भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

ताज़ा खबर

ताज़ा खबर

aaj ka Kanya rashifal 13 may 2026 Virgo horoscope in hindi today...

Last Updated:May 13, 2026, 00:08 IST Aaj ka Kanya Rashifal 13 may 2026: आज कन्या राशि वालों पर चन्द्रमा की शुभ दृष्टि रहने वाली है, जिससे व्यापार, नौकरी और पारिवारिक जीवन में खुशियों का माहौल बना रहेगा.ज्योतिषाचार्य के अनुसार आज आमदनी बढ़ने, शुभ समाचार मिलने और प्रतियोगी छात्रों को सफलता के संकेत मिल रहे हैं. ख़बरें फटाफट देवघर: दैनिक राशिफल ग्रहों की चाल, नक्षत्रों की स्थिति और पंचांग के आधार पर तय किया जाता है. आज ऋषिकेश पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है. साथ ही रेवती नक्षत्र और प्रीति योग का संयोग बन रहा है, जिसे ज्योतिष शास्त्र में बेहद शुभ माना जाता है. आज चन्द्रमा मीन राशि में संचार करेगा, जिसका सकारात्मक प्रभाव कन्या राशि के जातकों पर देखने को मिलेगा. ग्रहों की यह स्थिति आज कन्या राशि वालों के लिए उत्साह, सफलता और मानसिक शांति लेकर आने वाली है. हालांकि आज दोपहर 12 बजकर 23 मिनट से लेकर 02 बजकर 10 मिनट तक राहु काल रहेगा, इसलिए इस दौरान किसी भी नए और शुभ कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए. वहीं सुबह 07 बजकर 19 मिनट से लेकर 08 बजकर 52 मिनट तक अमृत काल रहेगा, जो बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है. आज अभिजीत मुहूर्त नहीं रहेगा, लेकिन ग्रहों की स्थिति फिर भी कन्या राशि वालों के लिए कई अच्छे संकेत दे रही है. नये व्यापार आरम्भ करने के लिए सबसे उत्तम दिन देवघर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुदगल बताते हैं कि आज का दिन कन्या राशि वालों के लिए अत्यंत सकारात्मक रहने वाला है. लंबे समय से जिन कार्यों को लेकर मन में चिंता या असमंजस बना हुआ था, उसमें आज राहत मिल सकती है. आज आपके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी और मन प्रसन्न रहेगा. कार्यक्षेत्र में आपके निर्णयों की सराहना हो सकती है. यदि आप कोई नया व्यापार शुरू करने की योजना बना रहे हैं या किसी नए कार्य की शुरुआत करना चाहते हैं तो आज का दिन आपके लिए शुभ संकेत दे रहा है. व्यापार में नए अवसर मिल सकते हैं और पुराने अटके हुए काम भी गति पकड़ सकते हैं. नौकरी करने वाले लोगों को भी आज अपने कार्यस्थल पर अच्छा माहौल मिलेगा और अधिकारी आपके काम से खुश नजर आ सकते हैं. मन मे सकरात्मक ऊर्जा महसूस होगी आज पारिवारिक जीवन भी सुखद रहने वाला है. घर में शांति और खुशी का वातावरण बना रहेगा. परिवार के सदस्यों के साथ अच्छा समय बिताने का अवसर मिलेगा. जीवनसाथी के साथ संबंध और भी मजबूत होंगे तथा आपसी प्रेम बढ़ेगा. लंबे समय बाद परिवार के साथ बैठकर हंसी-खुशी का माहौल देखने को मिल सकता है. आज मन में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहेगी, जिससे आप पूरे दिन उत्साहित महसूस करेंगे. आर्थिक स्थिति की बात करें तो आज चारों तरफ से आमदनी के संकेत मिल रहे हैं. कहीं से रुका हुआ पैसा वापस मिल सकता है या आय के नए स्रोत खुल सकते हैं. छोटे व्यापारियों और कारोबारियों के लिए भी आज का दिन लाभ देने वाला साबित हो सकता है. प्रतियोगिता परीक्षा की त्यारी करने वाले छात्र को मिल सकती है सफलताछात्रों के लिए भी आज का दिन बेहद खास रहने वाला है. जो विद्यार्थी प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें कोई शुभ समाचार मिल सकता है. परीक्षा, नौकरी या करियर से जुड़ी अच्छी जानकारी मिलने से मन प्रसन्न रहेगा. पढ़ाई में मन लगेगा और मेहनत का सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद बढ़ेगी. आज का दिन आत्मविश्वास और ऊर्जा से भरपूर रहेगा, इसलिए किसी भी काम को पूरी लगन और सकारात्मक सोच के साथ करने की जरूरत है. कुल मिलाकर आज का दिन कन्या राशि वालों के लिए खुशियां, सफलता और नई उम्मीद लेकर आने वाला है. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Deoghar,Jharkhand Source link

ताज़ा खबर

सुवेंदु और हिमंता की वायरल फोटो ने बढ़ाई ममता खेमे की धड़कनें,...

