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झारखंड

किसान पारंपरिक खेती के बजाय करें पौधों से जुड़ा ये काम, हजार...

Last Updated:May 18, 2026, 10:53 IST पलामू में किसान पारंपरिक खेती छोड़कर अब नर्सरी व्यवसाय अपना रहे हैं. इसमें कम लागत में कई गुना अधिक मुनाफा हो रहा है. आम, अमरूद और नींबू जैसे फलदार पौधों की बाजार में भारी मांग है. किसान कृषि केंद्रों से मुफ्त ट्रेनिंग लेकर आधा एकड़ में भी लाखों की कमाई कर सकते हैं. ख़बरें फटाफट पलामूः पारंपरिक खेती में बढ़ती लागत और कम मुनाफे के कारण अब किसान खेती के नए विकल्प तलाश रहे हैं. ऐसे में नर्सरी व्यवसाय किसानों के लिए कम लागत में अधिक कमाई का बेहतर जरिया बनता जा रहा है. सबसे खास बात यह है कि आधा एकड़ या एक एकड़ जमीन में भी किसान नर्सरी तैयार कर लाखों रुपए तक की कमाई कर सकते हैं. जहां पारंपरिक खेती में एक एकड़ में मुश्किल से 10 से 20 हजार रुपए तक का मुनाफा हो पाता है, वहीं नर्सरी व्यवसाय से किसान बेहतर आय अर्जित कर रहे हैं. फलदार पौधों की बढ़ रही मांगकृषि विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद कुमार ने लोकल18 को बताया कि आम, अमरूद, नींबू, संतरा समेत कई फलदार पौधों की मांग लगातार बढ़ रही है. इसके लिए सबसे पहले किसानों को मदर नर्सरी तैयार करनी होती है. मदर नर्सरी से उच्च गुणवत्ता वाले पौधे तैयार किए जाते हैं, जिन्हें बाजार में अच्छे दामों पर बेचा जा सकता है. एक पौधे को तैयार करने में करीब 20 रुपए तक की लागत आती है, जबकि बाजार में यही पौधा 150 से 200 रुपए तक में बिक जाता है. यानी एक पौधे पर करीब 150 रुपए तक का मुनाफा संभव है. सही जगह का चयन है जरूरीआगे कहा कि नर्सरी व्यवसाय शुरू करने से पहले सही जगह का चयन बेहद जरूरी माना जाता है. नर्सरी ऐसी जगह होनी चाहिए जहां पर्याप्त धूप आती हो और पानी की अच्छी सुविधा उपलब्ध हो. रोड किनारे नर्सरी लगाने से ग्राहकों तक पहुंच आसान हो जाती है और बिक्री भी बेहतर होती है. इसके अलावा मिट्टी की गुणवत्ता और पौधों की सुरक्षा पर भी ध्यान देना जरूरी है. आदर्श नर्सरी तैयार करने के लिए किसानों को तकनीकी जानकारी लेना भी आवश्यक होता है. औषधीय और इमारती पौधों से भी होगी कमाईउन्होंने बताया की फलदार पौधों के साथ-साथ किसान वानिकी और औषधीय पौधों की नर्सरी से भी अच्छी आय कमा सकते हैं. सतावर, अश्वगंधा, कवाच जैसे औषधीय पौधों की बाजार में काफी मांग है. वहीं इमारती पौधों की नर्सरी भी किसानों के लिए लाभदायक साबित हो रही है. इन पौधों को तैयार कर किसान महंगे दामों में बिक्री कर सकते हैं. नर्सरी व्यवसाय में कम लागत लगती है, लेकिन मुनाफा कई गुना अधिक होता है. क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र से मिलेगी मुफ्त जानकारीउन्होंने कब की नर्सरी से जुड़ी तकनीकी जानकारी किसानों को क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्रों में निःशुल्क दी जाती है यहां किसान पौध तैयार करने, ग्राफ्टिंग, सिंचाई और देखभाल की आधुनिक तकनीक सीख सकते हैं. सही योजना और मेहनत के साथ किसान नर्सरी व्यवसाय को अपनाकर एक एकड़ जमीन से लाखों रुपए तक की कमाई कर सकते हैं. About the Author Prashun Singh मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Palamu,Jharkhand Source link

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युवक का ससुराल में फंदे पर लटका शव मिला:परिजनों ने हत्या का...

