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पेपर लीक: प्रियंका गांधी ने लोकसभा में क्‍या कहा? बुरी तरह बिफरे...

होमताजा खबरदेश पेपर लीक: प्रियंका गांधी के किस बयान पर LS में बवाल? बुरी तरह बिफर गए रिजिजू Last Updated:July 28, 2026, 17:42 IST लोकसभा में एंटी-पेपर लीक बिल पर बहस के दौरान उस वक्त भारी हंगामा हो गया जब कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि अपने ऐसा शिक्षा मंत्री बनाया जिसने रेप के पीड़ित के आरोपियों की रिहाई पर स्वागत किया. प्रियंका के बयान पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया जिससे लाइव प्रसारण में उनका माइक बंद करना पड़ा. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस टिप्पणी को असंसदीय बताते हुए प्रियंका से माफी की मांग की. प्रियंका गांधी ने तीखा हमला बोला. नई दिल्ली. संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में उस समय ज़बरदस्त हंगामा खड़ा हो गया जब कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी का नाम लिए बिना उनपर निशाना साधा. उन्‍होंने कहा कि अपने ऐसा शिक्षा मंत्री बनाया जिसने रेप के पीड़ित के आरोपियों की रिहाई पर स्वागत किया. मामला नीट पेपर लीक के बाद लाए जा रहे नए कठोर कानून पर संसद में चर्चा का था. प्रियंका गांधी के इस बयान के तुरंत बाद सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया, जिसके चलते लाइव टेलीकास्ट के दौरान प्रियंका का माइक भी बीच-बीच में कई बार बंद कर दिया गया. मामले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस बयान को असंसदीय करार दिया और प्रियंका गांधी से सदन से माफी मांगने की मांग की. सरकार ने इस टिप्पणी को संसद की आधिकारिक कार्यवाही से हटाने की भी मांग की है. प्रियंका का पेपर लीक, लाठीचार्ज और शिक्षा बजट पर हमला • आरएमएल अस्पताल का वाकया: प्रियंका गांधी ने कहा कि जब वे प्रदर्शन में घायल छात्रा से मिलने गईं, तो पीड़ित छात्रा की मां ने सवाल किया कि बेटी का यह हाल करने वाले भी मिलने आए हैं? प्रियंका ने कहा कि इस बात से वे बेहद शर्मिंदा हुईं.• बर्बरता और पलेट गन पर सवाल: उन्होंने पीएम और गृह मंत्री से पूछा कि गांधीवादी रास्ते पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और पलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया?• शिक्षा बजट और माफिया: उन्होंने कहा कि माता-पिता जमीन और गहने बेचकर बच्चों को पढ़ाते हैं, लेकिन योग्यता के बजाय पैसा हावी है. छात्र केवल पेपर लीक रोकने और माफिया पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि बजट में शिक्षा की हिस्सेदारी लगातार घट रही है. प्रहलाद जोशी पर बयान और सदन में जोरदार हंगामा • विवादित बयान: प्रियंका गांधी ने पूर्व शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और स्वागत का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि ऐसे नेता को मंत्री बनाया गया, जिसने बलात्कार के आरोपियों (बिल्किस बानो मामले) की रिहाई का स्वागत किया था.• किरेन रिजिजू और प्रहलाद जोशी की आपत्ति: संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और प्रहलाद जोशी ने इस टिप्पणी पर कड़ा विरोध जताया. उन्होंने इसे चरित्र हनन करार देते हुए प्रियंका गांधी से बिना शर्त माफी मांगने और शब्दों को संसद के रिकॉर्ड से हटाने (एक्सपंज करने) की मांग की.• स्पीकर की हिदायत और प्रियंका का जवाब: स्पीकर ने कहा कि बिना तथ्यों के एक-एक शब्द न बोला जाए. इस पर प्रियंका गांधी ने एक अखबार की रिपोर्ट दिखाते हुए उसे ऑथेंटिकेट करने की बात कही और पूछा कि क्या जोशी जी अपने दिए बयान से इनकार कर रहे हैं? शिक्षा व्यवस्था, कमेटी और आरएसएस पर तीखे प्रहार • कमेटी पर सवाल: प्रियंका ने कहा कि बिल में पेपर लीक रोकने के कोई ठोस उपाय नहीं हैं. राधाकृष्णन कमेटी की सिफारिशें लागू नहीं हुईं और नई कमिटियों में ऐसे लोग शामिल हैं जिन्हें शिक्षा का सही ज्ञान नहीं है.• आरएसएस और नियुक्तियां: उन्होंने मांग की कि शिक्षण संस्थानों और सिस्टम को आरएसएस के लोगों से भरने के बजाय योग्य युवाओं को मौका दिया जाए. देश का नौजवान न्याय मांग रहा है, भीख नहीं.• ‘सपनों की चोरी’: प्रियंका ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि चुनाव में वोट और मंदिर में चंदे से भी बड़ी चोरी देश के नौजवानों के सपनों की चोरी है. उन्होंने पीएम से इसकी जिम्मेदारी लेने और ‘जेन-जी’ (Gen-Z) युवाओं का भरोसा वापस जीतने का आग्रह किया. सदन के हल्के-फुल्के पल • भाषण के दौरान प्रियंका गांधी ने स्पीकर से मुस्कुराने का आग्रह करते हुए कहा, “हम कांग्रेस के लोग जान दे देंगे लेकिन भारत की हार नहीं होने देंगे, सर अब तो मुस्कुरा लीजिए.”• इस पर किरेन रिजिजू ने चुटकी लेते हुए कहा कि इन्होंने राहुल गांधी के भाषण की लाइनें चोरी कर ली हैं. About the Author Sandeep GuptaChief Sub Editor पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर होम पेज पर जिम्‍मेदारी संभाल रहे हैं. जटिल और सामरिक विषयों को बेहद सरल भाषा में पाठकों त… और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi Source link

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Lok Sabha LIVE Today | Parliament Paper Leak Bill | Sansad TV...

