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संसद में अब होगा काम, पेपर लीक बिल पर मान गए सारे...

होमताजा खबरदेश संसद में अब होगा काम, पेपर लीक बिल पर मान गए सारे दल, लोकसभा में होगी महाबहस Last Updated:July 27, 2026, 23:34 IST Lok Sabha Anti Paper Leak Bill: संसद के मानसून सत्र में मंगलवार को लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर आठ घंटे तक चर्चा होगी. सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनने के बाद गतिरोध समाप्त हुआ है. कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के बहस में हिस्सा लेने की संभावना है. NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के बाद लाए गए इस विधेयक में पेपर लीक और परीक्षा माफिया के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है. संसद के मानसून सत्र में कई दिनों से जारी गतिरोध के बाद मंगलवार को लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर विस्तृत चर्चा होगी. संसद के मानसून सत्र में कई दिनों से जारी गतिरोध के बाद मंगलवार को लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर विस्तृत चर्चा होगी. सरकार और विपक्ष के बीच बनी सहमति के बाद सदन में इस अहम विधेयक पर करीब आठ घंटे तक बहस कराने का फैसला लिया गया है. माना जा रहा है कि NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर यह संसद की सबसे महत्वपूर्ण चर्चाओं में से एक होगी. समाचार एजेंसी एएनआई सूत्रों के हवाले से बताया कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के फ्लोर लीडर्स के साथ बैठक की थी. इसी बैठक में गतिरोध खत्म करने और विधेयक पर विस्तार से चर्चा कराने पर सहमति बनी. इसके बाद संसद में इस बिल पर व्यापक बहस का रास्ता साफ हो गया. राहुल गांधी संभालेंगे कांग्रेस का मोर्चा कांग्रेस ने भी इस चर्चा में सक्रिय रूप से हिस्सा लेने का फैसला किया है. सूत्रों के अनुसार, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पार्टी की ओर से इस विधेयक पर मुख्य वक्ता होंगे. कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के भी बहस में हिस्सा लेने की संभावना है. इससे पहले मंगलवार सुबह विपक्षी दलों के फ्लोर लीडर्स की बैठक में अंतिम रणनीति तय की जाएगी. सोमवार को हंगामे की वजह से नहीं हो सकी चर्चा सोमवार को सरकार इस विधेयक पर चर्चा शुरू कराना चाहती थी, लेकिन विपक्ष के हंगामे और लगातार नारेबाजी के कारण कार्यवाही बाधित होती रही. इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई थी. अब दोनों पक्षों के बीच बनी सहमति के बाद मंगलवार को विधेयक पर विस्तृत बहस होगी. क्या है एंटी पेपर लीक बिल? देशभर में NEET-UG 2026 पेपर लीक को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद केंद्र सरकार ने मौजूदा कानून को और सख्त बनाने के लिए यह संशोधन विधेयक पेश किया है. केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इसे लोकसभा में पेश किया था. सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य पेपर लीक, संगठित नकल गिरोह और परीक्षा माफिया पर कड़ा शिकंजा कसना है. बिल में क्या-क्या बड़े प्रावधान? प्रस्तावित संशोधन के तहत परीक्षा में धांधली करने वालों के लिए सजा को काफी सख्त किया गया है. अब ऐसे मामलों में कम से कम पांच साल और अधिकतम दस साल तक की जेल हो सकती है. साथ ही दोषियों पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा. अगर कोई संगठित गिरोह या परीक्षा माफिया इस तरह के अपराध में शामिल पाया जाता है, तो उसके लिए कम से कम सात साल की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है. फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी सुनवाई विधेयक में यह भी प्रस्ताव है कि पेपर लीक और परीक्षा धोखाधड़ी से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित किए जाएं, ताकि मुकदमों का जल्द निपटारा हो सके और दोषियों को समय पर सजा मिले. सरकार का दावा है कि यह कानून देश की सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा. About the Author Saad Omar साद बिन उमर मीडिया इंडस्ट्री में 15 साल से अधिक के अनुभव वाले सीनियर पत्रकार हैं. वह अभी News18 Hindi (hindi.news18.com) से जुड़े हैं, जहां वे होम पेज डेस्क पर काम करते हैं. कहां से … और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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Sushant Sinha: पहले बीजेपी के गुंडे बताया… जब एक्शन होने लगा तो...