होमताजा खबरदेश इशारों में सुवेंदु ने ऐसा कह दिया, हिमंता की पोस्ट से असम से बंगाल तक भूचाल Last Updated:May 12, 2026, 23:48 IST Viral Post of Himanta and Suvendu: असम और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने प्रचंड जीत हासिल की है. इस जीत के बाद दोनों राज्यों में मुख्यमंत्रियों ने शपथ भी ले लिया. एक तरफ जहां बंगाल में भाजपा पहली बार सत्ता में आई है, तो दूसरी ओर असम में हैट्रिक लगाई है. बंगाल में सुवेंदु अधिकारी तो असम हिमंता सरमा ने मुख्यमंत्री पद का शपथ लिया. अब दोनों नेताओं का एक्स पर दिलचस्प पोस्ट वायरल हो रहा है. इशारों में घुसपैठियों को चेतावनी. असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सुवेंदु अधिकारी के साथ एक फोटो पोस्ट की, जिसने इंटरनेट पर आग लगा दी है. दोनों नेता बेहद खुश नजर आ रहे हैं और गले मिल रहे हैं. हिमंता ने कैप्शन में लिखा, ‘Bad days for….(You know who)’. इसमें उन्होंने सुवेंदु को टैग किया, जिसके जवाब में सुवेंदु ने मजाकिया लहजे में लिखा, ‘No Prizes for Guessing, I guess 😄’. इस छोटे से एक्स पर पोस्ट-रिपोस्ट ने बंगाल के सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है. राजनीतिक जानकार इसे राज्य के विपक्षी खेमे के लिए एक बड़ी चेतावनी मान रहे हैं. इसके साथ ही सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री बनते ही बंगाल के सरकारी सिस्टम को बदलने के लिए कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. राजनीतिक एक्सपर्ट इसे दूसरे नजर से देख रहे हैं. उनका मानना है कि असम की हिमंता बिस्वा सरमा सरकार और पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार के बीच बढ़ता समन्वय बांग्लादेशी घुसपैठ, अवैध प्रवासियों और सीमा पार से होने वाली अव्यवस्था के खिलाफ एक नई सख्ती का संकेत है. असम पहले से ही डिटेंशन कैंपों और घुसपैठ विरोधी कड़े कदमों के लिए जाना जाता है. अब बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद इन दोनों प्रमुख पूर्वी राज्यों द्वारा साझा रणनीति अपनाए जाने की उम्मीद है, जिससे सीमा सुरक्षा और जनसांख्यिकीय नियंत्रण के मुद्दों पर क्षेत्रीय स्तर पर एक अधिक सुदृढ़ और एकीकृत दृष्टिकोण देखने को मिल सकता है. Source link

ताज़ा खबर

अमरेली में सड़क पर उतरी शेरनी! दिनदहाड़े शावकों संग रोड पर घूमती...

गुजरात के अमरेली में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब दिनदहाड़े एक शेरनी शावकों के साथ सड़क पर नजर आई. वाघनिया से लीलिया के बीच यह शेरनी आराम से सड़क पार करती नजर आई. शेरनी को देखते ही लोगों में दहशत फैल गई. कई वाहन चालकों ने तुरंत अपने वाहन रोक दिए और शेरनी के सड़क पार करने का इंतजार किया. इस दौरान कुछ लोगों ने पूरी घटना का वीडियो मोबाइल में कैद कर लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. Source link

ताज़ा खबर

50% इंटर-कास्ट मैरिज… सबरीमाला पर सुनवाई में आई ऐसी दलील, सीजेआई के...

नई दिल्‍ली. सुप्रीम कोर्ट का कोर्ट रूम नंबर एक… बाहर भीषण गर्मी, लेकिन अंदर का माहौल उससे भी कहीं ज्यादा गर्म! नौ जजों की संविधान पीठ के सामने भारत के सबसे दिग्गज वकील आमने-सामने थे. मुद्दा सिर्फ एक मंदिर का नहीं था, मुद्दा था क्या धर्म की आड़ में किसी को उसके अधिकारों से वंचित किया जा सकता है? तनाव तब और बढ़ गया जब वकील ने एक सर्वे का पन्ना लहराते हुए कहा, “साहब, देश की आधी आबादी इस बदलाव के खिलाफ है!” मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत की कड़क आवाज गूंजी। उन्‍होंने कहा ये सर्वे खास एजेंडे के लिए ‘टेलर-मेड’ किया गया है. अदालत में तर्क नहीं, बल्कि भविष्य के भारत की नींव रखी जा रही थी. एक तरफ सदियों पुरानी मर्यादा और संप्रदाय की दुहाई थी तो दूसरी तरफ वैकोम के उस संघर्ष की याद जिसने 101 साल पहले मंदिरों के बंद दरवाजे खोल दिए थे. वकील की एक ही बात पूरे कोर्ट रूम में गूंजती रही भगवान भेदभाव नहीं करते, ये इंसान की बनाई दीवारें है. 1. सर्वे पर CJI का कड़ा प्रहारसुनवाई के दौरान जब सीनियर एडवोकेट शादान फरासत ने दलील दी कि “50% भारतीय इंटर-कास्‍ट मैरिज के खिलाफ हैं” तो बेंच ने तुरंत हस्तक्षेप किया. CJI ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “ये सर्वे कुछ नहीं हैं, इन्हें खास जरूरतों और एजेंडे को पूरा करने के लिए ‘टेलर-मेड’ (विशेष रूप से तैयार) किया जाता है.” कोर्ट का मानना था कि सामाजिक सुधार के मामलों में इस तरह के डेटा को आधार नहीं बनाया जा सकता क्योंकि ये अक्सर पक्षपाती होते हैं. 2. सामाजिक सुधार बनाम धार्मिक अधिकारसीनियर एडवोकेट जयदीप गुप्ता और विजय हंसारिया ने तर्क दिया कि अनुच्छेद 25(2)(b) राज्य को सामाजिक सुधार के लिए कानून बनाने की शक्ति देता है. · तर्क: यदि कोई सामाजिक कुप्रथा धार्मिक रिवाज का चोला ओढ़ ले तो सरकार उसे सुधारने के लिए हस्तक्षेप कर सकती है. · निष्कर्ष: संविधान पीठ इस बात की जांच कर रही है कि क्या धार्मिक संप्रदाय के अधिकार इतने बड़े हैं कि वे समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14) को भी दबा दें? 3. ‘भगवान भेदभाव नहीं करते, इंसान करता है’सीनियर एडवोकेट संजय हेगड़े ने वैकोम सत्याग्रह का उदाहरण देते हुए कहा कि मंदिर में प्रवेश का अधिकार केवल आस्था का नहीं बल्कि मानवीय गरिमा का विषय है. उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि भगवान ने हमेशा अपने भक्तों को दर्शन दिए हैं, चाहे वे किसी भी जाति के हों. उन्होंने जोर दिया कि ईश्वर के दरबार में कोई भेदभाव नहीं है, यह इंसानी सोच है जिसने दीवारें खड़ी की हैं. 4. कोर्ट रूम में महिला प्रतिनिधित्व की गूंजसुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी ने एक बेहद महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक मुद्दा उठाया. उन्होंने याद दिलाया कि कैसे अदालतों की दीवारों पर महिलाओं की कमी खटकती है. · उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में 9-जजों की बेंच पूरी तरह महिलाओं की होगी. · जस्टिस नागरत्ना ने इस पर चुटकी लेते हुए कहा— “शायद कुछ वर्षों बाद लोग यहां आकर पूछेंगे कि पुरुष कहां हैं?” प्रमुख प्‍वाइंट्स· अनुच्छेद 25 और 26 का टकराव: क्या धार्मिक प्रबंधन की स्वतंत्रता (Art 26) व्यक्तिगत समानता के अधिकार (article 14) से ऊपर है? · संप्रदाय और धर्म: एडवोकेट जयदीप गुप्ता ने स्पष्ट किया कि संविधान के उद्देश्य के लिए संप्रदाय और संप्रदाय एक ही हैं, लेकिन इन्हें पूरे धर्म का पर्यायवाची नहीं माना जा सकता. · तर्कसंगत सिद्धांत: संजय हेगड़े ने तर्क दिया कि अंधविश्वास और कुरीतियों को धर्म का सुरक्षा कवच नहीं मिलना चाहिए. · सामाजिक सुधार का प्रभाव: विजय हंसारिया ने कहा कि सामाजिक सुधार के लिए बना कानून धार्मिक अधिकारों पर प्रभावी होना चाहिए. यह मामला केवल सबरीमाला या किसी एक मंदिर का नहीं है बल्कि यह तय करेगा कि आधुनिक भारत में संवैधानिक नैतिकता बड़ी है या धार्मिक परंपराएं। कोर्ट का रुख स्पष्ट है कि वह तैयार किए गए सामाजिक आंकड़ों के बजाय संवैधानिक मूल्यों को प्राथमिकता देगा. सवाल-जवाब क्या राज्य धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप कर सकता है? हां, अनुच्छेद 25(2)(b) के तहत राज्य को अधिकार है कि वह सामाजिक कल्याण और सुधार के लिए धार्मिक संस्थानों में हस्तक्षेप कर सके, विशेषकर सार्वजनिक संस्थानों को सभी वर्गों के लिए खोलने के मामले में. धार्मिक संप्रदाय (Religious Denomination) किसे माना जाता है? कोर्ट के अनुसार जिसका एक विशिष्ट नाम हो, एक समान विचारधारा या मत हो और जो एक संगठित समूह के रूप में काम करे, उसे संप्रदाय माना जाता है (जैसे रामकृष्ण मिशन). क्या 2018 का सबरीमाला फैसला बदल गया है? नहीं, 2018 का फैसला अभी प्रभावी है लेकिन सुप्रीम कोर्ट की यह 9-जजों की बेंच उन व्यापक कानूनी सवालों पर विचार कर रही है जो उस फैसले की समीक्षा के दौरान उठे थे. Source link

