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झारखंड

जामताड़ा कांग्रेस ने बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने को लेकर चलाया...

जामताड़ा | जामताड़ा प्रखंड कांग्रेस कमेटी की ओर से सोमवार को संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से बीएलए-2 कार्यकर्ता बैठक सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और संगठनात्मक मजबूती के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश प्राप्त किए। कार्यक्रम में एसआईआर ट्रेनिंग कोऑर्डिनेटर मुद्दासर खान एवं जिला ट्रेनर जलालुद्दीन अंसारी ने कार्यकर्ताओं को बूथ प्रबंधन, मतदाता सूची पुनरीक्षण और संगठनात्मक गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आगामी चुनावों में सफलता का आधार मजबूत बूथ संगठन और जागरूक कार्यकर्ता ही होंगे। प्रशिक्षण सत्र के दौरान कार्यकर्ताओं को वोट की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी गई। उन्हें मतदाता सूची में नाम कटने, गलत प्रविष्टि और फर्जी मतदान जैसी समस्याओं के प्रति सतर्क रहने तथा समय रहते सुधार कराने के उपाय बताए गए। Source link

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मिर्जापुर की इस शॉप पर रवि तैयार करते हैं 16 प्रकार का...

Last Updated:May 26, 2026, 13:29 IST दुकानदार रवि ने लोकल 18 से बताया कि हमारे यहां का वेज कवाब काफी अच्छा होता है. इसमें जो स्वाद होता है, वो जबरदस्त होता है. वेज कवाब बनाने के लिए  शोयबीन और चने की दाल का प्रयोग किया जाता है. यह एकदम फ्रेश रहता है, जिसको उपयोग में लेते हैं. वेब कबाब के लिए सीक्रेट मसाला बनाया जाता है. घर पर ही इन मसालों को तैयार किया जाता है. इसके अलावा कोई अतिरिक्त चीज नहीं मिलाया जाता है. ख़बरें फटाफट मिर्जापुर: वेज कवाब पराठा और वेब रोल के शौकीन है तो मिर्जापुर का यह दुकान बेहद खास है. मिर्जापुर का फूडी वेज कवाब पर 16 तरीके के कवाब तैयार किए जाते हैं. ग्राहकों को अलग-अलग स्वाद का आनंद लेने के लिए अलग-अलग वैरायटी का कवाब पराठा बनाते हैं. शहर के गिरधर चौराहा के पास दुकान स्थित शॉप पर वेज जवाब पराठा खाने के लिए काफी संख्या में लोग पहुंचते हैं. वेज रोल का दाम 40 रुपये और वेज कवाब पराठा का दाम 70 रुपये हैं. सोयाबीन का ग्रेवी इसके स्वाद को बढ़ा देता है. उसपर हरी चटनी और प्याज का सलाद मिलने के बाद वाह-वाह करेंगे. ऐसे तैयार करते हैं वेज कबाब पराठा दुकानदार रवि ने लोकल 18 से बताया कि हमारे यहां का वेज कवाब काफी अच्छा होता है. इसमें जो स्वाद होता है, वो जबरदस्त होता है. वेज कवाब बनाने के लिए  शोयबीन और चने की दाल का प्रयोग किया जाता है. यह एकदम फ्रेश रहता है, जिसको उपयोग में लेते हैं. वेब कबाब के लिए सीक्रेट मसाला बनाया जाता है. घर पर ही इन मसालों को तैयार किया जाता है. इसके अलावा कोई अतिरिक्त चीज नहीं मिलाया जाता है. वेब रोल के साथ ही वेज कवाब बनाया जाता है. हमने ग्राहकों से फीडबैक लिया है. ग्राहकों की डिमांड पर इसके कई प्रकार में तैयार किया जाता है. कुरकुरा होता है इनका पराठा रवि ने बताया कि वेज रोल का दाम 35 रुपये हैं. यहां पर करीब 5 वर्षों से दुकान लगा रहे हैं. ग्राहकों को देखकर लग रहा होगा कि कितना बेहतर स्वाद रहता है. वेब कवाब पराठा 70 रुपये का मिलता है. इसमें दो कुरकुरे लजीज स्वादिष्ट पराठे रहते हैं. शोयबीन की ग्रेवी, हरी चटनी और सलाद दिया जाता है. अगर आप एक बाद स्वाद का आनंद ले लेंगे तो बार-बार दुकान पर आएंगे. स्वाद के साथ ही कोई ऐसे मसाले तेल या अन्य सामान का उपयोग किया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए नुक्सानदेह हो. स्वाद और स्वास्थ्य दोनों का ख्याल रखते हैं. पूजा बिंद ने बताया कि यहाँ पर ज्यादातर वेज रोल खाती हूं. यह 40 रुपये में मिलता है. इसका स्वाद बेहद ही लाजवाब होता है. मैंने यहां पर स्वाद का जायका लिया, उसके बाद कहीं पर खाने के लिए नहीं गई. इनके वेज कवाब रोल और पराठे का कोई जवाब नहीं है. शालू सोनकर ने बताया कि वेज कवाब पराठा का स्वाद बेहतरीन है. हम लोग कई बार खा चुके हैं. इधर आते तो स्वाद का आनंद उठाते हैं. लजीज होने की वजह से About the Author Rajneesh Kumar Yadav मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Mirzapur,Uttar Pradesh Source link

