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झारखंड

पलामू में जमीन विवाद; दो हुए गिरफ्तार:जमीन विवाद में एक की हुई...

पलामू जिले के चैनपुर थाना क्षेत्र के रामपुर गांव में जमीन विवाद को लेकर हुई गोलीबारी के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इनकी पहचान 28 वर्षीय गोलू सिंह उर्फ नितेश कुमार सिंह और 80 वर्षीय ब्रह्मदेव सिंह के रूप में हुई है। दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अधीक्षक कपिल चौधरी ने बताया कि इस मामले में नामजद 15 आरोपी अभी भी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस सभी पहलुओं पर गहन जांच कर रही है और दावा किया है कि जल्द ही बाकी आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। घटना के बाद प्रशासन ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। 23 मई को हुई घटना, विवाद ने लिया था हिंसक रूप जानकारी के अनुसार, 23 मई को रामपुर गांव में जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच झड़प हो गई थी। शुरुआत में कहासुनी और मारपीट हुई, लेकिन देखते ही देखते मामला गोलीबारी तक पहुंच गया। इस हिंसक घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है और लोग सहमे हुए हैं। 42 आरोपियों पर मामला दर्ज, एसआईटी कर रही जांच घटना के बाद पीड़ित पक्ष की ओर से चैनपुर थाना में 17 नामजद और 25 अज्ञात समेत कुल 42 आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। पुलिस तकनीकी साक्ष्यों और गुप्त सूचना के आधार पर फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि सभी आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है और पूरे मामले की गहराई से जांच जारी है। Source link

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Rajouri Encounter LIVE। Rajouri Security Forces Operation Live। LIVE: राजौरी के जंगलों...

होमताजा खबरदेश LIVE: राजौरी के जंगलों में गुरिल्ला वॉर… छिप-छिपकर गांव बदल रहे आतंकी Last Updated:May 25, 2026, 17:21 IST Rajouri Encounter Live Update: जम्मू-कश्मीर के राजौरी में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच भीषण मुठभेड़ जारी है. आतंकी सेना को छकाने के लिए गम्भीर गली और मंजकोट के जंगलों के रास्ते लगातार अपना ठिकाना बदलकर ‘थ अड्डा’ इलाके में पहुंच गए हैं. लगातार लोकेशन बदलने से सेना की चुनौतियां बढ़ गई हैं. फिलहाल सुरक्षाबलों ने 2-3 आतंकियों को चारों तरफ से घेर लिया है और दोनों ओर से ताबड़तोड़ गोलीबारी जारी है. सेना ऑपरेशन चला रही है. (Representational Picture) जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में आतंकियों के खिलाफ सुरक्षाबलों का बड़ा ऑपरेशन चल रहा है, लेकिन घने जंगलों और पहाड़ों का फायदा उठाकर आतंकी लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे हैं. पिछले तीन दिनों के भीतर आतंकियों ने सेना को छकाने के लिए एक बार फिर अपना ठिकाना (इलाका) बदल लिया है. सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, आतंकी गम्भीर गली के रास्ते मंजकोट इलाके में दाखिल हुए और फिर घने जंगलों का सहारा लेते हुए ‘थ अड्डा’ क्षेत्र की तरफ बढ़ गए हैं. आतंकियों द्वारा लगातार गांव और ठिकाने बदलने की इस रणनीति ने सुरक्षाबलों के लिए चुनौतियां काफी बढ़ा दी हैं. इस बीच सेना और स्थानीय पुलिस ने पूरे इलाके को चारों तरफ से घेर लिया है और दोनों ओर से रह-रह कर ताबड़तोड़ गोलीबारी हो रही है. राजौरी एनकाउंटर लाइव अपडेट्स आतंकियों की पैंतरेबाज़ी: राजौरी के घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों का फायदा उठाकर आतंकी लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे हैं. पिछले तीन दिनों में गम्भीर गली के रास्ते मंजकोट होते हुए वे ‘थ अड्डा’ इलाके में जा छिपे हैं, जिससे सेना की मुश्किलें बढ़ गई हैं जंगलों में भारी घेराबंदी: आतंकियों के लगातार गांव और ठिकाने बदलने की रणनीति को नाकाम करने के लिए सेना और स्थानीय पुलिस ने पूरे क्षेत्र को चारों तरफ से कॉर्डन कर लिया है. सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकियों के भागने के सभी रास्ते बंद कर दिए हैं. इलाके में भारी दहशत: जंगलों में दोनों ओर से रुक-रुक कर हो रही ताबड़तोड़ गोलीबारी और धमाकों की गूंज से पूरा इलाका दहल उठा है. मुठभेड़ वाली जगह के आसपास के गांवों में रहने वाले स्थानीय नागरिक इस गोलाबारी से बेहद डरे और सहमे हुए हैं. शनिवार से जारी तलाश: सैन्य अधिकारियों के मुताबिक इन आतंकियों से सुरक्षाबलों का पहला सामना बीते शनिवार को हुआ था, जब वे एक प्राकृतिक हाइडआउट में छिपे थे. तब वे घने कोहरे की आड़ में भाग निकले थे, लेकिन सेना लगातार उनका पीछा कर रही थी. राजौरी के जंगलों में एक बार फिर सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच भीषण मुठभेड़ शुरू हो गई है. ताबड़तोड़ गोलियों की गूंज से पूरा इलाका दहल उठा है और आसपास के गांवों में रहने वाले स्थानीय लोगों के बीच गहरे डर का माहौल बना हुआ है. सैन्य अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षाबलों ने घने जंगलों में छिपे 2 से 3 आतंकियों को पूरी तरह से घेर लिया है. बताया जा रहा है कि बीते शनिवार को भी इसी क्षेत्र में आतंकियों के साथ पहली मुठभेड़ हुई थी, जहां आतंकी जंगल के बीच प्राकृतिक गुफाओं और पेड़ों की आड़ में बने एक हाइडआउट (ठिकाने) में छिपे हुए थे. शनिवार की मुठभेड़ के बाद आतंकी घने कोहरे और जंगलों का फायदा उठाकर वहां से खिसक गए थे, लेकिन सुरक्षाबलों ने हार नहीं मानी और खोजी कुत्तों व आधुनिक उपकरणों की मदद से लगातार उनका पीछा किया. आज एक बार फिर सुरक्षाबलों का आतंकियों से आमना-सामना यानी संपर्क स्थापित हो गया, जिसके तुरंत बाद पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन को और अधिक तेज कर दिया गया है. आतंकी लगातार एक छोर से दूसरे छोर भाग रहे हैं, जिससे सेना को हर कदम फूंक-फूंक कर रखना पड़ रहा है. सुरक्षा एजेंसियां अतिरिक्त कुमुद बुलाकर घेराबंदी को मजबूत कर रही हैं ताकि आतंकियों को भागने का कोई रास्ता न मिले. About the Author Sandeep GuptaChief Sub Editor डिजिटल पत्रकारिता में खबरों की गहरी समझ रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. 16 वर्षों से सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में इन्होंने अपनी कलम से जटिल विषयों को …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi Source link