ताज़ा खबर

Indian Army News| Indian Army Foils Infiltration in Poonch | एलओसी पर...

होमताजा खबरदेश एलओसी पर ‘काल की दिवार’! इंडियन आर्मी को चकम दे 300 मीटर अंदर घुसा आतंकी ढेर Last Updated:May 12, 2026, 20:49 IST Indian Army News: जम्मू-कश्मीर के पुंछ स्थित कृष्णा घाटी सेक्टर में भारतीय सेना ने पाकिस्तान की एक बड़ी नापाक साजिश को नाकाम कर दिया है. मंगलवार शाम एलओसी पर भारतीय सीमा के 300 मीटर अंदर घुसपैठ कर रहे एक आतंकी को सेना के मुस्तैद जवानों ने ढेर कर दिया. ‘व्हाइट नाइट कॉर्प्स’ ने बताया कि संदिग्ध हलचल देखते ही त्वरित कार्रवाई की गई, जिससे घुसपैठ की यह कोशिश विफल हो गई. इलाके में अभी भी सेना का सघन सर्च ऑपरेशन जारी है. घुसपैठ करने वाला आतंकी मारा गया. Jammu Kashmir Terrorist Intruder Killed: जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में भारतीय सेना ने एक बार फिर पाकिस्तान की नापाक साजिश को करारा जवाब दिया है. मंगलवार को पुंछ के कृष्णा घाटी सेक्टर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर सेना के सतर्क जवानों ने घुसपैठ की एक बड़ी कोशिश को नाकाम कर दिया है. एक घुसपैठिए की मारे जाने की खबर है. बताया जा रहा है कि यह आतंकी भारतीय सीमा के 300 मीटर अंदर तक घुस आया था, लेकिन सेना की पैनी नजर से बच नहीं सका. व्हाइट नाइट कॉर्प्स ने दी जानकारी भारतीय सेना की व्हाइट नाइट कॉर्प्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस ऑपरेशन की विस्तृत जानकारी दी है. सेना के अनुसार, कृष्णा घाटी सेक्टर में एलओसी के पास लगातार और कड़ी निगरानी की जा रही थी. इसी बीच मंगलवार शाम करीब 4 बजे, भारतीय सीमा के लगभग 300 मीटर अंदर कुछ संदिग्ध हलचल देखी गई. जवानों का क्विक एक्शन, एक आतंकी ढेर संदिग्ध गतिविधि की भनक लगते ही व्हाइट नाइट कॉर्प्स के मुस्तैद जवानों ने बिना कोई देरी किए त्वरित कार्रवाई की. सेना के अचूक प्रहार ने घुसपैठ की कोशिश को पूरी तरह से विफल कर दिया और एलओसी पर किसी भी तरह की सेंधमारी को रोक दिया. इस कार्रवाई में एक आतंकी को वहीं ढेर कर दिया गया. सर्च ऑपरेशन जारी व्हाइट नाइट कॉर्प्स ने दुश्मनों को सख्त चेतावनी देते हुए एक्स पर लिखा, ‘नाइट्स हमेशा सतर्क खड़े हैं – घुसपैठ की हर कोशिश नाकाम होगी. हम सेवा करते हैं, हम रक्षा करते हैं (We Serve, We Protect)!’ फिलहाल सेना ने पूरे इलाके में अपना दबदबा बना लिया है और सेक्टर में ऑपरेशनल तैयारियों को उच्चतम स्तर (High Alert) पर रखा गया है. मारे गए घुसपैठिए के अन्य साथियों के छिपे होने की आशंका के चलते इलाके में बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है. भारतीय सेना सीमा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद है. सूत्रों ने बताया कि संदेह है कि घुसपैठिया लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा था और मनकोट के बिचो चौकी के पास सीमा के इस तरफ घुसपैठ करने की कोशिश कर रहा था. About the Author Deep Raj DeepakSub-Editor Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jammu and Kashmir Source link

