भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

ताज़ा खबर

ताज़ा खबर

भारत ने पाकिस्तान के ‘न्यूक्लियर ब्लफ’ को किया बेनकाब, वाइस एडमिरल एएन...

होमताजा खबरदेश बेनकाब हुआ पाक का न्यूक्लियर ब्लफ, वाइस एडमिरल बोले- हम तय करेंगे युद्ध का रुख Last Updated:May 07, 2026, 20:18 IST वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान की परमाणु को लेकर बार-बार दी जाने वाली गीदड़ भ‍भकियों को दुनिया के सामने बेनकाब कर दिया है. 7 मई 2025 को आज के दिन भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके में मौजूद आतंकी ठिकानों पर बिल्‍कुल सटीक हमला कर लश्कर, जैश और हिजबुल के लॉन्च पैड तबाह किए थे. वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने कहा है कि भविष्य में भारत सिर्फ जवाबी कार्रवाई नहीं करेगा, बल्कि शुरुआत से ही युद्ध के मैदान का रुख अपनी रणनीति के मुताबिक तय करेगा. भविष्‍य में भारत युद्ध की दिशा खुद तय करेगा. Operation Sindoor: भारतीय नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने गुरुवार को कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत ने पाकिस्तान की न्‍यूकिल्‍यर ब्‍लैकमेल की सच्चाई दुनिया के सामने उजागर कर दिया है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से परमाणु हमले की धमकी देकर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश करता रहा है, लेकिन भारत ने इस बार साफ कर दिया कि वह किसी भी तरह की ब्लैकमेलिंग से डरने वाला नहीं है. ऑपरेशन सिंदूर के एक साल पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने कहा कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकी ठिकानों पर बेहद सटीक हमले किए. इन हमलों में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों के लॉन्च पैड और ठिकानों को निशाना बनाया गया. उन्होंने कहा कि लंबी दूरी तक मार करने वाले आधुनिक हथियारों की मदद से भारत ने पाकिस्तान के अंदर घुस कर कार्रवाई की. साथ ही, यह साबित कर दिया कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ किसी भी हद तक जाने को तैयार है. उन्‍होंने कहा कि इन हमलों ने पाकिस्तान की न्यूक्लियर ब्लैकमेल की रणनीति को पूरी तरह नाकाम कर दिया है. पहले जैसे नहीं होंगे भविष्‍य में युद्ध वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने यह भी कहा कि भविष्य के युद्ध अब पहले जैसे नहीं होंगे. आने वाले समय में बिना इंसानों वाली यानी अनक्रूड और ऑटोनॉमस प्रणालियों की भूमिका बहुत बढ़ने वाली है. उन्होंने कहा कि भारतीय सेना तेजी से नई तकनीकों को अपने सैन्य सिस्टम में शामिल कर रही है ताकि दुश्मन से हमेशा एक कदम आगे रहा जा सके. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की रणनीतिक ताकत, सैन्य तैयारी और स्वदेशी रक्षा क्षमताओं का बड़ा उदाहरण है. समुद्र में बड़ी ताकत बन चुका है भारतीय नौसेना लगातार अपनी युद्ध रणनीतियों की समीक्षा कर रही है और नई क्षमताओं को शामिल कर रही है. प्रमोद ने भारतीय नौसेना के स्वदेशी युद्धपोतों की भी तारीफ करते हुए कहा कि विमानवाहक पोत विक्रांत, कोलकाता और विशाखापत्तनम ने शानदार प्रदर्शन किया है. इस युद्ध में यह भी साबित हो गया है कि भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति सही दिशा में आगे बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि समुद्र में लंबे समय तक युद्ध के लिए तैयार रहने के साथ आधुनिक युद्ध कौशल को विकसित कर भारत की बड़ी ताकत बन चुका है. सैन्‍य सफलता के लिए जरूर है आत्‍मनिर्भता उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी सैन्य अभियान में सफलता के लिए आत्मनिर्भरता बेहद जरूरी है. भारत अब अपने हथियार, युद्धपोत और तकनीक खुद विकसित कर रहा है, जिससे सेना की ताकत लगातार बढ़ रही है. भविष्य की चुनौतियों पर बात करते हुए वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने कहा कि अब भारत सिर्फ जवाबी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा. उन्होंने कहा कि अगर भविष्य में भारत को फिर चुनौती दी गई तो भारतीय सेना सिर्फ जवाब नहीं देगी, बल्कि शुरुआत से ही युद्ध के मैदान का रुख अपने हिसाब से तय करेगी. 11 एयरपोर्ट और 13 एयरक्राफ्ट को किया बर्बाद भारतीय वायु सेना के उप-प्रमुख एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को हुए नुकसान की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि 7 मई 2025 को भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके में मौजूद नौ बड़े आतंकी ठिकानों पर हमला किया था और उन्हें पूरी तरह तबाह कर दिया था. अवधेश कुमार भारती ने बताया कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान के 11 एयरपोर्ट्स को निशाना बनाया और उसके 13 विमानों को नष्ट कर दिया. इनमें जमीन और हवा दोनों में मौजूद विमान शामिल थे. उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने 300 किलोमीटर से अधिक दूरी पर मौजूद पाकिस्तान की एक अहम हवाई संपत्ति को भी सफलतापूर्वक निशाना बनाया था. About the Author Anoop Kumar MishraAssistant Editor Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

ताज़ा खबर

महाभारत : नियोग से पांडु, धृतराष्ट्र और विदुर को पैदा करने वाले...