होमताजा खबरदेश संसद में अभिषेक बनर्जी के बयान पर हंगामा, स्पीकर पर तमतमा गईं महुआ मोइत्रा Last Updated:July 28, 2026, 16:42 IST Parliament Monsoon Session: संसद के मानसून सत्र में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा हो रही है. लोकसभा में इस बिल पर 10 घंटे तक बहस होगी. विपक्ष सदन में सरकार पर हालिया आंदोलन को आधार बनाते हुए तीखे हमले कर रहा है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार के ईगो पर तंज कसा है. वहीं कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने एनटीए के स्टाफ और नीट आरोपियों की बेल पर गंभीर सवाल उठाए हैं. सत्ताधारी बीजेपी ने इसे परिवर्तनकारी बिल बताया है. देखें, लोकसभा में बहस के लाइव अपडेट्स. तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद अभिषेक बनर्जी और महुआ मोइत्रा. (फोटो : संसद TV) नई दिल्ली: मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर जोरदार हंगामा हो रहा है. मंगलवार को दोपहर दो बजे के बाद कार्यवाही फिर से शुरू हुई. सदन में पब्लिक एग्जामिनेशन अमेंडमेंट बिल 2026 पर चर्चा चल रही है. विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. इस बिल पर चर्चा के लिए पहले छह घंटे का टाइम तय था. लेकिन विपक्ष की डिमांड पर इसे बढ़ाकर 10 घंटे कर दिया गया है. स्पीकर ओम बिरला ने भी सभी सदस्यों को अपने विचार रखने की अनुमति दी है. Lok Sabha | Parliament Monsoon Session | संसद | लोकसभा की कार्यवाही एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि इस विधेयक की तारीफ करने लायक सिर्फ एक बात है कि यह अंग्रेजी में लिखा गया है. मारन ने कहा कि “वन इंडिया, वन एग्जाम” जैसी व्यवस्था देश के लिए सही नहीं है, क्योंकि भारत विविधताओं वाला देश है. उन्होंने वित्त मंत्री पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पेपर लीक को छात्रों को तैयारी के लिए अतिरिक्त समय मिलने का बहाना बताना बेहद निंदनीय है. उन्होंने सरकार की परीक्षा व्यवस्था और शिक्षा नीति पर गंभीर सवाल उठाए. अभिषेक बनर्जी बोले – पेपर लीक पर फेल है सरकार, छात्रों को मिला आंसू गैस का जवाब लोकसभा में पेपर लीक विरोधी बिल में संशोधन पर बहस के दौरान अभिषेक बनर्जी के बोलने के लिए खड़े होने पर हंगामा हुआ. TMC सांसद ने कहा कि पार्टी बिल का समर्थन करती है, लेकिन NEET मुद्दे पर सरकार को ज़िम्मेदार ठहराने से पीछे नहीं हटेगी. उस समय हलचल बढ़ गई जब स्पीकर ने महुआ मोइत्रा से अपनी सीट पर बैठने को कहा, लेकिन उन्होंने बैठने से इनकार कर दिया. इस दौरान तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी ने शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि छात्रों की बात सुनने के बजाय उन पर पेलेट गन चलाई गई और आंसू गैस के गोले छोड़े गए. उन्होंने सवाल किया कि आखिर देश के युवाओं को कानून व्यवस्था की समस्या की तरह क्यों देखा जा रहा है. अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि पिछले दो वर्षों में पेपर लीक के मामलों में एक भी दोषी को सजा नहीं मिली. उन्होंने कहा कि लगातार पेपर लीक होना सरकार की नाकामी का सबसे बड़ा सबूत है. अखिलेश यादव का तंज- जो चढ़ावा चोर को नहीं रोक पाए, वो पेपर लीक कैसे रोकेंगे लोकसभा में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि “जो चढ़ावा चोर को नहीं रोक पाए, वो पेपर लीक कैसे रोकेंगे?” अखिलेश ने दावा किया कि भविष्य में भी NEET का पेपर लीक होगा, क्योंकि सरकार इसे रोकने में पूरी तरह नाकाम रही है. उन्होंने कहा कि 10वीं और 12वीं के पेपर भी लीक हुए, लेकिन सरकार के पास इसका कोई जवाब नहीं है. अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सरकार ने प्राथमिक स्कूलों को निशाना बनाकर बंद किया, जिससे गरीब और जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई. उन्होंने यह भी कहा कि RSS ने देश के शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों को बर्बाद कर दिया है. इसके साथ ही उन्होंने देश में नफरत की राजनीति होने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार किसी को न्याय दिलाने में सफल नहीं हुई है. सपा चीफ अखिलेश यादव ने लोकसभा में सरकार पर तीखा हमला बोला. अखिलेश यादव ने कहा, ‘सरकार के खिलाफ नारा लगा. सरकार को ईगो था कि सरकार झुकती नहीं. लेकिन नौजवानों ने नारा दिया कि झुकाने वाला चाहिये.’ उन्होंने यह बात स्टूडेंट्स के गुस्से और पेपर लीक के मुद्दे पर कही. अखिलेश ने कहा कि मंत्री जी लौटे तो सदन के बाहर उनका स्वागत हुआ. यह दिखाता है कि यूथ में कितना गुस्सा है. Delhi: Samajwadi Party chief and MP Akhilesh Yadav says, “I hope that all the demands that the youth and youngsters made, the government will accept all those demands. The government must have also accepted that any party, if it starts as a joke, can become a big party. Whatever… pic.twitter.com/DdOLsiCUtZ Source link

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CJP Food Volunteer | Junaid Malik Latest News | Supreme Court Update...

होमताजा खबरदेश CJP प्रोटेस्‍ट में खाना ख‍िलाने वाला जुनैद दौड़ा-दौड़ा पहुंचा सुप्रीम कोर्ट Last Updated:July 28, 2026, 15:53 IST Supreme Court News: CJP छात्र आंदोलन के दौरान जंतर-मंतर पर खाना पहुंचाने वाले जुनैद मलिक ने पुलिस पर उत्पीड़न का आरोप लगया है. जुनैद ने अपनी याच‍िका में कहा है क‍ि उसे अवैध हिरासत में रखा गया है. सुप्रीम कोर्ट में याच‍िका दाख‍िल कर उसने पुलिस कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है. सीजेपी प्रोटेस्‍ट में खाना पहुंचाने वाले जुनैद मलिक ने सुप्रीम कोर्ट में दाख‍िल की याच‍िका नई दिल्ली: दिल्ली में CJP छात्र आंदोलन के दौरान फूड वॉलंटियर रहे जुनैद मलिक ने पुलिस पर उत्पीड़न और अवैध हिरासत का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.जुनैद ने याचिका में दावा किया है कि पुलिस उन्हें दिल्ली से उठाकर ले गई. कई घंटे तक हिरासत में रखा और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ भी कथित तौर पर दबाव बनाने की कोशिश की. याचिका के मुताबिक, जुनैद मलिक का कहना है कि उन्हें दिल्ली से पुलिस अधिकारी अपने साथ ले गई. आरोप है कि उन्हें करीब 5 से 6 घंटे तक एक वाहन में बैठाकर रखा गया और इस दौरान उन्हें धमकाया गया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया. इसके बाद उन्हें देहरादून रोड पर एक दूरस्थ स्थान पर छोड़ दिया गया. जुनैद ने क्‍या आरोप लगाया?जुनैद ने अपनी याचिका में यह भी आरोप लगाया है कि गाजियाबाद पुलिस ने उनके पिता को हिरासत में लिया और उनके घर पर छापेमारी की. इसके अलावा पुलिस कथित तौर पर मेरठ स्थित उनकी विवाहित बहन के घर भी पहुंची, जहां उनके बहनोई के पिता और भाई को भी अपने साथ ले गई. याचिका में दावा किया गया है कि पुलिस ने यह सभी कार्रवाई बिना किसी लिखित नोटिस, दस्तावेज या कानूनी प्रक्रिया का पालन किए की. जुनैद का आरोप है कि उनके परिवार को डराने और उन पर दबाव बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाए गए. सुप्रीम कोर्ट से की क्‍या मांगसुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में जुनैद मलिक ने अदालत से अनुरोध किया है कि उनके और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ पुलिस की किसी भी जबरन या दमनात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने का निर्देश दिया जाए. फिलहाल इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से याचिका पर सुनवाई की तारीख तय होना बाकी है. About the Author अरुण बिंजोला अरुण बिंजोला वर्तमान में News18 हिंदी में एसोसिएट एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में वह करीब 19 वर्षों से काम कर रहे हैं, जिसमें 13 वर्षों से अधिक समय डिजिटल मीडिया में बी… और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi Source link

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Parliament Monsoon Session Live: पेपर लीक पर व‍िपक्ष का बवाल, स्‍पीकर ब‍िरला...

