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झारखंड

बारिश में डूबा गिरिडीह का गांधी चौक:सड़क पर गंदे पानी के जमाव...

गिरिडीह में हुई बारिश ने एक बार फिर नगर निगम की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। गुरुवार को हुई तेज बारिश के बाद शहर का सबसे व्यस्त गांधी चौक पूरी तरह जलमग्न हो गया। सड़क पर गंदे पानी का जमाव इतना अधिक था कि लोगों का पैदल चलना मुश्किल हो गया। कई स्थानों पर पानी घुटनों तक जमा हो गया, जिससे राहगीरों, दुकानदारों और वाहन चालकों को भारी परेशानी हुई। बारिश के बाद गांधी चौक का नजारा किसी तालाब जैसा दिख रहा था। सड़क और नालियों का पानी एक साथ जमा होने से पूरे इलाके में कीचड़ और बदबू फैल गई। बाइक सवार फिसलने से बाल-बाल बचे जलजमाव के कारण छोटे वाहन चालकों को काफी दिक्कत हुई। वहीं, कई बाइक सवार फिसलने से बाल-बाल बचे। पैदल चलने वाले लोगों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा। बाजार आने वाले ग्राहकों की संख्या भी कम हो गई, जिससे दुकानदारों का कारोबार प्रभावित हुआ। स्थानीय दुकानदारों और नागरिकों ने नगर निगम की कार्यशैली पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। लोगों का कहना है कि हर साल बारिश के मौसम में गांधी चौक और आसपास के इलाकों में ऐसी ही स्थिति बन जाती है। इसके बावजूद स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की जाती। लोगों ने ड्रेनेज व्यवस्था बनाने की भी मांग उठाई नालियों की नियमित सफाई न होने और जलनिकासी व्यवस्था कमजोर होने के कारण थोड़ी देर की बारिश में ही सड़कें जलमग्न हो जाती हैं। स्थानीय निवासियों ने बताया कि नगर निगम द्वारा शहर की सफाई और जलनिकासी को लेकर लगातार दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत बारिश के बाद स्पष्ट दिखाई देती है। जगह-जगह गंदा पानी जमा होने से संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। लोगों ने प्रशासन और नगर निगम से जल्द प्रभावी कदम उठाने की मांग की है, ताकि हर बारिश में शहरवासियों को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े। नागरिकों ने गांधी चौक सहित शहर के अन्य जलजमाव वाले क्षेत्रों में स्थायी ड्रेनेज व्यवस्था बनाने की भी मांग उठाई है। Source link

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जेवर एयरपोर्ट पर किसे मिलेगा पहला वॉटर कैनन सैल्‍यूट, फिर किस शहर...

Last Updated:May 07, 2026, 18:16 IST नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से फ्लाइट ऑपरेशन का ऐलान हो गया है. क्‍या आपको पता है कि जेवर में बने इस एयरपोर्ट से किस शहर के लिए पहली फ्लाइट टेकऑफ करने वाली है. इतना ही नहीं, किस फ्लाइट के पैसेंजर को खास वॉटर कैनन सैल्‍यूट मिलेगा. एयरपोर्ट से किस शहर के लिए उड़ेगी पहली फ्लाइट? Noida International Airport: आपको यह तो पता होगा कि 15 जून से नोएडा इंटरनेशलन एयरपोर्ट से फ्लाइट ऑपरेशन शुरू होने जा रहे हैं. लेकिन, क्‍या आपको यह पता है कि इस एयरपोर्ट से किस शहर के लिए पहली फ्लाइट टेकऑफ करेगी. साथ ही, किस शहर से आने वाली फ्लाइट को जेवर के इस एयरपोर्ट पर पहली लैंडिंग मिलेगी और उसका स्‍वागत वॉटर कैनन सैल्‍यूट से किया जाएगा. इसके अलावा, यहां से किस-किस शहरों के लिए फ्लाइट्स ऑपरेट की जाएगी. यदि आपके पास इन सभी सवालों के जवाब नहीं हैं तो चलिए सिलसिलेवार तरीके से हम आपको बताते हैं. About the Author Anoop Kumar MishraAssistant Editor Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Noida,Gautam Buddha Nagar,Uttar Pradesh Source link

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रांची के किसान जेवियर लकड़ा का कमाल, 1 एकड़ में लगाया 150...