झारखंड

झारखंड में शह और मात का खेल… दीपक प्रकाश, अर्जुन मुंडा, रघुवर...

Last Updated:May 26, 2026, 12:48 IST Jharkhand Rajya Sabha election : राज्यसभा चुनाव को लेकर झारखंड बीजेपी के अंदरखाने हलचल तेज हो गई है. दिल्ली से लेकर रांची तक बैठकों और लॉबिंग का दौर शुरू हो चुका है. पुराने संगठनात्मक चेहरे, बड़े आदिवासी नेता और हाल के सियासी घटनाक्रमों के केंद्र में रहे नाम अब राज्यसभा की दौड़ में बताए जा रहे हैं. सबसे दिलचस्प बात यह है कि पार्टी के भीतर सिर्फ दिग्गज ही नहीं, बल्कि पुराने कार्यकर्ता भी अपनी दावेदारी जता रहे हैं. झारखंड बीजेपी में राज्यसभा टिकट की रेस तेज, कई दिग्गज नेताओं के नाम चर्चा में रांची. झारखंड की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज है. भारतीय जनता पार्टी के भीतर एक तरफ जहां कई दिग्गज नेताओं और पुराने कार्यकर्ताओं ने अपनी दावेदारी पेश की है, वहीं दूसरी तरफ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के ताजा बयानों ने इस चुनाव को और भी अधिक दिलचस्प बना दिया है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, भाजपा में इस बार राज्यसभा टिकट के लिए लंबी कतार लगी है. निवर्तमान राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश एक बार फिर से उच्च सदन जाने की रेस में सबसे आगे माने जा रहे हैं. हालांकि, इस बार उनके सामने पार्टी के कई भारी-भरकम चेहरे चुनौती बनकर खड़े हैं. पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और रघुवर दास जैसे बड़े राष्ट्रीय चेहरों के नाम भी इस रेस में तेजी से चल रहे हैं. इसके साथ ही, हाल के समय में झामुमो छोड़कर भाजपा में शामिल हुईं सीता सोरेन ने पहले ही सार्वजनिक रूप से अपनी इच्छा जाहिर कर दी है. इन दिग्गजों के अलावा पार्टी के कई जमीनी और पुराने कार्यकर्ताओं ने भी केंद्रीय नेतृत्व के सामने दावेदारी ठोंकी है, जिससे आलाकमान के लिए किसी एक नाम पर मुहर लगाना बड़ी चुनौती बन गया है. बाबूलाल मरांडी का बयान-फैसला दिल्ली में होगा राज्यसभा चुनाव की इस पूरी कशमकश के बीच नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी के भीतर से कई योग्य नाम सामने आए हैं. प्रदेश स्तर पर इन सभी नामों को संकलित कर केंद्रीय चुनाव समिति (दिल्ली) को भेज दिया जाएगा, और अंतिम फैसला पूरी तरह से केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा. उन्होंने भरोसा जताया है कि भाजपा इस चुनाव को पूरी मजबूती के साथ जीतने के लिए मैदान में उतरेगी. ‘अंतरात्मा की आवाज’ और क्रॉस वोटिंग का दांव बाबूलाल मरांडी ने विधायकों की ‘अंतरात्मा की आवाज’ पर वोट देने की बात कही है. राजनीति के जानकारों की नजर में भाजपा के भीतर टिकट की रेस और बाबूलाल मरांडी के ‘अंतरात्मा की आवाज’ वाले दांव के पीछे की वास्तविक राजनीतिक रणनीति झलकती है. दरअसल, झारखंड विधानसभा में वर्तमान दलीय स्थिति को देखते हुए भाजपा को अपने उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता पड़ सकती है. इसी गणित को साधने के लिए मरांडी ने एक बड़ा