क्या आपको मालूम है कि महर्षि वेद व्यास का असली बेटा कौन था. वही व्यास जिन्होंने नियोग के जरिए पांडु, धृतराष्ट्र और विदुर को पैदा करने में मदद की थी. व्यास का अपना जो असली बेटा हुआ, उसका जन्म भी हैरानी भरा ही था. हालांकि ये बेटा भी खासा नामी निकला था महर्षि वेद व्यास खुद पाराशर और सत्यवती से पैदा हुए थे. वेद व्यास को ऋषि पाराशर ने पाला. वह खुद महर्षि बन गए. इसके बाद सत्यवती की शादी राजा शांतुन से हुई, जिनके दो पुत्र थे विचित्रवीर्य और चित्रांगद. चित्रांगद का निधन युवावय में हो गया. फिर विचित्रवीर्य का विवाह अंबिका और अंबालिका से हुआ. लेकिन विवाह के बाद विचित्रवीर्य का भी निधन हो गया. नियोग के लिए व्यास को बुलाया गया अब समस्या ये थी कि राजवंश को कैसे आगे चलाया जाएगा, क्योंकि दोनों ही रानियों की कोई संतान नहीं थी. तब सत्यवती ने अपनी दोनों बहुओं से संतान प्राप्त करने के लिए नियोग परंपरा का पालन करने का फैसला किया. इसके लिए उन्होंने अपने पुत्र महर्षि व्यास को बुलाया.  तीनों के जैविक पिता थे इससे पांडु और धृतराष्ट्र का जन्म हुआ. लेकिन जब अंबालिका को दोबारा वेद व्यास के पास जाना था तो उसने डर के मारे दासी को उनके पास भेज दिया, जिससे विदुर पैदा हुए. इस तरह व्यास इन तीनों के जैविक पिता थे. महर्ष वेद व्यास जैविक तौर पर पांडु, धृतराष्ट्र और विदुर के जैविक पिता थे. उन्होंने ये संतान नियोग के जरिए पैदा की थी. (News18 AI) व्यास की शादी वाटिका से हुई थी क्या इन तीनों के अलावा व्यास का कोई और भी जैविक पुत्र था. वैसे तो व्यास ऋषि थे लेकिन उनकी शादी वाटिका से हुई, जिन्हें आरुणि के नाम से भी जानते हैं. उन दोनों के एक पुत्र शुकदेव हुए थे. हालांकि शुकदेव के जन्म की कहानी भी विचित्र ही है. व्यास के कैसे हुआ एक और पुत्र वाटिका ऋषि जाबालि की पुत्री थीं. वह खुद भी आध्यात्मिक तौर पर बहुत प्रखर और उन्नत महिला थीं. ग्रंथों में कहा गया है कि शुकदेव अयोनिज पुत्र थे. वह 12 वर्ष तक माता के गर्भ में रहे. कथा के अनुसार, भगवान शिव पार्वती को अमर कथा सुना रहे थे, तभी एक तोता (शुक) ने हुंकारी भरी. शिव ने उस तोते को मारने के लिए त्रिशूल छोड़ा. तब जान बचाकर भागा वह शुक वेदव्यास की पत्नी के गर्भ में प्रवेश कर गया. 12 वर्ष तक वह वहीं रहा. फिर भगवान कृष्ण के आश्वासन पर जन्मा. जन्म लेते ही शुकदेव बाल्यावस्था में ही तपस्या के लिए वन चले गए. महर्षि शुकदेव लोगों को प्रवचन देते हुए (WIKI COMMONS) शुक कितने बड़े ऋषि थे शुक खुद प्रबुद्ध ऋषि थे. उन्हें वेद व्यास का सच्चा आध्यात्मिक उत्तराधिकारी माना जाता है. वे महाभारत में युवा कुरु राजकुमारों के एक बुद्धिमान मार्गदर्शक के रूप में भी बताए गए हैं. कौरव और पांडव दोनों सम्मान करते थे महर्षि वेद व्यास के पुत्र शुक (शुकदेव) एक अत्यंत प्रबुद्ध ऋषि थे, जो अपने गहन आध्यात्मिक ज्ञान और सांसारिक मामलों से विरक्ति के लिए जाने जाते थे. उनका कौरव और पांडव दोनों बहुत सम्मान करते थे. उन्हें भागवत पुराण के मुख्य वक्ता के रूप में जाना जाता है. बताया जाता है कि गर्भ में ही उन्हें ब्रह्मज्ञान प्राप्त हो गया था. इसी वजह से वह जन्म लेते ही वे सांसारिक मोह से मुक्त होकर वन की ओर चले गए. शुकदेव ने महाराज परीक्षित (अभिमन्यु के पुत्र) को मृत्यु से पहले 7 दिनों में भागवत पुराण का उपदेश दिया, जिससे परीक्षित को मोक्ष प्राप्त हुआ. एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, जब व्यास जी ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, तो शुकदेव जी इतने तेजस्वी हो गए कि उनके शरीर से होकर वायु और जल बहने लगा. इससे व्यास जी ने समझ लिया कि वे पूर्ण ब्रह्मज्ञानी हैं. वैसे आपको बता दें कि महाभारत के दौर में कई ऐसे जन्म भी हुए थे, जो बॉयोलॉजिकल नहीं थे. बल्कि दैवीय तरीके से हुए थे. Source link

ताज़ा खबर

जेवर एयरपोर्ट पर किसे मिलेगा पहला वॉटर कैनन सैल्‍यूट, फिर किस शहर...

Last Updated:May 07, 2026, 18:16 IST नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से फ्लाइट ऑपरेशन का ऐलान हो गया है. क्‍या आपको पता है कि जेवर में बने इस एयरपोर्ट से किस शहर के लिए पहली फ्लाइट टेकऑफ करने वाली है. इतना ही नहीं, किस फ्लाइट के पैसेंजर को खास वॉटर कैनन सैल्‍यूट मिलेगा. एयरपोर्ट से किस शहर के लिए उड़ेगी पहली फ्लाइट? Noida International Airport: आपको यह तो पता होगा कि 15 जून से नोएडा इंटरनेशलन एयरपोर्ट से फ्लाइट ऑपरेशन शुरू होने जा रहे हैं. लेकिन, क्‍या आपको यह पता है कि इस एयरपोर्ट से किस शहर के लिए पहली फ्लाइट टेकऑफ करेगी. साथ ही, किस शहर से आने वाली फ्लाइट को जेवर के इस एयरपोर्ट पर पहली लैंडिंग मिलेगी और उसका स्‍वागत वॉटर कैनन सैल्‍यूट से किया जाएगा. इसके अलावा, यहां से किस-किस शहरों के लिए फ्लाइट्स ऑपरेट की जाएगी. यदि आपके पास इन सभी सवालों के जवाब नहीं हैं तो चलिए सिलसिलेवार तरीके से हम आपको बताते हैं. About the Author Anoop Kumar MishraAssistant Editor Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Noida,Gautam Buddha Nagar,Uttar Pradesh Source link

ताज़ा खबर

OPINION: कर्नाटक में येदियुरप्पा को मिला था मौका, लेकिन TN में गवर्नर...

