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तारिक रहमान सरकार ने दिखा दिया अपना रंग, भारत संग डील में...

होमताजा खबरदेश तारिक रहमान सरकार ने दिखा दिया अपना रंग, भारत संग डील में चीन को बना रहे चौधरी Last Updated:May 08, 2026, 07:45 IST Tariq Rehman Government Sought China Involvement: बांग्लादेश की नई सरकार ने आखिरकार अपना रंग दिखा ही दिया है. उसने भारत के साथ एक अहम डील में चीन को चौधरी बनाने की बात कही है. ऐसे में सवाल यह है कि भारत के साथ द्विपक्षीय मुद्दों में चीन को एंट्री दिलाकर तारिक रहमान की सरकार क्या संदेश देना चाहती है. बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान. फोटो- रायटर Tariq Rehman Government Sought China Involvement: भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से अटके तीस्ता जल बंटवारा समझौते के बीच अब ढाका की नई सरकार ने ऐसा कदम उठाया है, जिसने नई दिल्ली की चिंता बढ़ा दी है. बीएनपी के नेता तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश सरकार ने तीस्ता नदी पुनर्स्थापन परियोजना में चीन की भागीदारी और समर्थन मांगा है. इसे भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिहाज से बड़ा रणनीतिक संकेत माना जा रहा है. दरअसल, बांग्लादेश लंबे समय से भारत पर 2011 के तीस्ता जल बंटवारा समझौते को लागू करने का दबाव बनाता रहा है. यह समझौता अब तक लागू नहीं हो पाया है. इसकी सबसे बड़ी वजह पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र के बीच सहमति का अभाव रहा. उस समय पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस समझौते पर आपत्ति जताई थी, जिसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया. ममता दीदी के हटने से बांग्लादेश की बढ़ी उम्मीद बैठक में दोनों देशों के बीच तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन और पुनर्स्थापन परियोजना पर भी चर्चा हुई. यह परियोजना बांग्लादेश के लिए बेहद अहम मानी जा रही है. तीस्ता नदी भारत के सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होकर बांग्लादेश में प्रवेश करती है. ढाका इस परियोजना के जरिए नदी की ड्रेजिंग, तटबंध निर्माण और जल प्रबंधन को बेहतर बनाना चाहता है, ताकि बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत किया जा सके. चीन ने खुलकर नहीं की बात हालांकि, वांग यी ने खुलकर यह नहीं बताया कि चीन किस स्तर तक परियोजना में शामिल होगा, लेकिन उन्होंने कहा कि बीजिंग अपनी क्षमता के अनुसार बांग्लादेश को हर संभव सहायता देने को तैयार है. उन्होंने यह भी कहा कि चीन, बेल्ट एंड रोड इनेशिएटिव को बांग्लादेश की विकास रणनीतियों के साथ जोड़ना चाहता है. चीन ने यह संकेत भी दिया कि वह बांग्लादेश के साथ सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं, बल्कि व्यापार, निवेश, जल संसाधन, हरित विकास और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाना चाहता है. दूसरी ओर खालिलुर रहमान ने चीन को बांग्लादेश का विश्वसनीय और अपरिहार्य मित्र बताया. उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब दक्षिण एशिया में चीन लगातार अपनी रणनीतिक मौजूदगी बढ़ाने में लगा हुआ है. विशेषज्ञों का मानना है कि तीस्ता परियोजना में चीन की संभावित एंट्री भारत के लिए केवल जल बंटवारे का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सामरिक चुनौती भी बन सकती है. भारत पहले ही श्रीलंका, मालदीव और नेपाल में चीन की बढ़ती सक्रियता को लेकर सतर्क रहा है. अब बांग्लादेश में भी चीन की गहरी भागीदारी नई दिल्ली के लिए चिंता का विषय बन सकती है. तीस्ता नदी को लेकर भारत और बांग्लादेश के रिश्ते हमेशा संवेदनशील रहे हैं. बांग्लादेश का कहना है कि उसे नदी के पानी में न्यायसंगत हिस्सेदारी नहीं मिल रही, जबकि भारत में राज्य और केंद्र के बीच राजनीतिक सहमति का अभाव समझौते की राह में सबसे बड़ी बाधा रहा है. About the Author संतोष कुमार न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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Petrol Price : नोएडा में सस्‍ता तो गाजियाबाद में महंगा हुआ पेट्रोल,...

Last Updated:May 08, 2026, 06:42 IST Petrol-Diesel Price : कच्‍चे तेल की कीमतों में एक बार फिर उछाल दिख रहा है, जिसका असर शुक्रवार सुबह जारी पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर भी दिखा. आज यूपी से लेकर बिहार तक के कई शहरों में तेल के खुदरा दाम बदल गए हैं. ग्‍लोबल मार्केट में कच्‍चे तेल की कीमतों में फिर उछाल दिख रहा है. नई दिल्‍ली. ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव धीरे-धीरे खत्‍म तो हो रहा है, लेकिन ग्‍लोबल मार्केट में कच्‍चे तेल की कीमतों में ज्‍यादा नरमी नहीं दिख रही है. ब्रेंट क्रूड का भाव एक बार फिर बढ़कर 102 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया है. इसका असर शुक्रवार सुबह देश के तमाम शहरों में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर भी दिखा. सरकारी तेल कंपनियों की ओर से जारी तेल की कीमतों में आज ज्‍यादातर शहरों में बदलाव दिख रहा है. एनसीआर के शहर नोएडा में जहां तेल के दाम गिरे हैं तो गाजियाबाद में महंगा हुआ है. सरकारी तेल कंपनियों के अनुसार, नोएडा में पेट्रोल 16 पैसे गिरकर 94.74 रुपये लीटर हो गया है तो डीजल 20 पैसे सस्‍ता होकर 87.81 रुपये लीटर पहुंच गया है. गाजियाबाद में पेट्रोल 12 पैसे महंगा होकर 94.70 रुपये लीटर बिक रहा है तो डीजल 14 पैसे बढ़त के साथ 87.81 रुपये लीटर के भाव पहुंच गया है. बिहार की राजधानी पटना में पेट्रोल 25 पैसे सस्‍ता होकर 105.23 रुपये लीटर हो गया तो डीजल 23 पैसे गिरावट के साथ 91.49 रुपये लीटर बिक रहा है. कच्‍चे तेल की बात करें तो बीते 24 घंटे में इसकी कीमतों में भी बड़ा उछाल दिख रहा है. ब्रेंट क्रूड का भाव तेजी से बढ़कर 102.40 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है. डब्‍ल्‍यूटीआई का रेट भी बढ़ गया है और ग्‍लोबल मार्केट में अब 96.66 डॉलर प्रति बैरल के भाव से चल रहा है. चारों महानगरों में पेट्रोल-डीजल के दाम– दिल्ली में पेट्रोल 94.72 रुपये और डीजल 87.62 रुपये प्रति लीटर– मुंबई में पेट्रोल 103.44 रुपये और डीजल 89.97 रुपये प्रति लीटर– चेन्नई में पेट्रोल 100.76 रुपये और डीजल 92.35 रुपये प्रति लीटर– कोलकाता में पेट्रोल 104.95 रुपये और डीजल 91.76 रुपये प्रति लीटर इन शहरों में बदल गए रेट– नोएडा में पेट्रोल 94.74 रुपये और डीजल 87.81 रुपये प्रति लीटर हो गया है.