Last Updated:May 26, 2026, 12:48 IST Jharkhand Rajya Sabha election : राज्यसभा चुनाव को लेकर झारखंड बीजेपी के अंदरखाने हलचल तेज हो गई है. दिल्ली से लेकर रांची तक बैठकों और लॉबिंग का दौर शुरू हो चुका है. पुराने संगठनात्मक चेहरे, बड़े आदिवासी नेता और हाल के सियासी घटनाक्रमों के केंद्र में रहे नाम अब राज्यसभा की दौड़ में बताए जा रहे हैं. सबसे दिलचस्प बात यह है कि पार्टी के भीतर सिर्फ दिग्गज ही नहीं, बल्कि पुराने कार्यकर्ता भी अपनी दावेदारी जता रहे हैं. झारखंड बीजेपी में राज्यसभा टिकट की रेस तेज, कई दिग्गज नेताओं के नाम चर्चा में रांची. झारखंड की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज है. भारतीय जनता पार्टी के भीतर एक तरफ जहां कई दिग्गज नेताओं और पुराने कार्यकर्ताओं ने अपनी दावेदारी पेश की है, वहीं दूसरी तरफ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के ताजा बयानों ने इस चुनाव को और भी अधिक दिलचस्प बना दिया है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, भाजपा में इस बार राज्यसभा टिकट के लिए लंबी कतार लगी है. निवर्तमान राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश एक बार फिर से उच्च सदन जाने की रेस में सबसे आगे माने जा रहे हैं. हालांकि, इस बार उनके सामने पार्टी के कई भारी-भरकम चेहरे चुनौती बनकर खड़े हैं. पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और रघुवर दास जैसे बड़े राष्ट्रीय चेहरों के नाम भी इस रेस में तेजी से चल रहे हैं. इसके साथ ही, हाल के समय में झामुमो छोड़कर भाजपा में शामिल हुईं सीता सोरेन ने पहले ही सार्वजनिक रूप से अपनी इच्छा जाहिर कर दी है. इन दिग्गजों के अलावा पार्टी के कई जमीनी और पुराने कार्यकर्ताओं ने भी केंद्रीय नेतृत्व के सामने दावेदारी ठोंकी है, जिससे आलाकमान के लिए किसी एक नाम पर मुहर लगाना बड़ी चुनौती बन गया है. बाबूलाल मरांडी का बयान-फैसला दिल्ली में होगा राज्यसभा चुनाव की इस पूरी कशमकश के बीच नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी के भीतर से कई योग्य नाम सामने आए हैं. प्रदेश स्तर पर इन सभी नामों को संकलित कर केंद्रीय चुनाव समिति (दिल्ली) को भेज दिया जाएगा, और अंतिम फैसला पूरी तरह से केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा. उन्होंने भरोसा जताया है कि भाजपा इस चुनाव को पूरी मजबूती के साथ जीतने के लिए मैदान में उतरेगी. ‘अंतरात्मा की आवाज’ और क्रॉस वोटिंग का दांव बाबूलाल मरांडी ने विधायकों की ‘अंतरात्मा की आवाज’ पर वोट देने की बात कही है. राजनीति के जानकारों की नजर में भाजपा के भीतर टिकट की रेस और बाबूलाल मरांडी के ‘अंतरात्मा की आवाज’ वाले दांव के पीछे की वास्तविक राजनीतिक रणनीति झलकती है. दरअसल, झारखंड विधानसभा में वर्तमान दलीय स्थिति को देखते हुए भाजपा को अपने उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता पड़ सकती है. इसी गणित को साधने के लिए मरांडी ने एक बड़ा राजनीतिक दांव खेला है. जादुई आंकड़े से ज्यादा वोट लाने का दावा बाबू लाल मरांडी ने स्पष्ट रूप से कहा कि राज्यसभा का चुनाव विधानसभा परिसर के बाहर (वोटिंग कंपार्टमेंट में) होता है, और इसमें किसी भी तरह का पार्टी व्हिप लागू नहीं होता है. व्हिप न होने के कारण विधायक अपनी व्यक्तिगत इच्छा से मतदान करने के लिए स्वतंत्र होते हैं. ऐसे में अब बाबूलाल मरांडी के दावों के बाद सवाल उठने लगा है कि आखिर बीजेपी किस चेहरे पर दांव लगाएगी, और कौन-कौन वो चेहरे हैं जो अंतरात्मा की आवाज पर वोटिंग करने वाले हैं. इसके साथ ही यह भी कि क्या राज्यसभा चुनाव झारखंड की राजनीति में नया सियासी संदेश देने वाला है? बीजेपी के लिए क्यों अहम है यह चुनाव? झारखंड में राज्यसभा चुनाव केवल एक सीट का चुनाव नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे राजनीतिक ताकत दिखाने के मौके के रूप में देखा जा रहा है. दरअसल, बीजेपी लंबे समय से राज्य में संगठन को मजबूत करने और सत्ता में वापसी की रणनीति पर काम कर रही है. अगर पार्टी किसी बड़े आदिवासी चेहरे या संगठन के पुराने नेता को राज्यसभा भेजती है तो इसका असर आने वाले विधानसभा चुनावों पर भी पड़ सकता है. खासकर आदिवासी राजनीति और संगठनात्मक संतुलन को देखते हुए यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है. क्या पार्टी सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधेगी? राजनीति के जानकारों का मानना है कि बीजेपी उम्मीदवार चयन में सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण को जरूर ध्यान में रखेगी. अर्जुन मुंडा और सीता सोरेन जैसे नेताओं के नाम आदिवासी राजनीति के लिहाज से अहम माने जा रहे हैं. वहीं दीपक प्रकाश संगठनात्मक अनुभव और केंद्रीय नेतृत्व से करीबी के कारण मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं. रघुवर दास का नाम भी इसलिए चर्चा में है, क्योंकि वह लंबे समय तक झारखंड बीजेपी का बड़ा चेहरा रहे हैं. झारखंड की राजनीति में शह और मात का खेल हालांकि, यह भी साफ है कि अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व की रणनीति और आने वाले राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर लिया जाएगा. फिलहाल झारखंड बीजेपी में राज्यसभा चुनाव को लेकर कई दिग्गज नेताओं के नाम चर्चा में हैं और पार्टी के भीतर लॉबिंग का दौर शुरू हो चुका है. अब सबकी नजर दिल्ली पर टिकी है, जहां केंद्रीय नेतृत्व अंतिम फैसला करेगा. यह चुनाव सिर्फ एक सीट की लड़ाई नहीं, बल्कि झारखंड बीजेपी के भविष्य के राजनीतिक संदेश और संगठनात्मक संतुलन की भी परीक्षा माना जा रहा है. About the Author Vijay jha पत्रकारिता क्षेत्र में 22 वर्षों से कार्यरत. प्रिंट, इलेट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन. नेटवर्क 18, ईटीवी, मौर्य टीवी, फोकस टीवी, न्यूज वर्ल्ड इंडिया, हमार टीवी, ब्लूक्राफ्ट डिजिट…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Source link