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शादी के दिन घर में फटा सिलेंडर; लगी आग:दुल्हन की शादी का...

कोडरमा जिले के सतगांवां थाना क्षेत्र के माधोपुर गांव में गुरुवार की सुबह एक परिवार के लिए ऐसी त्रासदी लेकर आई, जिसने पलभर में खुशियों को मातम में बदल दिया। दिलीप शर्मा की बड़ी बेटी अंजलि की शादी आज होनी है। घर में मेहमानों की चहल-पहल थी, गीत-संगीत और तैयारियों के बीच हर चेहरा खुशी से खिला हुआ था। लेकिन सुबह मेहमानों के लिए चाय बनाते समय अचानक सिलेंडर से गैस रिसाव हुआ। चूल्हे के पास माचिस जलते ही आग भड़क उठी। देखते ही देखते लपटों ने पूरे घर को अपनी चपेट में ले लिया। घर में मौजूद लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। डेढ़ घंटे की जद्दोजहद के बाद काबू आग इतनी तेजी से फैली कि किसी को संभलने का मौका नहीं मिला। देखते ही देखते शादी की तैयारियों में जुटा घर धू-धू कर जलने लगा। स्थानीय ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए आग बुझाने का प्रयास शुरू किया और करीब डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। आग बुझाने के दौरान दिलीप शर्मा के बड़े बेटे शिवनारायण का हाथ भी झुलस गया। जब धुआं छंटा तो घर में चारों ओर सिर्फ राख और बिखरे हुए सपनों के अवशेष नजर आ रहे थे। जिन सामानों को बड़ी मेहनत और उम्मीदों के साथ इकट्ठा किया गया था, वे सब चंद पलों में खत्म हो चुके थे। शादी का जोड़ा, कपड़े और नकदी खाक इस हादसे में बेटी का शादी का जोड़ा, दूल्हे के लिए रखा सूट, मेहमानों की विदाई के कपड़े, खाद्य सामग्री और करीब 20 हजार रुपए नकद जलकर राख हो गए। इस मुसीबत के बाद भी दिलीप शर्मा ने हिम्मत जुटाई और आस-पड़ोस के लोगों से कर्ज लेकर फिर से शादी की तैयारी शुरू कर दी। गांव के लोगों ने भी इस मुश्किल घड़ी में परिवार का साथ दिया और मदद के लिए आगे आए। वहीं, पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मुआवजे की गुहार लगाई है, ताकि इस संकट से उबरने में सहारा मिल सके। फिलहाल, आंसुओं के बीच भी बेटी की शादी की रस्में पूरी कराने की कोशिश जारी है। Source link

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गर्मी में घट रहा पशुओं का दूध? एक्सपर्ट ने बताया भूसा खिलाने...