राजनीतिक दांव खेला है. जादुई आंकड़े से ज्यादा वोट लाने का दावा बाबू लाल मरांडी ने स्पष्ट रूप से कहा कि राज्यसभा का चुनाव विधानसभा परिसर के बाहर (वोटिंग कंपार्टमेंट में) होता है, और इसमें किसी भी तरह का पार्टी व्हिप लागू नहीं होता है. व्हिप न होने के कारण विधायक अपनी व्यक्तिगत इच्छा से मतदान करने के लिए स्वतंत्र होते हैं. ऐसे में अब बाबूलाल मरांडी के दावों के बाद सवाल उठने लगा है कि आखिर बीजेपी किस चेहरे पर दांव लगाएगी, और कौन-कौन वो चेहरे हैं जो अंतरात्मा की आवाज पर वोटिंग करने वाले हैं. इसके साथ ही यह भी कि क्या राज्यसभा चुनाव झारखंड की राजनीति में नया सियासी संदेश देने वाला है? बीजेपी के लिए क्यों अहम है यह चुनाव? झारखंड में राज्यसभा चुनाव केवल एक सीट का चुनाव नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे राजनीतिक ताकत दिखाने के मौके के रूप में देखा जा रहा है. दरअसल, बीजेपी लंबे समय से राज्य में संगठन को मजबूत करने और सत्ता में वापसी की रणनीति पर काम कर रही है. अगर पार्टी किसी बड़े आदिवासी चेहरे या संगठन के पुराने नेता को राज्यसभा भेजती है तो इसका असर आने वाले विधानसभा चुनावों पर भी पड़ सकता है. खासकर आदिवासी राजनीति और संगठनात्मक संतुलन को देखते हुए यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है. क्या पार्टी सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधेगी? राजनीति के जानकारों का मानना है कि बीजेपी उम्मीदवार चयन में सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण को जरूर ध्यान में रखेगी. अर्जुन मुंडा और सीता सोरेन जैसे नेताओं के नाम आदिवासी राजनीति के लिहाज से अहम माने जा रहे हैं. वहीं दीपक प्रकाश संगठनात्मक अनुभव और केंद्रीय नेतृत्व से करीबी के कारण मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं. रघुवर दास का नाम भी इसलिए चर्चा में है, क्योंकि वह लंबे समय तक झारखंड बीजेपी का बड़ा चेहरा रहे हैं. झारखंड की राजनीति में शह और मात का खेल हालांकि, यह भी साफ है कि अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व की रणनीति और आने वाले राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर लिया जाएगा. फिलहाल झारखंड बीजेपी में राज्यसभा चुनाव को लेकर कई दिग्गज नेताओं के नाम चर्चा में हैं और पार्टी के भीतर लॉबिंग का दौर शुरू हो चुका है. अब सबकी नजर दिल्ली पर टिकी है, जहां केंद्रीय नेतृत्व अंतिम फैसला करेगा. यह चुनाव सिर्फ एक सीट की लड़ाई नहीं, बल्कि झारखंड बीजेपी के भविष्य के राजनीतिक संदेश और संगठनात्मक संतुलन की भी परीक्षा माना जा रहा है. About the Author Vijay jha पत्रकारिता क्षेत्र में 22 वर्षों से कार्यरत. प्रिंट, इलेट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन. नेटवर्क 18, ईटीवी, मौर्य टीवी, फोकस टीवी, न्यूज वर्ल्ड इंडिया, हमार टीवी, ब्लूक्राफ्ट डिजिट…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

झारखंड

गरमा जुताई से किसानों को मिलेगा फायदा, जलवायु परिवर्तन से निपटने में...