झारखंड

‘कांग्रेस और जेएमएम दोनों नेस्तनाबूद हो जाएंगी…’ बंगाल में बीजेपी ने फेल...

Last Updated:May 25, 2026, 16:57 IST Bangladeshi Infiltrators Jharkhand : भारतीय जनता पार्टी के फायरब्रांड नेता और गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने एसआईआर (SIR) के संदर्भ में  झारखंड के हेमंत सोरेन सरकार पर बड़ा हमला बोला है. दुबे ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस गठबंधन वाली सरकार पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. दुबे ने साफ शब्दों में कहा कि जिस तरह बंगाल में ममता बनर्जी का ‘डायमंड हार्बर मॉडल’ नेस्तनाबूद हुआ, उसी तरह झारखंड में भी हो जाएगा. एसआईआर के जरिए चुन-चुनकर सभी बांग्लादेशियों को बाहर निकाला जाएगा. रांची. बंगाल में भगवा झंडा गाड़ने के बाद अब बीजेपी की नजर झारखंड पर टिक गई है. झारखंड में भी पार्टी एक्शन मोड में आ गई है. भारतीय जनता पार्टी के फायरब्रांड नेता और गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे ने बंगाल में ममता बनर्जी के डायमंड हार्बर मॉडल फेल होने पर जबरदस्त चुटकी ली है. दुबे ने बंगाल की तरह एसआईआर (SIR) और बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे पर झारखंड के हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोला है. निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि बंगाल की तरह झारखंड में भी राजनीतिक स्वार्थ और वोट बैंक को मजबूत करने के लिए कांग्रेस और जेएमएम सरकार बांग्लादेशी घुसपैठियों का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही है. उन्होंने साफ चेतावनी देते हुए कहा कि भाजपा उनके इस मंसूबे को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देगी. पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए निशिकांत दुबे ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ने अपने अहंकार के चलते इसी तरह की राजनीति जारी रखी, लेकिन रविवार को बंगाल में फाल्टा सीट के नतीजे ममता बनर्जी के ‘डायमंड हार्बर मॉडल’ की पोल खोल दी. दुबे ने कहा कि टीएमसी को फल्टा (Falta) विधानसभा सीट पर 1,00,000 से अधिक वोटों के भारी अंतर से करारी शिकस्त झेलनी पड़ी. निशिकांत दुबे का यह बयान झारखंड की आगामी राजनीतिक दिशा और आंतरिक सुरक्षा के मुद्दों पर एक नई बहस को जन्म दे रहा है. बंगाल के बाद अब झारखंड की बारी निशिकांत दुबे ने कांग्रेस और जेएमएम की राजनीतिक मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा, “इसी विशेष उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) राज्य के भीतर बांग्लादेशी घुसपैठियों का सहारा लेने की कोशिश करेंगे. ये दल अपने गिरते राजनीतिक ग्राफ को बचाने और अपने कोर वोट बैंक को कृत्रिम रूप से मजबूत करने के लिए इन अवैध घुसपैठियों को ढाल बना रहे हैं. लेकिन हम उन्हें उनके इन देशविरोधी और विभाजनकारी मंसूबों में कभी भी कामयाब नहीं होने देंगे.” #WATCH | Deoghar: On SIR in Jharkhand: BJP MP Nishikant Dubey says, “With this objective in mind, the Congress and the JMM will attempt to utilize Bangladeshi infiltrators to bolster their voter base. We will not allow their designs to succeed. Mamata Banerjee continued to act in… pic.twitter.com/PSh6twDqPK Source link