Parliament Monsoon session Live: आज संसद के मॉनसून सत्र का सातवां दिन है. कई दिनों से नीट पेपर लीक मुद्दे पर चल रहे घमासान के बाद आज लोकसभा में ब‍िल के संशोध‍ित प्रावधानों पर चर्चा हो रही है. जबक‍ि राज्‍यसभा कल सुब‍ह 11 बजे तक के ल‍िए स्‍थग‍ित हो गई है. आज संसद के दोनों सदनों में एंटी-पेपर लीक कानून में संशोधन और MSME क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा और कार्यवाही हो रही है. पिछले 6 दिनों से जारी गतिरोध के बाद आज सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चर्चा के लिए सहमति बन पाई है. हालांकि सुबह 11 बजे शुरू हो रहे संसद सत्र से पहले आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्‍यक्षता में एनडीए की मंगल मिलन बैठक आयोजित की गई. जिसमें तृणमूल कांग्रेस को छोड़कर आए 20 सांसदों को शामिल होने का न्यौता दिया गया. नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया के झंडे तले इकठ्ठे हुए ये सभी सांसद बीजपी में शामिल हो सकते हैं. सुदीप बंद्योपाध्याय और काकोली घोष दस्तीदार सहित सभी बागी सांसदों ने NCPI (नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया) में खुद के विलय को मान्यता देने की मांग की है.मॉनसून सत्र शुरू होने से पहले एनडीए संसदीय दल की बैठक में पहली बार एनसीपीसीआई के सांसदों ने मंगल मिलन के तहत हिस्सा लिया है. आइए जानते हैं आज संसद के मॉनसून सत्र की पल-पल की लाइव अपडेट्स…. कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई बोले- NTA चेयरमैन को बचा रही सरकार लोकसभा में पेपर लीक ब‍िल पर जोरदार बहस हो रही है. इस दौरान कांग्रेस के सांसद गौरव गोगोई ने सरकार पर एनटीए के चेयरमैन को बचाने का आरोप लगाया. गोगोई ने कहा, ‘सरकार ने एनटीए के डीजी को बदल द‍िया लेक‍िन चेयरमैन को क्‍यों नहीं हटाया. सरकार चेयरमैन को बचा रही है. यह पुराने ब‍िल को ही संशोध‍ित करके ले आए हैं. ये कानून सरकार की व‍िफलता का स्‍मारक है. सरकार श‍िक्षा को लेकर गंभीर नहीं है. पेपर लीक की वजह से छात्रों ने आत्‍महत्‍या की. छात्र जंतर-मंतर पर जुटे, तब जाकर आज श‍िक्षा पर बात हो रही है.’ Anti Paper Leak bill: नए कानून में तेजी से मिलेगा न्याय, बोले मंत्री   जितेंद्र सिंह ने कहा, 2014 से पहले पेपर लीक के कई मामले हुए, लेकिन उनसे निपटने के लिए कोई व्यापक कानून नहीं था. प्रधानमंत्री मोदी और सरकार ने एक अधूरा काम पूरा किया है. ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024’ लाया गया है. इसके तहत जो संशोधन किए जा रहे हैं, उनका उद्देश्य “तेजी से न्याय” सुनिश्चित करना है.इस तरह के मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतें बनाई जाएंगी. इस तरह के पेपर लीक के मामले पहले पंजाब और कर्नाटक जैसे राज्यों में भी सामने आ चुके हैं. पेपर लीक जैसे अपराधों में जेल की अधिकतम सजा बढ़ाकर 10 साल कर दी गई है. प्रधानमंत्री ने परीक्षाओं को पूरी तरह पेपर लीक से सुरक्षित (लीक-प्रूफ) बनाने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की है.   पेपर लीक ब‍िल पर चर्चा शुरू, केसी वेणुगोपाल बोले, न पीएम न गृहमंत्री लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा शुरू हो गई. इस दौरान केन्द्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने संशोधन में प्रावधानों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि पेपर लीक किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है. पहले भी कई बार पेपर लीक हुए. 2009 में रेलवे परीक्षा के पेपर लीक हुए. एनटीए का प्रस्ताव भी यूपीए सरकार में आया. हालांकि केसी वेणुगोपाल ने सवाल उठाते हुए कहा कि इतना महत्वपूर्ण बिल है लेकिन सदन में न प्रधानमंत्री हैं और न ही गृह मंत्री हैं. राज्‍यसभा कल तक स्‍थग‍ित एंटी पेपर लीक ब‍िल पर व‍िपक्ष के हंगामे के बाद राज्‍यसभा कल सुबह 11 बजे तक के ल‍िए स्‍थग‍ित कर दी गई है. Anti paper Bill: लोकसभा में बोले क‍िरेन र‍िज‍िजू एंटी पेपर ब‍िल: लोकसभा में एंटी पेपर लीक ब‍िल पर केंद्रीय मंत्री क‍िरेण रिजिजू ने कहा, ‘मैंने सभी पार्टियों के सदस्यों से बात की… कांग्रेस, SP और DMK के चीफ़ व्हिप भी वहां मौजूद थे… अगर आप 2 घंटे का अतिरिक्त समय चाहते हैं, तो हमें कोई समस्या नहीं है; हम चर्चा के लिए समय बढ़ा देंगे.’ एंटी पेपर लीक ब‍िल पर 2 बचे चर्चा, NDA की तरफ से ये 12 सांसद रखेंगे बात लोकसभा में दोपहर दो बजे पेपर लीक संशोधन संबंधित बिल पर चर्चा होने जा रही है. जिसमें एनडीए की तरफ से ये 12 सांसद अपनी बात रखेंगे.बिल पर एनडीए की ओर से तैयार नेताओं के नामों में बीजेपी से बांसुरी स्वराज, तेजस्वी सूर्या, शशांक मणि त्रिपाठी और अनुराग ठाकुर बोलेंगे, जबकि एनडीए घटक दल की ओर से श्रीकांत शिंदे, अरुण भारती, आलोक सुमन, अनुप्रिया पटेल, और सायोनी घोष बोलेंगीं. Parliament Monsoon Session LIVE: 3 म‍िनट में लोकसभा स्‍थग‍ित, स्‍पीकर बोले- प्रश्‍नकाल में गत‍िरोध नहीं संसद मॉनसून सत्र लाइव: सुब‍ह 11 बजे लोकसभा-राज्‍यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही व‍िपक्ष ने सदन में हंगामा कर दिया. ज‍िसके महज 3 म‍िनट बाद ही लोकसभा की कार्यवाही स्‍थग‍ित कर दी गई. वहीं लोकसभा के दो म‍िनट बाद ही राज्‍यसभा की कार्यवाही भी स्‍थग‍ित कर दी गई. इस दौरान लोकसभा स्‍पीकर ओम ब‍िरला ने कहा क‍ि दोपहर 2 बजे एंटी पेपर लीक ब‍िल पर चर्चा होगी, प्रश्‍नकाल में गत‍िरोध नहीं होना चाहिए. एनडीए की बैठक खत्‍म सूत्रों के मुताबिक एनडीए की संसदीय दल की बैठक में पीएम मोदी के सामने दो प्रेजेंटेशन दिए गए. केन्द्रीय मंत्री पीयूष गोयल और लल्लन सिंह ने अपने अपने मंत्रालयों का प्रेजेंटेशन दिया.पीयूष गोयल ने इकानमी फ्री ट्रेड और भारत के व्यापार की परिस्थितियों के बारे में प्रेजेंटेशन दिया कि पिछले बारह साल में क्या हुआ और क्या डेवलपमेंट हुआ.जबकि लल्लन सिंह की ओर से मत्स्य विभाग के बारे में पिछले बारह सालों की उपलब्धियों के बारे में जिक्र किया गया.लल्लन सिंह ने ब्लू रेवोल्यूशन का भी जिक्र किया कि कैसे भारत ने प्रगति की है और भारत का एक्सपोर्ट इसमें बढ़ा है. आज बैठक में पीएम मोदी नहीं बोले. Monsoon session: NDA की मंगल म‍िलन बैठक खत्‍म, संसद की ओर रवाना हुए सांसद एनडीए की मंगल म‍िलन बैठक खत्‍म हो गई है. गृहमंत्री अमित शाह और एनडीए ने सभी वरिष्ठ नेता पैदल एनडीए बैठक स्थल से संसद के ल‍िए न‍िकल गए हैं.

