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rain in nautapa weather prediction failed astrological meaning of unseasonal rain bad...

होमताजा खबरधर्म नौतपा में हो गई बारिश, ये आंधी-बूंदाबांदी किस अशुभ संकेत की तरह इशारा! Last Updated:May 29, 2026, 19:49 IST Rain in Nautapa Astro Meaning: नौतपा खत्म होने में अभी कुछ दिन बचे थे लेकिन मौसम का यह बदला हुआ रूप चर्चा का विषय बना हुआ है. कोई इसे प्रकृति का संकेत मान रहा है तो कोई जलवायु परिवर्तन का असर. लेकिन इतना तय है कि बदलता मौसम अब लोगों की चिंता बढ़ाने लगा है. पारंपरिक मान्यताओं में कहा जाता है कि अगर नौतपा पूरी तरह से नहीं तपे, तो मानसून कमजोर हो सकता है और खेती पर असर पड़ सकता है. आइए जानते हैं नौतपा में अगर बारिश हो जाए तो यह भविष्य में किस घटना के संकेत मिलते हैं… Rain in Nautapa Astro Meaning: सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते ही नौतपा शुरू हो जाता है और साल 2026 में 25 मई से शुरू हुआ नौतपा 2 जून तक चलने वाला है. आमतौर पर नौतपा के दौरान भीषण गर्मी पड़ती है और सूरज की तपिश अपने चरम पर होती है, लेकिन इस बार कई राज्यों में नौतपा के बीच अचानक बारिश, तेज आंधी और बूंदाबांदी देखने को मिली. मौसम के इस बदले मिजाज ने लोगों को हैरान कर दिया है. वहीं ज्योतिष और पारंपरिक मान्यताओं में इसे कई तरह के संकेतों से जोड़कर देखा जा रहा है. सोशल मीडिया पर भी लोग सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर नौतपा में बारिश होना किस बात की ओर इशारा कर रहा है. नौतपा के फायदेज्योतिष शास्त्र के अनुसार, नौतपा के नौ दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं. मान्यता है कि इस दौरान सूर्य की तेज गर्मी धरती को तपाती है, जिससे आने वाले मानसून का संतुलन बनता है. मान्यता है कि नौतपा जितना ज्यादा तपता है, उतना ही अच्छा मानसून माना जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार नौतपा की तेज गर्मी से वातावरण में मौजूद कई हानिकारक बैक्टीरिया और कीटाणु खत्म होते हैं. इससे फसलों को फायदा मिलता है और बारिश का चक्र भी संतुलित रहता है. किसानों का मानना है कि अच्छी गर्मी पड़ने से खेत मानसून के लिए तैयार हो जाते हैं. वहीं आम, लीची और दूसरी गर्मी की फसलों को भी इसका लाभ मिलता है. नौतपा में बारिश के नुकसानअगर नौतपा के दौरान बार-बार बारिश, आंधी या बूंदाबांदी हो जाए तो इसे अच्छा संकेत नहीं माना जाता. पुराने जानकारों का मानना है कि अगर नौतपा के दौरान लगातार बारिश या आंधी-तूफान हो जाए तो इसका असर बारिश के पूरे सीजन पर पड़ सकता है. अगर अगली फसल के लिए सही से बारिश ना हुई तो यह किसान समेत सभी आमजन के लिए नुकसान की खबर हो सकती है. ऐसा करने से मंहगाई बढ़ेगी, जो पहले से ही काफी है. कुछ लोग इसे प्राकृतिक असंतुलन और मौसम में बदलाव का संकेत भी मानते हैं. तेज गर्मी नहीं पड़ने से खेती और फसलों पर असर पड़ने की आशंका रहती है. कई बार अचानक बारिश से सब्जियों और फलों की फसल खराब हो जाती है. मौसम का तेजी से बदलता पैटर्नविशेषज्ञों के मुताबिक नौतपा में बारिश होने का सीधा संबंध वेस्टर्न डिस्टर्बेंस और बदलते जलवायु चक्र से भी हो सकता है. पिछले कुछ वर्षों में मौसम का पैटर्न तेजी से बदला है, जिसकी वजह से गर्मी, बारिश और तूफान का समय भी प्रभावित हो रहा है. यही कारण है कि मई-जून जैसे गर्म महीनों में भी कई इलाकों में तेज बारिश देखने को मिल रही है. बारिश से लोगों को राहतइस बीच तेज हवाओं और बूंदाबांदी से लोगों को गर्मी से राहत जरूर मिली है, लेकिन किसानों की चिंता भी बढ़ गई है. कई जगहों पर तेज हवा और बारिश के कारण फसलों को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं. मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी कई राज्यों में आंधी और बारिश की संभावना जताई है. फिलहाल नौतपा के दौरान मौसम का यह बदला हुआ रूप चर्चा का विषय बना हुआ है. कोई इसे प्रकृति का संकेत मान रहा है तो कोई जलवायु परिवर्तन का असर. लेकिन इतना तय है कि बदलता मौसम अब लोगों की चिंता बढ़ाने लगा है. About the Author Parag SharmaChief Sub Editor पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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CBSE: 12वीं री-इवैल्यूएशन और री-चेकिंग को लेकर अपडेट, बढ़ गई डेट, हेल्‍पलाइन...

