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NEET 2026 Cancelled LIVE: नीट पेपर लीक मामले में दो अरेस्‍ट, दोबारा...

Last Updated:May 12, 2026, 13:47 IST neet paper leak 2026 news, neet exam cancelled LIVE: गेस पेपर वायरल होने के बाद अब NEET UG 2026 की परीक्षा रद्द कर दी गई है. इस मामले की जांच अब सीबीआई को सौंपी गई है. आइए जानते हैं कि इस मामले में अब तक क्‍या …और पढ़ें neet ug 2026, neet exam, neet exam cancelled 2026, neet cancelled, re neet 2026 LIVE: नीट परीक्षा का पेपर कैंसिल हो गया है. neet paper leak 2026 news, neet exam cancelled: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 को आखिरकार रद्द कर दिया गया है. राजस्थान में सामने आए कथित गेस पेपर लीक विवाद और परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों के बाद सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए परीक्षा कैंसिल कर दी है. अब पूरे मामले की जांच CBI करेगी.इस फैसले से 22 लाख से ज्यादा छात्र प्रभावित हुए हैं, जिन्होंने 3 मई 2026 को देशभर में आयोजित NEET परीक्षा दी थी. NTA का कहना है कि परीक्षा की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल उठने के बाद यह कदम उठाना जरूरी हो गया था. क्यों रद्द की गई NEET UG 2026 परीक्षा? NEET 2026 Cancelled LIVE:CBI करेगी पेपर लीक की जांच NEET 2026 Cancelled LIVE:सरकार ने नीट पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई को सौंपी है. अब इस पूरे मामले की जांच सीबीआई करेगी.अभी तक राजस्‍थान एसओजी नीट पेपर लीक मामले की जांच कर रही है. एसओजी ने इस मामले में कई लोगों को अरेस्‍ट भी किया गया है. NEET 2026 Cancelled LIVE:जवाबदेही तय करने की मांग NEET 2026 Cancelled LIVE: NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने पर पेपर लीक के आरोपों को लेकर फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने ट्वीट किया.FAIMA ने कहा कि हम इस पेपर लीक के लिए तुरंत जवाबदेही तय करने की मांग करते हैं. हम चुप नहीं रहेंगे. On NEET-UG 2026 exam cancelled following paper leak allegations, Federation of All India Medical Association (FAIMA) tweets, “FAIMA demand immediate accountability for this paper leak. We will not stay silent. Exemplary punishment is the only way forward.” pic.twitter.com/qsZteCkvO1 — ANI (@ANI) May 12, 2026 NEET 2026 Cancelled LIVE: नीट मामले में दो अरेस्‍ट NEET 2026 Cancelled LIVE: राजस्‍थान एसओजी ने जयपुर से नीट पेपर लीक मामले में दो लोगों को अरेस्‍ट किया है. अभी अविनाश लांबा और मनीष यादव नाम के दो लोगों को अरेस्‍ट किया गया है. NEET 2026 Cancelled LIVE: सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो जांच NEET Paper Leak Case LIVE: नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग की गई है.NSUI के कार्यकर्ताओं ने नीट एग्जाम कैंसिल होने के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर प्रतिबंध लगाने और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है. परीक्षा रदद होने के बाद NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने कहा कि हमें सरकार पर कोई भरोसा नहीं है.एनएसयूआई ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस विफलता के लिए जिम्‍मेदार ठहराया है और उनसे इस्‍तीफे की मांग की है. NEET 2026 Cancelled LIVE: MBBS की सीटें सीमित NEET 2026 Cancelled LIVE: देशभर में MBBS की सीटें सीमित हैं और लाखों छात्र सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए इस परीक्षा पर निर्भर रहते हैं. ऐसे में किसी भी तरह की गड़बड़ी सीधे छात्रों के भविष्य को प्रभावित करती है. neet paper leak 2026 LIVE Update: 22 लाख से ज्यादा छात्रों ने दी थी परीक्षा NEET 2026 Cancelled LIVE: इस साल NEET UG 2026 के लिए कुल 22,79,743 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था. NTA ने इतने ही अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड जारी किए थे.पिछले साल की तुलना में इस बार करीब 3000 ज्यादा छात्रों ने परीक्षा में हिस्सा लिया था. यही वजह है कि यह परीक्षा देश की सबसे ज्यादा प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में गिनी जाती है. NEET 2026 Cancelled LIVE: NTA ने क्‍या कहा? NEET 2026 Cancelled LIVE: NTA ने कहा है कि वह जांच में पूरा सहयोग करेगी और सभी रिकॉर्ड, डेटा और तकनीकी जानकारी CBI को उपलब्ध कराई जाएगी. NEET 2026 Cancelled LIVE: अब CBI करेगी पूरे मामले की जांच NEET 2026 Cancelled LIVE, neet paper leak 2026 news:केंद्र सरकार ने इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI को सौंप दी है.CBI यह पता लगाएगी कि कथित गेस पेपर आखिर कहां से आया, किसने इसे फैलाया और क्या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था. जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि क्या छात्रों से पैसे लेकर सवाल बेचे गए थे. Source link

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Opinion: बंगाल का ‘शापित’ ट्रेंड, हारने वाली पार्टी हो जाती है नेस्तनाबूद!...

