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विवाहिता की मौत, मायके पक्ष का हत्या का आरोप

लोहरदगा|सदर थाना क्षेत्र के जयनाथपुर में एक विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। मृतका की पहचान सुषमा देवी पति जनार्दन खत्री के रूप में हुई है। घटना गुरुवार शाम की बताई जा रही है। घर में महिला का शव फंदे से झूलता हुआ मिलने के बाद परिजनों में अफरा-तफरी मच गई। घटना को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। ससुराल पक्ष का कहना है कि महिला ने फांसी लगाकर आत्महत्या की है, जबकि मायके पक्ष ने इसे हत्या का मामला बताते हुए आरोप लगाया है कि पहले महिला का गला दबाकर हत्या की गई और बाद में साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से शव को फंदे से लटका दिया गया। मृतका के परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। Source link

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राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस : पेसा नियमावली के तहत ग्राम सभा के अधिकारों...

भास्कर न्यूज | लोहरदगा जिला परिषद लोहरदगा सभाकक्ष में शुक्रवार को पेसा नियमावली झारखंड 2025 को लेकर राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। जिसमें पेसा नियमावली के विभिन्न प्रावधानों, ग्राम सभाओं की भूमिका एवं अनुसूचित क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन को सशक्त बनाने संबंधी विषयों पर मास्टर ट्रेनर्स द्वारा विस्तृत जानकारी दी गई। वहीं बताया गया कि पेसा नियमावली का उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को अधिक अधिकार प्रदान करना तथा विकास योजनाओं में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना है। नियमावली के तहत ग्राम सभा को स्थानीय संसाधनों के संरक्षण, विकास योजनाओं की निगरानी, सामाजिक अंकेक्षण, परंपरागत व्यवस्थाओं के संरक्षण एवं सामुदायिक हितों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए हैं। वहीं बताया गया कि नियमावली में ग्राम सभा की नियमित बैठकें, योजनाओं की स्वीकृति एवं निगरानी, सरकारी एवं गैर-सरकारी एजेंसियों द्वारा किए जा रहे कार्यों की समीक्षा, उपलब्ध श्रमबल के उपयोग की योजना, प्रवासी श्रमिकों से संबंधित सूचना एवं संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन तथा सामाजिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं। वहीं जानकारी दी गई कि ग्राम सभा विकास कार्यों की गुणवत्ता की जांच कर सकती है तथा आवश्यकतानुसार संबंधित विभागों को सुझाव एवं निर्देश दे सकती है। इसके अतिरिक्त ग्राम पंचायत एवं अन्य संस्थाओं को ग्राम सभा के प्रति जवाबदेह बनाने का भी प्रावधान किया गया है। वक्ताओं ने कहा कि पेसा नियमावली अनुसूचित क्षेत्रों में लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण को मजबूत करने और स्थानीय समुदायों को निर्णय प्रक्रिया में सहभागी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बताया गया कि कार्यक्रम का उद्देश्य पेसा नियमावली के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा इसके प्रावधानों की व्यापक जानकारी आमजन एवं संबंधित हितधारकों तक पहुंचाना था। मौके पर जिप अध्यक्ष सुखदेव उरांव, डीडीसी राज महेश्वरम, पीडीआइटीडीए सुषमा नीलम सोरेंग, जिला स्तरीय पदाधिकारी, बीडीओ, सीओ सहित अन्य लोग उपस्थित थे। राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में उपस्थित जिले का प्रशासनिक महकमा। Source link

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रांची की सुष्मिता का मसाला ब्रांड, किचन से शुरू किया बिजनेस, 5...