Last Updated:May 29, 2026, 18:46 IST CBSE class 12 re-evaluation 2026: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी CBSE 12वीं रिजल्ट के बाद री-इवैल्यूएशन को लेकर नया अपडेट है.बोर्ड ने साफ कर दिया है कि 1 जून 2026 से री-इवैल्यूएशन और मार्क्स वेरिफिकेशन की प्रक्रिया शुरू होगी पहले यह प्रक्रिया 29 मई से ही शुरू होनी थी. ख़बरें फटाफट CBSE Board Result 2026, CBSE Re-evaluation Process, CBSE 12th Mark Verification: सीबीएसई रीवैल्‍यूएशन 1 जून से शुरू होगी. CBSE class 12 re-evaluation 2026: CBSE 12वीं बोर्ड रिजल्ट 2026 के बाद अब री-इवैल्यूएशन और री-चेकिंग प्रक्रिया को लेकर नया अपडेट सामने आया है. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी CBSE अब 1 जून 2026 से 12वीं के छात्रों के लिए री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है. यह सुविधा उन छात्रों के लिए होगी जिन्होंने अपनी उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी मंगवाई है हालांकि बोर्ड ने पहले अपने नोटिस में बताया था कि मार्क्स वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन का पोर्टल 29 मई 2026 से खुल जाएगा, लेकिन अब जारी नए प्रेस स्टेटमेंट में तारीख बदल दी गई है. बोर्ड के मुताबिक अब यह प्रक्रिया 1 जून से शुरू होगी. स्कैन कॉपी लेने वाले छात्र ही कर सकेंगे आवेदन CBSE की नई व्यवस्था के तहत वही छात्र री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर पाएंगे जिन्होंने पहले अपनी उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी हासिल की है. स्कैन कॉपी देखने के बाद छात्र तय कर सकेंगे कि उन्हें किन सवालों में दोबारा जांच की जरूरत महसूस हो रही है.बोर्ड का कहना है कि इस प्रक्रिया का मकसद छात्रों को ज्यादा पारदर्शी और निष्पक्ष व्यवस्था देना है ताकि वे अपनी कॉपी खुद देखकर फैसला ले सकें. OSM सिस्टम को लेकर अब भी जारी हैं शिकायतें इस साल CBSE ने पहली बार बड़े स्तर पर ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम यानी OSM लागू किया था. इसके तहत छात्रों की कॉपियों को डिजिटल तरीके से जांचा गया, लेकिन रिजल्ट जारी होने के बाद से सोशल मीडिया पर लगातार छात्रों की शिकायतें सामने आ रही हैं.कई छात्रों का कहना है कि उन्हें जो स्कैन कॉपी मिली है उसमें तस्वीरें धुंधली दिखाई दे रही हैं. वहीं कुछ छात्रों ने आरोप लगाया है कि उनकी पूरी उत्तर पुस्तिका दिखाई ही नहीं दे रही या कुछ पेज गायब हैं. इन शिकायतों के कारण छात्रों में काफी चिंता और घबराहट देखी जा रही है. इसी विवाद और छात्रों की परेशानियों को देखते हुए CBSE ने मदद के लिए 24×7 टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-11-8004 जारी किया है. इसके अलावा छात्र और अभिभावक info.cbse@nic.in और resultcbse2026@cbseshiksha.in पर ईमेल भेजकर भी अपनी शिकायत या सवाल दर्ज करा सकते हैं. लाखों छात्रों ने मांगी स्कैन कॉपी CBSE की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक इस बार बड़ी संख्या में छात्रों ने अपनी उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी मांगी है.बोर्ड के अनुसार कुल 4 लाख 4 हजार 319 आवेदन स्कैन कॉपी के लिए प्राप्त हुए वहीं छात्रों ने कुल 11 लाख 31 हजार 961 उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपी मांगी.अब तक बोर्ड की ओर से 8 लाख 98 हजार 214 उत्तर पुस्तिकाएं डिजिटल तरीके से उपलब्ध कराई जा चुकी हैं. CBSE ने अपने 26 मई 2026 के बुलेटिन में कहा था कि बाकी लंबित स्कैन कॉपी भी 27 मई तक छात्रों के रजिस्टर्ड ईमेल आईडी और आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध करा दी जाएंगी. About the Author Dhiraj Raiअसिस्टेंट एडिटर न्यूज़18 हिंदी (Network 18) डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कार्यरत. न्‍यूज 18 में एजुकेशन, करियर, सक्‍सेस स्‍टोरी की खबरों पर. करीब 15 साल से अधिक मीडिया में सक्रिय. हिन्दुस्तान, दैनिक भास्कर के प्रिंट व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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Agriculture tips | बाड़मेर मंगले की बेरी में बूंद बूंद सिंचाई से...