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक अनोखा पैटर्न दिखाई देता है. यहां सत्ता से विदा होने वाली पार्टियां कभी वापसी नहीं कर पातीं. एक बार जनादेश ने किसी को ठुकरा दिया तो वह लंबे समय तक विपक्ष की बेंच पर ही बैठी रहती है. कांग्रेस के बाद वामपंथी मोर्चा और अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के साथ भी यही हो रहा है. 2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत ने TMC की 15 साल की सत्ता का अंत कर दिया है. यह बदलाव बंगाल की राजनीति का नया अध्याय है, जहां क्षेत्रीय शक्तियां राष्ट्रीय लहर के सामने टिक नहीं पा रही हैं. यह पैटर्न सिर्फ संयोग नहीं, बल्कि बंगाल की सामाजिक-आर्थिक संरचना, वोटर व्यवहार और संगठनात्मक कमजोरियों का नतीजा है. बंगाल में सत्ता परिवर्तन का संकेत पहले से ही मिलने लगता है. जब एक बार जनता का मूड पूरी तरह बदलता है, तो पुरानी पार्टी को समूल उखाड़ फेंका जाता है. कांग्रेस 50 साल से कर रही इंतजार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस बंगाल की सबसे पुरानी और एक समय की सबसे मजबूत ताकत थी. स्वतंत्रता के बाद से 1977 तक कांग्रेस ने यहां लंबे समय तक राज किया. बिधान चंद्र रॉय जैसे दिग्गज मुख्यमंत्री रहे, लेकिन 1977 में वाम मोर्चा की लहर उठी तो कांग्रेस को करारी हार मिली. उसके बाद कांग्रेस लगभग 50 साल से सत्ता में वापसी का इंतजार कर रही है. 1972 में सिद्धार्थ शंकर राय के नेतृत्व में कांग्रेस की आखिरी मजबूत सरकार थी, लेकिन आपातकाल, नक्सलवाद और आर्थिक संकट ने कांग्रेस की छवि खराब कर दी. 1977 के बाद वामपंथियों ने लैंड रिफॉर्म और ग्रामीण संगठन के जरिए मजबूत पकड़ बना ली. कांग्रेस बंगाल में धीरे-धीरे हाशिए पर चली गई. 2011 में ममता बनर्जी ने वाम मोर्चा को हराया. 2021 और 2026 के चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद खराब रहा. कई बार वह अपना खाता तक नहीं खोल पाई. आज बंगाल में कांग्रेस तीसरे या चौथे नंबर की पार्टी बन कर रह गई है. उसके पारंपरिक वोटर- हिंदू मध्य वर्ग और कुछ अल्पसंख्यक- TMC और भाजपा के बीच बंट गए हैं. कांग्रेस की राष्ट्रीय छवि और बंगाल में संगठनात्मक ढांचे की कमी ने उसे वापसी नहीं करने दी. 50 साल का इंतजार अब शायद और लंबा हो गया है, क्योंकि नई पीढ़ी को कांग्रेस बंगाल में विकल्प के रूप में दिखाई ही नहीं देती. 34 साल बाद उखड़ा लेफ्ट का खूंटा वाम मोर्चा ने 1977 से 2011 तक पूरे 34 साल बंगाल पर राज किया. ज्योति बसु और बुद्धदेव भट्टाचार्य जैसे नेता इस युग के प्रतीक बने. लैंड रिफॉर्म, पंचायती राज और शिक्षा में कुछ उपलब्धियां रहीं, लेकिन अंतिम वर्षों में सिंगुर-नंदीग्राम जैसे आंदोलनों ने वाम सरकार को हिला दिया. औद्योगिक विकास की कमी, नौकरियों का अभाव और तुष्टिकरण की छवि ने जनता को नाराज कर दिया. 2011 में ममता बनर्जी की TMC ने भारी बहुमत से वाम मोर्चा को सत्ता से बेदखल कर दिया. उसके बाद वाम मोर्चा लगातार गिरावट पर है. 2016, 2021 और 2026 में भी वह खुद को मजबूत विपक्ष के रूप में भी स्थापित नहीं कर पाया. कई पारंपरिक वाम वोटर TMC की ओर गए, फिर कुछ भाजपा की ओर शिफ्ट हो गए. युवा पीढ़ी को वाम विचारधारा पुरानी और असफल लगने लगी है. 34 साल की सत्ता के बावजूद लेफ्ट आज बंगाल में मामूली ताकत बन कर रह गया है. संगठन टूटा, छात्र-युवा विंग कमजोर हुआ और वैचारिक आकर्षण खत्म हो गया. बंगाल में वाम की वापसी की कोई साफ संभावना नजर नहीं आती, क्योंकि न तो वे विकास का नया मॉडल पेश कर पाए और न ही विपक्षी एकता में अपनी भूमिका तय कर पाए. TMC के जाने के मिल रहे थे संकेत टीएमसी ने 2011 में सत्ता संभाली और ममता बनर्जी ने तीन बार मुख्यमंत्री पद संभाला. शुरू के वर्षों में लोकप्रियता चरम पर थी. महिला सशक्तिकरण, कल्याणकारी योजनाएं और क्षेत्रीय गौरव के नारे ने उसे सशक्त बनाया, लेकिन धीरे-धीरे भ्रष्टाचार, तुष्टिकरण, हिंसा और परिवारवाद की शिकायतें बढ़ीं. 2021 में भाजपा 38 प्रतिशत वोट शेयर और 77 सीटों तक पहुंच गई थी, जो टीएमसी की विदाई का संकेत था. 2026 के चुनावों में टीएमसी की हार के कई कारण थे. 15 साल के शासन से उपजा एंटी इनकम्बैंसी, कानून-व्यवस्था की समस्या, भर्ती घोटाले, और संगठनात्मक अंदरूनी कलह ने टीएमसी की ताकत क्षीण कर दी. भ्रष्टाचार और तोलाबाजी (रंगदारी) की संस्कृति ने टीेमसी की मुश्किलें बढ़ी. मुस्लिम वोट बैंक पर पकड़ कमजोर हुई और हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण भाजपा के पक्ष में गया. उच्च मतदान प्रतिशत और मतदाता सूची संशोधन (SIR) जैसे मुद्दों ने भी खेल बिगाड़ा. ममता बनर्जी ने हार के बाद साजिश का आरोप लगाया, लेकिन जनादेश साफ था. टीएमसी की 15 साल की सत्ता समाप्त हो गई. TMC के जाने के संकेत 2021 से ही मिल रहे थे. स्थानीय चुनावों में हार, पंचायतों में हिंसा की खबरें और भाजपा का ग्रामीण विस्तार विदाई के संकेत थे. अब TMC विपक्ष में बैठ कर अपनी वापसी की रणनीति बना रही है, लेकिन इतिहास बताता है कि यह आसान नहीं होगा. जाने वाले लौटते क्यों नहीं बंगाल में आजादी के बाद से ही बंगाल में यह अनोखा ट्रेंड रहा है कि सत्ता गंवाने वाली पार्टियां कभी वापसी नहीं करतीं. इसके कई कारण हैं. पहला यह कि बंगाल में बदलाव अचानक नहीं होता. जनता पहले इसका संकेत देती है. फिर बदलाव का फाइनल फैसला कर लेती है. पुरानी पार्टी को काम करने का जनता भरपूर मौका देती है. इस दौरान जनता तंगी-तबाही और सरकार की मनमानी को भी झेल लेती है. समय आने पर वोटर अपनी लायल्टी बदल लेते हैं. कल जो टीएमसी के सपोर्टर थे, अब वे भाजपा के हो गए हैं या होते जा रहे हैं. इसी तरह लेफ्ट पार्टियों के लोग भी टीएमसी की ओर मुखातिब हो गए थे. यह भी कि युवा मतदाता पुरानी पार्टियों को पुराना और असफल मानते हैं. वे मुकाबले में खड़ी किसी नई पार्टी को सपोर्ट करते हैं. इन्हीं कारणों से कांग्रेस 50 साल और लेफ्ट 15 साल बाद भी वापस नहीं लौट पाए. टीएमसी के साथ भी यही चुनौती हो सकती है. बीजेपी को अलग राह अपनानी होगी भाजपा ने 2026 में पहली बार बंगाल में सरकार बनाई है.

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PM मोदी-अमित शाह के बीच इस छोटी बच्ची को हिमंत ने शपथ...

