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झारखंड

जहां मिलती हैं दो नदियां…जमशेदपुर का सबसे सुकूनभरा स्पॉट, यहां मिनटों में...

Last Updated:May 07, 2026, 13:36 IST Jamshedpur Best Place To Visit In Summers: शाम को परिवार या दोस्तों के साथ मस्ती करने का प्लान है तो दोमुहानी संगम आ सकते हैं. यहां की नेचुरल ब्यूटी किसी का भी मन मोह सकती है. यहां दो नदियों, स्वर्णरेखा और खड़कई का संगम देखने को मिलता है, जो इस जगह को और खूबसूरत बना देता है. ख़बरें फटाफट जमशेदपुर. बदलते मौसम के साथ इन दिनों गर्मी लगातार बढ़ती जा रही है. तेज धूप और गर्म हवाओं की वजह से लोग दोपहर के समय घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं. जमशेदपुर की सड़कें और बाजार भी दोपहर में काफी हद तक सुनसान नजर आने लगे हैं. लोग केवल बहुत जरूरी काम होने पर ही बाहर निकलना पसंद कर रहे हैं. हालांकि, जैसे ही शाम होने लगती है, शहर के लोग ऐसी जगह की तलाश में निकल पड़ते हैं जहां उन्हें गर्मी से राहत, ठंडी हवा और थोड़ा सुकून मिल सके. इस वजह से खास है यह जगहऐसे में जमशेदपुर का दोमुहानी संगम इन दिनों लोगों के लिए सबसे पसंदीदा जगहों में से एक बन गया है. मरीन ड्राइव के समीप स्थित यह स्थान अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत माहौल के कारण लोगों को काफी आकर्षित कर रहा है. यहां स्वर्णरेखा और खड़कई नदी का खूबसूरत संगम देखने को मिलता है, जो इस जगह को और भी खास बना देता है. लोग आराम से घंटों बैठ सकते हैंदोमुहानी संगम को बेहद सुंदर तरीके से विकसित किया गया है. यहां पहुंचते ही लोगों को ठंडी हवाओं का एहसास होने लगता है. चारों ओर हरियाली, नदी का शांत बहाव और पहाड़ियों का खूबसूरत दृश्य लोगों का मन मोह लेता है. सबसे अच्छी बात यह है कि यहां बैठने के लिए साफ-सुथरी और व्यवस्थित जगह भी बनाई गई है, जहां लोग आराम से घंटों बैठकर प्रकृति का आनंद लेते हैं. ठंडी हवा के बीच सुकून के पलशाम के समय यहां का नजारा और भी शानदार हो जाता है. डूबते सूरज की लालिमा नदी के पानी पर पड़ती है तो पूरा वातावरण बेहद खूबसूरत दिखाई देता है. यही वजह है कि शाम के समय यहां परिवार, दोस्त, बुजुर्ग और युवा बड़ी संख्या में पहुंचते हैं. बच्चे यहां खेलते नजर आते हैं तो वहीं बड़े लोग ठंडी हवा के बीच सुकून के कुछ पल बिताते हैं. इस जगह की एक और खासियत यहां स्थित मंदिर है. शाम होते ही मंदिर से भजन और आरती की मीठी आवाज सुनाई देने लगती है, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय और शांत हो जाता है. शहर की भागदौड़ और तनाव से दूर यह स्थान लोगों को मानसिक शांति भी देता है. यही कारण है कि यहां लोग बड़ी संख्या में आते हैं. शहर की भागदौड़ से दूर शांत स्थानयहां पहुंचे एक परिवार ने बताया कि गर्मी के दिनों में शाम के समय यह जगह उनके लिए सबसे बेहतरीन विकल्प बन गई है. उन्होंने कहा कि शहर के बीचो-बीच इतनी शांत और प्राकृतिक जगह मिलना काफी मुश्किल है. दिनभर की भागदौड़ के बाद जब ठंडी हवा और सुकून की तलाश होती है तो वे लोग यहां आकर काफी देर तक बैठते हैं. बच्चे खेलते हैं और पूरा परिवार एक साथ समय बिताता है. तेज गर्मी के बीच जमशेदपुर का दोमुहानी संगम लोगों के लिए राहत और सुकून का एक खूबसूरत ठिकाना बनता जा रहा है. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jamshedpur,Purbi Singhbhum,Jharkhand Source link

व्यापार

नौकरी की टेंशन जाएंं भूल! 50 हजार में शुरू करें ये बिजनेस,...