होमफोटोकृषि रांची के किसान जेवियर लकड़ा का कमाल, 1 एकड़ में लगाया 150 आम के पेड़ Last Updated:May 07, 2026, 15:23 IST Ranchi Kisan Xavier Lakra Story: झारखंड की राजाधानी रांची के दमी गांव के रहने वाले जेवियर लकड़ा अपने घर के पास ही अपने एक एकड़ फॉर्म में हर तरह की खेती करते हैं. खासतौर पर वह आम की खेती के लिए मशहूर हैं. आज उनके पास 150 से अधिक आम के पेड़ हैं. इसके अलावा लीची, धनिया पत्ता, मिर्ची, भिंडी जैसी सारी चीजों की खेती करते हैं, जिससे आज उन्हें लाखों का मुनाफा हो रहा है और उन्होंने अपने सीक्रेट खाद के बारे में भी लोकल 18 की टीम से जानकारी साझा की. आइये जानते हैं उनकी खेती के बारे में. जेवियर लकड़ा ने लोकल 18 से बताया कि वह खेती के साथ-साथ 4 बैल और भेड़ भी पाले हुए हैं. ऐसे में बैल और भेड़ का जो वेस्ट होता है, वह उसको केंचुआ खाद में मिलाते हैं और उसको खाद के रूप में इस्तेमाल करते हैं. इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति काफी अच्छी रहती है और साथ में थोड़ा चूना भी मिला देते हैं, जिससे मिट्टी का पीएच लेवल एकदम बैलेंस रहता है. जेवियर बताते हैं कि उनके घर के चारों तरफ बगान है और बीच में यह उनका घर है. फिलहाल इस समय उनके बगान में कच्चे आम के फल पेड़ में ज्यादा लदे हुए है. जिसको हम लोग पका कर बाजार में बेचने का काम करते हैं, तो कुछ प्राकृतिक तौर पर भी पकते हैं. ऐसे में उन्हें कच्चे आम के भी दाम मिल जाते है और पका हुआ का फिलहाल मार्केट में ₹120 किलो तक मिल जाता है. हर दिन उन्हें 15 केजी तक पका आम मिल जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google इसके अलावा उनके पास लीची के भी कई सारे पेड़ देखने को मिलेंगे, लेकिन लीची फिलहाल कच्चा है. जहां आने वाले 15 दिनों में वह भी पक जाएंगे और तो और पेड़ के छांव वाली जगह पर मिर्च की खेती होती है. उसमें वह कई तरह के साग और धनिया पत्ता जैसे चीजों की खेती करते हैं. क्योंकि इससे सूर्य की रोशनी सीधे नहीं पड़ती और जगह का भी उपयोग बढ़िया से हो जाता है. उन्होंने आगे बताया इस बगान को तैयार करने में उन्हें 8 से 9 साल का समय लगा है. यह सारे पेड़ इतने ही साल पुराने हैं. अभी और नए पेड़ करीबन 70 पौधे आम के और लगाया हुए हैं, जो आने वाले 4 साल में फल देने लगेंगे. इसी तरह हर साल 60 से 70 पेड़ लगा देते हैं. इससे क्या है गर्मी के मौसम का वक्त होता है. इसमें अच्छी खासी डेढ़ लाख तक की कमाई हो जाती है और यह मुनाफा रुकता नहीं है. साल भर खेती से होता रहता है. Source link

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Eco Driving: अब ईको ड्राइविंग से होगी पेट्रोल की बचत और घटेगा...