होमताजा खबरकृषि जहां बबूल और झाड़ियां वहां 50°C में भी हरियाली! इस गांव ने तो कमाल कर दिया Last Updated:May 29, 2026, 17:38 IST Green Garden In Desert : बाड़मेर के मंगले की बेरी गांव ने रेगिस्तान में हरियाली उगाकर सबको चौंका दिया है. जहां कभी सिर्फ बबूल और सूखी जमीन नजर आती थी, वहां अब 4 हजार से ज्यादा पौधे लहलहा रहे हैं. ग्रामीणों ने बूंद-बूंद सिंचाई तकनीक से 50 डिग्री तापमान में भी इस इलाके को हराभरा बना दिया, जो अब पूरे राजस्थान के लिए प्रेरणा बन रहा है. ख़बरें फटाफट बाड़मेर. सरहदी बाड़मेर के तपते रेगिस्तान में स्थित मंगले की बेरी गांव में जहां कभी बंजर जमीन, बबूल और झाड़ियां नजर आती थीं, वहां अब हरियाली की चादर बिछी हुई है. नीम, शीशम, आंवला, नींबू, केर और गुलमोहर सहित 12 किस्मों के 4 हजार से ज्यादा पौधे लहलहा रहे हैं. खास बात यह है कि 50 डिग्री तापमान वाले इलाके में ग्रामीणों ने बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति से इन पौधों को सींचकर रेगिस्तान में सुकून देने वाला बगीचा तैयार कर दिया है. सरहदी बाड़मेर जिले के इस गांव ने ऐसा काम कर दिखाया है, जो किसी मिसाल से कम नहीं माना जा रहा. आडेल पंचायत समिति के मंगले की बेरी में जहां कभी सूखी जमीन और झाड़ियां दिखाई देती थीं, वहां आज दूर-दूर तक हरियाली नजर आती है. भीषण गर्मी और तेज तापमान के बीच यह जगह लोगों को ठंडक और सुकून का एहसास करा रही है. गांव के लोगों की सामूहिक मेहनत और पानी बचाने वाली तकनीक ने इस पूरे इलाके की तस्वीर बदल दी है. बूंद-बूंद सिंचाई से बदली गांव की तस्वीरइस इलाके में सबसे बड़ी चुनौती कम पानी के बीच पौधों को जिंदा रखना था. इसके लिए ग्रामीणों ने बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति अपनाई. पानी की हर बूंद का सही उपयोग करते हुए पौधों तक नमी पहुंचाई गई. लगातार देखभाल और संरक्षण का ही नतीजा है कि आज ये पौधे बड़े होकर घनी हरियाली में बदल चुके हैं. ग्रामीणों का कहना है कि शुरुआत में लोगों को भरोसा नहीं था कि रेगिस्तान जैसी जगह पर इतनी हरियाली तैयार हो सकती है. लेकिन गांव के लोगों ने मिलकर पौधों की देखभाल की और अब यह जगह पूरे इलाके के लिए प्रेरणा बन चुकी है. 8 हेक्टेयर में तैयार हुआ हरियाली का क्षेत्रआज 50 डिग्री तापमान में भी यहां ठंडक और सुकून का एहसास होता है. स्थानीय ग्रामीण गोरखाराम बताते हैं कि अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो तो रेगिस्तान में भी हरियाली उगाई जा सकती है. उन्होंने बताया कि पहले चरण में 5 हेक्टेयर भूमि पर नीम, शीशम, आंवला, नींबू, केर और गुलमोहर सहित करीब 12 किस्मों के 2500 से अधिक पौधे लगाए गए थे, जो अब अच्छी तरह विकसित हो चुके हैं. वहीं दूसरे चरण में 3 हेक्टेयर क्षेत्र में 1500 से ज्यादा पौधे लगाए गए हैं. लगातार बढ़ती हरियाली के कारण अब यह इलाका पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बनता जा रहा है. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना से मिला सहयोगजलग्रहण विकास एवं भू संरक्षण विभाग की ओर से प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के तहत इस कार्य को आगे बढ़ाया गया. पहले चरण में 5 हेक्टेयर भूमि पर चारागाह विकास और उद्यानिकी कार्य के तहत करीब 2500 पौधे लगाए गए. इनमें शीशम, सागवान, आम, इमली, नीम, गुलमोहर, चूरेल, बादाम, मौसमी, आंवला, बेर, गुंदा, अनार, शहतूत, सहजन और कैक्ट्स जैसी कई प्रजातियां शामिल हैं. इसके बाद दूसरे चरण में 3 हेक्टेयर भूमि पर 1500 पौधे और लगाए गए. अब यह पूरा क्षेत्र रेगिस्तान के बीच हरियाली की नई पहचान बनता जा रहा है. About the Author Anand Pandey आनंद पाण्डेय वर्तमान में News18 हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Barmer,Barmer,Rajasthan Source link

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सब्जियों की खेती से बदल गई इस किसान की किस्मत, अब सालाना...

होमताजा खबरकृषि सब्जियों की खेती से बदल गई इस किसान की किस्मत, अब सालाना कमा रहें लाखों रुपये Last Updated:May 29, 2026, 16:29 IST Agriculture News: सीधी जिले के ग्राम बराज निवासी किसान पूरनलाल कुशवाहा 5 एकड़ जमीन पर बड़े पैमाने में सब्जियों की खेती कर रहे हैं. इसमें लौकी, करेला, भिंडी, परवल, गोभी समेत कई मौसमी हरी सब्जियां शामिल है. किसान पूरनलाल कुशवाहा सालाना 6 लाख रुपये में कमा रहे हैं सीधी जिले के ग्राम बराज निवासी किसान पूरनलाल कुशवाहा ने यह साबित कर दिया है कि मेहनत, सही सोच और आधुनिक तकनीक के दम पर खेती भी सफलता की नई कहानी लिख सकती है. कभी आर्थिक तंगी से जूझने वाले पूरनलाल आज हरी सब्जियों की खेती से सालाना 5 से 6 लाख रुपये तक की कमाई कर रहे हैं. उनकी सफलता अब पूरे इलाके के किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है. पूरनलाल कुशवाहा ने लोकाल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि करीब 14 साल पहले उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी. परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया था और रोजगार के लिए उन्हें इधर-उधर भटकना पड़ता था. ऐसे समय में उन्होंने खेती में कुछ नया करने का फैसला लिया. उन्होंने महज 50 डिसमिल जमीन पर आधुनिक तकनीक से हरी सब्जियों की खेती शुरू की. शुरुआत में कई चुनौतियां आईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते रहे. धीरे-धीरे उन्हें खेती का अनुभव मिलता गया और उनकी फसल की गुणवत्ता बेहतर होती गई. बाजार में उनकी सब्जियों की मांग बढ़ने लगी. इसके बाद उन्होंने 5 एकड़ जमीन लीज पर लेकर खेती का दायरा बढ़ाया. लगातार मेहनत और समझदारी भरे फैसलों के दम पर उन्होंने अपनी कमाई से 5 एकड़ जमीन खरीद ली. अब वे उसी जमीन पर बड़े पैमाने पर लौकी, करेला, भिंडी, परवल, गोभी समेत कई मौसमी हरी सब्जियों की खेती कर रहे हैं हरी सब्जियों की खेती से सालाना लाखों कमा रहेपूरनलाल आधुनिक खेती के साथ जैविक खाद और संतुलित सिंचाई पद्धति का इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे उत्पादन बढ़ने के साथ उनकी सब्जियों की गुणवत्ता भी बेहतर बनी रहती है. यही वजह है कि बाजार में उनकी सब्जियों की अलग पहचान बन चुकी है. उन्हें अच्छी कीमत मिलती है. इस पूरे सफर में उनकी पत्नी मधु देवी और बच्चों ने हर कदम पर उनका साथ दिया. खेतों में मेहनत से लेकर घर की जिम्मेदारियों तक, परिवार ने हमेशा उनका सहयोग किया. इसी वजह से वे खेती पर पूरा ध्यान दे सके. आज उनके दोनों बेटे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं. परिवार खुशहाल जीवन जी रहा है.पूरनलाल कुशवाहा की कहानी यह बताती है कि यदि किसान नई तकनीक अपनाकर मेहनत और धैर्य के साथ खेती करें तो कृषि भी सम्मानजनक आय का मजबूत जरिया बन सकती है. आज दूर-दूर से किसान उनके खेत देखने पहुंचते हैं. उनसे आधुनिक खेती की जानकारी लेकर प्रेरणा हासिल कर रहे हैं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Sidhi,Madhya Pradesh Source link

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आगरा में आलू की खेती करने वाले किसानो को मिल रहा लागत...