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कलेक्टर साहब, पानी के नीचे मौत है… धौलपुर की इस कॉलोनी से...

Last Updated:July 28, 2026, 13:51 IST Dhaulpur ground report : धौलपुर की लीला विहार और कृष्णा विहार कॉलोनी में 2 साल से सीवर जाम है. सड़कों पर गंदा पानी भरा है, खुले सीवर चैंबर से हादसे का डर है. निवासियों ने प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की. स्थानीय निवासियों का कहना है कि सीवर लाइन करीब 10 फुट गहरी है. अगर कोई बच्चा, बुजुर्ग या राहगीर गलती से खुले चैंबर में गिर जाए तो उसकी जान बचाना मुश्किल हो सकता है. ख़बरें फटाफट धौलपुर. “कलेक्टर साहब, पानी के नीचे मौत छिपी है.” यह कहना है धौलपुर शहर की लीला विहार और कृष्णा विहार कॉलोनी के लोगों का. कॉलोनी में पिछले करीब दो साल से सीवर जाम की गंभीर समस्या बनी हुई है. सीवर उफान पर होने के कारण सड़कों पर हर समय गंदा पानी भरा रहता है. सबसे बड़ी चिंता यह है कि सड़क के बीच बने करीब 10 से 15 फुट गहरे सीवर चैंबर का ढक्कन खुला हुआ है. जलभराव के कारण यह चैंबर दिखाई नहीं देता, जिससे हर समय बड़े हादसे का खतरा बना रहता है. स्थानीय निवासी अशोक कुमार बघेल ने बताया कि पिछले दो वर्षों से ऋषि गलाव विद्यालय के पास स्थित कृष्णा विहार और लीला विहार कॉलोनी के लोग सीवर जाम की समस्या से परेशान हैं. सीवर जाम होने के कारण पूरी सड़क पर दूषित और बदबूदार पानी भरा रहता है. पानी के नीचे खुला सीवर चैंबर छिपा रहता है, जिससे यह जगह लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है. उन्होंने बताया कि बरसात के मौसम में हालात और भी ज्यादा खराब हो जाते हैं. बच्चों और बुजुर्गों के लिए बढ़ा खतराकॉलोनी के लोगों का कहना है कि सबसे ज्यादा परेशानी छोटे बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों को हो रही है. बच्चे रोज इसी गंदे पानी से होकर स्कूल जाने को मजबूर हैं, जिससे उनकी यूनिफॉर्म भी खराब हो जाती है. वहीं गंदे पानी के कारण बीमारियां फैलने का खतरा भी लगातार बना हुआ है. डर के कारण कई परिवारों ने बच्चों का अकेले घर से बाहर निकलना भी बंद कर दिया है. खुले चैंबर से हर समय हादसे का डरस्थानीय निवासियों का कहना है कि सीवर लाइन करीब 10 फुट गहरी है. अगर कोई बच्चा, बुजुर्ग या राहगीर गलती से खुले चैंबर में गिर जाए तो उसकी जान बचाना मुश्किल हो सकता है. कॉलोनी के लोगों ने कई बार नगर परिषद, जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो सका है. प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांगकॉलोनीवासियों का कहना है कि खुले सीवर चैंबर और लगातार जलभराव की वजह से हर समय डर का माहौल बना रहता है. लोगों ने जिला प्रशासन और नगर परिषद से मांग की है कि जल्द से जल्द सीवर जाम की समस्या का समाधान कराया जाए और खुले चैंबर पर ढक्कन लगाया जाए, ताकि किसी भी तरह की जनहानि होने से पहले इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान हो सके. About the Author Anand Pandey आनंद पाण्डेय वर्तमान में News18 हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ… और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Dhaulpur,Dhaulpur,Rajasthan Source link

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Action on Facebook-Instagram : फेसबुक और इंस्टा पर कसेगा शिकंजा, अपनी पर...