आप खेती-किसानी से जुड़े किस विषय पर जानकारी चाहते हैं, वॉट्सएप नंबर 9308098272 पर सिर्फ मैसेज करें। भास्कर न्यूज | जामताड़ा जिले में बदलते जलवायु परिदृश्य और अनियमित वर्षा को देखते हुए किसानों के लिए गरमा जुताई एक प्रभावी कृषि तकनीक के रूप में उभर रही है। जिला कृषि पदाधिकारी लव कुमार ने बताया कि गरमा जुताई खरीफ फसल की बुवाई से पहले गर्मी के मौसम में खेत की गहरी जुताई करने की प्रक्रिया है। यह कार्य जून के बीच तेज धूप में मिट्टी पलटने वाले हल या ट्रैक्टर से किया जाता है। उन्होंने बताया कि गरमा जुताई करने से मिट्टी में छिपे कीट, रोगजनक और खरपतवारों के बीज तेज धूप के संपर्क में आकर नष्ट हो जाते हैं। इससे फसल में रोग और कीटों का प्रकोप कम होता है तथा रासायनिक दवाओं पर निर्भरता घटती है। साथ ही, मिट्टी भुरभुरी बनती है, उसकी जल धारण क्षमता बढ़ती है और वर्षा जल का बेहतर संचयन संभव हो पाता है। खेत में नमी लंबे समय तक बनी रहती है, जिससे सूखे की स्थिति में भी फसल को लाभ मिलता है। कहा कि जलवायु परिवर्तन के दौर में गरमा जुताई लोचदार कृषि का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह तकनीक मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने, जल संरक्षण बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने में सहायक है। किसान गरमा जुताई, मेढ़बंदी, वर्षा जल संचयन, सूखा सहनशील किस्मों का चयन तथा मल्चिंग जैसी तकनीकों को अपनाकर नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं। Source link

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नुक्कड़ नाटक से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

भास्कर न्यूज |चित्तरंजन चित्तरंजन रेल इंजन कारखाना (चिरेका) में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पर्यावरण संरक्षण को लेकर लगातार विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। 15 मई से 5 जून 2026 तक चलने वाले इस अभियान की शुरुआत 15 मई को शपथ ग्रहण कार्यक्रम के साथ की गई थी। इसी क्रम में सोमवार को चिरेका के वर्क्स ऑफिस एवं वर्कशॉप क्षेत्र में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य कर्मचारियों और आम लोगों के बीच पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। कार्यक्रम में भारत स्काउट एवं गाइड के स्वयंसेवकों ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर पर्यावरण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावी ढंग से लोगों के सामने रखा। नाटक के माध्यम से “सिंगल-यूज़ प्लास्टिक को ना कहें” का संदेश प्रमुखता से दिया गया। साथ ही प्लास्टिक के अत्यधिक उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों को दर्शाते हुए लोगों को इसके उपयोग में कमी लाने के लिए प्रेरित किया गया। नाटक में पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने, स्वच्छता बनाए रखने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया। उपस्थित लोगों ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे पर्यावरण जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल बताया। चिरेका प्रबंधन की ओर से आयोजित इस तरह के कार्यक्रम यह दर्शाते हैं कि संस्था पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर है और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। आने वाले दिनों में भी इस अभियान के तहत विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा सके। Source link

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रणदीप सुरजेवाला की अग्नि परीक्षा, कर्नाटक संकट से उबरेगी कांग्रेस या फिर...