छात्र आंदोलन के नाम पर जो लोग गुंडई कर रहे थे, जो लोग हिंसा फैला रहे थे, उनका एक एक करके हिसाब हो रहा है. ताबड़तोड़ एक्शन हो रहा है. इनकी पहचान हो चुकी है. इनकी धरपकड़ चल रही है. चाहे दिल्ली हो, चाहे बिहार हो, चाहे बंगाल हो… ऐसे लोग अब बचेंगे नहीं, जिन्होंने छात्र आंदोलन में घुसकर उत्पात मचाया, हुड़दंग किया, हिंसा फैलाई. जिन्होंने पुलिस पर हमला किया, जवानों को पीटा, उन पर पत्थर चलाए, उनके सिर फोड़े… ऐसे लोग सोच रहे थे कि ये छात्र आंदोलन के नाम पर बच जाएंगे, इन पर कोई हाथ नहीं डालेगा, लेकिन ये लोग भूल गए कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं. और आज नहीं तो कल इनके गले तक कानून के हाथ पहुंच जाएंगे. यही काम हो रहा है, लेकिन जब ये काम हो रहा है तो इंडी वालों और कॉकरोच पार्टी वाले तिलमिला गए हैं. पहले ये लोग कह रहे थे कि जिन्होंने प्रोटेस्ट में हिंसा की, वो तो बीजेपी के गुंडे हैं, लेकिन जब एक्शन होने लगा है तो ये बवाल करने लगे कि ऐसा क्यों हो रहा है. हिंसा फैलाने वालों का इलाज हो रहा कॉकरोच पार्टी तो फिर से प्रोटेस्ट में बैठने की धमकी दे रही है. उधर इंडी वाले इसी को लेकर संसद में माहौल बना रहे हैं. जबकि आप देखिए कि छात्र आंदोलन में क्रिमिनल्स तक घुस गए थे. छात्र आंदोलन की आड़ लेकर पूरे देश में आग लगाने की तैयारी थी. इसीलिए आप देखिए कि सिर्फ दिल्ली के जंतर मंतर पर ही नहीं, देश के अलग अलग हिस्सों में प्रोटेस्ट के नाम पर हिंसा फैलाई गई. लेकिन अब इन हिंसा फैलाने वालों का इलाज हो रहा है. कोलकाता में छात्र आंदोलन के नाम पर जो प्रोटेस्ट हुआ था, उसमें वही पैटर्न दिखा था कि पीएम के खिलाफ भद्दी-भद्दी बातें कहो, पब्लिक प्रॉपर्टी तोड़ो, पुलिस वालों पर हमले करो. मीडिया पर हमले करो. ये सब करने वालों पर अब पुलिस ताबड़तोड़ एक्शन ले रही है. मीडिया पर हमले के लिए भड़काने के आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है और कोलकाता में इसकी परेड कराई गई. आरोपी को नंगे पैर कोलकाता की सड़कों पर परेड कराई गई. पुलिस इनसे पूछताछ कर रही है. इसी तरह से कोलकाता में हंगामा और बवाल करने वाले लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है. बाकी और आरोपियों की भी धर पकड़ जारी है. कॉकरोच पार्टी के प्रोटेस्ट के दौरान मीडिया पर हमले की कई तस्वीरें आई थी. मीडिया को जानबूझ के निशाना बनाया गया. कई पत्रकारों पर जानलेवा हमले हुए. महिला रिपोर्टर्स से बदसलूकी की गई, महिला पत्रकारों को भीड़ ने बुरी तरह से घेर के अटैक किया. दिल्ली बिहार और बंगाल तीनों जगह ऐसा देखने को मिला. इसके विरोध में कोलकाता में मीडियाकर्मियों ने विरोध मार्च निकाला. कोलकाता में पत्रकारों ने मार्च निकाला और कहा कि मीडिया पर हमले बंद होने चाहिए. इधर बिहार में भी प्रदर्शन के दौरान हिंसा और बवाल करने वालों पर एक्शन हो रहा है. बिहार में CJP के समर्थन में हुए प्रोटेस्ट में भयंकर हंगामा हुआ था. पुलिस के साथ टकराव हुआ था. पुलिस पर पथराव भी किया गया था. इसके बाद पुलिस ने हंगामा करने वालों को ट्रेस किया और उनकी तस्वीरें चौराहों पर चिपका दी हैं. इसमें छात्रों और उनके परिवार वालों से अपील की गई है कि शांति के साथ प्रदर्शन करेंगे. नहीं तो हंगामा करने वालों पर एक्शन लिया जाएगा. बिहार पुलिस ने हंगामा करने वाले डेढ़ सौ से ज्यादा लोगों की फोटो जारी की है. इतना ही नहीं, जैसे-जैसे इन लोगों की शिनाख्त हो रही है, और लोकेशन का पता चल रहा है. सभी को पूछताछ के लिए पुलिस ले जा रही है. अगर इन लोगों ने कुछ नहीं किया होगा तो आराम से छूट जाएंगे. लेकिन अगर किसी ने भी हंगामा, पत्थरबाजी या बवाल किया होगा तो वो धरा जाएगा. भारत में लोगों को भड़का रहा था पाकिस्तान! इसी तरह से पेपरलीक के खिलाफ महाराष्ट्र में भी प्रोटेस्ट हुआ था. महाराष्ट्र में भी जमकर हंगामा देखने को मिला था. पुलिस के साथ भिड़ंत की तस्वीरें सामने आई थीं. अब महाराष्ट्र की साइबर सेल की इस प्रोटेस्ट को लेकर बड़ा खुलासा किया है, जिसके मुताबिक CJP प्रोटेस्ट के दौरान पाकिस्तान-मलेशिया से सोशल मीडिया अकाउंट चल थे. साइबर सेल ने 500 से ज्यादा सोशल मीडिया अकाउंट को ट्रेस किया. इससे देश में माहौल खराब करने की कोशिश में पाकिस्तान का रोल सामने आया. पता चला कि इंस्टाग्राम, फेसबुक, X के जरिए भारत में लोगों को पाकिस्तान भड़का रहा था. असम में भी कॉकरोच पार्टी के सपोर्ट में विरोध प्रदर्शन हुए थे. इस प्रोटेस्ट को SFI ने आयोजित किया था. आरोप है कि इस दौरान भीड़ को उकसाने वाले नारे लगाए गए. इसी पर गुवाहाटी पुलिस ने SFI के 6 लोगों को गिरफ्तार किया है. असम पुलिस के मुताबिक, प्रोटेस्ट के दौरान शांति भंग होने की आशंका थी. भीड़ को भड़काने की कोशिश की जा रही थी. गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ हो रही है. पुलिस को विदेशी फंडिंग की भी आशंका है. ऐसे में विदेशी फंडिंग के एंगल से भी जांच हो रही है. वैसे तो जांच के बाद पता चलेगा कि विदेशी फंडिंग हुई थी या नहीं. लेकिन आप याद करिए ये वही पुरानी टूलकिट की तरह लग रहा है, और अब तो इस में ग्रेटा थनबर्ग भी शामिल हो गई हैं. वही ग्रेटा थनबर्ग जो भारत के खिलाफ विदेशों में माहौल बनाने में आगे रहती हैं. पेपरलीक और छात्रों के नाम पर जो प्रदर्शन हुआ, उसकी एक ही डिमांड थी कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा होना चाहिए. लेकिन इस प्रोटेस्ट की लाइन और लेंग्थ शुरू से ही अलग दिख रही थी. प्रोटेस्ट में पीएम मोदी के लिए अपशब्द कहे गए. पोस्टर बैनर के साथ ऐसे ऐसे बयान दिए गए जो कोई भी एक्सेप्ट नहीं कर सकता है. इन सब पर अब दिल्ली पुलिस का एक्शन शुरू हो गया है. दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नोटिस दिया है. PM मोदी और केंद्र सरकार के खिलाफ अभद्र पोस्ट्स हटाए गए हैं. दिल्ली पुलिस ने ऐसी सैकड़ों अभद्र पोस्ट्स को चिह्नित किया. AI से बनीं अपमानजनक पोस्ट्स जांच के दायरे में हैं. दिल्ली पुलिस ने

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Tamil Nadu Minister Scotty Ride। स्कूटी उठाई और निकल पड़े… मंत्री जी...