– गाजियाबाद में पेट्रोल 94.70 रुपये और डीजल 87.81 रुपये प्रति लीटर हो गया है.– पटना में पेट्रोल 105.23 रुपये और डीजल 91.49 रुपये प्रति लीटर हो गया है. हर सुबह 6 बजे जारी होते हैं नए रेटहर दिन सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव होता है. सुबह 6 बजे से ही नए रेट लागू हो जाते हैं. पेट्रोल व डीजल के दाम में एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन, वैट और अन्य चीजें जोड़ने के बाद इसका दाम मूल भाव से लगभग दोगुना हो जाता है. यही कारण है कि पेट्रोल-डीजल के दाम इतने अधिक दिखाई देते हैं. About the Author Pramod Kumar Tiwari प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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Thalapathy Vijay | Vijay TVK | Tamil Nadu Government | थलापति विजय...

होमताजा खबरदेश थलापति विजय का बड़ा दांव, TVK के विधायक देंगे इस्तीफा अगर…तमिलनाडु में ट्विस्ट Last Updated:May 08, 2026, 05:31 IST Tamil Nadu Government Formation: तमिलनाडु में सियासी उठापटक जारी है. टीवीके की सरकार पर संशय के बादल मंडरा रहे हैं. तमिलनाडु के राज्यपाल दो बार थलापति विजय को उल्टे पांव वापस भेज चुके हैं. अब तक उनकी पार्टी टीवीके को सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया है. राज्यपाल बहुमत वाला नंबर देखना चाहते हैं. इस बीच थलापति विजय ने बड़ा दांव चल दिया है, जिससे तमिलनाडु की सियासत में हड़कंप मच गया है. तमिलनाडु की सियासत में नया ट्विस्ट आया है. Thalapathy Vijay: तमिलनाडु में सरकार पर सस्पेंस बरकरार है. थलापति विजय की पार्टी टीवीके को अब तक सरकार बनाने का न्योता नहीं मिला है. तमिलनाडु के गवर्नर एक्टर विजय की टीवीके को पहले बहुमत वाला नंबर दिखाने को बोल रहे. थलापति विजय दो बार गवर्नर से मिल चुके हैं. दोनों बार निराशा ही हाथ लगी है. इस बीच खबर है कि तमिलनाडु में थलापति विजय की टीवीके की सरकार न बने, इसके लिए एआईएडीएमके और डीएमके के बीच गठबंधन की सुगबुगाहट तेज है. यही कारण है कि अब एक्टर विजय ने बड़ा दांव चल दिया है. इससे तमिलनाडु की सियासत में नया ट्विस्ट आ गया है. जी हां, एक्टर विजय की टीवीके यानी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने गुरुवार को कहा कि पार्टी के सभी 107 विधायक इस्तीफा देंगे अगर डीएमके (DMK) और एआईएडीएमके (AIADMK) तमिलनाडु में सरकार बनाते हैं. सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है. यह घटनाक्रम तब सामने आया जब DMK और AIADMK नेताओं के बीच दो बैठकें हुईं. राजनीतिक गलियारों में इस बात की खूब चर्चा है कि एआईएडीएमके और डीएमके साथ आ सकते हैं. अव्वल तो राज्यपाल के स्टैंड ने इन अटकलों को और बल दे दिया है. थलापति विजय को किस बात का डर दरअसल, तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अपना करिश्मा दिखा चुके थलापति विजय को एक शंका सता रही है. अब टीवीके (TVK) को शक है कि एआईएडीएमके और डीएमके दोनों पार्टियां मिलकर राज्य में सरकार बनाने की कोशिश कर रही हैं, जबकि सबसे ज्यादा वोट पाने वाली पार्टी को बाहर रखा जा रहा है. एक्टर विजय की पार्टी को कितनी सीटें एक्टर विजय की टीवीके ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीती. इनमें से दो विजय ने जीती हैं. टीवीके के पास 107 विधायक हैं और पार्टी का कहना है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते उसे सरकार बनाने का पहला मौका मिलना चाहिए. इससे पहले राज्यपाल आरवी अर्लेकर ने एक्टर विजय को सरकार बनाने का दावा पेश करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था. उन्होंने कहा कि विजय के पास पर्याप्त संख्या नहीं है. राज्यपाल ने विजय को दिया झटका इस तरह राज्यपाल ने विजय की बहुमत हासिल करने की योजना को खारिज कर दिया. सूत्रों के मुताबिक, दो दिनों में हुई दूसरी बैठक में राज्यपाल ने अभिनेता-राजनेता विजय से 118 विधायकों के समर्थन पत्र देने की मांग की. राज्यपाल के इस फैसले की आलोचना भी हो रही है. टीवीके, कांग्रेस और अन्य नेताओं का कहना है कि बहुमत साबित लोकभवन में नहीं किया जाता है, बल्कि फ्लोर में होता है. कपिल सिब्बल ने भी इस पर सवाल उठाया है. ‘TVK को 6 महीने तक परेशान नहीं करेंगे’: एमके स्टालिन इधर, तमिलनाडु के निवर्तमान मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने द टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए कहा कि टीवीके सरकार बनाने को तैयार है और वह छह महीने तक बिना हस्तक्षेप के देखेंगे. इस बयान के साथ स्टालिन ने एआईएडीएमके और DMK के गठबंधन की संभावना पर चल रही सभी अटकलों को खत्म कर दिया है. स्टालिन ने इशारा किया कि डीएमके नहीं चाहता कि राज्य में कोई संवैधानिक संकट या जल्द चुनाव हो. हालांकि, लॉटरी किंग मार्टिन की पत्नी चाहती हैं कि एआईएडीएमके और टीवीके के बीच गठबंधन हो. इसके लिए वह बैटिंग भी कर रही हैं. अब देखने वाली बात है कि आखिर तमिलनाडु की सियासत में कब तक स्थिरता आती है. About the Author Shankar Pandit Shankar Pandit has more than 10 years of experience in journalism. Before News18 (Network18 Group), he had worked with Hindustan times (Live Hindustan), NDTV, India News Aand Scoop Whoop. Currently he handle ho…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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होर्मुज में चला भारत की कूटनीति का जादू, लड़ते रह गए अमेरिका...

