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कभी बच्चों को डराते हैं, तो कभी छीन लेते हैं दुकानदारों से...

Last Updated:June 11, 2026, 10:51 IST बल्लभगढ़ के सिटी पार्क में इन दिनों बंदरों को लेकर लोगों की राय बंटी हुई है. कुछ लोग बच्चों और दुकानदारों के लिए इसे बड़ी समस्या बता रहे हैं, जबकि कई लोगों का मानना है कि बंदर तभी आक्रामक होते हैं जब उन्हें छेड़ा जाए. बढ़ती शिकायतों के बीच पार्क में आने वाले लोग स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं. विकास झा/फरीदाबाद: बल्लभगढ़ का सिटी पार्क शहर की पहचान बन चुका है. सुबह की ताजी हवा हो, शाम की सैर हो या दोपहर का खाली समय, हर वक्त यहां लोगों की चहल-पहल देखने को मिल जाती है. बच्चे झूलों पर खेलते नजर आते हैं बुजुर्ग टहलते हैं और युवा अपने दोस्तों के साथ समय बिताने पहुंचते हैं. लेकिन इन दिनों इस पार्क में एक ऐसी समस्या चर्चा का विषय बनी हुई है जिसने आने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है. कई लोगों का कहना है कि पार्क में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ रहा है जबकि कुछ लोग मानते हैं कि बंदर तभी हमला करते हैं जब उन्हें छेड़ा जाए. Local18 से बातचीत में पार्क आने वाले लोगों ने बंदरों को लेकर अलग-अलग अनुभव साझा किए. कुछ लोगों ने इसे गंभीर समस्या बताया तो कुछ ने इंसानों की गलती को इसकी वजह माना. बंदरों का आतंक सुबह-शाम ज्यादा मनोज कुमार बताते हैं मैं अक्सर यहां सिटी पार्क आता रहता हूं. बंदरों का जो आतंक है वो सुबह-शाम ज्यादा देखने को मिलता है. अभी गर्मी ज्यादा है तो दिन में कम निकलते हैं, लेकिन शाम करीब 5 से 6 बजे के बाद काफी संख्या में दिखाई देने लगते हैं. कई बार खेलते हुए बच्चों को पकड़ लेते हैं नाखून मार देते हैं और कभी-कभी काट भी लेते हैं. यह समस्या कई सालों से बनी हुई है. यहां एक-दो बार जाल भी लगाए गए थे लेकिन अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ. कई बार शिकायत भी की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. भेलपुरी बेचने वाले हैं परेशान पार्क में भेलपुरी बेचने वाले अशोक बताते हैं यहां बंदरों का बहुत आतंक है. मेरा टमाटर, प्याज और खाने का सामान उठाकर भाग जाते हैं. इनका कोई टाइम टेबल नहीं है. जब मन करता है तब आ जाते हैं. एक साथ 8 से 10 बंदर घूमते रहते हैं. हम बेचने वालों को काफी परेशानी होती है. कई बार ग्राहक भी डर जाते हैं. जब कोई उन्हें छेड़ेगा तो वो बंदर काटेंगे ही यासीन सैफी बताते हैं मैं सिटी पार्क में अक्सर घूमने के लिए जाता हूं. मेरे हिसाब से बंदरों का आतंक नहीं है. आदमी खुद बंदरों को परेशान करता है. जब कोई उन्हें छेड़ेगा तो वो बंदर काटेंगे ही काटेंगे अगर बंदर आपस में लड़ रहे हों तो उनसे दूरी बनाकर रखनी चाहिए. जेपी कौशिक बताते हैं मैं बल्लभगढ़ का रहने वाला हूं और अक्सर यहां घूमने आता हूं. मेरे को लगता है जैसे कोई मुझे तंग करेगा तो मैं भी जवाब दूंगा. बंदर भी तभी काटते हैं जब कोई उन्हें छेड़ता है. ऐसे बिना वजह किसी को परेशान नहीं करते. About the Author Vivek Kumar विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Faridabad,Faridabad,Haryana Source link

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तेल के लिए अंडमान के बाद यहां होगी ड्रिलिंग, समंदर में उतरी...