Last Updated:July 28, 2026, 12:40 IST Action on Facebook-Instagram : फेसबुक-इंस्टा जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के खिलाफ सरकार ने सख्त नाराजगी जताई है. सरकार के एक्शन पर इन कंपनियों ने माफी भी मांग ली है, लेकिन सरकार इस बात से सहमत न हुई तो भारतीय आईटी एक्ट के तहत आगे भी सख्त कार्रवाई की जा सकती है. भारतीय कानून सरकार को कौन-कौन सी शक्तियां देते हैं, जो इन कंपनियों पर शिकंजा कसने के लिए काफी हैं. सरकार ने सोशल मीडिया पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी है. नई दिल्ली. कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के दौरान सरकार के खिलाफ माहौल बनाने में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की अहम भूमिका रही है. बात चाहे देश के भीतर उठ रहे विरोध को हवा देने की हो या फिर आंदोलन को सीमा पार से मिल रहे समर्थन की, फेसबुक-इंस्टा सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. यही वजह है कि अब सरकार की नजर इन प्लेटफॉर्म और इनसे जुड़ी कंपनियों पर टेढ़ी हो गई है.इंस्टाग्राम ने तो बाकायदा अपने कृत्य के लिए माफी भी मांग ली है, लेकिन मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि इस बार सरकार ढिलाई बरतने के मूड में नहीं दिख रही. ऐसे में सवाल उठता है कि भारतीय कानून के तहत सरकार के पास ऐसी कौन-कौन सी शक्तियां हैं, जो इन कंपनियों की मनमानी पर शिकंजा कस सकती हैं. वैसे तो सीधे तौर पर सरकार मनमाने ढ़ंग से ऐसे किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को नहीं बंद कर सकती है, लेकिन भारत का सूचना एवं प्रसारण से जुड़ा कानून कई ऐसी शक्तियां देता है, जो इन कंपनियों पर शिकंजा कस सकता है. सरकार के पास फेसबुक, इंस्टा, थ्रेड और वॉट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म को चलाने वाली कंपनी मेटा के खिलाफ कई नियामकीय शक्तियां और कानून हैं. इन कानूनों का पालन करते हुए सरकार कंपनियों के पर कतर सकती है और उन पर जुर्माना लगाने की कार्रवाई भी कर सकती है. आइये समझते हैं कि कानून की किस धारा के तहत कौन से कदम उठाए जा सकते हैं. क्या कहता है भातर का आईटी कानूनभारत के आईटी एक्ट, 2000 की धारा 69ए के तहत सरकार किसी पोस्ट, वीडियो, अकाउंट अथवा पूरे प्लेटफॉर्म के कंटेंट को ही ब्लॉक करने का आदेश दे सकती है. हालांकि, अगर यह कंटेंट देश की एकता, अखंडता अथवा सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करता है या फिर जनता के लिए परेशानी खड़ी करता है तो इस पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है. अगर ऐसे कंटेंट लोगों को अपराध के लिए उकसाते हों अथवा उनसे राष्ट्रविरोधी भावना दिखती है तो भी सरकार कार्रवाई कर सकती है. आईटी अधिनियम 2021 के तहत सरकार के पास यह शक्ति होती है कि वह ऐसी कंपनियों के लिए देश में कम्पलायंस अधिकारी नियुक्त कर सकती है. सीधे कार्रवाई का भी रास्ताआईटी एक्ट की धारा 79 सरकार को ऐसे प्लेटफॉर्म पर सीधे कार्रवाई करने की भी छूट देता है. अगर प्लेटफॉर्म कानून का नियम पूर्वक पालन नहीं करता है तो उसकी सेफ हार्बर की सुरक्षा समाप्त हो जाती है और सरकार के पास सीधे कार्रवाई का रास्ता खुल जाता है. इसके अलावा आईटी एक्ट की धारा 69ए और ब्लॉकिंग रूल्स, 2009 के तहत सरकार पूरे प्लेटफॉर्म को ब्लॉक करने का आदेश दे सकती है. इसके अलावा किसी पोस्ट, यूआरएल, पेज, ग्रुप या फिर अकाउंट को भी इसी नियम के तहत ब्लॉक आवा प्रतिबंधित किया जा सकता है. इन मामलों में भी कार्रवाई संभवअगर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म समय पर शिकायतों का निस्तारण नहीं करते हैं अथवा भारतीय अधिकारियों के साथ तालमेल नहीं बैठाते हैं तो भी उन पर कार्रवाई की जा सकती है. आतंकवाद, साइबर अपराध, बाल यौन शोषण सामग्री, वित्तीय धोखाधड़ी या अन्य गंभीर अपराध की जांच भी सरकार कर सकती है. इसके अलावा डाटा सुरक्षा कानून का उल्लंघन करने पर नोटिस जारी करने के साथ ही अवैध कंटेंट हटाने, स्पष्टीकरण मांगने जैसी कार्रवाई भी सरकार इन कंपनियों के खिलाफ कर सकती है. अगर मामला गंभीर साबित होता है तो सरकार पूरे प्लेटफॉर्म की पहुंच को भी सीमित कर सकती है. About the Author Pramod Kumar Tiwari प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि… और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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Indian Driving License : अमेरिका में चल जाएगा भारत का ड्राइविंग लाइसेंस...

होमफोटोमनीLatest Money अमेरिका-यूरोप में चल जाएगा भारत का ड्राइविंग लाइसेंस लेकिन चीन-जापान में नहीं Last Updated:July 28, 2026, 11:42 IST Indian Driving License in Foreign : भारत में तो वाहन चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस जरूरी होता ही है. दुनिया के कई और भी देश हैं, जहां आप भारतीय डीएल पर वाहन चला सकते हैं. हालांकि, ज्यादातर देशों में वाहन चलाने के लिए भारतीय डीएल के साथ कुछ और नियामों का पालन करना पड़ता है लेकिन चीन और जापान ऐसे देश हैं जहां आप इस डीएल से वाहन नहीं चला सकते हैं. China-Japan : सबसे पहले बात करते हैं चीन और जापान की. भारत के पड़ोसी देश चीन में भारतीय ड्राइविंग लाइसेंस पर कार चलाने की अनुमति नहीं दी जाती है. यहां सामान्य इंटरनेशनल ड्राइविंग परमिट (IDP) भी मान्य नहीं है. इसके लिए आपको चीन का अस्थायी लाइसेंस लेना होगा, उसके बाद ही आप यहां ड्राइविंग कर सकते हैं. इसी तरह, जापान में भी भारतीय डीएल और सामान्य आईडीपी पर ड्राइविंग करने पर रोक है. वहां भी आपको खास सरकारी आईडीपी बनवाना पड़ता है, तभी खुद गाड़ी चला सकते हैं. America-UK : सामान्य रूप से देखा जाए तो अमेरिका और ब्रिटेन में यातायात के नियम काफी सख्त होते हैं. बावजूद इसके इन देशों में आपको भारतीय ड्राइविंग लाइसेंस पर वाहन चलाने की छूट मिल जाती है. अमेरिका में जहां भारतीय डीएल पर वाहन चलाने के लिए आईडीपी की जरूरत होती है, वहीं यूके में सामान्य डीएल पर ही वाहन चलाने की छूट मिल जाती है. हालांकि, इसके लिए स्थानीय नियमों का पालन करना जरूरी होता है, लेकिन किसी अतिरिक्त डॉक्यूमेंट की जरूरत नहीं पड़ती है. अमेरिका में भारतीय डील पर आप 3 से 12 महीने तक वाहन चला सकते हैं तो यूके में भी इसकी अवधि एक साल तक ही होती है. Canada-Australia : कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में भी आप भारतीय डीएल पर वाहन चला सकते हैं. कनाडा में डीएल के साथ आईडीपी की जरूरत होती है और तब आपको 60 से लेकर 90 दिनों तक वाहन चलाने की छूट रहेगी. हालांकि, कनाडा के हर राज्य में इस अविध को लेकर अलग-अलग कानून हो सकता है. इसी तरह, ऑस्ट्रेलिया के भी कई राज्यों में डीएल के साथ आईडीपी जरूरी होता है. इसकी अवधि राज्यों के अनुसार, 3 से लेकर 12 महीने तक हो सकती है. Add News18 as Preferred Source on Google Germany-France : यूरोप में भी आप भारतीय ड्राइविंग लाइसेंस पर वाहन चला सकते हैं. जर्मनी में आईडीपी जरूरत होता है. साथ ही आपका लाइसेंस अंग्रेजी में होना चाहिए या फिर आईडीपी जर्मन भाषा में हो तो बेहतर होगा. इन डॉक्यूमेंट के साथ भारतीय डीएल पर आप 6 महीने तक वाहन चला सकते हैं. फ्रांस में नियम थोड़ा अलग है और यहां भारतीय डीएल पर 6 से 12 महीने तक वाहन चलाने की अनुमति दी जाती है. हालांकि, इसके लिए आईडीपी और भाषा यानी फ्रेंच का होना जरूरी है. Europe : यूरोप के ज्यादातर देशों में इंटरनेशनल ड्राइविंग परमिट यानी आईडीपी के साथ भारतीय डीएल पर वाहन चलाने की अनुमति मिल जाती है. इटली, स्पेन, स्विटजरलैंड, नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, आइसलैंड, पुर्तगाल और ग्रीस जैसे देशों में अधिकतम 6 से 12 महीने तक वाहन चलाने की अनुमति दी जाती है. हालांकि, इन सभी देशों में वाहन चलाने के लिए आईडीपी जरूरी होता है और ज्यादातर यूरोपीय देश आईडीपी अथवा लाइसेंस को अंग्रेजी भाषा में ही स्वीकार करते हैं. Gulf Countries : खाड़ी देशों में भी भारतीय ड्राइविंग लाइसेंस पर वाहन चलाने की छूट मिल लाती है. संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, कतर, बहरीन कुवैत, सऊदी अरब में भी भारतीय डीएल पर वाहन चलाने के लिए आईडीपी की जरूरत होती है.इतना ही नहीं, इन देशों में वाहन चलाने की अवधि भी सीमित होती है. यहां लंबे समय तक वाहन चलाने के लिए आपको स्थानीय लाइसेंस की जरूरत होती है. बेहतर होगा कि इन देशों में जाने से पहले आप भारत से ही अपना आईडीपी बनवाकर जाएं. Nepal-Bhutan : भारत के पड़ोसी देश नेपाल और भूटान में ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर सहूलियत मिलती है. इन देशों में आज भी सामान्य भारतीय लाइसेंस पर ही वाहन चलाने की छूट मिल जाती है. हालांकि, यह छूट सीमित अविध तक होती है और लंबे समय तक यहां वाहन चलाने के लिए आपको स्थानीय लाइसेंस अथवा परमिट की जरूरत होगी. खास बात ये है कि इन देशों में वाहन चलाने के लिए आईडीपी की जरूरत नहीं होती है और आप सिर्फ भारतीय लाइसेंस पर ही कुछ समय के लिए वाहन चला सकते हैं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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Criminals in CJP Protest: जंतर-मंतर पर जुटी भीड़ की क्राइम प्रोफाइल तैयार;...