होमफोटोकृषि गर्मी में घट रहा पशुओं का दूध? एक्सपर्ट ने बताया भूसा खिलाने का सही तरीका Last Updated:April 30, 2026, 14:04 IST Cattle Care In Summers: गर्मी का मौसम दुधारू पशुओं के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं होता. तेज धूप, लू और पानी की कमी के कारण इस समय पशु जल्दी बीमार पड़ जाते हैं और सबसे बड़ी चिंता यह होती है कि उनका दूध उत्पादन अचानक कम हो जाता है या कई बार पूरी तरह खत्म हो जाता है. ऐसे में पशुपालकों के लिए यह समय चुनौती भरा जरूर होता है, लेकिन अगर खान-पान और देखभाल पर सही तरीके से ध्यान दिया जाए तो गर्मी में भी दूध उत्पादन को बनाए रखा जा सकता है. खासकर आहार का सही चुनाव इस मौसम में सबसे ज्यादा जरूरी हो जाता है. देवघर कृषि विज्ञान केंद्र की पशु चिकित्सक डॉ पूनम सोरेन बताती हैं कि गर्मी के दिनों में हरा चारा आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाता. खेतों में नमी की कमी और तेज तापमान के कारण हरी घास और चारा कम हो जाता है, जिससे पशुपालकों को परेशानी होती है. ऐसे समय में भूसा एक अच्छा विकल्प बनकर सामने आता है. हालांकि हर भूसा एक जैसा नहीं होता, इसलिए सही भूसे का चुनाव करना जरूरी है. डॉ सोरेन के अनुसार पीला भूसा जैसे गेहूं, धान, मकई और चना का भूसा दुधारू पशुओं के लिए बेहतर माना जाता है. इसमें जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो पशु के शरीर को ऊर्जा देते हैं और दूध उत्पादन को बनाए रखने में मदद करते हैं. यह भी ध्यान रखें कि सिर्फ भूसा देना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे खिलाने का तरीका भी उतना ही जरूरी है. अक्सर देखा जाता है कि पशुपालक सीधे सूखा भूसा पशु के सामने रख देते हैं, जो एक बड़ी गलती है. सूखा भूसा खाने से पशु के पाचन तंत्र पर असर पड़ सकता है और उसका पेट खराब हो सकता है. इससे पशु बीमार पड़ सकता है और दूध उत्पादन पर भी खराब असर पड़ता है. इसलिए भूसा खिलाने से पहले उसे सही तरीके से तैयार करना बहुत जरूरी है. Add News18 as Preferred Source on Google डॉ पूनम सोरेन सलाह देती हैं कि भूसे को खिलाने से पहले कम से कम एक से दो घंटे तक पानी में भिगोकर रखना चाहिए. जब भूसा अच्छी तरह से फूल जाता है, तब उसे पशु को खिलाना चाहिए. इससे भूसा नरम हो जाता है और पशु उसे आसानी से पचा पाता है. साथ ही इससे पशु के शरीर में पानी की कमी भी कुछ हद तक पूरी होती है, जो गर्मी के मौसम में बेहद जरूरी है. अगर पशुपालक इस छोटे से तरीके को अपनाते हैं, तो वे अपने पशुओं को बीमारियों से बचा सकते हैं और दूध उत्पादन को भी बेहतर बना सकते हैं. गर्मी के मौसम में दुधारू पशुओं की देखभाल में थोड़ी सी सावधानी और सही जानकारी बहुत बड़ा फर्क ला सकती है. सही भूसा, सही तरीका और समय पर देखभाल से पशुपालक न केवल अपने पशुओं को स्वस्थ रख सकते हैं, बल्कि अपने दूध उत्पादन को भी स्थिर और अच्छा बनाए रख सकते हैं. First Published : April 30, 2026, 14:04 IST Source link

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राजमहल सांसद विजय हांसदा पहुंचे पाकुड़:कहा- वास्तविक मतदाताओं का नाम मतदाता सूची...

राजमहल लोकसभा सांसद विजय हांसदा ने पाकुड़ जिला मुख्यालय के परिषदन भवन में एसआईआर (SiR) मुद्दे पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कार्यकर्ता यह सुनिश्चित करने के लिए मुस्तैद हैं कि वास्तविक मतदाताओं (जेनुइन वोटर) के नाम मतदाता सूची में बने रहें। सांसद हांसदा एक दिवसीय दौरे पर पाकुड़ पहुंचे थे। सांसद विजय हांसदा ने पश्चिम बंगाल और असम चुनावों के साथ-साथ एसआईआर के मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने बताया कि राज्य में एसआईआर (SiR) प्रक्रिया शुरू होने वाली है। झामुमो कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया गया है कि वे वास्तविक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल रहें, यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह सजग रहें। विजय हांसदा ने जानकारी दी कि इस मुद्दे पर केंद्रीय समिति के साथ-साथ जिला समिति की बैठकें भी हो चुकी हैं। इन बैठकों में कार्यकर्ताओं को कई प्रकार की जानकारी दी गई है। उन्होंने बताया कि एसएआर को लेकर प्रखंड और पंचायत स्तर के कार्यकर्ताओं को पूरी तरह से सजग और चौकस किया जा रहा है। उन्हें एसएआर के तहत आवश्यक जानकारी और फॉर्म भरने के तरीके के बारे में बताया जा रहा है, ताकि वे लोगों को जागरूक कर सकें। सांसद ने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वहां एसएआर प्रक्रिया में छोटे बदलावों के कारण लोगों के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए थे, जिनमें बड़े अधिकारियों के नाम भी शामिल थे। सांसद हांसदा ने स्पष्ट किया कि झामुमो एसएआर का विरोधी नहीं है, लेकिन इस प्रक्रिया में अपनाई जा रही तकनीक का विरोध करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वास्तविक मतदाताओं के नाम न कटें, यही झारखंड मुक्ति मोर्चा का मुख्य उद्देश्य है। पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा फीडबैक मिल रहा है कि ममता बनर्जी चौथी बार मुख्यमंत्री बनेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा का समर्थन हमेशा संविधान बचाने वाली पार्टी को रहा है। हांसदा ने बताया कि पश्चिम बंगाल के लोग आपस में मिलकर रहते हैं और इस बार भी उन्होंने इसी भावना के साथ मतदान किया है। इस अवसर पर झामुमो के जिला अध्यक्ष अजीजुल इस्लाम भी मौजूद थे। Source link

