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झारखंड

रामगढ़ में शराब दुकान से लाखों की चोरी:चोर शटर ऊपर उठाकर दुकान...

रामगढ़ जिले के चितरपुर ओवरब्रिज स्थित एक शराब दुकान से अज्ञात चोरों ने बीते रात लगभग 2 लाख 81 हजार 320 रुपए की नकदी चोरी कर ली। दुकान मालिक विनोद कुमार गुप्ता ने इस संबंध में अज्ञात चोरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। विनोद कुमार गुप्ता चितरपुर ओवरब्रिज पर वाइन शॉप चलाते हैं। रविवार रात लगभग 11 बजे दुकान के कर्मी ने इसे बंद किया था। सोमवार सुबह जब कर्मी दुकान खोलने पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि चैनल गेट के दो एंगल और शटर के दोनों तरफ के ताले टूटे हुए थे। चोरों ने शटर ऊपर उठाकर दुकान में प्रवेश किया। अंदर जाने पर कर्मचारियों ने पाया कि दुकान का सामान बिखरा पड़ा था और काउंटर में रखे 2,81,320 रुपए नकद, ड्रॉवर और ऑनलाइन सेल स्कैनर गायब थे। घटना की सूचना मिलने पर रजरप्पा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज खंगाले, जिसमें दो नकाबपोश चोर चोरी करते हुए दिखाई दिए। इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों में रोष है। उनका कहना है कि लगातार हो रही चोरी की वारदातों से रात्रि गश्त में पुलिस की लापरवाही उजागर होती है। वहीं, थाना प्रभारी कृष्ण कुमार ने बताया कि मामले की गहन जांच की जा रही है और जल्द ही घटना का पर्दाफाश कर सीसीटीवी फुटेज के आधार पर चोरों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। Source link

झारखंड

गुमला में दो अलग-अलग घटनाओं में दो लोगों की मौत:युवक ने घर...

गुमला जिले में सोमवार को दो अलग-अलग घटनाओं में दो व्यक्तियों की मृत्यु हो गई। पुलिस ने दोनों शवों का सदर अस्पताल गुमला में पोस्टमॉर्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है। पुलिस इन मामलों की गहनता से छानबीन कर रही है। पहली घटना भरनो थाना क्षेत्र के दुम्बो भगतटोली गांव में सामने आई। यहां 33 वर्षीय सुशील उरांव ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों के अनुसार, सोमवार सुबह तक सुशील का व्यवहार सामान्य था और वह परिवार के सदस्यों से बातचीत भी कर रहा था। आवाज देने पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली कुछ देर बाद सुशील अपने कमरे में चला गया और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। जब काफी समय तक वह बाहर नहीं निकला और आवाज देने पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो परिजनों को शक हुआ। उन्होंने दरवाजा तोड़ा और सुशील उरांव को रस्सी के सहारे लटका हुआ पाया। परिजनों ने बताया कि सुशील पिछले कुछ दिनों से मानसिक रूप से अस्वस्थ चल रहा था। वह अक्सर एकांत में बैठकर बड़बड़ाता रहता था और कभी-कभी असामान्य व्यवहार भी करता था। हालांकि, बीच-बीच में वह सामान्य भी हो जाता था और घर के मवेशियों को चराने जैसे दैनिक कार्य भी करता था। इस घटना की सूचना स्थानीय मुखिया जयराम उरांव को दी गई, जिन्होंने तत्काल भरनो थाना पुलिस को सूचित किया। मृतक अपने पीछे पत्नी और तीन छोटे बच्चों को छोड़ गया है। घटना के बाद परिजन गहरे सदमे में हैं। पुलिस फिलहाल मामले की जांच में जुटी हुई है। वहीं, दूसरी घटना में सदर थाना क्षेत्र के कोटॉम पतगच्छा निवासी 60 वर्ष बृद्ध भिखवा उराव की मौत जहरीले सांप काटने की वजह से हो गई जिसके बाद सूचना पर एसआई अरविंद कुमार ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। Source link

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तमिलनाडु में नया अध्याय: कोलाथुर में गिरा स्टालिन का किला, पेरम्बूर और...