होमताजा खबरमनी Eco Driving: अब ईको ड्राइविंग से होगी पेट्रोल की बचत और घटेगा प्रदूषण Last Updated:September 04, 2021, 16:32 IST Eco driving and Save Fuel: सीएसआईआर-सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्‍टीट्यूट की ओर से रिसर्च की गई है जिसमें बताया गया है कि परंपरागत गाड़‍ियों के इस्‍तेमाल के दौरान अगर ईको-ड्राइविंग पर फोकस किया जाए तो ईंधन और पर्यावरण दोनों को नुकसान से बचाया जा सकता है. अब दिल्ली में वैध प्रदूषण नियंत्रण सर्टिफिकेट के बिना गाड़ी चलाने पर ड्राइविंग लाइसेंस रद्द हो सकता है. नई दिल्‍ली. अगर आप भी कार ड्राइव करते हैं और पेट्रोल व डीजल (Petrol and Diesel) की कीमतों के आसमान छूने से परेशान हैं, या फिर पुरानी हो चुकी कार के प्रदूषण (Pollution) फैलाने के बावजूद आप उसे बेचकर या छोड़कर नई बिना प्रदूषण वाली इलेक्ट्रिक कार (Electric Car) खरीदने की स्थिति में नहीं हैं तो यह खबर आपके लिए बहुत उपयोगी हो सकती है. वैज्ञानिकों की ओर से बताई गई ईको-व्‍हीकल ड्राइविंग (Eco Driving) या पर्यावरण ड्राइविंग से न केवल आप पुरानी कार के बावजूद ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की जबरदस्‍त बचत कर पाएंगे बल्कि प्रदूषण भी कम फैलेगा और पर्यावरण (Environment) को नुकसान नहीं होगा. देशभर में प्रदूषण को देखते हुए अब इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रमोट किया जा रहा है. देश के कई राज्‍य इलेक्ट्रिक व्‍हीकल (EV) को लेकर अपनी-अपनी पॉलिसी भी जारी कर चुके हैं लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि नए प्रदूषण मुक्‍त वाहनों (Pollution Free Vehicle) पर जाने में अभी कई साल लगेंगे ऐसे में ऐसे तरीके या तकनीक की जरूरत है जो परंपरागत रूप से चल रहीं पेट्रोल और डीजल की गाड़‍ियों को भी ईको-फ्रेंडली बना सके और इसमें कम से कम ईंधन का उपयोग हो. अब इलेक्‍ट्रिक व्‍हीकल पर स्विच करने से ही नहीं बल्कि पेट्रोल-डीजल की गाड़‍ियों में ईको-ड्राइविंग से होगी ईंधन और पर्यावरण की बचत. हाल ही में सीएसआईआर-सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्‍टीट्यूट (CSIR-CRRI) की ओर से रिसर्च की गई है जिसमें बताया गया है कि परंपरागत गाड़‍ियों के इस्‍तेमाल के दौरान अगर ईको-ड्राइविंग पर फोकस किया जाए तो ईंधन (Fuel) और पर्यावरण दोनों को नुकसान से बचाया जा सकता है. रिसर्च करने वाले इंस्‍टीट्यूट के सीनियर प्रिंसिपल वैज्ञानिक और प्रोफेसर एसीएसआईआर ट्रांस्‍पोर्टेशन प्‍लानिंग एंड एनवायरनमेंट डॉ. रविंद्र कुमार कहते हैं कि अब पर्यावरण और तेल कीमतों (Oil Prices) को देखते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों पर स्विच किया जा रहा है लेकिन जो गाड़‍ि‍यां देश में पहले से चल रही हैं उन पर भी तकनीक का इस्‍तेमाल करना होगा नहीं तो एक तरफ चीजें ठीक होंगी और दूसरी तरफ हालात गड़बड़ हो जाएंगे. ईको ड्राइविंग से होगी 11 से 50 फीसदी तक की बचत हालिया रिसर्च में सामने आया है कि ईको-ड्राइविंग व्‍यवहार और प्रशिक्षण प्रथाओं से ईंधन अर्थव्‍यवस्‍था (Fuel Economy) में 11-50 फीसदी तक का सुधार हो सकता है. इसके अलावा सीओटू के उत्‍सर्जन में भी भारी कमी हो सकती है. इससे पर्यावरण के अलावा सामाजिक लाभ भी हैं. भारत में एक टन सीओटू (CO2) उत्‍सर्जन से अर्थव्‍यवस्‍था को 86 डॉलर का नुकसान होता है. ईको-ड्राइविंग से ऐसे होती है पेट्रोल-डीजल की बचत डॉ. रविंद्र कुमार बताते हैं कि ईको-ड्राइविंग या ग्रीन ड्राइविंग (Green Driving) एक पद्धति है. जिसमें कार की गति का विशेष ध्‍यान दिया जाता है. इससे ईंधन की भारी बचत होती है. रिसर्च में बताया गया है कि गाड़ी की स्‍पीड जितनी अधिक कम या जितनी अधिक ज्‍यादा होगी तो ईंधन की खपत सबसे ज्‍यादा होगी. अगर कोई कार 10 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही है तो वह 100 किलोमीटर तक पहुंचने में 14 लीटर ईंधन लेगी. जबकि यही कार अगर 120-140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही है तो इतनी ही दूरी तय करने में 14-16 लीटर ईंधन लेगी. ईको-ड्राइविंग व्‍यवहार और प्रशिक्षण प्रथाओं से ईंधन अर्थव्‍यवस्‍था में 11-50 फीसदी तक का सुधार हो सकता है. जबकि अगर ईको-ड्राइविंग की गति को देखा जाए तो यह 50-80 प्रति किलोमीटर है. अगर कोई भी व्‍यक्ति इस गति पर अपनी कार को स्थिर रखता है तो 100 किलोमीटर तक जाने में सबसे कम 7 से साढ़े सात लीटर ईंधन की जरूरत होगी जो कि बाकी स्‍पीड में लगे ईंधन का 50 फीसदी है. गाड़ि‍यों के मीटर में इसे ही ग्रीन गति के रूप में दर्शाया भी जाता है लेकिन अक्‍सर लोग इसे ऐसे समझते हैं कि दुर्घटनाओं की वजह से इसे ग्रीन सिग्‍नल कहा गया है. जबकि इसका मतलब ईंधन की खपत की बचत से है. क्‍या है ईको-ड्राइविंग डॉ. रविंद्र कहते हैं कि ड्राइविंग का एक चक्र होता है. पहले गाड़ी जीरो पर होती है यानि रुकी हुई होती है इसे हम सुस्‍ती या आइडलिंग कहते हैं. इसके बाद शुरू होता है एक्‍सेलरेशन. गाड़ी को एक्‍सलेरेट करने के बाद अगर सड़क अच्‍छी होती है तो हम क्रूज करते हैं. यहां ध्‍यान देने वाली बात है कि क्रूजिंग के दौरान हम गाड़ी को एक ही आदर्श गति पर रखें. 50-80 त‍क ग्रीन स्‍पीड होने के बावजूद अगर कार को 45-65 के बीच में ही चलाया जाए तो इसका प्रभाव और भी अच्‍छा होता है. इसके बाद हम देखते हैं कि अगर कहीं कोई गड्ढ़ा या ऐसी जगह आई जहां हमें गाड़ी को धीमा करना होगा तो धीरे-धीरे हम कार को डिसेलरेट करते हैं और फिर धीरे-धीरे कार को बंद करते हैं. कई जगह होता ये है कि हड़बड़ी और जल्‍दबाजी के चलते लोग ड्राइविंग के इन चक्रों को भी जल्‍दबाजी में इस्‍तेमाल करते हैं. जिसका प्रभाव कार के इंजन और अन्‍य पार्ट पर पड़ता है और ग्रीन हाउस गैसेज का उत्‍सर्जन बढ़ जाता है. डॉ. रविंद्र कहते हैं कि कोई व्‍यक्ति कार या कोई चौपहिया वाहन चलाता है तो उसे इन चारों चक्रों से गुजरना पड़ता है. इस दौरान ध्‍यान रखने वाली बात होती है कि इन चक्रों से गुजरने के बाद गाड़ी की गति को ग्रीन स्‍पीड तक ले जाया जाए और वहीं स्थिर रखा जाए. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : September 04, 2021, 16:03 IST Source link