होमताजा खबरदेश स्कूटी उठाई, निकल पड़े… मंत्री जी का अंदाज देखा क्या? काफिले को टाटा-बायबाय Last Updated:July 27, 2026, 21:06 IST Tamil Nadu Minister Scotty Ride: तमिलनाडु के जल संसाधन मंत्री आनंद स्कूटी पर सवार होकर कूवम नदी के विकास कार्यों का जायजा लेने पहुंचे. उन्होंने कोयंबेडु के पाडीकुप्पम में 40 करोड़ की लागत वाले 21 किमी लंबे सफाई व सौंदर्यीकरण प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया. यह काम NGO एक्सनोरा के सहयोग से हो रहा है. 71 किमी लंबी कूवम नदी तिरुवल्लूर की झील से निकलकर मरीना बीच पर मिलती है. मंत्री ने अधिकारियों को समय सीमा में कार्य पूरा करने का निर्देश दिया. तमिलनाडु में मंत्री जी स्‍कूटी से निकले. तामिलनाडु के जल संसाधन मंत्री आनंद का एक अनोखा अंदाज उस वक्त देखने को मिला जब वे अचानक स्कूटी पर सवार होकर कूवम नदी के विकास कार्यों का जायजा लेने पहुंचे. मंत्री जी का यह सादगी भरा अंदाज देखकर वहां मौजूद आम जनता और अधिकारी हैरान रह गए. स्कूटी पर घूम-घूमकर मंत्री ने पूरी परियोजना की समीक्षा की और स्थानीय निवासियों का दिल जीत लिया. दरअसल, तमिलनाडु सरकार ने कूवम नदी के 21 किलोमीटर लंबे हिस्से से गाद निकालने और इसके सुंदरीकरण कार्य की बड़ी शुरुआत की है. जल संसाधन मंत्री आनंद ने कोयंबेडु के पास पाडीकुप्पम में इस महत्वाकांक्षी परियोजना का औपचारिक उद्घाटन किया. 40 करोड़ की लागत से होगा कूवम नदी का कायाकल्पयह पूरी परियोजना लगभग 40 करोड़ की अनुमानित लागत से तैयार की गई है, जिसे अगले कुछ महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. कूवम नदी तिरुवल्लूर जिले के कूवम झील से निकलती है और लगभग 71 किलोमीटर का सफर तय करके मरीना बीच के पास समुद्र में मिल जाती है. हालांकि, अवैध कब्जों और जलकुंभी के फैलाव के कारण यह नदी अपनी पहचान खोती जा रही थी. इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए तमिलनाडु के जल संसाधन विभाग ने गैर-सरकारी संगठन एक्सनोरा के साथ हाथ मिलाया है. इसके तहत तिरुवल्लूर जिले के तिरुवेरकाडु से लेकर कोयंबेडु, अमिंजीकरई, चूलाईमेडु, चेतपेट, एग्मोर और चिंताद्रिपेट जैसे प्रमुख क्षेत्रों से गुजरने वाली 21 किलोमीटर लंबी नदी की सफाई की जाएगी. मंत्री जी ने खुद लिया कचरा हटाने के काम का जायजाउद्घाटन के दौरान मंत्री आनंद ने नदी के दोनों किनारों से जमा कचरे और जलकुंभियों को हटाने के काम का बारीक निरीक्षण किया. स्कूटी पर सवार होकर मुआयना करने पहुंचे मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सफाई कार्य तय सीमा के भीतर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए. सवाल-जवाब कूवम नदी के सफाई और विकास प्रोजेक्ट का उद्घाटन किसने और किस खास अंदाज में किया? जल संसाधन मंत्री आनंद ने स्कूटी पर सवार होकर निरीक्षण करते हुए कोयंबेडु के पाडीकुप्पम में इस प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया. कूवम नदी विकास परियोजना की लागत कितनी है और इसमें कौन सा एनजीओ सहयोग कर रहा है? यह परियोजना लगभग 40 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई है और इसमें जल संसाधन विभाग के साथ NGO ‘एक्सनोरा’ (Exnora) सहयोग कर रहा है. कूवम नदी कहां से निकलती है और इसकी कुल लंबाई कितनी है? कूवम नदी तिरुवल्लूर जिले की कूवम झील से निकलती है, जिसकी कुल लंबाई 71 किलोमीटर है और यह मरीना बीच पर मिलती है. About the Author Sandeep GuptaChief Sub Editor पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर होम पेज पर जिम्‍मेदारी संभाल रहे हैं. जटिल और सामरिक विषयों को बेहद सरल भाषा में पाठकों त… और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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बांकीपुर उपचुनाव में नितिन नवीन-सम्राट चौधरी का रोड शो, क्या BJP कार्यकर्ताओं...

Last Updated:July 27, 2026, 20:31 IST बांकीपुर उपचुनाव में 30 जुलाई के मतदान से पहले सोमवार को बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन और सीएम सम्राट चौधरी के ऐतिहासिक रोड शो से पटना का सियासी पारा चढ़ गया. एक तरफ बीजेपी की महा-घेराबंदी है, तो दूसरी तरफ जन सुराज के प्रशांत किशोर का सीधा पलटवार. बांकीपुर उपचुनाव में बीेजेपी का भव्य रोड शो क्या जीत दिलाएगी? पटना. पटना की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को होने वाले उपचुनाव के लिए सोमवार का दिन राजनीतिक रूप से बेहद सरगर्मियों भरा रहा. चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में पहुंची सभी पार्टियों ने पटना की सड़कों पर अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. सोमवार को जहां भारतीय जनता पार्टी ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अगुवाई में विशाल रोड शो निकालकर अपनी ताकत का अहसास कराया, वहीं चुनावी मैदान में उतरे जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने सत्ताधारी एनडीए पर गंभीर आरोप लगाकर मुकाबला बेहद दिलचस्प बना दिया है. सोमवार को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और सम्राट चौधरी का ‘मेगा शो’ बांकीपुर सीट से लगातार 5 बार विधायक रहे नितिन नवीन के लिए यह सीट उनकी प्रतिष्ठा का प्रश्न बनी हुई है. सोमवार को बांकीपुर में निकाले गए शक्ति प्रदर्शन ने राजधानी का माहौल पूरी तरह चुनावी बना दिया. नितिन नवीन और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का रोड शो भट्टाचार्य मोड़ से शुरू होकर पीरमुहानी, बुद्धमूर्ति, साहित्य सम्मेलन और दरियापुर होते हुए गांधी मैदान के समीप समाप्त हुआ. Source link

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Police Lathi Charge Law India: क्या सीनियर का आदेश बताकर बच सकती...