होमताजा खबरदेश होर्मुज में चला भारत की कूटनीति का जादू, लड़ते रह गए अमेरिका और ईरान Last Updated:May 08, 2026, 01:49 IST होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए डरावना गेम चल रहा है. डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी चेतावनी एकदम जारी की है. ट्रंप ने कहा कि रास्ता नहीं खुला तो भारी बमबारी होगी. अमेरिका इस रास्ते पर अपनी ताकत दिखाना चाहता है. ट्रंप ने समझौते के लिए कुछ समय तक रोक हटा ली है. इस डरावने एक्शन से पूरे मिडिल ईस्ट में भारी दहशत मच गई है. ख़बरें फटाफट ईरान ने होर्मुज में अमेरिका और इजरायल को मात दे दी. (फाइल फोटो) नई दिल्ली. विदेश मंत्रालय (एमईए) ने गुरुवार को बताया कि ईरान के साथ चल रही कूटनीतिक बातचीत के चलते अब तक 11 भारतीय जहाज होर्मुज की खाड़ी से निकल चुके हैं. नई दिल्ली में साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान एमईए के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत में आगे प्रगति हो रही है और मंत्रालय लगातार ईरानी अधिकारियों के संपर्क में है. उन्होंने कहा, “हमें प्रगति दिख रही है और इसी प्रगति, कूटनीतिक बातचीत और ईरान के साथ संवाद के चलते अब तक 11 भारतीय जहाज होर्मुज की खाड़ी से बाहर निकल चुके हैं. अभी 13 जहाज फारस की खाड़ी में मौजूद हैं. हम ईरानी अधिकारियों के संपर्क में हैं, ताकि बाकी जहाज भी सुरक्षित रूप से होर्मुज की खाड़ी पार करके भारत आ सकें, जो उनका अंतिम गंतव्य है.” खबरों के मुताबिक, होर्मुज की खाड़ी अब फिर से खुलने की ओर बढ़ रही है. बुधवार को अमेरिका और ईरान की ओर से ऐसे संकेत मिले कि इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर लगी रोक हटाई जा सकती है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार की शाम को कहा था कि वह कुछ समय के लिए रोक हटाकर देखना चाहते हैं कि ईरान के साथ कोई समझौता हो सकता है या नहीं. इसके बाद ईरान के सैन्य संगठन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने बुधवार को कहा कि वह अब जहाजों को इस रास्ते से गुजरने देगा. उसने दावा किया कि अमेरिका की धमकियों को ‘बेअसर’ कर दिया गया है. ट्रंप ने बुधवार की सुबह चेतावनी दी थी कि अगर ईरान ने इस समुद्री रास्ते पर रोक नहीं हटाई तो वह फिर से और भी ज्यादा ताकत के साथ बमबारी शुरू कर सकते हैं. ईरान ने यह रास्ता उस समय बंद कर दिया था जब 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने उसके खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था. यह वही रास्ता है जिससे दुनिया का करीब 20 प्रत‍िशत तेल और गैस गुजरता है. इसके बाद अमेरिका ने 13 अप्रैल को ईरानी बंदरगाहों पर अपनी ओर से भी रोक लगा दी थी, जब दोनों देशों के बीच बातचीत अचानक टूट गई थी. About the Author Rakesh Ranjan Kumar राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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AIUDF का एक विधायक 100 आवाजों के बराबर, बदरुद्दीन अजमल के ऐलान...