झारखंड

पलामू में युवक के प्राइवेट पार्ट से निकली कोल्डड्रिंक बोतल:पेट दर्द के...

पलामू में एक 30 वर्षीय युवक के प्राइवेट पार्ट (मलद्वार) से 200 एमएल की कोल्ड ड्रिंक की बोतल निकाली गई है। युवक को पेट दर्द की शिकायत के बाद एमएमसीएच में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टरों ने 30 मिनट की मशक्कत के बाद बोतल को सफलतापूर्वक बाहर निकाला। युवक की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है, हालांकि उसका इलाज अभी जारी है। यह घटना तब सामने आई जब युवक को तेज पेट दर्द हुआ और परिजनों ने उसे गुरुवार को इलाज के लिए एमएमसीएच (MMCH) में भर्ती कराया। सिटी स्कैन में युवक के प्राइवेट पार्ट में बोतल फंसी हुई दिखाई दी, जिससे डॉक्टर भी हैरान रह गए। एमएमसीएच में डॉ. सुशील पांडेय के नेतृत्व में डॉ. सब्या साक्षी मेहरा और डॉ. सुमित की टीम ने इस जटिल प्रक्रिया को अंजाम दिया। उन्होंने पंप के माध्यम से 30 मिनट में बोतल को बाहर निकाला। डॉक्टरों के अनुसार, युवक की हालत स्थिर है और वह खतरे से बाहर है। इधर, घटना की जानकारी मिलने पर पड़वा पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। पड़वा थाना प्रभारी चिंटू कुमार ने बताया कि पुलिस युवक के नाम-पते का सत्यापन कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बोतल किसी और ने डाली या युवक ने नशे की हालत में खुद ही ऐसा किया। युवक जिले के पड़वा थाना क्षेत्र के लामीपतरा के झरी गांव का निवासी है और नशे का आदी बताया जा रहा है। आशंका जताई जा रही है कि नशे की हालत में उसके कुछ दोस्तों ने यह हरकत की हो सकती है। परिवारवालों ने शुरुआत में सिर्फ पेट दर्द की शिकायत बताई थी। हालांकि, युवक अभी तक इस संबंध में परिजनों या पुलिस को कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे पाया है, जिससे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। पुलिस आगे की जांच कर रही है। Source link

झारखंड

गुमला में दो बाइक की टक्कर, तीन घायल:दो गंभीर रूप से जख्मी,...