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गुमला में चप्पल से पिट गए राजस्व कर्मचारी, VIDEO:जमीन सीमांकन को पहुंची...

गुमला जिले के चैनपुर प्रखंड के केड़ेग खेड़ा गांव में चैनपुर अंचल की टीम पर ग्रामीणों ने हमला कर दिया। जमीन सीमांकन को पहुंची अंचल की टीम की कार्रवाई को लेकर ग्रामीणों ने न केवल हंगामा किया बल्कि मारपीट तक कर दी। इस दौरान राजस्व कर्मचारी सुजीत कुमार सिन्हा को एक महिला ने चप्पल से पीटा। इस पूरे घटनाक्रम का किसी ने वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जानकारी के अनुसार, शिव प्रसाद नामक व्यक्ति के ऑनलाइन आवेदन के आधार पर अंचल कार्यालय की टीम विवादित जमीन की मापी के लिए गांव पहुंची थी। टीम में राजस्व कर्मचारी सुजीत कुमार सिन्हा, नरेंद्र सेठ और अंचल अमीन उमाशंकर उरांव शामिल थे। हालांकि नियमानुसार पुलिस बल की मौजूदगी में सीमांकन होना था, लेकिन टीम पुलिस के पहुंचने से पहले ही मौके पर पहुंच गई। ठीक इसी समय मौके पर मौजूद ग्रामीण आक्रोशित हो गए। कर्मचारी को घेरकर पीटा, भाग कर बचाई जान जैसे ही टीम ने सीमांकन की प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश की, गांव के कुछ लोग आक्रोशित हो उठे। देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई। ग्रामीणों ने कर्मचारियों को घेर लिया। इसी दौरान एक महिला ने राजस्व कर्मचारी सुजीत कुमार सिन्हा पर चप्पलों से हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले से टीम के अन्य सदस्य भी घबरा गए। उपद्रवियों ने कर्मचारियों को खदेड़-खदेड़ कर पीटा। किसी तरह जान बचाकर भागने की कोशिश करते कर्मचारी पूरी तरह असहाय नजर आए। नहीं हो सका सीमांकन, मौके पर पहुंची पुलिस घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। किसी तरह स्थिति को नियंत्रित किया। हालांकि तब तक माहौल काफी तनावपूर्ण हो चुका था। ग्रामीणों के हिंसक विरोध के कारण जमीन का सीमांकन कार्य शुरू ही नहीं हो पाया। प्रशासनिक टीम और पुलिस बल को बिना काम किए ही वापस लौटना पड़ा। जानकारी के मुताबिक देर शाम अंचल कार्यालय की ओर से चैनपुर थाने को घटना की जानकारी दी गई है। हालांकि इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं कराया गया है। प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। Source link

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फास्ट फूड के दौर में भी कायम है ‘सिंघाड़ा’ का जलवा, गुमला...