Oil India Ultra Deepwater Drilling: देश में तेल की कमी दूर करने के लिए अब देसी संसाधनों पर फोकस किया जा रहा है. इस दिशा में देसी कंपनियां कमर कसकर उतर चुकी हैं. इसमें सरकारी तेल एवं गैस कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) बड़ी भूमिका निभाने जा रही है. दरअसल, समंदर की गहराइयों में नए हाइड्रोकार्बन भंडारों की तलाश तेज कर दी गई है. अंडमान सागर में चल रहे खोज अभियानों के बीच अब ऑयल इंडिया की नजर देश के पूर्वी तट पर स्थित कृष्णा-गोदावरी और महानदी बेसिन के अल्ट्रा-डीपवॉटर क्षेत्रों पर है. आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार ऑयल इंडिया 2027 से इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर खोजी ड्रिलिंग अभियान शुरू करने की तैयारी कर रही है. इसके लिए आवश्यक लॉजिस्टिक्स और तकनीकी ढांचे को विकसित करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है. 2027 से शुरू होगी नई खोज ऑयल इंडिया को ओपन एक्रेज लाइसेंसिंग पॉलिसी (OALP)-IX के तहत चार अपतटीय ब्लॉक आवंटित किए गए हैं. इनमें महानदी बेसिन के दो और कृष्णा-गोदावरी बेसिन के दो अल्ट्रा-डीपवॉटर ब्लॉक शामिल हैं. कंपनी फरवरी 2027 से इन ब्लॉकों में खोजी ड्रिलिंग शुरू करने की योजना पर काम कर रही है. सूत्रों के मुताबिक महानदी बेसिन में पहला स्ट्रेटिग्राफिक कुआं अप्रैल 2027 के आसपास ड्रिल किया जा सकता है. इस तरह की ड्रिलिंग का उद्देश्य सीधे उत्पादन शुरू करना नहीं होता, बल्कि समुद्र के नीचे मौजूद भूगर्भीय संरचनाओं का अध्ययन करना और तेल-गैस की संभावनाओं का आकलन करना होता है. अंडमान बेसिन में पहले से जारी है अभियान पूर्वी तट पर विस्तार की तैयारी के साथ-साथ ऑयल इंडिया अंडमान और निकोबार क्षेत्र में भी अपने खोज अभियान को आगे बढ़ा रही है. कंपनी वर्तमान में अंडमान सागर के दो अपतटीय ब्लॉकों में काम कर रही है. दस्तावेजों के अनुसार, यहां अब तक तीन खोजी कुओं की ड्रिलिंग पूरी की जा चुकी है, जबकि दो और कुएं ड्रिल करने की तैयारी चल रही है. ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अंडमान बेसिन भारत के लिए भविष्य का बड़ा हाइड्रोकार्बन क्षेत्र साबित हो सकता है. दरअसल, इस क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना दक्षिण-पूर्व एशिया के उन इलाकों से काफी मिलती-जुलती है, जहां तेल और गैस के विशाल भंडार मौजूद हैं. यदि यहां व्यावसायिक स्तर पर तेल या गैस की खोज सफल होती है, तो यह भारत के ऊर्जा क्षेत्र की तस्वीर बदल सकती है. क्यों महत्वपूर्ण हैं कृष्णा-गोदावरी और महानदी बेसिन? भारत के पूर्वी तट पर स्थित कृष्णा-गोदावरी बेसिन पहले भी देश को कई बड़े गैस भंडार दे चुका है. इसे भारत के सबसे महत्वपूर्ण अपतटीय ऊर्जा क्षेत्रों में गिना जाता है. वहीं, इसके उत्तर में स्थित महानदी बेसिन अभी अपेक्षाकृत कम खोजा गया क्षेत्र है. विशेषज्ञों का मानना है कि महानदी बेसिन में बड़े ऊर्जा संसाधनों की संभावना मौजूद है, लेकिन इसकी वास्तविक क्षमता का आकलन अभी पूरी तरह नहीं हो पाया है. ऐसे में ऑयल इंडिया का आगामी अभियान भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. समुद्र के बीच संचालन के लिए हेलीकॉप्टर सेवा अल्ट्रा-डीपवॉटर क्षेत्रों में ड्रिलिंग आसान काम नहीं है. ड्रिलिंग यूनिट्स अक्सर तट से सैकड़ों समुद्री मील दूर स्थित होती हैं. ऐसे में कर्मचारियों और जरूरी उपकरणों की आवाजाही के लिए विशेष व्यवस्थाओं की जरूरत पड़ती है. इसी को ध्यान में रखते हुए ऑयल इंडिया ने समर्पित हेलीकॉप्टर सेवाएं लेने की प्रक्रिया शुरू की है. इन हेलीकॉप्टरों का उपयोग तटीय बेस और समुद्र में मौजूद ड्रिलिंग प्लेटफॉर्म के बीच कर्मियों और आवश्यक सामग्रियों के परिवहन के लिए किया जाएगा. ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम ऑयल इंडिया की यह दोहरी रणनीति- एक ओर अंडमान सागर में फ्रंटियर एक्सप्लोरेशन और दूसरी ओर पूर्वी तट के अल्ट्रा-डीपवॉटर क्षेत्रों में नई खोज कंपनी के इतिहास के सबसे महत्वाकांक्षी विस्तार अभियानों में से एक मानी जा रही है. भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है. ऐसे में घरेलू भंडारों की खोज और उत्पादन बढ़ाना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है. यदि अंडमान, कृष्णा-गोदावरी और महानदी बेसिन में ऑयल इंडिया को सफलता मिलती है, तो इससे न केवल देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी बल्कि आयात बिल में भी उल्लेखनीय कमी आ सकती है. समुद्र की गहराइयों में छिपे ऊर्जा संसाधनों की यह खोज आने वाले वर्षों में भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लक्ष्य के और करीब ले जा सकती है. Source link

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मानसून में घूमने का है प्लान? हैदराबाद के पास ये 5 झरने...