थलापति विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) ने भले ही तमिलनाडु की राजनीति को सिर के बल पलट दिया हो, मगर खुद भी उलझ गई है. तीन दशकों से चला आ रहा द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (AIADMK) का दबदबा खत्म हो गया. राज्य की जनता ने एक नया विकल्प तो चुना, लेकिन विधानसभा चुनाव के नतीजों ने ऐसी तस्वीर पेश की है, जिसने सरकार बनाने की चाबी राजभवन की मेज पर रख दी है. आज तमिलनाडु की राजनीति उस मोड़ पर है, जहां राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर के फैसले पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं. राज्यपाल ने गुरुवार को टीवीके (TVK) चीफ विजय के सरकार बनाने के दावे को खारिज कर दिया. राजभवन की ओर से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया कि विजय विधानसभा में आवश्यक बहुमत साबित करने में सफल नहीं रहे हैं. विजय की पार्टी ने 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनने का गौरव हासिल किया है. यह आंकड़ा बहुमत के जादुई नंबर 118 से सिर्फ 10 सीटें दूर है. कांग्रेस के समर्थन के बाद यह संख्या 113 तक पहुंच गई है, जो अब भी बहुमत से 5 कदम दूर है. विजय ने राज्यपाल से अनुरोध किया कि उन्हें सबसे बड़े दल के नाते मौका दिया जाए और वे दो हफ्ते के भीतर फ्लोर टेस्ट में बहुमत साबित कर देंगे. लेकिन राज्यपाल का रुख कड़ा बना हुआ है. वे चाहते हैं कि विजय शपथ लेने से पहले ही उन 118 विधायकों का समर्थन पत्र दिखाएं, जो उनके साथ हैं. कर्नाटक 2018: क्या तब नियमों की परिभाषा अलग थी? जब हम तमिलनाडु के मौजूदा संकट को देखते हैं, तो मई 2018 का कर्नाटक चुनाव बरबस याद आता है. उस समय 224 सदस्यों वाली कर्नाटक विधानसभा में बीजेपी 104 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी. वह भी बहुमत के आंकड़े से दूर थी. दूसरी तरफ कांग्रेस और जेडीएस ने चुनाव के तुरंत बाद गठबंधन किया, जिसके पास बहुमत का स्पष्ट आंकड़ा था. इसके बावजूद तत्कालीन राज्यपाल वजुभाई वाला ने कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन को बुलाने के बजाय सबसे बड़ी पार्टी के नेता बी.एस. येदियुरप्पा को सरकार बनाने का न्यौता दिया. येदियुरप्पा को शपथ दिलाते समय उनसे विधायकों की लिस्ट नहीं मांगी गई, बल्कि उन्हें सदन में बहुमत साबित करने के लिए पर्याप्त समय दिया गया. हालांकि सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद फ्लोर टेस्ट हुआ और येदियुरप्पा को इस्तीफा देना पड़ा. सवाल यह है कि जो ‘VIP छूट’ कर्नाटक में बीजेपी को मिली, वही संवैधानिक परंपरा तमिलनाडु में विजय के लिए क्यों नहीं अपनाई जा रही है? गवर्नर से मिलकर तमिलनाडु में सरकार बनाने का दावा पेश करते विजय (PTI Photo) ‘राजभवन टेस्ट’ बनाम ‘फ्लोर टेस्ट’ का संवैधानिक विवाद संविधान विशेषज्ञों और सुप्रीम कोर्ट के कई ऐतिहासिक फैसलों ने यह स्पष्ट किया है कि बहुमत का फैसला राजभवन के बंद कमरों में नहीं, बल्कि विधानसभा के पटल पर होना चाहिए. 1994 का ‘एस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ’ मामला इसी बात की तस्दीक करता है. 9 जजों की बेंच ने साफ कहा था कि किसी सरकार के पास बहुमत है या नहीं, इसे परखने की एकमात्र जगह विधानसभा है. तमिलनाडु के मामले में ऐसा लग रहा है मानो राज्यपाल फ्लोर टेस्ट से पहले ही ‘राजभवन टेस्ट’ लेना चाह रहे हैं. वे विजय से यह पूछ रहे हैं कि वे बाकी पार्टियों का समर्थन कैसे जुटाएंगे. क्या यह राज्यपाल के अधिकार क्षेत्र में आता है कि वह पहले से ही सरकार की स्थिरता पर सवाल उठाएं, जबकि सबसे बड़े दल ने दावा पेश कर दिया हो? क्या राज्यपाल केवल केंद्र के प्रतिनिधि के रूप में काम कर रहे हैं? राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने इस मामले में राज्यपाल की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यपाल अक्सर केंद्र के एजेंट के रूप में काम करते हैं और अपने राजनीतिक हितों को साधने के लिए संविधान को नुकसान पहुंचाते हैं. अभिनेता और राजनेता कमल हासन ने इसे जनमत का अपमान बताया है. उनका कहना है कि तमिलनाडु की जनता ने विजय को सबसे ज्यादा सीटें दी हैं, ऐसे में उन्हें मौका न देना जनादेश का गला घोंटने जैसा है. कांग्रेस ने भी कड़ी चेतावनी दी है कि अगर बीजेपी ने एक विधायक के दम पर पिछले दरवाजे से शासन करने की कोशिश की, तो राज्य में बड़ा विद्रोह हो सकता है. தமிழ்நாடு சட்டமன்றத் தேர்தலில் தனித்து ஆட்சியமைக்கும் அதிகாரத்தை மக்கள் எந்தக் கட்சிக்கும் வழங்கவில்லை. இந்த முடிவு தமிழ்நாட்டு வரலாற்றில் முன்னெப்போதும் நிகழாதது. என் சகோதரர் திரு. @mkstalin அவர்கள் ‘மக்கள் தீர்ப்பை மதிக்கிறோம்; பொறுப்பான எதிர்க்கட்சியாகச் செயல்படுவோம்’ என்று… Source link

ताज़ा खबर

क्यों नहीं बढ़ सकी गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की वंशरेखा, बेटा देहरादून में...