होमताजा खबरमनी 50 हजार रुपये में शुरू करें ये बिजनेस, हर महीने होगी 1 लाख की कमाई, जानें कैसे Last Updated:September 09, 2021, 06:59 IST आप भी कोई ऐसा बिजनेस करने का प्लान कर रहे हैं जो हर समय मुनाफा देने वाला हो, तो आज हम आपको एक ऐसे बिजनेस आइडिया के बारे में बता रहें हैं जिसमें आपको अच्छा खासा फायदा होगा. मुर्गी पालन (Poultry Farming) का बिजनेस से होगी हर महीने मोटी कमाई नई दिल्ली. अगर आप बिज़नेस (Buisness Opportunity) के लिए कृषि क्षेत्र में अपना नसीब आजमाना चाहते हैं, तो मौसम के भरोसे चलने वाली खेती के अलावा भी कई विकल्प हैं जो आपको मुनाफे की गारंटी देते हैं. इसी में से एक है मुर्गी पालन (Poultry Farming) का बिजनेस. अगर आप छोटे पैमाने पर पोल्ट्री फार्म शुरू करना चाहते हैं तो कम से कम 50,000 रूपये से 1.5 लाख रुपये के बीच खर्च आएगा. अगर छोटे स्तर यानी 1500 मुर्गियों से लेयर फार्मिंग की शुरुआत करेंगे तो आप 50 हजार से 1 लाख रुपये प्रति महीना तक कमा सकते हैं. सबसे पहले आती है पैसों की बात-अगर आप छोटे पैमाने पर पोल्ट्री फार्म शुरू करना चाहते हैं तो कम से कम 50,000 रूपये से 1.5 लाख रुपये के बीच खर्च आएगा. और अगर इसी बिजनेस को और अधिक बड़े स्टार पर सेटअप करना का सोच रहें हैं तो लगभग 1.5 लाख रूपये से 3.5 लाख रूपये के बीच खर्च आता है. पोल्ट्री व्यवसाय शुरू करने के लिए कई फाइनेंशियल संस्थानों से बिज़नेस लोन लिया जा सकता है. सरकार देगी 35 फीसदी सब्सिडी-पॉल्ट्री फार्म के बिजनस के लोन पर सब्सिडी करीब 25 फीसदी होती है. वहीं, SC-ST वर्ग को प्रोत्साहन देने के लिए यह सब्सिडी 35 फीसदी तक हो सकती है. बता दें कि इस कारोबार की खासियत यह है कि इसमें कुछ रकम खुद लगानी होती है और बाकी की बैंक से लोन मिल जाएगा. इस तरह करें इस बिजनेस की प्लानिंग-कमाई भले ही अच्छी हो लेकिन इस कारोबार में हाथ आजमाने से पहले अच्छे से ट्रेनिंग लेना जरूरी है. 1500 मुर्गियों के टारगेट से काम शुरू करना हो तो 10 फीसदी ज्यादा चूज़े खरीदने होंगे. क्योंकि असमय बीमारी की चलते मुर्गियों के मरने का खतरा होता है. अंडे से भी होगी जबरदस्त कमाई-देश में अंडे के दाम बढ़ने लगे हैं. अक्टूबर की शुरुआत से ही अंडा 7 रुपये का बिक रहा है. लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि अंडे के दाम बढ़ने के साथ ही मुर्गी भी बेशकीमती हो गई है. मुर्गियां खरीदने का बजट 50 हजार रुपये–एक लेयर पैरेंट बर्थ की कॉस्ट लगभग 30 से 35 रुपये होती है. यानी मुर्गियां खरीदने के लिए 50 हजार रुपये का बजट रखना होगा. अब इन्हें पालने के लिए अलग-अलग तरह का खाना खिलाना पड़ता है और साथ ही मेडिकेशन पर भी खर्च करना पड़ता है. 20 हफ्तों का खर्च 3-4 लाख रुपये-लगातार 20 हफ्ते तक मुर्गियों को खिलाने का खर्च होगा करीब 1 से 1.5 लाख रुपये. एक लेयर पैरेंट बर्ड एक साल में लगभग 300 अंडे देती है. 20 हफ्ते बाद मुर्गियां अंडा देना शुरू कर देती है और साल भर तक अंडे देती है. 20 हफ्तों के बाद इनके खाने पीने पर तकरीबन 3 से 4 लाख रुपये खर्च होता है. सालाना 14 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई-ऐसे में 1500 मुर्गियों से 290 अंडे प्रति वर्ष के औसत से लगभग 4,35,000 अंडे मिलते हैं. बर्बादी के बाद भी अगर 4 लाख अंडे बेच पाएं तो थोक भाव में एक अंडा 6.00 रुपये की दर से बिकता है. यानी साल भर में सिर्फ अंडे बेचकर अच्छी खासी कमाई कर सकते हैं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : September 09, 2021, 05:19 IST Source link

झारखंड

डोरंडा शराब दुकान में मारपीट, तोड़फोड़; लूट का आरोप:रंगदारी मांगने की शिकायत,...

गिरिडीह जिले के घोडथम्बा ओपी क्षेत्र अंतर्गत डोरंडा स्थित एक विदेशी शराब दुकान में मारपीट, तोड़फोड़ और लूटपाट का मामला सामने आया है। दुकान में कार्यरत पवन कुमार राय ने घोडथम्बा ओपी में आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पीड़ित पवन कुमार राय ने पुलिस को दिए आवेदन में बताया कि 5 मई 2026 की रात करीब साढ़े आठ बजे सुधीर पांडेय, पप्पू शर्मा, रंजीत सिंह और मंटू राम जबरन दुकान का गेट खोलकर अंदर घुस गए। आरोप है कि ये युवक हथियार से लैस थे और काउंटर के अंदर घुसकर गाली-गलौज करते हुए पवन कुमार राय पर हमला कर दिया, जिससे उनके सिर में चोट आई। आरोपियों ने दुकान में जमकर तोड़फोड़ की और विदेशी शराब की कई बोतलें फोड़ दीं। साथ ही, काउंटर में रखे करीब 1 लाख 71 हजार 700 रुपये नकद भी निकाल लिए। पीड़ित के अनुसार, आरोपियों ने हर महीने एक पेटी शराब और पांच हजार रुपये रंगदारी की मांग की। मांग पूरी न करने पर जान से मारने की धमकी भी दी गई। यह पूरी घटना दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद होने की बात कही जा रही है। वहीं, मामले में आरोपी मंटू राम ने अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि शराब दुकान संचालक निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूल रहा था, जिसका विरोध करने पर विवाद और हाथापाई हुई। उन्होंने लूटपाट के आरोप से इनकार करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। इधर, घोडथम्बा ओपी प्रभारी धर्मेन्द्र अग्रवाल ने बताया कि आवेदन के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। मामले में घोषणाडीह टोला, तेतरयाटांड़ निवासी सुधीर पांडेय को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। Source link