चेन्नई. तमिलनाडु की राजनीति में इस बार नतीजों ने ऐसा मोड़ लिया है, जिसने पूरे सियासी समीकरण को झकझोर दिया है. राज्य के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन का अपना मजबूत गढ़ माने जाने वाले कोलाथुर से हारना सिर्फ एक सीट का नुकसान नहीं, बल्कि सत्ता से जाने का भी सीधा संकेत है. वहीं दूसरी ओर, अभिनेता से राजनेता बने थलापति विजय ने दोनों सीटों (पेरम्बूर और तिरुचिरापल्ली पूर्व) पर जीत दर्ज कर यह साफ कर दिया है कि राज्य की राजनीति में एक नया चेहरा तेजी से उभर रहा है. यह नतीजा सिर्फ जीत-हार का आंकड़ा नहीं, बल्कि तमिलनाडु में बदलते जनमत, नई राजनीतिक आकांक्षाओं और पारंपरिक दलों के सामने खड़ी चुनौती की कहानी भी कहता है. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला. मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र में हार का सामना करना पड़ा, जो डीएमके के लिए एक महत्वपूर्ण झटका है और राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में एक नाटकीय बदलाव का संकेत देता है. यह चौंकाने वाली हार अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) के व्यापक उदय के बीच हुई. टीवीके के वीएस बाबू ने कोलाथुर से जीत हासिल की. उन्होंने 68,419 वोट हासिल किए और स्टालिन को 7,731 वोटों के अंतर से हराया. टीवीके के उम्मीदवार विजय धामू ने भी रॉयपुरम निर्वाचन क्षेत्र से चौंकाने वाली जीत दर्ज की, जो एक ऑटो चालक हैं. उन्होंने एआईएडीएमके के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री डी. जयकुमार और डीएमके के सुबैर खान, जो पूर्व मंत्री रहमान खान के बेटे हैं, को हराया. इस जीत को व्यापक रूप से जमीनी स्तर पर सशक्तिकरण के प्रतीक और बदलाव चाहने वाले मतदाताओं के स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है. जैसे ही टीवीके का प्रभावशाली प्रदर्शन स्पष्ट हुआ, राजनीतिक और मनोरंजन जगत से बधाई संदेशों की बाढ़ आ गई. अभिनेत्री काजल अग्रवाल ने विजय की शानदार और प्रभावशाली जीत की सराहना करते हुए जनसमर्थन की व्यापकता को रेखांकित करने के लिए उनके एक प्रतिष्ठित फिल्म संवाद का उल्लेख किया. उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में इस परिणाम को उनकी दूरदर्शिता, दृढ़ता और जनता के साथ गहरे जुड़ाव का प्रमाण बताया. आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेश ने भी विजय को बधाई देते हुए कहा कि परिणाम तमिलनाडु के मतदाताओं की विकसित होती आकांक्षाओं को दर्शाते हैं. उन्होंने आगे कहा कि टीवीके के उदय से राज्य की राजनीतिक गतिशीलता में एक नया आयाम जुड़ गया है और उन्होंने आशा व्यक्त की कि विजय जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता के साथ जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरेंगे. इस बीच, एआईएडीएमके के महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पाडी के. पलानीस्वामी एक बड़ी व्यक्तिगत जीत के लिए तैयार नजर आ रहे थे. Source link