Karnataka Congress Crisis: कर्नाटक कांग्रेस एक बार फिर सत्ता से ज्यादा अंदरूनी सियासत को लेकर चर्चा में है. राज्य में मुख्यमंत्री बदलने की अटकलों के बीच पार्टी नेतृत्व पर दबाव बढ़ता जा रहा है. चर्चा है कि कांग्रेस हाईकमान अब सिद्दारमैया की जगह डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपने की तैयारी कर रहा है. इसी मुद्दे पर दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व के साथ अहम बैठक चल रही है, जिसमें दोनों दिग्गज नेता मौजूद हैं. लेकिन इस पूरी कवायद के केंद्र में एक और चेहरा है. वो हैं रणदीप सिंह सुरजेवावला. कर्नाटक कांग्रेस के प्रभारी के तौर पर सुरजेवाला पिछले कई महीनों से सिद्दारमैया और डीके शिवकुमार गुट के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं. अब जबकि नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा तेज है, उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि सत्ता परिवर्तन हो भी जाए तो पार्टी टूटे नहीं और सरकार स्थिर बनी रहे. दरअसल, 2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद ही मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान सामने आ गई थी. सिद्दारमैया और डीके शिवकुमार दोनों ही मुख्यमंत्री बनना चाहते थे. आखिरकार हाईकमान ने समझौते का रास्ता निकाला और सिद्दारमैया को मुख्यमंत्री, जबकि डीके शिवकुमार को डिप्टी सीएम बनाया गया. उसी समय यह चर्चा भी चली थी कि ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला लागू हो सकता है, हालांकि पार्टी ने कभी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की. सरकार के कार्यकाल का आधा से अधिक समय पूरा अब सरकार के कार्यकाल का आधा से अधिक समय पूरा हो गया है तो एक बार फिर सत्ता परिवर्तन की चर्चा ने जोर पकड़ लिया है. डीके शिवकुमार समर्थक खुलकर यह दावा कर रहे हैं कि अब वादा निभाने का समय आ गया है. दूसरी तरफ सिद्दारमैया खेमे का मानना है कि उनकी लोकप्रियता और प्रशासनिक पकड़ अभी भी कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा आधार है. ऐसे में उन्हें हटाना राजनीतिक जोखिम साबित हो सकता है. यहीं से रणदीप सुरजेवाला की असली परीक्षा शुरू होती है. अगर वह दोनों गुटों को संतुष्ट रखते हुए नेतृत्व परिवर्तन कराने में सफल हो जाते हैं, तो यह उनकी बड़ी राजनीतिक उपलब्धि मानी जाएगी. इससे यह संदेश भी जाएगा कि कांग्रेस हाईकमान अब भी राज्यों में संगठन और सत्ता दोनों पर नियंत्रण बनाए रखने में सक्षम है. लेकिन अगर मामला बिगड़ता है, तो इसके दूरगामी असर हो सकते हैं. सिद्दारमैया केवल एक मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि कर्नाटक में कांग्रेस का सबसे बड़ा जनाधार रखने वाले नेता माने जाते हैं. विशेष रूप से ओबीसी, अल्पसंख्यक और ग्रामीण वोट बैंक पर उनकी मजबूत पकड़ है. अगर उन्हें अपमानजनक तरीके से हटाया गया या उनकी सहमति के बिना फैसला लिया गया, तो पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ सकता है. शिवकुमार भी कांग्रेस के लिए बेहद अहम दूसरी तरफ डीके शिवकुमार भी कांग्रेस के लिए बेहद अहम हैं. संगठन को मजबूत करने, संसाधन जुटाने और चुनावी रणनीति तैयार करने में उनकी भूमिका निर्णायक रही है. कांग्रेस की 2023 की जीत में उनकी मेहनत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. ऐसे में अगर उन्हें फिर इंतजार करने को कहा गया, तो उनके समर्थकों में नाराजगी बढ़ना तय माना जा रहा है. कांग्रेस की सबसे बड़ी चिंता यह है कि कहीं यह नेतृत्व परिवर्तन राजस्थान जैसी स्थिति न पैदा कर दे, जहां सत्ता और संगठन की लड़ाई लंबे समय तक पार्टी को नुकसान पहुंचाती रही. पार्टी हाईकमान इस बार कोई खुला टकराव नहीं चाहता. इसलिए सुरजेवाला लगातार दोनों नेताओं से संवाद बनाए हुए हैं. असल चुनौती केवल मुख्यमंत्री बदलने की नहीं, बल्कि सत्ता संतुलन बनाए रखने की है. कांग्रेस जानती है कि कर्नाटक फिलहाल दक्षिण भारत में उसका सबसे मजबूत राज्य है. अगर यहां भी गुटबाजी खुलकर सामने आई, तो इसका असर सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी पार्टी की छवि प्रभावित होगी. इसलिए दिल्ली में चल रही बैठकों को केवल नेतृत्व परिवर्तन की कवायद के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे कांग्रेस की राजनीतिक प्रबंधन क्षमता की बड़ी परीक्षा माना जा रहा है. आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि रणदीप सुरजेवाला इस संकट को सुलझाने में सफल होते हैं या फिर कर्नाटक कांग्रेस एक नए शक्ति संघर्ष की ओर बढ़ती है. Source link

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चैंपियंस के साथ ये कैसा सलूक? इतिहास रचने वाले खिलाड़ियों को ई-रिक्शा...