Last Updated:June 11, 2026, 08:42 IST Places to Visit in Hyderabad During Monsoon: अगर आप मानसून में हैदराबाद के आसपास प्राकृतिक खूबसूरती का आनंद लेना चाहते हैं, तो तेलंगाना के प्रसिद्ध झरने आपकी यात्रा को यादगार बना सकते हैं. कुंतला और बोगाथा जैसे विशाल झरनों से लेकर मल्लेला तीर्थम और गायत्री जैसे शांत प्राकृतिक स्थलों तक, हर जगह अलग अनुभव मिलता है. बारिश के बाद इन झरनों का जलप्रवाह बढ़ जाता है और आसपास का इलाका हरियाली व कोहरे से भर जाता है. कुछ झरनों तक पहुंचने के लिए ट्रेकिंग और सीढ़ियों का सफर भी करना पड़ता है, जो एडवेंचर प्रेमियों के लिए अतिरिक्त आकर्षण बन जाता है हैदराबाद और तेलंगाना के आसपास मानसून की पहली बारिश होते ही प्रकृति का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है. जंगलों, पहाड़ियों और घाटियों के बीच छिपे झरने पूरी तरह जीवंत हो उठते हैं. सूखी चट्टानों से बहता दूधिया सफेद पानी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है. बारिश के बाद इन झरनों की सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है और आसपास का वातावरण हरियाली से भर जाता है. वीकेंड ट्रिप और प्रकृति प्रेमियों के लिए यह समय सबसे खास माना जाता है. मानसून के दौरान हैदराबाद के करीब स्थित एथीपोतला, कुंतला, बोगाथा, मल्लेला तीर्थम और गायत्री झरने घूमने के लिए बेहतरीन विकल्प हैं. कुंतला वॉटरफॉल तेलंगाना का सबसे ऊंचा और सबसे प्रसिद्ध झरना माना जाता है. मानसून की शुरुआती बारिश के बाद इसका रूप बेहद आकर्षक और विशाल हो जाता है. यह सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला के घने जंगलों के बीच कदम नदी पर स्थित है. झरने तक पहुंचने के लिए प्रवेश द्वार से करीब 400 सीढ़ियां नीचे उतरनी पड़ती हैं, जो यात्रा को रोमांचक बना देती हैं. लगभग 147 से 200 फीट की ऊंचाई से गिरता पानी दो चरणों में नीचे आता है और मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करता है. हैदराबाद से करीब 260 किलोमीटर दूर स्थित यह झरना मानसून में प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों की पहली पसंद बन जाता है. भोगता (बोगाथा) वॉटरफॉल अपनी विशाल चौड़ाई और आकर्षक चट्टानी संरचना के कारण “तेलंगाना का नियाग्रा” कहलाता है. मानसून की पहली बारिश के बाद इसका जलप्रवाह काफी बढ़ जाता है, जिससे झरना और भी भव्य दिखाई देता है. इस दौरान आसपास की घाटियां घने कोहरे और हरियाली की चादर से ढक जाती हैं, जो पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं. यहां आने वाले पर्यटकों के लिए सुंदर पार्क, बैठने की व्यवस्था और कई व्यू-पॉइंट्स भी विकसित किए गए हैं. हैदराबाद से करीब 280 किलोमीटर दूर स्थित यह झरना वीकेंड रोड ट्रिप के लिए बेहतरीन पर्यटन स्थलों में गिना जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google पोचेरा वॉटर फॉल्स तेलंगाना के सबसे खूबसूरत प्राकृतिक झरनों में से एक है. यह कुंतला जलप्रपात के करीब कदम नदी पर स्थित है और अपनी गहराई तथा चौड़े जलप्रवाह के लिए जाना जाता है. मानसून की शुरुआती बारिश के बाद इसका पानी पथरीले रास्तों और प्राकृतिक सीढ़ियों जैसी चट्टानों से होकर नीचे गिरता है, जो बेहद मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करता है. आसपास का शांत वातावरण और हरियाली इसकी सुंदरता को और बढ़ा देती है. हैदराबाद से लगभग 257 किलोमीटर दूर स्थित इस स्थल पर तेलंगाना पर्यटन विभाग ने पार्क और बैठने की बेहतर व्यवस्था विकसित की है, जिससे पर्यटकों को सुखद अनुभव मिलता है. मल्लेला तीर्थम वॉटरफॉल नल्लामला के घने जंगलों के बीच स्थित एक खूबसूरत और शांत प्राकृतिक स्थल है. जो लोग हैदराबाद से ज्यादा दूर यात्रा नहीं करना चाहते, उनके लिए यह बेहतरीन विकल्प माना जाता है. यह झरना कृष्णा नदी की एक सहायक धारा से बनता है और चारों ओर फैली हरियाली इसकी सुंदरता को और बढ़ा देती है. यहां पहुंचने के लिए करीब 350 सीढ़ियां उतरनी पड़ती हैं, जिसके दौरान जंगल का मनमोहक दृश्य देखने को मिलता है. धुंध और ठंडी फुहारों से भरा वातावरण पर्यटकों को आकर्षित करता है. हैदराबाद से लगभग 185 किलोमीटर दूर होने के कारण यह एक शानदार वीकेंड ट्रिप डेस्टिनेशन है. गायत्री वॉटरफॉल (गदिधा गुंडम) उन पर्यटकों के लिए खास आकर्षण है, जो भीड़भाड़ से दूर प्रकृति के बीच सुकून भरे पल बिताना चाहते हैं. कदम वन क्षेत्र के भीतर स्थित यह झरना अपनी प्राकृतिक और अछूती खूबसूरती के लिए जाना जाता है. यहां तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को छोटा-सा जंगल ट्रेक करना पड़ता है, जो यात्रा को और रोमांचक बना देता है. मानसून की पहली बारिश के बाद झरने का जलप्रवाह बढ़ जाता है और आसपास का क्षेत्र हरियाली से भर उठता है. हैदराबाद से करीब 270 किलोमीटर दूर स्थित यह स्थल एडवेंचर और नेचर लवर्स के लिए बेहतरीन डेस्टिनेशन माना जाता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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एथेनॉल वाले पेट्रोल पर एक्‍साइज ड्यूटी खत्‍म, ग्राहक से लेकर कंपनियों तक...