झारखंड

traditional mutton and chickpea dish recipe still special at weddings in gumla

Last Updated:April 27, 2026, 19:35 IST Gumla Mutton Chana Chakhna Recipe: गुमला के आदिवासी समुदाय में आज भी शादियों की परंपरा अनूठी है. यहां बड़ा मेहमानी के दौरान बनने वाले खास मटन-चना चखना के बिना मेहमानों का स्वागत अधूरा माना जाता है. लकड़ी के चूल्हे पर तैयार होने वाली इस पारंपरिक डिश को आज भी सखुआ के पत्तों पर परोसा जाता है. आधुनिकता के दौर में भी अपनी जड़ों से जुड़ी इस प्राचीन रेसिपी और इसके बनाने के खास तरीके के बारे में विस्तार से जानें. ख़बरें फटाफट गुमला: झारखंड के गुमला जिले में शादियों का सीजन अपने पूरे शबाब पर है. आज के आधुनिक दौर में जहां शादियों के मेन्यू में कॉन्टिनेंटल और चाइनीज डिशेज की भरमार रहती है. वहीं गुमला के आदिवासी बहुल इलाकों में अपनी जड़ों और परंपराओं के प्रति एक अलग ही लगाव देखने को मिलता है. यहां आदिवासी समुदाय की शादियों में आज भी एक ऐसी पारंपरिक डिश बनाई जाती है. जिसके बिना किसी भी मेहमान की खातिरदारी अधूरी मानी जाती है. इस विशेष व्यंजन का नाम है मटन-चना चखना. आइए जानते हैं इसकी रेसिपी. परंपरा और मान-सम्मान का प्रतीकआदिवासी समाज में शादी के दौरान होने वाले मुख्य प्री-वेडिंग या रिसेप्शन कार्यक्रमों को बड़ा मेहमानी के नाम से जाना जाता है. इस आयोजन में मेहमानों का मान-सम्मान सर्वोपरि होता है. स्थानीय आदिवासी महिला भगवती देवी ने बताया कि आज के डिजिटल युग में भी उनके समुदाय ने अपनी सदियों पुरानी परंपराओं को सहेज कर रखा है. उनके अनुसार बड़ा मेहमानी में मटन और चना की यह खास डिश जरूर बनते हैं. इसके बिना खान-पान की रस्म पूरी नहीं मानी जाती. यह हमारे पूर्वजों की विरासत है. इस डिश की सबसे बड़ी विशेषता इसका परोसने का अंदाज है. इसे किसी कांच या स्टील की प्लेट में नहीं, बल्कि प्राकृतिक रूप से शुद्ध सखुआ (साल) के पत्तों या उनसे बने पत्तलों में परोसा जाता है. इसे अक्सर समुदाय के पारंपरिक पेय पदार्थ हड़िया के साथ परोसा जाता है. जिसे लोग बेहद चाव और खुशी के साथ ग्रहण करते हैं. मिट्टी की सोंधी खुशबू और लकड़ी का चूल्हाइस व्यंजन का स्वाद दोगुना हो जाता है क्योंकि इसे आज भी पारंपरिक तरीके से लकड़ी के चूल्हे पर बनाया जाता है. जितनी देवी बताती हैं कि गैस चूल्हे की तुलना में लकड़ी की धीमी आंच पर भुने हुए मटन और चने का स्वाद बिल्कुल अलग और सोंधा होता है. ऐसे तैयार होती है यह सीक्रेट रेसिपीसबसे पहले बड़े बर्तनों में शुद्ध सरसों तेल गर्म किया जाता है. इसमें तेज मिर्च और बारीक कटा हुआ प्याज डालकर उसे सुनहरा होने तक फ्राई किया जाता है. इसके बाद इसमें अदरक-लहसुन का ताजा पेस्ट और पारंपरिक गरम मसाले डाले जाते हैं. मसाले भुन जाने के बाद इसमें मटन के छोटे टुकड़े और पहले से भिगोए हुए चने डाले जाते हैं. इस डिश की मुख्य खासियत इसकी भुनाई है. इसे तब तक भूना जाता है जब तक कि मटन का पानी पूरी तरह सूख न जाए. मसाले मटन-चने के साथ लिपट न जाएं. यह पूरी तरह से सूखा और भुजिया की तरह तैयार किया जाता है. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Gumla,Jharkhand First Published : April 27, 2026, 19:35 IST Source link

व्यापार

IRCTC Tour Package: काशी, गया और पुरी घूमने का मौका, ₹17,655 में...