ताज़ा खबर

पीएम मोदी की बात को सीरियसली लें… लेखक ने चेताते हुए कहा-...

होमताजा खबरदेश PM मोदी की बात को सीरियसली लें… लेखक ने चेताते हुए कहा- मार्च 2020 जैसी आहट Last Updated:May 12, 2026, 19:44 IST प्रधानमंत्री मोदी ने तेल बचाने और वर्क-फ्रॉम-होम की जो अपील की है, उसने इंटरनेट पर खलबली मचा दी है. लेखक अरिंदम पॉल ने कहा-माहौल ‘मार्च 2020’ जैसा लग रहा है. क्या सरकार को किसी बड़े आर्थिक तूफान की पहले से भनक है? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेल बचाने की अपील की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश से तेल बचाने, फिजूलखर्ची रोकने और वर्क फ्रॉम होम करने की अपील क्या की, सोशल मीडिया पर डर और डिबेट का रायता फैल गया. लोग पूछ रहे हैं कि क्या फिर से कोई बड़ा संकट आने वाला है? पश्चिम एशिया में मचे बवाल के बीच पीएम की इन बातों को लोग खतरे की घंटी मान रहे हैं. इसी बीच लेखक अरिंदम पॉल का ट्वीट वायरल हो रहा है, ज‍िसमें वे कह रहे हैं क‍ि पीएम मोदी की बात सीर‍ियसली लें… माहौल बिल्कुल वैसा ही है जैसा मार्च 2020 में था. अरिंदम पॉल ने लिखा, मुझे लग रहा है कि हम बड़ी मुसीबत में हैं और अगले कुछ महीने काफी दर्दनाक होने वाले हैं. साफ है कि सरकार को कुछ ऐसा पता है जो हमें नहीं पता. बिल्कुल वैसा ही अहसास हो रहा है जैसा मार्च 2020 में हुआ था. मतलब भाई, सीधे-सीधे खतरे का सिग्नल! ‘तेल कम जलाओ और घर से काम करो’ वाली सलाह दरअसल, मोदी जी ने कहा है कि दुनिया में हालात ठीक नहीं हैं, इसलिए तेल कम फूंको, बेवजह की यात्राओं से बचो और जहां तक हो सके दफ्तरों को वर्क फ्रॉम होम पर ले जाओ. स्कूलों को भी ऑनलाइन मोड पर विचार करने की सलाह दी गई है. पीएम की इस अपील को लोग सीधे लॉकडाउन वाले दिनों से जोड़कर देख रहे हैं, जब सन्नाटा पसरा हुआ था और सब कुछ ऑनलाइन चल रहा था. क्या सरकार को कुछ एक्स्ट्रा पता है? अर‍िंदम की पोस्‍ट पर लोग खूब प्रत‍िक्र‍िया दे रहे हैं. ल‍िख रहे हैं-दाल में कुछ काला है. सरकार के पास इंटेलिजेंस इनपुट होते हैं. लेखक ने इशारा किया कि शायद सरकार को पता है कि आगे चलकर तेल की सप्लाई पूरी तरह ठप हो सकती है या कीमतें आसमान फाड़ सकती हैं. इसीलिए जनता को पहले से ही मेंटल ट्रेनिंग दी जा रही है ताकि बाद में जब झटका लगे, तो कोई ये न कहे कि बताया नहीं था. पब्लिक बोली- ‘मजाक में मत उड़ाओ भाई’अरिंदम पॉल की पोस्ट पर कमेंट्स की झड़ी लगी है. कोई कह रहा है कि पीएम की बात को सीरियसली लो और अभी से पैसा बचाना शुरू कर दो, तो कोई मिडिल ईस्ट की पॉलिटिक्स समझा रहा है. एक शख्स ने लिखा कि भारत यूएई से सबसे ज्यादा तेल खरीदता है और अगर होर्मुज हमेशा के ल‍िए बंद हुआ तो लेने के देने पड़ जाएंगे. About the Author Gyanendra Mishra Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi Source link

ताज़ा खबर

केरल का नया मुख्यमंत्री कौन? दिल्ली में हलचल तेज, राहुल गांधी की...