होमताजा खबरदेश कांग्रेस बन गई है दूसरी मुस्लिम लीग, बदरुद्दीन अजमल के ऐलान से असम में हाहाकार Last Updated:May 08, 2026, 02:17 IST बदरुद्दीन अजमल ने कहा कि कांग्रेस और बीजेपी ने मिलकर खेल किया. दोनों ने एआईयूडीएफ को कमजोर करने के लिए सरेआम भारी समन्वय किया. गौरव गोगोई जैसे कांग्रेस लीडर बीजेपी का मुकाबला करने में फेल रहे. माइनॉरिटी समुदाय को कांग्रेस से उम्मीद एकदम थी, लेकिन सब बेकार गया. ख़बरें फटाफट बदरुद्दीन अजमल ने कांग्रेस पर निशाना साधा. (फाइल फोटो) गुवाहाटी. ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने गुरुवार को कांग्रेस पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ‘एक और मुस्लिम लीग’ बन गई है और असम में एक प्रभावी विपक्ष की भूमिका निभाने में पूरी तरह विफल रही है. बिनाकंडी विधानसभा क्षेत्र से अपनी जीत के बाद पत्रकारों से बात करते हुए अजमल ने दावा किया कि कांग्रेस ने अल्पसंख्यक समुदायों को छोड़ दिया है और अप्रत्यक्ष रूप से राज्य में भाजपा को राजनीतिक रूप से मदद की है. अजमल ने कहा कि कांग्रेस अब एक वास्तविक विपक्षी ताकत के रूप में काम नहीं कर सकती. यह एक और मुस्लिम लीग की तरह हो गई है और लोगों के वास्तविक मुद्दों को उठाने में विफल रही है. उन्होंने जोर देकर कहा कि अब एआईयूडीएफ असम विधानसभा में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार को चुनौती देने की जिम्मेदारी संभालेगी. एआईयूडीएफ नेता ने कहा कि भले ही पार्टी को मुट्ठी भर सीटें ही मिली हों, लेकिन उसके विधायक अल्पसंख्यकों, बेदखली अभियानों, नजरबंदी केंद्रों और डी-वोटर प्रणाली से जुड़े मुद्दों को उठाते रहेंगे. उन्होंने कहा कि विधानसभा में एक एआईयूडीएफ विधायक भी सौ आवाजों के बराबर होगा. अजमल ने आरोप लगाया कि असम में मुसलमानों को पिछले कई वर्षों से भय, असुरक्षा और अपमान का सामना करना पड़ा है, लेकिन कांग्रेस मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली सरकार का कड़ा विरोध करने के बजाय चुप रही. मिया समुदाय के इर्द-गिर्द चल रही राजनीतिक बयानबाजी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक मतदाताओं को कांग्रेस से मजबूत रुख की उम्मीद थी, लेकिन पार्टी की निष्क्रियता से वे निराश हुए. अजमल के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व विपक्ष में पैदा हुए राजनीतिक शून्य को भरने में विफल रहा, जिसके कारण एआईयूडीएफ सत्ताधारी दल के खिलाफ प्रमुख आवाज बनकर उभरा. उन्होंने गौरव गोगोई और लुरिनज्योति गोगोई समेत वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं की भी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि वे भाजपा का राजनीतिक रूप से मुकाबला करने में विफल रहे हैं. एआईयूडीएफ अध्यक्ष ने आगे दावा किया कि चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस और भाजपा दोनों ने मिलकर उनकी पार्टी को राजनीतिक रूप से कमजोर करने के लिए समन्वय किया. पार्टी के आंतरिक मामलों पर अजमल ने एआईयूडीएफ से नेताओं के अलग होने की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को संगठनात्मक मतभेदों और अनुशासनहीनता के मुद्दों के कारण हटाया गया है. About the Author Rakesh Ranjan Kumar राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Guwahati,Kamrup Metropolitan,Assam Source link

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‘चंद्रनाथ रथ की हत्या एक राजनीतिक आतंकवाद है’, पश्चिम बंगाल में नई...

कोलकाता. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का नतीजा सत्ता परिवर्तन के रूप में सामने आने के महज 48 घंटे बाद वरिष्ठ भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी (पीए) चंद्रनाथ रथ की हत्या ने राज्य को ऐसी स्थिति में धकेल दिया है जहां चुनाव बाद की हिंसा के लोकतांत्रिक परिवर्तन पर भारी पड़ने का खतरा पैदा हो गया है. भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद छिटपुट झड़पों के रूप में जो शुरू हुआ था, वह अब तेजी से एक बड़े टकराव का रूप ले चुका है, जिसमें भय, प्रतिशोध का विमर्श और राजनीतिक रूप से संवेदनशील जिलों में क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई शामिल है. बंगाल में अपनी पहली सरकार बनाने की तैयारी कर रही भाजपा के लिए यह हत्या एक चुनौती होने के साथ-साथ एक राजनीतिक अवसर भी है. चुनौती भावनात्मक रूप से आवेशित भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से जवाबी हिंसा को रोकने की है जबकि अवसर भगवा खेमे के लंबे समय से चले आ रहे इस आरोप को पुष्ट करने का है कि तृणमूल शासन के तहत धमकियां, लक्षित हमले और मजबूत स्थानीय सत्ता नेटवर्क बंगाल की राजनीति में हिंसा की संस्कृति को दर्शाते रहे हैं. घटना को ‘पूर्व नियोजित’ बताते हुए, अधिकारी ने आरोप लगाया कि उनके करीबी सहयोगी चंद्रनाथ रथ की मध्यग्राम में गोली मारकर हत्या करने से पहले कई दिन तक उनकी रेकी की गई. बुधवार देर रात अस्पताल पहुंचने के बाद अधिकारी ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा, “यह दिल दहला देने वाला है. उन्होंने उसका पीछा किया और उसे मार डाला.” उन्होंने इसके साथ ही समर्थकों से अपील की कि