Last Updated:June 13, 2026, 21:55 IST Success Story: झारखंड की राजधानी रांची की सुष्मिता अपना खुद का एक मसाला ब्रांड चलाती हैं. उन्होंने बताया कि महिलाएं घर के किचन से ही अपना बिजनेस शुरू कर सकती हैं. उन्हें बाहर जाने की जरूरत नहीं है, मार्केटिंग भी ऑनलाइन किया जा सकता है. अगर आपके प्रोडक्ट में दम है तो फिर सक्सेस होने से कोई नहीं रोक सकता है. उन्होंने बताया कि कैसे मसाले तैयार किए जाते हैं और कैसे उसकी ब्रांडिंग और प्रोडक्ट की क्वालिटी एश्योर की जाती है. आइये जानते हैं उनकी सफलात के बारे में. सुष्मिता बताती हैं कि घर पर मसाला को बेचना शुरू करना है तो सबसे पहले तो आप खुद मसाला बनाना शुरू करें और अपने आस पड़ोस के लोग को दें और उनसे पूछें कैसा लग रहा है. पहले फ्री में देना शुरू करें और फीडबैक लें. कहने का मतलब है कि पहले आप अपने मसाले की क्वालिटी को सुधार करें. पहले पैसा मत देखें, पहले देखें कि मेरा क्वालिटी कैसा है पहले लोगों को पसंद आना चाहिए, रिश्तेदारों को दें और जब खराब फीडबैक आए तो बिल्कुल भी निराश ना हों. बल्कि, बैठकर देखें कि कहां गलती हो रही है, 50 बार बनाना पड़े 50 पर बनाएं, कोई दिक्कत नहीं है, सफलता पाने के लिए निराश नहीं होना है. इसके बाद आपको पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर ध्यान देना है. आप अपना नाम सोच सकते हैं कि आप किस तरह का ब्रांड का नाम चाहते हैं और फिर आप किसी भी एनीमेशन स्टोर में जाकर डब्बे के ऊपर लिखी जाने वाली सारी जानकारी वहां से बनवा सकते हैं. जैसे एक्सपायरी डेट, इसमें क्या-क्या मिला हुआ है या फिर इसी में कोई यूनिक रेसिपी भी लिख दीजिए कि इस मसाले से आप यह भी बना सकते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google ऐसे में क्या है कि जब लोग डिब्बे लेंगे तो उसमें उनको एक रेसिपी भी दिखेगी तो इस तरीके से एनीमेशन स्टोर जाकर सारे स्टीकर ले लीजिए और डब्बे हाई क्वालिटी के होने चाहिए. क्योंकि दुनिया आपके बाहरी चमक को देखती हैं. अंदर किसी की बात बाद में पता चलती है. इसीलिए जनता को अट्रैक्ट करना है तो बाहरी पैकेजिंग शानदार होनी चाहिए. जब यह हो जाए तो सबसे पहले आप सोशल मीडिया का प्रयोग करें. इंस्टाग्राम, फेसबुक व अपने व्हाट्सएप स्टेटस में यह लगाना शुरू करें और पहले डिस्काउंट में एकदम 50%. निश्चित तौर पर आपको ऑर्डर जरूर आएंगे. इंस्टाग्राम पर अपना ऑफिशल पेज बना लें, कांटेक्ट नंबर, ईमेल आईडी सब कुछ दें. अब देखेंगे आपको धीरे-धीरे एक और दो आर्डर आने लगेंगे. यहीं से आपकी सबसे बड़ी जीत होगी. इसी एक दो आर्डर को अगर आप रिपीट करने में सफल हो जाते हैं तो फिर आपके इसी तरह लॉयल कस्टमर बनते चले जाएंगे. एक बात का विशेष ध्यान रखना है किसी भी बिजनेस को करने में ईमानदारी, लगन और उसके साथ धैर्य की जरूरत होती है, कम से कम 5 साल आपको जी तोड़ मेहनत करना पड़ेगा. इसमें कोई शॉर्टकट नहीं होता है. अगर आप इतना कर लेते हैं तो फिर आपको सफल होने से एक समय के बाद कोई नहीं रोक सकता है, फिर घर बैठे लाख रुपए आराम से आते रहेंगे. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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नलजल योजनाएं बंद, जलमीनार खराब और चापाकल से भी नहीं आ रहा...