होमताजा खबरदेश केरल का अगला सीएम कौन? राहुल गांधी की मैराथन बैठक के बाद इस नाम पर बनी सहमति! Last Updated:May 12, 2026, 18:55 IST Who will be New Chief Minister of Kerala: केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF की ऐतिहासिक जीत के बाद मुख्यमंत्री के नाम को लेकर सस्पेंस खत्म होता दिख रहा है. राहुल गांधी द्वारा केरल के दिग्गज नेताओं के साथ की गई अहम बैठक में केसी वेणुगोपाल को भारी बहुमत का समर्थन मिला है. 140 में से 102 सीटें जीतने के बाद अब दिल्ली में मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर अंतिम फैसला होने वाला है. नई दिल्ली. केरल का अगला सीएम कौन होगा? केरल, कांग्रेस और KC को लेकर राहुल गांधी बीते कई दिनों से माथापच्ची कर रहे हैं. केरल विधानसभा चुनावों में वामपंथी मोर्चे (LDF) को सत्ता से बेदखल कर कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (UDF) ने शानदार वापसी की है. 140 सदस्यीय विधानसभा में 102 सीटों पर मिली इस ऐतिहासिक जीत के बाद अब सबकी निगाहें इस सवाल पर टिकी हैं कि केरल का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? मंगलवार को दिल्ली में हुई हाई-प्रोफाइल बैठकों के बाद यह लगभग साफ हो गया है कि मुख्यमंत्री की दौड़ में केसी वेणुगोपाल ने अपने प्रतिद्वंदियों पर निर्णायक बढ़त बना ली है. राहुल गांधी की मौजूदगी में हुई बैठक के बाद वेणुगोपाल के नाम पर मुहर लगना अब महज एक औपचारिक औपचारिकता मानी जा रही है. लेकिन, राहुल गांधी केंद्र बनाम राज्य पॉलिटिक्स को ठोक बजाकर कोई फैसला करने वाले हैं. ऐसे में बड़ा सवाल यह कि क्या केसी वेणुगोपाल को दिल्ली से केरल भेजा जाएगा या फिर केरल का ही कोई चेहरा आगे आएगा? केरल के नए मुख्यमंत्री के चयन को लेकर मचे घमासान के बीच, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोनिया गांधी के आवास 10 जनपथ पर केरल कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के साथ एक लंबी और गहन बैठक की. इस बैठक में केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष एम.एम. हसन, के. सुधाकरन, और के. मुरलीधरन के साथ-साथ अनुशासन समिति के प्रमुख तिरुवंचूर राधाकृष्णन और कार्यकारी अध्यक्ष शफी परम्बिल, ए.पी. अनिल कुमार और पी.सी. विष्णुनाथ शामिल हुए. सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी ने एक-एक कर सभी नेताओं से उनकी राय जानी, ताकि राज्य में एक स्थिर और प्रभावी शासन दिया जा सके. KERALAM HAS WON! IT IS A UDF TSUNAMI! We thank the 3 crore people of Keralam for a historic, record breaking mandate in the UDF’s favour, giving us 102 seats! Red fortresses have been demolished, traditional arithmetic has been rejected, and a UDF wave has swept through… pic.twitter.com/guQjyffPH5 Source link

ताज़ा खबर

ज्योतिष ने साल भर पहले ही कर दी थी ‘विजय’ की भविष्यवाणी;...

Thalapathy C. Joseph Vijay Astrology Belief: राजनीति और ज्योतिष का रिश्ता भारत में हमेशा से गहरा रहा है. नेता चुनाव से पहले अपनी कुंडली और ग्रहों की चाल जानने के लिए अक्सर ज्योतिषियों के दरवाजे खटखटाते हैं. लेकिन जब कोई नेता उसकी जीत की सटीक भविष्यवाणी करने वाले ज्योतिषी को सीधे सत्ता में अहम पद दे दे, तो यह एक ऐतिहासिक खबर बन जाती है. तमिलनाडु की राजनीति में कुछ ऐसा ही देखने को मिला है. नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने अपने ज्योतिषी रिकी राधन पंडित को मुख्यमंत्री का ‘ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी’ (OSD) नियुक्त किया है. यह वही ज्योतिषी हैं, जिन्होंने करीब एक साल पहले ही यह अचूक दावा किया था. उनका दावा था कि विजय तमिलनाडु के चुनावों में प्रचंड जीत हासिल करेंगे. क्या है सरकारी आदेश और OSD का रसूख? हाल ही में राज्य सरकार द्वारा जारी एक आधिकारिक आदेश में कहा गया है, ‘थिरु रिकी राधन पंडित वेट्रिवेल को उनके कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से मुख्यमंत्री (राजनीतिक) के विशेष कार्य अधिकारी (OSD) के रूप में नियुक्त किया जाता है.’ राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इस पद को अत्यधिक रसूखदार माना जाता है. एक राजनीतिक OSD आमतौर पर मुख्यमंत्री कार्यालय, बड़े राजनेताओं, पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं, विभिन्न सरकारी विभागों और आम जनता के बीच एक सबसे अहम कड़ी के रूप में काम करता है. यह पद रणनीतिक होने के साथ-साथ बेहद प्रभावशाली भी है, क्योंकि यह व्यक्ति राजनीतिक समन्वय और तुरंत निर्णय लेने वाले मामलों पर सीधे मुख्यमंत्री के साथ जुड़कर काम करता है. राधन पंडित को मुख्यमंत्री (राजनीतिक) के विशेष कार्य अधिकारी (OSD) के रूप में नियुक्त किया गया है. कौन हैं राधन पंडित? आखिर यह राधन पंडित कौन हैं? आखिर मुख्यमंत्री विजय ने उन पर इतना बड़ा भरोसा क्यों जताया है? वैदिक ज्योतिष, अंक ज्योतिष (न्यूमेरोलॉजी) और ध्यान-आधारित परामर्श में चार दशकों से अधिक का विशाल अनुभव रखने वाले राधन पंडित भारत के सबसे प्रतिष्ठित ज्योतिषियों में गिने जाते हैं. दक्षिण भारत में जन्मे इस ज्योतिषी ने मूल रूप से ‘पंडित वेट्रिवेल’ के नाम से अपनी प्रैक्टिस शुरू की थी. साल 2008 में वे अपना ठिकाना बदलकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली आ गए. दिल्ली में बसने के बाद उन्होंने अपना नाम बदलकर ‘राधन पंडित’ रख लिया. इसी नाम से उन्होंने देशभर में अपनी सबसे प्रमुख पहचान और हाई-प्रोफाइल अनुयायी बनाए. दिग्गजों से गहरे संबंध राधन पंडित के क्लाइंट्स की सूची में देश के कई ताकतवर राजनेता और पार्टियां शामिल रही हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कई वर्षों में उन्होंने बीजेपी, कांग्रेस, डीएमके (DMK) और एआईएडीएमके (AIADMK) सहित भारत के लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं को अपनी सेवाएं दी हैं. वे भाजपा के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी के काफी करीबी रहे हैं और उन्हें अपने मेंटर (मार्गदर्शक) के समान मानते हैं. बता दें कि उनके ज्योतिषीय करियर का सबसे चर्चित चैप्टर तमिलनाडु की दिवंगत मुख्यमंत्री और कद्दावर नेता जे. जयललिता के साथ उनका जुड़ाव रहा है. राधन पंडित खुद को जयललिता का ‘आध्यात्मिक मार्गदर्शक’ बताते रहे हैं. उन्होंने 1991 में जयललिता की प्रचंड चुनावी जीत की एकदम सटीक भविष्यवाणी की थी. हालांकि, 1994 में जब उन्होंने जयललिता को एक उथल-पुथल भरे दौर के शुरू होने की चेतावनी दी, तो जयललिता को यह रास नहीं आया और दोनों के रिश्ते में दरार आ गई थी. विजय के लिए डंके की चोट पर भविष्यवाणी राधन पंडित एक बार फिर तब जबरदस्त सुर्खियों में आए जब उन्होंने अभिनेता विजय के राजनीतिक भविष्य की मुखर होकर वकालत शुरू की. विजय की नवगठित राजनीतिक पार्टी, ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (टीवीके) के तमिलनाडु की राजनीति में एक मजबूत ताकत बनने से बहुत पहले ही, राधन पंडित सार्वजनिक मंचों से यह जोर देकर कह रहे थे कि अभिनेता का ज्योतिषीय प्रोफाइल (कुंडली) ‘राजनीतिक महानता’ की ओर साफ इशारा कर रहा है. – साल 2024 में उनका एक यूट्यूब वीडियो सामने आया था. इसमें विजय के 2026 तमिलनाडु चुनाव जीतने के बाद अब इंटरनेट पर खूब वायरल हो रहा है. इस वीडियो में पंडित ने विजय की ‘कुंडली’ का विस्तार से एक्सप्लेन किया था. उनका दावा था कि टीवीके नाम विजय की जन्म तिथि के साथ अंक ज्योतिष के हिसाब से पूरी तरह से मेल खाता है. यह पार्टी के भविष्य के लिए एक बड़ा ‘संरचनात्मक लाभ’ साबित होगा. राधन पंडित ने विजय के ग्रहों की स्थिति की तुलना पूर्व मुख्यमंत्री एडाप्पडी के पलानीस्वामी (EPS) और ओ पन्नीरसेल्वम (OPS) जैसे स्थापित नेताओं से करते हुए बताया था कि विजय की कुंडली में सत्ता और ‘राजयोग’ के अचूक संकेत हैं. 150 सीटों का किया था दावा राधन पंडित की सबसे सटीक भविष्यवाणी 2026 के विधानसभा चुनावों की ‘राजनीतिक जंग’ के बारे में थी. उन्होंने बहुत पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि यह चुनाव मुख्य रूप से विजय की टीवीके और डीएमके के उदयनिधि स्टालिन के बीच होगा- यानी मुकाबला दो ऐसे राजनेताओं के बीच होगा जो कभी अभिनेता हुआ करते थे. Source link