झारखंड

गर्मी की छुट्टियों में ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट:समर वेकेशन में कोडरमा...

गर्मी की छुट्टियां शुरू होते ही देशभर में ट्रेनों में यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। अधिकांश स्कूलों में समर वेकेशन की शुरुआत के साथ ही लोग परिवार के साथ यात्रा की योजना बना रहे हैं, जिसके चलते ट्रेनों में सीटों की भारी किल्लत हो गई है। हालात यह हैं कि अधिकांश ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट चल रही है और कई में ‘नो-रूम’ की स्थिति बन गई है। जिन यात्रियों ने पहले से टिकट बुक करा लिया था, उन्हें तो राहत है, लेकिन अचानक यात्रा की योजना बनाने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासकर बड़े शहरों और हिल स्टेशनों की ओर जाने वाली ट्रेनों में टिकट मिलना बेहद मुश्किल हो गया है। हरिद्वार-ऋषिकेश रूट पर सबसे ज्यादा दबाव इस बार छुट्टियों में उत्तर भारत की ओर जाने वाले यात्रियों की संख्या ज्यादा देखी जा रही है। हरिद्वार और ऋषिकेश जाने वाली ट्रेनों में सबसे अधिक भीड़ है। कोडरमा स्टेशन से गुजरने वाली 13009 हावड़ा-देहरादून दून एक्सप्रेस के थर्ड एसी कोच में 10 जून तक ‘नो-रूम’ की स्थिति है, जबकि सेकेंड एसी में 6 जून तक सभी सीटें बुक हो चुकी हैं। इसके बाद भी लंबी वेटिंग जारी है। यात्रियों की भीड़ को देखते हुए रेलवे ने 04311 योग नगरी ऋषिकेश-कोलकाता स्पेशल ट्रेन भी चलाई है, लेकिन उसमें भी 4 जून तक वेटिंग लिस्ट चल रही है। दिल्ली, जम्मू और अन्य उत्तर भारतीय शहरों की ट्रेनों में भी इसी तरह की स्थिति बनी हुई है। राजधानी-दुरंतो में भी वेटिंग, यात्रियों ने बदला प्लान कोलकाता-जम्मूतवी एक्सप्रेस के स्लीपर क्लास में ‘नो-रूम’ है। एसी कोच में जून तक लंबी वेटिंग चल रही है। 22317 हमसफर एक्सप्रेस में 29 जून तक सीटें फुल हैं और थर्ड एसी में 50 से अधिक की वेटिंग है। कोडरमा से नई दिल्ली जाने वाली 22711 तेजस राजधानी और 22259 बीकानेर दुरंतो जैसी ट्रेनों में भी 10 जून तक सीटें उपलब्ध नहीं हैं। 13051 नेताजी एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनों में भी यही हाल है। यात्रियों ने बताया कि तत्काल टिकट में भी कन्फर्म सीट मिलना मुश्किल हो गया है। झुमरीतिलैया के कन्हाई पासवान ने कहा कि बच्चों के साथ दिल्ली जाने की योजना फिलहाल अधर में है, जबकि मंजीत यादव ने हरिद्वार-ऋषिकेश का प्लान ही बदल दिया। हालांकि रेलवे ने एक दर्जन से अधिक समर स्पेशल ट्रेनें चलाई हैं, लेकिन बढ़ती भीड़ और शादी के सीजन के कारण वेटिंग लिस्ट लगातार लंबी होती जा रही है। Source link

झारखंड

चतरा में 1.01 करोड़ का अफीम, डोडा व पोस्ता जब्त:पुलिस ने मास्टरमाइंड...