शिक्षा

NIT Kurukshetra Student Suicides | Academic & Financial Pressure

Hindi News Career NIT Kurukshetra Student Suicides | Academic & Financial Pressure 3 मिनट पहलेलेखक: सोनाली राय कॉपी लिंक NIT कुरुक्षेत्र में 2 महीने में 4 कॉलेज स्टूडेंट्स की सुसाइड से मौत हो गई। ये नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी NIT कुरुक्षेत्र में 16 फरवरी से 16 अप्रैल तक में हुई मौतों का आंकड़ा है। इन 4 स्टूडेंट्स ने या तो एकेडमिक या फिर फाइनेंशियल प्रेशर की वजह से अपनी जान दी। 2 महीने में 4 मौतें हुईं 16 अप्रैल को कॉलेज के हॉस्टल में एक स्टूडेंट दीक्षा दुबे ने सुसाइड किया। दीक्षा AI एंड डेटा साइंस की फर्स्ट सेमेस्टर की स्टूडेंट थी। वो बिहार के बक्सर की रहने वाली थी। कॉलेज में इससे पहले भी 3 मौतें हुईं। कॉलेज में 16 फरवरी को 19 साल के कंप्यूटर इंजीनियरिंग के एक छात्र अंगोड़ शिवा ने अपनी जान दी थी। शिवा तेलंगाना से NIT कुरुक्षेत्र पढ़ने आए था। 31 मार्च को 22 साल का इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के छात्र पवन कुमार ने सुसाइड किया। पवन हरियाणा के नूंह जिले का रहने वाला था। 8 अप्रैल को NIT से सिविल इंजीनियरिंग कर रहे थर्ड ईयर के एक छात्र प्रियांशु वर्मा ने सुसाइड किया। सुसाइट नोट मिला पर उससे सुसाइड की वजह साफ नहीं है। प्रियांशु हरियाणा के सिरसा जिले का रहने वाला था। दो और स्टूडेंट ने जान देने की कोशिश की इसके अलावा इस बीच और दो स्टूडेंट ने भी जान देने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें बचा लिया गया। एकेडमिक और फाइनेंशियल प्रेशर झेल रहे हैं स्टूडेंट्स कॉलेज स्टूडेंट काउंसिल के मेंबर ने नाम न छापने की शर्त पर हमसे बात की। बताया कि कुछ स्टूडेंट्स ने कॉलेज में री-एग्जाम सिस्टम के प्रेशर में आकर सुसाइड किया है। कुछ ने क्रेडिट कार्ड और ऑनलाइन बेटिंग की वजह से फाइनेंशियल ट्रैप में फंसकर अपनी जान दी। इन मौतों का सीधा कारण भले एकेडमिक और फाइनेंशियल प्रेशर हो, पर इसका दूसरा पहलू कॉलेज में मेंटल हेल्थ सपोर्ट सिस्टम की कमी भी बताता है। सुसाइड मामलों की जांच को लेकर प्रोटेस्ट कैंपस में हालिया मौतों और उसके प्रति कॉलेज प्रशासन के रवैये के खिलाफ कॉलेज के स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट कर रहे हैं। इस प्रोटेस्ट में कैंपस में हुए सुसाइड समेत कई मुद्दों को उठाया, जिसमें इन मौतों की स्वतंत्र जांच की मांग उठाई। इसके अलावा एकेडमिक प्रेशर बढ़ाने वाले रि-एग्जाम सिस्टम को बदलने और कैंपस में मेंटल हेल्थ सपोर्ट सिस्टम बहाल और दुरुस्त करने की मांग की। NIT कुरुक्षेत्र में सुसाइड से हुई मौतें के बाद कॉलेज के छात्रों ने 16 अप्रैल को प्रोटेस्ट किया। स्टूडेंट्स का कहना है कि कॉलेज में अब तक कोई खास मेंटल हेल्थ सपोर्ट सिस्टम नहीं है। एक स्टूडेंट ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ‘एक काउंसलर हैं, पर वो भी कॉलेज में बहुत कम दिखती हैं।’ कॉलेज प्रशासन ने कैंपस खाली कराया कॉलेज प्रशासन ने सेमेस्टर ब्रेक से पहले ही कॉलेज बंद कर दिया और स्टूडेंट्स को घर लौट जाने की हिदायत दी। इसके साथ ही नोटिस जारी कर स्टूडेंट्स को अगस्त में सीधे परीक्षा में शामिल होने का आदेश जारी किया है। स्टूडेंट्स को मंहगी दरों पर क्रेडिट कार्ड दे रहे थे स्टूडेंट प्रोटेस्ट की खबर के बाद हरियाणा राज्य महिला आयोग (HSCW) की चेयरपर्सन रेनू भाटिया ने 28 अप्रैल को कैंपस विजिट कर स्टूडेंट्स से बात की। उनकी जांच में महंगी किश्तों पर क्रेडिट कार्ड लेने और ऑनलाइन बेटिंग-गैंब्लिंग की बात भी सामने आई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्राइवेट बैंक स्टूडेंट्स को सिर्फ आईडी कार्ड पर 36% इंट्रस्ट रेट पर क्रेडिट कार्ड दे रहे थे। इससे छात्र ऑनलाइन बेटिंग एप्स पर पैसा लगा रहे थे और हार के बाद कर्ज में डूबने पर प्राइवेट मनी लेंडर्स से पैसे लेकर उन्हें पैसे चुका रहे थे। एक तरह के लूप में फंसने के बाद उन्होंने अपनी जान दे दी। स्टूडेंट बोले- ‘काउंसलर थे, लेकिन जरूरत में उन तक पहुंच नहीं’ कॉलेज के PRO और हाल में डीन ऑफ एकेडमिक्स चुने गए जीयान भूषण का कहना है कि जांच में सबके सुसाइड के अलग-अलग कारण मिले हैं। रेनू भाटिया ने एक रिपोर्ट में कहा कि सुसाइड करने वाले दो लड़कों के मामले में ये बात सामने आई है कि वे जुए में लिप्त थे और कर्ज में डूब गए थे। उनके सुसाइड नोट में फाइनेंशियल प्रेशर का जिक्र है। कॉलेज स्टूडेंट्स की मौत का कारण भले एक न हो, लेकिन सभी में सुसाइड की वजह कॉमन थी और वो है मेंटल स्ट्रेस। लेकिन कॉलेज में समय रहते काउंसलर तक उनकी पहुंच नहीं थी। इस बारे में पूछने पर कॉलेज के वर्तमान PRO जीयान भूषण ने बताया कि पिछले तीन साल से कॉलेज में काउंसलर की व्यवस्था है। 2025 में काउंसलर और साइकोलॉजिस्ट अंजलि तनेजा को अपॉइंट किया गया था। ऐसे में स्टूडेंट्स का कहना है कि ये सब कागजी है लेकिन एक प्रॉपर सिस्टम नहीं है, जो वाकई में बच्चों की मदद कर सके। स्टूडेंट्स ने बताया कि पहले भी कॉलेज में साइकोलॉजिस्ट थे। जब हम खुद अप्रोच करते थे तब बात हो पाती थी, लेकिन उन तक हमारी पहुंच इतनी भी आसान नहीं थी। वे सिर्फ गिने-चुने दिनों में कुछ घंटों के लिए अवेलेबल होते थे। प्रोफेसर कहते हैं- कैंपस से बाहर जाकर सुसाइड करो कॉलेज ने प्रोटेस्ट के बाद सुसाइड मामला हाइलाइट होते ही कॉलेज बंद किया। इस पर स्टूडेंट्स का कहना है कि कॉलेज ब्रॉडर सिस्टेमेटिक प्रॉब्लम को एड्रेस करने और इसकी जिम्मेदारी लेने की बजाय इससे भाग रहा है। किसी प्रोफेसर ने बच्चों से ये तक कहा कि अगर सुसाइड करना है तो कैंपस के बाहर करो। प्रोटेस्ट में स्टूडेंट्स ने कहा- दीक्षा को बिना चेक किए, खिड़की से देखकर ही मृत घोषित कर दिया। कॉलेज ने मामले की जांच के लिए इंटरनल पैनल बनाया। हालांकि, स्टूडेंट्स का कहना है कि जांच में क्या सामने आया इस तरह की कोई जानकारी या रिपोर्ट पब्लिक नहीं की गई है। कॉलेज का कहना है कि रिपोर्ट सम्बंधित अधिकारियों को सौंप दी गई है। प्रोफेसर जीयान ने बताया कि कैंपस में क्रेडिट कार्ड सिस्टम बंद कर दिया गया है। NIT के ऑफिशिएटिंग डायरेक्टर के मुताबिक, स्टूडेंट्स के मेंटल हेल्थ हेल्थ सपोर्ट के लिए तीन कमिटी बनाई गई है, जिनमें से एक स्टूडेंट से वन ऑन वन

झारखंड

देवघर ज्वेलरी लूटकांड का खुलासा, तीन आरोपी गिरफ्तार:3 मई को हुई थी...

