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झारखंड

रंका : तापमान 43 डिग्री, सुबह 6 से शाम 6 बजे तक...

भास्कर न्यूज | रंका अनुमंडल मुख्यालय में इन दिनों तापमान 43 डिग्री हो जा रहा है। जिसके वजह से एक तरफ जहां जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो चुका है। वहीं दूसरी तरफ लोग दिनभर घरों में दुबक कर समय बिता रहे हैं। गौरतलब है कि पिछले कई दिनों से लगातार तापमान में बढ़ोतरी देखी जा रही है, लेकिन आज यहां सबसे ज्यादा तापमान देखा गया। तेज गर्मी, उमस व लू के कारण लोग बेचैन हैं। बिजली की आपूर्ति निर्बाध रूप से जारी है, जिसके लोगों को राहत हो रही है। वहीं थोड़ी देर के लिए भी लाइन कटने के बाद लोग बेचैन हो जा रहे हैं। रात्रि की बात करें तो रात्रि में भी गर्म हवा के थपेड़े चल रहे हैं जिसकी वजह से लोग रात्रि में भी आराम महसूस नहीं कर पा रहे हैं। इस प्रचंड गर्मी को देखते हुए राज्य सरकार के द्वारा सभी तरह के विद्यालयों को बंद कर दिया गया है। जिससे स्कूली बच्चों को थोड़ी राहत मिली है। 15 से 20 रुपए में मिल रही पानी की बोतल : इन दिनों रंका अनुमंडल मुख्यालय में शीतल पेय एवं ठंडा पानी के दाम भी आसमान छू रहे हैं। ठंडे पानी का बोतल यहां 15 से 20 रुपए में मिल रहा है जोकि अमूमन 7 से 10 रुपए में मिलने चाहिए जबकि शीतल पेय के भी दामों में काफी उछाल देखी जा रही है। बावजूद इसके लोग गर्मी से राहत पाने के लिए ऊंचे दाम पर भी शीतल पेय एवं पानी की खरीद कर रहे हैं। इस दौरान खीरा, ककड़ी और तरबूज ने लोगों को काफी राहत दिया है। 20 से 30 रुपए किलो में यह सभी आसानी से मिल जा रहे हैं जिसकी वजह से लोग थोड़ी राहत महसूस कर रहे हैं। मौसम विभाग के हिसाब से अभी तापमान में गिरावट होने की संभावना नहीं है, जिसके वजह से भी लोग चिंतित हैं। यहां सुबह 6 बजे से ही गर्म हवा चलना शुरू हो जा रहा है जो रात्रि के 6 बजे के बाद भी जारी रहा है ऐसी स्थिति में लोग अपने काम को निपटाने के लिए सुबह का ही वक्त ज्यादा तलाश रहे हैं। खरौंधी| पंचायत भवन में प्रखंड स्तरीय खरीफ फसल कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न पंचायतों से पहुंचे किसानों को मौसम अनुकूल खेती एवं उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम का शुभारंभ बीटीएम राकेश कुमार रजक, जिला परिषद सदस्य धर्मराज पासवान, उप प्रमुख देवदत्त आर्य, विधायक प्रतिनिधि हिफाजत अंसारी, मुखिया प्रतिनिधि कृष्ण प्रसाद, मंडल अध्यक्ष उपेंद्र दास एवं बीडीसी प्रतिनिधि देवांश गुप्ता ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यशाला में किसान मित्र संध्या कर विश्वकर्मा, जैनेंद्र द्विवेदी, जयचंद राय, अनुज चौधरी, सत्येंद्र मेहता एवं उमेश पाल सहित कई किसान मौजूद रहे। वहीं बुधनाथ गुप्ता, वार्ड सदस्य बबलू यादव, विजय यादव, नागेंद्र यादव, शिवमंगल गुप्ता, भोला यादव, परमेश्वर यादव एवं रमेश यादव सहित बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया। बीटीएम राकेश कुमार रजक ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि इस वर्ष सामान्य से लगभग 40 प्रतिशत कम वर्षा होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में किसानों को मौसम के अनुरूप खेती की तैयारी करनी होगी। उन्होंने कहा कि कम पानी में होने वाली फसलों एवं कम अवधि में तैयार होने वाले बीजों का चयन कर किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने किसानों को वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने, समय पर बीज उपचार करने तथा सरकार द्वारा संचालित कृषि योजनाओं का लाभ उठाने की भी जानकारी दी। कार्यक्रम के अंत में किसानों के बीच सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई नैनो यूरिया का वितरण किया गया। किसानों ने कार्यशाला को उपयोगी बताते हुए कृषि विभाग के इस पहल की सराहना की। तरल पदार्थों का सेवन करते रहें इधर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर असजद अंसारी ने कहा कि इस प्रचंड गर्मी में अनावश्यक लोग घरों से बाहर नहीं निकले। साथ ही साथ ज्यादा जरूरी होने पर सर एवं शरीर को गमछा और तोलिया का इस्तेमाल करें। वही तरल पदार्थ का सेवन करते रहें। Source link

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15 women from Lohardaga left for training to participate in the camp.