होमताजा खबरदेश हिमंता ने इस बच्ची को अपने शपथ ग्रहण समारोह में क्यों बनाया खास मेहमान? Last Updated:May 12, 2026, 11:40 IST assam chief minister oath ceremony: असम के मुख्यमंत्री के रूप में हिमंता बिस्वा सरमा आज दूसरी बार शपथ लेंगे. खानपारा मैदान में आयोजित इस भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह जैसे वीवीआईपी शामिल हो रहे हैं. लेकिन इन सबके बीच आकर्षण का केंद्र एक चौथी क्लास की बच्ची भी होगी. आइए जानते हैं कि आखिर इस छोटी सी बच्ची को हिमंता ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में क्यों बनाया खास मेहमान? शपथ ग्रहण में नन्ही तनीषा को वीवीआईपी न्योता देकर सभी को चौंकाया, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने निभाया अपना वह पुराना वादा. असम के राजनीतिक इतिहास में आज का दिन स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा. डॉ. हिमंता बिस्वा शर्मा लगातार दूसरी बार राज्य की कमान संभालने जा रहे हैं. गुवाहाटी का खानपारा मैदान इस ऐतिहासिक पल का गवाह बन रहा है. सुरक्षा के कड़े इंतजामों और सत्ता के गलियारों की हलचल के बीच एक ऐसी कहानी चर्चा में है जिसने सबका दिल जीत लिया है. यह कहानी है बोकाखाट के कमरगांव की रहने वाली नन्ही तनिष्ठा दुवारा की. तनिष्ठा महज चौथी कक्षा की छात्रा है, लेकिन आज वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह जैसे दिग्गजों के बीच उन खास मेहमानों की लिस्ट में सबसे ऊपर है, जिन्हें मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से आमंत्रित किया है. हिमंता का वादा और नन्ही पेंटर बात 4 मार्च की है, जब बोकाखाट विधानसभा क्षेत्र के कमरगांव में एक चुनावी जनसभा चल रही थी. भीड़ के बीच तनिष्ठा अपनी एक हाथ से बनाई हुई खूबसूरत पेंटिंग और एक छोटा सा पत्र लेकर मुख्यमंत्री से मिलने पहुंची थी. उस पत्र में मासूमियत के साथ एक बड़ी इच्छा लिखी थी— “मैं आपके अगले शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होना चाहती हूं.” उस वक्त शायद किसी ने नहीं सोचा था कि मुख्यमंत्री इसे इतनी गंभीरता से लेंगे. लेकिन हिमंता बिस्वा सरमा ने न सिर्फ वह पेंटिंग स्वीकार की, बल्कि मंच से ही वादा किया कि वे उसे जरूर बुलाएंगे. मंत्री को मिला विशेष निर्देश जैसे ही शपथ ग्रहण की तारीख तय हुई, मुख्यमंत्री ने अपना वचन निभाने में देर नहीं की. उन्होंने तुरंत मंत्री अतुल बोरा को निर्देश दिया कि तनीषा को ससम्मान समारोह स्थल तक लाने की पूरी व्यवस्था की जाए. यह केवल एक प्रोटोकॉल नहीं था, बल्कि एक नेता का जनता के प्रति और विशेषकर राज्य के भविष्य यानी बच्चों के प्रति लगाव का प्रतीक था. आज तनिष्ठा अपने परिवार के साथ वीवीआईपी दीर्घा में बैठकर इस भव्य समारोह की साक्षी बन रही है, जो किसी सपने के सच होने जैसा है. खानपारा में दिग्गजों का जमावड़ा शपथ ग्रहण समारोह के लिए खानपारा मैदान को दुल्हन की तरह सजाया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कई राज्यों के मुख्यमंत्री इस समारोह की शोभा बढ़ा रहे हैं. इस दौरान केवल मुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि उनके मंत्रिमंडल के प्रमुख साथी भी शपथ ले रहे हैं. गोलाघाट से विधायक अजंता नियोग, बोकाखाट से अतुल बोरा, माजबत से चरण बोरो और दुलियाजान से रामेश्वर तेली मंत्री पद की शपथ लेकर नई सरकार में अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे. सियासत में सादगी की मिसाल अक्सर देखा जाता है कि ऐसे बड़े आयोजनों में केवल रसूखदार लोगों को ही जगह मिलती है, लेकिन मुख्यमंत्री ने एक आम परिवार की बच्ची को बुलाकर यह संदेश दिया है कि उनकी सरकार आम आदमी की सरकार है. तनिष्ठा के पिता और गांव के लोग इस कदम से फूले नहीं समा रहे हैं. उनका कहना है कि मुख्यमंत्री ने एक छोटे से पत्र का मान रखकर असम की जनता का दिल जीत लिया है. यह घटना सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हो रही है और लोग मुख्यमंत्री की इस सादगी की जमकर तारीफ कर रहे हैं. विकास और विश्वास की नई पारी आज का यह शपथ ग्रहण समारोह असम के विकास के अगले अध्याय की शुरुआत है. नई सरकार के सामने जहां कई चुनौतियां हैं, वहीं जनता का भारी समर्थन और विश्वास भी है. हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में असम ने पिछले कार्यकाल में शांति और प्रगति की जो राह पकड़ी थी, उसे अब और तेज गति देने की तैयारी है. तनिष्ठा जैसी नन्ही नागरिकों का उत्साह यह बताता है कि नई पीढ़ी को अपनी सरकार और अपने मुखिया पर कितना गहरा भरोसा है. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi Source link

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तेजस-Mk1A 4.5 जेन फाइटर जेट मात्र ₹390 करोड़ में! चीनी J-20 का...