नई दिल्ली. दिल्ली में जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन स्थल और उसके आसपास मौजूद 2,873 लोगों की जांच की गई जिनमें से 980 से अधिक लोगों का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड मिला. ‍‍‍वे हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, बलात्कार, अपहरण, महिलाओं के खिलाफ अपराध, अवैध हथियार और मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में कथित रूप से शामिल पाए गए. आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी. जांच से जुड़े एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने ‘पीटीआई’ को बताया कि पुलिस विश्लेषण से पता चला है कि कम से कम 101 लोग पहले हत्या के मामलों में, 62 हत्या के प्रयास के मामलों में, 284 लूट और डकैती के मामलों में, 229 शस्त्र कानून के मामलों में, 135 झपटमारी के मामलों में, 19 अपहरण के मामलों में और 67 मामले मादक पदार्थ से जुड़े अधिनियम के तहत दर्ज मुकदमों में शामिल रहे हैं. उन्होंने कहा कि इनमें से 61 लोग बलात्कार के मामलों में शामिल रहे हैं, 25 महिलाओं की लज्जा भंग करने या छेड़छाड़ से संबंधित मामलों में संलिप्त रहे हैं, जबकि छह पर लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत मामला दर्ज था. सीजेपी के ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान हुई झड़पों की पृष्ठभूमि में यह सत्यापन किया गया. पुलिस के अनुसार, इन झड़पों में 65 से अधिक प्रदर्शनकारी और 200 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे. प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सुरक्षा बलों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन का इस्तेमाल किया. सूत्र के अनुसार, जंतर-मंतर पर और उसके आसपास भारी भीड़ जमा होने और उसके बाद 20 जुलाई को मार्च के दौरान हुई हिंसा के बाद यह सत्यापन शुरू किया गया था. उन्होंने कहा कि इस कवायद का उद्देश्य आपराधिक संलिप्तता वाले लोगों की पहचान करना और प्रदर्शन स्थल पर आने वाले या उसके आसपास घूमने वाले व्यक्तियों की प्रकृति का आकलन करना था. सूत्र ने कहा कि ये निष्कर्ष पुलिस डेटाबेस और ‘डोजियर सत्यापन’ प्रणालियों के माध्यम से की गई बड़ी जांच का हिस्सा हैं. पुलिस के अनुसार, 2,873 व्यक्तियों के आपराधिक रिकॉर्ड की जांच की गई और उनमें से 989 को पूर्व में गंभीर आपराधिक मामलों में संलिप्त पाया गया. यह दर्शाता है कि जिन लोगों की जांच की गई उनमें से एक-तिहाई से अधिक का पुलिस रिकॉर्ड था. पुलिस का कहना है कि यह सत्यापन विभिन्न जिला पुलिस इकाइयों और अन्य कानून लागू करने वाली एजेंसियों द्वारा रखे गए मौजूदा आपराधिक डेटाबेस और डोजियर रिकॉर्ड पर आधारित था. सूत्र ने कहा, ‘विश्लेषण से पता चला है कि हत्या के मामलों से जुड़े 101 लोगों में से 42 दो या दो से अधिक आपराधिक मामलों में शामिल रहे हैं, जबकि 12 का आपराधिक इतिहास 10 या अधिक मामलों से जुड़ा है, जो गंभीर अपराधों में बार-बार शामिल होने का संकेत देता है.’ इसी तरह, हत्या के प्रयास के मामलों से जुड़े 62 लोगों में से 25 के खिलाफ दो या उससे अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं. पुलिस रिकॉर्ड से पता चला है कि 284 व्यक्ति पहले डकैती और लूट के मामलों में शामिल रहे हैं. उनमें से 155 दो या दो से अधिक आपराधिक मामलों में शामिल रहे हैं, जबकि 31 के आपराधिक इतिहास में 10 या उससे अधिक मामले शामिल हैं, जिससे पता चलता है कि कई लोग आदतन अपराधी हैं. जांच में 61 लोग ऐसे भी पाए गए, जो बलात्कार के मामलों में शामिल थे. पुलिस रिकॉर्ड से पता चला कि उनमें से आठ लोग दो या अधिक आपराधिक मामलों में शामिल रहे हैं. सूत्र के अनुसार, महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों का सामना कर रहे लोगों में से छह के खिलाफ दो या अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं. सत्यापन से अवैध हथियारों से संबंधित अपराधों में व्यापक संलिप्तता का भी पता चला. पुलिस रिकॉर्ड से पता चला है कि नशीले पदार्थों के अपराधों से जुड़े लोगों में से नौ लोग दो या उससे अधिक आपराधिक मामलों में शामिल रहे हैं. सूत्र ने कहा, ‘इस जांच का उद्देश्य प्रदर्शन स्थल पर और उसके आसपास मौजूद लोगों की आपराधिक पृष्ठभूमि की पहचान करना और आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा की जांच कर रहे जांचकर्ताओं की सहायता करना था.’ पुलिस सूत्रों ने बताया कि ये निष्कर्ष विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की जांच का हिस्सा बनेंगे. Source link

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रेड चिली, ग्रीन चिली या सोया? जानिए कौन सा सॉस किस खाने...