होमताजा खबरमनी काशी, गया और पुरी घूमने का मौका, ₹17,655 में 8 दिन सैर कराएगा आईआरसीटीसी Last Updated:January 15, 2023, 19:42 IST IRCTC Air Tour Package: काशी, बैद्यनाथ धाम, पुरी, भुवनेश्वर, कोणार्क और गया के लिए पूरी यात्रा 7 रात और 8 दिनों की होगी. इस पैकेज की शुरुआत नई दिल्ली से होगी. आइए जानते हैं इस पैकेज से जुड़ी खास बातें. काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर. (News18Hindi) नई दिल्ली. अगर आप मशहूर तीर्थ स्थलों में घूमने की सोच रहे हैं तो आपके लिए एक शानदार मौका आ रहा है. दरअसल, आजादी का अमृत महोत्सव और ‘देखो अपना देश’ के तहत आईआरसीटीसी (IRCTC) बेहद ही शानदार और किफायती टूर पैकेज की पेशकश कर रहा है. इस पैकेज के जरिए आपको काशी, बैद्यनाथ धाम, पुरी, भुवनेश्वर, कोणार्क और गया घूमने का मौका मिलेगा. इस पैकेज की शुरुआत नई दिल्ली से होगी. आईआरसीटीसी ने इस ट्रेन टूर पैकेज की घोषणा अपने ट्विटर अकाउंट से की है. यह पूरी यात्रा 7 रात और 8 दिनों की होगी. इस पैकेज में आपको खाने-पीने की चिंता करने की जरूरत नहीं है. इसके अलावा होटल में ठहरने की सुविधा दी जाएगी. यह टूर पैकेज 25 जनवरी, 2023 से शुरू हो रहा है. इस स्पेशल ट्रेन में सफर करने वाले यात्री दिल्ली, गाजियाबाद, टूंडला, अलीगढ़, इटावा, कानपुर और लखनऊ स्टेशनों से बोर्डिंग/डिबोर्डिंग कर सकेंगे. Source link

झारखंड

भाजपा की पश्चिम बंगाल, असम, पुडुचेरी में जीत:कोडरमा में केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा...

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी के आवास पर पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में भाजपा की जीत का जश्न मनाया गया। इस अवसर पर मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने टीएमसी के ‘गुंडाराज’ के अंत की घोषणा करते हुए इसे बंगाल में एक नए युग की शुरुआत बताया। सुबह चुनावी रुझान आने के साथ ही मंत्री के आवासीय कार्यालय में कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटने लगी थी। जैसे-जैसे पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में भाजपा को बढ़त मिलती गई, कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ता गया। नतीजों की पुष्टि होते ही सभी ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर की। टीएमसी के ‘गुंडाराज’ से तंग आ चुकी थी जनता: मंत्री मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि बंगाल में टीएमसी के ‘गुंडाराज’ का अंत हो गया है। उन्होंने दावा किया कि बंगाल की जनता ‘बुआ-भतीजे’ की सरकार और टीएमसी के ‘गुंडाराज’ से तंग आ चुकी थी, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने बदलाव के लिए भाजपा को जनादेश दिया। उन्होंने असम और पुडुचेरी में भाजपा की जीत को भी ‘सुखद’ बताया। मंत्री ने कहा कि यह जीत पार्टी के प्रत्येक समर्पित कार्यकर्ता की मेहनत का परिणाम है। Source link