गुमला जिले के घाघरा-गुमला मुख्य मार्ग पर मसूरिया मोड़ के पास गुरुवार को दो बाइक की सीधी टक्कर में तीन लोग घायल हो गए। स्थानीय लोगों की मदद से तीनों को एंबुलेंस 108 द्वारा सदर अस्पताल गुमला भेजा गया, जहां गंभीर रूप से घायल दो लोगों को बेहतर इलाज के लिए रिम्स रेफर कर दिया गया। बताया जा रहा है कि यह दुर्घटना तेज रफ्तार और तीखे मोड़ के कारण हुई। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक सवार तीनों लोग सड़क पर जा गिरे और दोनों बाइकें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। घटना के तुरंत बाद राहगीरों और स्थानीय लोगों ने बचाव कार्य शुरू किया। उन्होंने तत्काल एंबुलेंस 108 को फोन कर बुलाया। घायलों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के बजाय सीधे सदर अस्पताल भेजा गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद दो युवकों को रिम्स रेफर किया गया। घायलों की पहचान गोया गांव निवासी रिपु उरांव (16), आफताब खान (18) और मंटू उरांव (22) के रूप में हुई है। इनमें से रिपु और आफताब की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें रिम्स भेजा गया है। तीनों बाइक सवारों को सिर, हाथ सहित शरीर के विभिन्न हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं। किसी भी बाइक सवार ने हेलमेट नहीं पहना था, जिसके कारण उनके सिर में चोटें लगीं। घटना की सूचना मिलने पर घाघरा पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त दोनों बाइकों को जब्त कर थाने ले आई है और मामले की छानबीन कर रही है। उल्लेखनीय है कि जिला परिवहन विभाग और सड़क सुरक्षा टीम द्वारा सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के उद्देश्य से लगातार वाहन जांच और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके बावजूद गुमला में सड़क दुर्घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं और दुर्घटनाओं में मृतकों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है, जिसमें ज्यादातर युवा वर्ग या किशोर शामिल हैं। Source link

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OPINION: कर्नाटक में येदियुरप्पा को मिला था मौका, लेकिन TN में गवर्नर...