देवघर नगर थाना क्षेत्र के गणेश मार्केट स्थित शिवम अलंकार ज्वेलर्स में हुई नकद लूटकांड का पुलिस ने सफलतापूर्वक खुलासा कर दिया है। इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोपियों के पास से लूटी गई नकदी, घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल और मोबाइल फोन भी बरामद किया गया है। पुलिस प्रशासन ने इस कार्रवाई को एक बड़ी सफलता बताया है। जानकारी के अनुसार, यह घटना 3 मई 2026 को दोपहर करीब 2:30 बजे बुद्धास लेन गली स्थित शिवम अलंकार ज्वेलर्स में हुई थी। अपराधियों ने दुकान का शटर बंद कर दुकान मालिक को डरा-धमकाकर जान से मारने की धमकी दी थी। इसके बाद उन्होंने तिजोरी की चाबी लेकर तिजोरी खोली और उसमें रखे लगभग 80 हजार रुपये नकद लूटकर फरार हो गए थे। इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल बन गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए, वरीय पुलिस पदाधिकारियों के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया था। नगर थाना पुलिस ने तकनीकी एवं गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए नगर थाना क्षेत्र के नंदन पहाड़ इलाके से तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रशांत कुमार झा, दिव्यांश रंजन झा उर्फ दिव्यांश झा और सौरभ कुमार के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपियों के पास से लूटी गई राशि में से कुल 10,100 रुपये बरामद किए हैं। इसके अतिरिक्त, घटना में प्रयुक्त लाल रंग की हीरो एक्सट्रीम मोटरसाइकिल और एक ओप्पो एंड्रॉयड मोबाइल फोन भी जब्त किया गया है। Source link

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Tamilnadu Government Formation: क्या AIADMK का होगा शिवसेना जैसा हाल? पुडुचेरी पहुंचे...

Tamilnadu Government Formation: तमिलनाडु की राजनीति एक बार फिर उस मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है, जहां संख्या से ज्यादा महत्व भरोसे और पार्टी की अंदरूनी एकजुटता का हो जाता है. कभी जयललिता के दम पर तमिल राजनीति की सबसे ताकतवर पार्टी मानी जाने वाली AIADMK अब चुनावी नतीजों के बाद नए संकट के संकेत दे रही है. पार्टी के विधायकों को पुडुचेरी भेजे जाने की खबर ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है. यह तस्वीर लोगों को 2022 की महाराष्ट्र राजनीति की याद दिला रही है, जब उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने अपने विधायकों को बचाने की कोशिश की थी, लेकिन एकनाथ शिंदे की बगावत ने पूरी पार्टी की दिशा बदल दी. अब सवाल यही उठ रहा है कि क्या AIADMK भी उसी रास्ते पर बढ़ रही है? EPS यानी एडप्पादी पलानीस्वामी फिलहाल पार्टी को संभालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन TVK चीफ विजय की बढ़ती सक्रियता और सरकार बनाने की कोशिशों ने AIADMK के भीतर बेचैनी बढ़ा दी है. राजनीति में अक्सर होटल, रिसॉर्ट और दूसरे राज्यों में शिफ्ट किए गए विधायक सिर्फ सुरक्षा का संकेत नहीं होते, बल्कि अंदरूनी अविश्वास की कहानी भी बयान करते हैं. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. कांग्रेस का समर्थन मिलने के बाद भी विजय बहुमत से कुछ सीटें दूर हैं. ऐसे में AIADMK के 47 विधायक अचानक बेहद अहम हो गए हैं. इसी बीच यह खबर आई कि कुछ विधायकों को पुडुचेरी ले जाया गया है. हालांकि पार्टी ने इसे अफवाह बताते हुए साफ किया कि सभी विधायक EPS से मिले हैं और पार्टी पूरी तरह एकजुट है. लेकिन राजनीति में सिर्फ बयान काफी नहीं होते. उद्धव ठाकरे की शिवसेना में भी शुरुआत में यही कहा गया था कि सब कुछ नियंत्रण में है. बाद में वही मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और सत्ता हाथ से निकल गई. यही वजह है कि अब AIADMK के हर कदम को शक की नजर से देखा जा रहा है. क्या यह सिर्फ एहतियाती रणनीति है या फिर पार्टी के भीतर कुछ बड़ा पक रहा है? फिलहाल यही चर्चा तमिलनाडु की राजनीति का सबसे बड़ा सवाल बन