होमताजा खबरदेश सीनियर का आदेश बता बच सकती है खाकी? अंधाधुंध लाठी भांजने पर क्‍या है SC नियम Last Updated:July 27, 2026, 19:31 IST Police Lathi Charge Law India। भारतीय कानून के अनुसार वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश पर भी अत्यधिक या अवैध लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों को सजा मिल सकती है. सुप्रीम कोर्ट और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत बल प्रयोग केवल न्यूनतम और नियंत्रित होना चाहिए. पुलिसकर्मी वरिष्ठों के आदेश की आड़ लेकर संविधान के उल्लंघन से नहीं बच सकते. लाठीचार्ज हमेशा अंतिम विकल्प होना चाहिए और वार केवल कमर के निचले हिस्से पर ही किया जा सकता है. सीजेपी प्रोटेस्‍ट के दौरान 20 जुलाई को छात्रों की पिटाई की तस्‍वीरें सामने आई. मंजिरी जोशी नई दिल्‍ली. अक्सर प्रदर्शनों और रैलियों के दौरान पुलिस द्वारा किए जाने वाले बर्बर लाठीचार्ज की तस्वीरें सामने आती रहती हैं. ऐसे में यह सवाल हमेशा उठता है कि क्या सिर्फ वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर लाठी बरसाने वाले निचले स्तर के पुलिसकर्मी कानूनी कार्रवाई से बच सकते हैं? भारतीय कानून और न्यायशास्त्र के अनुसार जवाब पूरी तरह से नहीं है. अगर पुलिस अधिकारी या जवान अवैध, अत्यधिक या बर्बर लाठीचार्ज करते हैं तो वे व्यक्तिगत रूप से दोषी ठहराए जा सकते हैं और उन्हें सजा मिल सकती है, भले ही उन्होंने स्वयं इसका आदेश न दिया हो. भारतीय कानून में वरिष्ठों के आदेश का हवाला देकर पूरी तरह से आपराधिक या नागरिक जवाबदेही से बचा नहीं जा सकता. यदि पुलिस द्वारा इस्तेमाल किया गया बल संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन करता है तो दोषी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच के साथ-साथ आपराधिक मुकदमा भी चलाया जा सकता है. क्या कहता है सुप्रीम कोर्ट और कानूनी ढांचा?सुप्रीम कोर्ट ने रामलीला मैदान हादसा बनाम गृह सचिव (2012) जैसे ऐतिहासिक फैसलों में स्पष्ट किया है कि पुलिस द्वारा बल का प्रयोग केवल निरोधात्मक Preventive), न्यूनतम और आनुपातिक (Proportional) होना चाहिए. पुलिस की कार्रवाई कभी भी दंडात्मक या बदले की भावना से की गई हिंसा नहीं हो सकती. निचले स्तर के अधिकारियों का भी यह कानूनी कर्तव्य है कि वे ऐसे आदेशों को मानने से इनकार कर दें जो स्पष्ट रूप से अवैध हों जैसे कि किसी पूरी तरह से शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की भीड़ पर जानलेवा हमला करने का निर्देश. हाल ही में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने भी टिप्पणी की थी कि केवल विरोध प्रदर्शन करना पुलिस द्वारा लाठीचार्ज करने का औचित्य नहीं हो सकता. भीड़ हटाने के लिए क्या हैं तय नियम और प्रोटोकॉल?भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 129 और 130 के तहत पुलिस को शारीरिक बल प्रयोग से पहले एक तय प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है: • घोषणा और चेतावनी: भीड़ को गैर-कानूनी घोषित कर हटने की स्पष्ट चेतावनी देना.• कम नुकसानदेह तरीके: लाठीचार्ज से पहले वॉटर कैनन (पानी की बौछार) या आंसू गैस जैसे विकल्पों का प्रयोग करना.• लाठी चलाने के कड़े नियम: लाठीचार्ज अंतिम विकल्प होना चाहिए और वार हमेशा कमर से नीचे पैरों पर होना चाहिए. सिर, गले या शरीर के संवेदनशील अंगों पर लाठी मारना पुलिस मैनुअल का गंभीर उल्लंघन है. सवाल-जवाब क्या वरिष्ठ अधिकारी के आदेश पर लाठीचार्ज करने वाला पुलिसकर्मी सजा से बच सकता है? नहीं, यदि लाठीचार्ज अवैध, अत्यधिक या अननुपातिक है, तो ‘वरिष्ठ के आदेश’ का बचाव नहीं लिया जा सकता और संबंधित पुलिसकर्मी पर कार्रवाई होगी. लाठीचार्ज को लेकर सुप्रीम कोर्ट के क्या निर्देश हैं? सुप्रीम कोर्ट के अनुसार पुलिस बल का प्रयोग हमेशा न्यूनतम और आनुपातिक होना चाहिए, और यह कभी भी बदले की कार्रवाई या दंडात्मक नहीं हो सकता. पुलिस मैनुअल के अनुसार लाठीचार्ज करते समय किस बात का ध्यान रखना जरूरी है? लाठीचार्ज हमेशा अंतिम विकल्प होना चाहिए और चोट से बचाने के लिए वार केवल कमर के निचले हिस्से (पैरों) पर ही किया जाना चाहिए. About the Author Sandeep GuptaChief Sub Editor पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर होम पेज पर जिम्‍मेदारी संभाल रहे हैं. जटिल और सामरिक विषयों को बेहद सरल भाषा में पाठकों त… और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi Source link

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Madras High Court Karur Stampede Verdict। थलापति विजय को लगा पहला बड़ा...