थलापति विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) ने भले ही तमिलनाडु की राजनीति को सिर के बल पलट दिया हो, मगर खुद भी उलझ गई है. तीन दशकों से चला आ रहा द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (AIADMK) का दबदबा खत्म हो गया. राज्य की जनता ने एक नया विकल्प तो चुना, लेकिन विधानसभा चुनाव के नतीजों ने ऐसी तस्वीर पेश की है, जिसने सरकार बनाने की चाबी राजभवन की मेज पर रख दी है. आज तमिलनाडु की राजनीति उस मोड़ पर है, जहां राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर के फैसले पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं. राज्यपाल ने गुरुवार को टीवीके (TVK) चीफ विजय के सरकार बनाने के दावे को खारिज कर दिया. राजभवन की ओर से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया कि विजय विधानसभा में आवश्यक बहुमत साबित करने में सफल नहीं रहे हैं. विजय की पार्टी ने 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनने का गौरव हासिल किया है. यह आंकड़ा बहुमत के जादुई नंबर 118 से सिर्फ 10 सीटें दूर है. कांग्रेस के समर्थन के बाद यह संख्या 113 तक पहुंच गई है, जो अब भी बहुमत से 5 कदम दूर है. विजय ने राज्यपाल से अनुरोध किया कि उन्हें सबसे बड़े दल के नाते मौका दिया जाए और वे दो हफ्ते के भीतर फ्लोर टेस्ट में बहुमत साबित कर देंगे. लेकिन राज्यपाल का रुख कड़ा बना हुआ है. वे चाहते हैं कि विजय शपथ लेने से पहले ही उन 118 विधायकों का समर्थन पत्र दिखाएं, जो उनके साथ हैं. कर्नाटक 2018: क्या तब नियमों की परिभाषा अलग थी? जब हम तमिलनाडु के मौजूदा संकट को देखते हैं, तो मई 2018 का कर्नाटक चुनाव बरबस याद आता है. उस समय 224 सदस्यों वाली कर्नाटक विधानसभा में बीजेपी 104 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी. वह भी बहुमत के आंकड़े से दूर थी. दूसरी तरफ कांग्रेस और जेडीएस ने चुनाव के तुरंत बाद गठबंधन किया, जिसके पास बहुमत का स्पष्ट आंकड़ा था. इसके बावजूद तत्कालीन राज्यपाल वजुभाई वाला ने कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन को बुलाने के बजाय सबसे बड़ी पार्टी के नेता बी.एस. येदियुरप्पा को सरकार बनाने का न्यौता दिया. येदियुरप्पा को शपथ दिलाते समय उनसे विधायकों की लिस्ट नहीं मांगी गई, बल्कि उन्हें सदन में बहुमत साबित करने के लिए पर्याप्त समय दिया गया. हालांकि सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद फ्लोर टेस्ट हुआ और येदियुरप्पा को इस्तीफा देना पड़ा. सवाल यह है कि जो ‘VIP छूट’ कर्नाटक में बीजेपी को मिली, वही संवैधानिक परंपरा तमिलनाडु में विजय के लिए क्यों नहीं अपनाई जा रही है? गवर्नर से मिलकर तमिलनाडु में सरकार बनाने का दावा पेश करते विजय (PTI Photo) ‘राजभवन टेस्ट’ बनाम ‘फ्लोर टेस्ट’ का संवैधानिक विवाद संविधान विशेषज्ञों और सुप्रीम कोर्ट के कई ऐतिहासिक फैसलों ने यह स्पष्ट किया है कि बहुमत का फैसला राजभवन के बंद कमरों में नहीं, बल्कि विधानसभा के पटल पर होना चाहिए. 1994 का ‘एस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ’ मामला इसी बात की तस्दीक करता है. 9 जजों की बेंच ने साफ कहा था कि किसी सरकार के पास बहुमत है या नहीं, इसे परखने की एकमात्र जगह विधानसभा है. तमिलनाडु के मामले में ऐसा लग रहा है मानो राज्यपाल फ्लोर टेस्ट से पहले ही ‘राजभवन टेस्ट’ लेना चाह रहे हैं. वे विजय से यह पूछ रहे हैं कि वे बाकी पार्टियों का समर्थन कैसे जुटाएंगे. क्या यह राज्यपाल के अधिकार क्षेत्र में आता है कि वह पहले से ही सरकार की स्थिरता पर सवाल उठाएं, जबकि सबसे बड़े दल ने दावा पेश कर दिया हो? क्या राज्यपाल केवल केंद्र के प्रतिनिधि के रूप में काम कर रहे हैं? राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने इस मामले में राज्यपाल की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यपाल अक्सर केंद्र के एजेंट के रूप में काम करते हैं और अपने राजनीतिक हितों को साधने के लिए संविधान को नुकसान पहुंचाते हैं. अभिनेता और राजनेता कमल हासन ने इसे जनमत का अपमान बताया है. उनका कहना है कि तमिलनाडु की जनता ने विजय को सबसे ज्यादा सीटें दी हैं, ऐसे में उन्हें मौका न देना जनादेश का गला घोंटने जैसा है. कांग्रेस ने भी कड़ी चेतावनी दी है कि अगर बीजेपी ने एक विधायक के दम पर पिछले दरवाजे से शासन करने की कोशिश की, तो राज्य में बड़ा विद्रोह हो सकता है. தமிழ்நாடு சட்டமன்றத் தேர்தலில் தனித்து ஆட்சியமைக்கும் அதிகாரத்தை மக்கள் எந்தக் கட்சிக்கும் வழங்கவில்லை. இந்த முடிவு தமிழ்நாட்டு வரலாற்றில் முன்னெப்போதும் நிகழாதது. என் சகோதரர் திரு. @mkstalin அவர்கள் ‘மக்கள் தீர்ப்பை மதிக்கிறோம்; பொறுப்பான எதிர்க்கட்சியாகச் செயல்படுவோம்’ என்று… Source link

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चौथी पास किसान की उड़ान! देवघर के टुनटुन ने जरबेरा फूल से...