Last Updated:June 11, 2026, 07:42 IST Excise Duty Petrol Waived: ईरन जंग की वजह से वेस्‍ट एशिया में हालात सामान्‍य नहीं रह गए हैं. एनर्जी कॉरिडोर के नाम से विख्‍यात होर्मुज स्‍ट्रेट से LPG, पेट्रोल और डीजल लदे जहाजों की आवाजाही लगभग ठप पड़ी हुई है. इसका असर एशिया से लेकर यूरोप तक के देशों पर पड़ रहा है. कई देशों में तो एनर्जी क्राइसिस जैसी स्थिति पैदा हो गई है. सरकार ने एथेनॉल ब्‍लेंडेड पेट्रोल पर लगने वाले एक्‍साइज ड्यूटी को शून्‍य करने का फैसला किया है. (फोटो: Reuters) Petrol Excise Duty Waived: सरकार ने एथेनॉल मिले पेट्रोल पर लगने वाले एक्‍साइज ड्यूटी को खत्‍म कर दिया है. सरकार के इस फैसले से ग्राहकों से लेकर तेल कंपनियों और आम किसानों को भी फायदा होने की उम्‍मीद है. बता दें कि सरकार ने एथेनॉल मिक्‍स पेट्रोल पर एक्‍साइज ड्यूटी को ऐसे समय में खत्‍म या शून्‍य करने का फैसला किया है, जब ईरान जंग की वजह से एनर्जी कॉरिडोर के नाम से मशहूर होर्मुज स्‍ट्रेट से गैस के साथ ही पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति भी बाधित हुई है. ऐसे में एनर्जी सिक्‍योरिटी को लेकर नई नीति अपनाई जा रही है, ताकि ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके. जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने पेट्रोल में अधिक मात्रा में एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 22 प्रतिशत से 30 प्रतिशत तक एथेनॉल ब्‍लेंडेड पेट्रोल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) और कुछ अन्य सेस यानी उपकर में छूट देने का फैसला किया है. इस संबंध में सरकार ने गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया. इसके तहत E22, E25, E27 और E30 श्रेणी के पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी शून्य कर दी गई है. तीसरा बाड़ा आयातक देश भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक और उपभोक्ता देश है. ऐसे में सरकार लंबे समय से पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की नीति पर काम कर रही है. अब तक E20 यानी 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा था, लेकिन नए फैसले से इससे अधिक मिश्रण वाले ईंधन को भी बढ़ावा मिलेगा. ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने में सहायता विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से भविष्य में ईंधन कीमतों को स्थिर रखने में सहायता मिल सकती है. साथ ही एथेनॉल उत्पादन के लिए कृषि क्षेत्र में मांग बढ़ेगी, जिससे किसानों को लाभ होगा. हालांकि, अधिक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का उपयोग सभी वाहनों में तुरंत संभव नहीं होगा. इसके लिए वाहन निर्माताओं को ऐसे इंजन विकसित करने होंगे जो उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के अनुकूल हों. किसानों की आय बढ़ाने में मदद एथेनॉल एक जैव-ईंधन (बायोफ्यूल) है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है. पेट्रोल में इसके उपयोग से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने, कार्बन उत्सर्जन घटाने और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है. सरकार का यह कदम ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और हरित ईंधन को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. एक्‍साइज ड्यूटी क्‍या है? एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) वह कर है, जो किसी देश के भीतर निर्मित या उत्पादित वस्तुओं पर सरकार द्वारा लगाया जाता है. भारत में यह कर केंद्र सरकार के राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्रोत रहा है. पेट्रोल, डीजल, तंबाकू उत्पाद और कुछ अन्य वस्तुओं पर केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी वसूलती है. पेट्रोलियम उत्पादों के मामले में एक्साइज ड्यूटी का भुगतान आमतौर पर रिफाइनरियों या तेल कंपनियों द्वारा किया जाता है, लेकिन इसका भार अंततः उपभोक्ताओं तक पहुंचता है और यह ईंधन की खुदरा कीमतों में शामिल होता है. सरकार समय-समय पर राजस्व आवश्यकताओं, महंगाई नियंत्रण और ऊर्जा नीति के अनुसार एक्साइज ड्यूटी की दरों में बदलाव करती है. एक्साइज ड्यूटी में छूट या कटौती का सीधा असर ईंधन की कीमतों और उपभोक्ताओं की लागत पर पड़ सकता है. About the Author Manish Kumar बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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गर्मी में आप भी पशुओं को खिला रहे हैं हरी चरी, तो...