Last Updated:May 29, 2026, 15:27 IST आगरा के किसान नेता मोहन सिंह चाहर ने बताया कि आलू किसान बेहद परेशान है. उन्हें उनका लागत मूल्य तक मिल नहीं पा रहा है. उन्होंने कहा कि किसानों की 1 हजार रूपये एक कुंटल लागत आती है लेकिन बाजारों में उन्हें सिर्फ 650 या 700 का भाव मिल रहा है. ऐसे में लाभ मूल्य तो दूर लागत मूल्य तक नहीं निकल रही है. किसान नेता ने बताया कि उद्यान मंत्री ने वादा किया है कि आगरा का आलू सड़ने या फेंकने नहीं दिया जायेगा. आगराः आगरा में बड़े पैमाने पर आलू की खेती की जाती है. इस सीजन का आलू बदहाल स्थिति में है. आलू किसान ने बताया कि लागत मूल्य तक नहीं निकल पा रहा है. उन्होंने कहा कि कोल्ड में आलू रखा हुआ है लेकिन उसे कोई ले नहीं रहा है. यदि स्थिति एसी ही रही तो किसान भारी नुकसान और कर्ज तक में डूब सकते है. किसानों से सरकार से अपील कि है की पहले की तरह आलू अन्य राज्यों और देशो में भेजा जाये. जिससे उन्हें लागत और लाभ मूल्य मिल सके. किसान नेता मोहन सिंह चाहर ने बताया कि आगरा का आलू यूपी ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों और देशों तक मशहूर है, लेकिन वर्तमान हालत बहुत ज्यादा खराब है किसान हताश है ऐसे में आलू सड़ने तक का डर अब किसानों को सताने लगा है. नहीं मिल पा रहा है लागत मूल्य आगरा के किसान नेता मोहन सिंह चाहर ने बताया कि आलू किसान बेहद परेशान है. उन्हें उनका लागत मूल्य तक मिल नहीं पा रहा है. उन्होंने कहा कि किसानों की 1 हजार रूपये एक कुंटल लागत आती है लेकिन बाजारों में उन्हें सिर्फ 650 या 700 का भाव मिल रहा है. ऐसे में लाभ मूल्य तो दूर लागत मूल्य तक नहीं निकल रही है. किसान नेता ने बताया कि उद्यान मंत्री ने वादा किया है कि आगरा का आलू सड़ने या फेंकने नहीं दिया जायेगा. आगरा का आलू ओडिशा भेजा जायेगा, लेकिन काफी वक़्त हो जाने के बाद भी अबतक आलू कोल्ड में ही है, ऐसे में किसानों की चिंता लगातर बढ़ती जा रही है. किसान नेता ने कहा कि पहले की तरह जैसे नेपाल, भूटान, मलेशिया आदि आगरा का आलू जाता था उसी तरह इस बार भी आलू बाहर देशों में भेजा जाये जिससे आगरा के किसान भुखमरी की कगार पर ना आएं. कर्ज लेकर किसान करते हैं आलू की खेती मोहन सिंह चाहर ने लोकल 18 से बताया कि आलू की खेती के लिए कई किसान कर्ज तक लेते है. वह समझते है कि जब आलू बिकेगा तो कर्ज वापस कर देंगे लेकिन इस सीजन में आलू की स्थिति काफी ज्यादा बदहाल स्थिति में है. किसानों को लागत मूल्य तक नहीं मिल रहा है ऐसे में वह कर्ज कैसे अदा कर पाएंगे. उन्होंने कहा कि कर्ज में डूबा किसान आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर हो जाता है इसलिए सरकार से अपील है कि जल्द आलू किसानों की ओर कुछ सोचा जाये अन्यथा स्थिति गंभीर हो सकती है. किसान नेता ने कहा कि यदि किसानों का आलू निर्यात नहीं कराया गया तो एक समय आएगा कि आगरा का आलू सड़को पर सड़ता हुआ दिखेगा और किसान कर्ज के कारण रोते हुए दिखेंगे, यह चिंता का विषय है जल्द आलू को अन्य राज्यों और देशों में निर्यात कराया जाये यही सरकार से अपील है. About the Author Rajneesh Kumar Yadav मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Agra,Uttar Pradesh Source link

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NEET Paper Leak Exclusive LIVE: नीट पेपर लीक पर बोले धर्मेंद्र प्रधान-...