् भास्कर न्यूज|लोहरदगा जिले में बढ़ती गर्मी के साथ पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों तक लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए परेशान हैं। कई गांवों में नल-जल योजनाएं बंद पड़ी हैं, जलमीनार खराब हैं और चापाकलों की स्थिति भी दयनीय बनी हुई है। इसके कारण आम लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जिले के विभिन्न हिस्सों से पेयजल संकट की लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। जानकारी के अनुसार, भंडरा प्रखंड के कई गांवों में पेयजल व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। भैसमुंदो गांव में जलमीनार पिछले कई दिनों से खराब पड़ा हुआ है, जबकि आसपास के कई टोलों में महीनों से पानी की आपूर्ति बंद है। ग्रामीणों को मजबूरन दूर-दराज के जलस्रोतों से पानी लाना पड़ रहा है। महिलाओं और बच्चों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ रहा है, जिन्हें प्रतिदिन कई किलोमीटर पैदल चलकर पानी जुटाना पड़ता है। कुडू प्रखंड के डोरोटोली गांव में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यहां सौर ऊर्जा आधारित जलमीनार और अन्य जल योजनाएं होने के बावजूद लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि योजनाओं के रखरखाव की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण अधिकांश सुविधाएं बेकार पड़ी हुई हैं। उनका आरोप है कि संबंधित विभाग द्वारा समय-समय पर निरीक्षण और मरम्मत नहीं किए जाने से समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। शहरी क्षेत्र भी पेयजल संकट से अछूता नहीं है। लोहरदगा बस स्टैंड, जहां प्रतिदिन हजारों यात्रियों का आना-जाना होता है और जहां से हर वर्ष लाखों रुपये का राजस्व प्राप्त होता है, वहां तक पीने के पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है। गर्मी के दिनों में यात्रियों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। इससे प्रशासनिक व्यवस्था और जनसुविधाओं को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीण सावित्री देवी ने बताया कि उन्हें रोजाना दो से तीन किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि घर में छोटे बच्चे होने के बावजूद पानी की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बन गया है। रीना कुमारी ने बताया कि सरकार की नल-जल योजना कुछ दिनों तक चली, लेकिन बाद में बंद हो गई और अब लोग फिर पुराने चापाकलों के भरोसे हैं। मीना देवी ने कहा कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ है। शहर के निवासी रमेश उरांव ने कहा कि बस स्टैंड जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर भी पानी की व्यवस्था नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। वहीं सुनील भगत ने कहा कि कई जलमीनार खराब पड़े हैं, लेकिन उनकी मरम्मत नहीं हो रही है। यदि समय पर ध्यान दिया जाता तो आज लोगों को इस संकट का सामना नहीं करना पड़ता। विशेषज्ञों का मानना है कि भूजल स्तर में लगातार गिरावट, अनियमित वर्षा, जल स्रोतों के संरक्षण की कमी और योजनाओं के कमजोर क्रियान्वयन के कारण स्थिति गंभीर होती जा रही है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में संकट और विकराल रूप ले सकता है। फिलहाल जिलेवासी प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप, खराब जलमीनारों की मरम्मत, नियमित जलापूर्ति तथा स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं, ताकि भीषण गर्मी में उन्हें राहत मिल सके। Source link

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प्रोपेन गैस आपूर्ति की चेन टूटी तो बीएसएल ने पीएनजी को बनाया...