Tejas MK1A Update: भारत का स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम अब ऐसे मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है, जहां वह सिर्फ इंडियन एयरफोर्स की जरूरत पूरी करने वाला प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि वैश्विक हथियार बाजार का बड़ा खिलाड़ी बन सकता है. एचएएल द्वारा निर्मित तेजस-Mk1A को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह है इसकी कीमत. इतनी कम कीमत में 4.5 जेनरेशन की आधुनिक क्षमताओं वाला फाइटर जेट अभी कोई दूसरा मुल्क नहीं बना पाया है. करीब 42 मिलियन डॉलर यानी लगभग 390 करोड़ रुपये प्रति विमान की कीमत पर उपलब्ध यह फाइटर जेट अब उन देशों के लिए आकर्षक विकल्प बनता जा रहा है जो पुराने F-5, मिग-21 और एफ-7 जैसे तीसरी पीढ़ी के विमानों को बदलना चाहते हैं. वैश्विक रक्षा बाजार में फिलहाल 300 से 500 हल्के लड़ाकू विमानों की संभावित मांग है. पश्चिमी देशों के पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर बेहद महंगे हैं. उदाहरण के तौर पर अमेरिकी F-35 या चीनी J-20 जैसे प्लेटफॉर्म छोटे और मध्यम रक्षा बजट वाले देशों की पहुंच से बाहर हैं. ऐसे में तेजस-Mk1A खुद को किफायती 4.5 जेनरेशन फाइटर के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है. आधुनिक तकनीक इस तकनीक की सबसे बड़ी ताकत तेजस की सबसे बड़ी ताकत उसकी आधुनिक तकनीक है. इसमें AESA रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट, आधुनिक एवियोनिक्स और बीवीआर यानी बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइल क्षमता मौजूद हैं. भारत की स्वदेशी अस्त्र Mk-1 मिसाइल के साथ इसकी मारक क्षमता और बढ़ जाती है. कम ऑपरेटिंग लागत और सिंगल इंजन डिजाइन इसे उन देशों के लिए आदर्श बनाता है जिन्हें सीमित बजट में आधुनिक एयर पावर चाहिए. अब तक तेजस के निर्यात में सबसे बड़ी बाधा अमेरिकी कंपनी GE F404 इंजन की सप्लाई थी. अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस समय पर इंजन नहीं दे पा रही थी, जिससे इस जेट का प्रोडक्शन प्रभावित हुआ. लेकिन अब स्थिति बदलती दिख रही है. जीई ने 2026-27 से हर साल 20 इंजन सप्लाई करने की प्रतिबद्धता जताई है. इससे विदेशी ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा, क्योंकि रक्षा सौदों में समय पर डिलीवरी बेहद अहम होती है. भारत सरकार ने भी तेजस कार्यक्रम को बड़ी मजबूती दी है. रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायु सेना के लिए 97 अतिरिक्त तेजस-Mk1A खरीद को मंजूरी दी है. करीब ₹62,000 करोड़ के इस सौदे के बाद कुल ऑर्डर 180 जेट से ज्यादा हो चुके हैं. यह किसी भी विदेशी खरीदार के लिए संकेत है कि भारत इस विमान को लंबे समय तक अपने फ्रंटलाइन फाइटर के रूप में इस्तेमाल करेगा. इससे रखरखाव, अपग्रेड और स्पेयर पार्ट्स की स्थिर व्यवस्था का भरोसा मिलेगा. भारतीय वायु सेना 180 तेजस मार्क-1ए जेट खरीद रही है. इन देशों पर फोकस कर रहा एचएएल एचएएल अब लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों पर खास फोकस कर रहा है. मिस्र, नाइजेरिया, बोत्सवाना और ब्राजील जैसे देशों को तेजस की पेशकश की गई है. मिस्र को तो इसे लीड-इन फाइटर ट्रेनर के रूप में भी ऑफर किया गया है. इन देशों को ऐसे मल्टीरोल फाइटर चाहिए जो एयर डिफेंस, ग्राउंड अटैक और समुद्री मिशन कर सकें, लेकिन उनकी लागत नियंत्रण में रहे. यही वह जगह है जहां चीन का J-20 और पश्चिमी देशों के महंगे जेट मात खा जा रहे हैं. J-20 तकनीकी रूप से उन्नत जरूर है, लेकिन उसकी लागत और रखरखाव खर्च काफी अधिक है. रूस के मिग और सुखोई प्लेटफॉर्म तथा फ्रांस के राफेल जैसे विमान भी महंगे विकल्प माने जाते हैं. तेजस इस गैप को भरने की कोशिश कर रहा है, जहां आधुनिक तकनीक और किफायती कीमत दोनों साथ हैं. रणनीतिक स्वायत्तता भारत की एक और बड़ी ताकत उसकी रणनीतिक स्वायत्तता है. कई देश पश्चिमी हथियार सौदों में लगाई जाने वाली सख्त शर्तों और एंड-यूजर मॉनिटरिंग से परेशान रहते हैं. भारत अपेक्षाकृत लचीली शर्तें, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और पश्चिमी व स्वदेशी हथियारों के मिश्रण की सुविधा देने को तैयार है. यही वजह है कि कई विकासशील देशों के लिए भारत एक भरोसेमंद रक्षा साझेदार के रूप में उभर रहा है. हालांकि, असली परीक्षा अब शुरू होती है. एचएएल को सिर्फ विमान की क्षमता साबित नहीं करनी, बल्कि समय पर उत्पादन, डिलीवरी और मजबूत सपोर्ट सिस्टम भी तैयार करना होगा. यदि भारत यह चुनौती सफलतापूर्वक पार कर लेता है, तो 2026 तेजस कार्यक्रम के लिए निर्णायक साल साबित हो सकता है और भारत वैश्विक फाइटर जेट बाजार में बड़ी ताकत बनकर उभर सकता है. Source link

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जापान-जर्मनी में नौकरी के लिए यूपी के युवाओं से मांगे गए आवेदन,...

मुरादाबाद में सेवायोजन विभाग की तरफ से विदेश में नौकरी की वैकेंसी निकाली गई है, जिसमें अलग-अलग पदों पर भर्ती की जा रही है. इन नौकरियों में 2 लाख रुपये से अधिक तक की सैलरी दी जाएगी. युवाओं को अलग-अलग देशों में नौकरी करने का मौका मिलेगा. इसके साथ ही विदेश की भाषा मुफ्त में सीखने का अवसर भी मिलेगा. जो भी आवेदन करना चाहता है, वह सेवायोजन विभाग के पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकता है और वहीं से पूरी जानकारी प्राप्त कर सकता है. विदेशों में मिलेगा रोजगार सहायक निदेशक सेवायोजन रत्नेश चंद्र ने बताया कि उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन के अंतर्गत सेवायोजन विभाग जिले के युवाओं को देश के साथ-साथ विदेशों में भी रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रहा है. सेवायोजन विभाग द्वारा संचालित पोर्टल rojgaarsangam.up.gov.in पर जापान, जर्मनी, इजराइल और सऊदी अरब जैसे देशों में प्रशिक्षित एवं कुशल श्रमिकों को भेजने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. विदेश मंत्रालय और नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के सहयोग से चयन प्रक्रिया को गति दी गई है. ऐसे करें आवेदन उन्होंने बताया कि रोजगार संगम पोर्टल rojgaarsangam.up.gov.in पर सऊदी अरब के लिए विभिन्न पदों जैसे फैब्रिकेशन सुपरवाइजर, मैकेनिकल हेल्पर, वेल्डर TIG एवं ARC CS, पाइप फैब्रिकेटर, स्ट्रक्चरल फैब्रिकेटर, मैकेनिकल टेक्नीशियन, फैब्रिकेटर फोरमैन और मैकेनिकल फिटर के 81 पदों पर भारतीयों के लिए आवेदन शुरू हो गए हैं. इच्छुक अभ्यर्थी जिनकी आयु 24 से 48 वर्ष के बीच है और जिन्होंने हाईस्कूल, आईटीआई (मैकेनिक मशीन टूल्स, वेल्डर, फिटर) या डिप्लोमा इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग की योग्यता प्राप्त की है, वे इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं. इन पदों के लिए अभ्यर्थियों के पास 5 से 15 वर्ष का कार्य अनुभव होना भी जरूरी है. पोर्टल पर करें पंजीकरण इसके साथ ही जापान, जर्मनी और इजराइल के लिए नर्सिंग (केयरगिवर, पेशेंट केयर, केयरटेकर) जैसी रिक्तियां भी अपलोड कर दी गई हैं. 20 से 45 वर्ष आयु वर्ग के इच्छुक अभ्यर्थी, जिनके पास 0 से 3 वर्ष तक का कार्य अनुभव है और जिन्होंने GNM, ANM या नर्सिंग की योग्यता प्राप्त की है, वे इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं. सभी इच्छुक अभ्यर्थी रोजगार संगम पोर्टल पर अपना पंजीकरण करने के बाद इन भर्तियों में आवेदन कर रोजगार का अवसर प्राप्त कर सकते हैं. सऊदी अरब के लिए निर्धारित वेतन लगभग 29,773 रुपये से 99,188 रुपये प्रतिमाह, इजराइल के लिए लगभग 1,31,818 रुपये प्रतिमाह, जापान के लिए लगभग 1,16,976 रुपये प्रतिमाह और जर्मनी के लिए लगभग 2,29,925 रुपये प्रतिमाह तक है. रोजगार संगम पोर्टल पर जर्मन भाषा के निःशुल्क प्रशिक्षण के लिए पंजीकरण भी शुरू हो गया है. अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय, मुरादाबाद के मोबाइल नंबर 8005383887 पर या किसी भी कार्य दिवस में कार्यालय पहुंचकर संपर्क कर सकते हैं. Source link