नई दिल्ली (NEET UG Paper Leak Case LIVE). नीट यूजी परीक्षा विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अहम सुनवाई से ठीक पहले, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने कोर्ट के सामने हलफनामा दाखिल किया है. इस हलफनामे के जरिए एनटीए ने देश की सर्वोच्च अदालत को भरोसा दिलाने की कोशिश की है कि परीक्षा की निष्पक्षता, शुचिता और पारदर्शिता को बहाल करने के लिए केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर बड़े बदलाव किए जा चुके हैं. एनटीए ने कोर्ट को बताया कि वह केवल पुरानी गलतियों को सुधारने में ही नहीं लगी है, बल्कि भविष्य के लिए ऐसा अभेद्य सुरक्षा चक्रव्यूह तैयार कर चुकी है जिसे भेद पाना पेपर लीक माफियाओं के लिए नामुमकिन होगा. NEET UG Paper Leak Case LIVE: सुरक्षा के लिए सेना और राज्यों की मदद से सुधरेगा एनटीए का ढांचा नीट यूजी पेपर लीक मामला लाइव: सरकार इस पूरी परीक्षा व्यवस्था की कमियों को जड़ से सुधारने में रात-दिन जुटी हुई है, ताकि जो बच्चे अपनी पढ़ाई में ईमानदारी से लगे हैं, उनके साथ कोई अन्याय न हो. यह ध्यान रखना जरूरी है कि एनटीए (NTA) का गठन खुद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर किया गया था और इसी एजेंसी ने देश की बड़ी और प्रतिष्ठित परीक्षाएं जैसे जेईई (JEE), सीयूईटी (CUET) और नेट (NET) को सफलतापूर्वक संपन्न कराया है. आज के दौर में साइबर चुनौतियां (Cyber Challenges) नई और जटिल दुनिया बन चुकी हैं, क्योंकि जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे परीक्षा में सेंध लगाने के तरीके भी बदल रहे हैं. इसी डिजिटल और तकनीकी बदलाव का डटकर मुकाबला करने के लिए सरकार एनटीए के पूरे सुरक्षा तंत्र को आधुनिक और पूरी तरह लीक-प्रूफ बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है. NEET UG Paper Leak Case LIVE: नीट पेपर लीक पर जीरो टॉलरेंस नीट यूजी पेपर लीक मामला लाइव: केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि देश के बच्चों का हित सरकार के लिए सबसे सर्वोपरि है और उनकी पढ़ाई की गरिमा को हर हाल में बहाल किया जाएगा. इसी कड़ी में रक्षा मंत्री के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की गई है, जिसके तहत प्रश्नपत्रों को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए भारतीय वायुसेना की मदद ली जाएगी, जबकि देश के सभी राज्यों में सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों को तैनात किया जाएगा. इस पूरे मिशन में सभी राज्य सरकारों का भी भरपूर सहयोग लिया जा रहा है. पेपर लीक के मामले पर पूरी तरह ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए यह जानकारी दी गई कि एनटीए को 7 और 8 मई को परीक्षा की गोपनीयता भंग (कंप्रोमाइज) होने की भनक लगते ही तुरंत कड़ा एक्शन लिया गया और बिना किसी देरी के 12 मई को परीक्षा को पूरी तरह रद्द कर दिया गया. NEET UG Paper Leak Case LIVE: प्रश्नपत्रों के परिवहन की थ्री-लेयर सिक्योरिटी नीट यूजी पेपर लीक मामला लाइव: पेपर लीक की मुख्य जड़ पर प्रहार करते हुए एनटीए ने प्रश्नपत्रों की छपाई, उनके सुरक्षित रखरखाव और परिवहन (लॉजिस्टिक्स) के लिए नई और अभेद्य सुरक्षा नियमावली लागू की है. हलफनामे के मुताबिक, छपाई के बाद से लेकर बैंकों के स्ट्रांग रूम और आखिरकार परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने तक, प्रश्नपत्रों को कई स्तरों की डिजिटल और फिजिकल निगरानी में रखा गया. पेपर्स के सुरक्षित परिवहन के लिए राज्य पुलिस और अन्य केंद्रीय सरकारी सुरक्षा एजेंसियों की मदद ली गई, जिससे सुरक्षा चक्र को मजबूती मिली. NEET UG Paper Leak Case LIVE: 1.85 लाख सीसीटीवी कैमरे और एआई तकनीक नीट यूजी पेपर लीक मामला लाइव: तकनीकी निगरानी का ब्योरा देते हुए एनटीए ने बताया कि देशभर के सभी 5,432 परीक्षा केंद्रों के चप्पे-चप्पे पर मोबाइल जैमर लगाए गए थे जिससे कोई भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस काम न कर सके. पूरी परीक्षा के दौरान लगभग 1.85 लाख सीसीटीवी कैमरों के जरिए हर क्लासरूम की लाइव मॉनिटरिंग की गई. सबसे खास बात यह रही कि इन कैमरों से मिलने वाले विशाल सीसीटीवी फुटेज का बारीकी से एनालिसिस करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया, जो किसी भी संदेहास्पद गतिविधि को तुरंत पकड़ लेता था. NEET UG Paper Leak Case LIVE: अत्याधुनिक बायोमेट्रिक और सख्त तलाशी व्यवस्था नीट यूजी पेपर लीक मामला लाइव: हलफनामे के अनुसार, नीट यूजी 2026 की परीक्षा के दौरान धांधली और फर्जी उम्मीदवारों (सिटर्स) को रोकने के लिए इतिहास में पहली बार बेहद आधुनिक तकनीकी उपाय किए गए. परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की पहचान की पुष्टि के लिए सख्त बायोमेट्रिक जांच, डिजिटल चेहरे की पहचान (फेस रिकग्निशन) और कई स्तरों पर फिजिकल चेकिंग की व्यवस्था लागू की गई थी. इस त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरे का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि केवल वही असली छात्र परीक्षा हॉल में प्रवेश कर सके जिसने फॉर्म भरा था. NEET UG Paper Leak Case LIVE: प्रशासनिक ढांचा मजबूत, 16 नए वरिष्ठ पद नीट यूजी पेपर लीक मामला लाइव: एनटीए ने कोर्ट को जानकारी दी है कि एजेंसी के अंदर आंतरिक जवाबदेही तय करने के लिए बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल किए गए हैं. संगठन को अधिक प्रोफेशनल और पारदर्शी बनाने के लिए विशेष रूप से 16 नए वरिष्ठ प्रशासनिक पद बनाए गए हैं. इसके अलावा, देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से आए तकनीकी और सुरक्षा विशेषज्ञों को भी इस नई व्यवस्था से जोड़ा गया है. परीक्षा संचालन और सुरक्षा के कड़े ऑडिट के लिए अब अलग-अलग विंग बनाकर अधिकारियों की जिम्मेदारियां तय की गई हैं. NEET UG Paper Leak Case LIVE: 621 जिला स्तरीय समन्वय समितियों का गठन नीट यूजी पेपर लीक मामला लाइव: परीक्षा के जमीनी प्रबंधन को फुलप्रूफ बनाने के लिए एनटीए ने बताया कि देशभर में राज्य और जिला स्तर पर मजबूत कोऑर्डिनेशन समितियां गठित की गईं. नीट यूजी 2026 परीक्षा के आयोजन के समय देशभर में कुल 621 जिला स्तरीय समितियां पूरी सक्रियता से काम कर रही थीं. इन खास कमेटियों में स्थानीय जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और एनटीए के टॉप अधिकारियों को शामिल किया गया था, जिससे परीक्षा केंद्रों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह चुस्त-दुरुस्त रखा जा सके और कानून-व्यवस्था बनी रहे. NEET UG Paper Leak Case LIVE: कुछ देर में होगी सुनवाई

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अरबों डॉलर का रॉकेट एक पल में बन गया आग का गोला,...