पलामू जिले के लेस्लीगंज थाना क्षेत्र के दारुडीह गांव में एक युवक का शव फंदे से लटका मिला है। मृतक की पहचान मेदिनीनगर के सुदना निवासी शंभू नाथ मेहता उर्फ रूपेश कुशवाहा (पिता शिवानंद महतो) के रूप में हुई है। रूपेश अपने साले की शादी में शामिल होने ससुराल आए थे। परिजनों ने ससुराल पक्ष पर मारपीट कर हत्या करने और शव को फंदे से लटकाकर आत्महत्या का रूप देने का आरोप लगाया है। परिजनों ने रूपेश की पत्नी अंजली देवी, साले विकास, सास ललिता देवी और ससुर विनोद महतो समेत अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में मृतक के पिता ने पुलिस अधीक्षक को आवेदन दिया है। रूपेश मेहता लगभग आठ दिन पहले अपने साले के विवाह समारोह में शामिल होने के लिए दारुडीह गांव स्थित ससुराल गए थे। सोमवार को परिजनों ने उनका शव कमरे में फंदे से लटका हुआ देखा। घटना की सूचना मिलते ही लेस्लीगंज थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का जायजा लिया और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मेदिनी रॉय मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया। पुलिस के अनुसार, प्रथम दृष्टया यह मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। हालांकि, पुलिस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है। मृतक के परिजनों का आरोप है कि ससुराल पक्ष के लोग अक्सर रूपेश की हत्या करने की धमकी देते थे। उनका यह भी कहना है कि रूपेश की पत्नी अंजली देवी उसके साथ नहीं रहना चाहती थी। रूपेश और अंजली का विवाह वर्ष 2019 में हुआ था। वहीं, लड़की के पिता ने बताया कि रविवार को रूपेश कुमार मेदिनीनगर गए थे और दिन भर वहीं रहे। शाम को वह नशे की हालत में लेस्लीगंज स्थित अपने ससुराल पहुंचे थे। Source link

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सख्ती : मझिआंव मोड़ पर खुले में मुर्गा काटने वालों पर कार्रवाई...

भास्कर न्यूज | गढ़वा शहर के मझिआंव मोड़ क्षेत्र में सड़क किनारे खुले में मुर्गा काटने, मांस, खून हड्डी पंख आदि अपशिष्ट फैलाने एवं सार्वजनिक मार्ग की स्वच्छता प्रभावित होने संबंधी लगातार प्राप्त जनशिकायतों के आलोक में एसडीएम संजय कुमार ने सख्त रुख अपनाया है। सदर अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने कहा कि मझिआंव मोड़ स्थित इन अवैध मुर्गा मांस कारोबारियों को पूर्व में भी कई बार हिदायत दी जा चुकी थी। इसके अतिरिक्त नगर परिषद को भी लिखित रूप से आवश्यक कार्रवाई, नियमित निगरानी तथा सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता सुनिश्चित करने हेतु निर्देशित किया गया था। इसके बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होने तथा आमजनों की शिकायतें लगातार प्राप्त होने के कारण अब मझिआंव मोड़ स्थित पांच दुकानदारों के साथ साथ नगर परिषद को भी पक्षकार बनाते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 152 के तहत कार्रवाई प्रारंभ की जा रही है। एसडीएम ने कहा कि सड़क किनारे खुले में पशु-पक्षी वध, गंदगी फैलाना एवं अपशिष्ट का अस्वच्छ निस्तारण सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के लिए गंभीर विषय है। वहां से गुजरने वाले राहगीरों व सड़क किनारे खड़े लोगों को भी भयंकर बदबू और असहजता का सामना करना पड़ता है। जो प्रथम दृष्टया पब्लिक न्यूसेंस का मामला है। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार की कार्रवाई अनुमंडल क्षेत्र के अन्य इलाकों में भी की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य शहर में स्वच्छ, सुरक्षित एवं व्यवस्थित वातावरण सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि न केवल मुर्गा मछली मांस आदि के व्यवसायियों को निर्धारित मानकों एवं स्वच्छता नियमों का पालन करना होगा। बल्कि नगर निकाय एवं अन्य संबंधित संस्थाओं को भी अपने दायित्वों का निर्वहन गंभीरता से सुनिश्चित करना होगा। संजय कुमार ने कहा कि पहले चरण में मझिआंव मोड़ के पास सड़क किनारे खुले में मुर्गा दुकान संचालित करने वाले जिन पांच दुकानदारों/ दुकान मालिकों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। उनमें अजय सिंह (पिता सूर्यदेव सिंह), अनुरुल हक (पिता ताजुद्दीन खां), फैजान खान (पिता लुहू तारीक), इब्राहिम खान (पिता उस्मान खान) तथा कमलेश अग्रवाल शामिल हैं। Source link

