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Police Lathi Charge Law India। भारतीय कानून के अनुसार वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश पर भी अत्यधिक या अवैध लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों को सजा मिल सकती है. सुप्रीम कोर्ट और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत बल प्रयोग केवल न्यूनतम और नियंत्रित होना चाहिए. पुलिसकर्मी वरिष्ठों के आदेश की आड़ लेकर संविधान के उल्लंघन से नहीं बच सकते. लाठीचार्ज हमेशा अंतिम विकल्प होना चाहिए और वार केवल कमर के निचले हिस्से पर ही किया जा सकता है.
सीजेपी प्रोटेस्ट के दौरान 20 जुलाई को छात्रों की पिटाई की तस्वीरें सामने आई.
मंजिरी जोशी
नई दिल्ली. अक्सर प्रदर्शनों और रैलियों के दौरान पुलिस द्वारा किए जाने वाले बर्बर लाठीचार्ज की तस्वीरें सामने आती रहती हैं. ऐसे में यह सवाल हमेशा उठता है कि क्या सिर्फ वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर लाठी बरसाने वाले निचले स्तर के पुलिसकर्मी कानूनी कार्रवाई से बच सकते हैं? भारतीय कानून और न्यायशास्त्र के अनुसार जवाब पूरी तरह से नहीं है. अगर पुलिस अधिकारी या जवान अवैध, अत्यधिक या बर्बर लाठीचार्ज करते हैं तो वे व्यक्तिगत रूप से दोषी ठहराए जा सकते हैं और उन्हें सजा मिल सकती है, भले ही उन्होंने स्वयं इसका आदेश न दिया हो.
भारतीय कानून में वरिष्ठों के आदेश का हवाला देकर पूरी तरह से आपराधिक या नागरिक जवाबदेही से बचा नहीं जा सकता. यदि पुलिस द्वारा इस्तेमाल किया गया बल संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन करता है तो दोषी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच के साथ-साथ आपराधिक मुकदमा भी चलाया जा सकता है.
क्या कहता है सुप्रीम कोर्ट और कानूनी ढांचा?
सुप्रीम कोर्ट ने रामलीला मैदान हादसा बनाम गृह सचिव (2012) जैसे ऐतिहासिक फैसलों में स्पष्ट किया है कि पुलिस द्वारा बल का प्रयोग केवल निरोधात्मक Preventive), न्यूनतम और आनुपातिक (Proportional) होना चाहिए. पुलिस की कार्रवाई कभी भी दंडात्मक या बदले की भावना से की गई हिंसा नहीं हो सकती.
निचले स्तर के अधिकारियों का भी यह कानूनी कर्तव्य है कि वे ऐसे आदेशों को मानने से इनकार कर दें जो स्पष्ट रूप से अवैध हों जैसे कि किसी पूरी तरह से शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की भीड़ पर जानलेवा हमला करने का निर्देश. हाल ही में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने भी टिप्पणी की थी कि केवल विरोध प्रदर्शन करना पुलिस द्वारा लाठीचार्ज करने का औचित्य नहीं हो सकता.
भीड़ हटाने के लिए क्या हैं तय नियम और प्रोटोकॉल?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 129 और 130 के तहत पुलिस को शारीरिक बल प्रयोग से पहले एक तय प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है:
• घोषणा और चेतावनी: भीड़ को गैर-कानूनी घोषित कर हटने की स्पष्ट चेतावनी देना.
• कम नुकसानदेह तरीके: लाठीचार्ज से पहले वॉटर कैनन (पानी की बौछार) या आंसू गैस जैसे विकल्पों का प्रयोग करना.
• लाठी चलाने के कड़े नियम: लाठीचार्ज अंतिम विकल्प होना चाहिए और वार हमेशा कमर से नीचे पैरों पर होना चाहिए. सिर, गले या शरीर के संवेदनशील अंगों पर लाठी मारना पुलिस मैनुअल का गंभीर उल्लंघन है.
सवाल-जवाब
क्या वरिष्ठ अधिकारी के आदेश पर लाठीचार्ज करने वाला पुलिसकर्मी सजा से बच सकता है?
नहीं, यदि लाठीचार्ज अवैध, अत्यधिक या अननुपातिक है, तो ‘वरिष्ठ के आदेश’ का बचाव नहीं लिया जा सकता और संबंधित पुलिसकर्मी पर कार्रवाई होगी.
लाठीचार्ज को लेकर सुप्रीम कोर्ट के क्या निर्देश हैं?
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार पुलिस बल का प्रयोग हमेशा न्यूनतम और आनुपातिक होना चाहिए, और यह कभी भी बदले की कार्रवाई या दंडात्मक नहीं हो सकता.
पुलिस मैनुअल के अनुसार लाठीचार्ज करते समय किस बात का ध्यान रखना जरूरी है?
लाठीचार्ज हमेशा अंतिम विकल्प होना चाहिए और चोट से बचाने के लिए वार केवल कमर के निचले हिस्से (पैरों) पर ही किया जाना चाहिए.
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पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर होम पेज पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. जटिल और सामरिक विषयों को बेहद सरल भाषा में पाठकों त…
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