Last Updated:July 28, 2026, 09:46 IST बाजार में कसुंदी, रेड चिली, ग्रीन चिली, सोया, शेजवान और टोमैटो चिली जैसे कई तरह के सॉस उपलब्ध हैं. हर सॉस का स्वाद, उपयोग और फ्लेवर अलग होता है. अगर आप भी अपनी पसंद और डिश के अनुसार सही सॉस चुनना चाहते हैं, तो पहले जान लें किस सॉस का इस्तेमाल किस व्यंजन के साथ सबसे बेहतर माना जाता है. एक ही ब्रांड में कई तरह के सॉस उपलब्ध हैं. इनमें कसुंदी (सरसों), रेड चिली, ग्रीन चिली, सोया और शेजवान जैसे फ्लेवर शामिल हैं. अलग-अलग व्यंजनों के लिए अलग स्वाद वाले सॉस का इस्तेमाल किया जाता है, इसलिए खरीदने से पहले यह जानना जरूरी है कि कौन-सा फ्लेवर आपकी पसंद और जरूरत के हिसाब से बेहतर रहेगा. कसुंदी पूर्वी भारत, खासकर पश्चिम बंगाल और ओडिशा में लोकप्रिय सरसों आधारित सॉस है. इसका स्वाद हल्का तीखा और खट्टापन लिए होता है. इसे फिश फ्राई, पकौड़े, सैंडविच और स्नैक्स के साथ खाना पसंद किया जाता है. सरसों के दानों की वजह से इसकी बनावट भी दूसरे सॉस से अलग दिखाई देती है. रेड चिली सॉस सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले सॉस में शामिल है. इसे समोसा, मोमोज, स्प्रिंग रोल, नूडल्स और फ्राइड राइस जैसी डिश के साथ परोसा जाता है. लाल मिर्च और अन्य मसालों से तैयार यह सॉस तीखे स्वाद के शौकीनों की पहली पसंद माना जाता है. बरसात के मौसम में रेड चिल्ली सॉस को पकोड़ी के साथ भी खाया जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google सोया सॉस का उपयोग मुख्य रूप से चाइनीज और अन्य एशियाई व्यंजनों में किया जाता है. इसका स्वाद नमकीन और उमामी (Umami) होता है. नूडल्स, मंचूरियन, फ्राइड राइस और स्टर-फ्राई सब्जियों में इसकी कुछ बूंदें भी स्वाद बदल देती हैं. इसका इस्तेमाल सीमित मात्रा में करना बेहतर माना जाता है.पारंपरिक सोया सॉस Fermentation (किण्वन) प्रक्रिया से तैयार किया जाता है. ग्रीन चिली सॉस हरी मिर्च से तैयार किया जाता है और इसका स्वाद ताजा व तीखा होता है. इसे मोमोज, पकोड़े, सैंडविच, बर्गर और रोल्स के साथ खूब पसंद किया जाता है. जो लोग ज्यादा तीखा खाना पसंद करते हैं, उनके लिए यह फ्लेवर अच्छा विकल्प माना जाता है.हरी मिर्च में विटामिन कॉल भी पाया जाता है, हालांकि सॉस बनाने की प्रक्रिया में इसकी मात्रा कम हो सकती है. शेजवान सॉस अपने तीखे और मसालेदार स्वाद के लिए जाना जाता है. इसमें लाल मिर्च, लहसुन और मसालों का मिश्रण होता है. फ्राइड राइस, नूडल्स, मोमोज और मंचूरियन जैसी इंडो-चाइनीज डिश के साथ इसका इस्तेमाल खूब किया जाता है. तीखा स्वाद पसंद करने वालों के बीच यह काफी लोकप्रिय है.शेजवान सॉस भारतीय-चीनी (Indo-Chinese) शैली का लोकप्रिय कंडिमेंट है. इसमें आमतौर पर लाल मिर्च, लहसुन, अदरक और मसालों का मिश्रण होता है, जो इसे तीखा और गाढ़ा स्वाद देता है टोमैटो चिली सॉस में टमाटर की मिठास और मिर्च का हल्का तीखापन एक साथ मिलता है. इसे समोसा, कटलेट, फ्रेंच फ्राइज, पकोड़े और बच्चों के स्नैक्स के साथ परोसा जाता है. जिन लोगों को बहुत ज्यादा तीखा स्वाद पसंद नहीं होता, उनके लिए यह एक संतुलित विकल्प माना जाता है.टमाटर में Lycopene नामक प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है, जो उसे लाल रंग देता है. प्रोसेसिंग के दौरान लाइकोपीन की उपलब्धता बढ़ सकती है, हालांकि तैयार सॉस में इसकी मात्रा सामग्री और निर्माण प्रक्रिया पर निर्भर करती है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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Research| World languages study: कभी दुनिया में थीं 75 हजार भाषाएं,जानिए कैसे...