19वीं सदी में बंगाल में टैगोर परिवार जाना माना बहुत संपन्न परिवार था. उनकी गिनती भारत के सबसे धनी परिवारों में होती थी. जाहिर सी बात है कि इस परिवार के सबसे चर्चित और प्रसिद्ध चेहरे गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर थे. उनका बनाया शांति निकेतन आज भी खूब फलफूल रहा है. उनके नाम से देशभर में बहुत सी संस्थाएं हैं. किताबें छपती हैं लेकिन क्या आपको मालूम है कि टैगोर परिवार के लोग अब क्या कर रहे हैं. रवींद्रनाथ टैगोर के वंशज आज दुनिया भर में फैले हुए हैं. उनमें से अधिकांश लोग सार्वजनिक सुर्खियों से दूर अपनी निजी और व्यावसायिक जिंदगी में सक्रिय हैं. वैसे ये बात सही है कि रवींद्रनाथ टैगोर की अपनी सीधी संतान रेखा अब नहीं रही. उनके बड़े भाई सत्येंद्रनाथ टैगोर के वंशज अभी उनके विचारों और विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं. रवींद्रनाथ टैगोर के भाई सत्येंद्रनाथ टैगोर के परपोते सुप्रियो टैगोर छह दशकों से अधिक समय से शांतिनिकेतन की विरासत के अगुआ और संरक्षक रहे. वह विश्व भारती विश्वविद्यालय के छात्र थे, जिसकी स्थापना टैगोर ने की थी. वह टैगोर की प्रसिद्ध आश्रम प्रणाली के विद्यालय, पाठा भवन स्कूल के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रधानाचार्य भी रहे. हाल के वरसों में परिवार के कुछ सदस्यों ने रवींद्रनाथ टैगोर से जुड़ी ऐतिहासिक संपत्तियों के संरक्षण के लिए आवाज उठाई है. फरवरी 2025 में प्रदीप टैगोर ने रांची के ‘टैगोर हिल’ पर हो रहे अवैध कब्जे के खिलाफ स्थानीय अधिकारियों से मुलाकात की. ऐतिहासिक संपत्तियों को मुक्त कराने की मांग की. वैसे परिवार के ज्यादातर लोग पारंपरिक रूप से चकाचौंध से दूर रहकर सादगीपूर्ण जीवन जीना पसंद करते हैं. हालांकि वे अक्सर अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं और कोलकाता, शांतिनिकेतन या अन्य स्थानों पर अपने पेशेवर जीवन में सक्रिय हैं. गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर अपनी बहू प्रतिमा और बेटे रथींद्रनाथ के साथ (फाइल फोटो) टैगोर परिवार के घर को ठाकुरबाड़ी कहा जाता था. ठाकुरबाड़ी का नाम आते ही एक ऐसे परिवार का नाम उभरने लगता है जो ज्ञान, कला, साहित्य और समृद्धि के बीच जीता था. ईस्ट इंडिया के जमाने में उद्योगपति द्वारकानाथ टैगोर से शुरू हुई ये यात्रा महर्षि देवेंद्रनाथ टैगोर से होती हुई गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर तक पहुंची लेकिन ये सवाल अक्सर मन में आता है कि रवींद्रनाथ टैगोर के सीधे वंशज आज कहां हैं, क्या कर रहे हैं. रवींद्रनाथ टैगोर की संतानें रवींद्रनाथ टैगोर का विवाह मृणालिनी देवी से हुआ था. उनके पांच बच्चे थे.1. माधुरीलता (बेला) – सबसे बड़ी बेटी2. रथींद्रनाथ – सबसे बड़े बेटे3. रेणुका – दूसरी बेटी4. मीरा – सबसे छोटी बेटी.5. शमींद्रनाथ – सबसे छोटा बेटा नियति के क्रूर खेल से ये परिवार नहीं बच सका. बीमारी और अकाल मौतों का साया परिवार पर पड़ा रहा. टैगोर के जीवनकाल में ही उनके तीन बच्चों बेला, रेणुका और शमींद्रनाथ की मृत्यु युवाकाल या और कम उम्र में हो गई. शमींद्रनाथ की मृत्यु मात्र 11 वर्ष की आयु में हैजा से हुई, जिससे गुरुदेव पूरी तरह टूट गए थे. रवींद्रनाथ की वंशरेखा के भौतिक रूप से समाप्त होने के पीछे मुख्य रूप से दो कारण रहे – अकाल मृत्यु और संतानहीनता. एक बेटा और एक बेटी ही बच सके रवींद्रनाथ के एक बेटा और एक बेटी ही बाद जीवित बच पाए. बेटे रथींद्रनाथ टैगोर कृषि वैज्ञानिक थे. वह शांतिनिकेतन के पहले उपकुलपति बने. उन्होंने प्रतिमा देवी से विवाह किया, लेकिन उनकी अपनी कोई संतान नहीं हुई. उन्होंने नंदिनी नाम की एक कन्या को गोद लिया. रथींद्रनाथ बाद के वर्षों में पारिवारिक और प्रशासनिक विवादों के कारण शांतिनिकेतन छोड़कर देहरादून चले गए. रवींद्रनाथ टैगोर अपने बेटे रथींद्रनाथ और बेटी माधुरीलता के साथ (फोटो X) रथींद्रनाथ टैगोर का अंतिम समय देहरादून में ही बीता. उनका वहां जाना टैगोर परिवार के इतिहास का एक अत्यंत दुखद और विवादास्पद अध्याय माना जाता है. गुरुदेव की मृत्यु के बाद वह विश्वभारती विश्वविद्यालय के पहले ‘उपकुलपति’ बने. उनके शांतिनिकेतन छोड़ने और देहरादून बसने के पीछे की दो वजहें थीं. 1. प्रशासनिक विवादरथींद्रनाथ एक कुशल कृषि वैज्ञानिक और शिल्पी थे. 7 अगस्त 1941 में गुरुदेव की मृत्यु के बाद विश्वभारती को संभालना उनके लिए कांटों भरा ताज साबित हुआ. शांतिनिकेतन के पुराने आश्रमवासियों और कुछ दिग्गज विद्वानों के साथ उनके मतभेद गहरे हो गए. उन पर प्रशासनिक अनियमितताओं और विश्वविद्यालय के फंड के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए. रथींद्रनाथ स्वभाव से बहुत संवेदनशील थे. उन पर लगे आरोपों की जांच के लिए समितियां बनाई गईं, जिससे उन्हें लगा कि जिस संस्था को उनके पिता ने खून-पसीने से सींचा, वहीं उनका अपमान हो रहा है. आखिरकार 1953 में उन्होंने भारी मन से उपकुलपति के पद से इस्तीफा दे दिया. 2. पारिवारिक विवाद और मीरा से नजदीकियांरथींद्रनाथ का निजी जीवन भी काफी जटिलताओं से भरा रहा, जिसने उन्हें शांतिनिकेतन से दूर जाने पर मजबूर किया. उनकी पत्नी प्रतिमा देवी के साथ उनके संबंध अंतिम वर्षों में बहुत मधुर नहीं रह गए थे. प्रतिमा देवी शांतिनिकेतन में ही रहना चाहती थीं, जबकि रथींद्रनाथ वहां के माहौल से ऊब चुके थे. रथींद्रनाथ के जीवन में मीरा चटर्जी का प्रवेश हुआ, जो उनके मित्र निर्मल चंद्र चटर्जी की पत्नी थीं. मीरा उनके अकेलेपन का सहारा बनीं. जब रथींद्रनाथ ने शांतिनिकेतन छोड़ा, तो मीरा चटर्जी और उनका परिवार भी उनके साथ देहरादून चला गया. इस रिश्ते को उस समय के बंगाली समाज और टैगोर परिवार के कई सदस्यों ने स्वीकार नहीं किया, जिससे विवाद और बढ़ गया. गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के बेटे रथींद्रनाथ पारिवारिक और विश्वभारती विवि के प्रशासनिक विवादों के बाद सबकुछ छोड़कर देहरादून आ गए. उनका अंतिम जीवन यहीं गुजरा (फाइल फोटो) बेटा सबकुछ छोड़ देहरादून चला गया 1953 में शांतिनिकेतन त्यागने के बाद रथींद्रनाथ देहरादून के राजपुर’ इलाके में एक बंगले में रहने लगे, जिसका नाम उन्होंने ‘मयाली’रखा था. वहां उन्होंने अपना समय पेंटिंग करने, लिखने और बागवानी में बिताया. वह शांतिनिकेतन की राजनीति से दूर एक गुमनाम जीवन जीना चाहते थे. देहरादून में रहते हुए भी वे आर्थिक तंगी और मानसिक अवसाद से जूझते रहे. गुमनामी में निधन 3 जून 1961 को देहरादून में ही उनका निधन हुआ. उनकी मृत्यु के समय उनके पास शांतिनिकेतन का कोई आधिकारिक प्रतिनिधि नहीं था, जो उस महान विरासत के उत्तराधिकारी के लिए एक विडंबना ही थी. रथींद्रनाथ का देहरादून

ताज़ा खबर

दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन: ISI के इशारे पर आतंक फैलाने आए...