Last Updated:April 30, 2026, 21:05 IST Gumla Samosa Shop: आज के इस मॉडर्न दुनिया में खाने पीने में भी आधुनिकता का दौर चल रहा है. इस कारण आजकल फास्ट फूड का प्रचलन चरम पर है. चाहे गांव हो या शहर आपको सभी जगह फास्ट फूड की स्टॉलें बड़ी आसानी से मिल जाएंगी. जहां आपको आज के दौर का पसंदीदा व्यंजन जैसे मोमो, बर्गर, पिज्जा, रोल, चाऊमीन, चिल्ली आदि बड़ी ही आसानी से मिल जाएंगे, लेकिन इन सभी व्यंजनों के बीच आज भी एक खास चीज है, जिसे लोग समोसा के नाम से जानते हैं. वहीं, इसे झारखंड के गुमला जिले में सिंघाड़ा के नाम से जाना जाता है, जिसका जलवा आज भी सभी वर्ग के लोगों के बीच बरकरार है. बता दें कि समोसा एक ऐसा नमकीन है, जिसे हर उम्र के लोग पसंद करते हैं. चाहे बच्चे हों, युवा हों या बुजुर्ग. इसके स्वाद का जलवा सभी लोगों को खूब भाता है. यही कारण है कि गांव हो या शहर हर चौक-चौराहे पर समोसे की दुकान जरूर आपको मिल जाएगी. वहीं, कुछ दुकानों के समोसे इतने टेस्टी होते हैं कि वे उस होटल की पहचान बन जाते हैं. ऐसा ही गुमला के घाघरा प्रखंड के आदर गांव में एक लाजवाब व टेस्टी समोसा की 50 साल पुरानी दुकान है, जहां मिलने वाले समोसे के स्वाद के कारण उसकी बादशाहत आज भी कायम है. दुकानदार सतदेव महतो ने लोकल 18 से बताया कि गुमला जिले के घाघरा प्रखंड के बड़ा अजियातु गांव के वह रहने वाले हैं. उनके गांव के सटे आदर में साप्ताहिक बाजार लगता है. यहां बाजार में वह लगभग 50 सालों से अपना होटल चला रहे हैं. उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता भी यही होटल चलाते थे. उन्हीं से यह काम सीखा था. इसके बाद वह खुद 50 सालों से अपना होटल चला रहे हैं. उनके यहां दुकान पर समोसा ,आलू चाप, धुसका ,बर्रा ,जलेबी, पकौड़ी आदि बनाई जाती है, लेकिन उनके यहां सबसे ज्यादा डिमांड समोसा की ही रहती है. Add News18 as Preferred Source on Google उन्होंने बताया कि शुरुआत में वह मात्र 10 पैसे प्रति पीस के हिसाब से बिक्री करते थे. जहां आज धीरे-धीरे महंगाई बढ़ती गई और रेट भी बढ़ती गई, लेकिन उनके यहां मिलने वाले समोसे का क्रेज आज भी बरकरार है. आज उनके यहां समोसे के स्वाद में कोई कमी नहीं आई है. इस वजह से दुकान पर ग्राहकों को तांता लगा रहता है अगर आज कीमत की बात करें तो वर्तमान में ₹15 जोड़ा के हिसाब से समोसा मिलता है. वहीं, उनके यहां समोसे के साथ टमाटर की स्पेशल चटनी भी परोसी जाती है, जिसका स्वाद लोगों को खूब भाता है. वहीं, उनकी दुकान आदर में लगने वाले साप्ताहिक बाजार रविवार और बुधवार के दिन सुबह 8:00 बजे से शाम के 7:00 बजे तक सजी रहती है. उन्होंने बताया कि उनके यहां समोसा अच्छे तरीके से तैयार किया जाता है, जिसे आप घर में भी ट्राई कर सकते हैं. समोसा बनाने के लिए सबसे पहले मैदा लें, फिर उसमें मोयन के रूप में डालडा, नमक, अजवाइन ,मंगरैला आदि डालकर पानी से गूंथ लें. अब आलू का मसाला तैयार करने के लिए आलू को छीलकर मैश लें. फिर उसमें जीरा, हल्दी, लहसुन, धनिया, गरम मसाला, बादाम, मसाले मिलाएं. फिर मैदा से लोई बनाकर, बेलकर उसमें तैयार आलू मसाला को बेलकर तेल में छानकर गर्मा गर्म परोसें. First Published : April 30, 2026, 21:05 IST Source link

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सरायकेला की शांभवी बनीं ICSE 12वीं की नेशनल टॉपर:जमशेदपुर के सेक्रेड हार्ट...

