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Exclusive Settebello Indian Crew Member aditya sharma Last Message : दहाड़ पड़ा...

तेहरान: ईरान पर अटैक करने के चक्कर में अमेरिका बेकाबू हो चुका है. हाल ही में अमेरिकी नेवी ने ओमान कोस्ट के पास एक कार्गो शिप MT Settebello पर अटैक किया था, जिसमें भारतीय क्रू मौजूद था. इस अटैक में 3 भारतीयों की मौत हो गई है. जिसके बाद भारत सरकार ने अमेरिका को हड़काया है. इसी अटैक में भारतीय क्रू मेंबर आदित्य शर्मा की भी जान गई है, जिनके पिता ने जहाज के मालिकों और सुरक्षा व्यवस्था पर बेहद तीखे और गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. उन्होंने बताया कि अटैक से पहले सोमवार की रात आया आदित्य का आखिरी मैसेज आया, पिता ने इस मैसेज को भी पढ़कर सुनाया. अमेरिकी हमले में बेटा खोने वाले पिता ने पूछा सवाल राजेश शर्मा ने रुंधे गले से बताया कि उनका बेटा आदित्य पिछले साल नवंबर के महीने से इस कार्गो शिप पर तैनात था. शुरुआत में सब कुछ बिल्कुल ठीक चल रहा था. जहाज के रूट सुरक्षित थे और वो चीन, सिंगापुर और श्रीलंका जैसे देशों के शांत समुद्री रास्तों पर काम कर रहा था. परिवार भी निश्चिंत था कि बेटा सुरक्षित है और अपनी ड्यूटी कर रहा है लेकिन, कहानी में ट्विस्ट तब आया जब जहाज को अचानक ओमान भेजा गया. पिता के मुताबिक, ओमान पहुंचने के बाद बिना किसी ठोस वजह या सुरक्षा गारंटी के, जहाज को अचानक ईरान के उस रूट पर बढ़ने के आदेश दे दिए गए, जहां पहले से ही युद्ध जैसे हालात बने हुए थे और चारों तरफ से घेराबंदी थी. राजेश शर्मा का सवाल है कि जब वो इलाका एक नो-गो जोन था, तो जहाज के ऑपरेटरों ने इतनी बड़ी लापरवाही कैसे की? MT Settebello का कैप्टन बन गया था बेटा पिता ने बताया कि रविवार को आदित्य ने घर पर फोन भी किया था. उस आखिरी फोन कॉल में उसकी आवाज में थोड़ी घबराहट थी. उसने अपने पिता को बताया था कि उनके जहाज के बिल्कुल पास मौजूद एक दूसरे शिप पर भयानक हमला हुआ है. हालांकि, राहत की बात ये थी कि उस जहाज पर मौजूद भारतीय क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बचा लिया गया था. आदित्य ने कहा था कि ‘पापा, पास वाले जहाज पर हमला हुआ है, डर का माहौल है लेकिन भारतीय सुरक्षित निकाल लिए गए हैं’. इस खबर को सुनने के बाद से ही भारत में बैठे आदित्य के पूरे परिवार की सांसें अटक गई थीं. उनकी चिंता इतनी बढ़ गई थी कि वे हर पल टीवी पर नजरें गड़ाए बैठे थे और भगवान से बेटे की सलामती की दुआएं मांग रहे थे. कैप्टन बेटे का आखिरी मैसेज सोमवार की रात को आदित्य का एक आखिरी टेक्स्ट मैसेज आया. उसने बताया था कि जहाज पर एक नए कैप्टन ने कार्यभार संभाल लिया है और अब वो आगे के सफर के लिए तैयार हैं. परिवार को क्या पता था कि नए कैप्टन के आते ही ये सफर आदित्य का आखिरी सफर बन जाएगा. इस मैसेज के कुछ ही समय बाद, इंटरनेशनल वॉटर में MT Settebello पर एक जोरदार मिसाइल आकर गिरी. धमाका इतना जबरदस्त था कि जहाज का एक हिस्सा पूरी तरह तबाह हो गया और इसी हमले में भारत के इस होनहार लाल, आदित्य शर्मा की जान चली गई. पिता राजेश शर्मा ने बेहद भावुक होकर सवाल उठाया, ‘जब क्षेत्र में लगातार खतरा मंडरा रहा था, रोज हमलों की चेतावनी आ रही थी, तो जहाज को आगे बढ़ाने का आत्मघाती फैसला आखिर क्यों और किसके इशारे पर लिया गया’? अमेरिकी सेना ने बिना वॉर्निंग किया अटैक इस पूरे मामले में एक बहुत बड़ा अंतरराष्ट्रीय मोड़ तब आ गया जब MT Settebello के प्रबंधक, IOS Marine-F.Z.E ने एक आधिकारिक बयान जारी किया. कंपनी ने इस हमले के लिए किसी आतंकी संगठन को नहीं, बल्कि सीधे तौर पर अमेरिकी नौसेना को जिम्मेदार ठहराया है! कंपनी ने साफ-साफ कहा है कि इस हमले में तीन बेगुनाह नाविकों की जान गई है और इसके लिए अमेरिकी सेना सीधे तौर पर जवाबदेह है. प्रबंधक ने अमेरिकी पक्ष के उस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि जहाज को चेतावनी दी गई थी लेकिन उसने निर्देशों की अनदेखी की. कंपनी का कहना है कि हमले से पहले जहाज के साथ किसी भी तरह का रेडियो संपर्क या चेतावनी स्थापित नहीं की गई थी और अगर अमेरिका के पास इसका कोई सबूत है, तो वह उसे पूरी दुनिया के सामने सार्वजनिक करे. न ईरान से वास्ता न उसके तेल से! जहाज के प्रबंधकों ने इस बात को पूरी तरह साफ किया है कि MT Settebello का ईरान या ईरान के तेल व्यापार से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं था. ये अंतरराष्ट्रीय वॉटर्स में पूरी तरह से कानूनी और व्यावसायिक गतिविधि में लगा एक आम नागरिक व्यापारिक जहाज था. बयान के मुताबिक, जहाज पिछले लगभग 10 दिनों से समुद्र में एक ही जगह पर शांति से खड़ा था और उसकी तरफ से कोई भी ऐसी आक्रामक या संदेहास्पद गतिविधि नहीं की जा रही थी जिससे अमेरिकी नौसेना को कोई खतरा महसूस हो. प्रबंधकों ने अब इस पूरे नरसंहार की एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की है ताकि मृतकों के परिवारों को न्याय मिल सके. Source link

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Telangana voter list pre SIR impact: बंगाल के बाद कांग्रेस के गढ़...