होमताजा खबरदेश CM विजय को लगा पहला बड़ा झटका, सबसे बड़े मास्‍टरस्‍ट्रोक पर हाईकोर्ट का हथोड़ा Last Updated:July 27, 2026, 18:06 IST Madras High Court Karur Stampede Verdict: मद्रास हाईकोर्ट ने टीवीके सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसके तहत करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी देने का फैसला लिया गया था. टीवीके प्रमुख विजय की रैली में हुई इस भगदड़ में 41 लोगों की मौत हुई थी. अदालत ने कहा कि यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का सीधा उल्लंघन करता है तथा इससे भविष्य में ऐसी अनुचित मांगों की गलत परंपरा शुरू होगी. विजय को हाईकोर्ट से झटका लगा. मद्रास हाईकोर्ट ने सोमवार को विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु वेत्री कषगम (TVK) सरकार के उस फैसले को पूरी तरह से रद्द कर दिया जिसके तहत करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी देने का प्रावधान किया गया था. अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट रूप से कहा कि सरकार का यह कदम सार्वजनिक रोजगार से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों का सीधा उल्लंघन करता है. यह मामला पिछले साल 27 सितंबर को टीवीके प्रमुख और अभिनेता (विजय) की रैली के दौरान हुए करूर हादसे से जुड़ा है. इस दुखद भगदड़ में 41 लोगों की जान चली गई थी जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे. इसके बाद सरकार ने पीड़ित परिवारों की मदद के लिए अनुकंपा नियुक्ति की घोषणा की थी. ‘अगर मनमानी की छूट दी तो अराजकता फैलेगी’मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु की टीवीके (TVK) सरकार को झटका देते हुए स्पष्ट कहा कि कार्यपालिका की शक्ति संवैधानिक दायरे में ही रहनी चाहिए. कोर्ट ने टिप्पणी की, “यदि कार्यपालिका के फैसलों पर कोई नियंत्रण नहीं रहा और उन्हें खुली छूट दे दी गई तो चारों तरफ अराजकता का राज होगा.” सार्वजनिक रोजगार के सिद्धांतों पर जोर देते हुए पीठ ने कहा कि सरकारी नौकरी राज्य द्वारा ऐसे ही किसी को बांटी नहीं जा सकती. इसे योग्यता से हासिल किया जाना चाहिए, इसके महत्व और मूल्य को समझा जाना चाहिए. रोजगार की आस में लाखों लोग कतार में इंतजार कर रहे हैं. गौरतलब है कि इससे पहले हाईकोर्ट ने अस्थायी आधार पर और न्यायिक समीक्षा के अधीन रहते हुए अनुकंपा नियुक्तियों के आदेश जारी करने की अनुमति दी थी जिसे अब अंतिम रूप से खारिज कर दिया गया है. करूर भगदड़ हादसा और सीबीआई जांचयह पूरा विवाद पिछले साल सितंबर में टीवीके प्रमुख (विजय) की रैली के दौरान हुए करूर हादसे से जुड़ा है, जिसमें बच्चों समेत 41 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी. पुलिस ने आरोप लगाया था कि विजय के देर से आने के कारण भीड़ बेकाबू हुई और बुनियादी सुविधाओं की कमी से यह हादसा हुआ. वहीं टीवीके ने आरोपों को खारिज करते हुए पुलिस को जिम्मेदार ठहराया था. बाद में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 10 जुलाई को करूर का दौरा कर पीड़ित परिवारों को अनुकंपा पत्र सौंपे थे. इस त्रासदी की निष्पक्ष जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2025 में मामले को राज्य की एसआईटी से सीबीआई (CBI) को सौंप दिया था. शीर्ष अदालत ने रिटायर्ड जज जस्टिस अजय रस्तोगी की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय समिति भी गठित की है जो सीबीआई जांच की निगरानी कर रही है. सीबीआई फिलहाल भीड़ प्रबंधन, विजय के आने के समय और स्थानीय प्रशासन के बीच तालमेल की जांच कर रही है. सवाल-जवाब मद्रास हाईकोर्ट ने कार्यपालिका की शक्तियों पर क्या कहा? हाईकोर्ट ने कहा कि कार्यपालिका को बिना अंकुश की छूट मिलने से अराजकता फैलेगी और सरकारी नौकरियां बिना नियमों के बांटी नहीं जा सकतीं. करूर भगदड़ मामले की जांच कौन सी एजेंसी कर रही है? सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद करूर भगदड़ मामले की निष्पक्ष जांच सीबीआई (CBI) कर रही है, जिसकी निगरानी तीन सदस्यीय समिति कर रही है. About the Author Sandeep GuptaChief Sub Editor पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर होम पेज पर जिम्‍मेदारी संभाल रहे हैं. जटिल और सामरिक विषयों को बेहद सरल भाषा में पाठकों त… और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Mumbai,Maharashtra Source link

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टीएमसी में बगावत से क्या खत्म हो जाएगा ममता बनर्जी का राजनीतिक...

