भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

Author name: scsmdos@gmail.com

झारखंड

200-500 के बजट में शानदार एडी ज्वेलरी, दुल्हन की सहेली-भाभी करेंगी लकलक,...

Last Updated:April 29, 2026, 07:43 IST Palamu Markets AD Jewelry In Trend: शादी सीजन में लहंगे, कपड़ों के अलावा ज्वेलरी की भी खूब डिमांड रहती है. इसी क्रम में पलामू में आजकल एडी यानी अमेरिकन डायमंड की ज्यूलरी खूब पसंद की जा रही है. यह हर बजट में फिट बैठती है और मैचिंग ऑप्शन भी आसानी से मिल जाते हैं. ख़बरें फटाफट पलामू. शादी-विवाह का सीजन चल रहा है. ऐसे में पलामू की बाजारों में रौनक लौट आई है. यहां कपड़ों, श्रृंगार सामग्री और सजावटी सामानों के साथ ज्वेलरी दुकानों पर भी ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ रही है. किसी भी शादी समारोह में महिलाओं के श्रृंगार में ज्वेलरी की सबसे अहम भूमिका होती है. दुल्हन से लेकर घर की महिलाओं तक हर कोई अपने पहनावे के अनुसार आकर्षक गहनों की तलाश में बाजार पहुंच रहा है. यही वजह है कि इन दिनों पलामू के मेदिनीनगर सहित विभिन्न बाजारों में एडी ज्वेलरी की डिमांड बढ़ रही है. बजट फ्रेंडली और स्टाइलिशबता दें कि शादी के मौसम में अब महिलाएं महंगे सोने-चांदी के गहनों के साथ-साथ स्टाइलिश और बजट फ्रेंडली विकल्प भी पसंद कर रही हैं. इसी वजह से अमेरिकन डायमंड यानी एडी ज्वेलरी की मांग तेजी से बढ़ी है. कम कीमत में शानदार लुक और आकर्षक चमक मिलने के कारण यह हर वर्ग की महिलाओं की पसंद बन चुकी है. दुकानदारों का कहना है कि शादी-विवाह के सीजन में एडी सेट की बिक्री सबसे ज्यादा हो रही है. इसे आम तौर पर अमेरिकन डायमंड (AD) या CZ ज्वेलरी कहा जाता है, जो असली हीरे नहीं होते, बल्कि प्रयोगशाला में बने जिरकोनियम डाइऑक्साइड के क्रिस्टल से बने होते हैं. लेकिन ये असली हीरे की तरह ही रंगहीन, चमकदार और दोषरहित दिखते हैं. मिलता है रॉयल लुकपलामू जिले के मेदिनीनगर शहर के बाजार स्थित रूप रंग शॉप में अमेरिकन डायमंड ज्वेलरी देखने को मिल रही है. दुकानदार राजीव कुमार ने लोकल18 को बताया कि इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी चमक और डिजाइन है. यह देखने में बिल्कुल डायमंड सेट जैसी नजर आती है, जिससे पहनने वाली महिलाओं को खास और रॉयल लुक मिलता है. ब्राइडल सेट में इसकी मांग सबसे अधिक है. दुल्हनें अपने लहंगे और साड़ी के अनुसार ग्रीन, रेड, सिल्वर, पिंक, रूबी रेड, पिस्ता और बेबी पिंक रंगों के सेट पसंद कर रही हैं. हर नए सीजन में दुकानदार नए डिजाइन और नया कलेक्शन ला रहे हैं. हर बजट में होती फिटउन्होंने कहा कि एडी ज्वेलरी 200 रुपये से शुरू होकर 1000 से 1200 रुपये तक उपलब्ध है. नेकलेस सेट, हार, झुमका, ईयररिंग्स और मैचिंग ब्राइडल सेट की अच्छी रेंज दुकानों में सजी हुई है. इसके अलावा कुंदन सेट भी अलग-अलग डिजाइन और रंगों में उपलब्ध हैं, जिन्हें महिलाएं खूब पसंद कर रही हैं. कम बजट में शानदार ज्वेलरी मिलने से मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए यह बेहतर विकल्प साबित हो रहा है. टिकाऊ होती है यह ज्वेलरीआगे कहा कि एडी ज्वेलरी टिकाऊ भी होती है. यदि इसे नमी, परफ्यूम और मॉइश्चराइजर से बचाकर रखा जाए तो इसकी चमक लंबे समय तक बनी रहती है. यही कारण है कि आजकल की महिलाओं के बीच यह पसंदीदा फैशन ट्रेंड बन चुका है. शादी-विवाह के इस सीजन में पलामू के बाजार में अमेरिकन डायमंड ज्वेलरी की भारी डिमांड देखी जा रही है और आने वाले दिनों में इसकी बिक्री और बढ़ने की उम्मीद है. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Palamu,Jharkhand First Published : April 29, 2026, 07:43 IST Source link

झारखंड

वज्रपात और आंधी का खतरा! रांची जमशेदपुर…. झारखंड के कई जिलों में...