याद कीजिए पश्चिम बंगाल में जब एसआईआर हुआ तो करीब 70 लाख वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से गायब हो गए. यानी ऐसे वोटर जिनका हकीकत में कोई वजूद ही नहीं था या जो फर्जी थे. नतीजा क्या हुआ? ममता बनर्जी की अजेय मानी जाने वाली सरकार भरभरा कर ढह गई. अब ठीक वैसा ही ज‍िन्‍न कांग्रेस के गढ़ तेलंगाना में बाहर आया है. बंगाल में तो फिर भी एसआईआर में लाखों नाम कटे थे, तेलंगाना में तो प्री-एसआईआर यानी शुरुआती जांच में ही 89 लाख फर्जी या गड़बड़ वोटर पाए गए हैं. अगर छंटनी हुई तो तेलंगाना की स‍ियासत में भूचाल आना तय है. क्या है ये 89 लाख का गड़बड़झाला? तेलंगाना में पिछले कई महीनों से चुनाव आयोग के अधिकारी एक खास मिशन पर लगे हुए थे. इसे तकनीकी भाषा में प्री-एसआईआर मैपिंग कहा गया. अध‍िकार‍ियों ने साल 2002 की वोटर लिस्ट उठाई और उसे आज की वोटर ल‍िस्‍ट से म‍िलान करवाया. मकसद था ये देखना कि वोटर लिस्ट में जो नाम दर्ज हैं, वो असली हैं या सिर्फ कागजों पर वोट डाल रहे हैं. गुरुवार को तेलंगाना के मुख्य निर्वाचन अधिकारी सी. सुदर्शन रेड्डी ने इसकी ड‍िटेल्‍स सामने रखी. तेलंगाना के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया क‍ि वोटर ल‍िस्‍ट में 11 तरह की गड़बड़‍ियां पाई गई हैं. अब तक कुल मिलाकर लगभग 89 लाख गड़बड़‍ियां सामने आ चुकी हैं. मतलब साफ है क‍ि 89 लाख वोटरों के डेटा में कुछ न कुछ ऐसा झोल है, जो सामान्य नहीं है. अब चुनाव आयोग इन सभी संदिग्ध वोटरों को नोटिस थमाएगा और उनसे पूछेगा कि तुम्हारा वजूद क्या है? जरा सबूत तो दिखाओ! 11 गड़बड़‍ियां क‍िस-क‍िस तरह की? बाप-बेटे की उम्र में 15 साल से कम का अंतर: वोटर लिस्ट बता रही है कि कई मामलों में माता-पिता और उनके बच्चों की उम्र के बीच 15 साल से भी कम का अंतर है. यानी, कागज के हिसाब से कोई 13 या 14 साल की उम्र में ही माता-पिता बन गया. दो भाई-बहनों के बीच 9 महीने से कम का अंतर: दो बच्चों के जन्म के बीच कम से कम 9 महीने का फासला होता है (जुड़वा बच्चों को छोड़कर). लेकिन तेलंगाना की वोटर लिस्ट में ऐसे हजारों भाई-बहन हैं, जिनके जन्म के बीच 9 महीने से भी कम का गैप है. बाप-बेटे की उम्र में 50 साल से ज्यादा का अंतर: एक तरफ 15 साल से कम का अंतर है, तो दूसरी तरफ ऐसे वोटर भी हैं जहां माता-पिता और संतान की उम्र में 50 साल से ज्यादा का फासला दर्ज है. दादा और पोते की उम्र में 40 साल से कम का अंतर: दादा और पोते के बीच कम से कम दो पीढ़ियों का फासला होता है. लेकिन यहां वोटर लिस्ट में दादा और पोते की उम्र के बीच 40 साल से भी कम का अंतर है. रिश्तों का बदल जाना : सबसे मजेदार झोल ये है कि मौजूदा वोटर लिस्ट और पुरानी लिस्ट का जब मिलान किया गया, तो पता चला कि वोटर का नाम तो वही है, लेकिन उसके रिश्तेदारों के नाम या रिश्ते का प्रकार ही बदल गया है. जो पिछली लिस्ट में पिता था, वो नई लिस्ट में पति बन गया! अब होगा दूध का दूध-पानी का पानी सवाल ये कि इन 89 लाख संदिग्धों का क्या होगा? इसके लिए चुनाव आयोग SIR करने जा रहा है. तेलंगाना इससे पहले साल 2002 में एसआईआर हुआ था. यानी 22 साल बाद फिर से वोटर लिस्ट का पूरा पोस्टमार्टम होने जा रहा है. 25 जून से 24 जुलाई के बीच ‘बूथ लेवल ऑफिसर’ तेलंगाना के हर घर का दरवाजा खटखटाएंगे. वो एक फॉर्म देंगे, उसे भरवाएंगे, चेक करेंगे कि जो वोटर लिस्ट में लिखा है, वो आदमी हकीकत में उस घर में रहता भी है या नहीं. अगर दादा और पोते की उम्र में 30 साल का अंतर है, तो BLO पूछेगा कि ये कौन सा चमत्कार है! अगर जवाब नहीं मिला या वोटर गायब मिला, तो उसका नाम लिस्ट से काट दिया जाएगा. तेलंगाना का गणित समझ‍िए तेलंगाना की कुल आबादी लगभग 3.5 से 4 करोड़ के बीच है. यहां कुल वोटरों की संख्या करीब 3 करोड़ 20 लाख के आसपास बैठती है. अब अगर 3.2 करोड़ वोटरों में से 89 लाख वोटर यानी करीब 27-28% वोटर संदिग्ध हैं, तो ये कोई छोटी-मोटी बात नहीं है. अगर इस 89 लाख में से छंटनी के बाद 40 या 50 लाख वोटर भी फर्जी पाए गए और उनके नाम काटे गए, तो पूरा का पूरा चुनावी समीकरण बदल जाएगा. जीत-हार का मार्जिन तेलंगाना विधानसभा चुनावों में कई बार हार-जीत का अंतर 2,000 से 5,000 वोटों का होता है. अगर हर विधानसभा क्षेत्र से 30,000 से 40,000 फर्जी वोट कट जाएं, तो उन सीटों पर नतीजे पूरी तरह से पलट सकते हैं. Source link

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EPFO : अपने भी खोला है पीएफ खाता, पेंशन दिलाने में काम...