गुरुवार को फ्लोरिडा में जोरदार धमाके ने इलाके को दहला दिया. साथ ही अरबों डॉलर रुपये और 10 साल की मेहनत भी स्वाहा हो गई. दरअसल ब्लू ओरिजिन ने फ्लोरिडा में अपने एक दशक की मेहनत से तैयार किए न्यू ग्लेन रॉकेट को लांच किया, तभी ऐसी घटना घटी जो अक्सर लोगों ने हॉलीवुड फिल्मों में देखी होगी, हालांकि इसमें कंपनी को खासा नुकसान हुआ और अरबों डॉलर तबाह हो गए. साथ ही एलन मस्क को टक्कर देने का सपना भी चकनाचूर हो गया. द न्यूयॉर्क पोस्ट की खबर के मुताबिक गुरुवार रात को ब्लू ओरिजिन का विशाल न्यू ग्लेन रॉकेट लॉन्च पैड पर ही आग के गोले में तब्दील हुआ और जोरदार धमाके के साथ फट गया. यह दृश्य हॉलीवुड की एक्शन फिल्म जैसा लग रहा था. लाइव वीडियो में देखा गया कि रात करीब 9 बजे जैसे ही टेस्ट शुरू हुआ, रॉकेट एक ह्यूज आग के गोले में बदल गया. जेफ बेजोस की कंपनी ब्लू ओरिजिन ने साफ बताया कि इस हादसे में कोई व्यक्ति घायल नहीं हुआ. इस घटना को लेकर जेफ बेजोस ने सोशल मीडिया पर ट्वीट किया, “अभी कारण पता लगाना जल्दबाजी होगी, लेकिन हम इसकी जड़ तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं. बहुत मुश्किल दिन था, लेकिन जो भी टूटा है उसे हम दोबारा बनाएंगे और उड़ान भरेंगे. यह कोशिश योग्य है.” 10 साल की मेहनत हो गई पानी दरअसल न्यू ग्लेन रॉकेट को बनाने में 10 साल लगे हैं और इसमें अरबों डॉलर खर्च हुए हैं. इसका मकसद एलन मस्क की स्पेसएक्स कंपनी और उसके स्टारशिप रॉकेट को टक्कर देना था, हालांकि इस घटना से अब कंपनी को बड़ा झटका लगा है. वहीं इस घटना के वीडियो को देखकर एलन मस्क भी खुद को रोक नहीं पाए और ट्वीट किया, “बहुत दुखद. रॉकेट बनाना आसान नहीं है.” नासा के एडमिनिस्ट्रेटर जेयर्ड इसाकमैन ने एक्स पर लिखा कि उन्हें लॉन्च कॉम्प्लेक्स 36 पर हुई “असामान्य घटना” की जानकारी है. उन्होंने कहा कि इसकी पूरी जांच की जाएगी. उन्होंने कहा, “स्पेसफ्लाइट बहुत कठिन है और नया भारी रॉकेट विकसित करना बेहद मुश्किल काम है. हम अपने पार्टनर्स के साथ मिलकर इसकी गहराई से जांच करेंगे और आगे के मिशनों पर पड़ने वाले असर का पता लगाएंगे.” वहीं FAA (अमेरिकी एविएशन अथॉरिटी) ने बताया कि यह टेस्ट उनके लाइसेंस वाले दायरे में नहीं था. उन्होंने कहा कि हवाई यातायात पर कोई असर नहीं पड़ा.यह घटना उस समय हुई जब रॉकेट जल्द ही लॉन्च होने वाला था. इसमें अमेजन के 48 सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजना था. वहीं इस घटना पर फ्लोरिडा के कांग्रेस सदस्य माइक हरिदोपोलोस ने ट्वीट कियाण् “कोई घायल नहीं हुआ, यह राहत की बात है. मैं फर्स्ट रेस्पॉन्डर्स, इंजीनियर्स और लॉन्च टीम का शुक्रगुजार हूं. फ्लोरिडा के स्पेस कोस्ट और सभी लोगों के लिए प्रार्थना करता हूं.” Source link

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IMD Monsoon Alert | IMD Monsoon Update: मई तो कट गया, असली...