Last Updated:April 29, 2026, 08:05 IST Jharkhand Aaj Ka Mausam: झारखंड में भीषण गर्मी के बीच कई जिलों में बादल छाए रहने की संभावना है. इसके साथ ही कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश और आंधी की संभावना बनी हुई है. IMD ने 28 से 30 अप्रैल तक ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. ख़बरें फटाफट झारखंड के कई जिलों में आज बारिश की संभावना है ( एआई फोटो ) रांची: झारखंड में इन दिनों मौसम दो रंग दिखा रहा है. एक तरफ जहां भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है. वहीं, दूसरी ओर बादल के गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश और आंधी की संभावना बनी हुई है. IMD के अनुसार आज झारखंड के कई जिलों में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ बारिश या आंधी की संभावना भी है. वहीं, राजधानी रांची, बोकारो, हजारीबाग और गिरिडीह में दिनभर आंशिक बादल छाए रहने की उम्मीद है. इन क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है, जो सामान्य से थोड़ा कम है. बता दें कि आज झारखंड की राजधानी रांची में अधिकतम तापमान 37-38 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की उम्मीद है. जबकि न्यूनतम तापमान 22-24 डिग्री के करीब रहेगा. आज जमशेदपुर, बोकारो, धनबाद और डाल्टनगंज जैसे इलाकों में दिन का पारा 39-42 डिग्री तक पहुंच सकता है. पलामू, चाईबासा और गढ़वा संभाग में सबसे ज्यादा गर्मी पड़ रही है. इन जिलों का तापमान 43 डिग्री के करीब रह सकता है. वहीं, जमशेदपुर, डाल्टनगंज और चाईबासा जैसे दक्षिणी जिलों में गर्मी का असर अभी भी बरकरार है. शहरों का तापमान और AQI   शहर तापमान अधिकतम/न्यूनतम AQI रांची 39/26 140 जमशेदपुर 43/29 150 हजारीबाग 41/26 160 धनबाद 42/28 150 IMD ने आज 28, 29 और 30 अप्रैल के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. आज राज्य के कई जिलों में गरज-चमक, वज्रपात, तेज हवाएं चल सकती हैं. जहां ये हवाएं 30-50 किमी प्रति घंटा से चलने की संभावना है. इसके अलावा कहीं-कहीं ओलावृष्टि की भी आशंका है. साथ ही उत्तर-पूर्वी और मध्य झारखंड रांची, बोकारो, हजारीबाग, रामगढ़, कोडरमा, गुमला आदि में हल्की से मध्यम बारिश के साथ बौछारें पड़ सकती हैं. दक्षिणी हिस्सों में आड गर्मी का असर ज्यादा रहने की संभावना है. जबकि कुछ जगहों पर बादल राहत दे सकते हैं. झारखंड में आने वाले दो-तीन दिनों में कई जिलों में प्री-मानसून गतिविधियां बढ़ने की संभावना है, जिससे तापमान में और गिरावट आ सकती है. फिलहाल लोगों को सतर्क रहने और मौसम विभाग के अपडेट पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है. बता दें कि गर्म हवाओं का असर अभी भी बना हुआ है. लोगों को दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक बाहर निकलने से बचना चाहिए. साथ ही पर्याप्त पानी पीना, हल्के रंग के ढीले कपड़े पहनना और छाता या टोपी का इस्तेमाल करना जरूरी है. About the Author Brijendra Pratap Singh बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ranchi,Jharkhand First Published : April 29, 2026, 06:09 IST Source link

झारखंड

कुआं रिंग बनाते हैं रांची के मिस्त्री रहमान, हर तीसरे दिन 15000...