लोहरदगा5 घंटे पहले कॉपी लिंक लोहरदगा|चतरा ज़िला में 24 मई से प्रारंभ हो रहे प्रांत स्तरीय सात दिवसीय प्रांतीय दुर्गावाहिनी प्रशिक्षण शिविर में वार्ड पार्षद संगीता कुमारी के अगुवाई में लोहरदगा ज़िला से 15 माताएं, बहने प्रशिक्षण के लिए चतरा के लिये बस से रवाना हुई। बस बरवा टोली दुर् Source link

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राफेल पर हर टंटा खत्‍म, पाकिस्‍तान बजाता रहा झुनझुना, भारत ने कर...

होमताजा खबरदेश राफेल पर हर टंटा खत्‍म, पाकिस्‍तान बजाता रहा झुनझुना, भारत ने कर दिया खेल Last Updated:May 25, 2026, 10:01 IST 114 Rafale Fighter Jet Deal: एयरफोर्स को ताकतवर बनाना आज के दिन हर देश के लिए एक अनिवार्य जरूरत है. भारत की सीमा एक तरफ चीन तो दूसरी तरफ पाकिस्‍तान से लगती है. इन दोनों देशों के साथ भारत का रिश्‍ता जगजाहिर है, ऐसे में भारत के लिए आवश्‍यक है कि वह अपने डिफेंस सिस्‍टम को मजबूत करने के साथ ही उसे एडवांस भी करे. खासकर एयरफोर्स को ताकतवर बनाना जरूरी है. अब इस दिशा में भारत ने निर्णायक कदम उठाया है. भारत मित्र देश फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने को लेकर निर्णायक कदम उठा लिया है. (फाइल फोटो/Reuters) 114 Rafale Fighter Jet Deal: भारत ने मित्र देश फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने की दिशा में निर्णायक कदम उठा लिया है. इसके साथ ही अब इस सौदे को लेकर तमाम तरह की अटकलबाजियों पर फिलहाल विराम लग गया है. भारत ने फ्रांस के साथ 3.25 लाख करोड़ की ऐतिहासिक डिफेंस डील की है. अब इसको लेकर भारत ने लेटर ऑफ रिक्‍वेस्‍ट (Letter of request-LOR) को अंतिम रूप दे दिया है. अब इसे फ्रांस को भेजा जाएगा. दोनों पक्षों के बीच सहमति बनने के बाद खरीद प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच जाएगी. इसके तहत भारत को 114 राफेल फाइटर जेट मिलना है. बताया जा रहा है कि इस सौदे के तहत भारत को राफेल का एडांस वर्जन F4 मिलेगा. यह पहले के विमानों के मुकाबले ज्‍यादा एडवांस है. राफेल F4 फाइटर जेट में पहले के मुकाबले पावरफुल सेंसर और रडार सिस्‍टम लगाया गया है. इसके साथ ही राफेल F4 में कटिंग एज टेक्‍नोलॉजी से डेवलप ज्‍यादा घातक वेपन भी इंटीग्रेट किया जा सकेगा. पाकिस्‍तान भी चीन और तुर्की से फाइटर जेट खरीदने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अभी तक सिर्फ बतोलेबाजी ही चल रही है. किसी तरह का ठोस निर्णय नहीं लिया गया है. भारत ने भारतीय वायुसेना (IAF) के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद प्रक्रिया में बड़ा कदम उठाते हुए फ्रांस को भेजे जाने वाले लेटर ऑफ रिक्वेस्ट (LoR) को अंतिम रूप दे दिया है. ‘इंडियन एक्‍सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, यह दस्तावेज अगले कुछ हफ्तों में फ्रांस को भेजा जा सकता है. इस सौदे के तहत करीब 90 राफेल विमान भारत में ही फ्रांसीसी कंपनी Dassault Aviation और एक भारतीय साझेदार कंपनी के सहयोग से बनाए जाएंगे, जबकि बाकी विमान सीधे फ्रांस से तैयार अवस्था में भारत आएंगे. यह खरीद गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट समझौते यानी इंटरगवर्नमेंटल एग्रीमेंट (IGA) के तहत की जा रही है. रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, फ्रांस की ओर से LoR का जवाब मिलने के बाद भारत औपचारिक रूप से रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी करेगा. इसके बाद कीमत, तकनीकी सहायता और लॉजिस्टिक सपोर्ट को लेकर दोनों देशों के बीच विस्तृत बातचीत होगी. अंतिम मंजूरी केंद्रीय मंत्रिमंडल की सुरक्षा समिति (CCS) से मिलने के बाद ही समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे. प्रस्‍ताव को 3 महीने पहले मिली थी मंजूरी इस प्रस्ताव को रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने तीन महीने पहले मंजूरी दी थी. अब भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह अगले महीने की शुरुआत में फ्रांस की यात्रा पर जाने वाले हैं. यह दौरा प्रधानमंत्री Narendra Modi की संभावित फ्रांस यात्रा से पहले हो रहा है, जिससे रक्षा सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है. भारतीय वायुसेना पहले से 36 राफेल विमानों का ऑपरेशन कर रही है, जबकि भारतीय नौसेना भी आने वाले वर्षों में 26 राफेल-M विमानों को अपने विमानवाहक पोतों (Aircraft Carrier) के लिए शामिल करने जा रही है. अतिरिक्त राफेल विमानों की खरीद से प्रशिक्षण, रखरखाव और लॉजिस्टिक लागत कम करने में मदद मिलेगी. क्‍यों अहम है यह डील? इस परियोजना में लगभग 50 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री शामिल करने की योजना है. भारत विमान के इंटरफेस कंट्रोल डॉक्यूमेंट (ICD) हासिल करने पर भी जोर दे रहा है, ताकि स्वदेशी हथियार प्रणालियों जैसे Astra Missile और BrahMos-NG को राफेल से जोड़ा जा सके. हालांकि, विमान के पूरे सोर्स कोड तक पहुंच मिलने की संभावना कम मानी जा रही है. सरकार का लक्ष्य इस साल के अंत तक बातचीत पूरी कर सौदे पर हस्ताक्षर करना है. रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह सौदा भारतीय वायुसेना की घटती स्क्वाड्रन क्षमता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा. फिलहाल वायुसेना के पास केवल 29 लड़ाकू स्क्वाड्रन हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 42 स्‍क्‍वाड्रन की है. राफेल डील जरूरी क्‍यों? राफेल विमानों की नई खेप भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रमों जैसे LCA Mk1A, LCA Mk2 और Advanced Medium Combat Aircraft के पूरी तरह विकसित होने तक कमी के अंतर को भरने में मदद करेगी. AMCA के 2035 के बाद सेवा में आने की संभावना है. इस बीच भारत पांचवीं पीढ़ी के एक अन्य लड़ाकू विमान की खरीद पर भी विचार कर रहा है. रूस ने अपने Sukhoi Su-57 लड़ाकू विमान का प्रस्ताव भारत को दिया है, लेकिन इस पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. About the Author Manish Kumar बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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65 साल की उम्र में भी 18 घंटे काम! ₹100 फीस में...