वे “कानून को अपने हाथ में न लें”. इस अपील से ही भाजपा नेतृत्व के भीतर व्याप्त चिंता का व्यापक स्वरूप झलकता है. हत्या के कुछ ही घंटों के भीतर, जिलों में पार्टी के संगठनात्मक नेटवर्क के माध्यम से, विशेष रूप से उत्तर 24 परगना और पूर्वी मेदिनीपुर में, जहां अधिकारी का काफी प्रभाव है, आक्रोश तेजी से फैल गया. भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने निजी तौर पर इस बात की आशंका जताई कि अगर इस स्थिति को राजनीतिक रूप से नियंत्रित नहीं किया गया तो इससे स्वतःस्फूर्त प्रतिशोध भड़क सकता है. पार्टी के एक नेता ने कहा, “यह हत्या का कोई सामान्य मामला नहीं है. यह राजनीतिक आतंकवाद है.” उन्होंने “पुरानी व्यवस्था” पर नई सरकार के सत्ता संभालने से पहले भय का माहौल पैदा करने की कोशिश का आरोप लगाया गया. रथ कोई साधारण कार्यकर्ता नहीं थे, बल्कि भाजपा की चुनाव मशीनरी में गहराई से शामिल व्यक्ति थे. वह बंगाल में पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार और तृणमूल कांग्रेस विरोधी सबसे जुझारू चेहरे सुवेंदु अधिकारी के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए थे. राजनीतिक विश्लेषक सुभोमोय मोइत्रा ने कहा, “यह बंगाल की राजनीति का सबसे संवेदनशील दौर है – एक शासन के पतन और दूसरे के सत्ता में आने के बीच का समय. इस दौरान होने वाली हर हिंसक घटना प्रतीकात्मक महत्व रखती है.” चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद से कई जिलों से पार्टी कार्यालयों पर हमले, तोड़फोड़, धमकी और झड़पों की खबरें सामने आई हैं. मध्यग्राम में हुई हत्या से जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के बीच असुरक्षा की भावना बढ़ने और उत्तर 24 परगना, नदिया, हुगली तथा पूर्वी मेदिनीपुर जैसे जिलों में ध्रुवीकरण गहराने की आशंका है, जहां हाल के वर्षों में राजनीतिक निष्ठाओं में तेजी से बदलाव आया है. वहीं, एक अन्य विश्लेषक ने कहा, “खतरा यह है कि हिंसा स्वतःस्फूर्त होती है. हर हमला प्रतिशोध के लिए एक और औचित्य प्रदान करता है.” भाजपा इस घटना को न केवल एक आपराधिक कृत्य के रूप में बल्कि इस बात के सबूत के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश कर रही है कि निवर्तमान सत्ताधारी तंत्र के कुछ वर्ग सत्ता हस्तांतरण को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं. इस हत्या से भाजपा के भीतर उन आवाजों को भी मजबूती मिल सकती है जो शपथग्रहण समारोह के तुरंत बाद राजनीतिक रूप से अस्थिर क्षेत्रों में त्वरित पुलिस फेरबदल, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और आक्रामक कार्रवाई की वकालत कर रही हैं. स्थिति पर एक राजनीतिक विश्लेषक ने टिप्पणी की, “भाजपा का संदेश स्पष्ट है; वे इसे एक ढहती हुई व्यवस्था के अंतिम प्रतिरोध के रूप में चित्रित करना चाहते हैं.” साथ ही, भाजपा नेतृत्व के सामने एक नाजुक संतुलन बनाए रखने की चुनौती है.  हालांकि, पार्टी सार्वजनिक रूप से आक्रामक रुख अपना रही है, लेकिन वह इस बात से अवगत है कि स्थानीय कैडर नेटवर्क के अनियंत्रित प्रतिशोध से नए प्रशासन के औपचारिक रूप से कार्यभार संभालने से पहले ही अस्थिरता और गहरी हो सकती है. तृणमूल कांग्रेस के लिए, यह घटना एक खतरनाक राजनीतिक जाल की तरह है. पार्टी ने हत्या की निंदा की और अदालत की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग की, साथ ही यह आरोप भी लगाया कि चुनाव के बाद हुई झड़पों में उसके कई कार्यकर्ताओं पर हमला किया गया है. हालांकि, भाजपा ने हत्या के इर्द-गिर्द खुद के पीड़ित होने का विमर्श सफलतापूर्वक मजबूत कर लिया है. यह स्थिति तृणमूल कांग्रेस के लिए विशेष रूप से समस्या पैदा करने वाली है, ऐसे समय में जब वह चुनावी हार के बाद संगठनात्मक क्षरण की धारणाओं से पहले से ही जूझ रही है. पिछले कुछ वर्षों में, अधिकारी ने खुद को बंगाल की राजनीति में भाजपा के जमीनी स्तर के प्रमुख लड़ाके के रूप में स्थापित किया है, और तृणमूल कांग्रेस के साथ लगातार टकराव के माध्यम से अपनी छवि बनाई है. अधिकारी के करीबी सहयोगी की हत्या से भाजपा का रुख और भी सख्त होने की संभावना है तथा आने वाले दिनों में पार्टी का राजनीतिक संदेश और भी तीव्र हो सकता है. Source link

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Tamil Nadu Political Drama। TN next CM। विजय समर्थन के लिए ठोकरें...

सियासत के मंच पर एक ऐसा क्लाइमेक्स तैयार हो गया है जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी. जहां थलापति विजय बहुमत के लिए जोड़-तोड़ में जुटे हैं, वहीं राजभवन से निकली एक आवाज ने पूरे तमिलनाडु में भूकंप ला दिया है. न्‍यूज18 तमिल की रिपोर्ट के अनुसार राज्यपाल का यह कहना कि वे धुर विरोधी DMK और AIADMK के साथ आने की स्थिति में उन्‍हें सरकार बनाने का मौका देने को भी तैयार हैं, किसी फिल्मी ट्विस्ट से कम नहीं है. उधर पुडुचेरी में AIADMK ने रातों-रात बाजी पलटते हुए सरकार बनाने का दावा ठोक कर सबको सन्न कर दिया है. जब सत्ता की बिसात पर दो पुराने दुश्मन हाथ मिलाने को तैयार हों, तो नए खिलाड़ी की चमक फीकी पड़ना लाजमी है. विजय के राजतिलक की तैयारियों के बीच पुराने दिग्गज तमिलनाडु की राजनीति में