेयजल सुविधा शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के इस दौर में “जल ही जीवन” है और आम लोगों के जीवन की सुरक्षा करना पुलिस की पहली प्राथमिकता है। Source link

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