चतरा पुलिस ने 1 करोड़ 1 लाख रुपए मूल्य का अफीम, डोडा और पोस्ता दाना जब्त किया है। इस अभियान में अंतरराज्यीय गिरोह के मास्टरमाइंड समेत तीन तस्करों को गिरफ्तार किया गया, जबकि पांच आरोपी अंधेरे और जंगल का फायदा उठाकर फरार हो गए। पुलिस अधीक्षक अनिमेष नैथानी को मिली जानकारी के आधार पर सिमरिया और लावालौंग थाना क्षेत्रों में एक साथ छापेमारी की गई। एसपी के निर्देश पर सिमरिया एसडीपीओ नागरगोजे शुभम भाऊ साहेब के नेतृत्व में टीम गठित कर कार्रवाई को अंजाम दिया गया। पुलिस की इस दोहरी कार्रवाई से जिले में सक्रिय नशा नेटवर्क का बड़ा खुलासा हुआ है। बरामदगी की तस्वीरें देखें… इचाहर जंगल से डोडा- पोस्ता बरामद कार्रवाई की शुरुआत लावालौंग थाना क्षेत्र के इचाहर वन क्षेत्र से हुई, जहां सूचना थी कि जंगल में भारी मात्रा में डोडा छिपाकर रखा गया है। पुलिस टीम ने घने जंगल में दबिश दी, जहां चार संदिग्ध पहरेदारी करते मिले। पुलिस को देखते ही तीन तस्कर फरार हो गए, जबकि जवानों ने कैलाश गंझू को खदेड़कर पकड़ लिया। उसकी निशानदेही पर जंगल के तीन ठिकानों पर छापेमारी की गई, जहां से 361.52 किलोग्राम डोडा, 25.290 किलोग्राम पोस्ता दाना और 23.820 किलोग्राम मिश्रित नशीला पदार्थ बरामद हुआ। बरामद खेप की कीमत करीब 54 लाख रुपए आंकी गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह खेप पिकअप वैन के जरिए दूसरे राज्यों में खपाने की तैयारी थी। बजराही मैदान से अफीम बरामद इसी दौरान पुलिस को दूसरी सूचना मिली कि बगरा-चतरा रोड स्थित बजराही मैदान में अफीम की खरीद-बिक्री के लिए तस्कर जुटे हैं। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इलाके की घेराबंदी की। मौके से लुतीडीह निवासी जीवलाल गंझू और ईचाक कला निवासी मो. फैजान मलिक को गिरफ्तार किया गया, जबकि दो अन्य आरोपी भाग निकले। पुलिस ने एक टीवीएस एक्सएल100 लूना मोटरसाइकिल से 7 किलो 196 ग्राम शुद्ध अफीम बरामद की। इसके बाद जीवलाल के घर पर छापेमारी कर 78.4 किलोग्राम डोडा भी जब्त किया गया। इस खेप की कीमत करीब 47 लाख रुपए बताई गई है। एसपी ने कहा कि तस्कर जल्दबाजी में स्टॉक बेचने की फिराक में थे। दोनों मामलों में एनडीपीएस एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। Source link

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Inspiring Story: मजदूर बना मसीहा! ई-रिक्शा को बनाया स्कूल बस, बदल दी...

Inspiring Story: जमुई के एक टोला सेवक ने महादलित बच्चों की शिक्षा को लेकर जो किया वो एक नजीर बन गया है. जयकांत ने मुश्किल से अपनी पढ़ाई की, लेकिन वह नहीं चाहता कि उसके समाज के और बच्चों को भी पढ़ाई में मुश्किल आए. इसलिए उसने खुद के पैसों से एक ई-रिक्शा खरीद ली और उस से वह हर रोज बच्चों को घर से स्कूल लाता है और स्कूल से घर छोड़ने जाता है.  Source link

झारखंड

ब्यूटी पार्लर छोड़िए… आटा-गुलाबजल से चेहरे पर लाएं गोल्डन लुक, ये फेस...