Last Updated:June 11, 2026, 17:57 IST EPF Scheme Certificate : पीएफ खाता तो आपने भी खुलवाया होगा, लेकिन क्‍या आपको पता है कि स्‍कीम सर्टिफिकेट किसे कहते हैं. किस तरह के खाताधारकों को स्‍कीम सर्टिफिकेट जारी किया जाता है और इसका क्‍या काम होता है. अगर आप भी ईपीएफ के तहत पेंशन लेना चाहते हैं तो यह सर्टिफिकेट जरूरी होता है. ईपीएफओ पेंशन दिलाने के लिए स्‍कीम सर्टिफिकेट जारी करता है. नई दिल्‍ली. कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (EPFO) के आंकड़ो देखें तो पता चलता है कि देश में करीब 7 करोड़ से भी ज्‍यादा पीएफ खाताधारक हैं. भविष्‍य निधि यानी पीएफ खाता खासतौर से रिटायरमेंट के बाद पेंशन और बुढ़ापे की जरूरतों के लिए खोला जाता है, जिसमें आज आपका किया गया योगदान कल पेंशन के रूप में मिलता है. लेकिन, ज्‍यादातर खाताधारकों को यह नहीं पता होगा कि पेंशन लेने के लिए स्‍कीम सर्टिफिकेट की जरूरत होती है. आखिर यह स्‍कीम सर्टिफिकेट होता क्‍या है और पेंशन के लिए इसकी जरूरत क्‍यों पड़ती है. सबसे पहले आपको यह बताते हैं कि स्‍कीम सर्टिफिकेट भी ईपीएफओ की ओर से जारी किया जाता है. ईपीएफ एक्‍ट 1952 के तहत कमर्चारी भविष्‍य निधि संगठन सैलरीड कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद पेंशन का लाभ दिलाने के लिए स्‍कीम सर्टिफिकेट जारी करता है. यह सर्टिफिकेट आपको रिटायरमेंट के बाद पेंशन पाने में मदद करता है. अब सवाल यह उठता है कि क्‍या यह सर्टिफिकेट सभी कर्मचारियों को मिलता है या फिर इसके लिए कुछ खास लोग ही योग्‍य माने जाते हैं. क्‍या है स्‍कीम सर्टिफिकेटस्‍कीम सर्टिफिकेट उन कर्मचारियों को जारी किया जाता है, जो अपने ईपीएफ अंशदान को निकालने के बावजूद रिटायरमेंट उम्र के बाद पेंशन का लाभ लेना चाहते हैं. जो कर्मचारी 10 साल की सर्विस पूरी कर लेते हैं और उनकी उम्र 58 साल नहीं पहुंचती है, उन्‍हें ईपीएफओ की ओर से स्‍कीम सर्टिफिकेट जारी किया जाता है. ऐसे कर्मचारियों के लिए स्‍कीम सर्टिफिकेट प्राप्‍त करना जरूरी होता है, लेकिन जो कर्मचारी 10 साल की सर्विस पूरी नहीं करते हैं, उनके लिए स्‍कीम सर्टिफिकेट जारी करना जरूरी नहीं. हालांकि, अगर वे चाहें तो इस सर्टिफिकेट को ईपीएफओ से प्राप्‍त कर सकते हैं. क्‍या है इस सर्टिफिकेट का फायदास्‍कीम सर्टिफिकेट के जरिये आप नौकरी बदलने पर अपना पेंशन अकाउंट ट्रांसफर करा सकते हैं. यह सर्टिफिकेट इस बात का सबूत होता कि आपके पेंशन का पैसा नई कंपनी के साथ खोले गए पीएफ खाते में ट्रांसफर कर दिया जाएगा. इससे आपके पेंशन लाभ में इजाफा होता है. साथ ही अगर पीएफ खाताधारक की मौत हो जाती है तो स्‍कीम सर्टिफिकेट की मदद से उनका परिवार पेंशन क्‍लेम कर सकता है. वैसे तो 8 साल की सर्विस पूरी करने वाला कर्मचारी भी अपने पीएफ खाते से पैसे निकाल सकता है, लेकिन बेहतर होगा अगर 10 साल की सर्विस पूरी करें, ताकि उन्‍हें ईपीएस 1995 के तहत रिटायरमेंट के बाद पेंशन का लाभ मिल सके. ईपीएफ स्‍कीम के क्‍या फायदे ईपीएफ में जमा किए गए पैसों पर आपको सालाना 8.25 फीसदी का ब्‍याज मिल रहा है. इस खाते में आपकी बेसिक सैलरी का 12 फीसदी और इतना ही पैसा कंपनी की ओर से भी डाला जाता है. आपकी बेसिक और डीए अगर 15 हजार तक है तो इसमें 12 फीसदी अंशदान कर सकते हैं. वालंटरी प्रोविडेंट फंड यानी वीपीएफ के जरिये इस निवेश को दोगुना कर सकते हैं. ईपीएफ खाते में सालाना 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर आपको सेक्‍शन 80सी के तहत टैक्‍स छूट मिलती है. कर्मचारी की ओर से पीएफ खाते में डाले गए पैसों पर मिलने वाला 2.5 लाख रुपये तक का ब्‍याज टैक्‍स फ्री होता है, जबकि नियोक्‍ता का पूरा ब्‍याज ही टैक्‍स के दायरे से बाहर रहता है. About the Author Pramod Kumar Tiwari प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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Indians Dominate Global Visa Programs Report | अमेरिका से यूएई तक भारतीयों...

होमताजा खबरदेश मोदी सरकार में अमेरिका से UAE तक जलवा, ग्लोबल वीजा प्रोग्राम्स में भारत नंबर 1 Last Updated:June 11, 2026, 16:55 IST Indians Dominate Global Visa Programs: एक नई रिपोर्ट के अनुसार ग्लोबल वीजा प्रोग्राम्स में भारत का दबदबा कायम है. अमेरिका के एच-1बी और यूएई के गोल्डन वीजा में भारतीय सबसे आगे हैं. विदेशी कंपनियां सस्ते लेबर की जगह अब हाई-स्किल टैलेंट पर फोकस कर रही हैं. यही कारण है कि भारतीयों को लोकल कर्मचारियों से ज्यादा सैलरी मिल रही है. इसके साथ ही प्रोफेशनल्स के वापस भारत लौटने की उम्मीद भी बढ़ रही है. विदेशी कंपनियों में भारतीय टैलेंट की भारी डिमांड. नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर भारतीय प्रोफेशनल्स अपनी काबिलियत का लोहा मनवा रहे हैं. डील वर्कफोर्स मैनेजमेंट की नई रिपोर्ट में यह सामने आया है. दुनिया के प्रमुख वीजा प्रोग्राम्स में भारत टॉप पर है. अमेरिका के एच-1बी वीजा में भारतीय सबसे बड़ा सोर्स हैं. ब्रिटेन के स्किल्ड वर्कर वीजा में भी भारतीय काफी आगे हैं. आज विदेशी कंपनियां कॉस्ट कटिंग पर फोकस नहीं कर रही हैं. वे हाई-स्किल टैलेंट के लिए ज्यादा पैसा खर्च करने को तैयार हैं. यही वजह है कि भारत ग्लोबल लेवल पर टैलेंट सप्लाई करने वाला लीडर बन गया है. भारतीय प्रोफेशनल्स ग्लोबल ट्रेंड्स का पूरा फायदा उठा रहे हैं. यह रिपोर्ट 150 देशों के डाटा पर आधारित है. आखिर यूएई और अमेरिका में भारतीयों को कितनी ज्यादा सैलरी मिल रही है? विदेशी कंपनियां टैलेंट की कमी दूर करने के लिए भारतीयों को लोकल स्टाफ से बड़ा पैकेज दे रही हैं. रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में एच-1बी वीजा होल्डर्स की औसत सैलरी 1.40 लाख डॉलर है. वहीं समान पद पर अमेरिकी नागरिकों की सैलरी 1.30 लाख डॉलर है. ब्रिटेन में स्किल्ड वर्कर वीजा वालों की कमाई 96 हजार पाउंड है. वहां लोकल लोगों को 87 हजार पाउंड मिलते हैं. यूएई में भी यही ट्रेंड दिख रहा है. वहां गोल्डन वीजा होल्डर्स की इनकम 6.05 लाख दिरहम है. सामान्य वीजा वालों को 4.59 लाख दिरहम मिलते हैं. दुनिया के किन नए देशों में सबसे तेजी से बढ़ रही है भारतीयों की डिमांड? अब भारतीय टैलेंट सिर्फ कुछ देशों तक सीमित नहीं है. नए मार्केट्स में भी इनकी जबरदस्त मांग देखी जा रही है. डील के डाटा में सबसे तेज ग्रोथ ऑस्ट्रेलिया में दर्ज की गई है. वहां पिछले साल के मुकाबले 724 प्रतिशत का उछाल आया है. ब्रिटेन में 142 प्रतिशत और अमेरिका में 139 प्रतिशत की ग्रोथ दिखी है. जर्मनी की ‘अवसर कार्ड’ योजना में भी भारतीयों का जलवा है. इसमें बिना जॉब ऑफर के जर्मनी जाने की परमिशन मिलती है. इसके एक-तिहाई परमिट सिर्फ इंडियंस को मिले हैं. क्या ग्लोबल डिमांड के बीच अब भारत वापस लौटेंगे हमारे टॉप प्रोफेशनल्स? दुनिया भर में इंजीनियरिंग और एआई की डिमांड तेजी से बढ़ रही है. डिजिटल सर्विसेज में भी भारतीय टेक्नोक्रेट्स छाए हुए हैं. यूएई अभी भी भारतीयों के लिए सबसे बड़ा डेस्टिनेशन बना हुआ है. इसके बाद सिंगापुर और कनाडा का नंबर आता है. डील की इकोनॉमिस्ट लॉरेन थॉमस ने इस पर अपनी राय रखी है. थॉमस ने कहा, ‘टैलेंट अब दुनिया के कई नए मार्केट्स की ओर जा रहा है’. लेकिन रिपोर्ट में एक बड़ा इशारा भी किया गया है. भारत में घरेलू मौके बढ़ रहे हैं. ऐसे में विदेशी अनुभव वाले प्रोफेशनल्स जल्द भारत लौट सकते हैं. About the Author दीपक वर्माDeputy News Editor दीपक वर्मा (Deepak Verma) की‍ गिनती हिंदी डिजिटल मीडिया के तेजी से उभरते चेहरों में होती है. वह News18हिंदी के साथ डिप्टी न्यूज़ एडिटर की भूमिका में जुड़े हैं. प्रिंट से डिजिटल का रुख करने वाले दीपक के पास पत्र…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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Video: बीच सड़क पर बैठी थी मासूम बच्ची, बस ड्राइवर ने पूरी...