शिक्षा

NEET Exam Center Controversy | Rajasthan Burqa Entry Row 2026

47 मिनट पहले कॉपी लिंक 3 मई को हुई NEET UG परीक्षा के एग्‍जाम सेंटर वीडियोज इस साल भी वायरल हैं। अलग-अलग राज्यों में छात्र छात्राओं की सख्‍ती से चेकिंग के वीडियोज सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे हैं। इनमें से कुछ ऐसे हैं जो चर्चा का विषय बने हैं। बुर्का पहनकर सेंटर पहुंची छात्रा पहला वीडियो राजस्थान के बाड़मेर जिले का है, जिसमें बुर्का पहने एक NEET एस्पिरेंट को बस चेहरा आडेंटिफाई करके एग्जाम सेंटर में एंट्री मिल गई। इस वीडियो पर कईयों का कहना है कि इतनी सख्‍त चेकिंग के बीच किसी को बुर्का पहनकर एग्‍जाम सेंटर में घुसने की इजाजत कैसे दी जा रही है। हालांकि, इस वीडियो के आधार पर यह स्‍पष्‍ट नहीं है कि छात्रा को पेपर देने की अनुमति मिली है। वीडियो में छात्रा चेकिंग कराकर आगे जाते दिखाई दे रही है। छात्रा से उतरवाई तुलसी माला वहीं दूसरा वीडियो गुजरात के सूरत का है, जहां एक छात्रा को कंठी (तुलसी माला) के साथ एंट्री नहीं मिलने पर काफी बवाल हुआ। वीडियो में छात्रा के पिता ने इस सख्त चेकिंग को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने ये तक कह दिया कि ‘हम सूरत में हैं, पाकिस्तान में नहीं।’ छात्रा को वापस कंठी पहनाता पिता। एग्जाम में बुर्का अलाउड नहीं, फिर इसके साथ एंट्री कैसे? इसके बाद सोशल मीडिया पर ऑनलाइन डिबेट-सी छिड़ गई कि एक ओर इतनी सख्त चेकिंग जहां हिंदू धर्म के प्रतीकों तक को नहीं छोड़ा जा रहा, वहीं दूसरी ओर मुस्लिम कैंडिडेट को बुर्का के साथ एग्जाम सेंटर में एंट्री मिली। वो भी तब जबकि NEET एग्जाम में हिजाब तो अलाउड है पर बुर्का नहीं। रबड़बैंड-कलावा कटवाया, इन सबमें पढ़ा हुआ भूली इसी बीच NEET 2024 क्वालिफाई करने वाली एक डॉक्टर की भी वीडियो वायरल हुई, जिसमें उन्होंने 2024 में अपने एग्जाम का अनुभव साझा किया है। उन्होंने बताया कि एग्जाम सेंटर में एंट्री से पहले कलावा कटवाया था, रबड़बैंड तक हटाने को कह दिया था। वो आगे कहती हैं, ‘इन सबके चक्कर में इतना क्यॉटिक माहौल हो गया था कि जितना मैंने पढ़ा था, उससे ज्यादा तो मैं भूल रही थी। उस वक्त मुझे बुखार तक आ गया।’ सीकर में पजामे का नाड़ा-चेन काटकर हटाया, फिर एंट्री तीसरा वीडियो भी राजस्थान के सीकर का है, जिसमें कैंडिडेट्स के पजामे का नाड़ा और यहां तक कि चेन भी काटकर निकाला गया। इसके बाद ही एंट्री मिली। चौथा वीडियो तमिलनाडु के नामक्कल जिले का है, जहां एक छात्र को एडमिट कार्ड पर लगी सेम फोटो साथ नहीं लाने पर सेंटर में एंट्री नहीं मिली। 20.05 लाख कैंडिडेट्स एग्जाम देने पहुंचे ऐसे कुछ बवालों के बावजूद 3 मई को NEET एग्जाम सफल हुआ। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के मुताबिक, NEET UG 2026 में करीब 20.05 लाख कैंडिडेट्स एग्जाम देने पहुंचे। इस एग्जाम के लिए 22.79 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन किया था। NTA के ऑफिशियल नोटिस के मुताबिक, 3 मई को देश के 551 शहरों और देश के बाहर के 14 शहरों के एग्जामिनेशन सेंटर्स पर एग्जाम हुए। एग्जाम दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक ऑफलाइन मोड यानी पेन-पेपर मोड में आयोजित हुई थी। NEET UG 2026 का पेपर बैलेंस्ड, लेकिन लेंदी रहा दिल्ली में विशनरी मास्टर्ज के डायरेक्टर हरप्रीत सिंह के मुताबिक, NEET UG 2026 परीक्षा का स्तर कुल मिलाकर मॉडरेट रहा। हालांकि, अभ्यर्थियों के मुताबिक पेपर बैलेंस्ड, लेकिन लेंदी था। फिजिक्स सेक्शन रैंक डिसाइडिंग फैक्टर साबित हो सकता है फिजिक्स वाला सेक्शन काफी चैलेंजिग रहा, जिसमें करेंट करेंट इलेक्ट्रिसिटी, मैग्नेटिक इफेक्ट्स, जैसे विषयों से कॉन्सेप्चुअल और कैलकुलेटिव सवाल ज्यादा पूछे गए, जिससे ये सेक्शन रैंक डिसाइडिंग फैक्टर साबित हो सकता है। केमिस्ट्री में ज्यादातर सवाल NCERT बेस्ड केमिस्ट्री का लेवल आसान से मॉडरेट रहा, जहां फिजिकल केमिस्ट्री आसान रही, जबकि ऑर्गेनिक केमिस्ट्री के कुछ सवाल थोड़े पेचीदा थे और ज्यादातर सवाल NCERT बेस्ड थे। बायोलॉजी में एस्पिरेंट्स की कॉन्सेप्चुअल अंडरस्टैंडिंग को परखा बायोलॉजी सबसे ज्यादा स्कोरिंग सेक्शन रहा, जिसमें Human Physiology, Genetics, Biotechnology और Plant Physiology जैसे टॉपिक्स से सीधे सवाल पूछे गए। इस साल बायोलॉजी सेक्शन में स्टेटमेंट-बेस्ड और मैच-द-कोलम जैसे ज्यादा सवाल रहे, जिनमें एस्पिरेंट्स की कॉन्सेप्चुअल अंडरस्टैंडिंग, NCERT की लाइन-बाई-लाइन समझ और आपस में मिलते-जुलते कॉन्सेप्ट्स में अंतर करने की क्षमता को परखा गया, न कि सिर्फ रटने की क्षमता को। कुल मिलाकर पेपर में कॉन्सेप्ट की समझ और NCERT पर पकड़ को प्रायॉरिटी दी गई और एस्पिरेंट्स का मानना है कि सवाल आसान थे, लेकिन अच्छा स्कोर करने के लिए टाइम मैनेजमेंट बेहद जरूरी रहा। स्टोरी – सोनाली राय —————————– ये खबर भी पढ़ें… NEET-एस्पिरेंट अंकिता का एडमिट कार्ड मलबे में दबा, वीडियो वायरल:एग्जाम से एक दिन पहले घर टूटा और डॉक्टर बनने का सपना भी आज 3 मई को देशभर में NEET का एग्जाम हुआ। इससे ठीक एक दिन पहले, जहां एक ओर सारे एस्पिरेंट्स इसकी आखिरी तैयारी में लगे थे, वहीं दूसरी ओर भोपाल की NEET एस्पिरेंट अंकिता दांगी मलबे में से अपना एडमिट कार्ड खोज रही थी। वही मलबा जो शनिवार सुबह तक उसका घर था। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं… Source link