होमताजा खबरDelhi टारगेट किलिंग और धमाकों का था प्लान, दिल्ली में रेकी कर रहे 8 ISI एजेंट पकड़ाए Last Updated:May 07, 2026, 15:11 IST दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर चल रहे एक बड़े मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है. पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के नेतृत्व में काम कर रहे 8 गुर्गों को गिरफ्तार किया गया है. ये आरोपी दिल्ली में टारगेट किलिंग और बम धमाकों जैसी बड़ी आतंकी वारदातों को अंजाम देने की फिराक में थे. पुलिस ने इनके पास से कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद किए हैं. राजधानी दहलाने की साजिश फेल: स्पेशल सेल ने पकड़ा पाकिस्तानी गैंगस्टर भट्टी का खूंखार मॉड्यूल. (AI Image) नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बहुत बड़े ऑपरेशन में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के नापाक इरादों को नाकाम कर दिया है. पुलिस ने पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के मॉड्यूल पर स्ट्राइक करते हुए अलग-अलग शहरों से 8 लोगों को गिरफ्तार किया है. ये सभी आरोपी सोशल मीडिया के जरिए सीधे पाकिस्तान में बैठे भट्टी और उसके आकाओं के संपर्क में थे. पुलिस की शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि ये लोग दिल्ली में किसी बड़ी आतंकी वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे. इनके निशाने पर कुछ वीवीआईपी और महत्वपूर्ण स्थान भी शामिल थे, जिनकी इन्होंने पहले ही रैकी कर ली थी. गिरफ्तार आरोपियों से मिले इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में कई चौंकाने वाले सबूत मिले हैं, जो सीधे तौर पर सीमा पार बैठे आतंकियों से जुड़े हैं. दिल्ली में बड़ी तबाही मचाने का था प्लान पकड़े गए आरोपियों ने पूछताछ में कबूल किया है कि उन्हें दिल्ली के भीड़भाड़ वाले इलाकों में हमले का टास्क दिया गया था. शहजाद भट्टी ने ISI के निर्देश पर इन लोगों को भारत में एक्टिव किया था. ये मॉड्यूल न सिर्फ धमाके बल्कि दिल्ली में टारगेट किलिंग की प्लानिंग भी कर रहा था. आरोपियों ने शहर के कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील ठिकानों की रैकी पूरी कर ली थी. स्पेशल सेल अब इनके बाकी नेटवर्क और मददगारों की तलाश में जुटी हुई है. कैसे ऑपरेट हो रहा था शहजाद भट्टी का यह मॉड्यूल? शहजाद भट्टी पाकिस्तानी जेलों और सुरक्षित ठिकानों से बैठकर सोशल मीडिया के जरिए इन युवकों को रिक्रूट कर रहा था. गिरफ्तार किए गए 8 आरोपी अलग-अलग शहरों से ताल्लुक रखते हैं, जो आपस में डिजिटल माध्यमों से जुड़े थे. पुलिस ने इनके पास से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और संदिग्ध दस्तावेज जब्त किए हैं. इन डिवाइस की एनालिसिस से पता चला है कि भट्टी इन्हें हथियारों और फंड्स की सप्लाई करने वाला था. पुलिस को अंदेशा है कि इस मॉड्यूल के तार अन्य बड़े अंडरवर्ल्ड गैंग्स से भी जुड़े हो सकते हैं. क्या इन आरोपियों के तार दूसरे गैंग्स से भी जुड़े हैं? दिल्ली पुलिस को जांच के दौरान यह भी पता चला है कि ISI अब गैंगस्टर्स का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए कर रही है. गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस अब उन बड़े गैंग्स पर भी एक्शन ले रही है जो परोक्ष रूप से इनकी मदद कर रहे थे. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह एक हाइब्रिड मॉडल है, जहां अपराधियों को आतंक फैलाने का काम सौंपा गया है. आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़ी गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है. About the Author दीपक वर्माDeputy News Editor दीपक वर्मा News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक से भी ज्यादा का अनुभव रखने वाले दीपक मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति और भारत के आंतरिक घ…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

ताज़ा खबर

Tamilnadu Government Formation: क्या AIADMK का होगा शिवसेना जैसा हाल? पुडुचेरी पहुंचे...