Last Updated:April 29, 2026, 08:10 IST Ranchi Rehman Kuaan Ring Maker: रांची के पिठोरिया के रहमान गर्मी में कुआं रिंग बनाने का काम करते हैं. यूं तो ये काम सीजनल है, जिसकी मांग इस मौसम में ज्यादा रहती है पर वे सीजनभर में ही मोटी कमाई कर लते हैं. इससे पूरे साल उनका खर्च इत्मीनान से चलता है. ख़बरें फटाफट रांची. रांची के पिठोरिया के रहमान खासतौर पर कुआं रिंग बनाने का काम करते हैं. इन्हें वे अपने हाथों से ही बनाते हैं. उन्होंने बताया कि ‘गर्मी के दिनों में इसका ऑर्डर बहुत आता है. खासतौर पर ग्रामीण एरिया में हर दूसरे-तीसरे दिन कुआं रिंग की डिमांड होती है और मैं खुद जाकर सेट करता हूं. जिसका रेट लगभग 15,000 तक होता है, तो गर्मी के दो महीने में ही अच्छा-खासा लाख रुपये के ऊपर कमा लेता हूं. रहमान बताते हैं, गर्मी में खासतौर पर यह बनाना बेहद ही आसान होता है. क्योंकि कड़ी धूप होती है और कड़ी धूप में रिंग आसानी से सूख जाती है. दूसरी बात कड़ी धूप के चलते कुआं की भी जरूरत अधिक पड़ती है. ऐसे में खास जितने भी ग्रामीण एरिया हैं, वहां से हर दूसरे व तीसरे दिन ऑर्डर आते हैं. हालांकि यह पूरी तरह सीजनल काम है. एक रिंग की कीमत होती है ₹800एक रिंग की कीमत ₹800 होती है. तो अगर एक कुआं बनाना होता है तो इस तरीके के 10 से 15 रिंग की जरूरत पड़ती है और क्योंकि वहीं जाकर फिट करता हूं, तो 15 से 16,000 तक का रेट आराम से चला जाता है. अगर थोड़ा और डीप जाना हो तो रेट 18,000 तक भी जाती है और यह सिर्फ कुआं ही नहीं बल्कि घर में जो जल संचय होता है, उसमें भी काम आता है. जल संचय में भी काम आता हैकई लोग ऐसे होते हैं जो अपने घरों के आगे इस तरह के रिंग जमीन के अंदर डलवाते हैं और पूरा का पूरा एक ब्लॉक बनवाते हैं. ताकि बारिश का पानी या फिर और पानी जो छत से टपक रहा है, वह सब सुरक्षित इसमें स्टोर होता रहे. तो ऐसे में खासतौर पर बरसात के मौसम में भी इस तरह के ऑर्डर आते हैं. अभी फिलहाल हर दिन 20-25 रिंग अपने हाथों से ही बनाता हूं. बच्चे पढ़ते हैं अच्छे स्कूलों मेंमेरे बच्चे अच्छे इंटरनेशनल स्कूलों में पढ़ते हैं. दो बच्चे हैं, दोनों पढ़ाई में काफी अव्वल हैं. ऐसे में यह जो दो-तीन महीनों में बंपर कमाई होती है, उनकी शिक्षा के लिए मैं सेव करके रखता हूं. क्योंकि सालभर फिर इतनी कमाई नहीं हो पाती. ऐसे में यह जो जैकपॉट वाला समय होता है, इसका इस्तेमाल करता हूं. ताकि आगे उनकी पढ़ाई न रुके और पूरे घर की जिम्मेदारी उठाता हूं. कोई काम छोटा-बड़ा नहींमुस्कुराते हुए आगे बताते हैं कि काम कोई छोटा-बड़ा नहीं होता. मिस्त्री हैं तो क्या हुआ, अगर आप शिद्दत के साथ काम करें और मेहनत पूरी लगन के साथ करें तो आप इसी में बहुत बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं. लेकिन कई बार लोगों में झिझक होती है कि यह छोटा काम मैं कैसे करूं. अगर यह चीज हटा दी जाए तो काम करने के कई विकल्प हैं और कमाने के भी.’ About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ranchi,Jharkhand First Published : April 29, 2026, 08:10 IST Source link

व्यापार

बीड़ा से बिजनेस तक, छत्तीसगढ़ के छुईखदान की महिलाओं ने पान को...