होमफोटोकृषि देवघर के टुनटुन ने जरबेरा फूल से बदली किस्मत, बेटे को बनाया रेलवे कर्मचारी Last Updated:May 07, 2026, 15:46 IST Farmer Earning Well With Gerbera: समय के साथ खेती-किसानी का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है. पहले जहां किसान केवल पारंपरिक फसलों जैसे धान, गेहूं और सरसों पर निर्भर रहते थे, वहीं अब आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण की मदद से वे नई-नई फसलों की खेती कर रहे हैं. इस बदलाव ने किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है. आज के दौर में कृषि विज्ञान केंद्र जैसे संस्थानों से प्रशिक्षण लेकर किसान तकनीकी खेती अपना रहे हैं और कम जमीन में ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं. यह बदलाव न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुधार रहा है, बल्कि उनके जीवन स्तर को भी बेहतर बना रहा है. झारखंड के देवघर जिले के देवीपुर प्रखंड के गमरडीहा गांव के रहने वाले किसान टुनटुन पंडित इसकी एक मिसाल हैं. टुनटुन पंडित ने बहुत कम पढ़ाई की है, वे केवल चौथी कक्षा तक ही पढ़े हैं. एक समय था जब वे भी पारंपरिक खेती करते थे, लेकिन उस समय उनकी आमदनी इतनी कम थी कि घर चलाना भी मुश्किल हो जाता था. खेती में मेहनत बहुत लगती थी, लेकिन उसके मुकाबले आमदनी बहुत कम होती थी. ऐसे में परिवार की जिम्मेदारियों को निभाना उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण हो गया था. टुनटुन पंडित ने हार नहीं मानी और अपनी स्थिति को बदलने का फैसला किया. उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षण लिया और नई तकनीकों के बारे में जानकारी हासिल की. इसके बाद उन्होंने जरबेरा फूल की खेती शुरू की. यह एक ऐसी खेती है जिसमें मेहनत तो लगती है, लेकिन सही तरीके से करने पर अच्छी आमदनी भी होती है. आज टुनटुन पंडित करीब चार कट्ठा जमीन में 3500 से 4000 जरबेरा के पौधे लगाए हुए हैं. इन पौधों से उन्हें सालाना करीब 4 लाख रुपये तक की आमदनी हो जाती है, जो उनके लिए एक बड़ी सफलता है. Add News18 as Preferred Source on Google देवघर को देवों की नगरी कहा जाता है, जहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं. पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों में फूलों की काफी मांग रहती है, जिसका फायदा टुनटुन पंडित को भी मिल रहा है. उनके उगाए हुए जरबेरा फूल आसानी से बाजार में बिक जाते हैं, जिससे उन्हें लगातार अच्छी आय प्राप्त हो रही है. यही कारण है कि उन्होंने पारंपरिक खेती छोड़कर फूलों की खेती को अपनाया और आज वे एक सफल किसान बन गए हैं. हालांकि, टुनटुन पंडित का जीवन इतना आसान नहीं रहा है. कुछ साल पहले उनकी पत्नी का निधन हो गया था, जिसके बाद उन पर परिवार की पूरी जिम्मेदारी आ गई. उन्होंने न केवल खेती संभाली, बल्कि अपने बच्चों की देखभाल भी खुद ही की. वे खेत में काम करने के साथ-साथ घर पर खाना बनाकर बच्चों को खिलाते थे और उनकी पढ़ाई का भी ध्यान रखते थे. यह समय उनके लिए बहुत कठिन था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और लगातार मेहनत करते रहे. आज उनकी मेहनत रंग लाई है. फूलों की खेती से हुई कमाई के दम पर उन्होंने अपने बड़े बेटे को बाहर पढ़ने भेजा और उसे अच्छी शिक्षा दिलाई. यही नहीं, उनका बेटा आज रेलवे में नौकरी कर रहा है, जो टुनटुन पंडित के संघर्ष और मेहनत का सबसे बड़ा परिणाम है. उनकी कहानी यह बताती है कि अगर इंसान मेहनत और सही दिशा में प्रयास करे, तो वह किसी भी परिस्थिति को बदल सकता है. टुनटुन पंडित जैसे किसान आज के समाज के लिए प्रेरणा हैं. उन्होंने यह साबित कर दिया है कि कम पढ़ाई और सीमित संसाधनों के बावजूद भी सफलता हासिल की जा सकती है. जरूरत है तो सिर्फ सही जानकारी, प्रशिक्षण और मेहनत की. उनकी यह सफलता कहानी न केवल अन्य किसानों को प्रेरित करती है, बल्कि यह भी बताती है कि खेती में बदलाव अपनाकर बेहतर भविष्य बनाया जा सकता है. Source link

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IT Act : राजस्थान में डेटा लीक मामले में सरकार ने वोडाफोन...