वैश्विक युद्ध के घने बादलों और मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच बीएसएल ने वह कर दिखाया है, जिसकी कल्पना भी मुश्किल थी। ईरान-इजराइल संघर्ष के चलते जब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरू मध्य में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही और आपूर्ति ठप हुई, तो देश के स्टील उत्पादन पर एक बड़ा और गंभीर खतरा मंडराने लगा था। स्टील उत्पादन के लिए सबसे जरूरी माने जाने वाले ईंधन, प्रोपेन गैस की विदेशी सप्लाई चेन टूट चुकी थी। हालात इतने गंभीर हो गए थे कि बीएसएल के स्टोरेज में प्रोपेन का बैकअप घटकर महज 15 दिनों का रह गया था। इस दौरान बीएसएल प्रबंधन ने तुरंत प्रोपेन गैस की जगह पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) को अपनाने का साहसिक फैसला लिया और बीएसएल के इंजीनियरों ने कमाल कर दिखाया। उन्होंने युद्ध स्तर पर दिन-रात एक कर काम किया और महज 7 दिन के रिकॉर्ड समय में 7 किमी लंबी पीएनजी गैस पाइपलाइन खड़ी कर दी। इससे प्लांट को करोड़ों रुपए का सीधा फायदा भी हो रहा है। बीएसएल को प्रोपेन गैस की तुलना में पीएनजी गैस 40 प्रतिशत कम दर पर मिल रहा है। यानी प्रोपेन गैस पर प्रतिमाह करीब 6 करोड़ खर्च की जगह अब मात्र 3.60 करोड़ खर्च कर पीएनजी गैस मिलने लगा है। चर्चा है कि अगर समय रहते कोई ठोस फैसला न लिया जाता, तो स्टील मेल्टिंग शॉप, कोल्ड रोलिंग मिल और गैल्वेनाइजिंग लाइन जैसे विभागों में काम रुक जाता। कार्बन उत्सर्जन में आई कमी, पर्यावरण संरक्षण होगा 15 अप्रैल 2026 को 7 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन में गैस छोड़ दी गई और इसका ट्रायल पूरी तरह से सफल रहा। पिछले करीब डेढ़ महीने से प्लांट पीएनजी के दम पर अपनी पूरी रफ्तार से दौड़ रहा है। बीएसएल प्रबंधन के इस मास्टर स्ट्रोक से प्लांट को चौतरफा और दीर्घकालिक फायदे हुए हैं। महंगी प्रोपेन के मुकाबले पीएनजी बेहद किफायती और सस्ती पड़ रही है। इस ऐतिहासिक बदलाव से प्लांट का ईंधन खर्च करीब 40 फीसदी तक घट गया है। लागत में आई इस भारी कमी के कारण, बीते डेढ़ महीने में ही संयंत्र को करोड़ों रुपए की बंपर बचत होने का अनुमान है, जो मुनाफे के रूप में दर्ज होगी। पहले प्रोपेन के बड़े पैमाने पर भंडारण (स्टोरेज) और ट्रकों से ट्रांसपोर्टेशन का भारी झंझट रहता था। अब पीएनजी के सीधे पाइपलाइन से आने के कारण वे सारे सुरक्षा जोखिम पूरी तरह खत्म हो गए हैं। पीएनजी के इस्तेमाल से प्लांट के कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आई है। इससे पर्यावरण संरक्षण को बल मिला है और बीएसएल ने ग्रीन स्टील के निर्माण की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा दिए हैं। मिशन मोड : सात दिन का चैलेंजिंग डेलाइजिंग हालात की गंभीरता और समय की कमी को देखते हुए बीएसएल प्रबंधन ने तुरंत प्रो पेन की जगह पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) को अपनाने का फैसला लिया। प्लांट के निदेशक प्रभारी प्रिय रंजन और कार्यपालक निदेशक (वर्क्स) अनूप कुमार दत्त के नेतृत्व में यूटिलिटी विभाग ने मोर्चा संभाला। बिना कोई समय गवाएं इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) के साथ आनन-फानन में गैस सेल्स एग्रीमेंट साइन किया गया। समझौते के तहत, आईओसीएल ने प्लांट की बाहरी सीमा तक 2 किलोमीटर की पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा किया गया। Source link

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धालभूमगढ़ के चोयरा में सात एकड़ में फलों का साम्राज्य, बाजार में...