होमताजा खबरदेश मई तो कट गई, असली तपिश जून में, तरसाएगा मानसून, IMD ने दी बेहद बुरी खबर Last Updated:May 29, 2026, 12:24 IST IMD Monsoon Update: IMD ने मानसून 2026 को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया है. मौसम विभाग के अनुसार जून से सितंबर तक देशभर में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है. उत्तर-पश्चिम, मध्य और दक्षिण भारत में कमजोर मानसून का असर ज्यादा दिख सकता है. जून महीने में कई राज्यों में भीषण गर्मी और हीटवेव का खतरा भी बढ़ेगा. अल नीनो की स्थिति मानसून को कमजोर कर सकती है. कम बारिश का असर खेती, बिजली उत्पादन और पेयजल संकट पर पड़ने की आशंका है. IMD ने राज्यों को अभी से तैयारी मजबूत करने की सलाह दी है. ख़बरें फटाफट IMD ने मानसून 2026 को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया है. (PTI) IMD Monsoon Alert: देश में जून का महीना आते ही आमतौर पर लोगों की नजरें आसमान पर टिक जाती हैं. किसान खेतों की तैयारी शुरू कर देते हैं. शहरों में लोग गर्मी से राहत की उम्मीद करने लगते हैं. लेकिन इस बार मानसून को लेकर जो तस्वीर सामने आई है, उसने चिंता बढ़ा दी है. भारतीय मौसम विभाग यानी IMD ने साफ संकेत दिए हैं कि जून 2026 में देश के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है. यही नहीं, पूरे दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान भी बारिश Long Period Average यानी LPA के केवल 90 फीसदी तक रहने का अनुमान जताया गया है. इसका मतलब यह है कि इस साल गर्मी जल्दी पीछा छोड़ने वाली नहीं है. खेतों से लेकर बिजली उत्पादन और पेयजल संकट तक, कई मोर्चों पर मुश्किलें बढ़ सकती हैं. सबसे ज्यादा चिंता इस बात की है कि उत्तर-पश्चिम, मध्य और दक्षिण भारत के बड़े हिस्सों में मानसून कमजोर रह सकता है. IMD की यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब देश पहले से ही भीषण गर्मी और हीटवेव का सामना कर रहा है. उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा और गुजरात जैसे राज्यों में तापमान लगातार रिकॉर्ड तोड़ रहा है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति विकसित हो रही है, जिसका सीधा असर भारतीय मानसून पर पड़ सकता है. अल नीनो आमतौर पर समुद्री तापमान बढ़ाता है और भारत में बारिश को कमजोर कर देता है. हालांकि हिंद महासागर में IOD फिलहाल न्यूट्रल स्थिति में है, लेकिन वह भी मानसून को बहुत ज्यादा ताकत देता नजर नहीं आ रहा. ऐसे में जून महीने में बारिश की कमी और लू का डबल अटैक लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है. IMD ने राज्यों को पहले से तैयारी मजबूत करने की सलाह भी दी है. IMD ने राज्यों को सलाह दी है कि वे हीटवेव और संभावित जल संकट से निपटने के लिए अभी से तैयारी शुरू करें. (फोटो PTI) जून में कमजोर पड़ सकता है मानसून का दम IMD के मुताबिक जून से सितंबर 2026 के दौरान देशभर में सामान्य से कम बारिश होने की सबसे ज्यादा संभावना है. मौसम विभाग का अनुमान है कि इस साल मानसून का प्रदर्शन औसत से नीचे रह सकता है. सबसे ज्यादा असर उत्तर-पश्चिम भारत, मध्य भारत और दक्षिण प्रायद्वीपीय इलाकों में देखने को मिल सकता है. Monsoon Core Zone यानी कृषि आधारित क्षेत्रों में भी बारिश कम रहने का खतरा जताया गया है. यही वजह है कि खेती-किसानी से जुड़े राज्यों में चिंता बढ़ गई है. जून महीने में देश के अधिकतर हिस्सों में तापमान सामान्य से ज्यादा रहने की संभावना है. IMD के अनुसार उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात और आंध्र प्रदेश में सामान्य से ज्यादा हीटवेव वाले दिन देखने को मिल सकते हैं. महाराष्ट्र, तेलंगाना, तमिलनाडु और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी लू का असर बढ़ सकता है. यानी बारिश कम और गर्मी ज्यादा रहने का खतरा एक साथ मंडरा रहा है. कम बारिश का असर केवल मौसम तक सीमित नहीं रहेगा. इसका सबसे बड़ा असर खेती पर पड़ सकता है. अगर जून और जुलाई में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो धान, दाल और दूसरी खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है. कई राज्यों में पहले से ही जलाशयों का जलस्तर कम है. ऐसे में पानी की कमी और गंभीर हो सकती है. बिजली उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका है क्योंकि देश के कई हिस्सों में हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट मानसूनी पानी पर निर्भर रहते हैं. अल नीनो ने बढ़ाई टेंशन मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बार अल नीनो की स्थिति मानसून पर भारी पड़ सकती है. अल नीनो के दौरान प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से ज्यादा हो जाता है, जिससे भारत की मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं. यही वजह है कि IMD ने पहले ही कम बारिश का अलर्ट जारी कर दिया है. हालांकि उत्तर-पूर्व भारत में सामान्य बारिश की उम्मीद जताई गई है, लेकिन देश के बड़े हिस्से में हालात चुनौतीपूर्ण रह सकते हैं. मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बार अल नीनो की स्थिति मानसून पर भारी पड़ सकती है. (PTI) राज्यों को दी गई तैयारी की सलाह IMD ने राज्यों को सलाह दी है कि वे हीटवेव और संभावित जल संकट से निपटने के लिए अभी से तैयारी शुरू करें. अस्पतालों, बिजली विभागों और जल आपूर्ति एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रहने को कहा गया है. किसानों को भी मौसम के अपडेट पर नजर रखने और कम पानी वाली फसलों पर विचार करने की सलाह दी जा रही है. आने वाले कुछ हफ्ते यह तय करेंगे कि मानसून कितनी राहत देता है और कितनी चिंता बढ़ाता है. IMD ने इस साल मानसून को लेकर क्या बड़ा अनुमान जारी किया है? IMD के अनुसार जून से सितंबर 2026 के दौरान देशभर में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है. मानसून Long Period Average यानी LPA का करीब 90 फीसदी रह सकता है. इसका असर खासतौर पर उत्तर-पश्चिम, मध्य और दक्षिण भारत में ज्यादा देखने को मिल सकता है. अल नीनो का मानसून पर क्या असर पड़ता है? अल नीनो प्रशांत महासागर के तापमान को बढ़ा देता है. इसका असर भारतीय मानसून पर पड़ता है और बारिश कमजोर हो जाती है. कई बार इसकी वजह से

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Jammu Ronisha Satti Case News: अस्पताल में भर्ती रोनिशा को फिर मिली...