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लातेहार में युवक की गोली मारकर हत्या:ग्रामीणों के साथ जंगल में शिकार...

लातेहार जिले के बालूमाथ थाना क्षेत्र में एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना बालू पंचायत के कलकलिया टोला में हुई। मृतक की पहचान कलकलिया निवासी 42 वर्षीय रामेश्वर उरांव, पिता मनते उरांव के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, रामेश्वर उरांव रात में खाना खाने के बाद गांव के लोगों के साथ जंगल में शिकार खेलने गया था। इसी दौरान यह घटना हुई। पंचायत के मुखिया पति संतु उरांव ने बताया कि उन्हें बलदेव उरांव का फोन आया था। बलदेव ने फोन पर कहा कि उनसे गलती हो गई है और एक व्यक्ति को गोली लग गई है। इसके बाद उसका मोबाइल बंद हो गया। सूचना मिलने के बाद पुलिस, परिजन और ग्रामीणों ने रामेश्वर की तलाश शुरू की। काफी खोजबीन के बाद गांव के समीप एक जंगल में महुआ पेड़ के नीचे रामेश्वर उरांव का शव खून से लथपथ हालत में मिला। घटना की सूचना मिलते ही बालूमाथ प्रभारी थाना प्रभारी अमित कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए लातेहार सदर अस्पताल भेज दिया। थाना प्रभारी अमित कुमार ने बताया कि रामेश्वर उरांव की छाती में गोली लगी थी, जिससे उसकी मौत हुई है। हत्या के पीछे की वजह और इसमें शामिल लोगों का अभी खुलासा नहीं हो सका है। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की गहन जांच कर रही है। Source link

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महाभारत : गांधारी ने दो बार ही आंखों से हटाई थी पट्टी,...