महेंद्र साव | धालभूमगढ़ पूर्वी सिंहभूम जिले के धालभूमगढ़ के चोयरा निवासी समाजसेवी भूतेष पंडित ने अपनी सात एकड़ जमीन पर फलों का बड़ा बागान तैयार किया है। वे राजनीति और समाजसेवा की व्यस्तता के बीच भी बागवानी का शौक निभाते हैं। बागान की खास बात यह है कि भूतेष पंडित यहां के कीमती और रसीले फल बाजार में नहीं बेचते। उनका कहना है कि बागान व्यावसायिक लाभ के लिए नहीं लगाया। शौक और पर्यावरण प्रेम इसकी वजह है। बागान में आने वाला हर अतिथि, मित्र या राहगीर खाली हाथ नहीं लौटता। वे ताजे फल भेंट करके विदा करते हैं। करीब पांच साल पहले उन्होंने बागान की शुरुआत की थी। 200 से अधिक आम के पौधे लगाए थे। अब ये पौधे घने पेड़ बन चुके हैं। इस सीजन में छोटे-छोटे पेड़ों पर आम के गुच्छे इतने लदे हैं कि शाखाएं झुककर मिट्टी को छू रही हैं। बागान में दुनिया का सबसे महंगा माना जाने वाला मियाजाकी आम भी है। अल्फांसो, दशहरी, लंगड़ा, हेमसागर, मल्लिका समेत दर्जनों किस्में हैं। यहां बारहमासी आम के पेड़ भी हैं। इनमें सालभर आम फलते हैं। आम के साथ अमरूद की कई किस्में भी हैं। सबसे अलग बैंगनी अमरूद है। इसकी पत्तियां, डालियां, फल गहरे बैंगनी और कत्थई रंग के होते हैं। इलाहाबादी अमरूद और देसी किस्मों के पेड़ों पर भी भारी मात्रा में फल आए हैं। करीब दो साल पहले वे मालदा की नर्सरी से जामरुल वाटर एप्पल के दो पौधे लाए थे। अब उन पेड़ों पर प्रचुर मात्रा में जामरुल लगे हैं। बागान में मीठी इमली, नींबू, कई प्रजातियों के कटहल, नारियल, जामुन, बेर, बेल, पपीता जैसे फलदार पेड़ भी हैं। बागान के बीचोंबीच ठहरने के लिए भवन और आलीशान फार्म हाउस बनाया गया है। शांत माहौल और फलों की खुशबू के कारण यह वीआईपी लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना है। हर साल जमशेदपुर के प्रसिद्ध अस्पताल टीएमएच के डॉक्टरों की टीम परिवार के साथ यहां पिकनिक मनाने आती है। धालभूमगढ़ और आसपास से आने वाले लोग उनके इस प्रयास, मेहनत और फलों को मुफ्त बांटने की परंपरा की तारीफ करते हैं। बागान में फल दिखाते भूतेष पंडित। Source link

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कीटनाशक खाकर विवाहिता ने की खुदकुशी

दुमका| शिकारीपाड़ा थाना क्षेत्र के चकलता गांव में एक 20 वर्षीय विवाहिता ने जहरीला पदार्थ खाकर खुदकुशी कर ली है। यह घटना गुरुवार देर रात की है। स्वजन के मुताबिक मोनिका टुडू को कोई संतान नहीं थी। रात में किसी बात को लेकर वह पति से नाराज हुई। आवेश में आकर उसने कीटनाशक दवा खा ली। हालत बिगड़ने पर इलाज के लिए दुमका के फूलो-झानो मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां इलाज के दौरान मौत हो गई। नगर थाना की पुलिस ने महिला के स्वजन का फर्द बयान लिया। शव का पोस्टमार्टम कराने की कार्रवाई की। पुलिस ने इस मामले में यूडी केस दर्ज किया है।नगर थाना की पुलिस ने महिला के स्वजन का फर्द बयान लिया। Source link

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मोदी सरकार के 12 वर्ष: भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष शाही ने गिनाईं उपलब्धियां

भास्कर न्यूज |दुमका भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व स्वास्थ्य मंत्री भानु प्रताप शाही ने शुक्रवार को दुमका परिसदन में आयोजित प्रेसवार्ता में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष देश के विकास और सुशासन के लिए ऐतिहासिक रहे हैं। शाही ने कहा कि वित्तीय हस्तांतरण के मामले में झारखंड को 2004-14 के दौरान 56,090 करोड़ मिले थे। 2014-24 के दौरान यह राशि बढ़कर 2,26,444 करोड़ हो गई। उन्होंने बताया कि जून 2026 तक यह आंकड़ा 3,17,069 करोड़ तक पहुंच चुका है। यह 2004-14 की तुलना में 465 प्रतिशत अधिक है। बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में उन्होंने कहा कि रेलवे का वार्षिक औसत बजट 2009-14 के 457 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में 7,302 करोड़ हो गया है। झारखंड को जोड़ने वाली 7 वंदे भारत ट्रेनें संचालित हैं। 57 रेलवे स्टेशनों का आधुनिक पुनर्विकास जारी है। सड़क क्षेत्र में 3,633 किमी से अधिक राष्ट्रीय राजमार्ग निर्मित किए गए हैं। स्वास्थ्य के क्षेत्र में उन्होंने एम्स देवघर और दुमका सहित पांच जिलों में केंद्र द्वारा स्वीकृत मेडिकल कॉलेजों का उल्लेख किया। आदिवासी कल्याण के संदर्भ में उन्होंने धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत 79,150 करोड़ के बजट का जिक्र किया। प्रेसवार्ता में प्रदेश उपाध्यक्ष सुनील सोरेन, प्रदेश प्रवक्ता अमित मंडल, भाजपा जिलाध्यक्ष रूपेश मंडल सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। Source link