Jammu Ronisha Satti Case News: जम्मू की सोशल मीडिया दुनिया में इस समय रोनिशा केस सबसे ज्यादा चर्चा में है. कथित आत्महत्या प्रयास के बाद अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रही रोनिशा ने अब ऐसे आरोप लगाए हैं, जिसने पूरे मामले को और सनसनीखेज बना दिया है. रोनिशा का दावा है कि अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद उसे और उसके परिवार को लगातार धमकियां मिल रही हैं. सबसे बड़ा आरोप उसके मंगेतर प्रशांत शर्मा पर लगा है. रोनिशा के मुताबिक, प्रशांत ने उसकी मां को फोन कर धमकी दी और कहा कि वह उन्हें जम्मू में नहीं रहने देगा. इस मामले ने सोशल मीडिया ट्रोलिंग, साइबर बुलिंग और रिश्तों में मानसिक प्रताड़ना जैसे गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. जम्मू में लोग अब यह चर्चा कर रहे हैं कि आखिर एक सोशल मीडिया विवाद किस तरह किसी की जिंदगी को पूरी तरह हिला सकता है. रोनिशा का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से उसे सोशल मीडिया पर लगातार बदनाम किया जा रहा था. उसके चरित्र पर सवाल उठाए गए, फर्जी पोस्ट शेयर की गईं और मानसिक रूप से तोड़ने की कोशिश हुई. अब अस्पताल से सामने आए उसके नए आरोपों ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है. उसने दावा किया कि प्रशांत शर्मा और उसके परिवार के लोग फिलहाल फरार हैं. वहीं सोशल मीडिया पर कई लोग इस मामले में निष्पक्ष जांच और आरोपी पक्ष पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. हालांकि पुलिस ने अभी तक इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और जांच जारी होने की बात कही है. अस्पताल से सामने आए नए आरोप रोनिशा ने दावा किया कि अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद उसे धमकी भरे कॉल मिल रहे हैं. उसके मुताबिक, प्रशांत शर्मा ने उसकी मां को फोन कर कहा कि वह ‘पहले से भी बुरा हाल करेगा’ और परिवार को जम्मू में नहीं रहने देगा. इसके बाद परिवार काफी डरा हुआ है. रोनिशा का आरोप है कि प्रशांत शर्मा फिलहाल घर से गायब है और उसका परिवार भी फरार बताया जा रहा है. उसने पुलिस पर भी सवाल उठाए और कहा कि शिकायतों के बावजूद उसे पर्याप्त सुरक्षा और मदद नहीं मिल रही. मामले के बाद जम्मू में यह मुद्दा सोशल मीडिया से निकलकर कानून व्यवस्था की बहस तक पहुंच गया है. सोशल मीडिया ट्रोलिंग से टूटी रोनिशा रोनिशा ने आरोप लगाया कि एक NGO से जुड़े सोशल मीडिया पेज के जरिए उसके खिलाफ अभियान चलाया गया. उसने दावा किया कि उसी प्लेटफॉर्म से उसे बदनाम करने की कोशिश की गई. उसके मुताबिक लगातार गालियां, अपमानजनक पोस्ट और निजी जिंदगी पर हमलों ने उसे मानसिक रूप से तोड़ दिया. रोनिशा ने यह भी कहा कि उसे और उसकी मां को सोशल मीडिया पर बेहद आपत्तिजनक नामों से पुकारा गया. उसने कहा कि कोई भी लड़की इस तरह की सार्वजनिक बेइज्जती को लंबे समय तक सहन नहीं कर सकती. यही वजह रही कि वह पूरी तरह टूट गई. ‘कई लड़कियों के वीडियो’ वाला दावा न्यूज18 से बातचीत में रोनिशा ने दावा किया कि प्रशांत शर्मा ने कई लड़कियों के न्यूड वीडियो बनाए थे. हालांकि इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. पुलिस फिलहाल पूरे मामले की जांच कर रही है और डिजिटल सबूत भी खंगाले जा रहे हैं. रोनिशा ने बताया कि उसने मामले में एक और FIR दर्ज करवाई है. उसका कहना है कि यह सिर्फ निजी विवाद नहीं, बल्कि साइबर बुलिंग और मानसिक प्रताड़ना का गंभीर मामला है. इसी कारण अब सोशल मीडिया पर भी उसके समर्थन में आवाजें उठने लगी हैं. अस्पताल में जारी है इलाज कुछ दिन पहले रोनिशा ने कथित तौर पर जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या का प्रयास किया था. इससे पहले उसने एक वीडियो जारी किया था, जिसे उसने अपना “आखिरी वीडियो” बताया था. फिलहाल उसका अस्पताल में इलाज चल रहा है और डॉक्टर उसकी हालत पर लगातार नजर बनाए हुए हैं. रोनिशा ने प्रशांत शर्मा पर क्या आरोप लगाए हैं? रोनिशा ने आरोप लगाया है कि प्रशांत शर्मा ने उसकी मां को फोन कर धमकी दी और कहा कि वह परिवार को जम्मू में नहीं रहने देगा. इसके अलावा उसने सोशल मीडिया ट्रोलिंग, मानसिक प्रताड़ना और बदनाम करने की साजिश जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं. क्या पुलिस ने इन आरोपों की पुष्टि की है? फिलहाल पुलिस ने किसी भी आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है. डिजिटल सबूत, कॉल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया गतिविधियों की भी जांच की जा रही है. सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर कैसी प्रतिक्रिया है? सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग रोनिशा के समर्थन में सामने आए हैं. कई यूजर्स साइबर बुलिंग और ऑनलाइन ट्रोलिंग के खिलाफ सख्त कानून की मांग कर रहे हैं. वहीं कुछ लोग मामले की निष्पक्ष जांच की अपील भी कर रहे हैं. Source link

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महाराष्‍ट्र में जहरीली शराब पीने से 15 लोगों की मौत, कई की...

Last Updated:May 29, 2026, 10:15 IST Marashatra Hooch Tragedy: जहरीली शराब ने एक बार फिर से तांडव मचाया है. इस बार बिहार नहीं, बल्कि महाराष्‍ट्र में जहरीली शराब पीने से 15 लोगों की मौत खबर सामने आई है. जहरीली शराब से इतनी बड़ी संख्‍या में लोगों के मारे जाने की घटना से स्‍थानीय प्रशासन सकते में है. हालांकि, इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है. महाराष्‍ट्र में जहरीली शराब पीने से 15 लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई अन्‍य की हालत गंभीर बताई जा रही है. (फाइल फोटो/Reuters) Marashatra Hooch Tragedy: महाराष्‍ट्र में चौंकाने वाली घटना सामने आई है. पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ में जहरीली शराब पीने से कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्‍य की हालत गंभीर बताई जा रही है. पिंपरी-चिंचवाड़ के दापोडी और फुगेवाड़ी इलाके में आठ लोगों ने दम तोड़ा, जबकि पुणे के काले पड़ल इलाके में तीन और हडपसर इलाके में दो लोगों की मौत हुई. घटना के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है और प्रभावित इलाकों में जांच तेज कर दी गई है. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जहरीली शराब आरोपी योगेश वानखेडे ने तैयार की थी, जो कथित तौर पर अवैध शराब कारोबार से जुड़ा हुआ है. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. उसके खिलाफ पहले से भी कई आपराधिक मामले दर्ज बताए जा रहे हैं. About the Author Manish Kumar बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Pune,Maharashtra Source link

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