कौरवों की मां गांधारी आंखों से देख सकती थीं. जब उनके शादी अंधे धृतराष्ट्र से हुई तो उन्हें पहले तो जबरदस्त झटका लगा लेकिन उसके बाद उन्होंने प्रण लिया कि पति की तरह अब वो भी किसी भी चीज को अपनी आंखों से नहीं देखेंगी, लिहाजा उन्होंने अपनी आंखों पूरे जीवन के लिए पट्टी बांध ली. लेकिन ये पट्टी दो मौकों पर जब उन्होंने खोली तो क्या गजब हो गया. गांधार की राजकुमारी गांधारी की शादी हस्तिनापुर के राजकुमार धृतराष्ट्र से हुई थी. वह जन्म से ही अंधे थे. उन्होंने फैसला लिया कि वह उस दुनिया को नहीं देखेंगी, जिसे उनके पति नहीं देख सकते. उन्होंने इसी प्रण की वजह से अपनी पैदा हुई संतानों को भी कभी नहीं देखा. गांधारी के बारे में कहा जाता था कि वह अंतर्ज्ञान से जानती थीं कि उनके आसपास और लोगों के मन में क्या चल रहा है. भीष्म ने गांधारी के गुणों और कुरु वंश के गौरव को देखते हुए इस विवाह का प्रस्ताव रखा, जिसे गांधारी के पिता सुबल ने स्वीकार कर लिया. आंख पर पट्टी बांधकर गांधारी अपने पति के साथ समान धरातल पर रहना चाहती थीं. हालांकि ये भी कहा जाता है कि गांधारी ने ऐसा करके एक नेत्रहीन व्यक्ति से विवाह करने के लिए बाध्य किए जाने पर इस तरह अपना मौन विरोध जाहिर किया. तब हर कोई अवाक रह गया हालांकि गांधारी का अपनी आंखों पर पट्टी बांधने का फैसला उनके चरित्र की दृढ़ता, त्याग और पतिव्रता धर्म के प्रति उनकी निष्ठा को भी दिखाता है. गांधारी आंखों पर जो पट्टी पहनी हुई थी, उसका जिक्र महाभारत में भी आया है. कम से कम दो बार उनके पट्टी उतारने का जिक्र तो आया है. वो दोनों बहुत खास क्षण थे. और जब उन्होंने आंख से पट्टी हटाई तो वो मौके ऐसे थे कि हर कोई स्तब्ध रह गया था. गांधारी ने महाभारत युद्ध के बाद युद्धक्षेत्र में अपनी आंखों से पट्टी हटाई ताकि अपने मृत पुत्रों को देख सकें. ये दूसरा मौका था जब गांधारी ने आंख से पट्टी हटाई. अपने पुत्रों को रणक्षेत्र में मृत देखकर वह अंदर ही अंदर धधक उठी थीं. (News18 AI) तब गांधारी बहुत गुस्से में थीं महाभारत के स्त्री पर्व में प्रसंग है जहां युद्ध के बाद गांधारी अपने मृत पुत्रों, विशेष रूप से दुर्योधन को देखने के लिए कुरुक्षेत्र जाती है. कुछ व्याख्याओं में कहा जाता है कि उन्होंने तब अपनी आंखों से पट्टी हटाई. उन्होंने युद्ध के मैदान में पड़ी लाशों के बीच अपने पुत्रों को मृत देखा. इस समय वह अंदर से इतने गुस्से में थीं कि उनके सामने जो आ जाता, वो गुस्से से भस्म ही हो जाता. लिहाजा उस समय कृष्ण ने पांडवों को उनके सामने नहीं आने के लिए कहा. कृष्ण ने उन्हें कैसे नियंत्रित किया जब उन्होंने पट्टी बांध ली तब कृष्ण के साथ पांडव उनसे और धृतराष्ट्र से मिलने आए. आंख पर पट्टी बांधने के लिए बावजूद गांधारी अंदर से धधक रही थीं. वह तपस्वी थीं. गांधारी की तपस्या में संयम, धैर्य और त्याग का भी समावेश था. हालांकि उस दिन अपनी तपस्या से प्राप्त दैवीय दृष्टि का उपयोग करके उन्होंने पांडवों को शाप देने की कोशिश की. कहा जाता है कृष्ण ने गांधारी की उस शक्ति को नियंत्रित किया.  पैर का अंगूठा काला पड़ गया तब गांधारी को अपनी पट्टी के निचले पोर से केवल युधिष्ठिर का पैर का अंगूठा नजर आया और वह गांधारी के ताप के कारण काला पड़ गया. तब कृष्ण के कारण ही उनका गुस्सा कृष्ण पर उतरा और पांडव बच गए. कब पहली बार गांधारी ने पट्टी हटाई महाभारत में कहा गया है कि गांधारी ने पहली बार आंख से पट्टी महाभारत युद्ध से पहले हटाई थी. तब उन्होंने पुत्र दुर्योधन को अपने सामने वस्त्रविहीन यानि नग्न आने के लिए कहा था. तब गांधारी ने बेटे दुर्योधन को बगैर वस्त्र के अपने सामने महल में आने को कहा था. लेकिन दुर्योधन निचले वस्त्र पहनकर उनके सामने आए, जिससे वह उनके शरीर के ऊपरी हिस्सों को ही पत्थर की तरह अजेय कर पाईं. (News18 AI) कुरुक्षेत्र युद्ध शुरू होने से पहले गांधारी को अपने पुत्र दुर्योधन और कौरवों के अधर्मपूर्ण रवैये के कारण चिंता थी. वह जानती थीं कि युद्ध में पांडवों की सेना, विशेष रूप से भगवान कृष्ण के मार्गदर्शन में, बहुत शक्तिशाली है. मां की भावनाओं और तपस्या की शक्ति के कारण गांधारी ने दुर्योधन को युद्ध में अजेय बनाने की कोशिश की. गांधारी ने दुर्योधन को अपने पास बुलाया. उसे नग्न अवस्था में उनके सामने आने को कहा. इसका कारण यह था कि गांधारी अपनी तपस्या से प्राप्त दैवीय शक्ति का उपयोग करके दुर्योधन के शरीर को वज्र के समान कठोर करना चाहती थीं. उनकी दृष्टि में इतनी शक्ति थी कि वह जिस अंग को देख लेतीं, वह अजेय हो जाता. दुर्योधन अपनी माता के आदेश का पालन करने के लिए नग्न अवस्था में जाने को तैयार था, लेकिन रास्ते में भगवान कृष्ण ने उसे रोका. कृष्ण ने दुर्योधन को समझाया कि अपनी माता के सामने पूरी तरह नग्न जाना अनुचित और लज्जाजनक है. कृष्ण के कहने पर दुर्योधन ने अपनी जंघाओं को (विशेषकर कमर के नीचे का हिस्सा) कपड़े से ढक लिया. तब दुर्योधन के शरीर को पट्टी खोलकर देखा जब दुर्योधन गांधारी के सामने आया, तब गांधारी ने अपनी आंखों की पट्टी हटाई, जो उन्होंने वर्षों से पहनी थी. उनकी तपस्या की शक्ति ऐसी थी कि उनकी दृष्टि ने दुर्योधन के शरीर के उन हिस्सों को, जिन्हें उन्होंने देखा, वज्र के समान कठोर कर दिया लेकिन चूंकि दुर्योधन ने अपनी जंघाएं ढकी हुई थीं, वह हिस्सा उनकी दृष्टि से अछूता रह गया और कमजोर रहा. यही कमजोरी बाद में युद्ध में दुर्योधन की हार का कारण बनी. भीम ने युद्ध के अंतिम चरण में (18वें दिन) दुर्योधन की जंघाओं पर गदा से प्रहार किया, जिससे वह पराजित हुआ. Source link