Tamilnadu Government Formation: तमिलनाडु की राजनीति एक बार फिर उस मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है, जहां संख्या से ज्यादा महत्व भरोसे और पार्टी की अंदरूनी एकजुटता का हो जाता है. कभी जयललिता के दम पर तमिल राजनीति की सबसे ताकतवर पार्टी मानी जाने वाली AIADMK अब चुनावी नतीजों के बाद नए संकट के संकेत दे रही है. पार्टी के विधायकों को पुडुचेरी भेजे जाने की खबर ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है. यह तस्वीर लोगों को 2022 की महाराष्ट्र राजनीति की याद दिला रही है, जब उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने अपने विधायकों को बचाने की कोशिश की थी, लेकिन एकनाथ शिंदे की बगावत ने पूरी पार्टी की दिशा बदल दी. अब सवाल यही उठ रहा है कि क्या AIADMK भी उसी रास्ते पर बढ़ रही है? EPS यानी एडप्पादी पलानीस्वामी फिलहाल पार्टी को संभालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन TVK चीफ विजय की बढ़ती सक्रियता और सरकार बनाने की कोशिशों ने AIADMK के भीतर बेचैनी बढ़ा दी है. राजनीति में अक्सर होटल, रिसॉर्ट और दूसरे राज्यों में शिफ्ट किए गए विधायक सिर्फ सुरक्षा का संकेत नहीं होते, बल्कि अंदरूनी अविश्वास की कहानी भी बयान करते हैं. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. कांग्रेस का समर्थन मिलने के बाद भी विजय बहुमत से कुछ सीटें दूर हैं. ऐसे में AIADMK के 47 विधायक अचानक बेहद अहम हो गए हैं. इसी बीच यह खबर आई कि कुछ विधायकों को पुडुचेरी ले जाया गया है. हालांकि पार्टी ने इसे अफवाह बताते हुए साफ किया कि सभी विधायक EPS से मिले हैं और पार्टी पूरी तरह एकजुट है. लेकिन राजनीति में सिर्फ बयान काफी नहीं होते. उद्धव ठाकरे की शिवसेना में भी शुरुआत में यही कहा गया था कि सब कुछ नियंत्रण में है. बाद में वही मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और सत्ता हाथ से निकल गई. यही वजह है कि अब AIADMK के हर कदम को शक की नजर से देखा जा रहा है. क्या यह सिर्फ एहतियाती रणनीति है या फिर पार्टी के भीतर कुछ बड़ा पक रहा है? फिलहाल यही चर्चा तमिलनाडु की राजनीति का सबसे बड़ा सवाल बन चुकी है. फिलहाल पार्टी ने किसी भी तरह की टूट से इनकार किया है. (फाइल फोटो PTI) AIADMK ने अफवाहों को बताया बेबुनियाद AIADMK की तरफ से आधिकारिक बयान जारी कर कहा गया कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और सभी नवनिर्वाचित विधायक EPS के संपर्क में हैं. पार्टी प्रवक्ताओं ने मीडिया में चल रही उन खबरों को गलत बताया, जिनमें कहा गया कि MLAs को बिना जानकारी पुडुचेरी ले जाया गया. पार्टी नेतृत्व का कहना है कि विरोधी दल जानबूझकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब भी किसी पार्टी को अपने विधायकों को एक जगह इकट्ठा रखना पड़ता है, तब अंदरूनी असुरक्षा की चर्चा तेज हो जाती है. TVK के उभार ने AIADMK की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. विजय लगातार राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश कर रहे हैं. कांग्रेस पहले ही उनका समर्थन कर चुकी है और अब उनकी नजर अन्य दलों तथा निर्दलीय विधायकों पर है. इसी वजह से AIADMK के 47 विधायक बेहद अहम हो गए हैं. अगर पार्टी में थोड़ी भी टूट होती है तो तमिलनाडु की पूरी राजनीति बदल सकती है. यही कारण है कि EPS फिलहाल किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रहे. TVK को समर्थन नहीं, साफ संदेश AIADMK के डिप्टी जनरल सेक्रेटरी केपी मुनुसामी ने साफ कहा कि पार्टी किसी भी हालत में TVK को समर्थन नहीं देगी. उन्होंने कहा कि यह फैसला EPS के निर्देश पर लिया गया है और पार्टी अपनी अलग पहचान बनाए रखेगी. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि AIADMK फिलहाल विपक्ष में रहकर खुद को मजबूत करना चाहती है. पार्टी को डर है कि अगर उसने TVK को समर्थन दिया तो उसकी राजनीतिक जमीन और कमजोर हो सकती है. जयललिता की विरासत वाली पार्टी के लिए यह अस्तित्व की लड़ाई भी बन चुकी है. अगर TVK बहुमत जुटाने में सफल रहती है तो राज्य में नई सरकार बन सकती है. क्या दोहराई जाएगी शिवसेना वाली कहानी? महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे ने भी अपने विधायकों को बचाने की कोशिश की थी लेकिन अंत में शिंदे गुट अलग हो गया. AIADMK के सामने भी फिलहाल वैसा ही खतरा दिख रहा है. हालांकि अभी पार्टी में खुलकर बगावत सामने नहीं आई है, लेकिन MLAs को लेकर चल रही खबरों ने शक जरूर पैदा कर दिया है. EPS के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को एकजुट रखना है. अगर वे सभी गुटों को संतुष्ट रखने में सफल रहे तो पार्टी संकट से बाहर निकल सकती है. लेकिन अगर अंदरूनी असंतोष बढ़ा, तो तमिलनाडु में भी महाराष्ट्र जैसा राजनीतिक भूचाल देखने को मिल सकता है. क्या AIADMK सच में टूट के खतरे से गुजर रही है? फिलहाल पार्टी ने किसी भी तरह की टूट से इनकार किया है, लेकिन राजनीतिक संकेत चिंता बढ़ाने वाले हैं. विधायकों को पुडुचेरी शिफ्ट किए जाने की खबरों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि कहीं पार्टी नेतृत्व को अपने ही MLAs पर भरोसा कम तो नहीं हो रहा. हालांकि अभी तक कोई खुली बगावत सामने नहीं आई है, इसलिए स्थिति पूरी तरह शिवसेना जैसी नहीं कही जा सकती. AIADMK TVK को समर्थन क्यों नहीं देना चाहती? AIADMK का मानना है कि TVK को समर्थन देने से उसकी खुद की राजनीतिक पहचान कमजोर पड़ सकती है. पार्टी फिलहाल खुद को एक मजबूत विपक्ष के रूप में स्थापित करना चाहती है. EPS नहीं चाहते कि विजय की लोकप्रियता के सामने AIADMK की जमीन और खिसके. यही वजह है कि पार्टी ने साफ संदेश दिया है कि TVK को किसी भी हाल में समर्थन नहीं मिलेगा. तमिलनाडु की राजनीति में आगे क्या हो सकता है? अगर TVK बहुमत जुटाने में सफल रहती है तो राज्य में नई सरकार बन सकती है. लेकिन अगर संख्या पूरी नहीं हुई तो राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है. AIADMK के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण है. पार्टी अगर एकजुट रहती है तो भविष्य में किंगमेकर की भूमिका निभा सकती है.

ताज़ा खबर

TVK chief Vijay | Tamil Nadu Government Formation | 2 दिन, 2...

होमताजा खबरदेश 2 दिन, 2 मुलाकात, तब भी नहीं बनी बात…विजय को गवर्नर ने उल्टे पांव लौटाया Last Updated:May 07, 2026, 13:02 IST Tamil Nadu Govt Formation TVK Chief Vijay News: तमिलनाडु में सरकार की तस्वीर अब तक साफ नहीं हो पाई है. विजय आज यानी गुरुवार को दूसरी बार गवर्नर से मिलने गए थे, लेकिन आज भी उन्हें खाली हाथ ही लौटना पड़ा. राज्यपाल विजय के नंबरों से संतुष्ट नहीं हैं. तमिलगा वेत्त्री कझगम (टीवीके) के प्रमुख विजय ने गुरुवार को दो दिनों में दूसरी बार राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से मुलाकात की और सरकार बनाने के लिए अपनी दावेदारी दोहराई. विजय आज दूसरी बार गवर्नर से मिलने गए थे. Thalapathy Vijay meets Tamil Nadu Governor: तमिलनाडु में सरकार गठन का रास्ता अब भी अधड़ में है. थलापति विजय की टीवीके की कैसे और कब सरकार बनेगी, अब तक पेच फंसा है. एक्टर विजय टीवीके की गठबंधन सरकार बनाने की कोशिशों में जुटे हैं. राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा कर चुके हैं. वह दो बार राज्यपाल से मिल चुके हैं. मगर दोनों बार लोकभवन से खाली हाथ लौटना पड़ा है. इस तरह अब तक तमिलनाडु में सरकार गठन की तस्वीर साफ नहीं हो पाई है. राज्यपाल अब भी थलापति विजय के दावों और नंबरों से संतुष्ट नहीं हैं. राज्यपाल पहले बहुमत के लिए 118 विधायकों के साइन देखना चाहते हैं, तभी वह विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे. दरअसल, टीवीके यानी तमिलगा वेत्त्री कझगम के प्रमुख विजय दो दिनों में दो बार राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से मुलाकात कर चुके हैं. पहले बुधवार को विजय लोकभवन गए थे. अब एक्टर विजय ने गुरुवार को भी लोकभवन का दौरा किया और राज्यपाल से मुलाकात की. इस दौरान सरकार बनाने के लिए अपनी दावेदारी दोहराई. मगर दो दिन में दोनों मुलाकातों में बात नहीं बन पाई. सूत्रों का कहना है कि विजय आज एक बार फिर लोकभवन से खाली हाथ लौटे. दूसरी बार गवर्नर से मुलाकात पर भी बात नहीं बनी. राज्यपाल विजय के नंबरों से संतुष्ट नहीं हैं. पहले वह बहुमत वाला नंबर देखना चाहते हैं. दो दिन, दो मुलाकात और नहीं बनी बात दरअसल, अभिनेता से नेता बने विजय को राज्यपाल ने बुलाया था ताकि यह चर्चा की जा सके कि क्या उनके पास राज्य में स्थिर सरकार बनाने के लिए जरूरी संख्या है, क्योंकि विधानसभा चुनाव में टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और उसके पास 108 सीटें हैं. टीवीके प्रमुख विजय और तमिलनाडु के कार्यवाहक राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर के बीच यह बैठक काफी अहम मानी जा रही थी. टीवीके ने राज्यपाल से सरकार बनाने के प्रस्ताव पर फिर से विचार करने की मांग की. मगर बात नहीं बनी. टीवीके चीफ विजय ने राज्यपाल से क्या कहा? सूत्रों के मुताबिक, टीवीके ने कानूनी सलाह ली है और राज्यपाल से सरकार बनाने के अपने अनुरोध पर फिर से विचार करने को कहा है. हालांकि, विजय के अनुरोध पर राज्यपाल ने कहा है कि वे इस पर विचार करेंगे. टीवीके ने यह भी कहा है कि पहले भी बिना बहुमत के सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का मौका दिया गया है. दो बार वापस लौटे विजय टीवीके ने राज्यपाल से कहा कि वे विधानसभा में बहुमत साबित करने को लेकर आश्वस्त हैं. यही बात कल भी राज्यपाल को बताई गई थी, जब टीवीके के बुस्सी आनंद लोकभवन गए थे. अब जब दो बार राज्यपाल ने विजय को वापस लौटा दिया है, तो ऐसे में सवाल है कि क्या सरकार बनाने की मंजूरी नहीं मिलने पर जय मद्रास हाईकोर्ट जाएंगे? सूत्रों के अनुसार, अगर राज्यपाल सरकार बनाने की मंजूरी नहीं देते हैं तो टीवीके मद्रास हाईकोर्ट का रुख कर सकती है. टीवीके के पास कितनी सीटें यहां बताना जरूरी है कि बुधवार को भी राज्यपाल ने टीवीके के नंबर गेम को लेकर अपनी असहजता जताई थी. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में टीवीके ने 234 में से 108 सीटें जीती हैं. हालांकि, वह बहुमत के आंकड़े 118 से पीछे रह गई है. कांग्रेस के टीवीके के साथ गठबंधन करने से उसे पांच और सीटें मिली हैं, लेकिन विजय को सरकार बनाने के लिए अभी भी पांच सीटों की कमी है. About the Author Shankar Pandit Shankar Pandit has more than 10 years of experience in journalism. Before News18 (Network18 Group), he had worked with Hindustan times (Live Hindustan), NDTV, India News Aand Scoop Whoop. Currently he handle ho…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