Last Updated:May 25, 2026, 09:36 IST Ranchi Famous Personality: रांची की गाइनेकोलॉजिस्ट करुणा सहदेव बाबा हॉस्पिटल में 100 रुपये में इलाज और 6000 में प्रसव करती हैं. आज वह 65 की उम्र में 18 घंटे काम करती हैं. इसके साथ ही वह एक लाख से ज्यादा महिलाओं का प्रसव करा चुकी हैं. रांची की जानी मानी गाइनेकोलॉजिस्ट करुणा सहदेव एक ऐसा नाम है कि शायद ही कोई महिला उन्हें न जानती हो. गरीबों के बीच तो इन्हें भगवान माना जाता है. इन्होंने खुद का अस्पताल भी खोला है, जिसका नाम बाबा हॉस्पिटल है. जहां पर मात्र ₹100 में ही वह गरीबों को देखती हैं. आज 65 साल की उम्र में भी वह 18 घंटे काम करती हैं और सरकारी अस्पताल में खास तौर पर गरीबों का इलाज करती हैं. वह बताती हैं कि उन्होंने रांची के रिम्स से ही पढ़ाई की हैं और इस दौरान देखा कि काफी गरीब लोग हैं, जो भटकते हैं इलाज के अभाव में, खासतौर पर अच्छे इलाज के अभाव में. कई लोगों की तो जान भी चली जाती है. उन्होंने देखा कि खासतौर पर जो प्रेग्नेंट महिलाएं होती हैं, उनको बड़ी मुश्किल का सामना करना पड़ता है. बड़े बेबस और लचर स्थिति में लोगों को देखा है. करुणा सहदेव ने बताया कि उन्हें अच्छा खासा करोड़ों रुपये का ऑफर आ चुका है, लेकिन हमेशा से गरीबों की सेवा करनी थी. इसलिए आज भी सरकारी अस्पताल में बैठती हैं और खुद का अस्पताल बनाकर गरीबों की सेवा करती है. ऐसे में मेडिकल फील्ड में यह एक काफी पॉपुलर चेहरा है. कोई भी प्रेग्नेंट महिला हो गरीब से लेकर अमीर हमेशा इन्हीं को तलाशते हुई नजर आती है. Add News18 as Preferred Source on Google उन्होंने बताया कि पढ़ाई के समय ही उन्होंने सोच लिया था जब डॉक्टर बन जाऊंगी तब इन सभी का मुफ्त में या फिर एकदम सस्ते में इलाज करूंगी. आज उनके अस्पताल में मात्र ₹100 में इलाज होता है और 6000 में प्रसव हो जाता है. जब भी यहां पर आएंगे तो आपको कम से कम 100 से अधिक मरीज बाहर वेट करते हुए दिखाई देंगे. इसके अलावा उन्हें कई सारे अवार्ड जैसे बेस्ट डॉक्टर , बेस्ट गाइनेकोलॉजिस्ट जैसे अवार्ड से नावाजा जा चुका है. उन्होंने अब तक एक लाख से अधिक प्रसव ऑपरेशन किया है. उन्हें रांची में ‘ मां रूपी’ डॉक्टर का दर्जा मिला है. करुणा बताती हैं कि डॉक्टर बनना यह सिर्फ एक पेशा नहीं है. एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है. समाज के प्रति, लोगों के प्रति, इसे आप पैसे कमाने का पेशा नहीं बना सकते हैं. जब कोई यहां पर गरीब आता है. हम उसका इलाज करते हैं और वह खुश होकर जाता है, पूरी तरह ठीक होकर तो उसमें जो आनंद आता है. वह करोड रुपए में भी नहीं है. Source link

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इंस्टाग्राम में हुआ प्रेम; ग्रामीणों ने मंदिर में कराई शादी:कोडरमा में शादी...