होमताजा खबरदेश ममता बनर्जी का सियासी करियर खत्म हो जाएगा? प्रशांत किशोर ने कर दी भविष्यवाणी Last Updated:July 27, 2026, 17:25 IST पश्चिम बंगाल में टीएमसी में लगातार हो रही बगावत और नेताओं के पलायन के बीच ममता बनर्जी के राजनीतिक भविष्य पर सवाल उठने लगे हैं. इसी बीच चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने ममता के समर्थन में बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि केवल नेताओं के पार्टी छोड़ने से ममता की ताकत खत्म नहीं हो जाएगी, क्योंकि आज भी उनके साथ करीब ढाई करोड़ मतदाता खड़े हैं. प्रशांत किशोर के मुताबिक टीएमसी एक दिन में नहीं बनी और न ही एक दिन में खत्म होगी. प्रशांत किशोर ने ममता बनर्जी के समर्थन में बड़ा बयान दिया है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) में लगातार हो रही टूट और कई सीनियर नेताओं के पार्टी छोड़ने से ममता बनर्जी के राजनीतिक भविष्य को लेकर तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. हालांकि, चुनावी रणनीतिकार और कभी ममता बनर्जी के करीबी राजनीतिक सलाहकार रहे प्रशांत किशोर ने इन सभी अटकलों को खारिज करते हुए कहा है कि केवल नेताओं के पार्टी छोड़ने से ममता बनर्जी की राजनीतिक ताकत खत्म नहीं होने वाली. प्रशांत किशोर ने एक टीवी इंटरव्यू में साफ कहा कि ममता बनर्जी आज भी पश्चिम बंगाल की सबसे बड़ी जननेता हैं. उन्होंने कहा कि चुनाव में हार के बाद बीजेपी उनके नेताओं को तोड़ने और पार्टी पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है, लेकिन इससे ममता के जनाधार पर कोई असर नहीं पड़ता. प्रशांत किशोर ने कहा, ‘लोगों को यह नहीं भूलना चाहिए कि आज भी ममता बनर्जी के साथ करीब ढाई करोड़ वोट हैं. विधायक या सांसद किस पार्टी में जा रहे हैं, इससे जनता का समर्थन अचानक खत्म नहीं हो जाता. जब तक ममता बंगाल की राजनीति में सक्रिय हैं, उनका कोई विकल्प नजर नहीं आता.’ उन्होंने उन दावों को भी खारिज किया जिनमें कहा जा रहा है कि टीएमसी का अस्तित्व खत्म होने की कगार पर है. प्रशांत किशोर ने कहा कि कोई भी राजनीतिक दल एक दिन में नहीं बनता और न ही एक दिन में खत्म हो जाता है. जब उनसे पूछा गया कि कई बड़े नेताओं के पार्टी छोड़ने से क्या टीएमसी कमजोर नहीं होगी, तो उन्होंने पलटकर सवाल किया कि आखिर ‘बड़े नेता’ किसे कहा जा रहा है. उनके मुताबिक बंगाल में लोग किसी सांसद या विधायक के नाम पर नहीं, बल्कि ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के नाम पर वोट देते हैं. प्रशांत किशोर ने यह भी संकेत दिया कि पार्टी छोड़ने वाले कई नेता राजनीतिक दबाव में ऐसा कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘जान बचाने के लिए इंसान क्या-क्या नहीं करता.’ ममता बनर्जी का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी कमियां हो सकती हैं, लेकिन यह भी सच है कि तृणमूल कांग्रेस को उन्होंने अपने संघर्ष, मेहनत और राजनीतिक जीवन की कमाई से खड़ा किया है. इसलिए कोई भी नेता इतनी आसानी से इस पार्टी पर कब्जा नहीं कर सकता. About the Author Saad Omar साद बिन उमर मीडिया इंडस्ट्री में 15 साल से अधिक के अनुभव वाले सीनियर पत्रकार हैं. वह अभी News18 Hindi (hindi.news18.com) से जुड़े हैं, जहां वे होम पेज डेस्क पर काम करते हैं. कहां से … और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Kolkata,West Bengal उन्होंने उन दावों को भी खारिज किया जिनमें कहा जा रहा है कि टीएमसी का अस्तित्व खत्म होने की कगार पर है. प्रशांत किशोर ने कहा कि कोई भी राजनीतिक दल एक दिन में नहीं बनता और न ही एक दिन में खत्म हो जाता है. जब उनसे पूछा गया कि कई बड़े नेताओं के पार्टी छोड़ने से क्या टीएमसी कमजोर नहीं होगी, तो उन्होंने पलटकर सवाल किया कि आखिर ‘बड़े नेता’ किसे कहा जा रहा है. उनके मुताबिक बंगाल में लोग किसी सांसद या विधायक के नाम पर नहीं, बल्कि ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के नाम पर वोट देते हैं. प्रशांत किशोर ने यह भी संकेत दिया कि पार्टी छोड़ने वाले कई नेता राजनीतिक दबाव में ऐसा कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘जान बचाने के लिए इंसान क्या-क्या नहीं करता.’ ममता बनर्जी का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी कमियां हो सकती हैं, लेकिन यह भी सच है कि तृणमूल कांग्रेस को उन्होंने अपने संघर्ष, मेहनत और राजनीतिक जीवन की कमाई से खड़ा किया है. इसलिए कोई भी नेता इतनी आसानी से इस पार्टी पर कब्जा नहीं कर सकता. यह बयान ऐसे समय आया है जब ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने चुनाव आयोग के समक्ष तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह पर दावा ठोक दिया है. इससे राज्य की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है. हालांकि प्रशांत किशोर का मानना है कि संगठनात्मक चुनौतियों के बावजूद ममता बनर्जी का जनाधार अभी भी बरकरार है और उनकी राजनीतिक भूमिका को कम करके आंकना बड़ी भूल होगी. खबरें पढ़ने का बेहतरीन अनुभव QR स्कैन करें, डाउनलोड करें News18 ऐप या वेबसाइट पर जारी रखने के लिए यहां क्लिक करें login Source link

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कल का मौसम 28 जुलाई: दिल्‍ली-यूपी से पहाड़ों तक भारी बारिश, मुंबई...