मिलकर खेल करते नजर आ रहे हैं. विजय के 107 विधायकों के इस्‍तीफा देने के कयास भी तमिलनाडु में इस वक्‍त लगाए जा रहे हैं. ‘AIADMK की सरकार बनेगी’खबर है कि तमिलनाडु के पूर्व सीएम और AIADMK के महासचिव एडप्पादी पलानीस्वामी ने पुडुचेरी में विधायकों की एक बैठक में बोलते हुए कहा, “इंतजार करें, अच्छी चीजें होंगी. AIADMK की सरकार बनेगी.” दक्षिण भारत की राजनीति इस वक्त एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ हर पल समीकरण बदल रहे हैं. एक तरफ थलापति विजय की पार्टी TVK सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद सत्ता की दहलीज पर संघर्ष कर रही है तो दूसरी तरफ पुडुचेरी और तमिलनाडु में गठबंधन के नए और चौंकाने वाले फॉर्मूले सामने आ रहे हैं. राज्यपाल का वेट एंड वॉच और रिसॉर्ट पॉलिटिक्सतमिलनाडु में थलापति विजय की पार्टी TVK ने 108 सीटें जीतकर धमाका तो किया है लेकिन बहुमत के जादुई आंकड़े (118) से वह अब भी दूर हैं. राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने विजय को सरकार बनाने का न्योता देने के बजाय उनसे 118 विधायकों के समर्थन का ठोस प्रमाण मांगा है. कांग्रेस के 5 विधायकों के समर्थन के बावजूद विजय का आंकड़ा 113 तक ही पहुंच पा रहा है. इसी खींचतान के बीच खरीद-फरोख्त के डर से विजय ने अपने विधायकों को महाबलीपुरम के रिसॉर्ट में शिफ्ट कर दिया है. राज्यपाल का कड़ा रुख विजय के सीएम बनने के सपने के बीच सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है. AIADMK और NDA का मास्टरस्ट्रोकपड़ोसी राज्य पुडुचेरी में सियासत ने एकदम से करवट बदली है. ताजा अपडेट के अनुसार AIADMK ने निर्दलीय और अन्य छोटे दलों के विधायकों के साथ मिलकर एक नया समीकरण तैयार कर लिया है. AIADMK अब पुडुचेरी से तमिलनाडु में NDA की सरकार बनाने का दावा पेश करने की तैयारी में है. यह थलापति विजय और अन्य क्षेत्रीय खिलाड़ियों के लिए एक बड़ा झटका है क्योंकि पुडुचेरी का यह ‘खेला’ पड़ोसी राज्यों की राजनीति को भी प्रभावित करेगा. DMK-AIADMK विलय या गठबंधन?सबसे चौंकाने वाला बयान राज्यपाल आर्लेकर की ओर से आया है. एक अंग्रेजी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अगर DMK और AIADMK मिलकर सरकार बनाना चाहें तो उन्हें उसे स्वीकार करने में कोई गुरेज नहीं है. यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि DMK और AIADMK दशकों से एक-दूसरे की धुर विरोधी रही हैं. गवर्नर ने ऐसा क्‍या कहा? तमिलनाडु के गवर्नर ने एक अंग्रेजी वेबसाइट से बातचीत करते हुए कहा, सरकार बनाने के लिए जरूरी सदस्यों की संख्या बहुत अहम है. इसके बाद आपको बहुमत साबित करना होता है. जो लोग मुझसे मिलने आते हैं और सरकार बनाने का दावा करते हैं मैं उनसे सिर्फ एक ही बात पूछता हूं. सवाल यह है कि क्या आपके पास सरकार बनाने के लिए जरूरी सदस्य हैं? जब उनसे पूछा गया कि क्या वह AIADMK और DMK को एक साथ आने और सरकार बनाने का दावा करने की इजाजत देंगे, तो उन्होंने कहा, जब ऐसा होगा तो मैं देखूंगा कि क्या उनके पास जरूरी संख्या है और फिर फैसला लूंगा. मैं शपथ लेने के लिए तैयार हूँ लेकिन अभी हालात ऐसे नहीं हैं. अगर मैं आज जरूरी संख्या जुटा लेता हूं तो कल शपथ ले लूंगा मैंने TVK नेता विजय को नहीं रोका था. उधर, DMK विधायकों की बैठक में एक बड़ा प्रस्ताव पास हुआ है: · विधायकों ने गठबंधन तोड़ने के लिए कांग्रेस की कड़ी निंदा की है. · DMK का साफ कहना है कि तमिलनाडु दोबारा चुनाव के लिए तैयार नहीं है. · एम.के. स्टालिन को राजनीतिक स्थिति का विश्लेषण कर तत्काल निर्णय लेने का अधिकार दिया गया है. · पार्टी का मुख्य उद्देश्य राज्य में एक स्थिर सरकार बनाना है. क्या वाकई होगा असंभव गठबंधन?अगर स्टालिन की DMK और AIADMK हाथ मिलाते हैं तो यह भारतीय राजनीति का सबसे बड़ा यू-टर्न होगा. लेकिन DMK का यह कहना कि वे चुनाव नहीं चाहते इस बात की ओर इशारा करता है कि वे सत्ता बचाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं. यदि विजय को रोकने के लिए ये दो दिग्गज दल साथ आते हैं तो विजय की नई राजनीति का सफर शुरू होने से पहले ही मुश्किलों में घिर जाएगा. सवाल-जवाब राज्यपाल ने DMK-AIADMK गठबंधन पर क्या कहा है? राज्यपाल ने कहा है कि यदि राज्य के हित में DMK और AIADMK साथ आकर सरकार बनाना चाहते हैं, तो वे इसे स्वीकार करने के लिए तैयार हैं. DMK ने दोबारा चुनाव पर क्या रुख अपनाया है? DMK विधायकों ने प्रस्ताव पास किया है कि तमिलनाडु अभी दोबारा चुनाव के बोझ को सहने के लिए तैयार नहीं है और प्राथमिकता एक स्थिर सरकार की है. कांग्रेस और DMK के बीच क्या विवाद हुआ है? DMK विधायकों ने गठबंधन तोड़ने के लिए कांग्रेस की निंदा की है और स्टालिन को कड़े फैसले लेने के लिए अधिकृत किया है. विजय के लिए बहुमत का रास्ता क्यों कठिन है? विजय की पार्टी के पास 108 सीटें हैं और कांग्रेस के समर्थन के बाद भी वे 113 पर हैं, जो कि 118 के बहुमत के आंकड़े से 5 कम है. राज्यपाल बिना पूर्ण बहुमत के उन्हें शपथ दिलाने को तैयार नहीं हैं. Source link

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Aaj Ka Dhanu Rashifal: धनु वालों खुलेंगे सफलता के द्वार, करियर में...