कोडरमा जिले के सतगांवां थाना क्षेत्र के मीरगंज पंचायत अंतर्गत पचौरी गांव में 22 मई को हुआ एक प्रेम विवाह अब विवादों में घिर गया है। पचौरी गांव की काजल कुमारी और इटाय गांव के रोशन कुमार के बीच इंस्टाग्राम पर बातचीत के दौरान प्रेम संबंध शुरू हुआ था। दोनों के बीच मुलाकातों का सिलसिला भी चलता रहा। 21 मई की रात जब रोशन काजल से मिलने उसके गांव पहुंचा, तो ग्रामीणों ने दोनों को देख लिया। इसके बाद पूरे गांव में मामला चर्चा का विषय बन गया। ग्रामीणों ने तत्काल दोनों की शादी कराने का फैसला लिया। मंदिर में घंटों चला हाई वोल्टेज ड्रामा ग्रामीणों की मौजूदगी में स्थानीय मंदिर में दोनों की शादी कराई गई, लेकिन इस दौरान काफी हंगामा हुआ। बताया जा रहा है कि रोशन शादी करने को तैयार नहीं था, लेकिन ग्रामीणों के दबाव के कारण उसे मजबूरन विवाह करना पड़ा। घंटों चले इस हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद हिंदू रीति-रिवाज से दोनों का विवाह संपन्न हुआ। इसके बाद नवविवाहित जोड़े को काजल के घर लाया गया, जहां आगे की रस्में पूरी की जानी थीं। शादी के बाद फरार हुआ दूल्हा काजल कुमारी ने अपने आवेदन में बताया कि शादी के बाद जब घर में रस्में चल रही थीं, तभी रोशन बहाना बनाकर वहां से फरार हो गया। कुछ समय बाद रोशन के परिवार के लोग, जिनमें उसकी मां और मौसी सहित सात-आठ लोग शामिल थे, काजल के घर पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने काजल के परिजनों के साथ गाली-गलौज की और दहेज में 10 लाख रुपए की मांग की। विरोध करने पर परिजनों को धमकी देकर वे लोग वहां से चले गए। थाने में मामला दर्ज, पुलिस ने शुरू की जांच घटना के बाद काजल के परिजन दो दिनों तक रोशन के लौटने का इंतजार करते रहे, लेकिन जब वह वापस नहीं आया तो काजल ने सतगांवां थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई। मामले की जानकारी देते हुए थाना प्रभारी बबलू सिंह ने बताया कि काजल कुमारी के आवेदन के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस पूरे प्रकरण की जांच में जुट गई है। Source link

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Jharkhand Rajya Sabha Seat | Soren Family Woman Candidate Discussion 2026