आदित्यपुर नगर निगम के वार्ड-17 की निवासी शांभवी तिवारी ने ICSE 12वीं (बायो साइंस) की परीक्षा में देश में पहला स्थान हासिल किया है। उन्हें 99.8% मिले हैं। जमशेदपुर के सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट स्कूल की छात्रा शांभवी की इस उपलब्धि से उनके परिवार, स्कूल और पूरे जमशेदपुर तथा सरायकेला-खरसावां जिले में हर्ष का माहौल है। शांभवी ने अपनी कड़ी मेहनत, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति अटूट समर्पण के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। वह बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रही हैं और हर कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करती आई हैं। मां हैं सेंट मेरीज इंग्लिश हाई स्कूल में टीचर शांभवी के पिता राजेश रमण आकाशवाणी में कार्यरत हैं, जबकि उनकी मां निभा सिन्हा सेंट मेरीज इंग्लिश हाई स्कूल में रसायण शास्त्र की शिक्षिका हैं। परिवार में शिक्षा के मजबूत माहौल और माता-पिता के मार्गदर्शन ने उनकी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वर्तमान में शांभवी नीट परीक्षा की तैयारी कर रही हैं। उनका सपना एक सफल डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना है। उनकी यह उपलब्धि अन्य छात्रों के लिए भी प्रेरणास्रोत है। शांभवी एक अनुशासित और मेधावी छात्रा रही हैं: प्रिंसिपल स्कूल की प्रिंसिपल सिस्टर स्टेफी ए.सी. ने शांभवी की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह शुरू से ही एक अनुशासित और मेधावी छात्रा रही हैं। उन्होंने हमेशा अपने प्रदर्शन से स्कूल का नाम रोशन किया है और यह सफलता उनकी कड़ी मेहनत का ही परिणाम है। शांभवी तिवारी की यह उपलब्धि उन सभी छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो बड़े सपने देखते हैं और उन्हें पूरा करने के लिए लगातार परिश्रम करते हैं। Source link

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साली से शादी के लिए किया साले का अपहरण:कोडरमा में जीजा समेत...

कोडरमा में विधवा साली से शादी के लिए उसके जीजा ने साले का अपहरण कर लिया। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए 24 घंटे में अपहृत 14 वर्षीय बच्चे को बरामद कर लिया और आरोपी समेत तीन को गिरफ्तार कर लिया। पूरा मामला तिलैया थाना क्षेत्र का है। गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों में अपहृत का जीजा और उसके दो साथी शामिल हैं। कोडरमा एसपी कुमार शिवाशीष ने गुरुवार को बताया कि तिलैया थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर 24 निवासी वीणा देवी (पति स्व. नंदकिशोर यादव) ने 29 अप्रैल को थाने में आवेदन दिया था। स्कूल जाने के बाद घर वापस नहीं लौटा था चंदन उन्होंने बताया कि उनका भाई चंदन कुमार स्कूल जाने के बाद घर वापस नहीं लौटा। मामले की गंभीरता को देखते हुए तिलैया थाना में कांड संख्या 127/26 दर्ज किया गया। इसके बाद थाना प्रभारी विनय कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी और मानवीय साक्ष्यों के आधार पर वीणा देवी के जीजा सूरज यादव को हिरासत में लिया। परिवार पर दबाव बनाने के लिए किया अपहरण पूछताछ में सूरज यादव ने खुलासा किया कि उसने अपने साथियों पिंटु कुमार और संतोष कुमार सिन्हा के साथ मिलकर बच्चे का अपहरण किया था। आरोपी ने बताया कि वह अपनी साली वीणा देवी से शादी करना चाहता था और परिवार पर दबाव बनाने के लिए इस वारदात को अंजाम दिया था। सूरज यादव की निशानदेही पर पुलिस ने मोरियांवां निवासी संतोष सिन्हा के घर से बच्चे को बरामद कर लिया। पुलिस ने मुख्य आरोपी सूरज यादव, उसके साथी बिहार के गया जिले के घरहरा निवासी पिंटु कुमार और संतोष कुमार सिन्हा को गिरफ्तार कर लिया है। Source link

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आंखों में नहीं, इरादों में है रोशनी! नेत्रहीन सुदामा और रामाशीष भाई...