Last Updated:January 18, 2026, 22:24 IST छत्तीसगढ़ के छुईखदान का प्रसिद्ध पान एक बार फिर चर्चा में है. वर्ष 2000 से संचालित मां बम्लेश्वरी महिला स्व-सहायता समूह की 12 महिलाएं पान से वैल्यू एडेड उत्पाद तैयार कर रही हैं. पान फ्रेश, बीड़ा, लड्डू, चाय और पाउडर की सप्लाई रायपुर सहित बड़े शहरों तक हो रही है. अब तक 70 हजार का शुद्ध मुनाफा हो चुका है. CG News : छत्तीसगढ़ का छुईखदान क्षेत्र कभी पूरे प्रदेश में अपने खास और सुगंधित पान के लिए पहचाना जाता था. यहां का पान न सिर्फ स्थानीय बाजारों में, बल्कि आसपास के जिलों में भी काफी प्रसिद्ध था. हालांकि समय के साथ बाजार की उपेक्षा, प्रोत्साहन की कमी और बदलती उपभोक्ता आदतों के कारण छुईखदान के पान की पहचान धीरे-धीरे फीकी पड़ती चली गई. लेकिन अब एक बार फिर छुईखदान का पान सुर्खियों में है और इसके पीछे मेहनत व संकल्प की एक प्रेरक कहानी छिपी है, जिसे यहां की महिलाओं ने गढ़ा है. संगठित होकर पान को आजीविका का मजबूत साधन बना रही वर्ष 2000 से संचालित छुईखदान की मां बम्लेश्वरी महिला स्व-सहायता समूह ने पान को दोबारा पहचान दिलाने की पहल की है. इस समूह से वर्तमान में 12 महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जो संगठित होकर पान को आजीविका का मजबूत साधन बना रही हैं. समूह की सचिव आशा मोहबिया बताती हैं कि एक समय छुईखदान का पान बेहद प्रसिद्ध था, लेकिन बाजार और सरकारी प्रोत्साहन के अभाव में इसका उत्पादन और बिक्री दोनों प्रभावित हो गए थे. इससे पान की खेती और उससे जुड़े काम धीरे-धीरे सिमटते चले गए. पहचान और मांग दोनों बढ़ रही इस स्थिति को बदलने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार और कृषि महाविद्यालय के सहयोग से महिला समूह ने पान आधारित वैल्यू एडेड उत्पादों पर काम शुरू किया. महिलाओं ने पारंपरिक पान को नए स्वरूप में बाजार तक पहुंचाने की रणनीति अपनाई. अब महिलाएं घर से ही पान फ्रेश, बीड़ा पान, पान का लड्डू, पान की चाय और पान का पाउडर जैसे कई नवाचार उत्पाद तैयार कर रही हैं. इन उत्पादों को आधुनिक पैकेजिंग के साथ बाजार में उतारा जा रहा है, जिससे इनकी पहचान और मांग दोनों बढ़ रही हैं. पान से बने ये उत्पाद स्वाद में अलग होने के साथ-साथ स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभकारी माने जाते हैं। पान पाचन क्रिया को बेहतर करने, मुंह की दुर्गंध दूर करने और शरीर को ऊर्जा देने में सहायक माना जाता है. यही वजह है कि पान से बने इन उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है. महिला समूह द्वारा तैयार उत्पादों की सप्लाई अब केवल रायपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि बॉम्बे और हैदराबाद जैसे बड़े महानगरों तक भी पहुंच चुकी है. वहां से विशेष ऑर्डर के माध्यम से इन उत्पादों की मांग आई, जिसे समूह की महिलाओं ने समय पर पूरा किया. बीते छह महीनों से महिलाएं नियमित रूप से पान से बने उत्पादों का निर्माण कर रही हैं और इससे उन्हें अच्छा आर्थिक लाभ मिलने लगा है. नवंबर माह में राज्योत्सव के दौरान लगाए गए स्टॉल के माध्यम से समूह ने 32 हजार रुपये की बिक्री की. वहीं अब तक लगभग 70 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा हो चुका है. आने वाले समय में उत्पादन और बाजार विस्तार के साथ इस मुनाफे के और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है. About the Author Amit Singh 7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Raipur,Raipur,Chhattisgarh First Published : January 18, 2026, 22:24 IST Source link

ताज़ा खबर

रसीला, मीठा और खुशबूदार होता है ‘चौसा’ आम, जानिए कैसे पड़ा इसका...

Last Updated:April 29, 2026, 07:59 IST आम का सीजन शुरू हो गया है. ऐसे में मार्केट में अब अलग-अलग वैरायटी के आम देखने को मिल जाएंगे. तो वही अलग-अलग नाम के आम भी मार्केट में देखने को मिल जाएंगे. उन्ही में से एक चौसा आम है. जो देखने और खाने दोनों में बहुत लाजवाब होता है. इसकी सुगंध बहुत अच्छी होती है. इस आम में भरपूर मात्रा में गुदा पाया जाता है आम का सीजन शुरू हो गया है. ऐसे में बाजार में अब अलग-अलग वैरायटी के आम देखने को मिल रहे हैं. वहीं, अलग-अलग नामों के आम भी उपलब्ध हैं. उन्हीं में से एक है चौसा आम, जो देखने और खाने दोनों में बहुत लाजवाब होता है. इसकी सुगंध बेहद अच्छी होती है और इसमें भरपूर मात्रा में गूदा पाया जाता है. आम के शौकीनों की यह पहली पसंद माना जाता है. बहुत खास होता है यह आम मुरादाबाद के कृषि वैज्ञानिक डॉ. दीपक मेहंदी रत्ता ने बताया कि चौसा आम का नाम बिहार के चौसा नामक स्थान से जुड़ा हुआ है. यह आम बिहार में अधिक पाया जाता है. चौसा नाम के स्थान पर ही इसे पहली बार उगाया गया था, इसलिए इसका नाम चौसा आम पड़ा. इसका स्वाद बहुत मीठा होता है और इसकी फसल अन्य आमों के मुकाबले देर से आती है. इसी कारण बाजार में इसकी मांग अधिक रहती है. किसान यदि इसकी खेती करते हैं, तो उन्हें अच्छी पैदावार मिलती है और देर से आने के कारण यह आम महंगे दामों पर बिकता है. चौसा नाम की उत्पत्तिमुख्य रूप से बिहार के चौसा नामक स्थान के कारण ही इसे चौसा आम कहा जाता है. शुरुआत में यह आम केवल बिहार में पाया जाता था, लेकिन अब इसकी खेती उत्तर प्रदेश और बिहार दोनों राज्यों में होने लगी है. उत्तर प्रदेश में भी इसकी अच्छी-खासी पैदावार होती है. यह आम की ऐसी किस्म है, जिसकी फसल देर से तैयार होती है. जब दशहरी और लंगड़ा आम का सीजन समाप्त हो जाता है, तब चौसा आम बाजार में आता है. इस दौरान इसकी मांग अधिक होने के कारण किसानों को अच्छे दाम मिलते हैं और अच्छा मुनाफा होता है. इसलिए जो किसान आम की खेती करना चाहते हैं, उनके लिए चौसा आम एक बेहतर विकल्प हो सकता है. इसके अलावा, यह आम स्वाद में भी बेहद लाजवाब होता है. About the Author Vivek Kumar विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Moradabad,Moradabad,Uttar Pradesh First Published : April 29, 2026, 07:59 IST Source link