होमताजा खबरदेश Video: बीच सड़क पर बैठी थी बच्ची, बस ड्राइवर ने इमरजेंसी ब्रेक लगाकर बचाया Last Updated:June 11, 2026, 15:55 IST जब मौत और उस मासूम के बीच सिर्फ एक सेकेंड का फासला बचा था, तब बस के बस ड्राइवर ने वो जांबाजी दिखाई जिसने पूरे देश को उनका मुरीद बना दिया. केरल के मलप्पुरम से एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसे देखकर अच्छे-अच्छों के रोंगटे खड़े हो जाएं और दिल हलक में आ जाए! जरा सोचिए, एक अंधा मोड़, तेज रफ्तार में आती एक प्राइवेट बस और मोड़ मुड़ते ही अचानक सड़क के ठीक बीचों-बीच बैठा हुआ एक साल से भी छोटा मासूम बच्चा! कोई भी ड्राइवर होता तो शायद उसके हाथ-पैर फूल जाते, लेकिन येां बस के ड्राइवर और कंडक्टर किसी ‘फरिश्ते’ की तरह आए और पलक झपकते ही मासूम की जिंदगी बचा ली. अंधा मोड़, गीली सड़क और सामने साक्षात मौत!ये रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना बुधवार सुबह की है. मलप्पुरम के कोंडोटी के पास पुलिक्कल किनारुपडी रोड पर एक प्राइवेट बस अपने रूटीन रूट पर दौड़ रही थी. सुबह का वक्त था, बारिश की वजह से सड़क गीली थी. जैसे ही बस के ड्राइवर रामचंद्रन ने वलियापरंबा चेरुमुट्टम रोड पर एक तीखा मोड़ काटा, उनके और अगली सीट पर बैठे यात्रियों के होश उड़ गए. सामने सड़क के बिल्कुल बीचों-बीच एक साल से भी कम उम्र की मासूम बच्ची बैठी थी और सीधे बस की तरफ ही देख रही थी. बस और मौत के बीच चंद सेकंड का फासला था. ड्राइवर का गजब रिफ्लेक्स, कंडक्टर की कड़क फुर्तीनजारा बेहद खौफनाक था, लेकिन ड्राइवर रामचंद्रन ने गजब का हौसला और दिमाग दिखाया. बिना एक पल गंवाए उन्होंने पूरी ताकत से इमरजेंसी ब्रेक लगा दिए और बस बच्ची से चंद कदम की दूरी पर जाकर रुक गई. बस रुकते ही कंडक्टर ‘नवास’ बिजली की फुर्ती से नीचे कूदा, दौड़कर सड़क के बीच गया और उस रोती हुई मासूम बच्ची को अपनी गोद में उठा लिया. बस के भीतर लगे CCTV कैमरे में ये पूरी घटना कैद हुई है, जिसका फुटेज देखकर किसी की भी रूह कांप जाए. घर का खुला रह गया था दरवाजा और…बाद में जब कंडक्टर नवास बच्ची को लेकर पास के घरों की तरफ भागा, तो पता चला कि पास में ही रहने वाले एक परिवार की ये बच्ची थी. घर का दरवाजा गलती से खुला रह गया था और घुटनों के बल चलते-चलते ये मासूम बच्ची कब रिंग रेंगते हुए हाईवे के बीचो-बीच पहुंच गई, घर वालों को भनक तक नहीं लगी. जब कंडक्टर बच्ची को सही-सलामत लेकर पहुंचा, तब जाकर माता-पिता की जान में जान आई. मंत्रियों से लेकर पुलिस तक ने ठोकी पीठ, कहा- ‘सैल्यूट है बॉस!’इस जांबाज बस क्रू के इस कारनामे की गूंज अब पूरे देश में है. केरल के परिवहन मंत्री सी. पी. जॉन और महिला एवं बाल कल्याण मंत्री बिंदु कृष्णा ने खुद ड्राइवर रामचंद्रन और कंडक्टर नवास को फोन घुमाया और उनकी इंसानियत और सूझबूझ की जमकर तारीफ की. यही नहीं, केरल मोटर वाहन विभाग और मलप्पुरम जिला पुलिस ने भी अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया पेज पर इस घटना का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, ‘हमेशा अनहोनी के लिए तैयार रहें… ड्राइवर रामचंद्रन और कंडक्टर नवास को उनकी इस मुस्तैदी के लिए हमारा कड़क सैल्यूट!’ News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें ड्राइवर का गजब रिफ्लेक्स, कंडक्टर की कड़क फुर्तीनजारा बेहद खौफनाक था, लेकिन ड्राइवर रामचंद्रन ने गजब का हौसला और दिमाग दिखाया. बिना एक पल गंवाए उन्होंने पूरी ताकत से इमरजेंसी ब्रेक लगा दिए और बस बच्ची से चंद कदम की दूरी पर जाकर रुक गई. बस रुकते ही कंडक्टर ‘नवास’ बिजली की फुर्ती से नीचे कूदा, दौड़कर सड़क के बीच गया और उस रोती हुई मासूम बच्ची को अपनी गोद में उठा लिया. बस के भीतर लगे CCTV कैमरे में ये पूरी घटना कैद हुई है, जिसका फुटेज देखकर किसी की भी रूह कांप जाए. घर का खुला रह गया था दरवाजा और…बाद में जब कंडक्टर नवास बच्ची को लेकर पास के घरों की तरफ भागा, तो पता चला कि पास में ही रहने वाले एक परिवार की ये बच्ची थी. घर का दरवाजा गलती से खुला रह गया था और घुटनों के बल चलते-चलते ये मासूम बच्ची कब रिंग रेंगते हुए हाईवे के बीचो-बीच पहुंच गई, घर वालों को भनक तक नहीं लगी. जब कंडक्टर बच्ची को सही-सलामत लेकर पहुंचा, तब जाकर माता-पिता की जान में जान आई. मंत्रियों से लेकर पुलिस तक ने ठोकी पीठ, कहा- ‘सैल्यूट है बॉस!’इस जांबाज बस क्रू के इस कारनामे की गूंज अब पूरे देश में है. केरल के परिवहन मंत्री सी. पी. जॉन और महिला एवं बाल कल्याण मंत्री बिंदु कृष्णा ने खुद ड्राइवर रामचंद्रन और कंडक्टर नवास को फोन घुमाया और उनकी इंसानियत और सूझबूझ की जमकर तारीफ की. यही नहीं, केरल मोटर वाहन विभाग और मलप्पुरम जिला पुलिस ने भी अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया पेज पर इस घटना का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, ‘हमेशा अनहोनी के लिए तैयार रहें… ड्राइवर रामचंद्रन और कंडक्टर नवास को उनकी इस मुस्तैदी के लिए हमारा कड़क सैल्यूट!’ खबरें पढ़ने का बेहतरीन अनुभव QR स्कैन करें, डाउनलोड करें News18 ऐप या वेबसाइट पर जारी रखने के लिए यहां क्लिक करें login Source link