राज्यसभा चुनाव को लेकर झारखंड की सियासत में इस बार पारिवारिक प्राथमिकता साफ नजर आ रही है। झामुमो ने अपनी रणनीति में सबसे ऊपर परिवार को रखा है। संकेत मिल रहे हैं कि गुरुजी की खाली हुई सीट पर उनका ही परिवार दावा मजबूत कर रहा है। . सूत्रों के मुताबिक पार्टी इस बार परिवार की किसी महिला सदस्य को राज्यसभा भेजने की तैयारी में है। आधिकारिक तौर पर भले ही चुप्पी साधी गई हो, लेकिन अंदरखाने यह लगभग तय माना जा रहा है कि यह मौका परिवार के भीतर ही जाएगा। कल्पना सोरेन फिलहाल गांडेय विधानसभा से विधायक हैं। परिवार की महिलाओं के नाम पर मंथन पार्टी के अंदर जिन नामों पर चर्चा हो रही है, उनमें गुरुजी की बेटी अंजलि सोरेन, विधायक कल्पना सोरेन और बसंत सोरेन की पहली पत्नी हेमलता सोरेन प्रमुख हैं। इन तीनों में से कोई भी अब तक राज्यसभा नहीं पहुंची हैं, ऐसे में पार्टी एक नया चेहरा सामने लाने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रही है। गुरुजी की पत्नी रूपी सोरेन का नाम भी संभावित दावेदारों में आ सकता था, लेकिन उनकी लगातार खराब सेहत के कारण फिलहाल उन्हें इस दौड़ से बाहर माना जा रहा है। यही वजह है कि पार्टी अन्य महिला सदस्यों पर फोकस कर रही है। हालांकि पार्टी के नेता सार्वजनिक रूप से कुछ भी कहने से बच रहे हैं, लेकिन अनौपचारिक बातचीत में अधिकतर पदाधिकारियों ने स्वीकार किया है कि इस बार परिवार की महिला सदस्य को ही प्राथमिकता मिलेगी। मुख्यमंत्री की बड़ी बहन अंजलि सोरेन ओडिशा में सक्रिय राजनीति में जुड़ी हुई हैं। कौन हैं अंजलि सोरेन मुख्यमंत्री की बड़ी बहन अंजलि सोरेन ओडिशा में सक्रिय राजनीति में जुड़ी हुई हैं। वे वहां लंबे समय से झामुमो की ओडिशा इकाई के साथ काम कर रही हैं। वह मयूरभंज जिले के रायरंगपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुकी हैं। मयूरभंज क्षेत्र में वे आदिवासी समुदायों के बीच काम करने, उनकी संस्कृति को बढ़ावा देने और स्थानीय मुद्दों को उठाने के लिए जानी जाती हैं। जेएमएम और राज्यसभा सदस्य का रहा है कनेक्शन राज्यसभा और जेएमएम सदस्यों को कनेक्शन रहा है। बात सोरेन परिवार की करें तो शिबू सोरेन सोरेन परिवार में सबसे अधिक गुरुजी तीन अलग-अलग अवधि में उच्च सदन में रहे हैं। उनका अंतिम कार्यकाल अगस्त 2025 तक था। वहीं गुरुजी के दूसरे बेटे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 2009 में राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्य किया था। इसके बाद वे सक्रिय राजनीति में राज्य स्तर पर केंद्रित हो गए। हेमलता सोरेन गुरुजी के छोटे बेटे बसंत सोरेन की पहली पत्नी हैं। इनके अतिरिक्त बसंत सोरेन ने 2016 में राज्यसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन वे जीत नहीं सके। पार्टी से बात करें तो केडी सिंह झामुमो के कोटे से राज्यसभा सांसद थे। 2014 में इस्तीफा दे दिया था। वहीं स्टीफन मरांडी भी सदस्य रहे हैं। इनका कार्यकाल समय से पहले ही समाप्त हो गया था। वर्तमान में झामुमो से महुआ माजी और सरफराज अहमद राज्यसभा सदस्य हैं। सीएम से मिले हैं धीरज, नाथवाणी भी संपर्क में कांग्रेस नेता धीरज साहू ने भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से एक-दो बार मुलाकात की है। बताया जा रहा है कि धीरज साहू ने मुख्यमंत्री से राज्यसभा की दूसरी सीट देने का आग्रह किया है। वहीं उद्योगपति परिमल नाथवाणी भी झामुमो से संपर्क की कोशिश में हैं। नाथवाणी ने कहा कि झामुमो ने सहयोग किया कि तो वे एक बार फिर झारखंड से राज्यसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं। —————————————— इसे भी पढ़ें.… झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर चुनाव:गठबंधन रहे साथ तो जीत पक्की, बिखराव से बढ़ेगी चुनौती; 4 परिस्थितियों से समझें पूरी कहानी निर्वाचन आयोग द्वारा राज्यसभा की 24 सीटों पर चुनाव की घोषणा कर दी गई है। इसके साथ ही झारखंड की दो सीटों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इनमें एक सीट शिबू सोरेन के निधन के बाद खाली हुई है, जबकि दूसरी सीट दीपक प्रकाश का कार्यकाल पूरा होने से रिक्त होगी। चुनावी कार्यक्रम के अनुसार 1 जून को अधिसूचना जारी होगी, 8 जून तक नामांकन और 11 जून तक नाम वापसी की प्रक्रिया चलेगी। 18 जून को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान और उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना होगी। इस घोषणा के साथ ही राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति पर काम तेज कर दिया है, क्योंकि दोनों सीटों का गणित सीधा नहीं बल्कि गठबंधन और समीकरणों पर निर्भर है। यहां पढ़ें पूरी कहानी… Source link

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Opinion- PM की विदेश यात्राओं से राहुल-ममता के पेट में दर्द क्यों?...