Last Updated:April 30, 2026, 21:15 IST किसी ने बिल्कुल सही कहा है, मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, क्योंकि पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है. जब इंसान के इरादे मजबूत हों और दिल में कुछ कर गुजरने का जज्बा, तब कोई कमी, कोई परेशानी और कोई मजबूरी उसे आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती. ऐसे ही हौसले और संघर्ष की मिसाल हैं वे लोग, जिन्होंने हालात से लड़कर अपनी मेहनत से सफलता की नई कहानी लिख दी. दरअसल, लातेहार जिले के सदर प्रखंड स्थित सीसी गांव के दो भाई सुदामा महतो और रामाशीष मेहता उन लोगों के लिए प्रेरणा बन गए हैं, जो छोटी-छोटी मुश्किलों में हार मान लेते हैं. जन्म से नेत्रहीन होने के बावजूद दोनों भाइयों ने अपनी जिंदगी को बोझ नहीं बनने दिया, बल्कि खेती को सहारा बनाकर पूरे परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा रखी है. दोनों भाइयों ने ये साबित कर रहे हैं कि इंसान की असली ताकत उसकी आंखों में नहीं, बल्कि उसके इरादों में होती है. आंखों में भले अंधेरा हो, लेकिन मेहनत और आत्मविश्वास से उन्होंने अपने जीवन को रोशन कर दिया है. आंखों से देखने में असमर्थ ये दोनों भाई आज भी खेतों में कुदाल चलाते हैं, बुवाई करते हैं, फसल काटते हैं और मौसम के अनुसार खेती कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं. गांव के लोग जब उन्हें खेतों में काम करते देखते हैं तो हैरान रह जाते हैं. बिना आंखों की रोशनी के सिर्फ अनुभव और अंदाज के सहारे खेती करना किसी मिसाल से कम नहीं है. सुदामा महतो ने लोकल18 को बताया कि बचपन में गांव में पढ़ाई की सुविधा नहीं थी और नेत्रहीन होने के कारण शिक्षा हासिल करना मुश्किल था. ऐसे में उन्होंने पिता के साथ खेतों में काम करना शुरू किया. धीरे-धीरे खेती ही उनका जीवन बन गई. आज करीब छह एकड़ जमीन पर वे खेती करते हैं. वर्तमान समय में मक्का, पेक्ची, गेहूं और गन्ना जैसी फसलें लगी हैं. गेहूं की कटाई के बाद अब झींगी, करैला, भिंडी और मूंग की बुवाई की तैयारी है. Add News18 as Preferred Source on Google सुदामा महतो के दो बेटे हैं, जबकि रामाशीष मेहता के तीन बेटे हैं. दोनों भाई कहते हैं कि साल भर खेती ही परिवार का सहारा है. इसी कमाई से बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और जीवन की जरूरतें पूरी होती हैं. एक सीजन की अच्छी फसल से खाने-पीने से लेकर बच्चों की पढ़ाई तक का खर्च निकल जाता है. रामाशीष मेहता ने कहा कि उनकी जमीन लगभग 6 एकड़ से भी अधिक है. जिसमें कुछ जमीन कुछ लोगों द्वारा हड़पा जा रहा है. वहीं सरकारी योजना का भी लाभ नहीं मिल रहा है. जिसमें सबसे जरूरी सिंचाई है. वहीं खेत में काम करने के लिए बोरी बिछाकर खुद से काम करते है. खुद मक्का और गेहूं हाथों से काटते है. संघर्ष केवल दिव्यांगता तक सीमित नहीं है. दोनों भाइयों का आरोप है कि गांव के कुछ लोगों ने उनकी जमीन के हिस्से पर कब्जा कर लिया है, जिससे खेती का क्षेत्र कम हो गया है. जोत-कोड़ और संसाधनों की भी भारी समस्या है. इसके बावजूद दोनों भाई हार मानने को तैयार नहीं हैं. सबसे दुखद बात यह है कि इतने संघर्ष के बावजूद उन्हें सरकार की किसी योजना का लाभ नहीं मिल सका है. यदि प्रशासन इन मेहनतकश भाइयों की मदद करे तो इनका जीवन और बेहतर हो सकता है. First Published : April 30, 2026, 21:15 IST Source link

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गुमला में कुएं में डूबने से महिला की मौत:पानी भरते समय हुआ...