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नहीं चखा होगा ऐसा दही वड़ा! मटर घुघनी और आलू मसाले से...

Last Updated:May 18, 2026, 13:21 IST Odisha Aloo Dum Dahi Bada In Jamshedpur: जमशेदपुर में दही वड़े के तो कई स्टॉल लगते हैं पर उड़ीसा स्पेशल आलू दम दही वड़ा कम ही जगहों पर मिलता है. इसी क्रम में जमशेदपुर के बाराद्वारी मैदान के पास इस खास डिश का स्टॉल लगता है. 40 रुपये प्लेट में स्वाद का मजा लेने लोग दूर-दूर से आते हैं. ख़बरें फटाफट जमशेदपुर. झारखंड के जमशेदपुर में सुबह के नाश्ते की बात हो तो लोगों की पहली पसंद अक्सर साउथ इंडियन व्यंजन बन जाते हैं. शहर के अलग-अलग इलाकों में इडली, डोसा और वडा आसानी से मिल जाते हैं और लोग इन्हें खूब पसंद भी करते हैं. लेकिन इसी बीच शहर में अब उड़ीसा का पारंपरिक और बेहद मशहूर स्वाद भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है. दरअसल, उड़ीसा के रहने वाले पवित्र कुमार बेहरा ने जमशेदपुर के बाराद्वारी मैदान के पास अपना छोटा-सा फूड स्टॉल शुरू किया है, जहां वे उड़ीसा का प्रसिद्ध आलू दम-दही बड़ा लोगों को परोस रहे हैं. खास बात यह है कि शहर में यह स्वाद बहुत कम जगहों पर देखने को मिलता है. ऐसे में लोगों के लिए यह बिल्कुल नया और अलग अनुभव बन गया है. नौकरी में नहीं लगा मनपवित्र कुमार एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में काम करते थे. उन्होंने बताया कि नौकरी तो कर रहे थे, लेकिन उसमें वह सुकून नहीं मिल रहा था जिसकी उन्हें तलाश थी. तभी उनके मन में विचार आया कि क्यों न अपने राज्य उड़ीसा के पारंपरिक स्वाद को जमशेदपुर के लोगों तक पहुंचाया जाए. बस फिर क्या था, उन्होंने छोटा-सा सेटअप तैयार किया और अपने हाथों से आलू दम-दही बड़ा बनाना शुरू कर दिया. 40 रुपये में बेमिसाल स्वादउनके बनाए इस खास व्यंजन की सबसे बड़ी खासियत उसका स्वाद और परोसने का तरीका है. एक प्लेट में सबसे पहले चार छोटे-छोटे नरम दही बड़ा डाले जाते हैं. इसके ऊपर मसालेदार मटर की सब्जी और खास तरीके से तैयार किया गया आलू मसाला डाला जाता है. फिर ऊपर से प्याज और मसालों की टॉपिंग की जाती है, जिससे इसका स्वाद और भी लाजवाब हो जाता है. यह पूरी प्लेट लोगों को मात्र ₹40 में मिल रही है. इतना ही नहीं, नाश्ता खत्म होने के बाद पवित्र, लोगों को खास तरह का दही पानी भी देते हैं, जिसे उड़ीसा में काफी पसंद किया जाता है. उनका कहना है कि यह पाचन के लिए काफी अच्छा होता है और खाने के बाद ताजगी महसूस कराता है. दुकान खुलने के पहले लगती है लाइनपवित्र की दुकान की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोग दुकान खुलने से पहले ही वहां पहुंचने लगते हैं. कई ग्राहक रोजाना यहां नाश्ता करने आते हैं. नाश्ता करने पहुंचे रोहित जी ने बताया कि ऐसा स्वाद उन्होंने पहले कभी नहीं चखा. उन्होंने कहा कि यह व्यंजन खाते ही उन्हें उड़ीसा की याद आ गई और जमशेदपुर में इस तरह का स्वाद मिलना वाकई खास बात है. आज पवित्र कुमार का यह छोटा-सा प्रयास लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और शहर में उड़ीसा के स्वाद की नई पहचान बनता जा रहा है. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jamshedpur,Purbi Singhbhum,Jharkhand Source link