होमताजा खबरदेश Opinion- राहुल-ममता का मंसूबा क्या; PM के विदेश दौरे से पेट में दर्द क्यों? Last Updated:May 25, 2026, 09:00 IST विपक्ष को मोदी सरकार के जाने का इंतजार है. इंतजार 2014 से ही विपक्षी कर रहे हैं. राहुल गांधी को अब पक्का भरोसा हो गया है कि नरेंद्र मोदी की सरकार अगले साल तक गिर जाएगी. शनिवार को अल्पसंख्यक सलाहकार समिति की बंद कमरे में हुई बैठक में उन्होंने अपनी भविष्यवाणी बताई. बंगाल की निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी इसी तरह की आस लगाए बैठी हैं. उन्होंने कहा है- ‘आप (मोदी) दिल्ली में सत्ता से गिरेंगे तो भुगतना होगा कर्मों का फल. मुझे उसी दिन का इंतजार है.’ कुछ इसी तरह की उम्मीद अखिलेश यादव, अरविंद केजरीवाल और तेजस्वी यादव को भी होना चाहिए. इसलिए कि नरेंद्र मोदी के विरोध का अलख फिलवक्त विपक्ष के ये ही नेता जगाए हुए हैं. इस वक्त विपक्ष के नेता ये कयास लगा रहे हैं कि पीएम मोदी की सरकार जल्द गिर जाएगी. फोटो- पीटीआई नरेंद्र मोदी के सत्ता से जल्दी जाने का जाप करने वाले इंडिया ब्लाक के विपक्षी नेताओं की ताकत को तथ्यों से समझिए. पिता मुलायम सिंह यादव की अनुकंपा से अखिलेश यादव एक बार यूपी के मुख्यमंत्री बने. दोबारा उनकी वापसी नहीं हुई. 2017 से ही वे दोबारा सीएम बनने का अवसर तलाश रहे हैं. अरविंद केजरीवाल 2 बार यानी 10 साल दिल्ली में प्रचंड बहुमत वाली सरकार के मुखिया थे. दोनों से भाजपा ने ही सत्ता छीनी है. राहुल गांधी 2014 से खुद को आजमा रहे हैं. अभी तक सफलता इतनी भर मिली है कि वे इस बार नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी तक घंहुच गए हैं. तेजस्वी यादव तो बिहार में राजद के अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं. सत्ता जाने के 10 साल बाद 2015 में राजद ने 80 सीटें जीती थीं. 2025 में उसकी सीटें खिसक कर 25 पर आ गई हैं. उनमें भी एक ने विधायक ने साथ छोड़ दिया है. विपक्षी नेताओं की समझ ममता 15 साल तक बंगाल की मुख्यमंत्री रहीं हैं. केंद्र में भी कभी एनडीए सरकार में मंत्री थीं. अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल भी मुख्यमंत्री रह चुके हैं. राहुल गांधी 3 बार जोर आजमाइश में विफल रहने के बावजूद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं. इसलिए इन्हें नासमझ मानना भूल होगी. पर, इनके बयानों से इनके संसदीय ज्ञान का अनुमान तो लग ही जाता है. इन विपक्षी नेताओं को इस बात पर आपत्ति है कि मध्य पूर्व एशिया की स्थितियों के कारण देश में ईंधन की कमी है, फिर भी पीएम मोदी विदेशों की सैर कर रहे हैं. ऐसा सवाल न संसदीय मर्यादा के अनुकूल है और न संसदीय व्यवस्था की समझ ही दर्शाता है. विरोध के बावजूद विस्तार इन्हें इतनी तो सामान्य समझ होगी ही कि मोदी तफरीह के लिए विदेश दौर पर नहीं गए हैं. उनके टूर में कई महत्वपूर्ण व्यावसायिक और सामरिक डील भी हो रही हैं. मोदी देश के पीएम हैं तो भविष्य की चिंता का भार भी उन पर है. जिस भाजपा के मोदी नेता हैं, वह तात्कालिक लाभ के लिए कोई काम नहीं करती. भाजपा का लंबे समय तक शासन का प्लान है. इसलिए मोदी मुंह भी नहीं छिपा सकते. 10 साल तो उनके कामों को लोगों ने सराहा और अगले 5 साल और काम करने की मोहलत दे दी है. इसलिए अगले साल तक मोदी सरकार गिरने की राहुल की भविष्यवाणी का कोई तार्किक या तथ्यात्मक आधार नहीं दिखता. भाजपा का जिस कदर विस्तार हो रहा है, उससे ममता की आस भी पूरी होने की गुंजाइश नहीं दिख रही है. उल्टे ममता की टीएमसी के सांसद-विधायक भाजपा से गलबहियां के लिए बेताब दिख रहे हैं. बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इटली के दौरे पर थे. इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी के साथ. PM का दौरा जरूरी क्यों? अब जरा पीएम के विदेश दौरे की जरूरत समझिए कि कि किन वजहों से प्रधानमंत्री का विदेश दौरा जरूरी लगता है. रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद ही दुनिया के देश वैचारिक रूप से बंटने लगे थे. कुछ तो इस-उस ओर खड़े भी हो गए. इसका असर दुनिया ने महसूस किया है. असर आज भी बरकरार है. फरवरी 2026 से ईरान, इजरायल और अमेरिका गुत्थमगुत्था हो रहे हैं. यह नई समस्या है. इस युद्ध का असर यह है कि पूरी दुनिया में कच्चा तेल और रसोई गैस के लिए हाहाकार मचा हुआ है. कुछ देशों में तो इसके दाम बेतहाशा बढ़े हैं. भारत में इस बीच करीब 4 रुपए ही कीमत बढ़ी है. पर, असर दिख तो दिख ही रहा है. पीएम नरेंद्र मोदी ने स्थिति और गंभीर होने की आशंका जताते हुए आगाह किया है. इस संकट में सर्वाइव करने के रास्ते तो तलाशने ही पड़ेंगे न. और, यह काम पीएम के अलावा दूसरा कोई कर भी नहीं सकता. इसके लिए तो हवाई करना मजबूरी और जरूरी है. 40 बिलियन डॉलर की डील अब जरा इसे भी समझिए. इस महीने (मई 2026) पीएम मोदी 5 देशों की यात्रा पर निकले हैं. संयुक्त अरब अमीरात (UAE), नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे और इटली के दौरे में लगभग 40 बिलियन डॉलर (करीब 3.5 लाख करोड़ रुपये) के निवेश की डील हुई है. UAE से लंबे समय के लिए तेल और रसोई गैस सप्लाई का समझौता मौजूदा तेल संकट को टालने की दिशा में बड़ी डील मानी जा रही है. ASML और Tata के साथ सेमीकंडक्टर फैब, डिफेंस और AI में स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप, ग्रीन एनर्जी, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और सप्लाई चेन डाइवर्सिफिकेशन जैसे समझौते भी पीएम ने इस बार की यात्रा में किए हैं. इससे आर्थिक विकास में मदद मिलने की उम्ममीद है तो सामरिक रणनीति की दृष्टि भी दिखती है. सामरिक समझौते भी किए यह बात किसी से छिपी नहीं है कि अमेरिका से भारत के रिश्ते ठीक नहीं चल रहे. ट्रंप ने पहले भारतीय सामानों पर बेहिसाब टैरिफ लगाया. रूस से सस्ते तेल की खरीद रोकने का दबाव बनाया. सामरिक तौर पर भी भारत को मुसीबत में डालने करने का प्रयास ट्रंप ने शुरू कर दिया है. अब तक न्यूट्रल रहे भारत के बजाय इसके दुश्मन पाकिस्तान को उसने ईरान-इजरायल युद्ध में सरपंच बनाया. भारत के छोटे पड़ोसी देश तो कभी भी अमेरिका के आगे सरेंडर कर सकते हैं या