ताज़ा खबर

Tamil nadu CM Thalapathy Vijay | Radhan Pandit OSD | थलापति विजय...

चेन्नई. तमिलनाडु की राजनीति में अक्सर फिल्मों जैसा रोमांच देखने को मिलता है, लेकिन इस बार जो खबर सामने आई है, उसने सबको हैरान कर दिया है. तमिल फिल्मो के सुपरस्टार से मुख्यमंत्री बने थलापति विजय ने अपनी सरकार में एक ऐसी नियुक्ति की है, जिसकी चर्चा पूरे देश में हो रही है. मुख्यमंत्री विजय ने अपने निजी ज्योतिषी और आध्यात्मिक मार्गदर्शक, थिरु रिक्की राधान पंडित वेट्ट्रीवेल को मुख्यमंत्री के विशेष कर्तव्य अधिकारी (Officer on Special Duty) के रूप में नियुक्त करने का आदेश दिया है. खास बात यह है कि इस पंडित ने तमिलनाडु के पूर्व दिवंगत सीएम जे जयललिता को लेकर भी बड़ी भविष्यवाणी की थी. इस फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि विजय न केवल प्रशासनिक सलाहकारों, बल्कि आध्यात्मिक मार्गदर्शन पर भी गहरा भरोसा रखते हैं. कौन हैं थिरु रिक्की राधान पंडित? थिरु रिक्की राधान पंडित तमिलनाडु के आध्यात्मिक और ज्योतिषीय हलकों में एक बहुत बड़ा नाम हैं. उन्हें राज्य के सबसे प्रभावशाली स्पिरिचुअल मेंटर्स में से एक माना जाता है. राधान पंडित का इतिहास केवल विजय तक सीमित नहीं है. वे तमिलनाडु की राजनीति की ‘अम्मा’ कही जाने वाली पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत जे. जयललिता के भी बेहद करीबी रहे हैं. जयललिता अपने कठिन समय में अक्सर राधान पंडित से आध्यात्मिक सलाह लिया करती थीं. राजनीति के जानकारों का कहना है कि राधान पंडित का राजनीतिक समझ और ग्रहों की चाल का मेल बैठाने का तरीका उन्हें अन्य ज्योतिषियों से अलग बनाता है. विजय ने अपनी सरकार में एक ऐसी नियुक्ति की है, जिसकी चर्चा पूरे देश में हो रही है. जीत की वो भविष्यवाणी जिसने बदल दी किस्मत थलापति विजय और राधान पंडित का रिश्ता काफी पुराना है. कहा जाता है कि जब विजय ने अभिनय की दुनिया छोड़कर राजनीति में कदम रखने का फैसला किया था, तब कई लोग उनके इस कदम को जोखिम भरा मान रहे थे. उस समय राधान पंडित ही थे जिन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ भविष्यवाणी की थी कि विजय तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बनेंगे. उनकी यह भविष्यवाणी सच साबित हुई और आज विजय राज्य की सत्ता के शिखर पर हैं. शायद यही वजह है कि विजय ने कृतज्ञता प्रकट करते हुए और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए अपने इस भरोसेमंद सलाहकार को अपने ऑफिस में एक आधिकारिक स्थान दिया है. OSD के रूप में क्या होगी भूमिका? मुख्यमंत्री कार्यालय में ओएसडी का पद बेहद महत्वपूर्ण होता है. यह अधिकारी सीधे मुख्यमंत्री को रिपोर्ट करता है और नीतिगत फैसलों से लेकर महत्वपूर्ण नियुक्तियों तक में अपनी राय रखता है. राधान पंडित की ओएसडी के रूप में नियुक्ति यह संकेत देती है कि विजय अपनी सरकार के हर बड़े कदम को ज्योतिषीय और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से परखना चाहते हैं. हालांकि, सरकारी तंत्र में एक ज्योतिषी को इतना महत्वपूर्ण पद दिए जाने पर कुछ प्रशासनिक हल्कों में दबी जुबान में आलोचना भी शुरू हो गई है, लेकिन विजय के समर्थकों का मानना है कि यह उनकी अपनी कार्यशैली है. तमिलनाडु की राजनीति में बदला समीकरण विजय के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही तमिलनाडु की राजनीति में दशकों से चले आ रहे द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के वर्चस्व को तगड़ी चुनौती मिली है. ऐसे में विजय अपने साथ उन लोगों को रखना चाहते हैं जो न केवल उनके प्रति वफादार हों, बल्कि उनकी जीत में भी सारथी की भूमिका निभा चुके हों. राधान पंडित की नियुक्ति से यह संदेश गया है कि विजय की सरकार में ‘विश्वास’ को सबसे ऊपर रखा जाएगा. सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस राजनीतिज्ञों का कहना है कि विजय अब जयललिता की उस विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, जहां अध्यात्म और राजनीति का गहरा मेल देखने को मिलता था. इस नियुक्ति की खबर जैसे ही वायरल हुई, सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई. विजय के प्रशंसक इसे एक शानदार कदम बता रहे हैं, उनका कहना है कि अगर कोई व्यक्ति आपको सही राह दिखा सकता है, तो उसे साथ रखने में कोई बुराई नहीं है. वहीं, आलोचक इसे ‘अंधविश्वास’ को बढ़ावा देने वाला कदम करार दे रहे हैं. कुछ यूजर्स ने मजाकिया लहजे में लिखा कि अब तमिलनाडु सरकार की फाइलें ‘शुभ मुहूर्त’ देखकर ही आगे बढ़ेंगी. लेकिन इन सबसे बेखबर, विजय अपनी टीम को मजबूत करने में जुटे हैं. पंडित जयललिता के भी आध्यात्मिक मार्गदर्शक रह चुके हैं. ये भी पढें: विजय का दूसरा सुपर हिट फैसला, एक ही झटके में बंद कर दी 717 शराब की दुकानें, वजह जानकर आप भी करेंगे सैल्यूट थलापति विजय ने अपनी राजनीति की शुरुआत से ही यह स्पष्ट कर दिया है कि वे लीक से हटकर काम करेंगे. पहले 200 यूनिट बिजली फ्री वाला फैसला, फिर महिलाओं की सुरक्षा के लिए सिंगा टास्क फोर्स का गठन और मंगलवार को 717 शराब की दुकानें बंद करने के बाद, अपने ज्योतिषी को ओएसडी बनाना उनका दूसरा सबसे बड़ा चौंकाने वाला फैसला है. यह देखना दिलचस्प होगा कि राधान पंडित का मार्गदर्शन विजय की सरकार को कितनी ऊंचाई तक ले जाता है. फिलहाल, चेन्नई से लेकर दिल्ली तक, राधान पंडित और थलापति विजय की यह ‘जुगलबंदी’ सुर्खियां बटोर रही है. Source link

ताज़ा खबर

विधानसभा हार के बाद ममता बनर्जी का ‘बहरामपुर प्लान’: यूसुफ पठान की...