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Nashik TCS case | Nida Khan News | टीसीएस केस : निदा...

महाराष्ट्र के नासिक स्थित टीसीएस से जुड़े मामले में छत्रपति संभाजीनगर से ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के पार्षद मतीन पटेल की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. औरंगाबाद नगर निगम (AMC) ने उनके खिलाफ अवैध निर्माण को लेकर नोटिस जारी किया है. जिन संपत्तियों पर सवाल उठाए गए हैं, उनमें वह बंगला भी शामिल है, जहां नासिक टीसीएस केस की आरोपी निदा खान कथित तौर पर छिपकर रह रही थी. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, नगर निगम के मेयर समीर राजूरकर ने साफ कहा है कि अगर पार्षद की ओर से नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो उनकी इमारतों को गिराने की कार्रवाई की जाएगी. इतना ही नहीं, अगर अवैध निर्माण साबित होता है तो पार्षद की सदस्यता रद्द करने की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है. मतीन के ही घर में रह रही थी निदा नगर निगम प्रशासन ने 9 मई को मतीन पटेल को नोटिस भेजा. इनमें कौसर बाग स्थित वह मकान, जहां निदा खान के रहने की बात सामने आई, और उसी इलाके में स्थित उनका एक दफ्तर शामिल है. निगम का दावा है कि शुरुआती जांच में दोनों निर्माण पूरी तरह या आंशिक रूप से अवैध पाए गए हैं. तीन दिन में जवाब, वरना बुलडोजर एक्शन मेयर समीर राजूरकर ने कहा कि नियमों के तहत पार्षद को जवाब देने के लिए तीन दिन का समय दिया गया है. यदि जवाब संतोषजनक नहीं हुआ तो कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी. उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम के तहत यदि कोई पार्षद, उसका परिवार या आश्रित अवैध निर्माण में शामिल पाए जाते हैं तो उनकी सदस्यता रद्द की जा सकती है. हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि क्या निगम मतीन पटेल की सदस्यता खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ेगा, तो उन्होंने कहा कि इस पर अंतिम फैसला सदन और नगर आयुक्त स्तर पर लिया जाएगा. फिलहाल अवैध निर्माण के मामले में कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है. 35 वर्षीय मतीन माजिद शेख, जिन्हें मतीन पटेल के नाम से जाना जाता है, पहली बार AIMIM के टिकट पर पार्षद बने हैं. चुनावी हलफनामे के मुताबिक उन्होंने सातवीं तक पढ़ाई की है. उनके पास कृषि और गैर-कृषि जमीनों समेत कई संपत्तियां हैं. इस बीच मतीन पटेल ने स्थानीय अदालत का दरवाजा खटखटाया है. उन्होंने नोटिस का जवाब देने के लिए 15 दिन का समय मांगा है और नगर निगम को किसी भी तरह की सख्त कार्रवाई से रोकने की मांग की है. मामले पर मंगलवार को सुनवाई हो सकती है. Source link

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CM Himanta Oath Ceremony Live: हिमंत बिस्व सरमा आज फिर संभालेंगे असम...

होमताजा खबरदेश LIVE: CM हिमंत दूसरी बार संभालेंगे असम की कमान, ये चार मंत्री भी साथ लेंगे सपथ Last Updated:May 12, 2026, 07:30 IST Himanta Biswa Sarma Shapath Grahan Live Updates: असम में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार लगातार तीसरी बार सत्ता संभालने जा रही है. गुवाहाटी में आजभव्य शपथ ग्रहण समारोह होगा, जहां हिमंत बिस्व सरमा…और पढ़ें हिमंत बिस्व सरमा आज लगातार दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. असम में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार लगातार तीसरी बार सत्ता संभालने जा रही है. आज गुवाहाटी में भव्य शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होने जा रहा है, जहां हिमंत बिस्व सरमा दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. यह समारोह गुवाहाटी के खानापाड़ा स्थित वेटरनरी कॉलेज खेल मैदान में सुबह 11 बजे आयोजित किया जाएगा, जहां राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा और नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे. इस शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे. प्रधानमंत्री के सुबह करीब 10:30 बजे गुवाहाटी पहुंचने की संभावना है. पीएम मोदी के अलावा इस समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह , भाजपा के पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत कई केंद्रीय मंत्री मौजूद रहेंगे. इसके अलावा बीजेपी और एनडीए शासित राज्यों के 22 मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री भी कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं. शपथ ग्रहण से पहले हिमंत बिस्व सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर नई सरकार में शामिल होने वाले मंत्रियों के नामों की घोषणा की. उन्होंने बताया कि उनके साथ रामेश्वर तेली, अतुल बोरा, चंदन ब्रह्मा (चरण बोरो) और अजंता नियोग मंत्री पद की शपथ लेंगे. CM Himanta Oath Ceremony Live Updates: असम चुनाव में बीजेपी नीत एनडीए को मिली प्रचंड जीत हाल ही में संपन्न असम विधानसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने शानदार जीत दर्ज की थी. 126 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए ने 102 सीटें हासिल कीं, जबकि अकेले बीजेपी ने 82 सीटों पर जीत दर्ज कर बहुमत से कहीं ज्यादा समर्थन हासिल किया. इसी जीत के बाद हिमंत बिस्व सरमा लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. Location : New Delhi,Delhi Source link

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एक ने बसाया जन्नत, दूसरे ने लूटी दौलत तो किसी और ने...