झारखंड

किसान हो तो जेवियर लकड़ा जैसे… मिक्सड फार्मिंग में कर रहे हैं...

होमताजा खबरकृषि किसान हो तो जेवियर लकड़ा जैसे…1 खेत में उगा रहे ये 5 सब्जियां, कमाई है बंपर Last Updated:April 29, 2026, 07:34 IST Ranchi Kisan Xavier Lakra Story: रांची के दमी गांव के किसान जेवियर लकड़ा खेती में कमाल कर रहे हैं. वह एक एकड़ में 5 तरह की सब्जियों और फलों की खेती करते हैं. जहां इस समय उनके खेत में 150 से ज्यादा आम के पेड़ हैं. आइये जानते हैं उनकी खेती के बारे में. ख़बरें फटाफट रांची: झारखंड की राजाधानी रांची के दमी गांव के रहने वाले जेवियर लकड़ा अपने घर के पास ही अपने एक एकड़ फॉर्म में हर तरह की खेती करते हैं. खासतौर पर वह आम की खेती के लिए मशहूर हैं. आज उनके पास 150 से अधिक आम के पेड़ हैं. इसके अलावा लीची, धनिया पत्ता, मिर्ची, भिंडी जैसी सारी चीजों की खेती करते हैं, जिससे आज उन्हें लाखों का मुनाफा हो रहा है और उन्होंने अपने सीक्रेट खाद के बारे में भी लोकल 18 की टीम से जानकारी साझा की. आइये जानते हैं उनकी खेती के बारे में. भेड़ के खाद का करते हैं इस्तेमाल जेवियर लकड़ा ने लोकल 18 से बताया कि वह खेती के साथ-साथ 4 बैल और भेड़ भी पाले हुए हैं. ऐसे में बैल और भेड़ का जो वेस्ट होता है, वह उसको केंचुआ खाद में मिलाते हैं और उसको खाद के रूप में इस्तेमाल करते हैं. इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति काफी अच्छी रहती है और साथ में थोड़ा चूना भी मिला देते हैं, जिससे मिट्टी का पीएच लेवल एकदम बैलेंस रहता है. फार्म के बीच में ही बनाया है घर जेवियर बताते हैं कि उनके घर के चारों तरफ बगान है और बीच में यह उनका घर है. फिलहाल इस समय उनके बगान में कच्चे आम के फल पेड़ में ज्यादा लदे हुए हैं, जिसको हम लोग पका कर बाजार में बेचने का काम करते हैं, तो कुछ प्राकृतिक तौर पर भी पकते हैं. ऐसे में उन्हें कच्चे आम के भी दाम मिल जाते है और पका हुआ का फिलहाल मार्केट में ₹120 किलो तक मिल जाता है. हर दिन उन्हें 15 केजी तक पका आम मिल जाता है. लीची से लेकर मिर्ची तक है तैयार इसके अलावा उनके पास लीची के भी कई सारे पेड़ देखने को मिलेंगे, लेकिन लीची फिलहाल कच्चा है. जहां आने वाले 15 दिनों में वह भी पक जाएंगे और तो और पेड़ के छांव वाली जगह पर मिर्च की खेती होती है. उसमें वह कई तरह के साग और धनिया पत्ता जैसे चीजों की खेती करते हैं. क्योंकि इससे सूर्य की रोशनी सीधे नहीं पड़ती और जगह का भी उपयोग बढ़िया से हो जाता है. उन्होंने आगे बताया इस बगान को तैयार करने में उन्हें 8 से 9 साल का समय लगा है. यह सारे पेड़ इतने ही साल पुराने हैं. अभी और नए पेड़ करीबन 70 पौधे आम के और लगाया हुए हैं, जो आने वाले 4 साल में फल देने लगेंगे. इसी तरह हर साल 60 से 70 पेड़ लगा देते हैं. इससे क्या है गर्मी के मौसम का वक्त होता है. इसमें अच्छी खासी डेढ़ लाख तक की कमाई हो जाती है और यह मुनाफा रुकता नहीं है. साल भर खेती से होता रहता है. About the Author Brijendra Pratap Singh बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ranchi,Jharkhand First Published : April 29, 2026, 07:34 IST Source link

व्यापार

नौकरी छोड़ना चाहते हैं? बाजार के ये 5 बिजनेस बदल सकते हैं...