आसमान में गड़गड़ाते काले बादल और हवाओं की सनसनाहट. कल का मौसम यानी 28 जुलाई को मानसून देश के एक बड़े हिस्से में अपना सबसे रौद्र रूप दिखाने के लिए तैयार है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) की चेतावनी के मुताबिक कल देश के कई राज्यों में कुदरत का कड़ा इम्तिहान होने वाला है. दिल्ली, लखनऊ और चंडीगढ़ की सड़कें जहां झमाझम बारिश के बाद जलभराव की मार झेल सकती हैं, वहीं मुंबई और भुवनेश्वर जैसे तटीय शहरों में समंदर की उफनती लहरें और मूसलाधार बारिश आफत बनकर टूट सकती है. उधर, शिमला और देहरादून की हसीन पहाड़ियां कल लैंडस्‍लाइड के खौफनाक साये में होंगी. मौसम विभाग ने मल्टी-मॉडल एनसेंबल (MME) टूल के जरिए सटीक अलर्ट जारी करते हुए सावधान किया है कि कल गरजते बादलों के साथ कड़कड़ाती बिजली और आंधी-तूफान जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर सकता है. ऐसे में घर से निकलने से पहले जान लीजिए अपने शहर के मौसम का मिजाज. देश के 10 राज्यों के 40 शहरों में कल का मौसम हरियाणा• गुरुग्राम: गुरुग्राम में भारी बारिश के चलते जलभराव और लंबा ट्रैफिक जाम लग सकता है.• फरीदाबाद: फरीदाबाद में तेज आंधी और बारिश से मौसम सुहावना रहेगा लेकिन सतर्कता जरूरी है.• अंबाला: अंबाला में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश का अनुमान है.• हिसार: हिसार में तेज हवाओं के साथ बारिश होने से गर्मी से राहत मिलेगी.हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में 28 जुलाई को बारिश का येलो/ऑरेंज अलर्ट है. महाराष्ट्र• मुंबई: मुंबई में समुद्र की ऊंची लहरों और तेज हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश का अलर्ट है.• पुणे: पुणे में मध्यम से भारी बारिश के चलते घाट क्षेत्रों में सतर्कता बरतने की सलाह है.• नासिक: नासिक में तेज आंधी और गरज के साथ बारिश होने का अनुमान है.• नागपुर: नागपुर में बादलों की गड़गड़ाहट के साथ रुक-रुक कर भारी बारिश हो सकती है.कोकण और मध्य महाराष्ट्र के तटीय जिलों में मानसून अपनी पूरी रफ्तार पर रहेगा. उत्तर प्रदेश• लखनऊ: लखनऊ में 28 जुलाई को गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश और जलभराव होने की संभावना है.• कानपुर: कानपुर में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है.• वाराणसी: वाराणसी में बादलों की आवाजाही के बीच बिजली चमकने और मध्यम से भारी बारिश का अनुमान है.• गोरखपुर: गोरखपुर में आंधी-तूफान के साथ झमाझम बारिश से तापमान में गिरावट आ सकती है.उत्तर प्रदेश में मानसून पूरी तरह से सक्रिय है और कई जिलों में बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है. पंजाब• अमृतसर: अमृतसर में भारी बारिश और तेज हवाओं से स्थानीय स्तर पर यातायात प्रभावित हो सकता है.• लुधियाना: लुधियाना में मूसलाधार बारिश से निचले इलाकों में पानी भरने का अंदेशा है.• जालंधर: जालंधर में आकाशीय बिजली कड़कने के साथ तेज बारिश की संभावना है.• पटियाला: पटियाला में दिनभर बादल छाए रहेंगे और कई दौर की तेज बारिश हो सकती है.मौसम विभाग ने पंजाब में नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए बाढ़ का अलर्ट जारी किया है. हिमाचल प्रदेश• शिमला: शिमला में भारी बारिश के साथ भूस्खलन की पूरी आशंका जताई गई है.• मनाली: मनाली में तेज बारिश और व्यास नदी का जलस्तर बढ़ने से प्रशासन अलर्ट पर है.• कांगड़ा: कांगड़ा में मूसलाधार बारिश और अचानक बाढ़ (Flash Flood) का खतरा बना रहेगा.• मंडी: मंडी में लैंडस्लाइड के कारण मुख्य रास्ते बाधित होने की संभावना है.पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश को देखते हुए पर्यटकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है. उत्तराखंड• देहरादून: देहरादून में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है.• नैनीताल: नैनीताल में बारिश के साथ धुंध छाने और भूस्खलन होने की संभावना है.• हरिद्वार: हरिद्वार में गंगा नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी और तेज बारिश की उम्मीद है.• ऋषिकेश: ऋषिकेश में आंधी-तूफान के साथ भारी बारिश होने की संभावना है.उत्तराखंड के संवेदनशील इलाकों में यात्रियों को बेहद सावधानी बरतने को कहा गया है. ओडिशा• भुवनेश्वर: भुवनेश्वर में भारी बारिश और तेज हवाओं से जनजीवन प्रभावित हो सकता है.• कटक: कटक में निचले इलाकों में पानी भरने और भारी बारिश का अंदेशा है.• पुरी: पुरी के तटीय इलाकों में समुद्र में ऊंची लहरें उठने और मूसलाधार बारिश का अनुमान है.• संबलपुर: संबलपुर में बिजली गिरने के साथ भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है.बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम से राज्य के कई हिस्सों में बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है. पश्चिम बंगाल• कोलकाता: कोलकाता में तेज हवाओं के साथ मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है.• सिलीगुड़ी: सिलीगुड़ी में भारी बारिश से पहाड़ी नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है.• हावड़ा: हावड़ा में जलभराव और तेज बारिश के कारण ट्रैफिक धीमा हो सकता है.• जलपाईगुड़ी: जलपाईगुड़ी में मूसलाधार बारिश के साथ बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है.उत्तर और दक्षिण बंगाल दोनों ही हिस्सों में मानसून मेहरबान रहेगा. बिहार• पटना: पटना में 28 जुलाई को बादल छाए रहेंगे और कई दौर की मूसलाधार बारिश होगी.• गया: गया में आकाशीय बिजली (वज्रपात) चमकने के साथ भारी बारिश का अलर्ट है.• मुजफ्फरपुर: मुजफ्फरपुर में जलभराव और तेज हवाओं के साथ बारिश होने का अनुमान है.• भागलपुर: भागलपुर में गंगा के तटीय इलाकों में भारी बारिश से जलस्तर बढ़ेगा.बिहार के अधिकांश जिलों में वज्रपात की चेतावनी के साथ भारी बारिश का अनुमान है. राजस्थान• जयपुर: जयपुर में 28 जुलाई को दिनभर बादल छाए रहेंगे और रुक-रुक कर भारी बारिश होगी.• जोधपुर: जोधपुर में तेज हवाओं के साथ मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है.• उदयपुर: उदयपुर में पहाड़ियों के आसपास झमाझम बारिश होने का पूर्वानुमान है.• बीकानेर: बीकानेर में आंधी-तूफान के साथ बारिश होने से तापमान में गिरावट आएगी.पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान में मानसून की सक्रियता से मौसम में ठंडक घुलेगी. Source link

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107 साल के बरगद के पेड़ को सजा-धजा कर क्यों मनाया गया...