होमफोटोदेश 387 साल पुरानी 12 मई से जुड़ी है दिल्‍ली के दिलचस्‍प किले की कहानी! Last Updated:May 12, 2026, 06:01 IST Lal Qila ki Dilchasp kahani लाल किले की प्राचीर पर खड़ा देवांग अपनी बहन गौरी को लालकिले से जुड़ी वह कहानी बता रहा है, जिसे जानकार आप भी हैरान रह जाएंगे. इस कहानी में 12 मई 1639 की नींव से लेकर नहर-ए-बिहिश्त की ठंडक, तख्त-ए-ताऊस के हीरे, चांदी की छत, अंग्रेजों का बर्बर कहर, बहादुर शाह जफर के बेटों का कत्ल सहित कई घटनाओं का जिक्र किया गया है. देवांग और गौरी लाल किले की प्राचीर के पास खड़े थे. देवांग ने गौरी की तरफ देखा और बोला- गौरी, आज 12 मई है. गौरी हंस दी- तो, मेरा बर्थडे नहीं है. देवांग मुस्कुराया और बोला – नहीं, आज से ठीक 387 साल पहले इसी दिन एक शाह ने धरती पर अपना जन्नत बसाने की नींव रखी थी. वो जन्नत है… ये लाल किला. चल, आज तुझे इसकी हर ईंट की कहानी सुनाता हूं. गौरी ने पूछा- अच्छा, ये लाल-लाल क्यों है? देवांग ने शरारत से कहा- खून से थोड़े ही! गौरी बोली- अरे यार! फिर देवांग सीरियस हो गया- असल में, शाहजहां ने फतेहपुर सीकरी से लाल बलुआ पत्थर यमुना के रास्ते मंगवाए थे और अंदर के महलों के लिए राजस्थान से सफेद संगमरमर. इन पत्थरों पर फूल इस कदर तराशे कि लगे मानो किसी ने दीवारों पर चित्रकारी कर दी हो. ये काम 9 साल चला. 9 साल! तूने कभी 9 साल किसी चीज पर लगाए? देवांग ने सवाल किया- पता है, इस किले को बनने में कितना खर्चा हुआ? गौरी ने अंदाजा लगाया- दस-बीस करोड़? गौरी हंस दी- नहीं, उस जमाने में एक करोड़ रुपये. सुन, हैरान मत हो- उस वक्त ये कई राज्यों का सालाना बजट होता था. यानी शाहजहां ने पूरे राज्यों की कमाई एक किले पर लुटा दी. गौरी बोला- वो तो प्यार में दीवाने थे. गौरी ने कहा- हां, अपनी मुमताज के लिए तो ताजमहल बनवाया, अपने शौक के लिए ये लाल किला. Add News18 as Preferred Source on Google देवांग अब सबसे दिलचस्प बात लेकर आया- ये प्राचीर देख रही है? गौरी ने ऊपर देखा – हां, ऊंची-ऊंची. देवांग ने समझाया- मुगल काल में इस प्राचीर पर चढ़ने का मतलब था बादशाह के दरबार तक सीधी पहुंच. यानी तू दुनिया के सबसे ताकतवर आदमी से मिलने वाली थी. ऐसे इंसान को कहते थे ‘खास’. गौरी ने पूछा- और आज? देवांग गर्व से बोला- आज इसी प्राचीर से प्रधानमंत्री देश को संबोधित करते हैं. 15 अगस्त 1947 से ये परंपरा है. गौरी को गर्मी की फिक्र हुई- गर्मी में यहां लगता तो बहुत तपती होगी. देवांग ने चालाकी से कहा- यही तो चमत्कार है. शाहजहां ने यमुना से एक नहर बनवाई ‘नहर-ए-बिहिश्त’ यानी स्वर्ग की नहर. ये पूरे किले में बहती थी. गौरी चौंकी- पानी से ठंडक? देवांग बोला – हां! रंग महल के पास ये नहर छोटे झरने में बदल जाती थी. बैलों से चलने वाली रहटें रात-दिन पानी बहाती थीं. सचमुच का एसी सिस्टम वो भी 400 साल पहले. अब देवांग की आवाज धीमी हो गई. अब बात करते हैं दुनिया के सबसे कीमती तख्त की. तख्त-ए-ताऊस यानी मयूर सिंहासन. गौरी उत्सुक थी. उसने पूछा- कैसा था? देवांग ने कहा – सात सोने के मोर – उनकी पूंछ में माणिक, पन्ना, नीलम, हीरे… सोने-चांदी के बर्तन, खुरासान के कालीन, रंगीन काँच के झूमर. गौरी ने पूछा – आज कहां है? देवांग उदास हो गया. वह बोला- जब 1739 में नादिरशाह ने दिल्ली लूटी, वो सब ले गया. कोहिनूर हीरा भी, जो आज ब्रिटेन के ताज में जड़ा है. समझ, हमारे दादा-परदादाओं का गहना आज किसी और के सर पर सो रहा है. गौरी ने पूछा- मुगलों के बाद क्या हुआ? देवांग ने बताया- आए मराठे. 1760 के दशक में सदाशिवराव भाऊ ने लाल किला जीत लिया. पर सेना के खर्चे के लिए उन्हें पैसे चाहिए थे. गौरी ने पूछा- क्या किया? देवांग बोला- दीवान-ए-खास की चांदी की छत तोड़कर उसे पिघलाया और सिक्के बनाए. सोच जहां बादशाह बैठता था, वहां अब छत ही नहीं बची. गौरी का सवाल था- अंग्रेजों ने क्या किया? देवांग बहुत गंभीर हो गया. वह बोला- 1857 का विद्रोह. अंग्रेज हारे नहीं, टूट पड़े. उन्होंने किले के 80% से ज्‍यादा हिस्से तोड़ डाले. सफेद मार्बल के महल गिरा दिए, उनकी जगह बैरकें बनाईं. गौरी फफक पड़ी और बोली-ये तो कत्ल है. देवांग ने सबसे बुरी बात बताई- और सबसे बुरा बहादुर शाह जफर के तीन बेटों को बिना मुकदमे के गोली मार दी. अंग्रेज हडसन ने बूढ़े बादशाह को अपने बेटों के शव दिखाए. फिर जफर को बर्मा भेज दिया, जहां वह अकेले मर गए. देवांग अब उत्तेजित हो गया- अब आता है 1945 का वो मुकदमा. अंग्रेजों ने आजाद हिंद फौज के तीन अफसरों शाह नवाज, गुरबख्श सिंह, प्रेम सहगल का यहीं किले में कोर्ट-मार्शल किया. गौरी ने पूछा- फिर क्या हुआ? देवांग बोला- फिर क्या, पूरा देश सड़कों पर उतर आया. हिंदू-मुस्लिम एक साथ. यहां तक कि ब्रिटेन को दुनिया के सामने शर्मिंदा होना पड़ा. ये आजादी की शुरुआत की आग थी. देवांग की आंखों में चमक आ गई. अब सबसे सुनहरा पल. 15 अगस्त 1947, सुबह. नेहरू जी इसी प्राचीर पर चढ़े. गौरी ने पूछा- तिरंगा लहराया? देवांग ने कहा- हां. वो तिरंगा राजस्थान के आलूदा गांव में बना था. और जब झंडा फहरा, तो बिस्मिल्लाह खान ने शहनाई बजाई. सोच, वो दृश्य – 200 साल की गुलामी के बाद, लाल किले की दीवारें, शहनाई की आवाज, और उड़ता तिरंगा. गौरी भावुक हो गई. Source link