Last Updated:January 19, 2026, 13:20 IST बहुत से लोगों का सपना होता है कि वे नौकरी करने के बजाय अपना खुद का व्यापार शुरू करें, लेकिन पूंजी की कमी के कारण यह सपना अधूरा रह जाता है. ऐसे में अगर सही आइडिया और सही जगह मिल जाए, तो कम निवेश में भी अच्छा बिजनेस खड़ा किया जा सकता है. आज हम आपको ऐसे पांच बिजनेस आइडिया के बारे में बताने जा रहे हैं, जो छोटी और कम ट्रैफिक वाली मार्केट के लिए सबसे ज्यादा उपयुक्त हैं और कम लागत में बेहतर कमाई का मौका देते हैं. अगर आप घर पर रहकर और छोटे बाजार में कम लागत में काम शुरू कर कमाई करना चाहते हैं, तो टिफिन सर्विस एक आसान और कारगर तरीका है. इसे घर की महिलाएं भी आसानी से कर सकती हैं. आप अपने घर पर दाल, चावल, रोटी और सब्जी जैसा सादा खाना बनाकर बाजार में काम करने वाले लोगों को टिफिन सर्विस उपलब्ध करा सकती हैं. एक टिफिन में खाना बनाने की लागत लगभग ₹30 आती है, जबकि वही टिफिन ₹50 से ₹60 में बेची जा सकती है. यह महिलाओं के लिए एक बढ़िया विकल्प है. वैसे तो यह एक ऐसा व्यापार है, जिसकी डिमांड साल भर रहती है, क्योंकि लोग पूजा-पाठ पूरे साल करते हैं. लेकिन त्योहारों में इसकी मांग और भी ज्यादा बढ़ जाती है. आप अपने घर पर अगरबत्ती, दिया और पूजन सामग्री बनाकर उसे छोटे-छोटे बाजारों में ले जाकर बेच सकते हैं. इसकी शुरुआत मात्र 10 हजार रुपए से की जा सकती है. आजकल मेकअप और सौंदर्य प्रसाधन लोगों, खासकर महिलाओं का आवश्यक हिस्सा बन चुका है. ऐसे में यदि महिलाएं और लड़कियां चाहें, तो कम पूंजी में ब्यूटी पार्लर खोलकर एक व्यापारिक आधार बना सकती हैं. इससे वे आत्मनिर्भर बन सकती हैं और कई अन्य महिलाओं को रोजगार भी दे सकती हैं. ब्यूटी पार्लर का बिजनेस 50,000 से लेकर ₹1,00,000 की पूंजी में शुरू किया जा सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google आजकल कोई भी सरकारी योजना हो या कहीं भी कोई काम, ज्यादातर ऑनलाइन और डिजिटल तरीके से किया जा रहा है. ऐसे में आप अपने गांव या छोटे-छोटे बाजार में ऑनलाइन फॉर्म भरकर अच्छी कमाई कर सकते हैं. इसके लिए आप अपने मोबाइल का भी उपयोग कर सकते हैं या फिर जन सुविधा केंद्र खोलकर भी यह काम किया जा सकता है. इसमें आप मोबाइल के जरिए ही लोगों के फॉर्म भरकर उन्हें सुविधा उपलब्ध करा सकते हैं. अगर आप अपने गांव या शहरी इलाके में किसी छोटे बाजार के आसपास रहते हैं, या आपके पास छोटा बाजार उपलब्ध है, तो आप हेयर कटिंग का काम करके अच्छी कमाई कर सकते हैं. इसके लिए आपको कुछ दिन किसी अनुभवी हेयर कटर के पास जाकर प्रशिक्षण लेना होगा. इसके बाद आप दिन में लगभग ₹1000 तक की कमाई कर सकते हैं. यह एक ऐसा व्यापार है जो कभी बंद नहीं होता और लोगों की मूलभूत जरूरतों को पूरा करने का काम करता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। First Published : January 19, 2026, 13:20 IST Source link

ताज़ा खबर

5 साल में ‘लू’ लगने से 3712 मौतें, बिहार-असम सहित 21 राज्यों...