Last Updated:June 11, 2026, 06:42 IST गर्मी के मौसम में चरी दुधारू पशुओं के लिए लाभदायक है, लेकिन सही उम्र की चरी, संतुलित मात्रा और उचित प्रबंधन के साथ ही इसका पूरा फायदा मिलता है. थोड़ी सी लापरवाही पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन दोनों को प्रभावित कर सकती है. रायबरेली: गर्मी के मौसम में दुधारू पशुओं के लिए हरा चारा बेहद लाभदायक माना जाता है. किसान अक्सर दूध उत्पादन बढ़ाने और पशुओं को पर्याप्त पोषण देने के लिए चरी खिलाते हैं. लेकिन पशु विशेषज्ञों का कहना है कि यदि चरी को सही तरीके से और संतुलित मात्रा में नहीं खिलाया गया तो यह पशुओं के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक भी साबित हो सकती है. दरअसल, रायबरेली जिले के राजकीय पशु चिकित्सालय शिवगढ़ के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ इंद्रजीत वर्मा (MVSC मथुरा) लोकल 18 से बात करते हुए बताते हैं कि भीषण गर्मी के बीच पशुपालक अपने दुधारू पशुओं को हरा चारा देने पर जोर देते हैं. खासकर ज्वार, बाजरा और मक्का की चरी पशुओं को खूब खिलाई जाती है. हालांकि, उनका कहना है कि कम उम्र की चरी या अधिक मात्रा में हरा चारा खिलाने से पशुओं में अपच, पेट फूलने और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. ऐसे में चरी खिलाने से पहले कुछ जरूरी सावधानियां अपनाना बेहद आवश्यक है. बरतें ये सावधानी इंद्रजीत वर्मा बताते हैं कि गर्मी के मौसम में हरे चारे के रूप में चरी पशुओं के लिए पोषण का अच्छा स्रोत है. इसमें पर्याप्त मात्रा में ऊर्जा, विटामिन और खनिज तत्व पाए जाते हैं, जो दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद करते हैं. लेकिन चरी को काटने और खिलाने के समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए.वह बताते हैं कि ज्वार की कम उम्र वाली चरी में हाइड्रोसायनिक एसिड (HCN) की मात्रा अधिक हो सकती है, जो पशुओं के लिए विषैली साबित हो सकती है. इसलिए ज्वार की चरी को कम से कम 50 से 60 दिन की उम्र होने के बाद ही पशुओं को खिलाना चाहिए. इसके अलावा हरे चारे को कभी भी खाली पेट अधिक मात्रा में नहीं देना चाहिए.पहले पशुओं को सूखा चारा या भूसा खिलाएं, उसके बाद हरा चारा दें.इससे पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता और पेट फूलने की समस्या से बचाव होता है. हरे चारे के साथ संतुलित आहार देना भी जरूरी  केवल चरी पर निर्भर रहने से पोषण असंतुलन हो सकता है.पशुओं को स्वच्छ और पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध कराना भी आवश्यक है, क्योंकि गर्मी के मौसम में पानी की कमी से दूध उत्पादन प्रभावित हो सकता है. आगे की जानकारी देते हुए वह बताते हैं कि चरी पर ओस या बारिश का पानी होने की स्थिति में उसे तुरंत न खिलाएं. चारा थोड़ा सूखने के बाद ही पशुओं को दें.किसी भी प्रकार की समस्या दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करें. संतुलित मात्रा में दे गर्मी के मौसम में चरी दुधारू पशुओं के लिए लाभदायक है, लेकिन सही उम्र की चरी, संतुलित मात्रा और उचित प्रबंधन के साथ ही इसका पूरा फायदा मिलता है. थोड़ी सी लापरवाही पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन दोनों को प्रभावित कर सकती है. About the Author Vivek Kumar विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Rae Bareli,Rae Bareli,Uttar Pradesh Source link

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हम विलय नहीं कर रहे… राहुल-अभिषेक मुलाकात के बाद टीएमसी ने अटकलों...