ताज़ा खबर

Thalapathy Vijay | how to convert social media followers into votes |...

नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर जब हमारे या आपके फॉलोअर मिलियन में हो जाते हैं तो कई दफे मन में सवाल उठता है क्या हम इनके बूते विधायक, सांसद बन सकते हैं? भारत में एक ऐसे चुनावी रणनीतिकार का उदय हुआ है जो आपके सपनों को साकार कर सकता है. अक्सर बातें होती हैं कि सोशल मीडिया के फॉलोअर से चुनाव नहीं जीता जा सकता है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण बिहार चुनाव 2025 में दिखा था. जब चुनाणी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराजी की सोशल मीडिया पर जबरदस्त फैन फॉलोइंग थी, लेकिन चुनाव में उन्हें एक भी सीट नहीं आई. लेकिन मार्केट में एक ऐसे चुनावी रणनीतिकार की सफल लॉन्चिंग हुई है जो इस करिश्मे को हकीकत में बदल देता है. वो शख्स का नाम है जॉन अरोकियासामी. इसने अपनी काबलियत से अभिनेता से राजनेता बने थलापति विजय और उनकी पार्टी टीवीके के साथ काम करके इस सोशल मीडिया के फॉलाअर्स को वोट में तब्दील करके दिखाया है. जॉन अरोकियासामी ने यह करिश्मा पहली बार नहीं बल्कि शिवसेना के साथ काम करते हुए भी कर दिखाया है. आइए सोशल मीडिया के फॉलोअर्स को वोट में बदलन वाली जॉन अरोकियासामी की कहानी जानते हैं. सोशल मीडिया के फॉलोअर्स को वोट में बदलने की तरकीब क्या? बात 2023 की है. जब तमिल फिल्मों के सुपरस्टार थलापति विजय से जॉन अरोकियासामी की मुलाकात होती है. बातचीत के दौरान थलापति विजय ने जॉन को बताया कि वह राजनीति में उतरना चाहते हैं. इसमें वह उनकी क्या मदद कर सकते हैं. उस रोज विजय के साथ छोटी मीटिंग करने के बाद जॉन वहां से चले गए. कुछ दिनों बाद दोनों फिर मिले. इस मुलाकात के दौरान जॉन अरोकियासामी ने विजय से कहा- ‘मैं अगर आपके सोशल मीडिया फॉलोअर्स को वोट में तब्दील कर दूं तो कैसा रहेगा.’ इस बात पर विजय को पल भर के लिए यकीन नहीं हुआ, लेकिन उस वक्त भारी मन से ही सही विजय ने जॉन अरोकियासामी को काम शुरू करने की परमिशन दे दी. जॉन अरोकियासामी ने जब अपनी टीम के साथ काम करना शुरू किया तो उन्होंने पहली ही मीटिंग में कहा- ‘आज से हम लोग एक एक ऐसे प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर रहे हैं जो थोड़ा नया है. लेकिन हमें इसे हर हाल में पूरा करना है.’ उनके ऐसा कहते ही टीम मीटिंग में मौजूद लोगों के चेहरे देखकर जॉन अरोकियासामी समझ गए कि उनके मन में सवाल है कि आखिर काम क्या है? तभी जॉन अरोकियासामी ने कहा- ‘हम कल्ट ऐक्टर विजय थलापति के लिए काम शुरू करने जा रहे हैं. विजय वो शख्स हैं जिनके सोशल मीडिया पोस्ट पर मिलियन में रिएक्शन आते हैं. हमें विजय के सोशल मीडिया फॉलोअर्स को वोट में तब्दील करा है.’ इसी मीटिंग के दौरान जॉन अरोकियासामी ने कहा कि डिजिटल मीडिया में मिलने वाले प्यार को वोटों में बदला जा सकता है, यह हम सबको साबित करके दिखाना है. जब हम सफल होंगे तो दुनिया इस करिश्मे को देखेगी. जॉन में यूं जगा विजय का भरोसा बताया जा रहा है कि जॉन और उनकी टीम ने जब थलापति विजय और उनकी पार्टी टीवीके के लिए काम करना शुरू किया तो कुछ महीने में उम्मीद जगा दी. भरोसा इतना ज्यादा जगा कि थलापति से जब पार्टी के लोग कुछ भी सवाल करते तो वह झट से कहते- ‘जॉन से एक बार पूछ लो’. टीवीके से जुड़े लोगों का कहना है कि कुछ ही दिनों में जॉन अरोकियासामी पर विजय बहुत ही ज्यादा भरोसा करने लगे. विजय के करीबी लोगों का कहना है कि विजय विचारधारा के स्तर पर बीजेपी या दक्षिणपंथी लोगों के करीब भी जा सकते थे, लेकिन जॉन की सलाह पर उन्होंने ऐसा नहीं किया. विजय ने जब टीवीके बनाई तब अरोकियासामी ने बीजेपी और व्यापक दक्षिणपंथी विचारधारा के खिलाफ मजबूती से खड़ा करने में मदद की. यह ज़रूरी नहीं कि उन्होंने ऐसा द्रविड़ राजनीति में वैचारिक रूप से डूबे होने के कारण किया हो, बल्कि उन्होंने ऐसा विजय को पूरी तरह से राजनीतिक लाभ पहुंचाने के लिए किया है. पार्टी के लोगों का कहना है कि टीवीके के अंदर, अरोकियासामी जिस तरह से विजय को समझते थे, उसे बताने के लिए बार-बार एक ही शब्द का इस्तेमाल किया जाता रहा- ‘कल्ट’ (एक ऐसा व्यक्तित्व जिसके दीवाने लोगों का एक अलग ही समूह हो). जॉन मानते हैं कि थलापति विजय केवल लोकप्रिय ही नहीं हैं, बल्कि वे एक ‘कल्ट’ बनने की राह पर हैं. शायद वे खुद भी अपनी इस क्षमता को पूरी तरह से नहीं समझ पाए थे. लाइमलाइट से दूर रहते हैं चुनावी रणनीतिकार जॉन अरोकियासामी कई मंचों पर खुद को प्रूफ कर चुके हैं जॉन विजय की तरह जॉन अरोकियासामी भी क्रिश्चियन धर्म को मानते हैं, लेकिन प्रोफेशनल लाइफ में उनकी विचारधारा का खास प्रभाव नहीं दिखता है. यही वजह है कि वह विजय से पहले 2016 में पीएमके के ‘माट्रम मुन्नेट्रम अन्बुमणि’ अभियान, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के पहले कार्यकाल के दौरान कर्नाटक में कांग्रेस, महाराष्ट्र में शरद पवार की अविभाजित एनसीपी और मुंबई में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली अविभाजित शिवसेना की नगरपालिका चुनाव के लिए रणनीति बना चुके हैं. जॉन अपनी पर्सनल जिंदगी में बाइबल को मानते हैं, लेकिन सोशल लाइफ में वह धर्मनिरपेक्षता को तवज्जो देते हैं. वह पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश के चित्तूर से ताल्लुक रखते हैं. चेन्नई से एमबीए कंप्लीट करने से पहले त्रिची में अंग्रेज़ी साहित्य की पढ़ाई की थी. उन्होंने ‘परफेक्ट रिलेशंस’ में काम किया और बाद में ‘गुड रिलेशंस इंडिया’ में डायरेक्टर और COO के पद तक पहुंचे. इसके बाद 2017 में उन्होंने ‘पर्सोना लीडरशिप एडवाइज़री प्राइवेट लिमिटेड’ की शुरुआत की और बाद में अपना राजनीतिक परामर्श उपक्रम ‘JPACPersona’ लॉन्च किया. खुद को लाइमलाइट से दूर रखकर जॉन अरोकियासामी चुपचाप काम करने और सौ फीसदी रिजल्ट देने में यकीन करते हैं. आज तब तमिलनाडु चुनाव में टीवीके को सबसे ज्यादा 108 सीटें आई हैं और थलापति विजय का मुख्यमंत्री बनना तय है तो लोग जॉन अरोकियासामी के बारे में जानना समझना चाह रहे हैं. जॉन की चर्चा इस बात के लिए हो रही है कि यह वह शख्स है कि जो सोशल मीडिया फॉलोअर्स को वोट में तब्दील करने की तरकीब जानता है. Source link