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दिल्ली की इस इमारत को बनवाने में शाह ने लुटाई जहां की...

History of Redfort & Connection with 12 May: आज से करीब 387 साल पहले दिल्‍ली की इस इमारत को बनवाने के लिए एक शाह ने सारे जहां की दौलत खर्च कर दी थी. यह सिर्फ एक इमारत नहीं थी, बल्कि एक ऐसी सोच थी, जिसे तब के भारत में मौजूद तमाम इमारतों का निचोड़ निकालकर तैयार किया गया है. 1639 में बनी यह इमारत आज भी कितनी खास है, इस बात का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि इसकी प्राचीर पर पहुंचने वाला शख्‍स पूरी दुनिया के लिए बेहद खास हो जाता है. जी हां, यहां पर हम बात दिल्‍ली के लाल किले की कर रहे हैं. दिल्‍ली का लाल किला आज भी उन चंद इमारतों में शामिल है, जिसके बनाने में सिर्फ पत्‍थर ही नहीं, बल्कि पूरी सल्‍तनत की ताकत लगा दी गई थी. इस किले को बनाने के लिए शाहजहां ने 12 मई 1639 को इसकी नींव रखी थी. लाल किले को चारदीवारी बनाने के लिए फतेहपुर सीकरी से लाल बलुआ पत्थर यमुना के रास्ते दिल्ली मंगाए गए थे. वहीं, किले के अंदर बनने वाले महलों को आलीशान बनाने के लिए राजस्थान के आए संगमरमर का इस्‍तेमाल हुआ था. दीवारों को जीवंत बनाने के लिए इन पत्‍थरों पर फूलों की ऐसी नक्काशी कराई गई. यह काम नौ साल तक चला. तब के जमाने में इस किले को बनाने में करीब एक करोड़ रुपये का खर्च आया. उससमय एक करोड़ रुपए कई राज्‍यों का सालाना बजट होता था. जहां तक बात इस किले की प्राचीर पर पहुंचने वाले शख्‍स के खास बनने की है तो मुगल काल में लाल किले की प्राचीर पर चढ़ने का मतलब था, बादशाह के दरबार तक सीधी पहुंच रखना. यानी दुनिया की सबसे ताकतवर शख्सियतों में से एक से सीधे रूबरू होना. वहां पहुंचने वाला व्यक्ति सचमुच ‘खास’ हो जाता था. लेकिन आज यह परंपरा एक नए रूप में जिंदा है. 15 अगस्त 1947 से हर साल इसी प्राचीर पर भारत के प्रधानमंत्री झंडा फहराते है. तब से लेकर आज तक लाल किले की प्राचीर वह मंच बन गई है जहां से प्रधानमंत्री देश-दुनिया को संबोधित करते है. कैसा था शाहजहां के सपनों का स्‍वर्ग लाल किला यहां फूलों पर लदा होता था सोना: दीवान-ए-खास के सफेद संगमरमर वाले खंभों में फिरोजा, लाजवर्द, पन्ना, नीलम कीमती पत्थर जड़े थे. दीवारों पर कलमकारी का ऐसा काम था कि देखने वाला सिर्फ देखता ही रह जाता था. खुरासान से मंगाए कालीन, रंगीन कांच के झूमर, सोने की परत लगे बर्तन, सब कुछ एक ऐसी दुनिया बनाते थे, जिसकी कल्‍पना करना आम आदमी के लिए लगभग नामुमकिन था. लाल किले की वो नहरें जहां होती थी शाही मौज: लाल किले में सबसे खास ‘नहर-ए-बिहिश्त’ यानी स्वर्ग की नहर थी. यमुना से लालकिले के बीच बनाई गई यह नहर तमाम महलों के बीच से होकर गुजरती थी. यह नहर एक तरह का कूलिंग सिस्टम थी, जो गर्मी के दिनों में महलों को ठंडा रखती थी. रंग महल पहुंचते-पहुंचते यह नहर एक छोटे से झरने में तब्‍दील हो जाती थी. नहर के पाने को पूरे लालकिले में प्रवाहित करने के‍ लिए बैलों से चलने वाले रहटें रात-दिन काम करती थीं. हीरों से सजा था शाहजहां का तख्‍त: लाल किले की सबसे कीमती चीज ‘मयूर सिंहासन’ थी, जिसे तख्त-ए-ताऊस कहा जाता था. यह सिर्फ सोने-चांदी का तख्त नहीं था, बल्कि दुनिया का सबसे कीमती सिंहासन था. इस पर सात सोने के मोर थे, और उनकी पूंछें माणिक्य, पन्ने और हीरों से जड़ी हुई थीं. इसी तख्त पर शाहजहां दरबार लगाता था. फारस के नादिरशाह ने 1739 में जब इस तख्त को लूटा, तो हीरे-जवाहरात के साथ वह कोहिनूर हीरा भी ले गया, जो आज ब्रिटेन के ताज में जड़ा है. जब लालकिले को लगने लगे बड़े झटके बाहरी हमलावरों ने लूटा सारा खजाना: शाहजहां के बाद आने वाले बादशाह उतने सक्षम नहीं थे. सबसे पहला और बड़ा झटका 1739 में लगा, जब नादिरशाह ने दिल्ली पर धावा बोल दिया. उसने लाल किले के अंदर दाखिल होने के साथ उसने सोना, हीरे, मयूर सिंहासन, हाथीदांत की कुर्सियां, कीमती पांडुलिपियां सब लूट लीं. उसने करीब 70 करोड़ रुपये की लूट अपने साथ फारस ले जाने का दावा किया था. यह रकम उस समय इतनी बड़ी थी कि नादिरशाह ने फारस में तीन साल तक कोई कर नहीं लगाया. मराठों के कब्‍जे में आया लालकिला: 1760 के दशक में मराठे लाल किले को जीतने में कामयाब रहे. सदाशिवराव भाऊ ने पानीपत के युद्ध से पहले लाल किले पर यह विजय हासिल की थी. इस जीत को मराठों की मुगलों के खिलाफ सबसे बड़ी जीतों में गिना जाता है. लालकिले पर जीत हासिल करने के बाद मराठों ने सेना के खर्च के लिए दीवान-ए-खास की चांदी की छत को पिघलाकर सिक्कों की शक्‍ल दे दी. इस युद्ध में लाल किले के हिस्‍से खंडहर में तब्‍दील हो गए. अंग्रेजों ने बैरक में बदल दिया स्‍वर्ग: 1857 का विद्रोह भारत के इतिहास का एक बड़ा मोड़ था. लाल किला इस विद्रोह का केंद्र बना, जब बहादुर शाह जफर को विद्रोहियों ने अपना नेता बना लिया. लेकिन विद्रोह के दब जाने के बाद, अंग्रेजों ने लाल किले को बर्बाद करने की ठान ली. उन्होंने 80% से अधिक अंदरूनी संरचनाओं को ध्वस्त कर दिया. संगमरमर के महलों को तोड़कर उनकी जगह बैरकें बना दीं. बागीचों को तबाह कर नहरों को भर दिया. लालकिले से जुड़ी दर्द, मुकदमें और प्रतीक की कहानी बहादुर शाह जफर के बेटों की हत्या: 1857 के बाद के दृश्य सबसे दर्दनाक थे. अंग्रेजों ने अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर को पकड़ लिया था. अंग्रेज अफसर विलियम हडसन ने जफर के तीन बेटों को बिना किसी मुकदमे के गोली मारने का आदेश दे दिए थे. बहादुर शाज जफर के तीनों बेटों मिर्जा मुगल, मिर्जा खिज्र सुल्तान और मिर्जा अबू बक्र की हत्या लाल किले के एक दरवाजे के पास हुई. बूढ़े बादशाह को अपने बेटों के शव देखने पर मजबूर किया गया. इस घटना के बाद जफर को बर्मा निर्वासित कर दिया गया, जहां 1862 में उनकी मौत हो गई. लाल किला मुकदमा और आजाद हिंद फौज: 1945 में दूसरे विश्व युद्ध के अंत के बाद लाल किला एक बार