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Bokaro-Jharkhand MEMU Trains Resume | WBCS Exam Relief

दक्षिण पूर्व रेलवे के आद्रा मंडल ने पश्चिम बंगाल सिविल सेवा (WBCS) परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों और आम यात्रियों की सुविधा के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मंडल ने 14 जून को पहले रद्द की गई कुछ मेमू ट्रेनों को फिर से चलाने का फैसला किया है . इस कदम से बोकारो, चंद्रपुरा, भोजूडीह, गोमो सहित झारखंड के कई क्षेत्रों के यात्रियों को लाभ मिलेगा। रेलवे के अनुसार, ये ट्रेनें पहले रोलिंग ब्लॉक और मरम्मत कार्यों के कारण रद्द या आंशिक रूप से रद्द की गई थीं। हालांकि, WBCS परीक्षा में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की यात्रा को देखते हुए, इन ट्रेनों को सामान्य रूप से बहाल करने का निर्णय लिया गया है। जिन मेमू ट्रेनों को बहाल किया गया है, उनमें आद्रा–मिदनापुर–आद्रा मेमू (68090/68089), आद्रा–विल्ली–आद्रा मेमू (68077/68078), भोजूडीह–चंद्रपुरा–भोजूडीह मेमू (68079/68080) और चक्रधरपुर–गोमो–चक्रधरपुर मेमू (18116/18115) शामिल हैं। ये सभी ट्रेनें 14 जून को अपने निर्धारित समय और मार्ग पर चलेंगी। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि इस निर्णय का उद्देश्य परीक्षा के दिन अभ्यर्थियों को उनके परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में होने वाली असुविधा को दूर करना है। इससे आम यात्रियों को भी यात्रा में सुविधा मिलेगी। दक्षिण पूर्व रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा से पहले ट्रेनों की अद्यतन स्थिति की जानकारी प्राप्त कर लें और रेलवे द्वारा जारी नवीनतम सूचनाओं पर ध्यान दें। इस फैसले से बोकारो और आसपास के हजारों यात्रियों को सुविधा मिलने की उम्मीद है। Source link

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प्रोटीन और फाइबर का पावरहाउस है मिक्स दाल चीला, मिनटों में तैयार...

X प्रोटीन और फाइबर का पावरहाउस है ये चीला, मिनटों में तैयार करें हेल्दी नाश्ता   अगर आप हेल्दी और स्वादिष्ट नाश्ते की तलाश में हैं, तो मिक्स दाल चीला अच्छा ऑप्शन हो सकता है. यह नाश्ता प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होता है और पूरे परिवार के लिए फायदेमंद है. मिक्स दाल चीला बनाने के लिए हरा मूंग दाल, पीला मूंग दाल, काला चना और अरवा चावल को रातभर पानी में भिगो दें. अगले दिन इसमें हरी मिर्च और अदरक मिलाकर पीस लें. ध्यान रखें कि घोल न ज्यादा पतला हो और न ज्यादा गाढ़ा. अब इसमें कद्दूकस की हुई लौकी, बारीक कटा प्याज, नमक, हल्दी, गरम मसाला और जीरा-अदरक-लहसुन-मिर्च का पेस्ट मिलाकर अच्छी तरह फेंट लें. इसके बाद गर्म तवे या पैन पर हल्का सरसों तेल लगाकर घोल को चीले की तरह फैलाएं और दोनों तरफ से सुनहरा व कुरकुरा होने तक सेंक लें. इसे टमाटर या धनिया की चटनी के साथ परोसें. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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