Last Updated:May 08, 2026, 00:03 IST Aaj ka Dhanu Rashifal 08 may 2026: धनु राशि वालों के लिए आज का दिन करियर और कारोबार में अच्छा रहेगा. पर फिजूलखर्ची से बचें वरना बजट बिगड़ सकता है. परिवार में तनाव संभव है. लव लाइफ अच्छी रहेगी. जल्दीबाजी में कोई भी फैसला ना लें, नहीं तो इसका दुरगामी परिणाम आपके हित में नहीं रहेगा. सेहत का ध्यान रखें और मां लक्ष्मी की पूजा करें. जमुई: धनु राशि के जातकों का 08 मई 2026 का दिन काफी अच्छा गुजरेगा. खासकर जो लोग नौकरी की तलाश कर रहे हैं, बेरोजगार हैं या किसी तरह के सरकारी सेवा की तैयारी कर रहे हैं, तो उनका दिन आज काफी अच्छा गुजरेगा. आज आपको कोई अच्छी खबर मिल सकती है. आप को कोई रोजगार के अवसर मिल सकते हैं. उन्हें पहचान कर उन्हें अपनाना होगा. ज्योतिषाचार्य पंडित शत्रुघ्न झा बताते हैं कि धनु राशि के जातकों को आज अपने करियर को लेकर काफी सावधान रहने की जरूरत है. अगर आप नौकरी बदलने की सोच रहे हैं या आप अपने काम को छोड़ने की सोच रहे हैं, तो जल्दीबाजी में कोई भी फैसला ना लें, नहीं तो इसका दुरगामी परिणाम आपके हित में नहीं रहेगा. परिवार में किसी बात को लेकर हो सकता है तनावज्योतिषाचार्य बताते हैं कि धनु राशि के जातकों के परिवार में आज किसी बात को लेकर तनाव हो सकता है. आज परिवार में एक दूसरे के साथ किसी बात को लेकर कहा-सुनी हो सकती है जिससे आपका मन खिन्न होगा. उन्होंने बताया कि आज आपको अपनी संपत्ति को बढ़ाने और उसे बचाने की दिशा में ध्यान देना चाहिए. आज आप किसी भी तरह की फिजूल खर्ची से बचे. आप अपने किसी भी काम को बजट बनाकर करें, तब आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी. कारोबार करने वाले लोगों के लिए आज का दिन अच्छा गुजरेगा. आज आपको आमदनी के नए अवसर मिलेंगे. प्यार में भी अच्छा जाएगा दिन ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि धनु राशि के जातकों की लव लाइफ अच्छी रहने वाली है. आज आप अपने परिवार के लिए किसी तरह का सरप्राइज प्लान कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि आज आप अपने पार्टनर के साथ घूमने-फिरने जा सकते हैं. उन्होंने बताया कि आज आपको अपने सेहत को लेकर काफी सावधान रहने की जरूरत है. बदलते मौसम में आपको मौसमी बीमारियां हो सकती हैं. अपने खान-पान पर आज आपको ध्यान देना चाहिए. ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि धनु राशि के जातकों को आज के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए और उन्हें खीर का भोग लगाना चाहिए, ऐसा करना आपके लिए अच्छा रहेगा. आज के दिन के लिए आपका शुभ अंक 6 रहने वाला है. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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6 LPG सिलेंडर फ्री! सुनते ही झूम पड़ी जनता, पर ‘विजय’ से...

होमताजा खबरदेश 6 LPG सिलेंडर फ्री! सुनते ही झूम पड़ी जनता, पर ‘विजय’ से घबरा गए थलापति, क्‍यो Last Updated:May 07, 2026, 23:21 IST टीवीके प्रमुख थलापति विजय ने तमिलनाडु चुनाव से पहले हर परिवार को साल में 6 मुफ्त LPG सिलेंडर देने का बड़ा वादा किया था. अन्नपूर्णी सुपर 6 योजना ने गृहिणियों और मध्यम वर्ग के बीच तेजी से चर्चा बटोरी है. लेकिन राज्य की खराब आर्थिक स्थिति और बढ़ते कर्ज को देखते हुए इस योजना की व्यवहारिकता पर सवाल उठ रहे हैं. थलापति के लिए विजय बनी चुनौती! Free LPG Cylinder: तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों एक वादा सबसे ज्यादा चर्चा में है. हर परिवार को साल में 6 मुफ्त LPG सिलेंडर दिए जाएंगे. अभिनेता से नेता बने विजय थलापति की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) ने ‘अन्नपूर्णी सुपर 6’ योजना का ऐलान कर ऐसा सियासी दांव चला है, जिसने गृहिणियों से लेकर मध्यम वर्ग तक को अपना दीवाना बना दिया. महंगाई से परेशान लोगों को यह वादा मरहम की तरह लगा. लेकिन, दूसरी तरफ आर्थिक जानकार इस योजना को लेकर बड़े सवाल उठा रहे हैं. इन्‍हीं दावों ने चुनावी विजय के बाद थलापति की घबराहट बढ़ा दी है. दरअसल, अंतरराष्ट्रीय हालात ने गैस बाजार को पहले ही अस्थिर कर रखा है. ईरान-अमेरिका तनाव और ग्‍लोबल सप्लाई में दबाव के चलते एलपीजी की कीमतों में लगातार असर देखा जा रहा है. आलम यह है कि कमर्शियल सिलेंडर के दाम 3,239 रुपये तक पहुंच चुके हैं. इसका असर सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं है, बल्कि होटल, रेस्तरां और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी पड़ रहा है. ऐसे माहौल में मुफ्त सिलेंडर का वादा आम लोगों को काफी लुभावना लग रहा है. वहीं, टीवीके का दावा है कि अगर उनकी सरकार बनी तो हर परिवार को साल में 6 सिलेंडर मुफ्त दिए जाएंगे. जनता के भरोसे पर विजय के लिए कहां से पैसा लाएंगे थलापतिलेकिन सवाल यह है कि इसके लिए पैसा कहां से आएगा? अनुमान के मुताबिक इस योजना पर सरकार को हर साल करीब 12,408 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं. यही आंकड़ा अब विजय के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है. तमिलनाडु की आर्थिक हालत पहले से दबाव में बताई जा रही है. रिपोर्ट्स के अनुसार 2026-27 तक राज्य पर कुल कर्ज करीब 11 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. ऐसे में इतनी बड़ी सब्सिडी योजना लागू करना आसान नहीं माना जा रहा है. आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सरकार मुफ्त सिलेंडर जैसी बड़ी योजना लागू करती है, तो उसे या तो दूसरी योजनाओं में कटौती करनी होगी. केंद्र की मेहरबानी दिला सकती है दावों पर विजयहालांकि तेल कंपनियों के कुछ अधिकारी मानते हैं कि योजना पूरी तरह असंभव नहीं है. उनका कहना है कि अगर एक सिलेंडर की औसत कीमत 1,000 रुपये मानी जाए, तो एक परिवार पर सालाना लगभग 6,000 रुपये का खर्च आएगा. सरकार चाहे तो केंद्र की उज्ज्वला योजना की तरह सीधे लोगों के बैंक खातों में सब्सिडी ट्रांसफर कर सकती है. इससे भ्रष्टाचार और गड़बड़ी की संभावना भी कम होगी. इधर हाल के महीनों में गैस सिलेंडर की सप्लाई को लेकर भी चिंता सामने आई थी. मार्च में अफवाहों और डर के कारण लोगों ने सामान्य से ज्यादा सिलेंडर बुक कर लिए थे, जिससे कई जगह कमी की स्थिति बन गई. हालांकि अब तेल कंपनियों का कहना है कि हालात सामान्य हो रहे हैं और दो दिनों के भीतर सिलेंडर डिलीवरी दी जा रही है. सियासी तौर पर बेहद असरदार रही विजय की योजनाराजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अन्नपूर्णी सुपर 6 योजना चुनावी नजरिए से बेहद असरदार साबित रही है. इस वादे ने खासतौर पर गृहिणियों और मध्यम वर्ग के बीच मजबूत पकड़ बनाने में मदद की है. लेकिन असली चुनौती विजय मिलने के बाद इस योजना को लागू करने की है. बढ़ती महंगाई, भारी कर्ज और आर्थिक दबाव के बीच विजय थलापति इस वादे को जमीन पर कैसे उतारेंगे, यही सवाल अब तमिलनाडु की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है. About the Author Anoop Kumar MishraAssistant Editor Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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Kerala CM | केरल: सतीशन बोले- सीएम पद से कम कुछ भी...