चुकी है. फिलहाल पार्टी ने किसी भी तरह की टूट से इनकार किया है. (फाइल फोटो PTI) AIADMK ने अफवाहों को बताया बेबुनियाद AIADMK की तरफ से आधिकारिक बयान जारी कर कहा गया कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और सभी नवनिर्वाचित विधायक EPS के संपर्क में हैं. पार्टी प्रवक्ताओं ने मीडिया में चल रही उन खबरों को गलत बताया, जिनमें कहा गया कि MLAs को बिना जानकारी पुडुचेरी ले जाया गया. पार्टी नेतृत्व का कहना है कि विरोधी दल जानबूझकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब भी किसी पार्टी को अपने विधायकों को एक जगह इकट्ठा रखना पड़ता है, तब अंदरूनी असुरक्षा की चर्चा तेज हो जाती है. TVK के उभार ने AIADMK की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. विजय लगातार राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश कर रहे हैं. कांग्रेस पहले ही उनका समर्थन कर चुकी है और अब उनकी नजर अन्य दलों तथा निर्दलीय विधायकों पर है. इसी वजह से AIADMK के 47 विधायक बेहद अहम हो गए हैं. अगर पार्टी में थोड़ी भी टूट होती है तो तमिलनाडु की पूरी राजनीति बदल सकती है. यही कारण है कि EPS फिलहाल किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रहे. TVK को समर्थन नहीं, साफ संदेश AIADMK के डिप्टी जनरल सेक्रेटरी केपी मुनुसामी ने साफ कहा कि पार्टी किसी भी हालत में TVK को समर्थन नहीं देगी. उन्होंने कहा कि यह फैसला EPS के निर्देश पर लिया गया है और पार्टी अपनी अलग पहचान बनाए रखेगी. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि AIADMK फिलहाल विपक्ष में रहकर खुद को मजबूत करना चाहती है. पार्टी को डर है कि अगर उसने TVK को समर्थन दिया तो उसकी राजनीतिक जमीन और कमजोर हो सकती है. जयललिता की विरासत वाली पार्टी के लिए यह अस्तित्व की लड़ाई भी बन चुकी है. अगर TVK बहुमत जुटाने में सफल रहती है तो राज्य में नई सरकार बन सकती है. क्या दोहराई जाएगी शिवसेना वाली कहानी? महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे ने भी अपने विधायकों को बचाने की कोशिश की थी लेकिन अंत में शिंदे गुट अलग हो गया. AIADMK के सामने भी फिलहाल वैसा ही खतरा दिख रहा है. हालांकि अभी पार्टी में खुलकर बगावत सामने नहीं आई है, लेकिन MLAs को लेकर चल रही खबरों ने शक जरूर पैदा कर दिया है. EPS के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को एकजुट रखना है. अगर वे सभी गुटों को संतुष्ट रखने में सफल रहे तो पार्टी संकट से बाहर निकल सकती है. लेकिन अगर अंदरूनी असंतोष बढ़ा, तो तमिलनाडु में भी महाराष्ट्र जैसा राजनीतिक भूचाल देखने को मिल सकता है. क्या AIADMK सच में टूट के खतरे से गुजर रही है? फिलहाल पार्टी ने किसी भी तरह की टूट से इनकार किया है, लेकिन राजनीतिक संकेत चिंता बढ़ाने वाले हैं. विधायकों को पुडुचेरी शिफ्ट किए जाने की खबरों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि कहीं पार्टी नेतृत्व को अपने ही MLAs पर भरोसा कम तो नहीं हो रहा. हालांकि अभी तक कोई खुली बगावत सामने नहीं आई है, इसलिए स्थिति पूरी तरह शिवसेना जैसी नहीं कही जा सकती. AIADMK TVK को समर्थन क्यों नहीं देना चाहती? AIADMK का मानना है कि TVK को समर्थन देने से उसकी खुद की राजनीतिक पहचान कमजोर पड़ सकती है. पार्टी फिलहाल खुद को एक मजबूत विपक्ष के रूप में स्थापित करना चाहती है. EPS नहीं चाहते कि विजय की लोकप्रियता के सामने AIADMK की जमीन और खिसके. यही वजह है कि पार्टी ने साफ संदेश दिया है कि TVK को किसी भी हाल में समर्थन नहीं मिलेगा. तमिलनाडु की राजनीति में आगे क्या हो सकता है? अगर TVK बहुमत जुटाने में सफल रहती है तो राज्य में नई सरकार बन सकती है. लेकिन अगर संख्या पूरी नहीं हुई तो राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है. AIADMK के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण है. पार्टी अगर एकजुट रहती है तो भविष्य में किंगमेकर की भूमिका निभा सकती है.