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मीन राशि वालों के लिए आज का दिन रहेगा चुनौतीभरा, व्यापार में...

Last Updated:May 12, 2026, 03:31 IST Aaj Ka Meen Rashifal 12 May 2026: मीन राशि वालों के लिए आज का दिन उतार-चढ़ाव भरा रह सकता है. व्यापार और कारोबार में सोच-समझकर फैसले लेने की जरूरत है, क्योंकि धन हानि के संकेत बन रहे हैं. स्वास्थ्य के मामले में पुराने रोग फिर से परेशानी बढ़ा सकते हैं. वहीं दांपत्य जीवन में मधुरता बढ़ेगी. मीन राशि वालों के लिए आज का दिन थोड़ी चुनौतियां लेकर आ सकता है. ग्रहों की प्रतिकूल चाल के कारण कामों में रुकावट और योजनाओं में देरी होने की संभावना है. मन में चिंता और असमंजस की स्थिति बनी रह सकती है, जिससे आत्मविश्वास कमजोर पड़ सकता है. छोटी-छोटी बातों को लेकर तनाव बढ़ने के संकेत हैं. ऐसे समय में धैर्य और समझदारी से काम लेना बेहद जरूरी रहेगा. जल्दबाजी या भावनाओं में आकर लिया गया फैसला नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए सोच-समझकर कदम बढ़ाएं. उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिष आचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, आज मानसिक तनाव और उलझन बढ़ सकती है. पहले से चल रही चिंताएं कम होने के बजाय और गहरी हो सकती हैं. इसलिए धैर्य रखें, विवादों से दूर रहें. सोच-समझकर ही कोई कदम उठाएंगे तो अच्छा रहेगा. मीन राशि का करियर और व्यापार राशिफलमीन राशि वालों के लिए आज करियर के क्षेत्र में दिन सामान्य रहने वाला है. लंबे समय से रुके कार्य पूरे होने से राहत महसूस होगी, लेकिन लापरवाही और काम टालने की आदत नुकसान पहुंचा सकती है. सफलता के लिए मेहनत और एकाग्रता बनाए रखना जरूरी रहेगा. व्यापार में उम्मीद के अनुसार लाभ मिलने के संकेत कम हैं. काम के सिलसिले में की गई यात्रा भी निराश कर सकती है. नए अवसर हाथ से निकल सकते हैं, इसलिए समय रहते सही निर्णय लेना बेहद जरूरी होगा. मीन राशि का स्वास्थ्य और आर्थिक स्थितिस्वास्थ्य की दृष्टि से आज का दिन मध्यम रहेगा. मानसिक तनाव और थकान महसूस हो सकती है. इनसे बचने के लिए ध्यान और योग करना लाभकारी रहेगा. छोटी-मोटी बीमारियों से बचाव के लिए पौष्टिक आहार लेना आवश्यक होगा. आर्थिक स्थिति की बात करें तो आज का दिन मिला-जुला रह सकता है. खर्च की अधिकता रहेगी, लेकिन शाम होते-होते पुरानी निवेश की गई पूंजी से धन लाभ के प्रबल योग बन रहे हैं. साथ ही पूंजी निवेश के लिए आज का दिन काफी अच्छा रहेगा. मीन राशि वालों का लव लाइफ राशिफललव लाइफ के मामले में आज का दिन थोड़ा तनाव और उलझन लेकर आ सकता है. पार्टनर के साथ बातचीत में गलतफहमियां बढ़ने की आशंका है, जिससे रिश्तों में दूरी महसूस हो सकती है. किसी छोटी बात को लेकर मनमुटाव गहरा सकता है. साथी की भावनाओं को नजरअंदाज करना संबंधों में कड़वाहट ला सकता है. शादीशुदा जीवन में भी वाणी पर संयम रखना जरूरी होगा, वरना घरेलू माहौल तनावपूर्ण बन सकता है और आपसी तालमेल प्रभावित हो सकता है. मीन राशि वाले जरूर करें ये उपायआज आपके लिए लकी नंबर 9 रहेगा. यह अंक आपको सफलता और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करेगा. वहीं आज के दिन इस राशि के जातक जो धर्म-कर्म के साथ दान-पुण्य में रुचि रखते हैं, उन्हें चाहिए कि आज के दिन हनुमान जी महाराज के मंदिर जाकर भगवान को गुड़, चने का भोग लगाए. उसके बाद गरीबों में लाल वस्तु का दान-वितरण करें, जिससे आज का दिन बेहतरीन हो सके. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ujjain,Madhya Pradesh Source link

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