तिरुवनंतपुरम: केरल चुनाव नतीजों के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा. केरल में कांग्रेस की शानदार जीत ने हाईकमान के सामने एक मीठी लेकिन जटिल चुनौती खड़ी कर दी है. एक तरफ ज्यादातर विधायक केसी वेणुगोपाल के पक्ष में नजर आ रहे हैं, तो दूसरी तरफ वीडी सतीशन और रमेश चेन्निथला की दावेदारी ने मामले को त्रिकोणीय बना दिया है. दिल्ली से भेजे गए ऑब्जर्वर्स अजय माकन और मुकुल वासनिक ने तिरुवनंतपुरम में नवनिर्वाचित विधायकों से वन-टू-वन बात की है. इस मीटिंग के बाद जो संकेत मिल रहे हैं, उससे साफ है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी का फैसला करना मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के लिए आसान नहीं होगा. क्या केसी वेणुगोपाल बनेंगे केरल के नए मुख्यमंत्री? सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस के 63 में से ज्यादातर विधायक संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री के तौर पर देखना चाहते हैं. वेणुगोपाल को राहुल गांधी का बेहद करीबी माना जाता है और दिल्ली में उनकी पकड़ काफी मजबूत है. विधायकों का मानना है कि वेणुगोपाल के पास संगठन को साथ लेकर चलने का लंबा अनुभव है. हालांकि उनकी राह में सबसे बड़ा रोड़ा यह है कि वे फिलहाल विधायक नहीं हैं बल्कि सांसद हैं. पार्टी ने चुनाव से पहले यह स्पष्ट किया था कि सांसदों को विधानसभा चुनाव में नहीं उतारा जाएगा. अगर वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाया जाता है, तो पार्टी को उनके लिए सुरक्षित सीट ढूंढनी होगी और उपचुनाव कराना होगा. 2004 में के मुरलीधरन के साथ हुआ हादसा पार्टी भूली नहीं है, जब मंत्री बनने के बाद वे उपचुनाव हार गए थे. केरल की कुर्सी का सस्पेंस: क्या केसी वेणुगोपाल की होगी ताजपोशी या सतीशन मारेंगे बाजी? (Photo : ANI) वीडी सतीशन की दावेदारी कितनी मजबूत है? वीडी सतीशन पिछले पांच सालों से केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता की भूमिका निभा रहे थे. पिनाराई विजयन सरकार के खिलाफ मोर्चा संभालने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी थी. सतीशन को गठबंधन के दूसरे सबसे बड़े दल आईयूएमएल (IUML) का भी साथ मिल रहा है. सतीशन ने सांप्रदायिकता और धार्मिक संगठनों के राजनीति में दखल के खिलाफ कड़ा स्टैंड लिया है, जिससे उनकी छवि एक सुलझे हुए नेता की बनी है. सतीशन ने हाईकमान को साफ कर दिया है कि वे मुख्यमंत्री पद के अलावा किसी और जिम्मेदारी में दिलचस्पी नहीं रखते. इसे एक तरह के दबाव की राजनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है. जनता के बीच भी सतीशन का चेहरा कांग्रेस के मुख्य अभियान का हिस्सा रहा है. क्या रमेश चेन्निथला की सीनियरिटी को मिलेगी अहमियत? रमेश चेन्निथला कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं. उनके पास प्रशासनिक अनुभव भी ज्यादा है और नायर सर्विस सोसाइटी (NSS) जैसे प्रभावशाली संगठनों के साथ उनके अच्छे संबंध हैं. चेन्निथला ने हाल ही में याद दिलाया कि 2011 में उन्होंने ओमन चांडी के लिए मुख्यमंत्री पद का दावा छोड़ दिया था क्योंकि चांडी सीनियर थे. अब वे चाहते हैं कि उसी सीनियरिटी को आधार मानकर उन्हें मौका दिया जाए. 2021 में बहुमत के बावजूद उन्हें विपक्ष का नेता नहीं बनाया गया था, जिसकी कसक उनके मन में अब भी है. चेन्निथला के लिए किसी जूनियर नेता जैसे सतीशन या वेणुगोपाल की कैबिनेट में काम करना सम्मान की लड़ाई बन सकता है. क्या हाईकमान विधायकों की राय को दरकिनार करेगा? कांग्रेस में यह अक्सर देखा गया है कि हाईकमान विधायकों की राय जानने के बाद अपना फैसला खुद लेता है. 2021 में भी ज्यादातर विधायक चेन्निथला के साथ थे, लेकिन नेतृत्व ने सतीशन को चुना था. इस बार भी पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को यह तय करना है कि वे विधायकों की पसंद को चुनेंगे या फिर प्रशासनिक अनुभव और गठबंधन के तालमेल को प्राथमिकता देंगे. राहुल गांधी के लिए भी यह फैसला मुश्किल है क्योंकि वेणुगोपाल उनके संकटमोचक रहे हैं. उन्हें दिल्ली से हटाकर केरल भेजना राष्ट्रीय स्तर पर संगठन के लिए एक बड़ा बदलाव होगा. कांग्रेस के सामने चुनौती यह है कि वे जिसे भी चुनें, बाकी दो बड़े नेता नाराज न हों. Source link

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