Last Updated:May 26, 2026, 11:44 IST Bhopal News: इस स्पर्धा में देव कुमार मीणा ने गोल्ड मेडल तो कुलदीप ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया. इस उपलब्धि के महज कुछ घंटों बाद दोनों खिलाड़ियों को खुद अपने पोल ई-रिक्शा पर लादकर ले जाने पड़े, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. पोल्स को ई-रिक्शा में रखते देव कुमार मीणा और कुलदीप कुमार. भोपाल/रांची. पोल वॉल्ट मुकाबले में भाग लेने वाले मध्य प्रदेश अकादमी भोपाल के युवा एथलीट देव कुमार मीणा और कुलदीप कुमार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देख हर कोई दंग है. सिस्टम पर तमाम तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं. वायरल वीडियो में दोनों खिलाड़ियों को सड़क किनारे देखा जा सकता है. देव और कुलदीप अपने-अपने फाइबरग्लास पोल ई-रिक्शा में लादकर होटल ले जाते दिख रहे हैं. यह तस्वीर तब के चंद घंटों बाद की है, जब दोनों खिलाड़ियों ने एथलेटिक्स में इतिहास रचा और फिर उन्हें बदहाल सिस्टम के चलते ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा. दरअसल देव कुमार मीणा और कुलदीप कुमार ने रांची के बिरसा मुंडा स्टेडियम में आयोजित फेडरेशन कप में पुरुष पोल वॉल्ट में 5.45 मीटर की समान छलांग लगाकर नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया और कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए क्वालिफाई कर लिया. इस स्पर्धा में देव कुमार ने गोल्ड तो कुलदीप ने सिल्वर मेडल (काउंटडाउन के आधार पर) अपने नाम किया. इस उपलब्धि के कुछ घंटों बाद दोनों खिलाड़ियों को खुद अपने पोल ई-रिक्शा पर लादकर ले जाने पड़े, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. देश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों के साथ इस तरह के सलूक को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. टीटीई ने ट्रेन से उताराइसी साल ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप से लौटते समय देव कुमार मीणा और कुलदीप कुमार को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में स्थित पनवेल स्टेशन पर टीटीई ने ट्रेन से उतार दिया था. दरअसल टीटीई ने उनके पोल्स के साथ यात्रा करने पर आपत्ति जताई थी. कहासुनी के बाद टीटीई ने उन्हें यात्रा करने से रोक दिया था. मजबूरन उन्हें ट्रेन से उतरना पड़ा. इस वजह से दोनों वहां करीब पांच घंटे तक फंसे रहे थे. टीटीई द्वारा की गई बदतमीजी के बाद देव कुमार मीणा ने एक भावुक वीडियो शेयर किया था. उन्होंने आपबीती सुनाते हुए कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के साथ ऐसा सलूक हो सकता है, तो सोचिए जूनियर लेवल के खिलाड़ियों साथ क्या होता होगा. बताते चलें कि पोल वॉल्ट स्पर्धा में इस्तेमाल होने वाले पांच मीटर लंबे ये पोल बेहद खास और संवेदनशील होते हैं. इन्हें संभालना और एक जगह से दूसरी जगह ले जाना आसान काम नहीं होता है. About the Author Rahul Singh राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Bhopal,Madhya Pradesh Source link

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पेंशन नहीं मिलने से बुजुर्ग दंपती परेशान पीवीटीजी शिविर में फिर से...

भास्कर न्यूज | पबिया नारायणपुर प्रखंड के पबिया पंचायत अंतर्गत सांवलापुर गांव में एक बुजुर्ग दंपति पेंशन के अभाव में कठिन जीवन जीने को मजबूर है। मोहली समुदाय से जुड़े 68 वर्षीय भादो मोहली और उनकी 64 वर्षीय पत्नी झकसी देवी आज भी सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। उम्र के इस पड़ाव में जहां उन्हें सामाजिक सुरक्षा पेंशन का सहारा मिलना चाहिए, वहीं उन्हें दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। परिवार की आजीविका का मुख्य साधन पारंपरिक बांस के कामकाज से है। भादो मोहली बांस से टोकरी और अन्य घरेलू उपयोग की वस्तुएं बनाकर स्थानीय बाजार में बेचते हैं, जिससे जो थोड़ी-बहुत आय होती है, उसी से किसी तरह घर चलता है। हालांकि बढ़ती उम्र और कमजोर होती शारीरिक क्षमता के कारण काम करना दिन-ब-दिन मुश्किल होता जा रहा है। दंपति ने बताया कि उन्होंने कई बार पंचायत और स्तर पर आयोजित शिविरों में पेंशन के लिए आवेदन दिया, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। हर बार उन्हें आश्वासन तो मिलता है, परंतु लाभ नहीं। इससे वे काफी निराश और परेशान हैं। उनका कहना है कि यदि उन्हें समय पर पेंशन मिल जाती, तो जीवन थोड़ा आसान हो जाता। सोमवार को शिविर में एक बार फिर उन्होंने पेंशन के लिए आवेदन जमा किया और प्रशासन से मदद की गुहार लगाई। Source link