होमताजा खबरदेश हम विलय नहीं कर रहे… राहुल-अभिषेक मुलाकात के बाद TMC ने अटकलों को किया खारिज Last Updated:June 11, 2026, 05:46 IST TMC Rejects Speculation Of Merger With Congress: टीएमसी ने कांग्रेस में विलय की अटकलें खारिज कर दी है. बुधवार को राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी की डेढ़ घंटे से अधिक चली मीटिंग में विपक्षी एकता पर चर्चा हुई. अभिषेक बनर्जी और राहुल गांधी. तृणमूल कांग्रेस ने कांग्रेस में पार्टी के संभावित विलय की अटकलों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के बीच हुई मुलाकात में इस तरह का कोई प्रस्ताव या चर्चा नहीं हुई. पार्टी ने इन खबरों को अफवाह और तथ्यहीन बताया है. राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी के बीच बुधवार को 10 जनपथ में करीब डेढ़ घंटे तक बैठक हुई. यह बैठक ऐसे समय में हुई जब एक दिन पहले ही पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की थी. दोनों बैठकों के बाद राजनीतिक गलियारों में टीएमसी और कांग्रेस के बीच संभावित नजदीकियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं. हालांकि टीएमसी सूत्रों ने साफ कहा कि कांग्रेस में पार्टी के विलय को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई. कांग्रेस की ओर से भी इस तरह की किसी भी संभावना से इनकार किया गया है. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी सोशल मीडिया पर कहा कि सोनिया गांधी और ममता बनर्जी की मुलाकात को लेकर मीडिया में चल रही कई खबरें पूरी तरह गलत हैं. उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से व्यक्तिगत संबंध रहे हैं और मुलाकात बेहद सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई. सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी की बैठक में पश्चिम बंगाल की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों, राज्य में कांग्रेस और टीएमसी के बीच संभावित समन्वय तथा विपक्षी एकता को मजबूत करने के मुद्दों पर चर्चा हुई. इसके अलावा 2029 के लोकसभा चुनाव और इंडिया गठबंधन को अधिक प्रभावी बनाने की रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया गया. बैठक के बाद टीएमसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक तस्वीर साझा करते हुए कहा कि दोनों नेताओं की मुलाकात लोकतंत्र की रक्षा, संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने और देश के नागरिकों के हितों के लिए साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है. पार्टी ने अपने संदेश में कहा कि टीएमसी गठबंधन एकजुट है. इस बीच TMC के भीतर जारी असंतोष और बगावती सुरों ने भी राजनीतिक चर्चाओं को हवा दी है. कुछ बागी नेताओं के खेमे से यह दावा किया गया है कि लोकसभा में पार्टी के 28 सांसदों में से कम से कम 19 सांसद उनके संपर्क में हैं. हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है. उधर, शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने सुझाव दिया कि टीएमसी और एनसीपी (शरद पवार गुट) जैसी पार्टियां, जो कभी कांग्रेस से निकली थीं, उन्हें फिर से एकजुट होकर कांग्रेस को मजबूत करना चाहिए. उन्होंने इसे वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों की जरूरत बताया. इसी बीच टीएमसी को एक और झटका तब लगा जब राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने पार्टी और राज्यसभा दोनों से इस्तीफा दे दिया. इससे पहले राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय भी पार्टी छोड़ चुके हैं. About the Author संतोष कुमार न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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bus fare increased farmers and passengers angry in purnia public opinion

Last Updated:June 10, 2026, 22:08 IST Purnia Public Opinion: 1 जून से बसों के किराए में 10-15% की वृद्धि के बाद पूर्णिया की जनता का बजट बिगड़ गया है. यात्रियों का कहना है कि काम की मजबूरी में सफर तो करना ही पड़ेगा, लेकिन सरकार ने बोझ बढ़ा दिया है. सबसे ज्यादा आक्रोशित किसान हैं. जिनका कहना है कि फसल का दाम तो नहीं बढ़ा, लेकिन किराया बढ़ गया. बस संचालकों के अनुसार, बढ़े किराए के कारण बसों में यात्री कम मिल रहे हैं. ख़बरें फटाफट पूर्णिया: बिहार सरकार द्वारा 1 जून से बस के किराए में 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी का असर पूर्णिया में साफ दिखने लगा है. इस फैसले पर आम जनता की राय बंटी हुई है. कुछ इसे महंगाई के दौर में जरूरी मान रहे हैं, तो कुछ इसे सीधे तौर पर अपनी जेब पर बोझ बता रहे हैं. लेकिन, इस पूरे मामले में पूर्णिया के किसानों ने जो बात कही है, वह हर किसी को सोचने पर मजबूर कर रही है. अनाज के दाम स्थिर, फिर किराया क्यों बढ़ा?लोकल 18 की टीम ने जब पूर्णिया बस स्टैंड पर यात्रियों, बस संचालकों और किसानों से बातचीत की. तो लोगों का दर्द छलक पड़ा. जहां कुछ यात्रियों ने महंगाई को देखते हुए किराए की वृद्धि को सही बताया. वहीं मीनू झा, पुष्कर कुमार और राजेश कुमार जैसे नियमित यात्रियों का कहना है कि 10-15 प्रतिशत की बढ़ोतरी आम आदमी के बजट से बाहर है. सबसे तीखी प्रतिक्रिया किसानों की रही. किसानों का कहना है कि सरकार हमारे द्वारा उपजाए गए फसलों का तो उचित मूल्य नहीं बढ़ाती, लेकिन किराया बढ़ाने में तनिक भी देरी नहीं करती. अनाज के दाम तो वैसे ही हैं, लेकिन हर जरूरी सेवा महंगी होती जा रही है. काम है तो जाना पड़ेगा, चाहे किराया कितना भी होबस स्टैंड पर मौजूद लोगों का कहना है कि सरकारी फैसले के कारण किराया तो बढ़ गया है. लेकिन लोगों की मजबूरी कम नहीं हुई है. यात्रियों का कहना है कि काम के सिलसिले में सफर तो करना ही पड़ेगा. चाहे किराया कितना भी क्यों न हो जाए. हालांकि लोगों ने यह जरूर कहा कि सरकार को 15-20 प्रतिशत तक की वृद्धि के बजाय 5 प्रतिशत ही किराया बढ़ाना चाहिए था. उदाहरण के तौर पर जिस रूट का किराया पहले 120 रुपये था. अब उसके लिए 140 से 150 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं. सवारी के इंतजार में खाली खड़ी बसेंकिराया बढ़ने का सीधा असर बस ऑपरेटरों पर भी पड़ा है. बस चालकों और कंडक्टरों की मानें तो किराया वृद्धि के बाद यात्रियों की संख्या में भारी कमी आई है. पूर्णिया से भागलपुर रूट पर चलने वाली बसों में भी सीटें खाली रह रही हैं. बस संचालकों का कहना है कि लोग अब लंबी दूरी की यात्रा करने से कतराने लगे हैं. इस मामले पर पूर्णिया के प्रमंडलीय परिवहन अधिकारी प्रतीक कुमार ने कहा कि सरकार के आदेशानुसार ही किराए में बढ़ोतरी की गई है. उन्होंने यात्रियों को आश्वस्त किया कि अलग-अलग रूटों पर परिवहन सेवाओं का संचालन सुचारू रूप से जारी रहेगा. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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Amit Shah jhalmuri TMC remark: अमित शाह ने खाई झालमुड़ी, ल‍िखा Tangy,...