होमताजा खबरदेश 107 साल के बरगद के पेड़ का क्यों मनाया गया बर्थडे, काटा गया केक, बांटी गई टॉफी Last Updated:July 27, 2026, 15:27 IST क्या किसी पेड़ का भी जन्मदिन मनाया जा सकता है? इस सुनकर आपको थोड़ा हैरानी हो सकती है. लेकिन असल में तमिलनाडृ के मदुरै में ऐसा ही कुछ हुआ. इसकी वजह सिर्फ जश्न ही नहीं, बल्कि एक बड़ा संदेश भी है. यही से ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने हजारों लोगों का ध्यान खींचा है. आखिर हर साल इस बरगद के लिए क्यों काटा जाता है केक. आइए जानते हैं सभी जवाब. मदुरै में 107 साल पुराने बरगद के पेड़ का जन्मदिन मनाते पर्यावरण कार्यकर्ता और स्थानीय छात्र. तमिलनाडु के मदुरै में एक 107 साल पुराने बरगद के पेड़ का जन्मदिन बड़े ही अनोखे अंदाज में मनाया गया है. पेड़ को सजाया गया, केक काटा गया, मिठाइयां बांटी गईं और बच्चों को गिफ्ट भी दिए गए. पहली नजर में यह किसी उत्सव जैसा लगता है, लेकिन इसके पीछे पर्यावरण संरक्षण का बड़ा संदेश छिपा है. मीडिया में छपी खबर के मुताबिक, इस आयोजन का मकसद उस बरगद को बचाना है, जो अब पूरे इलाके में अपनी तरह का आखिरी पेड़ बचा है. हर साल इसलिए मनता है जन्मदिन मीडिया में छपी खबर के मुताबिक, मदुरै के मीनाक्षीपुरम इलाके में स्थित 107 साल पुराने बरगद के पेड़ का जन्मदिन वर्ष 2019 से लगातार मनाया जा रहा है. इस कार्यक्रम को ‘हरित प्रकृति महोत्सव’ का नाम दिया गया है. इसका आयोजन जल निकाय संरक्षण आंदोलन और अन्य सामाजिक ट्रस्ट मिलकर करते हैं. इस अभियान का उद्देश्य लोगों को यह बताना है कि पुराने पेड़ों को बचाना भी उतना ही जरूरी है, जितना नए पौधे लगाना. इलाके का आखिरी सौ साल पुराना बरगद कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह बरगद आसपास के क्षेत्र में बचा 100 साल से अधिक पुराना इकलौता पेड़ है. इससे पहले सड़क चौड़ीकरण और पार्क निर्माण जैसी परियोजनाओं के दौरान कम से कम सात अन्य बरगद के पेड़ काटे जा चुके हैं. अब लोगों को डर है कि भविष्य में किसी नई परियोजना के नाम पर कहीं इस पेड़ की भी बलि न चढ़ जाए. इसी वजह से इसके संरक्षण को लेकर जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. बच्चों ने काटा केक, बांटे गए पौधे कार्यक्रम में स्थानीय लोगों के साथ राजाजी मिडिल स्कूल के छात्र-छात्राएं भी शामिल हुए. सभी ने मिलकर पेड़ के सामने केक काटा और मिठाइयां बांटी. पेड़ को फूलों और सजावटी सामान से सजाया गया. आयोजकों ने बच्चों को नोटबुक और पौधे भी दिए. साथ ही उन्हें पेड़ों की देखभाल और पर्यावरण बचाने की शपथ भी दिलाई गई. आयोजन का मकसद नई पीढ़ी को प्रकृति के प्रति जिम्मेदार बनाना था. पेड़ पर मंडरा रहे कई खतरे पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने बताया कि यह बरगद कई तरह के खतरों का सामना कर रहा है. पेड़ के आसपास लोग कचरा फेंकते हैं और उसे जला देते हैं, जिससे जड़ों और तने को नुकसान पहुंचता है. इसके अलावा ऊपर से गुजर रही बिजली की लाइनों की वजह से समय-समय पर इसकी शाखाएं काटी जाती हैं. स्थानीय त्योहारों में पटाखों का शोर और धुआं भी इस पेड़ के लिए नुकसानदेह साबित हो रहा है. 200 साल पुराने पेड़ के गिरने से बढ़ी चिंता इसी बीच तमिलनाडु के करूर जिले के कुलिथलाई इलाके से भी एक चिंताजनक खबर सामने आई. यहां करीब 200 साल पुराना बरगद का पेड़ अचानक गिर गया. इस हादसे में दो वाहन क्षतिग्रस्त हो गए. इस घटना के बाद पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि पुराने और विरासत वाले पेड़ों की समय-समय पर जांच और सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था होनी चाहिए. मदुरै का यह अभियान इसी सोच को मजबूत करने की कोशिश है. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Madurai,Tamil Nadu Source link

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जेल में बिताए वक्त का मांगा हिसाब… क्या अबू सलेम समय से...

होमताजा खबरदेश अबू सलेम समय से पहले रिहा होगा? सुप्रीम कोर्ट में हुई अहम सुनवाई Last Updated:July 27, 2026, 14:26 IST साल 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट के दोषी अबू सलेम की समय से पहले रिहाई को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत में हलचल तेज हो गई है. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ के सामने अबू सलेम की याचिका पर अहम सुनवाई हुई. इस दौरान अबू सलेम के वकील ने कोर्ट में कड़ा रुख अख्तियार करते हुए जेल प्रशासन के काम करने के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए. जेल में कैद अबू सलेम की समय से पहले रिहाई की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. (फाइल फोटो) नई दिल्ली. 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में दोषी ठहराए गए अबू सलेम की समय से पहले रिहाई (Premature Release) की याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने की. सुनवाई के दौरान अबू सलेम की ओर से पेश वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि टाडा (TADA) कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि विचाराधीन कैदी के तौर पर जेल में बिताई गई पूरी अवधि का सेट-ऑफ (Set-off) दिया जाए. हालांकि, वकील के मुताबिक जेल प्रशासन की ओर से अब तक उस अवधि का लाभ नहीं दिया जा रहा है. अबू सलेम की याचिका में इसी आधार पर समय-पूर्व रिहाई का लाभ देने की मांग की गई है. मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जारी है. 11 नवंबर 2005 को पुर्तगाल से भारत लाया गया थाअबू सलेम को 11 नवंबर 2005 को पुर्तगाल से भारत लाया गया था. इस मामले में पहले हुई सुनवाई के दौरान भी उसकी ओर से यह दलील दी जाती रही है कि भारत-पुर्तगाल संधि के तहत उसकी कुल सजा 25 साल से अधिक नहीं हो सकती. फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?इससे पहले फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने अबू सलेम की रिहाई की सीधी याचिका खारिज कर दी थी. हालांकि, अदालत ने उसे बॉम्बे हाईकोर्ट जाने की स्वतंत्रता दी थी. अब सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में उसकी समयपूर्व रिहाई की याचिका पर फिर सुनवाई हुई है. इस बार उसकी ओर से जेल में बिताई गई अंडरट्रायल अवधि का सेट-ऑफ नहीं मिलने को आधार बनाया गया है. About the Author Rakesh Ranjan Kumar राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h… और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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