ताज़ा खबर

‘मानसिक संतुलन खो चुके हैं…’, भगंवत मान पर क्यों भड़के सीएम नायब...

Last Updated:May 07, 2026, 10:59 IST पंजाब में हुए दोहरे बम धमाकों के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराने के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के बयान पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पलटवार किया है. ख़बरें फटाफट मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी. चंडीगढ़.  पंजाब में जालंधर और अमृतसर में हुए बम धमाकों को लेकर सीएम भगवंत मान के बयान पर भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. मान ने इन धमाकों के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहरया था. अब इस पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रतिक्रिया दी है. सीएम सैनी ने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार वाले राज्य में हुए दोहरे बम धमाकों के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराने के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपना मानसिक संतुलन खो दिया है. सैनी ने यह भी कहा कि पंजाब में होने वाली किसी भी घटना के लिए आम आदमी पार्टी पूरी तरह जिम्मेदार है. पुलिस ने बताया कि मंगलवार रात जालंधर में बीएसएफ के पंजाब फ्रंटियर मुख्यालय के बाहर और अमृतसर के खासा में सेना छावनी के पास दो धमाके हुए. किसी के घायल होने की खबर नहीं है. बुधवार को जब मान ने इन धमाकों के लिए भाजपा को जिम्मेदार बताया और कहा कि पार्टी 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी इसी तरह कर रही है, तो पंजाब और हरियाणा के भाजपा नेताओं ने उन्हें सबूत देने या इस्तीफा देने की चुनौती दी. सैनी ने हिंदी में एक्स पर पोस्ट किया, ‘भगवंत मान का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है.’ हरियाणा के मुख्यमंत्री ने कहा, ‘जालंधर और अमृतसर में हुए बम धमाके न सिर्फ पंजाब बल्कि पूरे देश के लिए चिंता का विषय हैं, लेकिन भगवंत मान का बयान उससे भी ज्यादा चिंता की बात है.’ उन्होंने कहा कि जहां पंजाब के डीजीपी इन घटनाओं के पीछे पाकिस्तान की आईएसआई की भूमिका की बात कर रहे हैं, वहीं मुख्यमंत्री मान राजनीतिक मकसद से गैरजिम्मेदार बयान दे रहे हैं. हरियाणा के मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा हमेशा देश को सबसे ऊपर रखती है और सुरक्षा, स्थिरता और सुशासन के लिए काम करती रही है और आगे भी करेगी. सैनी ने पंजाब के मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा, ‘पंजाब की जनता आपके गैरजिम्मेदार रवैये को समझती है और समय आने पर जवाब देगी.’ हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने भी मान के बयान की कड़ी आलोचना की. विज ने कहा कि भगवंत मान ने गैरजिम्मेदाराना बयान दिया है और उन्हें तुरंत इस्तीफा देना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा पंजाब में मजबूत बहुमत के साथ सरकार बनाएगी. About the Author Vinod Kumar Katwal Vinod Kumar Katwal, a Season journalist with 14 years of experience across print and digital media. I have worked with some of India’s most respected news organizations, including Dainik Bhaskar, IANS, Punjab K…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

Scroll to Top