झारखंड

egg embryo eating effects on health: मिड डे मील के अंडे में...

Last Updated:May 07, 2026, 13:53 IST Mid Day Meal embryo in Egg: झारखंड में गोड्डा के सरकारी स्कूल में मिड डे मील के उबले अंडे में चूजे का भ्रूण मिलने से हंगामा मच गया है. पेरेंट्स ने इसे लेकर अस्‍पताल में बवाल मचाया और बच्‍चों की सेहत को होने वाले नुकसान डॉ रमन कुमार ने कहा पकने पर इससे सेहत को नुकसान नहीं होता झारखंड में म‍िड डे मील के अंडे में न‍िकला भ्रूण, अगर कोई खा ले तो क्‍या नुकसान हो सकते हैं.. सांकेत‍िक तस्‍वीर.. Mid Day Meal Chick embryo: झारखंड के गोड्डा जिले के एक सरकारी स्कूल में बच्चों को बांटे गए मिड डे मील में चूजे का भ्रूण निकलने से हंगामा मच गया. दर्जनों पेरेंट्स स्कूल में आकर प्रदर्शन करने लगे और बच्चों को खराब खाना परोसने का आरोप लगाया. दरअसल बच्चों को खाने में उबला अंडा दिया गया था. जब एक बच्चे ने अंडा फोड़ा तो उसमें चूजे का हिस्सा जैसा दिखाई दिया.पेरेंट्स का कहना था कि सिर्फ एक ही नहीं बल्कि बच्चों को दिए गए कई अंडों में भ्रूण बन रहा था. मिड डे मील की गुणवत्ता पर सवाल पहली बार नहीं उठा है, लेकिन अंडे में भ्रूण निकलने का यह पहला और अजीबोगरीब मामला सामने आया है. पेरेंट्स इस भ्रूण वाले अंडे से बच्चों की सेहत को खतरा होने का आरोप लगा रहे हैं, ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वाकई चूजे का भ्रूण अगर बच्चे खा लेते तो उनकी सेहत को नुकसान हो सकता था? क्या इससे कोई गंभीर बीमारी हो सकती थी? यह कितना खतरनाक है? इसे लेकर आइए फैमिली फिजिशियन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट डॉ. रमन कुमार से जानते हैं… डॉ. रमन कुमार ने बताया कि आमतौर पर जो अंड़े खाए जाते हैं, उनमें जीव पैदा करने की क्षमता नहीं होती है, लेकिन यह अंडा कैसे फर्टाइल हुआ और इसमें कैसे भ्रूण पनपा, या यह अंडा मिड डे मील में कैसे आया यह तो प्रशासनिक जांच का विषय है, लेकिन अगर मेडिकल नजरिए से देखें तो अगर यह भ्रूण पक गया था और इसे बच्चे खा लेते तो इससे हेल्थ को कोई नुकसान नहीं होता. डॉ. रमन कहते हैं कि यह अपने आप में पहला मामला है लेकिन जो बच्चे घरों में अंडा और चिकन खाते हैं, अगर वे इसे भी खाते तो स्वास्थ्य पर तो कोई असर नहीं पड़ता, लेकिन इसे न खाने या इसका विरोध करने के अन्य पहलू हो सकते हैं. वहीं इस भ्रूण से संक्रमण होने के सवाल पर डॉक्टर कहते हैं कि मिड डे मील हो या कहीं और मिलने वाला भोजन हो, अगर उसे बनाने के दौरान सही नियमों का पालन नहीं किया गया है और साफ-सफाई व अन्य चीजों का ध्यान नहीं रखा गया है, पानी ठीक इस्तेमाल नहीं किया गया है तो उससे भी संक्रमण फैल सकता है. जो लोग चिकन नहीं सिर्फ अंडा खाते हैं… कुछ लोग सिर्फ अंडा खाते हैं लेकिन मीट या चिकन नहीं खाते हैं तो ऐसी स्थिति में अगर किसी के उबले अंडे में भ्रूण निकलता है तो वह बर्दाश्त करना मुश्किल होता है. ये भी एक वजह हो सकती है कि पेरेंट्स विरोध कर रहे हों. या हो सकता है कि उस अंडे की क्ववालिटी ही खराब हो. विदेशों में खाते हैं बलूत और भ्रूण बता दें कि चीन, इंडोनेशिया और कोरियाई देशों में लोग मुर्गी या बत्तख के अंडों में पनपे भ्रूण को खाते हैं. भ्रूण पनप चुके अंडों को बलूत बोला जाता है. वहां लोग अंडों को बिना छीले भी खा जाते हैं. हालांकि भारत में ऐसा नहीं पाया जाता है. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

व्यापार

4 लाख लगाकर शुरू करें ये बिजनेस 8 लाख का होगा फायदा,...

होमताजा खबरमनी 4 लाख लगाकर शुरू करें ये बिजनेस 8 लाख का होगा फायदा, सरकार भी देगी मदद Last Updated:September 11, 2021, 07:50 IST अगर आप बिजनेस (Business) करना चाहते हैं तो यह खबर आपके लिए है. यह एक ऐसा बिजनेस है जिसे कम लागत (Low Investment) में शुरू किया जा सकता है और इस बिजनेस में मुनाफा (Profit) भी ज्यादा है. खरगोश पालन (Rabbit Farming) के बिजनेस से करें कमाई नई दिल्ली. अगर आप बिजनेस (Business) करना चाहते हैं तो यह खबर आपके लिए है. यह एक ऐसा बिजनेस है जिसे कम लागत (Low Investment) में शुरू किया जा सकता है और इस बिजनेस में मुनाफा (Profit) भी ज्यादा है. आप लगभग 4 लाख रुपये के निवेश में खरगोश पालन (Rabbit Farming) का बिजनेस शुरू कर सकते हैं. यह बिजनेस इसलिए फायदेमंद है क्योंकि बाजार में खरगोश के मांस की ज्यादा कीमत मिलती है. वहीं इसके बालों से बनने वाली ऊन के लिए भी इसे पाला जाता है. आइए जानते हैं छोटे पैमाने पर किस तरह आप खरगोश पालन कर नियमित कमाई कर सकते हैं. 4 लाख रुपये तक आएगा खर्च- खरगोश पालन के इस बिजनेस को यूनिट में बांटा गया है. एक यूनिट में सात मादा और तीन नर खरगोश होते हैं. मान लें फार्मिंग के लिए शुरुआती स्तर 10 यूनिट का रखा है तो इसके लिए लगभग 4 लाख से 4.50 लाख रुपये खर्च आता है. इसमें टिन शेड लगभग 1 से 1.50 लाख रुपये, पिंजड़े 1 से 1.25 लाख रुपये, चारा और इन यूनिट्स पर लगभग 2 लाख रुपये खर्च शामिल हैं. नर और मादा खरगोश लगभग 6 महीने के बाद ब्रीडिंग के लिए तैयार होते हैं. एक मादा खरगोश एक बार में 6 से 7 बच्चों को जन्म देती है. मादा खरगोश का प्रेगनेंसी पीरियड 30 दिन का होता है और इसके अगले 45 दिनों में बच्चा लगभग 2 किलोग्राम का होने के बाद बिकने के लिए तैयार हो जाता है. ऐसे होगी कमाई- एक मादा खरगोश से औसतन 5 बच्चे हुए तो इस तरह 45 दिनों में 350 बच्चे बनेंगे. खरगोश की यूनिट लगभग छह माह में बच्चे पैदा लायक होती है. इनमें 6 महीने के इंतजार की भी जरूरत नहीं होती. 10 यूनिट खरगोश से 45 दिनों में तैयार हुआ बच्चों का बैच लगभग 2 लाख रुपये में बिकता है. इन्हें फार्म ब्रीडिंग, मीट और ऊन व्यवसाय के लिए बेचा जाता है और एक मादा खरगोश सालभर में कम से कम 7 बार बच्चे देती है. लेकिन मोर्टेलिटी, बीमारी आदि सभी को ध्यान में रखकर औसतन 5 प्रेगनेंसी पीरियड मानकर चलें तो सालभर में 10 लाख रुपये के खरगोश बिक जाते हैं जबकि चारे पर खर्च 2 से 3 लाख रुपये मान लें तो 7 लाख रुपये नेट प्रॉफिट कमाया जा सकता है. हालांकि शुरू के साल में कुल 4.50 लाख रुपये की इन्वेस्टमेंट को इसमें निकालकर चलें तब भी 3 लाख रुपये की आमदनी होती है. फ्रेंचाइजी लेकर भी शुरू कर सकते हैं बिजनेस अगर ज्यादा रिस्क लेने की क्षमता ना हो तो कई बड़े फार्म से फ्रेंचाइजी लेने का विकल्प नए लोगों के पास है. इसके माध्यम से खरगोश ब्रीडिंग से लेकर मार्केटिंग तक सभी तरह की ट्रेनिंग दी जाएगी. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : September 11, 2021, 07:50 IST Source link