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Bokaro Ward Member Attacked | Driver Accused; Police CCTV Probe

बोकारो के जरीडीह थाना क्षेत्र स्थित टांड़ बालीडीह पंचायत के न्यू शांतिनगर में बीती रात वार्ड 13 के सदस्य मंजय कुमार साह पर जानलेवा हमला किया गया। पीड़ित ने जरीडीह थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें दो युवकों पर चाकू और फाइटर पंच से हमला करने . पुलिस को दी गई जानकारी के अनुसार, हमले से पहले मंजय कुमार साह का ड्राइवर शशि वर्नवाल से विवाद हुआ था। शशि वर्नवाल मंजय के भाई धनंजय कुमार साह की गाड़ी चलाता था। बताया गया कि गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद मंजय ने शशि को आगे से गाड़ी न चलाने को कहा था, जिस पर दोनों के बीच कहासुनी हुई। आरोप है कि इस दौरान ड्राइवर ने मंजय को धमकी दी थी। पीड़ित मंजय ने बताया कि वह रात में अपने घर की गली में मोबाइल देख रहा था। तभी दो युवक वहां आए और पूछा, “धनंजय का भाई कौन है?” जैसे ही मंजय ने अपनी पहचान बताई, दोनों हमलावरों ने उस पर हमला कर दिया। एक हमलावर के पास चाकू था, जबकि दूसरे के पास फाइटर पंच था। मंजय ने खुद को बचाने के लिए घर की ओर भागने की कोशिश की, लेकिन हमलावरों ने उसे घायल कर दिया। मंजय कुमार साह ने अपनी शिकायत में शशि वर्नवाल और उसके भाई उज्जवल वर्नवाल को हमलावर बताया है। यह पूरी घटना आसपास लगे CCTV कैमरों में कैद हो गई है। पुलिस CCTV फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उनकी तलाश कर रही है। Source link

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जामताड़ा में मोबाइल दुकान से लाखों के फोन की चोरी:सेंधमारी कर घुसे...