होमताजा खबरदेश 5 साल में ‘लू’ लगने से 3712 मौतें, 21 राज्यों में हीटवेव से मचेगा हाहाकार Last Updated:April 29, 2026, 02:09 IST एनएचसी ने हीटवेव के भारी खतरे पर अपना कड़ा अलर्ट जारी किया है. लू की बढ़ती इंटेंसिटी से गरीब और बेघर लोग बहुत ज्यादा प्रभावित होते हैं. आउटडोर वर्कर के पास गर्मी से बचने के लिए कोई अच्छा शेल्टर नहीं होता है. बुजुर्ग और छोटे बच्चे इस खतरनाक गर्मी के प्रति बहुत ज्यादा सेंसिटिव होते हैं. ख़बरें फटाफट एनएचसी ने लू को लेकर 21 राज्यों के चीफ सेक्रेटरी को लेटर लिखा है. नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग (एनएचसी) ने दिल्ली सहित 21 राज्य सरकारों को लू के बढ़ते खतरे से संवेदनशील आबादी की रक्षा के लिए सक्रिय उपाय करने और राहत प्रयासों को लागू करने का निर्देश दिया है. आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के सरकारों को निर्देश जारी किया गया है. संबंधित राज्यों और दिल्ली के मुख्य सचिवों को भेजे गए पत्रों में एनएचसी ने भीषण गर्मी के प्रभाव को कम करने और जानमाल के नुकसान को रोकने के लिए उपायों की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया. एनएचसी ने कहा कि लू की बढ़ती आवृत्ति, अवधि और तीव्रता से हाशिए पर रहने वाले और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, विशेष रूप से बाहरी कामगार और बेघर लोग असमान रूप से प्रभावित होते हैं, जिनके पास अक्सर पर्याप्त आश्रय और संसाधन नहीं होते हैं. बुजुर्ग, बच्चे, शिशु और नवजात शिशु अत्यधिक तापमान के लंबे समय तक संपर्क में रहने से उत्पन्न गंभीर स्वास्थ्य परिणामों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं. एनएचसी ने यह भी कहा कि लू के कारण आजीविका का नुकसान हो सकता है और आग से संबंधित घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है. राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों का हवाला देते हुए एनएचसी ने कहा कि 2019 से 2023 के बीच पूरे भारत में लू या लू लगने से 3,712 मौतें दर्ज की गईं. इसी कारण सरकारों से आग्रह है कि वे अपनी मौजूदा मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) या राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार राहत उपायों का कार्यान्वयन सुनिश्चित करें. सर्वोच्च मानवाधिकार निकाय ने संबंधित राज्य और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों के माध्यम से जिला अधिकारियों से समेकित कार्रवाई रिपोर्ट भी मांगी है. सर्वोच्च मानवाधिकार निकाय को मानवाधिकार उल्लंघन की औपचारिक शिकायत प्राप्त किए बिना भी मीडिया रिपोर्टों, सार्वजनिक जानकारी या अन्य स्रोतों के आधार पर स्वतः संज्ञान (स्वयं) लेने का अधिकार है. About the Author Rakesh Ranjan Kumar राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi First Published : April 29, 2026, 02:06 IST Source link

झारखंड

झुलसाती गर्मी में चाहिए सुकून के पल तो घूम आएं रानी तालाब,...

Last Updated:April 28, 2026, 08:35 IST Jamshedpur Famous Pond: जमशेदपुर के पास तिरुलडीह गांव में ऐतिहासिक रानी तालाब है, जिसकी एक नहीं कई विशेषताएं हैं. यह सालभर भरा रहता है, मछली और बत्तख पालन से लोगों को आजीविका का मौका देता है, खूबसूरत इतना है कि लोग यहां सुकून के पल बिताने आते हैं. ख़बरें फटाफट जमशेदपुर. झारखंड का मूलभूत नारा ‘जल, जंगल, जमीन’ सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि इस राज्य की पहचान है. चारों ओर फैली हरियाली, घने जंगल, पहाड़ और जल स्रोत इसे प्राकृतिक रूप से बेहद खूबसूरत बनाते हैं. खासकर गर्मियों के मौसम में जब शहरों की गर्मी लोगों को परेशान करती है, तब ऐसे शांत और ठंडे स्थानों की तलाश बढ़ जाती है जहां कुछ समय सुकून से बिताया जा सके. ऐसे में जमशेदपुर के पास स्थित तिरुलडीह गांव का रानी तालाब एक बेहतरीन पर्यटन स्थल के रूप में उभरकर सामने आता है. इस वजह से पड़ा नामजमशेदपुर से करीब 14 किलोमीटर दूर बड़ा तालसा पंचायत में स्थित यह रानी तालाब प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत उदाहरण है. इस तालाब का नाम ‘रानी तालाब’ इसलिए पड़ा क्योंकि इसका निर्माण घाटशिला की रानी के समय में कराया गया था. वर्षों पुराना यह तालाब आज भी अपनी ऐतिहासिक पहचान और प्राकृतिक आकर्षण को संजोए हुए है. आजीविका का भी साधनइस तालाब की सबसे खास बात यह है कि जहां आसपास के अधिकांश तालाब गर्मी के दिनों में सूख जाते हैं, वहीं रानी तालाब सालभर पानी से भरा रहता है. यही कारण है कि यह न सिर्फ स्थानीय लोगों के लिए बल्कि पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. गांव के लोग इस तालाब का उपयोग बत्तख पालन और मछली पालन के लिए भी करते हैं, जिससे उनकी आजीविका भी जुड़ी हुई है. गांव के निवासी कानू मुर्मू बताते हैं कि रानी तालाब का पानी बहुत ही पवित्र माना जाता है. यहां के लोग किसी भी शुभ कार्य, शादी या त्योहार की शुरुआत इसी तालाब के पानी से करते हैं. इस आस्था और परंपरा ने इस स्थान को और भी खास बना दिया है. पर्यटन के लिए बेहद खासपर्यटन की दृष्टि से देखा जाए तो रानी तालाब का दृश्य खासकर शाम के समय बेहद मनमोहक हो जाता है. सूरज के ढलते ही आसमान के रंग और तालाब का पानी मिलकर ऐसा दृश्य बनाते हैं, जो किसी विदेशी लोकेशन से कम नहीं लगता. चारों ओर फैले पहाड़, हरी-भरी घास और शांत वातावरण लोगों को प्रकृति के करीब ले जाता है. यहां बैठकर लोग सुकून के पल बिताते हैं और खूबसूरत सनसेट का आनंद लेते हैं. नेचर की असली खूबसूरतीअगर आप भी इस गर्मी में किसी शांत, ठंडी और प्राकृतिक जगह की तलाश में हैं, तो तिरुलडीह का रानी तालाब आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है. यह जगह न सिर्फ आपकी थकान दूर करेगी, बल्कि आपको प्रकृति की असली खूबसूरती का एहसास भी कराएगी. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jamshedpur,Purbi Singhbhum,Jharkhand First Published : April 28, 2026, 08:35 IST Source link