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पिता चलाते हैं पोकलेन, 17 साल के बेटे ने 17,400 फीट की...

Last Updated:May 25, 2026, 08:26 IST कोडरमा के 17 वर्षीय एनसीसी कैडेट आकाश कुमार ने इतिहास रचा है. उन्होंने 17,400 फीट ऊंची बर्फीली चोटी पर तिरंगा लहराया. आकाश के पिता तमिलनाडु में पोकलेन ड्राइवर हैं. वे एडवांस माउंटेनियरिंग कोर्स पूरा करने वाले झारखंड के पहले कैडेट बने हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने राज्य का मान बढ़ाया है. ख़बरें फटाफट कोडरमा: जिले के कोरियाडीह गांव निवासी एवं सीएच स्कूल के एनसीसी कैडेट आकाश कुमार ने अपने साहस, मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर ऐसी उपलब्धि हासिल की है. जिस पर पूरा झारखंड गर्व कर रहा है. महज 17 वर्ष की आयु में आकाश ने अरुणाचल प्रदेश स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड एलाइड स्पोर्ट्स , दिरांग से एडवांस माउंटेनियरिंग कोर्स सफलतापूर्वक पूरा कर अरुणाचल प्रदेश की बर्फीली चोटियों 17 हजार 400 फीट की ऊंचाई पर भारतीय तिरंगा फहराकर जिले और राज्य का नाम रोशन किया है. एडवांस माउंटेनियरिंग कोर्स को पूरा करने वाले झारखंड के पहले एनसीसी कैडेट नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड एलाइड स्पोर्ट्स, देश के प्रतिष्ठित पर्वतारोहण एवं साहसिक प्रशिक्षण संस्थानों में गिना जाता है. जहां कठिन परिस्थितियों में प्रशिक्षण देकर युवाओं को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाया जाता है. आकाश कुमार झारखंड के पहले ऐसे एनसीसी कैडेट बन गए हैं जिन्होंने इस एडवांस माउंटेनियरिंग कोर्स को सफलतापूर्वक पूरा किया. आकाश जब इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद वे कोडरमा लौटे तो रेलवे स्टेशन पर उनका भव्य स्वागत किया गया. स्टेशन परिसर में परिजनों, मित्रों, एनसीसी अधिकारियों, बटालियन स्टाफ और सैकड़ों एनसीसी कैडेटों ने फूल-मालाएं पहनाकर, मिठाई खिलाकर और जोरदार नारों के साथ उनका अभिनंदन किया. एनसीसी के अधिकारियों ने किया स्वागत स्वागत समारोह में 45 झारखंड बटालियन के सूबेदार मेजर जीके चौधरी, ट्रेनिंग जेसीओ बलविंदर, सुधीर मिश्रा, एएनओ लेफ्टिनेंट राधिका, फर्स्ट ऑफिसर अरुण कुमार पाल और सेकंड ऑफिसर नवीन चौधरी सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे. सीएच स्कूल के प्रिंसिपल कृष्णकांत तिवारी ने भी आकाश को शुभकामनाएं भेजते हुए कहा कि उनकी यह उपलब्धि जिले के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी. उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि मेहनत और लगन हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता. पिता चलाते हैं पोकलेन आकाश कुमार साधारण परिवार से आते हैं. उनके पिता तमिलनाडु में पोकलेन मशीन चालक के रूप में कार्य करते हैं. आर्थिक और पारिवारिक चुनौतियों के बावजूद आकाश ने अपने सपनों को टूटने नहीं दिया और लगातार मेहनत करते रहे. इस उपलब्धि के दौरान एक भावुक पल भी सामने आया, जब आकाश ने अपने पिता को याद करते हुए कहा कि दूरी अधिक होने के कारण वे उनकी खुशी में शामिल नहीं हो सके. आकाश ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, कमांडिंग ऑफिसर विजय कुमार (सेना मेडल), सीएच स्कूल के एएनओ लेफ्टिनेंट राधिका, सेकंड ऑफिसर नवीन चौधरी और समस्त बटालियन स्टाफ को दिया. About the Author Prashun Singh मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Kodarma,Jharkhand Source link

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पलामू में देर रात आगजनी, कई दुकानें हुई खाक:टायर दुकान में लगी...