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Liquor Price Hike: बीयर ₹40 और शराब ₹90 महंगी, सरकारी खजाने में...

होमफोटोदेश बीयर ₹40 और शराब ₹90 महंगी, लेकिन जेब पर असर नहीं! विजय सरकार का नया प्लान Last Updated:June 11, 2026, 14:54 IST Liquor Price Hike: तमिलनाडु सरकार ने शराब और बीयर कंपनियों पर नया अतिरिक्त शुल्क लगा दिया है. अब शराब की हर पेटी पर कंपनियों को TASMAC को ज्यादा रकम चुकानी होगी. स्पिरिट पर 90 रुपए, बीयर पर 40 रुपए और वाइन पर 20 रुपए अतिरिक्त लिए जाएंगे. सरकार का दावा है कि इससे हर साल करीब 1000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व मिलेगा. हालांकि ग्राहकों के लिए राहत की बात यह है कि शराब की दुकानों पर कीमतें नहीं बढ़ेंगी और आम लोगों को अतिरिक्त पैसा नहीं देना होगा. तमिलनाडु सरकार ने शराब कारोबार को लेकर ऐसा दांव चला है जिसने शराब कंपनियों की टेंशन बढ़ा दी है, लेकिन आम ग्राहकों को फिलहाल राहत मिली हुई है. राज्य सरकार ने बीयर और शराब बनाने वाली कंपनियों पर नया अतिरिक्त शुल्क लगा दिया है. अब TASMAC यानी तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन को सप्लाई की जाने वाली हर शराब की पेटी पर कंपनियों को ज्यादा पैसे चुकाने होंगे. खास बात यह है कि सरकार ने साफ कर दिया है कि दुकानों पर शराब खरीदने वाले लोगों को इसके लिए एक भी रुपया अतिरिक्त नहीं देना पड़ेगा. यानी झटका कंपनियों को लगेगा, ग्राहक को नहीं. तमिलनाडु देश के उन राज्यों में शामिल है जहां शराब की बिक्री पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में होती है. TASMAC राज्यभर में 4 हजार से ज्यादा शराब की दुकानों का संचालन करता है. अब नई नीति के तहत स्पिरिट यानी हार्ड शराब की हर पेटी पर कंपनियों को अतिरिक्त 90 रुपए देने होंगे. बीयर कंपनियों पर प्रति केस 40 रुपए और वाइन कंपनियों पर 20 रुपए अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है. यह रकम सीधे सरकार के खाते में जाएगी. सरकार का मानना है कि शराब बिक्री से जुड़ा पूरा आर्थिक फायदा अब तक राज्य खजाने तक पूरी तरह नहीं पहुंच रहा था. तमिलनाडु सरकार का दावा है कि इस नए मॉडल से हर साल करीब 1000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व मिलेगा. दिलचस्प बात यह है कि सरकार ने टैक्स बढ़ाने या MRP में बदलाव करने के बजाय पूरा बोझ कंपनियों पर डाल दिया है. इससे आम ग्राहकों के बीच नाराजगी का खतरा भी कम रहेगा. राजनीतिक जानकार इसे ‘राजस्व बढ़ाओ लेकिन जनता को नाराज मत करो’ वाली रणनीति बता रहे हैं. Add News18 as Preferred Source on Google राज्य सरकार ने साफ किया है कि TASMAC दुकानों पर शराब और बीयर की कीमतें फिलहाल नहीं बढ़ेंगी. यानी अगर कोई ग्राहक पहले जितने पैसे देकर बीयर या शराब खरीद रहा था, उसे आगे भी उतने ही पैसे देने होंगे. हालांकि बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबे समय में कंपनियां इस अतिरिक्त बोझ की भरपाई दूसरे तरीकों से करने की कोशिश कर सकती हैं. फिलहाल सरकार और कंपनियों के बीच इस फैसले को लेकर अंदरखाने चर्चाएं तेज हो गई हैं. तमिलनाडु में शराब कारोबार हमेशा से बड़ा राजनीतिक और आर्थिक मुद्दा रहा है. TASMAC के जरिए हर साल हजारों करोड़ रुपए की कमाई होती है. राज्य की करीब 4048 सरकारी दुकानों में सिर्फ लाइसेंस प्राप्त कंपनियों की शराब बिकती है. सरकार का कहना है कि नया शुल्क मॉडल शराब वितरण व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी और राजस्व केंद्रित बनाएगा. इससे राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी. देशभर में कई राज्य नए राजस्व स्रोत तलाश रहे हैं. ऐसे समय में तमिलनाडु का यह मॉडल दूसरे राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है. खासकर वे राज्य जहां शराब बिक्री सरकारी नियंत्रण में है, वहां इस तरह के अतिरिक्त शुल्क मॉडल पर चर्चा शुरू हो सकती है. सरकारें चाहती हैं कि टैक्स सीधे जनता पर डाले बिना खजाना मजबूत किया जाए और यही वजह है कि कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ाया जा रहा है. फिलहाल शराब कंपनियों के लिए यह फैसला बड़ा झटका माना जा रहा है. एक तरफ बिक्री पहले से सरकारी नियंत्रण में है और दूसरी तरफ अब अतिरिक्त शुल्क का बोझ भी बढ़ गया है. लेकिन सरकार को उम्मीद है कि इससे राज्य की कमाई बढ़ेगी और आम लोगों पर सीधा असर नहीं पड़ेगा. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनियां इस फैसले को कैसे संभालती हैं और क्या भविष्य में इसका असर शराब बाजार की रणनीतियों पर भी दिखाई देगा. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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TMC Crisis Live: TMC का एक और विकेट गिरा, राज्यसभा सांसद प्रकाश...