झारखंड

JMM को राज्यसभा चुनाव में हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका:चुनाव आयोग को पत्र...

झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए 18 जून को चुनाव होना तय होने के साथ ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भाजपा ने अपने प्रत्याशी उतारने का फैसला कर दिया है। वहीं सत्तारूढ़ झामुमो ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर गंभीर आशंका जताई है। झामुमो ने इस पूरे मामले को लेकर चुनाव आयोग को पत्र लिखकर हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका जताई है। पार्टी की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि गठबंधन के पास दोनों सीटें जीतने के लिए पर्याप्त विधायक हैं, जबकि एनडीए के पास संख्या बल कम है। ऐसे में भाजपा द्वारा उम्मीदवार उतारने के बाद विधायकों को प्रभावित करने के लिए आर्थिक प्रलोभन, बाहरी दबाव या अन्य अनैतिक तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। झामुमो ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए खतरा बताया है। एजेंसियों को सतर्क रखने की अपील की झामुमो ने चुनाव आयोग से निष्पक्ष, पारदर्शी और भयमुक्त माहौल में चुनाव कराने के लिए विशेष निगरानी व्यवस्था लागू करने की मांग की है। पार्टी ने केंद्रीय एजेंसियों जैसे सीबीआई, ईडी, केंद्रीय सतर्कता आयोग, राज्य खुफिया निदेशालय और राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को भी सतर्क रखने का आग्रह किया है। झामुमो का कहना है कि अगर समय रहते सख्ती नहीं बरती गई तो चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। वहीं, इस मुद्दे को लेकर राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। भाजपा की सहयोगी दलों से संपर्क बढ़ाने की तैयारी राज्यसभा चुनाव में बीजेपी एक सीट पर मजबूत उम्मीदवार उतारने की बात कही है। पार्टी की बैठक में यह भी चर्चा हुई कि पार्टी और उसके सहयोगी दलों के पास कुल 24 वोट हैं। जीत के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाने की कोशिश की जाएगी। पार्टी ने निर्णय लिया गया कि सभी विधायकों से राष्ट्रहित में समर्थन की अपील की जाएगी, ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को और मजबूत किया जा सके। इसके साथ ही जेएलकेएम विधायक जयराम महतो, आजसू, जदयू और लोजपा (आर) के विधायकों एवं प्रदेश नेतृत्व से भी संपर्क साधने पर सहमति बनी। प्रदेश महामंत्री अमर बाउरी ने कहा कि पार्टी का ही कार्यकर्ता उम्मीदवार होगा, कोई बाहरी चेहरा नहीं उतारा जाएगा। उन्होंने महागठबंधन पर आरोप लगाया कि चुनाव से पहले ही उसे अपने विधायकों पर भरोसा नहीं रहा। —————————————- इसे भी पढ़ें.… सोरेन परिवार की बहू या बेटी जा सकती है राज्यसभा:अंजलि, कल्पना या हेमलता के नाम की चर्चा; कांग्रेस-नाथवाणी भी संपर्क में राज्यसभा चुनाव को लेकर झारखंड की सियासत में इस बार पारिवारिक प्राथमिकता साफ नजर आ रही है। झामुमो ने अपनी रणनीति में सबसे ऊपर परिवार को रखा है। संकेत मिल रहे हैं कि गुरुजी की खाली हुई सीट पर उनका ही परिवार दावा मजबूत कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी इस बार परिवार की किसी महिला सदस्य को राज्यसभा भेजने की तैयारी में है। आधिकारिक तौर पर भले ही चुप्पी साधी गई हो, लेकिन अंदरखाने यह लगभग तय माना जा रहा है कि यह मौका परिवार के भीतर ही जाएगा। यहां पढ़ें पूरी खबर…. Source link

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अब रेस कोर्स की जमीन भी होगी खाली, 150 एकड़ में फैला...