Last Updated:May 25, 2026, 07:47 IST Beauty Tips: रांची की फेमस ब्यूटी एक्सपर्ट ऊषा ने आटा, गुलाब जल, दूध और एलोवेरा से घरेलू फेस पैक बनाने का सुझाया दिया है. उन्होंने कहा कि बिना साइड इफेक्ट के चेहरे से टैन और दाग धब्बे गायब हो जाते हैं. आइये जानते हैं इसके बारे में. ख़बरें फटाफट रांची: झारखंड की राजधानी रांची में खासतौर पर महिलाएं घर पर एक फेस पैक का इस्तेमाल करती हैं. यह फेस पैक आटे का होता है, जो आटा साधारण तौर पर हम खाते हैं, उस आटे का इस्तेमाल करना है. रांची की ब्यूटी एक्सपर्ट ऊषा बताती हैं कि आपको थोड़ा सा आटा लेना है और उसमें थोड़ा सा गुलाब जल डाल देना है. अगर आपके पास कोई फल है जैसे पपीता या एलोवेरा जेल भी है तो चलेगा. वह थोड़ा सा डाल दीजिए और इसका पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगा लीजिए. इसे खासतौर पर बना कर दिखाया गृहिणी उषा ने. उषा बताती हैं हम लोग अक्सर घर में इस तरह का पेस्ट बनाते हैं. आटे की रोटी बनाते हैं और इसी को चेहरे पर भी इस्तेमाल करते हैं. क्योंकि, जो बाहर के क्लीनअप होते हैं. उससे हमारा चेहरा खराब हो जाता है. इसमें कई तरह के केमिकल्स का इस्तेमाल होता है. पता चला की गोरे होने गए और उल्टा और काले होकर आ जाते हैं और कई बार स्किन में रिएक्शन भी होता है. बिना साइड इफेक्ट के चमका सकते हैं चेहरा उषा बताती हैं कि इसकी सबसे खास बात यह है कि इसमें किसी तरह का कोई भी साइड इफेक्ट नहीं है. यह हर स्किन टाइप के लोग इसका इस्तेमाल आसानी से कर सकते हैं, चाहे सेंसिटिव हो गया ड्राई हो. आपको कुछ नहीं करना बस आटा लेना है. अगर आपके पास गुलाब जल नहीं है तो थोड़ा सा आप दूध ले लीजिए और थोड़ा सा एलोवेरा ले लीजिए. अब आपको इन तीनों को बढ़िया से मिला लेना है और मिलाने के बाद चेहरे पर 15 से 20 मिनट तक लगा हुआ रहने दें. इसके बाद आपको चेहरा बढ़िया से धो लेना है. इसके बाद ठंडे पानी से धो लेना है. उसके बाद अच्छे से मॉइश्चराइजर कर लेना है.  इससे ज्यादा और कुछ नहीं करना है. आपको ब्यूटी पार्लर में क्लीनअप कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी. गंदगी को करता है साफ ये पेस्ट उन्होंने बताया कि ये चेहरे की गंदगी को साफ करता है. चेहरे पर धूल मिट्टी की जो परत होती है. इसको यह एकदम बारीकी तौर पर हटा देता है और आपका चेहरा एकदम साफ हो जाता है. दाग धब्बे कम होते हैं. अगर गर्मी की वजह से टैन हो गया है तो उसमें भी जबरदस्त रिजल्ट देखने को मिलेगी, लेकिन एक बार लगाने के पहले अपने कान के पीछे के स्किन में पैच टेस्ट जरूर कर लें. अगर कोई एलर्जी होती है तो भूल करके इसका इस्तेमाल न करें. About the Author Brijendra Pratap Singh बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ranchi,Jharkhand Source link

झारखंड

बालू लदे ट्रक ने टोटो-ट्रक को मारी टक्कर:पाकुड़ के लिट्टीपाड़ा में दो...

पाकुड़ जिले के लिट्टीपाड़ा थाना क्षेत्र में बालू लदे ट्रक ने दो वाहनों को टक्कर मार दी। यह हादसा लिट्टीपाड़ा-धरमपुर मुख्य सड़क पर बांसजोड़ी के समीप हुआ, जहां पहले ट्रक ने एक टोटो को पीछे से जोरदार टक्कर मारी। फिर भागने के दौरान एक अन्य ट्रक को भी अपनी चपेट में ले लिया। इस घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। दुर्घटना में टोटो चालक और दूसरे ट्रक का उपचालक गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। पहली टक्कर में टोटो पलटा, चालक गंभीर मिली जानकारी के अनुसार, बालू लदा ट्रक (जेएच 10 सीए 8773) जमुई से बालू लेकर उत्तर दिनाजपुर की ओर जा रहा था। इसी दौरान बांसजोड़ी के पास आगे चल रहे एक टोटो को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि टोटो अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गया। इस हादसे में रांगा थाना क्षेत्र के शहरी निवासी टोटो चालक गणेश तुरी (34) गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद चालक मौके से भागने की कोशिश में ट्रक की गति और तेज कर दी, जिससे स्थिति और भयावह हो गई। दूसरी टक्कर के बाद ट्रक पलटा भागने के क्रम में कुछ ही दूरी पर उक्त ट्रक ने आगे चल रहे एक अन्य ट्रक (बीआर 09 जीए 9625) को भी पीछे से टक्कर मार दी। इस दूसरी टक्कर के बाद बालू लदा ट्रक असंतुलित होकर सड़क किनारे पलट गया। इस दुर्घटना में दूसरे ट्रक का उपचालक रोनी शेख (25), जो पाकुड़ थाना क्षेत्र के सकरघाट का निवासी है, केबिन में दबकर गंभीर रूप से घायल हो गया। सूचना मिलते ही लिट्टीपाड़ा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों की मदद से दोनों घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लिट्टीपाड़ा पहुंचाया गया। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. मुकेश बेसरा ने प्राथमिक उपचार के बाद रोनी शेख की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे सदर अस्पताल पाकुड़ रेफर कर दिया। Source link