Do you know: आज दुनिया में करीब 7,500 भाषाएं बोली जाती हैं. इनमें अंग्रेजी, मंदारिन चीनी, हिंदी, स्पेनिश, अरबी और फ्रेंच सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली भाषाएं हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक समय ऐसा भी था जब धरती पर 30 हजार से लेकर 75 हजार से ज्यादा भाषाएं बोली जाती थीं? यह दावा एक इंटरनेशनल रिसर्च में किया गया है. वैज्ञानिकों का कहना है कि हजारों साल पहले दुनिया में छोटी-छोटी मानव आबादियां अलग-अलग रहती थीं. हर समुदाय की अपनी अलग भाषा थी. समय के साथ साम्राज्यों का विस्तार, युद्ध, उपनिवेशवाद और लोगों के एक-दूसरे में घुलने-मिलने की वजह से हजारों भाषाएं हमेशा के लिए खत्म हो गईं. 12 हजार साल पुराने इतिहास को समझने की कोशिश यह शोध अमेरिका की येल यूनिवर्सिटी की भाषाविज्ञान और मानवशास्त्र की प्रोफेसर क्लेयर बॉवर्न (Claire Bowern) की अगुवाई में किया गया है. यह अध्ययन प्रतिष्ठित जर्नल साइंस (Science)में प्रकाशित हुआ है.शोधकर्ताओं ने गणितीय मॉडलिंग, मानवशास्त्र (Anthropology), भाषाविज्ञान (Linguistics) और जनसंख्या विज्ञान (Demography) के आंकड़ों का इस्तेमाल करके यह अनुमान लगाया कि करीब 12 हजार साल पहले, यानी अंतिम हिमयुग (Ice Age) के खत्म होने के बाद दुनिया में कितनी भाषाएं बोली जाती थीं.यह अध्ययन होलोसीन (Holocene) काल के दौरान भाषाओं के विकास और उनके धीरे-धीरे खत्म होने की कहानी को समझने की कोशिश करता है. कब सबसे ज्यादा भाषाएं बोली जाती थीं? शोध के मुताबिक दुनिया में भाषाओं की संख्या पहली सहस्राब्दी ईसा पूर्व (1000 BC) से लेकर पहली सहस्राब्दी ईस्वी (1000 AD) के बीच अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थी.वैज्ञानिकों का अनुमान है कि उस समय पूरी दुनिया में एक साथ लगभग 30 हजार से लेकर 75 हजार से भी ज्यादा अलग-अलग भाषाएं बोली जाती थीं. इसे शोधकर्ताओं ने भाषाओं का गोल्डन एज यानी स्वर्णकाल बताया है. आज सिर्फ 7,500 भाषाएं ही क्यों बची हैं? शोध में बताया गया है कि समय के साथ भाषाओं की संख्या लगातार घटती चली गई.इसके पीछे कई बड़े कारण रहे.सबसे पहले प्राचीन काल में बड़े-बड़े साम्राज्यों का विस्तार हुआ. जब एक साम्राज्य दूसरे क्षेत्रों पर कब्जा करता था तो वहां की स्थानीय भाषाओं की जगह शासकों की भाषा का इस्तेमाल बढ़ने लगता था.इसके बाद पिछले कुछ सौ वर्षों में यूरोपीय उपनिवेशवाद ने भी दुनिया की हजारों स्थानीय भाषाओं को खत्म करने में बड़ी भूमिका निभाई. कई जगह लोगों को अपनी मातृभाषा छोड़कर दूसरी भाषा अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा. भाषा सिर्फ बोलने का माध्यम नहीं, पहचान भी है प्रोफेसर क्लेयर बॉवर्न कहती हैं कि किसी भी भाषा का महत्व केवल बातचीत तक सीमित नहीं होता.उनके मुताबिक हर भाषा अपने समाज की यादें, परंपराएं, इतिहास, संस्कृति और ज्ञान अपने भीतर संजोकर रखती है. जब कोई भाषा खत्म होती है तो उसके साथ उस समुदाय की कई पीढ़ियों का अनुभव और सांस्कृतिक विरासत भी हमेशा के लिए खो जाती है. पहली लिखित भाषाएं कब सामने आईं? शोध के अनुसार शुरुआत में दुनिया की सभी भाषाएं केवल बोली जाती थीं. बाद में अलग-अलग सभ्यताओं ने लिखित भाषा विकसित की.सबसे पहले चौथी सहस्राब्दी ईसा पूर्व (Fourth Millennium BC)में मेसोपोटामिया में सुमेरियन भाषा को क्यूनिफॉर्म (Cuneiform)लिपि में लिखा गया.इसके बाद मिस्र, चीन और मेसोअमेरिका जैसी सभ्यताओं में भी स्वतंत्र रूप से लिखने की प्रणालियां विकसित हुईं. वैज्ञानिकों ने इतने पुराने समय का अनुमान कैसे लगाया? इतने पुराने समय की भाषाओं का कोई सीधा रिकॉर्ड मौजूद नहीं है.ऐसे में शोधकर्ताओं ने अलग तरीका अपनाया.उन्होंने अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया के 171 ऐसे शिकारी-संग्रहकर्ता (Hunter-Gatherer) समुदायों का अध्ययन किया जो आज भी पारंपरिक जीवनशैली के करीब माने जाते हैं.इन समुदायों के आकार, उनकी भाषाओं और उस समय की अनुमानित वैश्विक आबादी के आधार पर वैज्ञानिकों ने गणितीय मॉडल तैयार किया. इसी मॉडल की मदद से उन्होंने हजारों साल पहले बोली जाने वाली भाषाओं की संख्या का अनुमान लगाया. 12 हजार साल पहले कितनी भाषाएं थीं? शोध के मुताबिक करीब 12 हजार साल पहले दुनिया की आबादी छोटे-छोटे समूहों में बंटी हुई थी. लोग खानाबदोश (Nomadic) शिकारी-संग्रहकर्ता के रूप में रहते थे और अलग-अलग इलाकों में फैले हुए थे.ऐसे समय में दुनिया भर में लगभग 4,500 से 6,200 भाषाएं बोली जाती थीं.बाद में आबादी बढ़ने और नए समुदाय बनने के साथ भाषाओं की संख्या भी तेजी से बढ़ी और हजारों साल बाद अपने सबसे बड़े स्तर पर पहुंच गई. भाषाएं आखिर खत्म कैसे हो जाती हैं? क्लेयर बॉवर्न बताती हैं कि किसी भाषा के खत्म होने के कई कारण हो सकते हैं.कई बार उस भाषा को बोलने वाले लोग युद्ध, महामारी या हिंसा में खत्म हो जाते हैं.कई बार लोगों को सामाजिक, राजनीतिक या आर्थिक कारणों से अपनी भाषा छोड़कर दूसरी भाषा अपनानी पड़ती है. कुछ मामलों में सरकारों की नीतियां और शिक्षा व्यवस्था भी स्थानीय भाषाओं को कमजोर कर देती हैं.धीरे-धीरे नई पीढ़ी जब अपनी मातृभाषा बोलना छोड़ देती है तो वह भाषा हमेशा के लिए लुप्त हो जाती है. आज भी हजारों भाषाएं खतरे में हैं शोध में बताया गया है कि आज दुनिया में मौजूद लगभग आधी भाषाएं संकटग्रस्त (Endangered) मानी जाती हैं.सबसे बड़ी बात यह है कि दुनिया की 90 प्रतिशत आबादी केवल 10 प्रतिशत भाषाएं ही बोलती है.इसका मतलब है कि हजारों भाषाएं ऐसी हैं जिन्हें बोलने वाले लोगों की संख्या बहुत कम बची है.यदि इन्हें संरक्षित नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में इनमें से कई भाषाएं पूरी तरह खत्म हो सकती हैं. रिसर्च से क्‍या बताता है? यह अध्ययन बताता है कि मानव इतिहास केवल सभ्यताओं और साम्राज्यों का इतिहास नहीं है, बल्कि भाषाओं का भी इतिहास है. कभी दुनिया में हजारों भाषाएं इंसानी विविधता की पहचान थीं, लेकिन समय के साथ उनमें से अधिकांश लुप्त हो गईं.वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर आज बची हुई छोटी भाषाओं को संरक्षित नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियां दुनिया की सांस्कृतिक विरासत का एक बड़ा हिस्सा हमेशा के लिए खो देंगी. 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