पलामू के हैदरनगर रेलवे गुमटी के समीप सोमवार की रात करीब तीन बजे भीषण आग लगने से इलाके में हड़कंप मच गया। आग की शुरुआत एक टायर दुकान से हुई, जो देखते ही देखते आसपास की कई दुकानों में फैल गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, आग इतनी तेजी से फैली कि दुकान में रखे हवा भरने वाले टंकी और घरेलू गैस सिलेंडर में जोरदार विस्फोट हो गया। धमाके की आवाज सुनकर आसपास के घरों में सो रहे लोग घबराकर बाहर निकल आए। रेलवे लाइन के किनारे अवैध रूप से बनी कई दुकानें आग की चपेट में आ गईं। सभी पूरी तरह जलकर राख हो गईं। घंटों की मशक्कत के बाद आग पर पाया काबू घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत करते हुए कई घंटों बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक दुकानों में रखा अधिकांश सामान जल चुका था। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक इस आगजनी में पांच लाख रुपए से अधिक की संपत्ति का नुकसान हुआ है। हालांकि वास्तविक क्षति का आकलन अभी किया जा रहा है। आग की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आसपास के लोगों को अपनी जान बचाने के लिए घर छोड़कर भागना पड़ा। बिजली तार टूटने से आपूर्ति ठप आग के दौरान ऊपर से गुजर रहा 11 हजार वोल्ट का बिजली का तार भी इसकी चपेट में आ गया और टूटकर जमीन पर गिर गया। इससे पूरे इलाके की बिजली आपूर्ति ठप हो गई और लोगों में दहशत फैल गई। एहतियात के तौर पर प्रशासन ने लोगों को घटनास्थल से दूर रहने की अपील की। साथ ही जपला-हैदरनगर मुख्य सड़क पर दोनों ओर से बड़े वाहनों के आवागमन को रोक दिया गया, जिससे सड़क पर लंबा जाम लग गया। आग लगने का प्रारंभिक कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है, हालांकि प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुट गया है। Source link

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भंडरा में 2.5 करोड़ से बना 50 बेड का भवन 12 साल...

भास्कर न्यूज|लोहरदगा/भंडरा झारखंड सरकार एक और स्वास्थ्य सुविधा को बेहतर बनाने की दिशा में कार्य कर रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ अव्यवस्थाओं के कारण इन सुविधाओं और भवनों का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। जिले के भंडरा प्रखंड के गड़रपों पंचायत के पलमी गांव में 2.5 करोड़ की लागत से बना 50 बेड वाला भवन बनने के बाद से आज तक बेकार साबित हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग रांची से 2014 में टेंडर के बाद यहां भवन निर्माण हुआ था। दोनों भवनों का हैंडओवर आज तक नहीं हो पाया। जिस कारण भवन का शुभारंभ नहीं हो सका। नतीजा उक्त भवन भी धीरे-धीरे जर्जर होने के कगार पर पहुंच गया है। स्थिति यह है कि अब भी प्रखंड के मरीज और घायल सीएचसी के भरोसे चल रहे है। गंभीर स्थिति को छोड़ दे तो प्राथमिक से आगे बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के लिए भी रेफर की परंपरा आज भी कायम है। इधर इसके अलावा कुडू प्रखंड में भी लगभग 16 वर्षों से रेफरल अस्पताल अधूरा पड़ा है। 3 करोड़ 56 लाख की लागत से भवन की नींव रखी गई थी, जो अब तक पूरा नहीं हो सका है जबकि इस भवन के बनने में दो बार संविदा निकल गई थी। पहले बार में संवेदक को ब्लैकलिस्टेड भी किया गया चुका है। दूसरे बार भी संवेदक द्वारा कार्य अधूरा छोड़ दिया गया। बाद में कार्य जैसा का तैसा पड़ा रह गया। मामले पर सीएस राजू कच्छप से बताया कि मामले की जानकारी स्थानीय प्रभारी के माध्यम से ली जाएगी। इसके बाद स्थल का विजिट भी किया जाएगा। आखिर किस परिस्थिति में अब तक भवन का संचालन शुरू नहीं हो सका इसकी जांच कराई जाएगी। हर हाल में स्थानीय लोगों को स्वास्थ्य लाभ मुहैया कराने की दिशा में कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भवन यदि बेहतर अवस्था में है तो इसका प्रयोग अवश्य स्वास्थ्य सुविधा के लिए किया जाएगा। Source link

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