झारखंड

Bilaspur Wife & Lover Murder Husband; Jharkhand Money Lure

पत्नी ने अपने बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर पति को मार डाला। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में पत्नी ने अपने बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर पति को मार डाला। झारखंड की रहने वाली महिला ने साजिश के तहत पति को 10 हजार रुपए दिलाने का लालच देकर बिलासपुर ले आई। यहां बॉयफ्रेंड ने दोस्तों के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया। . आरोपियों ने रेलवे ट्रैक के पास पहले दुपट्टे से गला घोंट, फिर चाकू से गला रेत दिया। मर्डर के बाद शव को पास झाड़ियों में फेंककर सभी आरोपी झारखंड रवाना हो गए। जांच में सामने आया कि दोनों की पहचान फेसबुक के जरिए हुई थी। पुलिस ने पत्नी को अरेस्ट कर लिया है। मामला सिरगिट्‌टी थाना क्षेत्र का है। मर्डर के बाद शव को पास झाड़ियों में फेंककर सभी आरोपी झारखंड रवाना हो गए। पढ़िए अफेयर और हत्या की पूरी कहानी… जानकारी के मुताबिक पूनम और विनोद लिमगा झारखंड के सिमडेगा जिले के रहने वाले है। विनोद मजदूरी कर परिवार पालन-पोषण करता था। वहीं फेसबुक के जरिए पूनम की पहचान सुगड़ तोपड़ो से हुई, जो झारखंड का ही निवासी है। दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई, जो धीरे-धीरे दोस्ती में बदल गई। कुछ समय बाद दोनों एक-दूसरे के करीब आ गए और प्रेम संबंध बन गए। बताया जा रहा है कि पूनम अपने पति विनोद और बच्चों को छोड़कर अपने बॉयफ्रेंड के साथ घर से भाग गई थी। हालांकि करीब 15 दिन बाद वह उसके साथ रहकर वापस अपने घर लौट आई। पैसों के लालच में विनोद लिमगा पत्नी के साथ बिलासपुर पहुंचा था। (फाइल फोटो) बॉयफ्रेंड संग रची हत्या की साजिश घर लौटने के बाद पूनम ने अपने बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर पति की हत्या की साजिश रची। साजिश के तहत बॉयफ्रेंड अपने दोस्त इंदल मांझी और एक अन्य शख्स के साथ बिलासपुर के सिरगिट्टी पहुंचा। साजिश के तहत बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड के पति विनोद को कॉल कर सिरगिट्टी आने पर 10 हजार रुपए देने और उसकी पत्नी को छोड़ने का लालच दिया। इस प्रस्ताव पर विनोद तैयार हो गया। वह 19 मई को पत्नी पूनम को साथ लेकर झारखंड से सिरगिट्टी आ गया। महिला अकेली वापस पहुंची तो मर्डर का हुआ शक मुलाकात के दौरान पत्नी ने बॉयफ्रेंड और साथियों के साथ मिलकर पति की हत्या कर दी। इसके बाद वह अकेली अपने झारखंड स्थित गांव लौट गई। महिला को अकेले देखकर ससुराल वालों को शक हुआ। हालांकि, महिला ने उन्हें गुमराह करते हुए बताया कि उसका पति बिलासपुर में ही रुका हुआ है। इससे परेशान होकर परिजनों ने थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई। इस दौरान पुलिस ने महिला के मोबाइल की कॉल डिटेल्स खंगाली और तकनीकी जांच की, जिसके बाद उस पर संदेह गहराता गया। पत्नी पूनम ने पूछताछ में बॉयफ्रेंड संग मिलकर हत्या करना स्वीकार किया। (फाइल फोटो) 6 दिन बाद मिली सड़ी-गली लाश शक होने पर पुलिस ने पूनम से पूछताछ की, जिसके बाद वह टूट गई। उसने अपने बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर पति की हत्या करने और शव को बिलासपुर के सिरगिट्टी क्षेत्र में रेलवे ट्रैक के पास फेंकने की बात स्वीकार की। महिला के बताए अनुसार रविवार को झारखंड पुलिस उसे लेकर शहर पहुंची और सिरगिट्टी पुलिस को घटना की जानकारी दी। इसके बाद सिरगिट्टी और झारखंड पुलिस की संयुक्त टीम रेलवे ट्रैक के पास पहुंची, जहां विनोद लिमगा का सड़ा-गला शव झाड़ियों में मिला। इस मामले में सिरगिट्टी पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर आरोपी पत्नी पूनम लिमगा को गिरफ्तार कर लिया है। दुपट्टे से गला दबाकर चाकू से गला रेता महिला ने पुलिस को बताया कि 19 मई को बिलासपुर के सिरगिट्टी पहुंचने पर उसका प्रेमी सुगड़ वहां मिला। इसके बाद सभी ने मिलकर उसे रेलवे ट्रैक के पास एक सुनसान जगह पर ले गए। वहां दुपट्टे से उसका गला दबाया गया और फिर चाकू से गला रेतकर हत्या कर दी गई। वारदात के बाद शव को झाड़ियों के बीच कीचड़ में फेंक दिया गया और सभी आरोपी झारखंड लौट गए। प्रेमी और उसके दोस्तों की तलाश में जुटी पुलिस हत्या के इस मामले में पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया है, वहीं उसके प्रेमी और साथियों की तलाश शुरू कर दी है। बॉयफ्रेंड सुगड़ तोपड़ो, उसके दोस्त इंदल मांझी और अन्य आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस की एक टीम झारखंड रवाना हुई है। ……………………. इससे जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… बॉयफ्रेंड संग मिलकर हेड-कॉन्स्टेबल पति को मार-डाला:धारदार हथियार से हत्या कर शव रेत में गाड़ा; प्रेमी ने मिलने के बहाने बलरामपुर बुलाया था बलरामपुर में महिला ने बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर पति की हत्या की छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में 2 बच्चों की मां ने शादीशुदा बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर अपने पति को मार डाला। वह अपने बॉयफ्रेंड के साथ रहना चाहती थी। दोनों ने छिपकर शादी भी कर ली थी। इस वजह से पत्नी ने बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर पति की हत्या की साजिश रची। पढ़ें पूरी खबर… Source link