होमताजा खबरदेश अब रेस कोर्स की जमीन होगी खाली, 150 एकड़ में फैला है क्लब, HC ने दी हरी झंडी Last Updated:May 26, 2026, 11:31 IST दिल्ली हाईकोर्ट डिवीजन बेंच ने दिल्ली रेस क्लब को मिली अंतरिम राहत हटाई, केंद्र के कारण बताओ नोटिस पर रोक खत्म, अब सरकार कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ा सकेगी. दिल्ली हाईकोर्ट ने रेस कोर्स क्लब की जमीन खाली कराने का रास्ता साफ कर दिया है. Delhi Race Course Club Case: दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली रेस क्लब मामले में केंद्र सरकार को बड़ी राहत दी है. कोर्ट उस अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके तहत सार्वजनिक परिसर कानून के तहत जारी कारण बताओ नोटिस पर रोक लगाई गई थी. अदालत ने केंद्र सरकार की अपील स्वीकार करते हुए अपने ही सिंगल बेंच के फैसले को पलट दिया. मामला दिल्ली रेस क्लब को केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए नोटिस से जुड़ा है. केंद्र ने क्लब को सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया था. इस नोटिस में क्लब से पूछा गया था कि उसे संबंधित जमीन और परिसर से बेदखल क्यों न किया जाए. यह क्लब करीब 150 एकड़ जमीन में फैला हुआ है. इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने क्लब को अंतरिम राहत देते हुए नोटिस पर रोक लगा दी थी और केंद्र सरकार को तत्काल कार्रवाई से रोका था. अदालत ने उस समय कहा था कि बिना उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाए किसी संस्थान को जबरन बेदखल नहीं किया जा सकता. हालांकि अब डिवीजन बेंच ने केंद्र सरकार की दलीलों को स्वीकार करते हुए कहा कि कारण बताओ नोटिस पर शुरुआती स्तर पर रोक लगाना उचित नहीं था. अदालत ने माना कि संबंधित प्राधिकरण को कानून के तहत अपनी प्रक्रिया पूरी करने का अधिकार है और नोटिस जारी करना केवल प्रारंभिक कार्रवाई है. जमीन की लीज काफी पहले समाप्त हो चुकी है सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार ने अदालत में कहा कि दिल्ली रेस क्लब जिस जमीन पर संचालित हो रहा है, उसकी लीज काफी पहले समाप्त हो चुकी है और क्लब का कब्जा अब वैधानिक जांच के दायरे में है. सरकार ने यह भी तर्क दिया कि सार्वजनिक संपत्ति से जुड़े मामलों में प्रशासनिक प्रक्रिया को बीच में रोकना उचित नहीं होगा. इस मामले में पहले भी हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि यदि वह क्लब को हटाना चाहती है तो ड्यू प्रोसेस ऑफ लॉ यानी विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन करना होगा. अदालत ने मार्च में केंद्र को जबरन कब्जा लेने से रोका था. दिल्ली रेस क्लब का कहना है कि वह लंबे समय से वैध रूप से परिसर का उपयोग कर रहा है और नियमित रूप से ग्राउंड रेंट का भुगतान करता रहा है. क्लब ने यह भी दलील दी थी कि उसका मामला होल्डिंग ओवर टेनेंसी के तहत आता है, इसलिए अचानक बेदखली की कार्रवाई गैरकानूनी होगी. अब डिवीजन बेंच के ताजा फैसले के बाद केंद्र सरकार को आगे की कार्रवाई करने का रास्ता साफ हो गया है. हालांकि इसका मतलब तत्काल बेदखली नहीं है, बल्कि अब संबंधित प्राधिकरण कानून के तहत सुनवाई और अन्य प्रक्रियाएं आगे बढ़ा सकेगा. दिल्ली रेस क्लब का यह मामला राजधानी के कई पुराने और प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़ी जमीनों और लीज विवादों के बीच अहम माना जा रहा है. हाल के महीनों में केंद्र सरकार ने कई प्रमुख क्लबों और संस्थानों की जमीनों की समीक्षा शुरू की है. About the Author संतोष कुमार न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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