Last Updated:June 10, 2026, 22:17 IST भारत मंडपम में NDA की बैठक के दौरान अमित शाह ने बंगाल की मशहूर झालमुड़ी का स्वाद लिया और सोशल मीडिया पर उसकी तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा- Tangy, Masaledar and Crunchy. बस फिर क्या था, इंटरनेट ने इन तीन शब्दों के पहले अक्षरों को जोड़कर TMC बना दिया और इसे तृणमूल कांग्रेस पर सियासी तंज बताने लगा. अमित शाह ने राजनाथ सिंह के साथ खाई झालमुड़ी. गृहमंत्री अमित शाह कई बार संकतों में ऐसी बातें कह जाते हैं, जो बाद में सच साबित होता ही है. लेकिन इस बार कहानी कुछ अलग है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रिकॉर्ड कार्यकाल के जश्न मनाने का मौका था और भारत मंडपम में NDA नेताओं की मीटिंग चल रही थी. देशभर के राज्यों की झलक दिखाने वाले स्टॉल लगे थे. पश्चिम बंगाल के स्टॉल पर परोसी जा रही थी बंगाल की मशहूर झालमुड़ी. वहीं पहुंचे गृह मंत्री अमित शाह. झालमुड़ी खाई, फोटो खिंचवाई और फिर सोशल मीडिया पर तस्वीरें पोस्ट कर दीं. लेकिन असली कहानी तस्वीरों से ज्यादा उनके कैप्शन में छिपी थी. Source link

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‘आगे भी महान उपलब्‍ध‍ियां हास‍िल करेंगे मेरे दोस्‍त’, पीएम मोदी के ल‍िए...

सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर अमेर‍िकी राष्‍ट्रपत‍ि डोनाल्‍ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी. ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर पीएम मोदी के ल‍िए स्‍पेशल मैसेज लिखा, मेरे मित्र, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले प्रधानमंत्री बनने पर बधाई. और वह एक महान प्रधानमंत्री हैं. वे मजबूत, स्वस्थ और बुद्धिमान व्यक्ति हैं तथा आने वाले वर्षों में भी महान उपलब्धियां और सफलता हासिल करेंगे. ट्रंप का यह संदेश ऐसे वक्‍त में आया है, जब दोनों देशों के र‍िश्तों में उतार चढ़ाव चल रहा है. ट्रेड डील काफी हद तक पूरी हो चुकी है और उस पर मुहर लगना बाकी है. एक्‍स्‍पोर्ट और तेल खरीद के मुद्दे पर खींचतान चल रही है. हालांक‍ि, ट्रंप लगातार पीएम मोदी को अपना सबसे अच्‍छा दोस्‍त बताते रहे हैं और तारीफ करते रहे हैं. कहा ये भी जा रहा है कि जी20 समिट में शामिल होने के लिए पीएम मोदी जब फ्रांस जाएंगे तो उनकी मुलाकात राष्‍ट्रपत‍ि ट्रंप से हो सकती है. ट्रंप के संदेश पर पीएम मोदी का जवाब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप के बधाई संदेश का जवाब देते हुए लिखा, राष्ट्रपति ट्रंप, आपकी हार्दिक शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद. मैं भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाने के लिए आपके साथ मिलकर काम करने को उत्सुक हूं. यह साझेदारी हमारे दोनों देशों और पूरी दुनिया के हित में है. कई राष्‍ट्राध्‍यक्षों ने दी शुभकामनाएं श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायकेयह उपलब्धि केवल आपके लंबे कार्यकाल का प्रमाण नहीं है, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की जनता द्वारा आपके नेतृत्व पर बार-बार जताए गए विश्वास और भरोसे का भी प्रतीक है. भारत में हुए आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन तथा मोदी की दूरदर्शी सोच ने भारत के बाहर भी अनेक लोगों को प्रेरित किया है. मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिमप्रधानमंत्री मोदी को भारत के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर हार्दिक बधाई. यह उपलब्धि भारत के विकास, समृद्धि और वैश्विक प्रतिष्ठा को आगे बढ़ाने के लिए उनके समर्पित सार्वजनिक जीवन और नेतृत्व का प्रमाण है. मैं प्रधानमंत्री मोदी की निरंतर सफलता तथा भारत की जनता के लिए शांति, प्रगति और समृद्धि की कामना करता हूं. रूस की ओर से बधाईक्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने मोदी को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में करोड़ों लोग गरीबी से बाहर निकले हैं और भारत दुनिया की प्रमुख आर्थिक शक्तियों में शामिल हुआ है. रूस ने भारत-रूस साझेदारी को और मजबूत होने की उम्मीद भी जताई. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री Narendra Modi को बधाई देते हुए भारत-इज़राइल मित्रता और उनके नेतृत्व की सराहना की. उन्होंने कहा कि मोदी के नेतृत्व में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है और दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी आगे भी मजबूत होती रहेगी. कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी मार्क कार्नी ने मोदी को भारत के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर बधाई देते हुए लोकतांत्रिक जनादेश और भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने भारत-कनाडा संबंधों को आगे बढ़ाने और साझा हितों पर मिलकर काम करने की इच्छा भी जताई. इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने दोनों देशों के लोगों के लिए नए अवसर पैदा करने में प्रधानमंत्री मोदी के साथ काम करने की इच्‍छा व्यक्त की. साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स ने कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री मोदी की वर्षों की समर्पित सेवा और नेतृत्व को दर्शाती है. उन्होंने भारत और साइप्रस के बीच संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की. डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने श्री मोदी को बधाई दी और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के लिए उनके साथ काम जारी रखने की इच्‍छा व्यक्त की। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने वर्षों से भारत की आर्थिक और विकासात्मक प्रगति का मार्गदर्शन किया है और भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी एबॉट ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में भारत ने बुनियादी ढांचे, सूचना प्रौद्योगिकी, बिजली और स्वच्छता के क्षेत्र में काफी सुधार किया है. ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने भी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए उन्हें एक सच्चा राजनेता बताया, जिन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था और विश्व में इसकी प्रतिष्ठा को बदल दिया है. Source link