जामताड़ा: शहर के सरखेलड़ीह मोहल्ले में स्थित ‘मोबाइल सेवा’ नामक दुकान में बीती रात सेंधमारी हुई। अज्ञात चोर लाखों रुपए मूल्य के मोबाइल फोन और नगदी चुरा ले गए। इस घटना से इलाके के दुकानदारों में चिंता का माहौल है। दुकानदार आलोक जैन ने बताया कि सुबह दुकान खोलने पर रैक खाली दिखे। शुरुआती जांच में कई मोबाइल फोन गायब पाए गए। दुकान के अंदर निरीक्षण करने पर पूर्वी दीवार में एक छोटा सेंध मिला, जिससे चोर दुकान में घुसे थे। घटना की सूचना मिलते ही सदर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर मनोज कुमार महतो पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने दुकान का निरीक्षण किया और बताया कि दीवार में की गई सेंधमारी काफी छोटी है। इससे आशंका जताई जा रही है कि चोरी को अंजाम देने के लिए किसी छोटे बच्चे को शामिल किया गया होगा, क्योंकि लगभग 10 वर्ष तक का बच्चा ही उस छेद से अंदर जा सकता था। पुलिस के अनुसार, दुकान में सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा होने के कारण जांच में कठिनाई आ सकती है। थाना प्रभारी ने दुकानदार को तत्काल सीसीटीवी कैमरे लगाने की सलाह दी है। झाड़ियों से दो मोबाइल फोन बरामद हुए दुकानदार आलोक जैन ने यह भी बताया कि चोर कैश काउंटर से लगभग 55 हजार रुपए नकद भी ले गए। आसपास खोजबीन के दौरान रेलवे लाइन किनारे झाड़ियों से दो मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। चोरी हुए मोबाइलों की कुल संख्या और उनकी कीमत का आकलन किया जा रहा है। मौके पर मौजूद मकान मालिक और समाजसेवी देवाशीष सरखेल ने शहर में बढ़ती चोरी की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि गश्ती दल के सक्रिय रहने के बावजूद ऐसी घटनाएं हो रही हैं, जिस पर पुलिस को प्रभावी अंकुश लगाने की आवश्यकता है। गौरतलब है कि बीते 19 अप्रैल की रात अक्षय तृतीया के अवसर पर शहर में लगभग 12 लाख रुपए मूल्य के जेवरात चोरी की बड़ी घटना हुई थी। उसी दिन वर्तमान पुलिस अधीक्षक शंभू कुमार सिंह ने पदभार ग्रहण किया था। अब एक माह के भीतर फिर से हुई इस बड़ी चोरी ने शहर की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। थाना प्रभारी मनोज कुमार महतो ने बताया कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी कर ली जाएगी। Source link

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राहुल गांधी कभी गाल छूकर दुलारते, तो प्रियंका हाथ मिलाती, वीडी सतीशन...

होमताजा खबरदेश राहुल कभी गाल छूकर दुलारते, तो प्रियंका हाथ मिलाती; ‘कर्ली गर्ल’ कौन? Last Updated:May 18, 2026, 12:47 IST केरल में वीडी सतीसन के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा का दुलार वाला अंदाज देखने को मिला. समारोह में मौजूद एक छोटी बच्ची राहुल गांधी के पास पहुंची, जिसके बाद वे मुस्कुराते हुए उसका गाल सहलाया और लाड किया. प्रियंका गांधी ने भी बच्ची से हाथ मोड़ा और उससे हल्की-फुल्की बातचीत की. इस दौरान दोनों नेताओं के चेहरे पर मुस्कान साफ ​​नजर आई. बच्ची कौन थी और किसके साथ समारोह में आई थी, इसकी जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है. वीडी सतीशन के शपथ ग्रहण में एक छोटी बच्ची के साथ दिखे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी. तिरुवनंतपुरम: केरल में मुख्यमंत्री वीडी सतीशन की अगुवाई में बनी यूडीएफ सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और वायनाड सांसद प्रियंका गांधी का एक अलग ही अंदाज दिखा. शपथ ग्रहण समारोह का गवाह बनने पहुंचे राहुल और प्रियंका वहां आई एक छोटी बच्ची के साथ हल्के-फुल्के अंदाज़ में बातचीत करते दिखे. सामने आए वीडियो में दिख रहा है कि फ्रॉक बहनी छोटी के बाल कर्ली (घुंघराले बाल) हैं. वह अपनी सीट से ऊठकर राहुल गांधी के पास पहुंचती है. राहुल गांधी मुस्कुराते हुए उसे दुलारते दिखते हैं. राहुल छोटी बच्ची का गाल सहलाते हुए लाड करते हैं. वहीं बगल में बैठीं प्रियंका गांधी उस छोटी बच्चे से हाथ मिलाती हैं. प्रियंका और राहुल दोनों उस छोटी बच्ची से कुछ हल्के-फुल्के अंदाज़ में बातचीत करते दिखते हैं. इस दौरान राहुल और प्रियंका के चेहरे पर मुस्कान दिख रही है. ये बच्ची कौन है, शपथ ग्रहण समारोह में उसे लेकर कौन पहुंचा था, इस बारे में फिलहाल जानकारी उपलब्ध नहीं है. #WATCH | Thiruvananthapuram: Lok Sabha LoP Rahul Gandhi, Congress MP Priyanka Gandhi Vadra had a light-hearted interaction with a child during the swearing-in ceremony of the Keralam government Source link

झारखंड

छऊ मास्क से मोआ लड्डू तक…जीआई टैग प्रोडक्ट्स का महत्व बता रहे...

