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Flour Mill Business Idea: अगर आप नौकरी के भरोसे नहीं रहना चाहते और कम लागत में अपना खुद का कारोबार शुरू करने की सोच रहे हैं, तो आटा चक्की का बिजनेस आपके लिए बढ़िया विकल्प बन सकता है. यह ऐसा काम है, जिसकी जरूरत हर घर में रोज पड़ती है. चाहे गांव हो या शहर, रोटी हर किसी के घर बनती है और रोटी के लिए आटा चाहिए. यही वजह है कि इस कारोबार में ग्राहकों की कमी बहुत कम देखने को मिलती है. अगर आपकी चक्की अच्छी जगह पर है और काम सही तरीके से होता है, तो रोज के रोज अच्छी कमाई की जा सकती है.
देवघर जिले के घोषना गांव निवासी जयकांत राय पिछले करीब 20 सालों से आटा चक्की का कारोबार कर रहे हैं. उन्होंने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि जब उन्होंने यह काम शुरू किया था, तब गांव में बहुत कम चक्कियां थीं.
धीरे-धीरे लोगों का भरोसा बढ़ता गया और आज आसपास के कई गांवों से लोग उनके यहां गेहूं पिसवाने आते हैं. उनका कहना है कि इस काम में सबसे बड़ी बात यह है कि लोगों की जरूरत कभी खत्म नहीं होती. हर घर में रोज खाना बनता है, इसलिए आटा भी रोज चाहिए. यही कारण है कि यह कारोबार पूरे साल चलता रहता है.
जयकांत राय बताते हैं कि सामान्य दिनों में भी उनकी चक्की पर सुबह से शाम तक लोगों का आना-जाना लगा रहता है. कोई पांच किलो गेहूं लेकर आता है, तो कोई 25 से 30 किलो तक पिसवाता है. शादी-ब्याह, पूजा-पाठ और त्योहारों के समय काम और भी बढ़ जाता है.
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कई बार इतनी भीड़ हो जाती है कि लोगों को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है. उनके मुताबिक, रोजाना औसतन एक हजार से पंद्रह सौ रुपये तक की कमाई आराम से हो जाती है. अगर किसी इलाके में आसपास ज्यादा चक्कियां नहीं हैं, तो आमदनी इससे भी अधिक हो सकती है.
उन्होंने बताया कि इस कारोबार को शुरू करने के लिए सबसे पहले बिजली कनेक्शन लेना जरूरी होता है, क्योंकि मशीन पूरी तरह बिजली से चलती है. इसके बाद अच्छी क्वालिटी की आटा चक्की मशीन, मोटर और जरूरी उपकरण खरीदने पड़ते हैं.
गांव में छोटी आटा चक्की मिल लगाने के लिए करीब एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक का खर्च आता है. अगर जगह अपनी हो, तो शुरुआती लागत और भी कम हो सकती है. जयकांत राय का कहना है कि इस कारोबार में सिर्फ मशीन लगा देना ही काफी नहीं होता. ग्राहकों का भरोसा जीतना सबसे जरूरी है.
गेहूं की पिसाई साफ-सुथरे तरीके से हो, समय पर काम मिले और लोगों के साथ अच्छा व्यवहार किया जाए, तो ग्राहक खुद-ब-खुद जुड़ते चले जाते हैं. एक बार अगर किसी को आपकी सेवा पसंद आ गई, तो वह बार-बार उसी चक्की पर आता है और दूसरे लोगों को भी आपके यहां आने की सलाह देता है. इसी भरोसे की बदौलत उनका कारोबार पिछले दो दशकों से लगातार चल रहा है.
ग्रामीण इलाकों में आज भी बड़ी संख्या में लोग पैकेट वाला आटा खरीदने के बजाय अपने खेत का गेहूं या बाजार से खरीदा गेहूं पिसवाकर खाना पसंद करते हैं. उनका मानना है कि ताजा पिसा हुआ आटा ज्यादा स्वादिष्ट और बेहतर होता है. यही वजह है कि गांवों में आटा चक्की की मांग हमेशा बनी रहती है.
अगर कोई युवा कम निवेश में ऐसा कारोबार शुरू करना चाहता है, जिसमें रोज कमाई की संभावना हो, तो आटा चक्की का बिजनेस उसके लिए अच्छा विकल्प साबित हो सकता है. सही जगह का चुनाव, अच्छी मशीन और ईमानदारी से किया गया काम इस कारोबार को लंबे समय तक सफल बना सकता है.