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Monday History Explained: आखिर मंडे को Monday क्यों कहते हैं? Moon और...

Last Updated:May 25, 2026, 14:57 IST मंडे यानी सोमवार… एक ऐसा दिन जिसे भारत में भगवान शिव और चंद्रदेव से जोड़ा जाता है, जबकि पश्चिमी दुनिया में इसका रिश्ता रोमन देवी लूना से रहा है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर सोमवार या मंडे शब्द की शुरुआत कहां से हुई? आइए जानें, अंग्रेजी के मंडे के नाम के पीछे छिपी पूरी ऐतिहासिक, धार्मिक और वैज्ञानिक कहानी. सोमवार सप्‍ताह का पहला दिन है या दूसरा, कहां से आया यह नाम, रोमन देवी से क्‍या है इसका कनेक्‍शन, बड़ी रोचक है पूरी कहानी. Monday Ka Itihas: मंडे यानी सोमवार… भारत में यह दिन भगवान शिव की आराधना का दिन माना जाता है. दूसरी तरफ यूरोप की बात करें, तो वहां कभी इस दिन को रोमन देवी ‘लूना’ से जोड़कर देखा जाता है. यूरोप में देवी लूना का मान्‍यता चंद्र देवी की है. वहीं आज की GenZ पीढ़ी की बात करें तो उनके लिए सोमवार का दिन ‘मंडे ब्‍लूज (Monday Blues)’ है. मंडे ब्‍लूज यानी जेंजीज का वह मनहूस दिन, जिस दिन उनकी वीकेंड की मस्‍ती खत्‍म हो गई है और काम का बोझ उनका इंतजार कर रहा है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इस एक दिन को लेकर पूरी दुनिया की सोच इतनी अलग होने के बावजूद उसका आधार एक जैसा क्यों है? धर्म अलग, भाषा अलग, परंपराएं अलग… लेकिन मंडे का रिश्ता लगभग हर जगह चंद्रमा से ही जुड़ा हुआ है. भारत में यह ‘सोमवार’ कैसे बना और अंग्रेजी में ‘मंडे’ नाम कहां से आया? क्या यह नाम हमेशा से ऐसा ही था या समय के साथ बदलता गया? दिलचस्प बात यह है कि इस दिन की कहानी सिर्फ कैलेंडर तक सीमित नहीं है. इसके पीछे हजारों साल पुराना इतिहास छिपा है. कभी बेबीलोन के खगोलविदों ने ग्रहों और चंद्रमा के हिसाब से दिनों के नाम तय किए थे. फिर रोमन साम्राज्य ने इसे अपनी देवी ‘लूना’ से जोड़ दिया. बाद में जर्मनिक सभ्यताओं ने अपने हिसाब से इसका नाम बदला और धीरे-धीरे ‘मोनांडेग (Monandæg)’ से यह ‘Monday’ बन गया. वहीं भारत में यह दिन सदियों से ‘सोमवार’ के नाम से जाना जाता रहा. आइए अब जानते हैं कि आखिर ‘Monday’ नाम की शुरुआत कैसे हुई और क्यों पूरी दुनिया में इसका रिश्ता चंद्रमा से जुड़ गया. सोमवार यानी मंडे से जुड़ी 5 खास बातें आपको कर देंगी हैरान बेबीलोन से आए ये सात दिन: सात दिनों के सप्ताह की अवधारणा सबसे पहले मेसोपोटामिया में बेबीलोनियन खगोलविदों ने विकसित की थी. लगभग 600 ईसा पूर्व में उन्होंने सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि नामक सात ग्रहों के नाम पर सात दिनों के नाम रखे थे. यह पद्धति इतनी वैज्ञानिक थी कि बाद में रोमन और यूनानियों ने इसे अपना लिया और अपने देवताओं से जोड़ दिया. इसमें चंद्रमा को सबसे पहले स्‍थान में रखा गया, लिहाजा सप्‍ताह के पहले दिन का नाम सोमवार यानी मंडे हुआ. रोमन देवी लूना का दिन: जब रोमन साम्राज्य ने सात दिनों वाले सप्ताह की व्यवस्था को अपनाया, तब उन्होंने सोमवार को अपनी चंद्र देवी ‘लूना’ को समर्पित कर दिया. रोमन मान्यता के अनुसार, लूना रात, शांति और चंद्रमा की शक्ति का प्रतीक थीं. लैटिन भाषा में इस दिन को ‘डाइस लूने (Dies Lunae)’ कहा गया, जिसका शाब्दिक अर्थ है ‘चंद्रमा का दिन’. माना जाता है कि इसी नाम से आगे चलकर अंग्रेजी का शब्द ‘Monday’ बना. रोमन सभ्यता में चंद्रमा को भावनाओं, ऊर्जा और नए आरंभ का प्रतीक माना जाता था, इसलिए सोमवार को एक नई शुरुआत के दिन के रूप में भी देखा जाता था. 