गुमला थाना क्षेत्र के मोकरो हुडकुटोली गांव में गुरुवार को कुएं में डूबने से 48 वर्षीय सोमारी उरांव की मौत हो गई। यह हादसा पानी भरने के दौरान हुआ। परिजनों ने बताया कि सोमारी उरांव गुरुवार को अपने घर से लगभग 300 मीटर दूर स्थित कुएं में पानी भरने गई थीं। पानी भरते समय अचानक बाल्टी की रस्सी उनके हाथ में लिपट गई। बाल्टी के बड़े और भारी आकार के कारण वह संतुलन खो बैठीं और सीधे कुएं के गहरे पानी में जा गिरीं। हादसे के करीब एक घंटे बाद जब गांव के अन्य लोग कुएं पर पानी भरने पहुंचे, तो उन्होंने पानी में सोमारी की चप्पलें और प्लास्टिक की बाल्टी तैरती देखी। इससे ग्रामीणों को किसी अनहोनी की आशंका हुई। शोर मचाने पर आसपास के लोग इकट्ठा हुए और स्थानीय स्तर पर बांस के लंबे डंडे की मदद से काफी मशक्कत के बाद शव को बाहर निकाला गया। घटना की सूचना मिलने पर सुबह लगभग 10 बजे गुमला थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर कागजी कार्रवाई पूरी की और पोस्टमार्टम करवाया। Source link

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गढ़वा के दंपती ने की पलामू में महिला की हत्या:दो दिनों तक...

पलामू के रेड़मा स्थित झरना टोला में एक महिला का शव मिला था। पुलिस जांच में सामने आया कि गढ़वा के एक दंपती ने उसकी हत्या की थी। यह खुलासा गुरुवार को एसडीपीओ राजीव रंजन ने किया। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी महिला को गिरफ्तार किया है, जबकि उसका पति फरार है। हत्याकांड में उपेन्द्र कुमार गौतम उर्फ रोहित कुमार और उसकी पत्नी चंदा देवी (30) की संलिप्तता सामने आई है। ये दंपती मूल रूप से गढ़वा जिले के बालेखांड़ गांव के निवासी हैं और रेड़मा में उत्तम दुबे के मकान में किराए पर रहते थे। पुलिस ने चंदा देवी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि उसका पति उपेन्द्र फरार है। पुलिस पूछताछ में चंदा देवी ने बताया कि वह अपने पति के साथ मिलकर महिलाओं को घर लाकर उनसे देह व्यापार करवाती थी। घटना 22 अप्रैल की है, जब चंदा ने देह व्यापार के लिए लाई गई महिला से पहले लिए गए मोबाइल और 1000 रुपये वापस मांगे। इस बात पर दोनों के बीच विवाद बढ़ गया, जिसके बाद पति-पत्नी ने मिलकर महिला की हत्या कर दी। हत्या के बाद दंपती ने शव को कमरे में छिपाकर ताला लगा दिया और फरार हो गए। दो दिन बाद 24 अप्रैल की रात को वे वापस लौटे और शव को ठिकाने लगाने की कोशिश की। उन्होंने शव को कमरे से निकालकर बाउंड्री के बाहर फेंक दिया, जिस पर लोगों की नजर पड़ी और उन्होंने पुलिस को सूचना दी। एसपी ने एसडीपीओ राजीव रंजन के नेतृत्व में इस हत्याकांड के उद्भेदन के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। मृत महिला की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। आरोपी चंदा देवी भी उसकी पहचान नहीं बता पा रही है। पुलिस मृतका की पहचान के लिए सीआईजी प्रकाशन करवाएगी। फरार आरोपी उपेन्द्र कुमार गौतम का आपराधिक इतिहास भी लंबा है। उसके खिलाफ गढ़वा के रंका, डंडई, रमकंडा और पलामू के रामगढ़ में आर्म्स एक्ट, अपहरण और पॉक्सो एक्ट के कई मामले पहले से दर्ज हैं। इस कार्रवाई में एसडीपीओ राजीव रंजन, शहर थाना प्रभारी ज्योतिलाल रजवार सहित कई पुलिस पदाधिकारी और सशस्त्र बल शामिल थे। Source link

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