जमशेदपुर. भारत के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब ‘वोकल फॉर लोकल’ और गांवों की पारंपरिक पहचान को दुनिया तक पहुंचाने की बात कही, तब से देशभर में जीआई टैग को लेकर एक नई जागरूकता देखने को मिली. प्रधानमंत्री ने अपने कई भाषणों में कहा है कि हर गांव और हर क्षेत्र की विशेष कला, परंपरा और उत्पाद को वैश्विक पहचान मिलनी चाहिए. इसी सोच को दिल से अपनाया है जमशेदपुर के रहने वाले विकास सेठ ने. कॉरपोरेट कंपनी में कार्यरत विकास सेठ आज सिर्फ नौकरी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जीआई टैग से जुड़ी भारत की विरासत को खोजने और लोगों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं. उन्हें जब पता चला कि देश में अब तक 697 से अधिक उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है, तब उन्होंने इसके बारे में गहराई से रिसर्च शुरू की. लोग नहीं समझते असली कीमतविकास बताते हैं कि आज भी कई गांव ऐसे हैं, जहां की पारंपरिक सामग्री को जीआई टैग मिल चुका है, लेकिन वहां रहने वाले लोगों को इसकी असली कीमत और पहचान का अंदाजा तक नहीं है. यही वजह है कि उन्होंने गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करना शुरू किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक लाइन – ‘देश की मिट्टी, देश की खुशबू, कारीगरों की मेहनत और पसीने को तराशने की जरूरत है’ – विकास सेठ को बेहद प्रेरित करती है. इसी सोच के साथ वे अलग-अलग राज्यों में जाकर वहां की पारंपरिक कला और उत्पादों की जानकारी जुटा रहे हैं. इन पर किया रिसर्चअब तक उन्होंने पश्चिम बंगाल के पुरुलिया स्थित मुकुक्ष ग्राम के प्रसिद्ध छऊ मास्क, मेदिनीपुर की मधुरकाठी चटाई, जयनगर का मशहूर मोआ लड्डू, बरुईपुर का अमरूद, ओडिशा के रघुराजपुर का पत्ताचित्र, पीपली का एप्लिक वर्क, कोणार्क स्टोन क्राफ्ट, बांकुड़ा का टेराकोटा और डोकरा कला जैसी कई जीआई टैग प्राप्त सामग्रियों पर रिसर्च की है. सिर्फ रिसर्च ही नहीं, विकास को इन उत्पादों को संग्रहित करने का भी शौक है. जहां भी जाते हैं, वहां की कोई न कोई जीआई टैग प्राप्त वस्तु अपने घर जरूर लेकर आते हैं. उनके घर में आज देश के अलग-अलग हिस्सों की पारंपरिक कला और उत्पादों का अनोखा संग्रह देखने को मिलता है. समय-समय पर करते हैं सेमिनारविकास जमशेदपुर में समय-समय पर सेमिनार और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित करते हैं. इन कार्यक्रमों में वे लोगों को बताते हैं कि जीआई टैग सिर्फ एक पहचान नहीं, बल्कि गांवों और कारीगरों की आर्थिक स्थिति बदलने का जरिया भी बन सकता है. सही जानकारी और सही बाजार मिलने पर गांव के कारीगरों की आमदनी कई गुना तक बढ़ सकती है. आज विकास का यह प्रयास सिर्फ एक शौक नहीं, बल्कि भारत की मिट्टी, कला और कारीगरों को नई पहचान दिलाने का मिशन बन चुका है. वे मानते हैं कि अगर गांवों की असली कला दुनिया तक पहुंचे, तो देश के लाखों कारीगरों की जिंदगी बदल सकती है. Source link

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