321 ईस्वी में कानून तौर पर तय हुआ मंडे नाम: 7 मार्च, 321 ईस्वी को रोमन सम्राट कॉन्सटेंटाइन द ग्रेट ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया. उन्होंने पूरे रोमन साम्राज्य में सात दिनों का सप्ताह अनिवार्य कर दिया. साथ ही, यह तय किया कि रविवार सप्ताह का पहला दिन होगा, जबकि मंडे उसका दूसरा दिन. यह वह दौर था जब ‘डाइस लूने’ को आधिकारिक मान्यता मिली और बाद में पूरी पश्चिमी दुनिया का कैलेंडर इसी के अनुसार ढल गया. जर्मनिक देवता ‘मणि’ और ‘मोनांडेग’ का कनेक्‍शन: जब रोमन साम्राज्य का पतन हुआ और जर्मनिक जनजातियों (एंग्लो-सैक्सन) ने ब्रिटेन पर कब्जा किया, तो उन्होंने रोमन कैलेंडर को तो अपना लिया, लेकिन देवताओं को बदल दिया. रोमन लूना की जगह उनके अपने चंद्र देवता ‘मणि’ (Māni) आ गए. इस तरह लैटिन ‘Dies Lunae’ का अनुवाद पुरानी अंग्रेजी में ‘मोनांडेग (Monandæg)’ हुआ, जो आज का ‘मंडे’ है. भारत में चंद्र देवता और शिव का मिलन: जहां पश्चिम में यह नाम बदलता रहा, वहीं प्राचीन भारत में यह दिन हमेशा ‘सोमवार’ के नाम से जाना जाता था. ‘सोम’ का अर्थ चंद्र देवता से है. हिंदू धर्म में यह दिन भगवान शिव को समर्पित है, क्योंकि उनके मस्तक पर चंद्रमा विराजमान है. हजारों साल पुरानी यह परंपरा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है. साथ ही, यह साबित करती है कि भारत में दिनों का नामकरण खगोल विज्ञान और आध्यात्मिकता का अद्भुत मिश्रण था. सोमवार के नाम और प्रभाव से जुडे़ कुछ रोचक पहलू जापान से लेकर जर्मनी तक चंद्रमा है केंद्र: क्या आपने कभी सोचा है कि जापानी या कोरियाई भाषा में सोमवार का क्या अर्थ होता है? जापानी में इसे ‘गेत्सुयोबी (Getsuyōbi)’ कहा जाता है, जिसमें ‘गेत्सु (Getsu)’ का मतलब चंद्रमा होता है. वहीं जर्मन भाषा में Monday को ‘मोंटाग (Montag)’ कहा जाता है, जो प्राचीन जर्मनिक चंद्र देवता ‘मानो (Mano)’ के नाम से जुड़ा माना जाता है. दिलचस्प बात यह है कि दुनिया की कई प्रमुख भाषाओं और संस्कृतियों ने इस दिन को चंद्रमा से जोड़कर देखा. भले ही अलग-अलग देशों में देवताओं के नाम और मान्यताएं अलग रहीं, लेकिन सोमवार और चंद्रमा का रिश्ता लगभग हर सभ्यता में किसी न किसी रूप में दिखाई देता है. पुर्तगाली और अरबी में कहा गया ‘दूसरा दिन’: सभी संस्कृतियों ने मूर्तिपूजक नामों को स्वीकार नहीं किया. ईसाई धर्म के प्रभाव के चलते पुर्तगाली भाषा में सोमवार को ‘सेगुंडा-फेइरा (Segunda-feira)’ कहा जाता है, जिसका अर्थ है ‘दूसरा दिन’ यानी रविवार के बाद आने वाला दिन. इसी तरह, अरबी में इसे ‘अल-इथनैन (Al-Ithnayn)’ कहा जाता है, जिसका मतलब भी ‘दूसरा दिन’ ही होता है. यह बदलाव जानबूझकर किया गया

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