झारखंड

बोकारो में गैस से भरा टैंकर पलटा, लगी भीषण आग:चास-पुरुलिया NH-32 पर...

बोकारो में गुरुवार को इथेनॉल गैस लोडेड 16 चक्का टैंकर पलट गया और उसमें भीषण आग लग गई। इस घटना से पूरे इलाके में अफरातफरी मच गई और रोड जाम लग गया। घटना पिंडराजोरा थाना क्षेत्र स्थित चास-पुरुलिया राष्ट्रीय राजमार्ग-32 पर हुई। टैंकर में ज्वलनशील इथेनॉल भरा हुआ था, जो अत्यधिक ज्वलनशील और तीखी गंध वाला अल्कोहल होता है। टैंकर के पलटते ही दो मिनट में लग गई आग टैंकर पलटते ही बड़ी मात्रा में इथेनॉल सड़क पर फैल गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसे के करीब दो मिनट बाद अचानक आग भड़क उठी और देखते ही देखते आग की ऊंची लपटों ने पूरे टैंकर को अपनी चपेट में ले लिया। चालक को लगी हल्की चोटें आग की भयावहता के कारण आसपास के लोगों में दहशत फैल गई और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। हादसे के तुरंत बाद चालक और खलासी किसी तरह वाहन से बाहर निकलने में सफल रहे। चालक को हल्की चोटें आई हैं, जबकि खलासी पूरी तरह सुरक्षित है। समय रहते दोनों के बाहर निकल जाने से एक बड़ा हादसा टल गया। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई इधर, घटना के बाद एनएच-32 पर यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की तीन गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और काफी मशक्कत के बाद आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया। पुलिस ने सुरक्षा के मद्देनजर मार्ग के दोनों ओर आवागमन रोक दिया तथा वाहनों को वैकल्पिक रास्तों से भेजा। दुर्घटना में टैंकर पर लदा पूरा इथेनॉल जलकर नष्ट हो गया। पुलिस मामले की जांच कर रही है। Source link

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जमशेदपुर में कार में लगी आग:साईं मोटर्स परिसर में बड़ा हादसा टला,...

जमशेदपुर के गोलमुरी थाना क्षेत्र स्थित टूइलाडुंगरी में गुरुवार को साईं मोटर्स सेल-पर्चेस प्रतिष्ठान के परिसर में खड़ी एक कार में भीषण आग लग गई। इस घटना से इलाके में अफरातफरी मच गई, हालांकि समय रहते एक बड़ा हादसा टल गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पहले कार से धुआं निकलता देखा गया, जिसके बाद आग की लपटें तेजी से फैल गईं और पूरी गाड़ी को अपनी चपेट में ले लिया। आग लगने वाली जगह पर कई अन्य वाहन भी खड़े थे, जिससे बड़े पैमाने पर नुकसान की आशंका बढ़ गई थी। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया स्थानीय लोगों ने तुरंत गोलमुरी थाना और दमकल विभाग को सूचित किया। पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। तब तक कार पूरी तरह जलकर खाक हो चुकी थी। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है। हालांकि, इस आगजनी ने साईं मोटर्स परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने अग्निशमन सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों की आवश्यकता पर जोर दिया, क्योंकि यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहन खड़े रहते हैं। आग लगने के कारणों का अभी तक स्पष्ट खुलासा नहीं हो पाया है। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट या किसी तकनीकी खराबी की आशंका जताई जा रही है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। Source link

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