What Is Next Mamata Banerjee Plan After Bengal Lost: पश्चिम बंगाल की सत्ता की चाबी दीदी के हाथ से फिसल गई है. लेकिन ममता बनर्जी अभी भी अपने वजूद को बचाने के लिए जुगत लगा रही हैं. एक तरफ भवानीपुर विधानसभा सीट पर मिली करारी शिकस्त ने टीएमसी के खेमे में सन्नाटा पसरा दिया है, मगर इस सन्नाटे के बीच एक ऐसी खिचड़ी पक रही है जिसने दिल्ली से लेकर कोलकाता तक का सियासी पारा चढ़ा सकता है. सूत्रों की मानें तो ममता बनर्जी अब संसद के रास्ते अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की जुगत में हैं. इसके लिए उन्होंने बहरामपुर लोकसभा सीट को चुना है, जहां से वर्तमान में पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान सांसद हैं. खबर है कि यूसुफ पठान से इस्तीफा दिलाकर दीदी खुद वहां से उपचुनाव लड़ सकती हैं. लेकिन यह रास्ता इतना आसान नहीं है. एक तरफ भाजपा का बढ़ता ग्राफ है और दूसरी तरफ साख बचाने की चुनौती. अगर बहरामपुर में भी पासा उल्टा पड़ा, तो दीदी की रही-सही इज्जत भी दांव पर लग जाएगी.  टीएमसी के अंदरखाने इस पर मंथन शुरू हो चुका है. बहरामपुर की पिच और दीदी का दांव बहरामपुर हमेशा से बंगाल की राजनीति का सबसे दिलचस्प मोड़ रहा है. कभी इसे अधीर रंजन चौधरी का अभेद्य किला माना जाता था, जिसे 2024 में यूसुफ पठान ने ढहा दिया था. अब उसी पिच पर ममता बनर्जी खुद बैटिंग करने की तैयारी में हैं. टीएमसी के रणनीतिकारों को लगता है कि ममता का संसद पहुंचना भाजपा के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर माहौल बनाने के लिए जरूरी है. लेकिन राजनीति में टाइमिंग का बड़ा महत्व होता है. विधानसभा चुनाव में हार के तुरंत बाद किसी दूसरी सीट पर हाथ आजमाना जनता के बीच क्या संदेश देगा? क्या बहरामपुर के लोग दीदी को ‘शरणार्थी’ नेता के तौर पर देखेंगे या फिर उन्हें बंगाल की आवाज मानकर सिर-आंखों पर बैठाएंगे? यूसुफ पठान की राजनीतिक बलि? यूसुफ पठान को जब राजनीति में लाया गया था, तो वह ममता का ‘ट्रम्प कार्ड’ थे. उन्होंने अपना काम बखूबी किया और कांग्रेस के दिग्गज अधीर को पटखनी दी. लेकिन अब खबर है कि दीदी के लिए यूसुफ को अपनी सीट छोड़नी पड़ सकती है. इसे यूसुफ की राजनीतिक बलि के तौर पर देखा जा रहा है. सवाल यह है कि एक लोकप्रिय खिलाड़ी और सांसद को इस तरह किनारे करना क्या स्थानीय समर्थकों को रास आएगा? यूसुफ पठान की अपनी एक फैन फॉलोइंग है और उनके अचानक हटने से टीएमसी के भीतर भी असंतोष की लहर दौड़ सकती है. क्या दीदी का यह ‘सुसाइडल’ दांव खुद उनकी पार्टी के लिए ही मुसीबत खड़ी कर देगा? भाजपा की घेराबंदी और कड़ी चुनौती बहरामपुर अब वो पुराना गढ़ नहीं रहा जहां सिर्फ टीएमसी या कांग्रेस का कब्जा हो. 2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के सुब्रत मैत्रा ने जिस तरह से अपनी धाक जमाई है, उसने साफ कर दिया है कि बहरामपुर का मिजाज बदल चुका है. भाजपा ने यहां अपनी जड़ें काफी गहरी कर ली हैं. अगर ममता यहं से उपचुनाव लड़ती हैं, तो भाजपा इसे ‘हारी हुई मुख्यमंत्री’ बनाम ‘स्थानीय चेहरा’ का मुद्दा बनाएगी. सुब्रत मैत्रा की जीत ने भाजपा कार्यकर्ताओं में जो जोश भरा है, वह ममता के लिए सबसे बड़ी रुकावट बन सकता है. यहाँ की मिट्टी में अब कमल की खुशबू तेजी से फैल रही है. क्या साख बचा पाएंगी ममता बनर्जी? राजनीति में हार-जीत चलती रहती है, लेकिन ममता बनर्जी के लिए यह लड़ाई सिर्फ एक सीट की नहीं, बल्कि उनके अस्तित्व की है. भवानीपुर में हारने के बाद उनकी छवि को जो धक्का लगा है, उसकी भरपाई के लिए उन्हें एक बड़ी जीत चाहिए. बहरामपुर उनके लिए वो सुरक्षित गलियारा हो सकता था, लेकिन बदले हुए समीकरणों ने इसे ‘डेंजर जोन’ बना दिया है. माना जा रहा है कि अगर ममता यहां से भी हारती हैं, तो उनकी राजनीति का सूरज हमेशा के लिए अस्त हो सकता है. क्या वो अपनी बची-खुची इज्जत दांव पर लगाकर यह जोखिम उठाने को तैयार हैं? यह देखना अभी बाकी है. अधीर की हार और नया समीकरण उधर अधीर रंजन चौधरी की हार ने बहरामपुर में एक नया राजनीतिक शून्य पैदा कर दिया है. कांग्रेस के इस कद्दावर नेता की विदाई के बाद मुकाबला सीधे टीएमसी और भाजपा के बीच सिमट गया है. ममता बनर्जी इसी वैक्यूम का फायदा उठाना चाहती हैं. उन्हें लगता है कि कांग्रेस का बचा-कुचा वोट बैंक उनकी तरफ शिफ्ट हो सकता है. लेकिन हकीकत इसके उलट भी हो सकती है. कांग्रेस का वफादार वोटर टीएमसी को वोट देने के बजाय भाजपा की तरफ भी जा सकता है ताकि ममता को रोका जा सके. यह समीकरण दीदी के लिए सिरदर्द बन सकता है और उनकी सारी मेहनत पर पानी फेर सकता है. संसद जाने की मजबूरी या रणनीति? ममता बनर्जी हमेशा से ‘स्ट्रीट फाइटर’ रही हैं और दिल्ली की राजनीति में दखल देना उनका पुराना शौक है. विधानसभा में विपक्ष में बैठने के बजाय उन्हें संसद में बैठकर मोदी सरकार को घेरना ज्यादा रास आता है. लेकिन मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए या हार के बाद इस तरह का कदम उठाना उनकी कमजोरी के तौर पर भी देखा जा सकता है. लोग पूछेंगे कि क्या दीदी बंगाल की जनता का सामना करने से डर रही हैं? बहरामपुर उपचुनाव की चर्चाओं ने इस सवाल को और गहरा कर दिया है. क्या दीदी का यह मास्टरस्ट्रोक वाकई में उन्हें दिल्ली तक ले जाएगा या बीच रास्ते में ही अटक जाएगा? बहरामपुर की जनता का मूड क्या है? बहरामपुर की मिट्टी का मिजाज भांपना हमेशा से मुश्किल रहा है. यहां की जनता ने बड़े-बड़े सूरमाओं को धूल चटाई है. यूसुफ पठान को उन्होंने बाहरी होने के बावजूद जिताया था क्योंकि वह एक नई उम्मीद थे. लेकिन अब ममता बनर्जी के मामले में स्थिति अलग है. यहां का मतदाता अब ज्यादा जागरूक है और भाजपा की सक्रियता ने उसे विकल्प दे दिया है. क्या जनता एक बार फिर टीएमसी पर भरोसा करेगी? अगर यहां का दांव उल्टा पड़ा, तो बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी का मटियामेट होना तय माना जा रहा है. दीदी की बैटिंग देखने के लिए बहरामपुर की गलियां तैयार तो है, पर

Scroll to Top