झारखंड

RPF Operation Narcos Bokaro | Ganja Seized Rs 5.58 Lakh

बोकारो स्टील सिटी रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने ऑपरेशन ‘नारकोस’ के तहत बड़ी कार्रवाई की। इस दौरान 11.170 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 5.58 लाख रुपए है। यह कार्रवाई 4 मई 2026 को आरपीएफ पोस्ट बीकेएससी और सीपीड . प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह बरामदगी ट्रेन संख्या 18403 (भुवनेश्वर-धनबाद एक्सप्रेस) के प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर पहुंचने के बाद हुई। कोच एस-8 और जनरल डिब्बे के बीच एक लावारिस नीले रंग का ट्रॉली बैग संदिग्ध अवस्था में मिला। आरपीएफ टीम ने आसपास के यात्रियों से पूछताछ की, लेकिन किसी ने भी बैग पर अपना दावा नहीं किया। ब्राउन टेप में लिपटे चार पैकेट मिले इसके बाद आरपीएफ टीम बैग को प्लेटफॉर्म पर ले आई और वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया। बैग की तलाशी लेने पर उसमें ब्राउन टेप में लिपटे चार पैकेट मिले। एक पैकेट को खोलकर जांच करने पर उसमें गांजा होने की पुष्टि हुई। बरामद गांजे को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए जीआरपीएस बोकारो को सौंप दिया गया है। वहां एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(बी)(ii)बी के तहत अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है और जांच जारी है। Source link

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West Bengal Election: किस फेज में किस पार्टी ने बेहतर परफॉर्म किया