व्यापार

सरसों के डंठल को फेंकना छोड़िए, जानिए इससे कैसे होगी अच्छी कमाई,...

Last Updated:January 19, 2026, 16:30 IST अगर आप गांव में रहते हैं और कुछ चीजों को नजरअंदाज कर देते हैं, तो यह आपके लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. जी हां, हम बात कर रहे हैं धान की भूसी से तेल निकालने जैसी कहावत की. इस समय सरसों की बुवाई हो चुकी है और कुछ ही दिनों में सरसों तैयार हो जाएगी. ऐसे में कई किसान सरसों तो रख लेते हैं, लेकिन उसका डंठल या तो जला देते हैं या फेंक देते हैं, जबकि यही डंठल उनकी कमाई का एक महत्वपूर्ण साधन बन सकता है. सुल्तानपुर समेत अवध क्षेत्र में सरसों के डंठल को पिंजी कहा जाता है. यह सरसों के पौधे का सूखा हुआ भाग होता है, जो सरसों अलग करने के बाद बचता है. ऐसे में इसे ज्यादातर किसान कूड़ा समझकर फेंक देते हैं, जबकि यही उनकी कमाई का जरिया बन सकता है और अच्छा मुनाफा दिला सकता है. पिंजी को ही सरसों का डंडा भी कहा जाता है, जो कई तरीकों से कमाई में फायदा देता है. किसान अनिल कुमार लोकल 18 से बताते हैं कि अगर सरसों के डंठल को व्यावसायिक दृष्टिकोण से देखा जाए, तो इससे झाड़ू बनाकर बाजार में बेचा जा सकता है. हालांकि यह झाड़ू अस्थायी होती है, लेकिन बड़े क्षेत्रफल की सफाई के लिए यह काफी उपयोगी मानी जाती है. इसे बाजार में 25 से 30 रुपये प्रति झाड़ू के हिसाब से बेचा जा सकता है. ग्रामीण क्षेत्रों में भूसा, उपले रखने और जानवरों को ठंड से बचाने के लिए टटिया का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे में सरसों के डंठल और अरहर के डंठल के मिश्रण से टटिया बनाकर इसे बाजार में बेचा जा सकता है. इसकी कीमत करीब 1000 रुपये प्रति टटिया हो सकती है. Add News18 as Preferred Source on Google सरसों के डंठल को ईंट भट्ठों पर सप्लाई कर इससे अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है. दरअसल, सरसों का डंठल ईंट भट्ठों में ईंट पकाने के काम आता है, क्योंकि कोयले को लपक देने के लिए यह ज्यादा कारगर होता है. बशर्ते इसकी मड़ाई की गई हो और इसे टुकड़ों में काटा गया हो. मड़ाई के बाद इसकी कीमत करीब 800 रुपये प्रति कुंतल तक हो सकती है. अगर आप भी सरसों के डंठल का सही इस्तेमाल नहीं जानते हैं, तो आज हम आपको बताते हैं कि इससे जैविक खाद बनाई जा सकती है. जैविक खाद बनाने के लिए सबसे पहले आपको एक बड़ा और कम गहराई वाला गड्ढा खोदना होगा. उसके बाद उस गड्ढे में सरसों के डंठल को डालें और इसे लगभग 3 इंच मिट्टी से ढक दें. इसके बाद हल्का पानी डाल दें. 2 से 3 महीने बाद जब आप गड्ढा खोदेंगे, तो सरसों का डंठल सड़कर जैविक खाद के रूप में तैयार हो चुका होगा. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। First Published : January 19, 2026, 13:41 IST Source link

Scroll to Top