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कांग्रेस में शामिल होगी टीएमसी? ममता बनर्जी और सोनिया गांधी की मुलाकात...

होमताजा खबरदेश कांग्रेस में शामिल होगी TMC? ममता-सोनिया की मुलाकात का जयराम रमेश ने खोला राज Last Updated:June 10, 2026, 23:55 IST ममता बनर्जी के कोलकाता लौटने के बाद नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इंतजार कर रहे मीडियाकर्मियों ने उनसे तृणमूल कांग्रेस के कांग्रेस में पुनर्विलय की संभावना के बारे में पूछा. हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री बिना कुछ कहे जल्दी से अपनी गाड़ी में बैठकर वहां से प्रस्थान कर गईं. ख़बरें फटाफट टीएमसी और कांग्रेस के विलय की अटकले लगाई जा रही थीं. (पीटीआई) नई दिल्ली. कांग्रेस ने बुधवार को उन खबरों को पूरी तरह से गलत करार दिया, जिनमें दावा किया गया है कि पार्टी संसदीय दाल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी के बीच हुई मुलाकात के दौरान विलय संबंधी विषय पर चर्चा हुई थी. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि दोनों नेताओं ने अपने व्यक्तिगत विषयों को लेकर चर्चा की थी. टीएमसी में बगावत के बीच ममता बनर्जी ने मंगलवार को सोनिया गांधी से उनके आवास पर मुलाकात की थी. कुछ खबरों में दावा किया गया है कि दोनों नेताओं की मुलाकात के दौरान कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की तरफ से यह प्रस्ताव दिया गया कि ममता अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में कर दें. रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘सोनिया गांधी और ममता बनर्जी के बीच हुई मुलाकात के बाद आई कुछ पूरी तरह से गलत हैं. यह बैठक बहुत सौहार्दपूर्ण रही और उनके लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को देखते हुए कई व्यक्तिगत विषयों पर बातचीत हुई.’ ममता बनर्जी ने 1 जनवरी, 1998 को कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की. उन्होंने देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी के नेतृत्व पर पश्चिम बंगाल में तत्कालीन सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार के खिलाफ आंदोलन संगठित करने में अनिच्छा का आरोप लगाया था. हालांकि, पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस विधायक दल के नवगठित लेकिन बहुमत वाले गुट के नेता और सदन में विपक्ष के आधिकारिक नेता ऋतब्रत बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के पुनर्मिलन की किसी भी संभावना से स्पष्ट रूप से इनकार किया. ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि हमारा गुट पश्चिम बंगाल विधानसभा में मुख्य तृणमूल कांग्रेस है. हमने 58 विधायकों के साथ शुरुआत की थी, और आज यह संख्या 64 है. मैंने सुना है कि तृणमूल कांग्रेस के 28 लोकसभा सदस्यों में से अधिकांश अब बागी गुट में हैं. हम मुख्य तृणमूल कांग्रेस हैं, इसलिए हमारी पार्टी के कांग्रेस में विलय का कोई सवाल ही नहीं उठता. पश्चिम बंगाल में भी राज्य कांग्रेस नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के पुनर्विलय की संभावना पर संशय जताया. पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार के अनुसार ऐसी संभावना में दो प्रमुख कारक शामिल हैं. सरकार ने कहा कि पहला, जो भी कांग्रेस में वापस आना चाहेगा, उसे राहुल गांधी को अपना सर्वोच्च नेता स्वीकार करना होगा. दूसरा, यदि कोई यह सोचता है कि वह अपने भ्रष्टाचार के पुराने कृत्यों के कारण कानूनी पेचीदगियों से बचने के लिए कांग्रेस का इस्तेमाल ढाल के रूप में करेगा, तो यह स्वीकार्य नहीं होगा. About the Author Rakesh Ranjan Kumar राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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