West Bengal Politics Live: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस इस वक्त अपने सबसे बड़े राजनीतिक संकट से गुजर रही है. चुनावी हार के बाद शुरू हुई अंदरूनी कलह अब खुली बगावत में बदलती दिखाई दे रही है. राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक के इस्तीफे ने पार्टी नेतृत्व की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. इससे पहले भी कई सांसद और विधायक नेतृत्व के खिलाफ खुलकर नाराजगी जता चुके हैं. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आने वाले दिनों में और बड़े चेहरे पार्टी छोड़ सकते हैं. ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले कई नेता और सेलिब्रिटी चेहरे भी असंतुष्ट बताए जा रहे हैं. इस बीच पार्टी को बचाने के लिए ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी लगातार सियासी डैमेज कंट्रोल में जुटे हैं. सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ हुई मुलाकातों ने भी बंगाल की राजनीति में नए समीकरणों की अटकलें तेज कर दी हैं. TMC में बढ़ती टूट के बीच कांग्रेस में विलय की चर्चाओं ने भी राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया. हालांकि TMC और कांग्रेस दोनों ने इन खबरों को पूरी तरह खारिज किया है. जयराम रमेश ने सोनिया गांधी और ममता बनर्जी की मुलाकात को सिर्फ सौहार्दपूर्ण बातचीत बताया, जबकि TMC नेताओं ने विलय की खबरों को ‘बेबुनियाद’ कहा. दूसरी ओर बाबुल सुप्रियो ने भी बयान जारी कर साफ किया कि वह अपनी पार्टी और वर्तमान नेतृत्व के साथ खड़े हैं. उन्होंने कहा कि जनता के जनादेश का सम्मान करना लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है और वह राज्य सरकार के साथ मिलकर अपने क्षेत्र के विकास पर काम करते रहेंगे. लेकिन लगातार इस्तीफों और बागी गतिविधियों ने साफ कर दिया है कि TMC के भीतर संकट अभी खत्म नहीं हुआ है. TMC सांसद प्रकाश चिक बराइक के राज्यसभा से इस्तीफे को पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. वह अपना इस्तीफा उपराष्ट्रपति को सौंपने पहुंचे हैं. इससे पहले भी कई नेताओं के इस्तीफे और बगावती तेवर सामने आ चुके हैं. सूत्रों के मुताबिक पार्टी के भीतर असंतोष लगातार गहरा रहा है और कई नेता भविष्य की राजनीतिक संभावनाएं तलाश रहे हैं. पार्टी के भीतर टूट को रोकने के लिए ममता बनर्जी रणनीति बनाने में जुटी हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि TMC नेतृत्व अब कानूनी और तकनीकी आधार पर बागी नेताओं की गतिविधियों को चुनौती देकर समय हासिल करने की कोशिश कर सकता है. माना जा रहा है कि लोकसभा स्पीकर के सामने बागी गुट के दस्तावेजों और हस्ताक्षरों की वैधता पर सवाल उठाए जा सकते हैं. इसी बीच TMC के कई बड़े नेताओं के नाम चर्चा में हैं. डेरेक ओ’ब्रायन, डोला सेन, समीरुल इस्लाम, सागरिका घोष और बाबुल सुप्रियो जैसे नेता फिलहाल पार्टी के साथ दिखाई दे रहे हैं. लेकिन बंगाल की राजनीति में जिस तेजी से घटनाक्रम बदल रहे हैं, उसने ममता बनर्जी के लिए आने वाले दिनों को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया है. TMC Crisis Live: TMC सांसद सौगत रॉय बोले- कांग्रेस के साथ काम करना जरूरी West Bengal Politics Live: कांग्रेस और TMC के संभावित गठबंधन या विलय की चर्चाओं के बीच TMC सांसद सौगत रॉय का बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने कहा, ‘हमारे लिए कांग्रेस के साथ काम करना जरूरी है’ फिलहाल मैं इतना ही कह सकता हूं. आगे देखा जाएगा कि गठबंधन होता है या विलय.’ उनके इस बयान के बाद बंगाल की राजनीति में अटकलें और तेज हो गई हैं. West Bengal Politics Live: सिग्नेचर फर्जीवाड़ा केस में अभिषेक बनर्जी को अंतरिम राहत TMC Crisis Live: कलकत्ता हाई कोर्ट ने सिग्नेचर फर्जीवाड़ा मामले में तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी को बड़ी राहत देते हुए तीन हफ्तों तक गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दे दिया है. हालांकि कोर्ट ने जांच में सहयोग करने और जांच एजेंसी के सामने पेश होने के निर्देश भी दिए हैं. TMC Crisis Live: हस्ताक्षर जालसाजी केस में TMC की कलह खुलकर सामने आई, आमने-सामने कल्याण बनर्जी और अभिषेक West Bengal Politics Live: कोलकाता के हस्ताक्षर जालसाजी मामले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है. सूत्रों के मुताबिक सांसद अभिषेक बनर्जी के कथित अहंकारी रवैये से नाराज होकर वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने खुद को इस केस से अलग कर लिया है. वहीं कलकत्ता हाई कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को राहत देने से इनकार करते हुए उन्हें आज ही भवानी भवन स्थित CID कार्यालय में पेश होने का सख्त निर्देश दिया है. West Bengal Politics Live: TMC में बढ़ी बगावत, प्रसून बनर्जी भी ‘काकोली ग्रुप’ में शामिल TMC Crisis Live: तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी सियासी बगावत लगातार गहराती जा रही है. बुधवार तक ममता बनर्जी के साथ खड़े दिख रहे लोकसभा सांसद प्रसून बनर्जी ने अब बागी सांसदों के ‘काकोली ग्रुप’ का दामन थाम लिया है. जानकारी के मुताबिक प्रसून बनर्जी ने संसद में अलग गुट को मान्यता दिलाने की मांग वाले पत्र पर अपने हस्ताक्षर भी कर दिए हैं. TMC के भीतर सक्रिय बागी गुट अब लोकसभा में खुद को अलग ब्लॉक के तौर पर मान्यता दिलाने की कोशिश में जुटा है. सूत्रों के अनुसार इस गुट में अब तक प्रसून बनर्जी समेत 20 लोकसभा सांसद शामिल हो चुके हैं, जबकि ममता बनर्जी के खेमे में केवल 8 सांसद बचे बताए जा रहे हैं. बागी गुट लगातार अन्य सांसदों को भी अपने साथ जोड़ने में लगा है. हावड़ा से लगातार तीसरी बार सांसद बने प्रसून बनर्जी खेल और राजनीति दोनों क्षेत्रों में बड़ा नाम माने जाते हैं. TMC Crisis Live: MLA सिग्नेचर फर्जीवाड़ा केस में अभिषेक बनर्जी को हाई कोर्ट का नोटिस West Bengal Politics Live: कलकत्ता हाई कोर्ट ने TMC सांसद अभिषेक बनर्जी को MLA सिग्नेचर फर्जीवाड़ा मामले में आज शाम 6 बजे जांच एजेंसी के सामने पेश होने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा कि अभिषेक बनर्जी को कथित फर्जी दस्तावेज पेश करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच एजेंसी को दस्तावेज कानूनी प्रक्रिया के तहत सर्च और सीजर के जरिए हासिल करने होंगे. West Bengal Politics Live: TMC संकट के बीच बाबुल सुप्रियो बोले- मैं पार्टी और नेतृत्व के साथ TMC Crisis Live: पश्चिम बंगाल में चुनावी हार के बाद TMC में जारी सियासी उथल-पुथल के बीच राज्यसभा सांसद बाबुल सुप्रियो ने

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जालौर का नया टूरिस्ट हॉटस्पॉट! स्पिरिचुअल म्यूजियम और मनोरंजन का अनोखा संगम,...