Last Updated:September 07, 2021, 11:41 IST Action under IT Act: राजस्थान सरकार में डेटा लीक के एक मामले में आईटी एक्ट-2000 के तहत वोडाफोन के खिलाफ कार्रवाई कर उस पर 27 लाख रुपये से ज्यादा का जुर्माना लगाया है. इस केस में पीड़ित के खाते से 68 लाख रुपये निकाल लिये गये थे. अगर आप निवेश करने को लेकर प्लान (Investment Planning) कर रहे हैं तो आज हम आपको एक ऐसी सरकारी स्कीम के बारें में बताने जा रहे हैं जहां आप बेहद ही कम पैसों का निवेश कर एक मोटी रकम जोड़ सकते हैं. जयपुर. राजस्थान में डेटा लीक (Data Leak Case) के एक मामले में राज्य सरकार ने टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया लिमिटेड (Vodafone Idea Limited) पर 27 लाख रुपये से अधिक का भारी जुर्माना लगाया है. राजस्थान में आईटी एक्ट-2000 के तहत जुर्माना (Fine)  लगाने की पहली कार्रवाई बताई जा रही है. इसके साथ ही कहा गया है कि यदि कंपनी निर्धारित समय में पीड़ित को जुर्माना राशि उपलब्ध नहीं करवाती है तो उसे प्रति माह 10 फीसदी ब्याज देना होगा. इस मामले में पीड़ित के खाते से करीब 68 लाख रुपये निकाल लिये गये थे. दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर के अनुसार कृष्णलाल नैन नामक व्यक्ति की वोडाफोन की सिम खराब हो गई थी. इस पर नैन ने दूसरी डुप्लीकेट सिम के लिये कंपनी के पास आवेदन किया था। लेकिन बाद में यह सिम भानुप्रताप नामक के दूसरे व्यक्ति को बिना किसी वेरिफिकेशन के जारी कर दी गई. बाद में भानुप्रताप ने इसके जरिये नैन के खाते से 68 लाख रुपये निकाल लिये. नैन को जब इस बात का चला तो उसने आईटी एक्ट के तहत कंपनी पर मुआवजा देने के लिये दावा किया. एक महीने के भीतर पीड़ित पक्ष को राशि देने के आदेश दियेबाद में इस मामले की सूचना प्रोद्यौगिकी और संचार विभाग के प्रमुख शासन सचिव एवं न्यायालय न्यायनिर्णयक अधिकारी आलोक गुप्ता ने इसकी सुनवाई की. गुप्ता ने सुनवाई पूरी होने के बाद वोडाफोन पर 27.23 लाख रुपये का जुर्माना लगाया. इसके साथ ही उन्होंने कंपनी को आदेश दिया कि वह एक महीने के भीतर पीड़ित पक्ष को राशि दे अन्यथा उसे प्रति वर्ष 10 फीसदी ब्याज देना होगा. बताया जा रहा है कि आईटी एक्ट के तहत राजस्थान में पहली किसी टेलीकॉम कंपनी पर जुर्माना लगाया गया है. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : September 07, 2021, 11:39 IST Source link

झारखंड

कपाली में ब्राउन शुगर का बड़ा नेटवर्क बेनकाब:एक महिला सहित तीन लोग...

सरायकेला-खरसावां जिले के कपाली ओपी क्षेत्र में पुलिस ने ब्राउन शुगर के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में एक महिला सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से भारी मात्रा में ब्राउन शुगर बरामद की है। एसपी निधि त्रिवेदी ने बताया कि कपाली ओपी पुलिस को बंधुगोड़ा बड़ा गाछ के पास एक किराए के मकान से ब्राउन शुगर के अवैध कारोबार की लगातार सूचनाएं मिल रही थीं। इन सूचनाओं के आधार पर एसपी निधि द्विवेदी के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसने योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी की। 679 पुड़िया ब्राउन शुगर बरामद छापेमारी के दौरान पुलिस ने 679 पुड़िया ब्राउन शुगर बरामद किया। जब्त ब्राउन शुगर की अनुमानित कीमत साढ़े 16 लाख रुपए बताई जा रही है। पुलिस ने मौके से अजगर, सिनी निवासी महाराज अली और आदित्यपुर निवासी शबनम परवीन को गिरफ्तार किया। पुलिस पूछताछ में नशे के इस कारोबार से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि आरोपी लंबे समय से कपाली और आसपास के क्षेत्रों में ब्राउन शुगर की आपूर्ति कर रहे थे। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े बड़े सप्लायरों और अन्य तस्करों की तलाश में जुट गई है। Source link

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