TMC-BJP Performance in Both Phase: पश्चिम बंगाल में इस बार ‘भगवा’ लहराया है. टीएमसी की बुरी हार हुई है. दोफेज में हुए विधानसभा चुनाव में कुल 92.47% मतदान हुआ, जो राज्य के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा था. चुनाव आयोग की वेबसाइट पर ताजा रुझानों में भाजपा 294 सीटों में से 199 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि टीएमसी 90 सीटों से भी नीचे आ गई है. आइए देखते हैं कि दोनों चरणों में पार्टियों का प्रदर्शन कैसा रहा. पहला चरण (23 अप्रैल 2026): उत्तर बंगाल और भाजपा का ‘विजय रथ’ पहले चरण में 16 जिलों की 152 सीटों पर मतदान हुआ था. यहां रिकॉर्ड 93.19% वोटिंग दर्ज की गई. भाजपा का दबदबा: पहले चरण में भाजपा ने अपनी पकड़ बहुत मजबूत रखी. विशेष रूप से उत्तर बंगाल के जिलों में, जहाँ भाजपा ने पहले भी बेहतर प्रदर्शन किया था, इस बार लगभग ‘क्लीन स्वीप’ जैसी स्थिति नजर आ रही है. चाय बागान और औद्योगिक क्षेत्रों के मतदाताओं ने भाजपा के पक्ष में जमकर मतदान किया. टीएमसी की स्थिति: टीएमसी को यहां स्थानीय सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ा. विकास के मुद्दों और भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते ममता बनर्जी का जादू यहां बेअसर रहा. दूसरा चरण (29 अप्रैल 2026): दक्षिण बंगाल में सेंधमारी दूसरे चरण में 8 जिलों की 142 सीटों पर मतदान हुआ. इसमें कोलकाता और उसके आसपास के इलाके शामिल थे, जिन्हें पारंपरिक रूप से टीएमसी का गढ़ माना जाता रहा है. यहाँ 91.66% मतदान हुआ. कड़ा मुकाबला: दूसरे चरण में उम्मीद थी कि टीएमसी अपनी खोई हुई जमीन वापस पाएगी, लेकिन रुझान बताते हैं कि भाजपा ने यहाँ भी टीएमसी को कड़ी टक्कर दी है. दक्षिण बंगाल के ग्रामीण इलाकों में भाजपा ने कल्याणकारी योजनाओं के दम पर पैठ बनाई. हाई-प्रोफाइल सीटें: भवानीपुर और कोलकाता की शहरी सीटों पर भी भाजपा के उम्मीदवारों ने टीएमसी के दिग्गजों की नींद उड़ा दी है. हालांकि, कोलकाता के कुछ शहरी क्षेत्रों में टीएमसी ने अपनी बढ़त बनाए रखी है, लेकिन वह सरकार बचाने के लिए पर्याप्त नहीं दिख रही है. फेज-वाइज तुलना: किसने मारी बाजी? यदि दोनों चरणों की तुलना करें, तो भाजपा ने पहले चरण (Phase 1) में टीएमसी के मुकाबले कहीं अधिक ‘बेहतर’ परफॉर्म किया है. पहले चरण की बढ़त ने ही भाजपा को वह मनोवैज्ञानिक लाभ दिया, जिससे दूसरे चरण में टीएमसी के गढ़ में घुसना उनके लिए आसान हो गया. भाजपा: पहले चरण में जबरदस्त बढ़त, दूसरे चरण में टीएमसी के गढ़ में ऐतिहासिक सेंधमारी. टीएमसी: पहले चरण में भारी नुकसान, दूसरे चरण में कुछ शहरी सीटों पर अपनी साख बचाने की कोशिश. कुल मिलाकर, 2026 का चुनाव बंगाल में ‘परिवर्तन’ का चुनाव साबित हुआ है. भाजपा ने दोनों ही चरणों में योजनाबद्ध तरीके से काम किया और मतदाताओं के एक बड़े वर्ग, विशेषकर युवाओं और महिलाओं को अपने पाले में करने में सफल रही. रिकॉर्ड तोड़ मतदान प्रतिशत ने सत्ता पक्ष के खिलाफ स्पष्ट जनादेश दिया है. पहले और दूसरे चरण में कुल कितनी सीटों पर मतदान हुआ? पहले चरण (23 अप्रैल) में 152 सीटों पर और दूसरे चरण (29 अप्रैल) में 142 सीटों पर मतदान संपन्न हुआ. किस चरण में सबसे अधिक मतदान दर्ज किया गया? पहले चरण में रिकॉर्ड तोड़ 93.19% मतदान दर्ज किया गया, जबकि दूसरे चरण में 91.66% वोटिंग हुई. रुझानों के अनुसार भाजपा और टीएमसी कितनी सीटों पर आगे चल रही हैं? भाजपा 176-192 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, वहीं टीएमसी 92-94 सीटों के आसपास सिमटती नजर आ रही है. उत्तर बंगाल और दक्षिण बंगाल के चुनावी मिजाज में क्या अंतर देखा गया? उत्तर बंगाल (Phase 1) में भाजपा का प्रदर्शन एकतरफा रहा, जबकि दक्षिण बंगाल (Phase 2) में कड़ा मुकाबला देखने को मिला, हालांकि यहाँ भी भाजपा ने टीएमसी के गढ़ में बड़ी सेंध लगाई. Source link