Last Updated:June 11, 2026, 12:52 IST Jalore Tourist Spot: जालौर जिले में स्थित वकाऊ थीम पार्क तेजी से पर्यटकों के बीच लोकप्रिय हो रहा है. यह नया पर्यटन स्थल आध्यात्मिकता, संस्कृति और मनोरंजन का अनूठा संगम प्रस्तुत करता है. पार्क का सबसे बड़ा आकर्षण यहां बना स्पिरिचुअल म्यूजियम है, जहां भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और आध्यात्मिक विरासत को आधुनिक शैली में प्रदर्शित किया गया है. इसके अलावा पार्क में परिवार और बच्चों के लिए कई मनोरंजक गतिविधियां और आकर्षक स्थल विकसित किए गए हैं, जो इसे एक आदर्श वीकेंड डेस्टिनेशन बनाते हैं. प्राकृतिक वातावरण, सुंदर डिजाइन और शांत माहौल पर्यटकों को खास अनुभव प्रदान करते हैं. स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज से आने वाले पर्यटक भी इस नई जगह को देखने पहुंच रहे हैं. ख़बरें फटाफट जालौर: जालौर जिले के भीनमाल क्षेत्र में स्थित वकाऊ थीम पार्क इन दिनों स्थानीय पर्यटन का एक उभरता हुआ नया केंद्र बनता जा रहा है. भीषण गर्मी के इस मौसम में जहां लोग घर से बाहर निकलने से बचते हैं, वहीं यह थीम पार्क लोगों के लिए मनोरंजन और राहत का एक बेहतर विकल्प साबित हो रहा है. यहां आने वाले पर्यटकों के लिए सबसे खास आकर्षण है इसका अनोखा स्पिरिचुअल म्यूज़ियम. इस म्यूज़ियम में वैक्स से बने पुतलों को आधुनिक मशीनरी के जरिए इस तरह प्रस्तुत किया गया है कि वे जीवंत प्रतीत होते हैं। ये पुतले और उनके माध्यम से दिखाए जाने वाले दृश्य लोगों को एक अलग ही अनुभव देते हैं, जो सिर्फ मनोरंजन ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संदेश भी देते हैं. यही वजह है कि यहां आने वाले लोग इसे एक साधारण पार्क नहीं, बल्कि एक अनुभवात्मक स्थल मानकर लौटते हैं. इसके अलावा पार्क में बच्चों के लिए विशेष किड्स ज़ोन बनाया गया है, जहां झूले, खेलने के साधन और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध है. परिवारों के लिए यह जगह एक परफेक्ट पिकनिक स्पॉट बनकर उभरी है, जहां बच्चे खुलकर मस्ती करते हैं और बड़े लोग आराम से समय बिता सकते हैं. पार्क में बैठने की सुविधा, रेस्ट एरिया और खाने-पीने की व्यवस्था भी लोगों के अनुभव को और बेहतर बनाती है. लोगों के लिए एक पर्यटन स्थलगर्मी की छुट्टियों और वीकेंड के दौरान यहां लगातार लोगों की भीड़ देखी जा रही है. जालौर जिले के साथ-साथ आसपास के गांवों और कस्बों से परिवार यहां पहुंच रहे हैं. इससे यह साफ दिखाई देता है कि यह जगह अब केवल भीनमाल तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे जिले के लोगों के लिए एक प्रमुख पर्यटन स्थल बनती जा रही है. गर्मी की छुट्टियों और वीकेंड के दौरान यहां लगातार लोगों की भीड़ देखी जा रही है. जालौर जिले के साथ-साथ आसपास के गांवों और कस्बों से परिवार यहां पहुंच रहे हैं. इससे यह साफ दिखाई देता है कि यह जगह अब केवल भीनमाल तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे जिले के लोगों के लिए एक प्रमुख पर्यटन स्थल बनती जा रही है. सुंधा माता मार्ग पर स्थित होने के कारण इसकी लोकेशन भी काफी आसान और सुगम है, जिससे पर्यटक बिना किसी परेशानी के यहां पहुंच सकते हैं. सड़क मार्ग से जुड़ा होने के कारण यह आसपास के इलाकों के लिए भी एक सुविधाजनक डेस्टिनेशन बन चुका है. परिवार के साथ समय बिताने का अच्छा माहौलयहां घूमकर आए पर्यटक विधि सोनी ने लोकल18 के साथ जानकारी साझा करते हुए बताया कि यहां आकर हमें बहुत अच्छा अनुभव मिला. बच्चों के लिए झूले और खेलने की अच्छी सुविधा है, और स्पिरिचुअल म्यूज़ियम में वैक्स पुतलों के जरिए जो दृश्य दिखाए गए हैं, वे काफी अलग और आकर्षक हैं. यहां परिवार के साथ समय बिताने का अच्छा माहौल है और गर्मी में घूमने के लिए यह एक बेहतरीन जगह है. About the Author Jagriti Dubey Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jalor,Rajasthan Source link

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Inspiring story of Metro man E Sreedharan: देश की रफ्तार बढ़ाने वाले...