झारखंड

Shahi Paneer: घर पर बनाएं रेस्टोरेंट जैसा शाही पनीर, जानें क्रीमी ग्रेवी...

होमफोटोलाइफ़फूड घर पर बनाएं रेस्टोरेंट जैसा शाही पनीर, जानें क्रीमी ग्रेवी का सीक्रेट Last Updated:April 27, 2026, 20:47 IST Shahi Paneer at Home: शाही पनीर का नाम सुनते ही हर किसी के मुंह में पानी आ जाता है. यह एक ऐसी डिश है जिसे खास मौकों, त्योहारों या मेहमानों के स्वागत के लिए बनाया जाता है. हालांकि, कई बार घर पर शाही पनीर बनाते समय स्वाद वैसा नहीं आ पाता जैसा रेस्टोरेंट में मिलता है. इसकी सबसे बड़ी वजह टमाटर की खटास होती है, जो पूरी ग्रेवी का स्वाद बिगाड़ देती है. कोडरमा की गृहिणी राधिका प्रजापति ने बताया कि अगर कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखा जाए तो घर पर भी बेहद स्वादिष्ट और क्रीमी शाही पनीर तैयार किया जा सकता है. उन्होंने बताया कि टमाटर की खटास को संतुलित करने के लिए किचन में मौजूद साधारण चीजें जैसे चीनी या शहद का इस्तेमाल बेहद कारगर साबित होता है. इससे न सिर्फ खट्टापन कम होता है बल्कि डिश का स्वाद भी शाही बन जाता है. उन्होंने बताया कि सबसे पहले टमाटर, प्याज और हरी मिर्च को काट लें और काजू के साथ धीमी आंच पर हल्का भून लें. इसके बाद इन्हें ठंडा करके मिक्सर में पीसकर एक स्मूद पेस्ट तैयार करें. यह पेस्ट ही शाही पनीर की ग्रेवी का बेस होता है. अब एक कढ़ाई में तेल गर्म करें और उसमें जीरा डालें. इसके बाद कटा हुआ प्याज, शिमला मिर्च, थोड़ी सी मटर और कसूरी मेथी डालकर अच्छे से भूनें. जब सब्जियां हल्की सुनहरी हो जाएं, तब इसमें अदरक-लहसुन का पेस्ट डालकर एक मिनट तक पकाएं. इससे डिश में खुशबू और स्वाद दोनों बढ़ते हैं. उन्होंने बताया कि इसके बाद तैयार किया गया टमाटर-काजू का पेस्ट कढ़ाई में डाल दें और इसे अच्छे से मिलाएं. Add News18 as Preferred Source on Google अब इसमें स्वादानुसार नमक, हल्दी और पनीर मसाला डालकर धीमी आंच पर पकाएं. जब मसाला तेल छोड़ने लगे, तब इसमें दो चम्मच दही डालकर अच्छी तरह से मिक्स करें. उन्होंने बताया कि जब ग्रेवी पूरी तरह पक जाए, तब इसमें कटे हुए पनीर के टुकड़े डालें. अब सबसे अहम स्टेप आता है टमाटर की खटास को संतुलित करना. इसके लिए चुटकी भर चीनी इसमें मिलाने से ग्रेवी का स्वाद संतुलित हो जाता है और हल्की मिठास शाही पनीर को और भी लाजवाब बना देती है. उन्होंने कहा कि अंत में इस डिश को धीमी आंच पर 5 से 10 मिनट तक पकाएं ताकि सभी फ्लेवर अच्छे से मिल जाएं. तैयार शाही पनीर को हरे धनिया से सजाकर गरमागरम परोसें. First Published : April 27, 2026, 20:47 IST Source link

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