Inspiring story of Metro man E Sreedharan: आज हम मेट्रो में सफर करते हैं और 5 म‍िनट की भी देरी बर्दाश्‍त नहीं करते. वहीं जब मेट्रो नहीं थी तो ट्रेनों में घंटों की लेट-लतीफी झेलते थे. द‍िल्‍ली की सड़कों पर भीषण जाम झेलते थे. क्‍या आपको पता है क‍ि द‍िल्‍ली-एनसीआर की लाइफलाइन द‍िल्‍ली मेट्रो के जनक कौन हैं? हो सकता है आप नाम जानते भी हों ई-श्रीधरन, ज‍िन्‍हें भारत सरकार पद्म व‍िभूषण से भी सम्‍मान‍ित कर चुकी है, लेक‍िन क्‍या आपको पता है क‍ि गांव के सरकारी स्‍कूल से पढ़े और फ‍िर इंजीनि‍यर ई श्रीधरन ने मेट्रो मेन बनने का सफर कैसे तय क‍िया? आइए जानते हैं उनकी प्रेरक कहानी.. ई. श्रीधरन ऐसे ही दूरदर्शी इंज‍ीन‍ियर हैं, जिन्होंने अपनी प्रतिभा, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता से न केवल भारत के बुनियादी ढांचे को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया बल्‍क‍ि आधुनिक परिवहन व्यवस्था की तस्वीर ही बदल दी. उन्‍हीं की बदौलत आज दिल्‍ली मेट्रो में सफर करते हुए हम म‍िनटों का ह‍िसाब रखते हैं. साल 1932 में 12 जून को केरल के करुकापुथुर में जन्मे एल्लाट्टुवलपिल श्रीधरन आज उस पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसने अनुशासन, ईमानदारी और समयबद्धता को सफलता का सबसे बड़ा मंत्र बनाया. भारत के प्रसिद्ध सिविल इंजीनियर और ‘मेट्रो मैन’ के नाम से विख्यात श्रीधरन का जीवन इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और स्पष्ट कार्यप्रणाली से असंभव दिखने वाले सपनों को भी साकार किया जा सकता है. श्रीधरन की प्राथमिक शिक्षा पलक्कड़ जिले के पट्टांबी के निकट सरकारी लोअर प्राइमरी स्कूल, चथन्नूर में हुई. इसके बाद उन्होंने बेसल इवेंजेलिकल मिशन हायर सेकेंडरी स्कूल से उच्च माध्यमिक शिक्षा प्राप्त की और फिर पालघर के विक्टोरिया कॉलेज में अध्ययन किया. बाद में उन्होंने काकीनाडा के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की. उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी पहचान निर्धारित समय सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण कार्य पूरा करना रहा है. अपनी इसी पहचान की बदौलत उन्होंने सार्वजनिक परिवहन का चेहरा बदल दिया. साल 1963 में रामेश्वरम और तमिलनाडु को जोड़ने वाला पम्बन पुल टूट गया था. रेलवे ने इसके पुनर्निर्माण के लिए छह महीने का लक्ष्य तय किया था. बाद में यह समय सीमा घटाकर तीन महीने कर दी गई और इसकी जिम्मेदारी श्रीधरन को दी गई. चुनौती को स्वीकार करते हुए उन्होंने मात्र 45 दिनों में पुल का पुनर्निर्माण कर दिखाया. यह उपलब्धि उनकी असाधारण कार्यक्षमता और नेतृत्व क्षमता का शुरुआती परिचय थी. उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियों में से एक कोंकण रेलवे परियोजना भी रही. भारत के पश्चिमी तट के साथ 760 किलोमीटर लंबी इस रेलवे लाइन का निर्माण आसान नहीं था. बेहद चुनौतीपूर्ण भूभाग, 150 से अधिक पुलों और कई तकनीकी कठिनाइयों के बावजूद इस परियोजना को महज सात वर्षों में पूरा कर लिया गया. साल 1995 में दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) के प्रबंध निदेशक के रूप में नियुक्त हुए श्रीधरन ने राष्ट्रीय राजधानी के सार्वजनिक परिवहन के सपने को वैश्विक सफलता की कहानी में बदल दिया. 1995 से 2012 तक दिल्ली मेट्रो का नेतृत्व करते हुए उन्होंने पहले चरण का निर्माण निर्धारित समय से पहले और तय बजट के भीतर पूरा कर दिखाया. दिल्ली मेट्रो की सफलता ने देशभर के शहरों को प्रेरित किया. लखनऊ मेट्रो, कोच्चि मेट्रो जैसी परियोजनाओं के लिए यह एक आदर्श बनी, वहीं जयपुर और हैदराबाद जैसे शहरों ने भी मेट्रो रेल नेटवर्क अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाए. कोलकाता मेट्रो की योजना को आकार देने में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा. सेवानिवृत्ति के बाद भी उनका योगदान थमा नहीं. वे राष्ट्रीय विकास से जुड़े मुद्दों पर सलाहकार और अग्रणी विचारक के रूप में सक्रिय बने रहे. वर्ष 2015 में संयुक्त राष्ट्र के तत्कालीन महासचिव बान की-मून ने उन्हें सतत परिवहन पर संयुक्त राष्ट्र के उच्चस्तरीय सलाहकार समूह (एचएलएजी-एसटी) का सदस्य नियुक्त किया. देश और दुनिया ने उनके योगदान को अनेक सम्मानों से सम्मानित किया. भारत सरकार ने ई श्रीधरन को 2001 में पद्म श्री और 2008 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया. फ्रांस सरकार ने 2005 में शेवेलियर डे ला लेगियोन डी’होनूर प्रदान किया. टाइम पत्रिका ने 2003 में उन्हें एशिया का हीरो और दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में शामिल किया. वर्ष 2013 में जापान ने उन्हें अपने राष्ट्रीय सम्मान ऑर्डर ऑफ द राइजिंग सन- गोल्ड एंड सिल्वर स्टार से नवाजा. वर्ष 2011 में दिल्ली मेट्रो में उनके उत्तराधिकारी के रूप में मंगू सिंह की नियुक्ति की गई, लेकिन उनके द्वारा स्थापित कार्य संस्कृति और मानक आज भी भारतीय बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए प्रेरणा बने हुए हैं. Source link

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कभी बच्चों को डराते हैं, तो कभी छीन लेते हैं दुकानदारों से...

Last Updated:June 11, 2026, 10:51 IST बल्लभगढ़ के सिटी पार्क में इन दिनों बंदरों को लेकर लोगों की राय बंटी हुई है. कुछ लोग बच्चों और दुकानदारों के लिए इसे बड़ी समस्या बता रहे हैं, जबकि कई लोगों का मानना है कि बंदर तभी आक्रामक होते हैं जब उन्हें छेड़ा जाए. बढ़ती शिकायतों के बीच पार्क में आने वाले लोग स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं. विकास झा/फरीदाबाद: बल्लभगढ़ का सिटी पार्क शहर की पहचान बन चुका है. सुबह की ताजी हवा हो, शाम की सैर हो या दोपहर का खाली समय, हर वक्त यहां लोगों की चहल-पहल देखने को मिल जाती है. बच्चे झूलों पर खेलते नजर आते हैं बुजुर्ग टहलते हैं और युवा अपने दोस्तों के साथ समय बिताने पहुंचते हैं. लेकिन इन दिनों इस पार्क में एक ऐसी समस्या चर्चा का विषय बनी हुई है जिसने आने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है. कई लोगों का कहना है कि पार्क में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ रहा है जबकि कुछ लोग मानते हैं कि बंदर तभी हमला करते हैं जब उन्हें छेड़ा जाए. Local18 से बातचीत में पार्क आने वाले लोगों ने बंदरों को लेकर अलग-अलग अनुभव साझा किए. कुछ लोगों ने इसे गंभीर समस्या बताया तो कुछ ने इंसानों की गलती को इसकी वजह माना. बंदरों का आतंक सुबह-शाम ज्यादा मनोज कुमार बताते हैं मैं अक्सर यहां सिटी पार्क आता रहता हूं. बंदरों का जो आतंक है वो सुबह-शाम ज्यादा देखने को मिलता है. अभी गर्मी ज्यादा है तो दिन में कम निकलते हैं, लेकिन शाम करीब 5 से 6 बजे के बाद काफी संख्या में दिखाई देने लगते हैं. कई बार खेलते हुए बच्चों को पकड़ लेते हैं नाखून मार देते हैं और कभी-कभी काट भी लेते हैं. यह समस्या कई सालों से बनी हुई है. यहां एक-दो बार जाल भी लगाए गए थे लेकिन अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ. कई बार शिकायत भी की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. भेलपुरी बेचने वाले हैं परेशान पार्क में भेलपुरी बेचने वाले अशोक बताते हैं यहां बंदरों का बहुत आतंक है. मेरा टमाटर, प्याज और खाने का सामान उठाकर भाग जाते हैं. इनका कोई टाइम टेबल नहीं है. जब मन करता है तब आ जाते हैं. एक साथ 8 से 10 बंदर घूमते रहते हैं. हम बेचने वालों को काफी परेशानी होती है. कई बार ग्राहक भी डर जाते हैं. जब कोई उन्हें छेड़ेगा तो वो बंदर काटेंगे ही यासीन सैफी बताते हैं मैं सिटी पार्क में अक्सर घूमने के लिए जाता हूं. मेरे हिसाब से बंदरों का आतंक नहीं है. आदमी खुद बंदरों को परेशान करता है. जब कोई उन्हें छेड़ेगा तो वो बंदर काटेंगे ही काटेंगे अगर बंदर आपस में लड़ रहे हों तो उनसे दूरी बनाकर रखनी चाहिए. जेपी कौशिक बताते हैं मैं बल्लभगढ़ का रहने वाला हूं और अक्सर यहां घूमने आता हूं. मेरे को लगता है जैसे कोई मुझे तंग करेगा तो मैं भी जवाब दूंगा. बंदर भी तभी काटते हैं जब कोई उन्हें छेड़ता है. ऐसे बिना वजह किसी को परेशान नहीं करते. About the Author Vivek Kumar विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Faridabad,Faridabad,Haryana Source link

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